Hanuman Jayanti 2026: आज या कल, कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती? नोट करें पूजन का शुभ मुहूर्त

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हनुमान जयंती का हिंदुओं में बड़ा धार्मिक महत्व है. इस दिन को भगवान हनुमान की जयंती के रूप में मनाया जाता है क्योंकि उनका जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था. भक्त इस दिन को बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाते हैं. बजरंगबली का जन्म राजा केसरी और माता अंजनी से हुआ था. तो आइए ज्योतिर्विद प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि, कब मनाया जाएगा हनुमान जयंती का पर्व.

हनुमान जयंती का पावन पर्व हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था. हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में यह मान्यता भी है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था. इसलिए वहां कार्तिक में भी हनुमान जयंती मनाई जाती है. लेकिन ज्यादातर जगहों पर चैत्र पूर्णिमा को ही हनुमान जयंती मनाई जाती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाते हैं. उन्होंने वानर रूप में जन्म लेकर अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया. इसी कारण उन्हें भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त कहा जाता है. इस साल हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जाएगी.

पंचांग के मुताबिक, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा.

इस साल हनुमान जयंती पर दो मुहूर्त प्राप्त होंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 अप्रैल को हनुमान जयंती पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है. इसके बाद शाम को 6 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 6 मिनट तक पूजा का दूसरा मुहूर्त रहेगा. क्योंकि हनुमान जयंती का पूजन अभिजीत मुहूर्त में सबसे विशेष होता है इसलिए दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है.

इस साल हनुमान जयंती पर ध्रुव योग और हस्त नक्षत्र का संयोग रहने वाला है. ध्रुव योग सूर्योदय से लेकर दोपहर 2 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. इसके बाद व्याघात योग शुरू हो जाएगा. फिर शाम को 5 बजकर 38 मिनट तक हस्त नक्षत्र भी रहने वाला है. इसके बाद चित्रा नक्षत्र लग जाएगा.

हनुमान जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी को स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल से स्नान कराएं, तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें. हनुमान जी को सिंदूर और घी अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. इसके साथ ही लाल फूल, जनेऊ और माला चढ़ाएं. भोग में गुड़-चना और मौसमी फल जैसे केला, सेब या अंगूर चढ़ाएं. इसके बाद बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. समय हो तो सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं. अंत में हनुमान जी की आरती करें और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें. पूजा के बाद प्रसाद को ज्यादा से ज्यादा लोगों में बांटें.

हनुमान जयंती के दिन उनकी पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन भक्त हनुमान जी का ध्यान करने के लिए कई मंत्रों का जाप करते हैं.

एक प्रसिद्ध मंत्र है- ”मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”

इस मंत्र में हनुमान जी की विशेषताओं का वर्णन किया गया है कि वे मन की तरह तेज गति से चलने वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ और भगवान राम के दूत हैं. ऐसा भी माना जाता है कि कलियुग में भी हनुमान जी का अस्तित्व है और जहां-जहां राम कथा होती है, वहां वे किसी न किसी रूप में जरूर पहुंचते हैं.

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