Friday, May 1, 2026
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NATIONAL : आज श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत को हरी झंडी दिखाएंगे रेल मंत्री वैष्णव, 2 मई से शुरू होंगी नियमित सेवाएं

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यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक चलती थी, अब जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे देश की सबसे आधुनिक ट्रेन सीधे जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े शहर और रेलवे केंद्र तक पहुंचेगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव आज जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित श्रीनगर-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक चलती थी, अब जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे देश की सबसे आधुनिक ट्रेन सीधे जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े शहर और रेलवे केंद्र तक पहुंचेगी।

हरी झंडी दिखाने के बाद, केंद्रीय मंत्री उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) की दो सबसे उल्लेखनीय इंजीनियरिंग संरचनाओं, अंजी ब्रिज और चेनाब ब्रिज का निरीक्षण करेंगे। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी, तब इसमें 8 कोच थे। तब से, यह ट्रेन लगातार पूरी क्षमता से चल रही है और यात्रियों की ओर से इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

ट्रेन में 20 कोच जोड़ने का निर्णय मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे ट्रेन की बैठने की क्षमता दोगुनी से भी अधिक हो गई है और आरक्षण व प्रतीक्षा सूची पर दबाव काफी कम हो गया है, खासकर तीर्थयात्रा और पर्यटन के व्यस्त मौसम में।

उन तीर्थयात्रियों के लिए, जिनकी सीटें कई दिन पहले ही बिक जाती थीं, घाटी की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों के लिए और स्थानीय लोगों के लिए, जो रोजमर्रा की यात्रा के लिए इस सेवा पर निर्भर हैं, विस्तारित कोचों के कारण अब ट्रेन द्वारा उन्हें वापस भेजे जाने की संभावना बहुत कम हो गई है।

जम्मू-तवी तक विस्तार के साथ ही, 20 कोचों वाली वंदे भारत एक्सप्रेस अपने सबसे बड़े यात्री शहर तक पूरी क्षमता के साथ पहुंच गई है। यह ट्रेन अंततः उस मांग के अनुरूप बनाई गई है, जिसे इसने हमेशा से प्रेरित किया है।

हरी झंडी दिखाने के साथ ही पहली यात्रा शुरू होगी, लेकिन विस्तारित जम्मू-तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस 2 मई 2026 से नियमित सेवा में आ जाएगी। लगभग 266 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले इस कॉरिडोर पर दो जोड़ी सेवाएं संचालित होंगी।

BHAKTI : 60 साल बाद इस ‘दिव्य योग’ में होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, आज से रजिस्ट्रेशन शुरू

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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो रहे हैं. इस बार की यात्रा 60 साल बाद आ रहे दिव्य ‘अग्नि अश्व वर्ष’ महासंयोग में हो रही है, जिसे हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष का द्वार माना जाता है. जून के पहले सप्ताह से यात्री रवाना होंगे.

अगर आप कैलाश मानसरोवर यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल, इस यात्रा के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू हो रहा है. दिलचस्प बात ये है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार एक दिव्य योग में होने जा रही है, जिसमें भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के श्रद्धालु शामिल होंगे. यात्रा जून के पहले सप्ताह से शुरू होगी और पहले जत्थे को रवाना किया जाएगा.

बताया जा रहा है कि इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर 60 साल बाद तिब्बती और हिमालयी ज्योतिष का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है. इस योग का नाम है अग्नि अश्व वर्ष, जोकि हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष का द्वार कहा जाता है. तिब्बती ज्योतिष में 60 सालों का चक्र होता है. इस साल अग्नि तत्व और अश्व का दुर्लभ संगम बना है. यही वजह है कि 2026 में होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा में तीनों धर्मों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे.

कैलाश मानसरोवर यात्रा करवाने के लिए सरकार तेजी से तैयारियां करने में जुटी हुई है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड के रास्ते आयोजित की जाएगी और इसमें 500 श्रद्धालुओं को शामिल करने का प्लान बनाया गया है.

इस यात्रा को विदेश मंत्रालय हर साल जून से अगस्त-सितंबर के बीच दो अलग-अलग रास्तों से आयोजित करता है. एक रास्ता लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और दूसरा नाथू ला दर्रा (सिक्किम) है. ये यात्रा अपने धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक अहमियत के लिए जानी जाती है. हर साल सैकड़ों लोग यह यात्रा करते हैं. हिंदुओं के लिए भगवान शिव का निवास स्थान होने के नाते इसका धार्मिक महत्व जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा के रूट
लिपुलेख दर्रा मुख्य मार्ग है. इस रास्ते से यात्रा दिल्ली से शुरू होती है और टनकपुर, पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी और लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरती है. भारत-चीन सीमा तक यह रास्ता पूरी तरह से गाड़ियों के चलने लायक है और इसमें कैलाश पर्वत की पवित्र बाहरी परिक्रमा और भीतरी परिक्रमा शामिल है. श्रद्धालु मानसरोवर झील पर रुककर हवन और पूजा करते हैं.

नाथू ला दर्रा रूट सिक्किम के रास्ते से है,. यह यात्रा भी दिल्ली से ही शुरू होती है और नाथू ला पार करने से पहले गंगटोक तक जाती है. भू-राजनीतिक पाबंदियों के कारण इस रास्ते का इस्तेमाल कम किया जाता है. लिपुलेख दर्रा रूट की तरह ही, इस रास्ते में भी बहुत कम ट्रेकिंग करनी पड़ती है और यात्रा ज्यादा आरामदायक होती है.

कैलाश मानसरोवर के पात्रता, डॉक्यूमेंट्स
तीर्थयात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को MEA पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करना होगा. इसके लिए वैध भारतीय पासपोर्ट या OCI कार्ड, अपडेटेड मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और सरकार की ओर से जारी पहचान पत्र होना जरूरी होता है. चुने गए तीर्थयात्रियों को विदेश मंत्रालय की ओर से पूरी यात्रा योजना और दिशानिर्देश प्राप्त होते हैं. साथ ही प्रस्थान से पहले ओरिएंटेशन सत्र भी आयोजित किए जाते हैं.

कैलाश मानसरोवर के लिए पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए शरीर को अनुकूल बनाना क्यों जरूरी है?

यात्रा से पहले ज्यादा ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन के स्तर के साथ तालमेल बिठाने के लिए शरीर को अनुकूल बनाना जरूरी है. एक्यूट माउंटेंस सिकनेस, हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (HAPE) और हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा (HACE) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम करता है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा में आमतौर पर कितना समय लगता है?

इस यात्रा में आमतौर पर 1520 दिन लगते हैं, जो रास्ते और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है.

इस यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

ज्यादा ऊंचाई, कम ऑक्सीजन का स्तर और ऊबड़-खाबड़ इलाका. इन सभी चीजों के मेल की वजह से यह यात्रा शारीरिक रूप से बहुत थकाने वाली हो जाती है, यहां तक कि सेहतमंद यात्रियों के लिए भी.

BUSINESS : महंगे ईंधन ने रोकी उड़ानों की रफ्तार, मार्च में 1.46 करोड़ यात्री उड़े; जानें क्यों घटी ग्रोथ?

एयरलाइंस सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2025-26 अच्छा साबित नहीं हुआ है। इस दौरान एयर इंडिया से जुड़ी घटनाओं, इंडिगो एयरलाइन की संचालन संबंधी दिक्कतें और विमान हादसों ने पूरे सेक्टर पर असर डाला है। वहीं, महंगे हवाई ईंधन ने भी इंडस्ट्री की रफ्तार को धीमा कर दिया। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी सीमित ही रह गई।

पूरे वित्त वर्ष में हवाई यात्रियों की संख्या में केवल 1.4 फीसदी की हल्की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष के आखिरी महीने मार्च में यह बढ़ोतरी सिर्फ 1 फीसदी तक ही सीमित रही। हालांकि, इस अवधि में विमानन क्षेत्र की कुल क्षमता में कुछ कमी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद यात्रा की मांग में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी बहुत सीमित रही है। मार्च 2026 में घरेलू यात्री ट्रैफिक में सालाना आधार पर केवल 1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे वित्त वर्ष 2026 में भी ग्रोथ सिर्फ 1.4 फीसदी तक ही सीमित रही। इसी के साथ यह वित्त वर्ष हल्की बढ़त के साथ समाप्त हुआ है। जबकि मार्च 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस महीने कुल 14.68 मिलियन यानी करीब 1.46 करोड़ घरेलू यात्रियों ने हवाई यात्रा की है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि, मार्च 2026 में एयरलाइंस ने अपनी क्षमता को मार्च 2025 के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत कम रखा। हालांकि, फरवरी 2026 की तुलना में मार्च में क्षमता में 10.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। इसके बावजूद, पैसेंजर लोड फैक्टर में अच्छा सुधार देखने को मिला। मार्च 2026 में यह बढ़कर 89.5 फीसदी तक पहुंच गया, जो मार्च 2025 के 86 प्रतिशत के स्तर से काफी बेहतर है।

अप्रैल 2026 में घोषित एविएशन टर्बाइन फ्यूल की औसत कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह कीमतें पिछले महीने के मुकाबले 9.2 फीसदी और सालाना आधार पर 18.2 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे भी बनी रह सकती हैं। जिससे एटीएफ की दरों पर और दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना भी एविएशन सेक्टर के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इन परिस्थितियों के कारण आने वाले समय में हवाई यात्रियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
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ENTERTAINMENT : खालिस्तानियों के निशाने पर दिलजीत दोसांझ, वैंकूवर कॉन्सर्ट में हंगामा, सिंगर के खिलाफ लगे नारे

दिलजीत दोसांझ ने कुछ दिन पहले कनाडा के वैंकूवर में अपना शानदार कॉन्सर्ट किया था. अब ताजा जानकारी के मुताबिक, उस शो में कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा मचाया था. उन्होंने दिलजीत को अपना अगला टारगेट बनाया.

दिलजीत दोसांझ अब ग्लोबल स्टार बन चुके हैं. इंडिया में कॉन्सर्ट के बाद, वो अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपों में शोज करते हैं. वहां भी दिलजीत का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता है. 23 अप्रैल को दिलजीत ने कनाडा के वैंकूवर में अपने औरा टूर की शुरुआत की थी. वहां करीब 50,000 से ज्यादा इंडियन्स आए थे. ये पल सिंगर के लिए बेहद खास था, जिसका जिक्र उन्होंने बीते दिनों जिम्मी फॉलन के लेट नाइट शो पर भी किया था. मगर इस कॉन्सर्ट में एक और बवाल खड़ा हुआ, जिसकी जानकारी अब सामने आ रही है.

दिलजीत के वैंकूवर कॉन्सर्ट में कुछ खालिस्तानी समर्थक घुस गए थे, जो वहां सिंगर के खिलाफ नारे लगा रहे थे. जानकारी के मुताबिक, मामला काफी गंभीर हो गया था. मगर सिक्योरिटी ने कुछ ही देर में उन्हें शो से बाहर किया और माहौल को शांत किया. कहा जा रहा है कि दिलजीत खालिस्तानियों का अगला निशाना हैं.

दरअसल, शो के दौरान अचानक कुछ लोग खालिस्तान के झंडे लेकर अंदर घुस आए और नारेबाजी शुरू कर दी. इन लोगों ने भारत के खिलाफ भी नारे लगाए और दिलजीत पर बीजेपी और आरएसएस का एजेंट होने के आरोप लगाए. मौके पर मौजूद सिक्योरिटी टीम ने जब हालात संभालने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारी उनसे भिड़ गए. कुछ देर के लिए कॉन्सर्ट का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया, हालांकि बाद में स्थिति को काबू में कर लिया गया.

सूत्रों के मुताबिक हंगामा करने वालों में पवनदीप सिंह बस्सी और मनदीप सिंह रवि नाम के दो लोग शामिल बताए जा रहे हैं. इन पर आरोप है कि ये सिख्स फोर जस्टिस (SFJ) से जुड़े हुए हैं, जो भारत में बैन संगठन है और इसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने आगे भी दिलजीत दोसांझ के शो में विरोध करने की चेतावनी दी है.

हालांकि दिलजीत ने अभी तक खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई किसी भी नारेबाजी पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. सिंगर पिछले कुछ वक्त से ही गुरपतवंत सिंह पन्नू के निशाने पर नजर आए हैं. उन्होंने दिलजीत को कई बार धमकी दी, मगर सिंगर ने उसका असर अपने ऊपर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने हमेशा प्यार फैलाने की बात कही.

NATIONAL : बाली के होटल में हार्ट अटैक से Air India के पायलट की मौत, दिल्ली से विमान उड़ाकर पहुंचे थे इंडोनेशिया

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एअर इंडिया के 40 वर्षीय फर्स्ट ऑफिसर की इंडोनेशिया के बाली में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वे दिल्ली से उड़ान भरकर बाली पहुंचे थे और होटल में आराम ….

एअर इंडिया के एक पायलट की इंडोनेशिया के बाली में बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वह 40 वर्ष के थे और फ‌र्स्ट आफिसर थे। एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली से उड़ान भरकर बाली पहुंचे फ‌र्स्ट ऑफिसर होटल में आराम कर रहे थे तभी उन्हें बेचैनी महसूस हुई।

उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। तमाम कोशिशों के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। एअर इंडिया ने उनकी मौत पर दुख जताया है और कहा कि एयरलाइन परिवार के साथ लगातार संपर्क में है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

एयरलाइन अधिकारी ने कहा कि पायलट की कुछ महीने सभी अनिवार्य चिकित्सा जांच हुई थी। पायलट को पहले से कोई ज्ञात मेडिकल समस्या नहीं थी। एयरलाइन ने यह भी कहा कि पायलट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा निर्धारित उड़ान समय सीमा के भीतर ही काम किया था यानी उन पर काम का अतिरिक्त दबाव नहीं था।

NATIONAL : पुडुचेरी में फिर खिल सकता है कमल, एग्जिट पोल्स में NDA को 18+ सीटें, बहुमत के जादुई आंकड़े के पार

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पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के ‘पोल ऑफ पोल्स’ में NDA को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है.

पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव को लेकर सामने आए अलग-अलग एग्जिट पोल अब एक साझा रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं. ‘पोल ऑफ पोल्स’ के समेकित विश्लेषण में NDA स्पष्ट बढ़त के साथ उभरता दिख रहा है. 30 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 16 है और ज्यादातर सर्वे NDA को इस आंकड़े के पार ले जाते नजर आ रहे हैं.

तीन प्रमुख एजेंसियों Axis My India, Peoples Pulse और Praja Poll के आंकड़ों पर नजर डालें तो NDA की स्थिति मजबूत दिखती है. Axis My India के अनुसार NDA को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं, जिससे वह बहुमत के करीब या उससे ऊपर पहुंचता है. Peoples Pulse भी NDA को 16 से 20 सीटों के दायरे में दिखाता है, जबकि Praja Poll सबसे ज्यादा अनुमान देते हुए NDA को 19 से 25 सीटों तक पहुंचा रहा है. इन तीनों सर्वे का औसत यही संकेत देता है कि NDA पुडुचेरी में सरकार बनाने की स्थिति में है.

दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन इन अनुमानों में पीछे नजर आ रहा है. Axis My India उसे 6 से 8 सीटें देता है, जबकि Peoples Pulse के अनुसार उसे 10 से 12 सीटें मिल सकती हैं, जो उसके लिए थोड़ा बेहतर संकेत है. Praja Poll का अनुमान 6 से 10 सीटों के बीच है. कुल मिलाकर कांग्रेस गठबंधन के लिए तस्वीर चुनौतीपूर्ण दिखती है, हालांकि कुछ सर्वे उसे दोहरे अंक तक पहुंचने की संभावना भी दिखा रहे हैं.

इस चुनाव में एक दिलचस्प पहलू TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) की मौजूदगी भी है. Axis My India के अनुसार उसे 2 से 4 सीटें मिल सकती हैं, लेकिन Peoples Pulse और Praja Poll दोनों ही उसे कोई सीट नहीं देते. इससे संकेत मिलता है कि TVK का असर सीमित रह सकता है और वह कुछ चुनिंदा सीटों तक ही सिमटा रह सकता है.

अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 0 से 3 सीटें जाने का अनुमान है. संख्या भले कम हो, लेकिन करीबी मुकाबले में यही सीटें सरकार बनाने के समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं.

अलग-अलग सर्वे में सीटों के आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन रुझान एक ही दिशा में है- NDA बहुमत के करीब या उससे आगे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि और कम सीटों का गणित नतीजों को तेजी से बदल सकता है. ऐसे में 2-3 सीटों का फर्क भी सत्ता का संतुलन बदल सकता है.

अगर ‘पोल ऑफ एग्जिट पोल्स’ की बात करें तो पुडुचेरी में NDA को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है. अनुमान के मुताबिक NDA करीब 18 सीटों के साथ बहुमत में है, जबकि कांग्रेस करीब 9 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. TVK को 2 और अन्य के खाते में 1 सीट जाने का अनुमान है, जिससे NDA की सरकार बनती दिख रही है.

NATIONAL : असम में लगातार तीसरी बार कांग्रेस की हार, BJP को बहुमत के आसार; हिमंत सरमा सबसे पॉपुलर

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Assam Exit Poll: असम विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी के लिए खुशखबरी लेकर आए हैं। वोट वाइब के एग्जिट पोल के अनुसार, राज्य में भाजपा अपने दम पर बहुमत की सरकार बना सकती है। वहीं, वोट शेयर के मामले में बीजेपी को टक्कर दे रही कांग्रेस इस मामले में काफी पीछे नजर आ रही है। वहीं, मुख्यमंत्री पद के लिए हिमंत बिस्वा सरमा पॉपुलर बने हुए हैं। असम में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं। अंतिम नतीजे चुनाव आयोग की तरफ से 4 मई को जारी किए जाएंगे।

किसे कितनी सीटें मिलने का अनुमान
बीजेपी की अगुवाई वाला गठबंधन 90 से 100 सीटें अपने नाम कर सकता है। इसमें अकेले भाजपा ही 72 से 78 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है। जबकि, कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 23 से 33 सीटें मिलने का अनुमान है। एग्जिट पोल के अनुसार, कांग्रेस के 22 से 30 सीटें मिल सकती हैं। जबकि, AIUDF को 0 से 6 सीटें मिलने सकती हैं।

हिमंत बिस्वा सरमा बनाम गौरव गोगोई
वोट वाइब के सर्वे में शामिल 51.2 प्रतिशत लोगों ने हिमंत बिस्वा सरमा को सीएम चेहरा चुना है। जबकि, इस रेस में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई 37.2 फीसदी लोगों की पसंद हैं। जबकि, AIUDF के बदरुद्दीन अजमल को 1.9 फीसदी, राजौर दल के अखिल गोगोई को 1.8 प्रतिशत प्रतिभागियों का समर्थन मिला।

वोट शेयर में कांग्रेस ने दी बड़ी टक्कर
असम विधानसभा चुनाव के इस एग्जिट पोल में कांग्रेस भले ही सीटों के मामले में पीछे चल रही हो, लेकिन वोट शेयर के मामले में कड़ी टक्कर दी है। वोट वाइब के अनुसार, कांग्रेस का वोट शेयर 41.2 फीसदी रहा है। जबकि, भाजपा का वोट शेयर 46.1 फीसदी रहा। AIUDF के मामले में आंकड़ा 2.8 प्रतिशत और अन्य में 9.8 प्रतिशत रहा।

सबसे बड़े मुद्दे
वोट वाइब के अनुसार, 2026 असम विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी रहा। वहीं, दूसरे नंबर पर घुसपैठ, तीसरे पर भ्रष्टाचार, चौथे पर महंगाई और पांचवें पर विकास की कमी रहा। राज्य में भाजपा के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ने जबरदस्त समर्थन दिया है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम मतदाताओं का रुझान कांग्रेस की तरफ रहा।

असम में कितनी हुई थी वोटिंग
9 अप्रैल को हुए एक चरण के मतदान में असम में 85.38 प्रतिशत मतदान हुआ था। राज्य में पुरुषों की भागीदारी 84.80 प्रतिशत रही, वहीं महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 85.96 प्रतिशत दर्ज किया गया। राज्य में हुई भारी वोटिंग के बाद एक ओर जहां कांग्रेस ने इसे बदलाव के संकेत करार दिया था। वहीं, सरमा ने कहा था कि भारी मतदान ऐतिहासिक है। इससे पहले 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में राज्य में भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2 मई 2021 के घोषित हुए नतीजों में भाजपा ने 60 सीटें अपने नाम की थीं। वहीं, कांग्रेस के खाते में 29 सीटें आईं थीं। भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को कुल 76 सीटें मिली थीं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले अलायंस ने 49 सीटें मिली थीं। राज्य में बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत थी।

NATIONAL : तमिलनाडु में बड़ा उलटफेर! थलापति विजय की TVK को 120 सीटों तक का अनुमान

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK को 98 से 120 सीटें मिलने की संभावना है.JVC के अनुमानों में ADMK+ को 128 से 147 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है.Matrize, P-Marq और Peoples Insight एजेंसियां DMK+ गठबंधन को 120 से 145 सीटों के बीच जीत का पूर्वानुमान दे रही.

NDTV Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी TVK को बड़ी सफलता मिलती नजर आ रही है. सर्वे के अनुमान बताते हैं कि TVK को राज्य में 98 से 120 सीटें मिल सकती हैं, जिससे पार्टी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है. एग्जिट पोल के ये आंकड़े चुनावी मुकाबले को लेकर नई राजनीतिक तस्वीर पेश कर रहे हैं, हालांकि अंतिम नतीजे तो मतगणना के बाद ही सामने आएंगे.

साथ ही Exit Poll के आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री पद की इस रेस में विजय और स्टालिन के बीच सीधी टक्कर है. ऐसे में अंतिम नतीजे सिर्फ सीटों पर नहीं, बल्कि पोस्ट‑पोल समीकरणों और गठबंधन राजनीति पर भी निर्भर कर सकते हैं.

वहीं, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल के आंकड़ों में दिलचस्प मुकाबला नजर आ रहा है. JVC के अनुमानों में ADMK+ को 128-147 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है, वहीं अन्य तीन एजेंसियां DMK+ की जीत की भविष्यवाणी कर रही हैं. Matrize ने DMK+ को 122-132, P-Marq ने 125-145 और Peoples Insight ने 120-140 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है. TVK+ के लिए भी आंकड़े अलग-अलग हैं, जहां Peoples Insight उसे सर्वाधिक 30-40 सीटें दे रहा है, वहीं JVC के अनुसार उसे मात्र 8-15 सीटें मिल सकती हैं

वहीं, तमिलनाडु चुनाव के लिए ‘पीपल्स पल्स’ (Peoples Pulse) के एग्जिट पोल के आंकड़े के अनुसार, DMK+ गठबंधन सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, जिसे 125-145 सीटें मिलने की उम्मीद है. वहीं, ADMK+ गठबंधन को 65-80 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. इस चुनाव में TVK+ को 18-24 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य (OTH) के खाते में 2-6 सीटें जाने की संभावना जताई गई है.

इधर, एग्जिट पोल के नतीजों के बीच अभिनेता से नेता बने विजय बुधवार को महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईबाबा मंदिर गए. तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक ने मंदिर में प्रार्थना की. अभिनेता की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक बाहर जमा हो गए और अभिनेता ने हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया. इससे पहले, विजय ने तमिलनाडु के तिरुचेंदूर स्थित मुरुगन मंदिर के दर्शन किए थे.

NATIONAL : बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी तैनात रहेंगी CAPF की 500 कंपनियां, CRPF के डीजी ने दी जानकारी

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CRPF के DG जीपी सिंह ने कहा कि सभी फोर्स कमांडरों को भी सूचित कर दिया गया है कि चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी CAPF की 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में ही तैनात रहेंगी.

पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को दूसरे चरण के मतदान के साथ चुनाव संपन्न हो गया है. राज्य में दूसरे चरण के चुनाव के तहत 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हुए. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराने के लिए भारी मात्रा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती की थी, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद भी राज्य में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी की हुई है.

चुनाव आयोग की ओर से 19 मार्च, 2026 को जारी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती योजना के मुताबिक, आज बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को मतदान खत्म होने के बाद से पश्चिम बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए CAPF की 500 कंपनियां को तैनात रहेंगी. चुनाव आयोग ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 500 कंपनियां अगले आदेश तक पश्चिम बंगाल में तैनात रहेंगी.

वहीं, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक जीपी सिंह ने बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस निर्देश की पुष्टि की. उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘सभी फोर्स कमांडरों को भी यह सूचित कर दिया गया है कि चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में ही तैनात रहेंगी, जब तक कि आगे कोई नया आदेश जारी नहीं किया जाता. यह निर्देश 19 मार्च, 2026 के आदेश में स्पष्ट रूप से दिया गया है.’

CRPF के डायरेक्टर जनरल (DG) जीपी सिंह ने अपने पोस्ट में एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें पश्चिम बंगाल में रुकने वाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की जानकारी दी गई है. चुनाव आयोग की योजना के मुताबिक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 500 कंपनियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियां, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की 150 कंपनियां, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 50 कंपनियां, इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 50 कंपनियां और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 50 कंपनियां भी शामिल हैं.

NATIONAL : पहले 3, फिर 77; इस बार बंगाल में कितनी सीटों तक पहुंचेगी BJP, क्या गढ़ बचा पाएंगी ममता

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद अलग-अलग सर्वे एजेंसियों ने अलग-अलग दावे किए हैं। जहां कुछ एजेंसियां भाजपा की प्रचंड लहर की ओर इशारा कर रही हैं, वहीं दो प्रमुख एजेंसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सत्ता में मजबूत वापसी की भविष्यवाणी की है। इन परस्पर विरोधी आंकड़ों ने नतीजों से पहले राज्य में सस्पेंस गहरा दिया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न होते ही कयासों का दौर शुरू हो गया है। एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, बंगाल में इस बार सत्ता परिवर्तन के प्रबल संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के किले में भारतीय जनता पार्टी बड़ी सेंध लगाती दिख रही है।

मैट्रिज के सर्वे के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी 146 से 161 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर सकती है। राज्य में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में भाजपा इस जादुई आंकड़े को पार करती नजर आ रही है। पार्टी के पक्ष में 42.5% वोट शेयर जाने का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा भाजपा के लिए अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन साबित हो सकता है।

दूसरी ओर, सत्ताधारी टीएमसी को तगड़ा झटका लगता दिख रहा है। मैट्रिज सर्वे के मुताबिक, ममता बनर्जी को 125 से 140 सीटों के बीच संतोष करना पड़ सकता है। टीएमसी का वोट शेयर भी भाजपा से पिछड़कर 40.8% पर सिमटने का अनुमान है। अगर ये आंकड़े नतीजों में बदलते हैं, तो यह राज्य में एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे टीएमसी के शासन का अंत होगा।

प्रजा पोल के आंकड़े सबसे अधिक चौंकाने वाले हैं। इस एजेंसी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए एक बड़ी सियासी लहर का संकेत दिया है। इसके अनुसार, भाजपा को 178 से 208 सीटों का भारी बहुमत मिल सकता है। वहीं, सत्ताधारी टीएमसी का ग्राफ गिरकर मात्र 85 से 110 सीटों तक सिमटने का अनुमान है। इस पोल की खास बात यह है कि इसमें अन्य दलों का खाता भी नहीं खुलता दिख रहा है।

इन सभी सर्वे के बीच पीपल्स पल्स ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सत्ता में शानदार वापसी का भरोसा जताया है। इसके आंकड़ों के मुताबिक, टीएमसी 177 से 187 सीटें जीतकर फिर से सरकार बना सकती है। यहां भाजपा को 95 से 110 सीटों के साथ विपक्ष में बैठना पड़ सकता है, जबकि अन्य के खाते में एक से चार सीटें जा सकती हैं।

चाणक्य स्ट्रैटजीज के पूर्वानुमान में भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर दिखाई गई है। यहां भाजपा को 150 से 160 सीटें और टीएमसी को 130 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है। दूसरी ओर, पोल डायरी ने भी भाजपा को स्पष्ट बढ़त दी है। इस एजेंसी के मुताबिक, भाजपा 142 से 171 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर सकती है। वहीं टीएमसी को नुकसान के साथ 99 से 127 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

पीमारक्यू के सर्वे ने बंगाल में सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी करते हुए भाजपा को बड़ी बढ़त दी है। इस सर्वे के अनुसार, भाजपा 150 से 175 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना सकती है, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी 118 से 138 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। अगर ये आंकड़े सही साबित हुए, तो बंगाल की राजनीति में एक नया इतिहास रचा जाएगा।

दूसरी तरफ, जनमत पोल्स की रिपोर्ट पीमारक्यू के बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रही है। जनमत के अनुसार, ममता बनर्जी का जादू बरकरार है और टीएमसी 195 से 205 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ वापसी कर रही है, जबकि भाजपा को महज 80 से 90 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। दोनों एजेंसियों के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर होने की वजह से फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि 4 मई को ‘दीदी’ का किला बचेगा या कमल खिलेगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल में जेवीसी के आंकड़े राज्य में बेहद कड़ा मुकाबला दिखा रहे हैं। इस सर्वे के अनुसार, भाजपा को 138 से 159 सीटें मिलने का अनुमान है, जो उसे बहुमत के आंकड़े के करीब खड़ा कर रहा है। दूसरी ओर, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस भी ज्यादा पीछे नहीं है। टीएमसी को 131 से 152 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। अन्य दलों के खाते में दो से चार सीटें जा सकती हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि बंगाल में मुकाबला नेक-टू-नेक है। जहां भाजपा मामूली बढ़त के साथ सत्ता के करीब पहुंचती दिख रही है, वहीं टीएमसी की पकड़ भी मजबूत बनी हुई है।

कुल मिलाकर देखें तो अधिकांश एजेंसियां भाजपा को बहुमत के करीब मान रही हैं। लेकिन पीपल्स पल्स और जनमत पोल्स के आंकड़े टीएमसी समर्थकों में उम्मीद जगा रहे हैं। राज्य में अन्य पार्टियों की भूमिका नगण्य नजर आ रही है। पोल डायरी और चाणक्य स्ट्रैटजीज के अनुसार अन्य को पांच से 10 सीटें मिल सकती हैं। अब सभी की नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं कि क्या बंगाल में ‘परिवर्तन’ होगा या ‘दीदी’ का जादू कायम रहेगा।

वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा त्रिपाठी ने बंगाल चुनाव के एग्जिट पोल पर विश्लेषण करते हुए कहा है कि इस बार भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी के लिए सत्ता बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि मुस्लिम वोटों के बिखराव की जो चर्चा हुमायूं कबीर की वजह से हो रही थी, वह अब थमती नजर आ रही है। पूर्णिमा त्रिपाठी के अनुसार, ममता बनर्जी अपने गढ़ को बचाने में सफल रह सकती हैं, लेकिन राज्य में मुकाबला बेहद कांटे का है और ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा का सियासी सफर बेहद चौंकाने वाला रहा है, जहां पार्टी 2016 में मात्र तीन सीटों पर सिमटी थी, वहीं 2021 के पिछले चुनाव में उसने जबरदस्त छलांग लगाते हुए 77 सीटों पर कब्जा कर ममता बनर्जी के दुर्ग को हिला दिया था। अब 2026 के ताजा एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। यह सस्पेंस गहरा गया है कि क्या भाजपा अपनी 77 सीटों की पिछली बढ़त को बहुमत में तब्दील कर पाएगी या ममता बनर्जी का गढ़ अभेद्य बना रहेगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 148 है। पिछले यानी 2021 के चुनाव परिणामों पर नज़र डालें तो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए 215 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने 2016 की अपनी महज 3 सीटों से लंबी छलांग लगाकर 77 सीटों पर कब्जा जमाया था और मुख्य विपक्षी दल बनी थी। वहीं, वाम मोर्चा और कांग्रेस के गठबंधन संयुक्त मोर्चा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था।

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