Friday, June 19, 2026
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SPORTS : ‘वैभव को कैसे आउट करें?’ 15 साल का खिलाड़ी बना गेंदबाजों के लिए सिर दर्द, जोफ्रा आर्चर ने दी चेतावनी

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आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर में राजस्थान ने हैदराबाद को 47 रनों से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। वैभव सूर्यवंशी के 97 रनों के बाद जोफ्रा आर्चर ने पावरप्ले में 3 विकेट लेकर जीत पक्की की। मैच के बाद जब आर्चर से पूछा गया कि वैभव को आउट करने के लिए कहां गेंदबाजी करनी चाहिए।

न्यू चंडीगढ़: आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद को 47 रनों से करारी शिकस्त देकर राजस्थान रॉयल्स ने क्वालीफायर-2 में अपनी जगह पक्की कर ली है। बुधवार को खेले गए इस नॉकआउट मुकाबले में जहां एक तरफ 15 साल के ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने 29 गेंदों में 97 रनों की तूफानी पारी खेलकर सनसनी मचाई, वहीं दूसरी तरफ इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने अपनी आग उगलती गेंदों से हैदराबाद के धाकड़ बैटिंग ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया। मैच के बाद जोफ्रा आर्चर ने न सिर्फ टीम की जीत पर बात की, बल्कि वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक ऐसा रहस्यमयी बयान दिया जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

‘आईपीएल के बाद बताऊंगा…’ आर्चर का वो जवाब जिसने सबको चौंकाया
मैच खत्म होने के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में जोफ्रा आर्चर से वो सवाल पूछा गया जो इस समय दुनिया के हर क्रिकेट कप्तान और गेंदबाज के दिमाग में घूम रहा है, ‘आखिर वैभव सूर्यवंशी को गेंदबाजी कहां की जाए कि उन्हें आउट किया जा सके?’ इस सवाल पर आर्चर के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान तैर गई, लेकिन उन्होंने अपनी ही टीम के इस सिक्सर किंग का सीक्रेट खोलने से साफ मना कर दिया। आर्चर ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मैं आपको इसका जवाब इस आईपीएल सीजन के खत्म होने के बाद दूंगा।’ आर्चर का यह मजेदार और रहस्यमयी जवाब यह साफ दिखाता है कि वैभव की बल्लेबाजी का तोड़ फिलहाल किसी भी गेंदबाज के पास नहीं है, और राजस्थान रॉयल्स इस खुफिया रणनीति को टूर्नामेंट के अंत तक छिपाकर रखना चाहती है।

वैभव के लिए आर्चर की खास तारीफ
जोफ्रा आर्चर ने वैभव सूर्यवंशी की इस अविश्वसनीय पावर-हिटिंग और टैलेंट की खुलकर तारीफ की। वैभव की इस पारी के बारे में बात करते हुए आर्चर ने कहा, ‘उसे बल्लेबाजी करते देखना बेहद रोमांचक था। वह जितने ज्यादा रन बनाएगा, हमारे पास डिफेंड करने के लिए उतना ही बड़ा स्कोर होगा। जिस तरह की उसकी फॉर्म है, वह आने वाले मैचों में 150 रन भी बना सकता है।’

मैदान पर आर्चर का भी दिखा पुराना खूंखार रूप
भले ही पूरी लाइमलाइट वैभव की 12 छक्कों वाली पारी बटोर ले गई हो, लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद जैसी खतरनाक और विस्फोटक बैटिंग लाइन-अप की कमर तोड़ने का काम अकेले जोफ्रा आर्चर ने ही किया। आर्चर ने पावरप्ले के अंदर ही हैदराबाद के तीन सबसे बड़े मैच-विनर्स को पवेलियन भेजकर मैच को पूरी तरह राजस्थान की झोली में डाल दिया था। आर्चर ने अपनी तेज रफ्तार और सटीक उछाल से अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड और ईशान किशन को क्रीज पर टिकने ही नहीं दिया और तीनों को सस्ते में आउट कर दिया। हालांकि डेथ ओवरों में आर्चर थोड़े महंगे साबित हुए और उनका स्पेल 3/58 का रहा, लेकिन शुरुआती तीन झटकों ने हैदराबाद को मुकाबले से पूरी तरह बाहर कर दिया था।

पावरप्ले के खेल पर क्या बोले जोफ्रा आर्चर?
अपनी इस मैच जिताऊ गेंदबाजी पर बात करते हुए आर्चर ने बेहद शांत अंदाज में कहा, ‘आमतौर पर जो टीम पावरप्ले में सबसे ज्यादा विकेट लेती है, वही मैच जीतती है और आज हमने वही किया। सनराइजर्स हैदराबाद के टॉप ऑर्डर को गेंदबाजी करते समय आपको बस अपने नर्व्स को काबू में रखना होता है। उस समय आपकी अच्छी और बुरी दोनों गेंदें बाउंड्री के बाहर जा रही होती हैं, इसलिए आपको बस अपनी लाइन पर टिके रहना होता है।’ बता दें राजस्थान रॉयल्स का अगला मुकाबला गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेला जाएगा। इस मैच को जीतकर वह फाइनल में जाना चाहेंगे।

BUSINESS : चांदी दो दिन में ₹10,000 सस्ती, ₹2.61 लाख पर आई:सोना ₹2,800 सस्ता हुआ, 10 ग्राम ₹1.56 लाख का बिक रहा

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 27 मई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 1 किलो चांदी की कीमत 5,296 रुपए कम होकर 2.61 लाख रुपए पर आ गई है।

10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 1,539 रुपए गिरकर 1.56 लाख रुपए हो गया है। चांदी की कीमत 2 दिन में 10 हजार और 2,800 रुपए कम हो चुकी है।

सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.56 लाख तक

सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है।

शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹1.33 लाख
ऑलटाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख (सिर्फ एक महीने में भारी उछाल)
मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक 20 हजार सस्ता हो चुका है।
चांदी की कीमतों में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.61 लाख तक

चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑलटाइम हाई से काफी नीचे आई है।

शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹2.30 लाख
ऑलटाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹3.86 लाख (ऐतिहासिक बढ़त)
गिरावट का आंकड़ा: पिछले 118 दिन में चांदी ₹1.25 लाख सस्ती हो गई है

गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा

आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है:

कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे।
प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

  1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
  2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें।

BUSINESS : दांव पर पैसा लगाया तो खेल जुआ ही माना जाएगा… सुप्रीम कोर्ट का ऑनलाइन गेमिंग-फैंटेसी स्पोर्ट्स पर बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को तगड़ा झटका देते हुए केवल प्लेटफॉर्म फीस या ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू पर टैक्स लगाने की दलील को खारिज कर दिया है. अदालत ने साफ किया कि जीएसटी (GST) यूजर्स द्वारा दांव पर लगाई गई पूरी शुरुआती रकम पर ही वसूला जाएगा. कोर्ट के मुताबिक जब खेल में पैसा दांव पर लगता है तो वह सट्टेबाजी के दायरे में आ जाता है. इसके साथ ही पिछली तारीख से टैक्स वसूलने का फैसला भी बरकरार रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और फैंटेसी स्पोर्ट्स पर 28% जीएसटी (GST) लगाने के सरकार के फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है. कोर्ट ने इसके खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ किया कि जब अनिश्चित नतीजों पर पैसा लगाया जाता है तो ‘स्किल-बेस्ड’ (कौशल आधारित) गेम भी सट्टेबाजी और जुए जैसा ही रूप ले लेते हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इसे पिछली तारीख से लागू करने की मंजूरी दे दी है और कर्नाटक हाई कोर्ट के गेम्सक्राफ्ट वाले पुराने फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है.

ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए भारी-भरकम जीएसटी (GST) टैक्स नोटिस को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने केंद्रीय माल और सेवा कर (CGST) अधिनियम के प्रावधानों, राज्य जीएसटी कानूनों और इससे जुड़े नियमों की संवैधानिक वैधता को पूरी तरह बरकरार रखा है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों द्वारा दायर की गई सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया.

इस पूरे कानूनी विवाद में गेमिंग कंपनियों का सबसे मुख्य और मजबूत तर्क यह था कि टैक्स का आकलन केवल उनके ‘ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू’ (GGR) यानी प्लेटफॉर्म फीस पर होना चाहिए. प्लेटफॉर्म फीस वह मामूली कमीशन होता है जो कंपनियां गेम आयोजित करने के बदले यूजर्स से वसूलती हैं. कंपनियों का कहना था कि यूजर्स द्वारा गेम खेलने के लिए पूल में जमा की गई पूरी रकम पर टैक्स लगाना उनके कारोबार को पूरी तरह तबाह कर देगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि टैक्स पूरी दांव राशि पर ही लगेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी. कोर्ट ने कहा कि कोई खेल कौशल आधारित है या किस्मत आधारित, इस बात से सट्टेबाजी और जुए की परिभाषा तय नहीं होती. अगर किसी भी खेल में किसी अनिश्चित परिणाम के ऊपर पैसा दांव पर लगाया जा रहा है तो जीएसटी के नजरिए से वह लेन-देन पूरी तरह सट्टेबाजी और जुए के चरित्र जैसा ही माना जाएगा. इसके अलावा कोर्ट ने साल 2023 के जीएसटी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करने के सरकार के अधिकार को भी सही माना, जिससे कंपनियों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं.

ऑनलाइन गेमिंग फैसले की 5 मुख्य बातें

  • कंपनियों की मुख्य दलील खारिज: कोर्ट ने कंपनियों की उस मांग को ठुकरा दिया जिसमें केवल ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) या प्लेटफॉर्म फीस पर टैक्स लगाने की बात कही गई थी.
  • पूरी रकम पर लगेगा 28% टैक्स: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब गेम खेलने के लिए यूजर्स द्वारा दांव पर लगाई गई पूरी शुरुआती रकम (Full Amount Staked) पर 28% जीएसटी देना होगा.
  • पैसा लगते ही खेल बना ‘जुआ’: अदालत ने साफ किया कि अगर किसी भी अनिश्चित नतीजे पर पैसा दांव पर लगाया जाता है, तो टैक्स के उद्देश्य से वह खेल सट्टेबाजी और जुए की श्रेणी में ही आएगा.
  • पिछली तारीख से टैक्स वसूलने को मंजूरी: कोर्ट ने साल 2023 के जीएसटी संशोधनों को ‘स्पष्टीकरण’ मानते हुए इसे पिछली तारीख (Retrospective) से लागू करने की वैधता पर मुहर लगा दी है.
  • कानून पूरी तरह संवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट ने CGST एक्ट के प्रावधानों, राज्यों के जीएसटी कानूनों और नियमों को संवैधानिक रूप से पूरी तरह वैध और सही ठहराया है.
    गेमिंग इंडस्ट्री पर बुरा असर
    सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत के तेजी से बढ़ते ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. कंपनियों का पूरा बिजनेस मॉडल ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) पर आधारित था, जहां वे कुल जमा राशि का एक छोटा हिस्सा (लगभग 10% से 15%) प्लेटफॉर्म फीस के रूप में कमाती थीं. अब पूरी दांव राशि पर 28% जीएसटी लगने से गेमिंग कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा. इसका सीधा असर यूजर्स पर पड़ेगा क्योंकि अब उन्हें गेम खेलने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे और जीतने वाली इनामी राशि में भी कमी आ सकती है.
    कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो कोर्ट ने गेम ऑफ स्किल और गेम ऑफ चांस के बीच के पुराने अंतर को टैक्स के मोर्चे पर धुंधला कर दिया है. अब तक कंपनियां कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर खुद को सट्टेबाजी से अलग बताती थीं, लेकिन नए फैसले ने साफ कर दिया है कि जहां वित्तीय जोखिमऔर अनिश्चित परिणाम जुड़े हैं, वहां टैक्स की दरें जुए के समान ही होंगी. इसके अलावा, पिछली तारीख से टैक्स लागू होने की मंजूरी मिलने के बाद कंपनियों के ऊपर पहले से जारी अरबों रुपये के टैक्स डिमांड नोटिस का भूत फिर से जी उठा है, जिससे कई स्टार्टअप्स के बंद होने या विदेशी निवेश के रुकने का खतरा पैदा हो गया है.
    आनलाइन गेमिंग पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सवाल-जवाब
    : ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की सुप्रीम कोर्ट में टैक्स को लेकर क्या मुख्य मांग थी?

गेमिंग कंपनियों की मुख्य मांग थी कि जीएसटी (GST) केवल उनके ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) या प्लेटफॉर्म फीस पर ही वसूला जाना चाहिए. उनका तर्क था कि यूजर्स द्वारा दांव पर लगाई गई कुल राशि उनकी कमाई नहीं है, इसलिए उस पर टैक्स लगाना गलत है.

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों की इस दलील को किस आधार पर खारिज कर दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जब किसी अनिश्चित परिणाम वाले खेल में पैसा दांव पर लगाया जाता है, तो वह लेन-देन जीएसटी के दायरे में सट्टेबाजी और जुए जैसा ही माना जाता है. इसलिए टैक्स पूरी दांव राशि पर ही देय होगा.

इस फैसले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की किस बेंच ने की और किन कानूनों को वैध माना?

इस मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने की. कोर्ट ने केंद्रीय माल और सेवा कर (CGST) अधिनियम के प्रावधानों, विभिन्न राज्यों के जीएसटी कानूनों और इससे जुड़े नियमों की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया.

कोर्ट ने ‘गेम ऑफ स्किल’ (कौशल का खेल) को लेकर क्या अहम टिप्पणी की है?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई खेल स्किल-बेस्ड है या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. टैक्स के नजरिए से महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या उस खेल के पीछे पैसा दांव पर लगाया जा रहा है. पैसा लगते ही वह सट्टेबाजी के चरित्र का हो जाता है.

साल 2023 के जीएसटी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करने पर कोर्ट का क्या रुख रहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के जीएसटी संशोधनों (नियम 31B और 31C) को पिछली तारीख (Retrospective) से लागू करने के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने कहा कि ये संशोधन केवल स्पष्टीकरण और व्याख्या के रूप में थे, इसलिए इन्हें पहले से लागू माना जाएगा.

डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें

BUSINESS : आईटीआर-2 फॉर्म से आयकर रिटर्न भरना शुरू; बकरीद पर आज बंद रहेंगे शेयर बाजार

आयकर विभाग ने निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर-2 फॉर्म की ऑनलाइन फाइलिंग सुविधा शुरू कर दी है। करदाता अब ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। यह फॉर्म मुख्य रूप से उन व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए होता है, जिनकी आय वेतन, मकान किराया या पूंजीगत लाभ जैसे स्रोतों से होती है। आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 निर्धारित की गई है।

बकरीद पर आज बंद रहेंगे शेयर बाजार
बकरीद की छुट्टी के कारण आज घरेलू शेयर बाजार बंद रहेंगे। बीएसई और एनएसई के छुट्टियों के कैलेंडर के अनुसार, बृहस्पतिवार, 28 मई को इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव, करेंसी डेरिवेटिव खडों में कारोबार बंद रहेगा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) सुबह के सत्र के लिए बंद रहेगा। शाम पांच बजे से इसमें कारोबार शुरू होगा। घरेलू एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग शुक्रवार को फिर से शुरू होगी। अगली छुट्टी मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार, 26 जून को रहेगी।

ह्यूंडई ने 12,800 रुपये बढ़ाई कारों की कीमत
ह्यूंडई मोटर इंडिया ने वाहनों की कीमतों में 12,800 रुपये तक बढ़ोतरी का एलान किया है। कंपनी के अनुसार, यह मूल्य वृद्धि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, इनपुट लागत में इजाफा और परिचालन खर्च बढ़ने के कारण की जा रही है। नई कीमतें विभिन्न मॉडलों पर अलग-अलग लागू होंगी। कंपनी ने इससे पहले 8 अप्रैल, 2026 को भी अपने पूरे पोर्टफोलियो में औसतन एक फीसद तक कीमत बढ़ाने की घोषणा की थी।

जियो ने लॉन्च किया नया ओटीटी प्लान
रिलायंस जियो ने 200 रुपये का नया ओटीटी पास प्लान पेश किया है। इसमें इंटरनेट डाटा के साथ लाइव टीवी और 15 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की सुविधा मिलेगी। कंपनी के मुताबिक, इस प्लान के जरिये मिलने वाली सुविधाओं की कुल कीमत करीब 1,500 रुपये प्रति माह के बराबर है। इसकी वैधता 28 दिनों की है। इसमें यूट्यूब की प्रीमियम सर्विस भी मिलेगी, जिससे यूजर्स विज्ञापन-मुक्त वीडियो देख सकेंगे। 30जीबी 4जी के साथ असीमित 5जी डाटा भी मिलेगा।

WORLD : ‘अगर मैं डील करूंगा, तो वह बेहतरीन होगी’, ईरान के साथ समझौते पर बोले ट्रंप; ओबामा पर कसा तंज

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी सरकार ईरान के साथ कोई समझौता करती है तो वह ओबामा प्रशासन की डील जैसी नहीं होगी। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी संभावित डील अमेरिका के हितों और वैश्विक सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी जारी है और कोई अंतिम समझौता तय नहीं हुआ है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अगर उनकी सरकार ईरान के साथ कोई समझौता करती है तो वह “अच्छा और सही समझौता” होगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में हुए परमाणु समझौते पर निशाना साधते हुए कहा कि उस डील ने ईरान को भारी मात्रा में नकदी दी और परमाणु हथियार तक पहुंचने का खुला रास्ता दिया। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी संभावित डील पूरी तरह इसके उलट होगी और अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी।

ओबामा की डील पर ट्रंप ने क्या आरोप लगाए?
ट्रंप ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ जो समझौता किया था, वह अमेरिका के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। उनके मुताबिक उस डील से ईरान को आर्थिक फायदा मिला और उसने अपनी परमाणु गतिविधियों को आगे बढ़ाने का मौका हासिल किया। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ऐसी कोई गलती नहीं दोहराएगी। उन्होंने साफ कहा कि वह “खराब समझौते” नहीं करते और उनकी प्राथमिकता अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता होगी। ट्रंप ने अपने विरोधियों पर भी निशाना साधा और कहा कि जो लोग इस संभावित समझौते की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें अभी इसकी पूरी जानकारी ही नहीं है।

क्या अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है नई डील?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि ईरान के साथ संभावित समझौता अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ट्रंप के मुताबिक, अभी तक किसी ने इस डील को देखा नहीं है और न ही इसके सभी बिंदु तय हुए हैं। इसके बावजूद कुछ लोग लगातार आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगी और हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा।

ईरान को लेकर दुनिया की नजर क्यों बनी हुई है?
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों को आशंका रही है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जबकि ईरान हमेशा अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है। ऐसे में ट्रंप के बयान को काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच नई डील होती है तो उसका असर पश्चिम एशिया की राजनीति, वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

HEALTH : देश में मौत का सबसे बड़ा कारण बना हृदय रोग, हर तीन में एक जान दिल की बीमारी से जा रही

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जनगणना महारजिस्ट्रार की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा 32.1 फीसदी मौतें हृदय रोगों के कारण हो रही हैं। उत्तर भारत में स्थिति सबसे गंभीर पाई गई है। रिपोर्ट में श्वसन रोग, मधुमेह, पाचन तंत्र रोग और तपेदिक को भी मौत की बड़ी वजह बताया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खराब जीवनशैली और तनाव के कारण आने वाले वर्षों में यह स्वास्थ्य संकट और बढ़ सकता है।

भारत में बदलती जीवनशैली, तनाव, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। जनगणना महारजिस्ट्रार की ‘भारत में मृत्यु के कारण 2022-24’ रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में सबसे ज्यादा 32.1 फीसदी मौतें हृदय रोगों के कारण हो रही हैं। यानी हर तीन में से एक व्यक्ति की मौत दिल से जुड़ी बीमारी की वजह से हो रही है। रिपोर्ट ने यह भी दिखाया कि उत्तर भारत में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते रोकथाम और जागरूकता पर काम नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह संकट और बड़ा हो सकता है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं हृदय रोग के मामले?
रिपोर्ट के अनुसार हृदय रोग देश में मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। उत्तर भारत में दिल की बीमारी से मौत का आंकड़ा 35.1 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि मध्य भारत में यह 24.1 फीसदी है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार तनाव, धूम्रपान, शराब, जंक फूड, मोटापा और व्यायाम की कमी इसके बड़े कारण हैं। कम उम्र में भी लोगों में ब्लड प्रेशर और डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर दिल पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों के साथ अब गांवों में भी हृदय रोग तेजी से फैल रहे हैं।

किन बीमारियों से हो रही सबसे ज्यादा मौतें?
रिपोर्ट में हृदय रोग के बाद कई अन्य गंभीर बीमारियों को भी मौत का बड़ा कारण बताया गया है। श्वसन रोगों से 6 फीसदी, पाचन तंत्र रोगों से 5.9 फीसदी और श्वसन संक्रमण से 5.7 फीसदी मौतें हो रही हैं। मधुमेह यानी डायबिटीज से होने वाली मौतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। दक्षिण भारत में डायबिटीज से मौत का आंकड़ा सबसे ज्यादा 4.8 फीसदी दर्ज किया गया है। वहीं अज्ञात बुखार, चोट और जनन-मूत्र संबंधी रोग भी बड़ी वजह बन रहे हैं। रिपोर्ट में तपेदिक यानी टीबी को भी गंभीर खतरा बताया गया है, जिससे कुल 2.6 फीसदी मौतें हो रही हैं।

क्या पुरुष और महिलाओं में फर्क दिखा?
रिपोर्ट में पुरुषों और महिलाओं के बीच भी बीमारी के असर में अंतर सामने आया है। पाचन तंत्र रोगों से पुरुषों में 7.7 फीसदी मौतें दर्ज की गईं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 3.4 फीसदी रहा। जनन-मूत्र संबंधी रोगों से पुरुषों में 3.8 फीसदी और महिलाओं में 2.9 फीसदी मौतें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों में धूम्रपान, शराब और तनाव ज्यादा होने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं महिलाओं में स्वास्थ्य जांच को लेकर लापरवाही भी चिंता का विषय बनी हुई है।

क्या बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से बदली तस्वीर?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कम उम्र में होने वाली मौतों में कमी आई है और अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा उम्र तक जीवित रह रहे हैं। इसका कारण बेहतर इलाज, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार माना गया है। हालांकि बुजुर्गों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में अस्पष्ट कारणों से मौतें ज्यादा दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

क्या सुझाव दिए गए हैं?
विशेषज्ञों ने कहा है कि हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने के लिए मजबूत हस्तक्षेपकारी रणनीतियां अपनानी होंगी। लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित भोजन, व्यायाम और तनाव कम करने की आदत अपनानी होगी। रिपोर्ट में बच्चों और कम उम्र के लोगों की मौत रोकने के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जागरूकता और रोकथाम पर जोर दिया जाए तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं।

NATIONAL : सहारनपुर से 4 आतंकवादी ग‍िरफ्तार, लखनऊ-नोएडा सह‍ित कई शहरों में अस्पताल-स्कूलों को बम से उड़ाने की थी साज‍िश

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आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बुधवार को सहारनपुर से चार आतंकियों को गिरफ्तार किया है। चारों आतंकी पाकिस्तानी गैंगेस्टर शहजाद भट्टी व आबिद जट के लिए स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे। इन्हें लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद सहित अन्य शहरों में स्कूलों व अस्पतालों को बम से उड़ाने का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए आतंकियों ने कई स्कूलों व अस्पतालों की रेकी भी की थी। साथ ही असलहों व विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए नोएडा में बैठक भी की थी।

एडीजी कानून एवं व्यवस्था अमिताभ यश ने बताया कि पाकिस्तानी गैंगेस्टर शहजाद भट्टी ने इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म इंस्टाग्राम व यू-ट्यूब के जरिए चारों आतंकियों को अपने साथ जोड़ा था। इन्हें एक राजनीतिक दल के कार्यालय को भी बम से उड़ाने का लक्ष्य दिया गया था। एटीएस थाने में इनके विरुद्ध देश विरोधी साजिश रचने के मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

NATIONAL : सिद्धारमैया आज मुख्यमंत्री पद से दे सकते हैं इस्तीफा, ब्रेकफास्ट मीटिंग पर टिकीं सभी की नजरें

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कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया का कार्यकाल आज को समाप्त होने की उम्मीद है, क्योंकि उनसे पद से इस्तीफा देने की अपेक्षा की जा रही है। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने स्पष्ट रूप से उनके उत्तराधिकारी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उनके उत्तराधिकारी बनने के लिए तैयार माने जा रहे हैं।

सिद्धारमैया ने आज सुबह अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ एक ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्यपाल थावर चंद गहलोत से अपना इस्तीफा सौंपने के लिए समय मांगा है। शिवकुमार, जिन्होंने बुधवार को दिल्ली में बैठकें की थी। गुरुवार सुबह बेंगलुरु लौटने और सिद्धारमैया की नाश्ता बैठक में भाग लेने की उम्मीद है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सिद्धारमैया गुरुवार को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। संभवतः दिन के दूसरे पहर में। कांग्रेस विधायक अशोक पट्टन, जो सिद्धारमैया के वफादार माने जाते हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री गुरुवार को लगभग 3 बजे इस्तीफा देंगे।

सिद्धारमैया मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अंत को लेकर चुप्पी साधे रहे और कहा कि वह गुरुवार को इस मुद्दे पर टिप्पणी करेंगे। हालांकि, कांग्रेस के भीतर भ्रम बना रहा क्योंकि कर्नाटक मामलों के एआईसीसी महासचिव प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों से कहा कि पार्टी ने नेतृत्व परिवर्तन पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

बुधवार शाम बेंगलुरु पहुंचने के बाद मीडिया से बात करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि एक दिन पहले दिल्ली में हुई बैठक में केवल आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के उम्मीदवारों पर विचार-विमर्श हुआ था। जबकि कोई अन्य निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने मीडिया से अटकलों में न पड़ने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के इस मुद्दे पर फैसला लेने में सक्षम है। जब भी हम इस मुद्दे पर कुछ तय करेंगे, मैं खुशी से आपको सूचित करूंगा और कहा कि अभी तक कांग्रेस विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई गई है।

बुधवार को इससे पहले, राज्य के लोक निर्माण विभाग मंत्री सतीश जारकीहोली, जो सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें चल रही हैं, लेकिन इसकी पुष्टि तभी होगी जब मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट बैठक में आधिकारिक घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि तब इस पूरे प्रकरण पर पूर्ण विराम लग जाएगा। हाईकमान ने क्या निर्देश जारी किए हैं। मुझे नहीं पता। हमें केवल (ब्रेकफास्ट) बैठक में ही पता चलेगा।

इस बीच, राज्य के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को केवल अटकल करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। वहीं, एआईसीसी महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बैठक के बाद उनका बयान आधिकारिक है और अंतिम होगा।

राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने कहा कि उन्हें दिल्ली की बैठकों में चर्चा किए गए विषयों और नेतृत्व परिवर्तन के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता, लेकिन मीडिया में बहुत अटकलें हैं।बुधवार भर कई कांग्रेस विधायक सिद्धारमैया से मिले। राज्य के कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल, जिन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। पाटिल ने कहा लेकिन सिद्धारमैया चुप रहे।

NATIONAL : भारत-बांग्लादेश सीमा पर अब घुसपैठ होगी नामुमकिन? सीएम शुभेंदु बोले- BSF को सौंपी 142.79 एकड़ जमीन

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बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने सीमा चौकियों और कंटीले तार की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को 142.79 एकड़ जमीन सौंप दी है।

मुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने बीएसएफ चौकियों और बाड़बंदी के निर्माण कार्य को तेज करने के लिए यह पहल की है।

सीएम शुभेंदु की अगुवाई वाली राज्य की नवगठित भाजपा सरकार ने 12 मई को हुई अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 45 दिनों के भीतर सीमा बाड़बंदी और उससे जुड़ी आधारभूत परियोजनाओं के लिए बीएसएफ को 600 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। इसी फैसले के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।

पहल के पहले चरण में 20 मई को पांच जिलों में खरीदी गई 43 एकड़ जमीन और 31.9 एकड़ निहित भूमि के स्वीकृति आदेश बीएसएफ को सौंपे गए थे।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में अवैध घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए दोहरी रणनीति की घोषणा की थी। इसमें तेजी से बाड़बंदी कराने और प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाने की बात कही गई थी।

बंगाल की भारत-बांग्लादेश सीमा 2217 किमी लंबी है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसमें से लगभग 1600 किमी क्षेत्र में पहले ही बाड़बंदी हो चुकी है, जबकि करीब 600 किमी हिस्सा अब भी खुला है।

NATIONAL : सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने SC में जजों नियुक्ति के लिए भेजे 5 नाम, जानें लिस्ट में कौन-कौन हैं शामिल?

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्ति के लिए 5 नामों की सिफारिश सरकार को भेजी है. जानिए लिस्ट में किन जजों और वरिष्ठ वकील का नाम शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 और 27 मई 2026 को हुई बैठकों में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने के लिए पांच नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है. इन नामों में अलग-अलग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट की एक वरिष्ठ वकील शामिल हैं. अब सरकार की मंजूरी के बाद इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. कॉलेजियम ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू का नाम सुप्रीम कोर्ट के लिए सुझाया है. इसके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेव और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अरुण पल्ली के नाम भी भेजे गए हैं.

इन चार जजों के अलावा सुप्रीम Court की वरिष्ठ वकील वी मोहना को भी सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई है. अगर सरकार इन नामों को मंजूरी देती है, तो ये सभी सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पद संभालेंगे. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम देश की न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़ा सबसे अहम पैनल माना जाता है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज शामिल होते हैं, जो अलग-अलग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों पर फैसला लेते हैं.

भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम के जरिए की जाती है. यह व्यवस्था सीधे संविधान में नहीं लिखी गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों के बाद यह प्रक्रिया लागू हुई. इसी सिस्टम के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर किया जाता है. कॉलेजियम सिस्टम में सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज मिलकर फैसला लेते हैं कि किसे जज बनाया जाए. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं. फिलहाल भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई हैं. सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्ति की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले हाई कोर्ट के वरिष्ठ जजों या अनुभवी वकीलों के नाम पर विचार किया जाता है. संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठ जज भी कुछ नाम सुझाते हैं.

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