Friday, May 1, 2026
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NATIONAL : भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक मौसम पैटर्न बदलने की आशंका; गर्मी, सूखा व अतिवृष्टि का खतरा

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प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने से मेगा अल नीनो की आशंका बढ़ी है। इसका असर भारत के मानसून, एशिया की बारिश, ऑस्ट्रेलिया के सूखे और वैश्विक तापमान पर पड़ सकता है। इससे कमजोर मानसून, लंबी लू और कृषि संकट जैसी चुनौतियां बढ़ने की संभावना जताई गई है।

प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि के संकेतों ने दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान फिर से मेगा अल नीनो की ओर खींचा है। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ), अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार यदि अल नीनो की स्थिति और अधिक मजबूत होती है तो इसका असर भारत के मानसून, दक्षिण-पूर्व एशिया की वर्षा, ऑस्ट्रेलिया के सूखे, अफ्रीका की खाद्य सुरक्षा और अमेरिका-यूरोप के तापमान पैटर्न तक महसूस किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य अल नीनो और ‘मेगा अल नीनो’ यानी अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो में अंतर उसकी तीव्रता और वैश्विक प्रभाव के स्तर का होता है, और इतिहास बताता है कि ऐसे वर्षों में मौसमीय असंतुलन व्यापक आर्थिक और मानवीय संकट में बदल सकता है।

भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल दक्षिण-पश्चिम मानसून का है, क्योंकि देश की कृषि, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। आईएमडी और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के वैज्ञानिकों के अनुसार मजबूत अल नीनो अक्सर मानसून को कमजोर कर सकता है, हालांकि हर बार इसका सीधा और समान असर नहीं होता।

कमजोर मानसून की स्थिति में धान, दाल, गन्ना और तिलहन जैसी फसलों पर दबाव बढ़ सकता है। जलाशयों का स्तर गिर सकता है और बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। साथ ही, उत्तर और मध्य भारत में लू की अवधि लंबी हो सकती है और शहरी क्षेत्रों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक जा सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में इस समय अप्रैल के अंत से ही कई राज्यों में तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है और लू की अवधि सामान्य से लंबी देखी जा रही है। हर हीटवेव का सीधा कारण केवल अल नीनो नहीं होता, लेकिन मजबूत अल नीनो की पृष्ठभूमि में सतही तापमान और अधिक बढ़ सकता है। आईएमडी के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में लंबे और अधिक तीव्र गर्मी के दौर की संभावना ऐसे वर्षों में बढ़ जाती है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में वर्षा संकट की आशंका: इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों में अल नीनो आमतौर पर वर्षा में कमी और लंबे शुष्क दौर का कारण बनता है।

SPORTS : हैदराबाद का ऐतिहासिक चेज, 200+ रनचेज का नया कीर्तिमान, नमन की गलतियां पड़ी भारी

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दिलचस्प ट्रेंड यह है कि 2025 के बाद 200+ रन के 19 सफल चेज में से सिर्फ 5 मुकाबले ही आखिरी ओवर तक पहुंचे हैं। इनमें से भी कोई मैच 19.3 ओवर से आगे नहीं गया। इससे साफ है कि टीमें अब बड़े स्कोर को भी तेजी से और आत्मविश्वास के साथ हासिल कर रही हैं।

स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल 2026 में अब 200+ रन चेज करना भी टीमों के लिए आम बात हो गई है। सनराइजर्स हैदराबाद ने बुधवार को मुंबई इंडियंस के खिलाफ एक यादगार मुकाबले में 6 विकेट से जीत दर्ज की। टीम ने 244 रनों का विशाल लक्ष्य सिर्फ 18.4 ओवर में हासिल कर लिया, जो IPL के इतिहास का चौथा सबसे बड़ा रन चेज बन गया। इस जीत ने न सिर्फ फैंस को रोमांचित किया, बल्कि टी20 क्रिकेट में बदलती बल्लेबाजी शैली को भी उजागर किया।

IPL 2026 का सीजन रिकॉर्ड्स से भरा रहा है। इस मुकाबले के साथ ही इस सीजन में 10वीं बार 200 या उससे ज्यादा रन का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया गया। यह किसी एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा 200+ रनचेज का नया रिकॉर्ड है। इससे पहले 2025 में 9 बार ऐसा हुआ था। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि अब टीमें बड़े स्कोर से डर नहीं रही हैं, बल्कि आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर आसानी से लक्ष्य हासिल कर रही हैं।

मुंबई के लिए रियान रिकेल्टन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 44 गेंदों में शतक जड़ा। यह मुंबई इंडियंस के लिए सबसे तेज शतक है। इस मामले में उन्होंने सनथ जयसर्या और तिलक वर्मा के 45-45 गेंदों में बनाए गए शतक के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। जयसूर्या ने 2008 में यह कारनामा किया था, जबकि तिलक ने इसी सीजन में यह उपलब्धि हासिल की थी। हालांकि, रिकेल्टन की यह पारी टीम को जीत नहीं दिला सकी।

इस सीजन में मुंबई इंडियंस सही संयोजन की तलाश में लगातार बदलाव कर रही है। टीम अब तक 22 खिलाड़ियों को मौका दे चुकी है, जो इस सीजन में किसी भी टीम द्वारा सबसे ज्यादा है। इस सूची में CSK और दिल्ली कैपिटल्स 19-19 खिलाड़ियों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि मुंबई कई मुकाबलों में बेहतर रन बनाने के बाद भी खराब फील्डिंग से मैच गंवाती नजर आई।

दिलचस्प ट्रेंड यह है कि 2025 के बाद 200+ रन के 19 सफल चेज में से सिर्फ 5 मुकाबले ही आखिरी ओवर तक पहुंचे हैं। इनमें से भी कोई मैच 19.3 ओवर से आगे नहीं गया। इससे साफ है कि टीमें अब बड़े स्कोर को भी तेजी से और आत्मविश्वास के साथ हासिल कर रही हैं।

वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कुल 32 छक्के लगे, जो यहां किसी भी पुरुष टी20 मैच में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे ज्यादा छक्के (34) ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल जिनमें भारत बनाम इंग्लैंड के बीच में लगे थे। यह दर्शाता है कि बल्लेबाज किस तरह गेंदबाजों पर हावी हो चुके हैं।

BUSINESS : बजाज फाइनेंस के शेयर ने देखी तेजी, मुनाफा 22% बढ़ने से खरीद बढ़ी; Citi ने बढ़ाई रेटिंग

कंपनी ने एक दिन पहले अपने तिमाही और सालाना नतीजे जारी किए थे, जो कि अच्छे रहे। मार्च 2026 तिमाही के दौरान ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 18 प्रतिशत बढ़कर 21605.79 करोड़ रुपये हो गया। AUM 22 प्रतिशत बढ़कर 5.09 लाख करोड़ रुपये के रहे

नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस के शेयर 30 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में लगभग 5 प्रतिशत तक चढ़ गए। BSE पर कीमत 975.50 रुपये के हाई तक गई। बाद में शेयर लगभग 1 प्रतिशत बढ़त के साथ 936.60 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 5.83 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी ने एक दिन पहले अपने तिमाही और सालाना नतीजे जारी किए थे, जो कि अच्छे रहे। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 5464.57 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 4479.57 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 18 प्रतिशत बढ़कर 21605.79 करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 18294.45 करोड़ रुपये था। शुद्ध ब्याज आय 20 प्रतिशत बढ़कर 11,781 करोड़ रुपये हो गई, जो मार्च 2025 तिमाही में 9,808 करोड़ रुपये थी। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 19,017.39 करोड़ रुपये और ऑपरेशंस से रेवेन्यू 81,982.38 करोड़ रुपये रहा।

बजाज फाइनेंस के शेयर को कवर करने वाले 38 एनालिस्ट्स में से 27 ने ‘बाय’ रेटिंग दी है, 5 ने ‘होल्ड’ और 6 ने ‘सेल’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म सिटी ने अपनी रेटिंग “न्यूट्रल” से बढ़ाकर “बाय” कर दी है। प्राइस टारगेट भी पहले के ₹1,090 से बढ़ाकर ₹1,120 प्रति शेयर कर दिया है। CLSA ने शेयर के लिए “आउटपरफॉर्म” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट ₹1,200 रखा है। फर्म का कहना है कि अर्निंग्स कॉल के दौरान मैनेजमेंट का रवैया सकारात्मक लगा। उन्होंने नए वित्त वर्ष के लिए अपने क्रेडिट कॉस्ट के अनुमान (1.45% से 1.6%) को फिर से दोहराया।

जेफरीज ने बजाज फाइनेंस के शेयर के लिए “बाय” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट ₹1,210 प्रति शेयर रखा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगले 3 वर्षों में कंपनी का मुनाफा 20% की ‘कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट’ (CAGR) से बढ़ेगा। जेपी मॉर्गन ने “ओवरवेट” रेटिंग बरकरार रखी है और प्राइस टारगेट ₹1,080 रखा है। फर्म का कहना है कि Bajaj Finance द्वारा बढ़त दर्ज करना और एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर बताए गए सकारात्मक रुझान उन्हें काफी प्रभावशाली लगे। लेकिन किसी भी तरह के संघर्ष या विवाद के देर से पड़ने वाले असर को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।

बजाज फाइनेंस के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए शेयरहोल्डर्स को 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने का फैसला किया है। इस पर 30 जुलाई 2026 को होने वाली सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने पर डिविडेंड का पेमेंट 3 अगस्त को या उसके आसपास कर दिया जाएगा। पात्र शेयरहोल्डर्स तय करने के लिए रिकॉर्ड डेट 30 जून है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे।

कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च 2026 तिमाही में 22 प्रतिशत बढ़कर 5.09 लाख करोड़ रुपये के रहे। एक साल पहले ये 4.16 लाख करोड़ रुपये के थे। ग्रॉस NPA बढ़कर 1.01 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 0.96 प्रतिशत था। नेट NPA घटकर 0.41 प्रतिशत रह गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 0.44 प्रतिशत था।

WORLD : नेपाल में नए कस्टम नियम से सैकड़ों कंटेनर सीमा पर अटके

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काठमांडू, 30 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल सरकार के 30 अप्रैल से विदेश से आयात होने वाले सामान पर भी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लेबल अनिवार्य किए जाने के बाद अधिकांश आयातित वस्तुओं का कस्टम क्लियरेंस ठप हो गया है। इससे सैकड़ों कंटेनर सीमा पार अटक गए हैं।

पहली अप्रैल को नेपाल के वाणिज्य विभाग ने सूचना जारी कर देश में उत्पादित और आयातित तैयार वस्तुओं पर 30 अप्रैल से एमआरपी लेबल अनिवार्य करने की जानकारी दी थी। इस समय सीमा के अनुसार, मध्य रात 12 बजे सेी एमआरपी उल्लेख न होने वाले किसी भी सामान का कस्टम क्लियरेंस नहीं हो रहा है। कई कस्टम कार्यालयों ने इसकी पुष्टि की है।

उपभोक्ता संरक्षण की धारा 6(3) के अनुसार, नेपाल में उत्पादित वस्तुओं के लिए निर्माता और विदेश से आयातित वस्तुओं के लिए आयातकर्ता को नेपाली या अंग्रेजी भाषा में एमआरपी अनिवार्य रूप से अंकित करना होता है। कानून के मुताबिक, ऐसे उत्पाद जिन पर उपभोक्ता आसानी से समझ सकने वाला मूल्य अंकित न हो, उन्हें बाजार में बेचा नहीं जा सकता। मूल्य निर्धारण करते समय सभी करों को शामिल कर एमआरपी तय करना आवश्यक है।

लेबल पर मूल्य के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विवरण भी देना अनिवार्य है, जैसे—वस्तु का वजन या मात्रा, उत्पादन तिथि, बैच नंबर, उपभोग की अंतिम तिथि और संभावित साइड इफेक्ट की जानकारी विशेष रूप से हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या मशीनरी के मामले में गारंटी/वारंटी अवधि और संभावित जोखिम (जैसे टूट-फूट या ज्वलनशीलता) की जानकारी देना जरूरी है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर चेतावनी संदेश या चित्र भी अनिवार्य है।

इन कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 3 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, सख्त कानून के बावजूद इसके व्यावहारिक कार्यान्वयन में चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। सरकार ने कस्टम प्रणाली को सरल बनाने और वाणिज्य तथा उपभोक्ता संरक्षण कार्यों को अलग कर प्रभावी निगरानी के माध्यम से एमआरपी लागू करने की बात कही थी। वाणिज्य विभाग के अनुसार, खाद्य सामग्री में उत्पादन और उपभोग तिथि तथा तैयार वस्तुओं में ब्रांड और एमआरपी अनिवार्य है।

सरकार के निर्देशानुसार वीरगंज, भैरहवा, विराटनगर, रसुवा, नेपालगंज और कांकड़भिट्टा जैसे प्रमुख कस्टम नाकों पर एमआरपी और निर्धारित मानकों को पूरा न करने वाले सामान का क्लियरेंस पूरी तरह रोक दिया गया है। स्थिति यह है कि कस्टम क्लियरेंस ठप होने से 1000 से अधिक मालवाहक वाहन सीमा पर फंसे हुए हैं। इनमें से केवल वीरगंज में ही लगभग 600 कंटेनर रुके हुए हैं, जबकि अन्य स्थानों पर 20 से 100 तक कंटेनर अटके हैं।

हालांकि आवश्यक और औद्योगिक सामग्री का कस्टम क्लियरेंस जारी है। फल, हरी सब्जियां, लहसुन जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान, कच्चा पाम ऑयल, औद्योगिक कच्चा माल, जलविद्युत परियोजनाओं की सामग्री और मशीनरी का क्लियरेंस नियमित रूप से हो रहा है।

वीरगंज कस्टम के अधिकारी उदय सिंह विष्ट के अनुसार, ऊपर से निर्देश मिलने के कारण मानक पूरा न करने वाले सामान का क्लियरेंस संभव नहीं है। वहीं आयातकर्ता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि कस्टम पहुंच चुके सामान पर अब एमआरपी लेबल कैसे लगाया जाए। भैरहवा कस्टम प्रमुख हरिहर पौडेल ने बताया कि केवल मानक पूरा करने वाले सामान का ही क्लियरेंस हो रहा है।

रसुवागढ़ी नाके पर चीन से आए कपड़े और जूते के करीब 20 कंटेनर रुके हुए हैं। सूचना अधिकारी ठाकुर गौतम के अनुसार, एमआरपी न होने के कारण व्यापारी जुर्माने के डर से कस्टम घोषणा पत्र भरने से भी बच रहे हैं। विराटनगर कस्टम प्रमुख उमेश श्रेष्ठ ने कहा कि सरकार की नीति का सख्ती से पालन किया जा रहा है और बिना एमआरपी वाले सामान का क्लियरेंस संभव नहीं है।

सरकार का कहना है कि यह नीति उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने और बाजार मूल्य नियंत्रण के लिए लाई गई है, लेकिन व्यवसायी पूर्व तैयारी और स्पष्ट कार्यविधि की कमी का हवाला देते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। व्यवसायियों ने कई बार उद्योग मंत्री और वाणिज्य विभाग के महानिदेशक से मुलाकात कर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं, लेकिन सरकार हर हाल में एमआरपी लागू करने के पक्ष में है।

व्यवसायियों का कहना है कि वे नियम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे व्यावहारिक तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि पहले यह तय किया जाए कि किन वस्तुओं पर एमआरपी लगाया जा सकता है और किन पर नहीं, और कस्टम के बजाय गोदाम या बिक्री बिंदु पर लेबलिंग की अनुमति दी जाए।

BHOPAL : पंडित धीरेन्द्र शास्त्री बोले- बड़े घर की माताएं भी पी रहीं शराब, कांग्रेस ने घेरा

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भोपाल, 29 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक और बयान विवादों में आ गया है। नागपुर में कथा के दौरान उन्होंने कहा कि आजकल पुरुषों की तो छोड़ो, हमने सुना कि बड़े घरानों की माताएं भी पी रही हैं। राम-राम, राम-राम…बजरंग बली बचाएं।’

बुधवार को पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के इस बयान से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसके बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। छतरपुर में कांग्रेस नेता दीप्ति पांडे ने कहा कि व्यासपीठ से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। पूरा देश उन्हें सुनता है, ऐसे में माताओं के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

दरअसल, कथावाचक पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने नागपुर में चल रही कथा के दौरान 28 अप्रैल को व्यासपीठ से कहा था- जब कई माताएं ही विचित्र संस्कारों वाली हो जाएंगी तो बच्चों को क्या हलुआ संस्कार देंगी? हम तो सोच रहे हैं कि जिनकी घरवालियां पीती हैं, उनके कल के दिन बच्चे होंगे, वे बच्चे रोएंगे तो उन्हें भी शराब पिलाकर सुला देंगी। उन्होंने कहा कि पहले मर्यादा होती थी, संस्कार होते थे। लोग कुछ गलत करने से डरते थे लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं।

इस बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य दीप्ति पांडे ने कहा कि सृष्टि की सृजनकर्ता एक नारी ही होती है। वो मां है, जो बच्चे की प्रथम गुरु है। मातृ शक्ति के लिए इस तरह की भाषा का उपयोग करने का मैं विरोध करती हूं। उन्होंने बुधवार को वीडियो जारी कर कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी, मैं आपसे निवेदन करती हूं कि मातृ शक्ति के खिलाफ इस तरह की भाषा का उपयोग करना बंद कर दें। आपने महिलाओं के खिलाफ अब कोई अनर्गल टिप्पणी की तो हमें आपके खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

यह पहला मौका नहीं है जब शास्त्री के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले भी नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को देश सेवा के लिए समर्पित करने की बात कही थी, जिस पर देशभर में विवाद हुआ था। धार्मिक मंच से दिए गए इस बयान ने एक बार फिर समाज और राजनीति के बीच बहस को तेज कर दिया है। जहां समर्थक इसे सामाजिक चेतावनी बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं।

NATIONAL : धार सड़क हादसे में अब तक 16 की मौत: मृतकों में 6 बच्चे भी शामिल, 13 लोग घायल; PM मोदी और CM मोहन यादव ने जताया दुख, आर्थिक मदद का किया ऐलान

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जिले के तिरला में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के चिकलिया फाटे के समीप हुए दर्दनाक हादसे में अब तक 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। जबकि 13 घायल हैं। मृतकों में 6 बच्चे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हादसा मजदूरों से भरा पिकअप वाहन टायर फटने से अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़कर पलट गया। वाहन ने 3-4 बार पलटी खाई। इस दौरान सड़क के दूसरी तरफ जाकर स्कॉर्पियो से भी टकराया। हादसे में गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गया हैं, जहां उनका उपचार जारी हैं।

हादसे के बाद जिला अस्पताल पहुंचे कमिश्नर सुदाम खाड़े ने बताया कि पिकअप वाहन में करीब 46 लोग सवार थे। घायलों के इलाज को लेकर प्रशासन ने व्यवस्था की है। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है। वहीं करीब 15 घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। जबकि 6 अन्य का उपचार निजी अस्पतालों में जारी है। कमिश्नर ने बताया कि अस्पताल में हड्डी और फ्रैक्चर से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इंदौर में भी डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है।

वहीं हादसे का प्रत्यक्षदर्शी शुभम सिसोदिया ने बताया कि हादसे के समय मैं घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर मौजूद था। स्कॉर्पियो मांगूद से धार की ओर जा रही थी। जबकि पिकअप वाहन धार से मांगूद की तरफ आ रहा था। इसी दौरान अचानक पिकअप का टायर फट गया। अनियंत्रित होकर पिकअप डिवाइडर को पार करते हुए रॉन्ग साइड में आ गया और सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। फिर पलट गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार हादसे पर दुख जताया है। पीएम ने एक्स पर लिखा- दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे के प्रभावितों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने X पर लिखा- मृतकों के परिवारजन को 4-4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए तथा घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इंदौर संभागायुक्त और आईजी को उपचार व्यवस्था के लिए धार जाने के निर्देश दिए हैं। सभी घायलों का उपचार नि:शुल्क किया जाएगा।

इस हादसे ने जिम्मेदारों की लापरवाही की पोल भी खोल दी हैं, जहां आए दिन इस तरह के हादसों के बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। अगर समय रहते इन वाहनों में क्षमता से अधिक मजदूरों को बिठाकर बेलगाम चलने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई होती तो शायद आज ये बड़ा हादसा भी नहीं होता।

NATIONAL : बंगलूरू में बारिश का कहर: अस्पताल की दीवार गिरने से सात लोगों की मौत, सीएम सिद्धारमैया ने किया मुआवजे का एलान

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बंगलूरू में मूसलाधार बारिश के चलते अस्पताल की दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लिया और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।

कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में बुधवार शाम हुई भारी बारिश और तेज हवाओं ने भारी तबाही मचाई है। शहर के शिवाजीनगर इलाके में स्थित बोवरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल की एक विशाल चारदीवारी अचानक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम सात लोगों की जान चली गई है। मलबे के नीचे दबने से कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि डॉक्टरों ने घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई है।

हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और बचाव टीमें मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मरने वालों में ज्यादातर सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदार और वहां से गुजर रहे राहगीर शामिल हैं। शाम के वक्त अचानक शुरू हुई तेज बारिश और हवाओं के कारण दीवार का ढांचा दबाव नहीं झेल सका और गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बारिश इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी घटनास्थल का दौरा किया और मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन को राहत कार्य तेज करने और प्रभावितों को हर संभव मदद मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मुआवजे के तौर पर मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये देने का एलान किया है। शहर में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

NATIONAL : मुंबई में चार लोगों की मौत के बाद राजधानी में खरीदने से बच रहे लोग, बाजार पर असर

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गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा बिकने वाला और राहत देने वाला फल तरबूज अब लोगों के बीच डर की वजह बनता जा रहा है। मुंबई में बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के बाजारों में इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। लोग अब तरबूज खरीदने से पहले कई बार सोच रहे हैं, वहीं कई परिवारों ने फिलहाल इसे खाना ही बंद कर दिया है।

राजधानी के आजादपुर, कृष्णा नगर, करोल बाग, शाहदरा, पटपड़गंज और लक्ष्मी नगर जैसे इलाकों के फल विक्रेताओं का कहना है कि पिछले दो दिनों में तरबूज की बिक्री में साफ गिरावट आई है। जहां पहले ग्राहक बिना पूछे पूरा तरबूज खरीद लेते थे, अब वह बार-बार पूछ रहे हैं कि फल कहां से आया है, ताजा है या नहीं और कहीं ये इंजेक्शन वाला तो नहीं।

पहले दिनभर में 40 से 50 तरबूज आसानी से बिक जाते थे, लेकिन अब मुश्किल से 20-25 ही बिक रहे हैं। ग्राहक सिर्फ पूछते हैं और बिना खरीदे चले जाते हैं। खबर का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। – अर्जुन (फल विक्रेता)

मुंबई की घटना के बाद लोगों में डर बैठ गया है। लोग पूछ रहे हैं कि तरबूज सुरक्षित है या नहीं। हम समझाते हैं कि ताजा माल है, लेकिन डर इतनी जल्दी नहीं जाता। -शिवम (फल विक्रेता, आजादपुर मंडी)

कटे हुए तरबूज की बिक्री लगभग बंद हो गई है। लोग पूरा फल लेने से भी बच रहे हैं। अफवाह और डर का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ता है। -राजन (फल विक्रेता)

गर्मी के सीजन में तरबूज ही सबसे ज्यादा बिकता है। लेकिन इस बार ग्राहक संदेह में हैं। अगर यही हाल रहा तो सीजन का बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।

उधर, आम लोगों में भी डर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर बच्चों वाले परिवार ज्यादा सतर्क हो गए हैं। लोग अब खुले में बिक रहे कटे हुए फलों से दूरी बना रहे हैं। -चंद्र प्रकाश (निवासी, दिलशाद गार्डन)

बच्चों के लिए गर्मी में रोज तरबूज लाते थे, लेकिन मुंबई की खबर सुनने के बाद डर लग रहा है। जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी, घर में तरबूज नहीं लाएंगे। -प्राजकता (गृहिणी, मयूर विहार)

आजकल फल भी भरोसे के नहीं रहे। बाहर से लाल और मीठा दिखने वाला तरबूज अंदर से खराब निकलता है। बच्चों की सेहत के साथ रिस्क नहीं ले सकते। -ज्योतिसना (ग्रहणी, मालवीय नगर)

समाचार देखने के बाद मैंने फिलहाल तरबूज खरीदना बंद कर दिया है। बाजार में कौन-सा फल कितना सुरक्षित है, यह समझना मुश्किल हो गया है। -वंदना (ग्रहण, करोल बाग)

तरबूज सुरक्षित फल है और इससे मौत नहीं होती, लेकिन दूषित, मिलावटी या गलत तरीके से रखा गया तरबूज गंभीर फूड पॉइजनिंग, एलर्जी या किडनी मरीजों में जटिलताएं पैदा कर सकता है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। -डॉ. अमितेश आग्रवाल (निदेशक प्रोफेसर एंड यूनिट हेड, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन, जीटीबी अस्पताल)

मुंबई में हुई घटना के बाद दिल्ली के लोग तरबूज को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कई लोगों का आरोप है कि बाजार में चमकदार दिखाने के लिए फलों में केमिकल इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। मुंबई में हुई दर्दनाक घटना ने दिल्ली के लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है। गर्मी में राहत देने वाला तरबूज अब शक की नजर से देखा जा रहा है।

LIFESTYLE : देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवाओं की तेजी से बढ़ रही संख्या

भारत में हार्ट अटैक के खतरे का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और यह अब हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवा सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं।इस तरह के बढ़ते मामले सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में इसे लेकर हुए अध्ययन मे’ सामने आया है कि करीब 80 प्रतिशत ऐसे मरीज जिन्हें पहले मेडिकल जांच में ‘लो-रिस्क’ माना गया था, वे बाद में हार्ट अटैक का शिकार हो गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में हर वर्ष होने वाली करीब एक करोड़ मौत का लगभग 25 से 27 प्रतिशत यानी करीब 25 से 27 लाख मौत कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (सीवीडी) के कारण होती हैं, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति की मौत दिल से जुड़ी बीमारी से होती है। साफ है कि हार्ट अटैक देश में यह एक ‘साइलेंट महामारी’ बनता जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा खतरा अब युवाओं के सामने है।

देश में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के आंकड़े भी बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से सडन डेथ के 32,457 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 35 हजार से अधिक हो गई। इस मामले में वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े अभी तक जारी नहीं हुए हैं।

दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलाजिस्ट डॉ. मोहित दयाल गुप्ता के नेतृत्व में 2023 से 2025 के बीच एकत्रित मरीजों के डाटा पर आधारित हुआ क्लिनिकल विश्लेषण भारत में हार्ट डिजीज के बदलते पैटर्न को दर्शाता है।

हार्ट अटैक का शिकार होने वाले 20–30 वर्ष के युवाओं की संख्या पांच से 10 प्रतिशत के बीच है। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है, साथ ही इस उम्र में भी अचानक और बिना चेतावनी के हार्ट अटैक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

30 से 40 वर्ष की उम्र में यह खतरा और बढ़ जाता है, जहां तनाव, अनियमित दिनचर्या, मोटापा और शुरुआती डायबिटीज प्रमुख कारण बनते हैं। जबकि 40 से 50 वर्ष की आयु में इस तरह के लगभग 25 प्रतिशत मामले सामने आए। 50 से 60 वर्ष का वर्ग अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित (30 से 35 प्रतिशत) बना हुआ है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु दर सबसे अधिक देखी जाती है।

दिल्ली की स्थिति भी चिंताजनक है। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) व अन्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में दिल और रक्त संचार संबंधी बीमारियों से 34 हजार से अधिक मौतें दर्ज की गईं जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज बढ़ोतरी दर्शाती हैं। पिछले दो दशकों में दिल्ली में तीन लाख से ज्यादा लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण जान गंवा चुके हैं।

विशेषज्ञ इसके पीछे प्रदूषण, तनावपूर्ण जीवनशैली, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को प्रमुख कारण मानते हैं। यह भी सामने आया कि पश्चिमी देशों के आधार पर तैयार किए गए रिस्क कैलकुलेटर भारत के लिए पूरी तरह से कारगर नहीं हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अलग हार्ट रिस्क आंकलन माडल विकसित करने की जरूरत है। साथ ही लोगों को ‘नार्मल रिपोर्ट’ के भरोसे न रहकर नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

NATIONAL : आज श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत को हरी झंडी दिखाएंगे रेल मंत्री वैष्णव, 2 मई से शुरू होंगी नियमित सेवाएं

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यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक चलती थी, अब जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे देश की सबसे आधुनिक ट्रेन सीधे जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े शहर और रेलवे केंद्र तक पहुंचेगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव आज जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित श्रीनगर-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक चलती थी, अब जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे देश की सबसे आधुनिक ट्रेन सीधे जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े शहर और रेलवे केंद्र तक पहुंचेगी।

हरी झंडी दिखाने के बाद, केंद्रीय मंत्री उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) की दो सबसे उल्लेखनीय इंजीनियरिंग संरचनाओं, अंजी ब्रिज और चेनाब ब्रिज का निरीक्षण करेंगे। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी, तब इसमें 8 कोच थे। तब से, यह ट्रेन लगातार पूरी क्षमता से चल रही है और यात्रियों की ओर से इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

ट्रेन में 20 कोच जोड़ने का निर्णय मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे ट्रेन की बैठने की क्षमता दोगुनी से भी अधिक हो गई है और आरक्षण व प्रतीक्षा सूची पर दबाव काफी कम हो गया है, खासकर तीर्थयात्रा और पर्यटन के व्यस्त मौसम में।

उन तीर्थयात्रियों के लिए, जिनकी सीटें कई दिन पहले ही बिक जाती थीं, घाटी की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों के लिए और स्थानीय लोगों के लिए, जो रोजमर्रा की यात्रा के लिए इस सेवा पर निर्भर हैं, विस्तारित कोचों के कारण अब ट्रेन द्वारा उन्हें वापस भेजे जाने की संभावना बहुत कम हो गई है।

जम्मू-तवी तक विस्तार के साथ ही, 20 कोचों वाली वंदे भारत एक्सप्रेस अपने सबसे बड़े यात्री शहर तक पूरी क्षमता के साथ पहुंच गई है। यह ट्रेन अंततः उस मांग के अनुरूप बनाई गई है, जिसे इसने हमेशा से प्रेरित किया है।

हरी झंडी दिखाने के साथ ही पहली यात्रा शुरू होगी, लेकिन विस्तारित जम्मू-तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस 2 मई 2026 से नियमित सेवा में आ जाएगी। लगभग 266 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले इस कॉरिडोर पर दो जोड़ी सेवाएं संचालित होंगी।

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