Sunday, June 21, 2026
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6 मेहमानों के साथ डेस्टिनेशन वेडिंग, कपल के इस अनोखी शादी के मुरीद हुए लोग

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भारत में शादी का मतलब ढेर सारा खाना, खूब सारे मेहमान और जमकर नाच गाना। हालांकि काेरोना के बाद मेहमानों की संख्या में कुछ कमी आई है लेकिन क्या कोई 6 मेहमानों के साथ शादी करने की सोच सकता है। ऐसा किया है सेलेना रंधावा और जगदीप पन्नू ने जिन्होंने जयपुर में अपनी डेस्टिनेशन वेडिंग से लोगों की सोच ही बदल कर रख दी।

सच कहें तो हम भी इस अनोखी शादी के मुरीद हो गए है। इस कपल ने अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए अलग ही रास्ता अपनाया। हालांकि इन्होंने हर वह सेरेमनी आयोजित की जो बाकी शादियों में होती है । बस फर्क इतना था कि इन दोनों ने अपने खास 6 मेहमानों के साथ ही खुशियां बांटी । ईमानदारी से कहें तो दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार वालों के अलावा बाकी मेहमानों को रस्मों से नहीं बल्कि शादी के इंतजाम से मतलब होता है।शायद इसी बात को सोचते हुए कपल ने इस तरह की शादी करने का फैसला किया। जयपुर के बीचों-बीच एक शानदार बुटीक हेरिटेज होटल में हुई ये शादी समाज के लिए अलग मैसेज लेकर आई है। इस कपल ने हमें यह सिखा दिया कि खुशियां मनाने के लिए मेहमानों की बड़ी सूची की आवश्यकता नहीं होती है। अगर आप ऐसी शादी का सपना देख रहे हैं जिसमें सिर्फ़ जुड़ाव हो और तमाशा कम हो, तो सेलेना और जगदीप की जयपुर शादी आपके लिए प्रेरणास्रोत है!

अपनी शादी के स्वागत भोज में, इस जोड़े ने मैचिंग ब्लैक आउटफिट्स में सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। दुल्हन ने शानदार क्यूबिक लहंगा पहना, जिसके साथ बोल्ड तरुण तहिलियानी इयररिंग्स थे, जबकि दूल्हे ने स्लीक ब्लैक बंदगला पहना और इसे क्लासिक रखा।शदी के बात करें तो इस कपल ने एक खूबसूरत फूलों के मंडप के नीचे शपथ ली जो जितना रोमांटिक था उतना ही निजी भी था।

बिना किसी बड़ी भीड़ के, यह समारोह उनके लिए एक खूबसूरत निजी पल की तरह लगा। रिसेप्शन भी उतना ही शांत और अंतरंग था, जिसमें पारंपरिक राजस्थानी दावत और चारों ओर जगमगाती रोशनी थी। कल्पना कीजिए कि आप केवल उन लोगों के साथ हंस रहे हैं, खा रहे हैं और जश्न मना रहे हैं जो आपके लिए सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं – यही वह ऊर्जा है जो सेलेना और जगदीप अपनी शादी में लेकर आए थे।

“OLX पर बहुत सस्‍ती गाड़ी मिल रही है …”, पढ़ें इस Traffic Police की अपील

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सोशल मीडिया के दौर में जहां लोग अपना हुनर ​​दिखाकर लाखों रुपए कमा रहे हैं, वहीं कुछ गलत लोग इसका गलत इस्तेमाल भी करते नजर आ रहे हैं। हर दिन वे नया ढंग निकालकर भोले-भाले लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाते है।

ताजा मामला बटाला से सामने आया है जहां एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ठगों की ठगी का शिकार हो गया। ट्रैफिक पुलिस अधिकारी सुखदेव सिंह ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर उत्तराखंड नंबर की एक कार देखी, जिसकी कीमत 45 हजार रुपए थी। उन्होंने कहा कि चूंकि तस्वीरों में वाहन की स्थिति अच्छी थी, इसलिए उनसे संपर्क किया गया और फिर तस्वीरें भेजने वाले व्यक्ति ने 2,500 रुपए की Advance राशि की मांग की और 2,500 रुपए का भुगतान  Gpay के माध्यम से किया गया।

2500 रुपए के बाद उसने 21000 रुपए की मांग करते हुए कहा कि गाड़ी के कागजात आपके नाम पर बनते है। इसके बाद मुझे उसकी बातचीत के तरीके पर संदेह हुआ, इसलिए मैंने पैसे नहीं डाले। वह ठग मुझे फोन करता रहा, यहां तक ​​कि अपना नंबर भी बदलता रहा। उन्होंने बताया कि ठग ने अपने व्हाट्सएप पर सीमा पर तैनात सेना के एक जवान की फोटो पोस्ट कर दी थी, ताकि फोन करने वाले को लगे कि वह सेना में कार्यरत है। ट्रैफिक पुलिस ने कहा, “मैं लोगों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि ऐसे ठगों से बचें ताकि आप भी मेरी तरह इनका शिकार न बनें।”

महाकुंभ से जा रहे हैं Ayodhya तो जरा पढ़ें ये खबर, अभी-अभी आई जरूरी सूचना

अयोध्या धाम जाने वाले भक्तों के लिए जरूरी सूचना है। दरअसल,  श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी भक्तों के चरणों में प्रणाम कर अयोध्या में 15-20 दिन बाद आने की अपील कर रहे हैं।

महासचिव चंपत राय ने लेटर जारी कर कहा, “प्रयागराज में दिनांक 29 जनवरी को कुम्भ में मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान है। अनुमान है कि लगभग 10 करोड श्रद्धालु दिनांक 29 जनवरी को प्रयागराज में स्नान करेंगे। बहुत बड़ी संख्या में प्रयागराज से भक्तजन अयोध्या जी पहुंच रहे हैं। ट्रेन एवं सड़क दोनों प्रकार से भक्तजन प्रयाग से अयोध्या आ रहे हैं।  पिछले तीन दिनों से अयोध्या जी में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अयोध्या धाम की जनसंख्या एवं आकार को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इतनी अधिक संख्या में भक्तों को एक दिन में रामलला के दर्शन कराना बहुत कठिन है और इसी कारण भक्तों को परेशानी हो रही है। परिणाम स्वरूप किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए आवश्यक हो गया है कि व्यवस्थाओं में उपयुक्त परिवर्तन किए जाएँ। भक्तों को अधिक पैदल भी चलना पड़ रहा है।”

उन्होंने यह कहा कि मारा यह निवेदन है कि पास-पड़ोस के भक्तजन 15-20 दिन के पश्चात दर्शन करने हेतु अयोध्या जी पधारें ताकि बहुत दूर से आने वाले भक्त अभी सुविधा से प्रभु के दर्शन कर सकें। इससे सभी को सुविधा होगी। वसंत पंचमी के बाद फरवरी मास में काफी राहत रहेगी तथा मौसम भी अच्छा हो जाएगा। आसपास के भक्त यदि तब का कार्यक्रम बनाएं तो श्रेष्ठ रहेगा। इस निवेदन पर अवश्य विचार करें।

कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी यूपी एग्रीज: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (यूपी एग्रीज) परियोजना किसान और कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा। आईपीजी में परियोजना के शुभारंभ के मौके पर उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न का जो निर्यात होता है, उनमें तीसरे स्थान पर यूपी है। ऐसे में यूपी एग्रीज परियोजना प्रदेश के एक्सपोर्ट की संभावनाओं को आगे ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा। यह अन्नदाता किसानों और कृषि सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए अच्छी शुरुआत है। उन्होंने कहा कि चार हजार करोड़ की यूपी एग्रीज परियोजना में से 2,737 करोड़ का लोन विश्व बैंक और 1,166 करोड़ का अंशदान राज्य सरकार ने देने की व्यवस्था की है।

देश में लगभग 45 फीसदी भूमि कृषि योग्य हैः योगी
सीएम योगी ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य कृषि और उससे संबंधित सेक्टर को चिन्हित करना, प्रमुख फसलों की उत्पादकता में गुणात्मक वृद्धि, विशिष्ट कृषि उत्पादों, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और माकेर्ट सपोर्ट सिस्टम को विकसित करना है, जिससे अन्नदाताओं की आय में वृद्धि कर सके। यह परियोजना इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए नए अभियान को आगे बढ़ने की शुरुआत है। योगी ने कहा कि देश में लगभग 45 फीसदी भूमि कृषि योग्य है। इसमें से 75 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उत्तर प्रदेश में मौजूद है, जो सबसे उपयोगी और उर्वरा भूमि मानी जाती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश गेहूं, आलू, आम, अमरूद, मटर, मशरूम, तरबूज और शहद आदि के उत्पादन में देश में नंबर एक स्थान पर है। देश में जो सब्जी उत्पादन होता है, उसमें से सब्जी के उत्पादन की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी और फल उत्पादन में 11 प्रतिशत की हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश के पास है। उत्तर प्रदेश में जहां देश की 16 से 17 प्रतिशत जनसंख्या उत्तर प्रदेश में निवास करती है, वहीं खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 23 प्रतिशत से अधिक है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश को देश के फूड बॉस्केट के रूप में जाना जाता है।

6 वर्ष का होगा यह प्रोजेक्ट: योगी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परियोजना के पहले चरण में यूपी के आठ कमिश्नरी के 28 जनपद चुने गए हैं। यह प्रोजेक्ट 6 वर्ष का होगा। इसकी शुरुआत 2024-25 से प्रारंभ होकर 2029-30 तक यूपी में लागू होगी। ऐसे में एग्रीकल्चर की अभी जो प्रोडक्टिविटी है, इसमें 30 से 35 फ़ीसदी की अतिरिक्त वृद्धि करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश समग्र विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। इनमें कृषि और उससे संबंधित सेक्टर की प्रगति स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। यह कार्यक्रम उसी अभियान का एक हिस्सा है। इसमें उन्नाव में यूपीडा की इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर में केमपैक इंडिया द्वारा ग्रीन फील्ड मैन्युफैक्चरिंग इकाई का शिलान्यास कार्यक्रम भी शामिल है।1300 करोड रुपए की लागत का निवेश एसबीआई के तहत प्रदेश में आएगा। इसके अलावा मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए प्रदेश सरकार एवं यूएई के एक्वाब्रिज के मध्य करीब 4 हजार करोड़ के निवेश का एमओयू हुआ। वहीं डाटा बैंक की उपयोगिता किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन का एक कारक बनेगी।

घने कोहरे से ढका था Runway, लैंडिंग से ठीक पहले रास्‍ता भूल गया Pilot और फिर जो हुआ उसके बाद कांप उठी दुनिया

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यह घटना 28 जनवरी 2002 की है जो आज भी याद कर दिल दहला देती है। उस दिन टेम एयरलाइंस की फ्लाइट 120 ने इक्वाडोर के क्विटो से उड़ान भरी थी। विमान को तुलकान के टेनिएंटे कोरोनेल लुइस ए. मंटिला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करना था। इस फ्लाइट में कुल 94 लोग सवार थे जिसमें यात्री और क्रू मेंबर्स शामिल थे।

मौसम की गलत जानकारी बनी हादसे की वजह

टेकऑफ से पहले पायलट को बताया गया था कि तुलकान का मौसम बिल्कुल साफ है और लैंडिंग के लिए अनुकूल है लेकिन तुलकान पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है जहां मौसम अचानक बदल सकता है। जब तक फ्लाइट तुलकान पहुंची वहां घना कोहरा छा गया था। रनवे की एलाइनमेंट लाइट्स तक दिखाई नहीं दे रही थीं जिससे लैंडिंग करना चुनौतीपूर्ण हो गया।

पायलट ने लिया जोखिम भरा फैसला

फ्लाइट के कैप्टन 59 वर्षीय जॉर्ज एफ्रेन नोए और उनके फर्स्ट ऑफिसर 52 वर्षीय कार्लोस अल्फोंसो लोपेज़ ने स्थिति का आकलन किया। कैप्टन जॉर्ज के पास 12,000 घंटे की फ्लाइंग का अनुभव था इसलिए उन्हें भरोसा था कि वे विमान को सुरक्षित लैंड करा लेंगे। फर्स्ट ऑफिसर ने भी उनके फैसले का समर्थन किया।

विमान को रनवे की ओर बढ़ाया गया लेकिन घने कोहरे के कारण कैप्टन जॉर्ज को अंदाजा नहीं हुआ कि वे रनवे के बजाय एक पहाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं।

कुंबल ज्वालामुखी से टकराया विमान

लैंडिंग से कुछ सेकंड पहले पायलट को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने विमान को संभालने की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फ्लाइट 120 सुबह 10:23 बजे कुंबल ज्वालामुखी की ढलान से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि विमान में आग लग गई और सभी 94 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

कैसे हुई यह गलती?

जांच में सामने आया कि पायलट को घने कोहरे के कारण रनवे सही से दिखाई नहीं दिया। इसके चलते विमान गलत दिशा में चला गया और पहाड़ी से टकरा गया। अगर पायलट ने मौसम की स्थिति देखते हुए लैंडिंग को टालने का फैसला लिया होता तो शायद यह हादसा टल सकता था।

दुनिया के लिए सबक

यह हादसा पायलट और एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक सीख बन गया। मौसम की स्थिति को समझने और सही फैसले लेने का महत्व एक बार फिर स्पष्ट हुआ। हादसे के बाद विमानन सुरक्षा नियमों को और सख्त किया गया।

वहीं इस दुर्घटना ने न केवल 94 जिंदगियां लीं बल्कि विमानन इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया जो आज भी दुख और सीख दोनों का प्रतीक है।

ट्रैक्टर-ट्रॉली में Train का पहिया लगाकर… Track पर दौड़ाया, कटा 10 लाख का चालान

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औरैया में एक ट्रैक्टर ट्राली को रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के पहिये लगाकर गिट्टी डालने का काम करते हुए पकड़ा गया। यह ट्रैक्टर मालिक रेलवे ठेकेदारों से प्रति माह 85 हजार रुपये किराया लेता था। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी जुर्माना कार्रवाई की गई है जिसमें ट्रैक्टर ट्राली पर 10 लाख छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

चालक ने बताई पूरी कहानी

22 जनवरी की शाम को एआरटीओ सुधेश तिवारी कानपुर-इटावा हाईवे पर वाहन चेकिंग कर रहे थे जब उन्होंने मेहौली के पास एक ट्राली में ट्रेन का पहिया देखा। चालक से पूछताछ करने पर पता चला कि वह ट्रैक्टर ट्राली को लेकर राजस्थान जा रहा था और दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर फफूंद से अछल्दा स्टेशन तक का काम पूरा करके लौट रहा था।85 हजार रुपये प्रति माह किराया

ट्रैक्टर मालिक पप्पू राम जो राजस्थान के नागौर जिले का निवासी है ने बताया कि उसने दस साल पहले एक साधारण ट्रैक्टर ट्राली खरीदी थी। पांच साल पहले उसने उसमें ट्रेन के पहिये लगवाए थे और इसके बाद रेलवे ठेकेदारों के बीच इसकी मांग बढ़ गई। वह अब प्रति माह 85 हजार रुपये किराया लेकर काम करता था। पांच साल में उसने लगभग 50 लाख रुपये कमाए हैं। ट्रैक्टर ट्राली के ट्रेन के पहिये की वजह से वह आसानी से रेलवे ट्रैक पर चल पाता था।

10 लाख रुपये जुर्माना

चालक ने बताया कि जब ट्रैक का काम पूरा हो जाता था तो वह ट्रैक्टर ट्राली से ट्रेन का पहिया हटा देता था। लेकिन जब वह पहिया हटा रहा था तभी उसे पकड़ा गया। ट्राली से संबंधित कोई कागजात नहीं दिखा पाने पर एआरटीओ ने उस पर 10 लाख छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया और ट्रैक्टर ट्राली को सीज कर दिया।

आधिकारिक जानकारी और जुर्माने का विवरण

आरटीओ कानपुर और परिवहन कमिश्नर को इस मामले की जानकारी मिलने पर वे भी हैरान रह गए। 24 जनवरी को कमिश्नर ने एआरटीओ से जुर्माने की जानकारी ली। इस कार्रवाई में ट्रैक्टर ट्राली पर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसमें 9,63,500 रुपये जुगाड़ से ट्राली बनाने, प्रदूषण और स्पीड लिमिट डिवाइस के मामले में 10-10 हजार रुपये, फिटनेस के मामले में पांच हजार रुपये, बिना परमिट के चलाने पर 10 हजार रुपये और खतरनाक तरीके से ट्रैक्टर चलाने पर 2,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

बता दें कि यह कार्रवाई प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

किसान बच्चों की तरह पाली हुई फसल जलाने को मजबूर, जानें क्यों

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जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में लैवेंडर की खेती कर रहे किसान एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। दरअसल, लैवेंडर तेल की बिक्री में गिरावट और लगातार वित्तीय घाटे ने उन्हें अपनी फसल नष्ट करने पर मजबूर कर दिया है। अपनी आजीविका को दांव पर लगाते हुए किसानों को आगामी केंद्रीय बजट 2025 से बहुत उम्मीदें हैं।

डोडा के एक प्रसिद्ध लैवेंडर किसान भारत भूषण को 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया था। उन्होंने बिगड़ती स्थिति पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते कहा कि उन्होंने 2010 में लैवेंडर की खेती शुरू की थी। शुरुआती वर्षों में यह बहुत लाभदायक था। हालांकि, पिछले दो सालों से उनका लैवेंडर तेल नहीं बिक रहा है और वह घाटे में चल रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि उन्हें खेतों में अपनी फसल नष्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से 2025 के केंद्रीय बजट में डोडा के लैवेंडर किसानों के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया। संकट के बावजूद लैवेंडर की खेती में भूषण के योगदान को मान्यता मिलना जारी है।

अन्य किसानों ने भी इसी तरह की अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि इसका तुरंत कोई उपाय नहीं किया गया तो वे लैवेंडर की खेती को पूरी तरह से छोड़ने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार उनके मुद्दों को प्राथमिकता दे और उन्हें बाजार समर्थन प्रदान करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्हें आगामी बजट से बहुत उम्मीदें हैं।

गाजा की बर्बादी पर भी खुश हमास ! फिलीस्तीनियों की गाजा वापसी पर बोला- “ये इजरायल की बड़ी हार”

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इजरायल और हमास (Israel-Hamas war) के बीच युद्धविराम के बाद, गाजा (Gaza) के विस्थापित लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 15 महीने की जंग में 47,000 से अधिक फिलीस्तीनी नागरिक मारे गए और गाजा पट्टी की 23 लाख से अधिक आबादी में से 90 प्रतिशत लोग विस्थापित हो चुके हैं। इजरायल की बमबारी से गाजा पट्टी पूरी तरह तबाह हो चुकी है, और हमास की शीर्ष नेतृत्व को भी नुकसान उठाना पड़ा है। बावजूद इसके, इस आतंकवादी संगठन की अकड़ में कोई कमी नहीं आई है।

युद्धविराम के बाद, गाजा लौट रहे फिलीस्तीनियों की वापसी को हमास ने अपनी जीत करार दिया है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हमास और इस्लामिक जिहाद ने इसे इजरायल की नाकामी और फिलीस्तीनी लोगों की इच्छाशक्ति की जीत बताया। गाजा से लौट रहे फिलीस्तीनी नागरिकों की तस्वीरें सोमवार को वायरल हुईं, जहां सैकड़ों लोग अपने बोरिया-बिस्तर के साथ नेत्ज़रिम कॉरिडोर से पैदल अपने घरों की ओर लौट रहे थे। हमास ने कहा कि यह विस्थापन को चुनौती देने और अपनी जमीन से जुड़ाव का प्रतीक है।

उनके अनुसार, इजरायल फिलीस्तीनियों को अपने घरों से विस्थापित करने और उनकी इच्छाशक्ति को तोड़ने में नाकाम रहा है। यह पूरी स्थिति एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम से जुड़ी है, जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया और उसके बाद इजरायल ने अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस हमले में हजारों लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए। पहले इजरायल ने फिलीस्तीनी नागरिकों को उत्तरी गाजा लौटने से रोका, जिससे गाजावासियों के बीच प्रदर्शन और हिंसा का माहौल बना।

Google Maps ने एक शर्त पर मानी ट्रंप की बात, ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ का नाम बदलकर किया ‘Gulf of America’ लेकिन…

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गूगल मैप्स (Google Maps) ने घोषणा की है कि अमेरिकी यूजर्स के लिए ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ (Gulf of Mexico) को अब ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ (Gulf of America) के नाम से दिखाया जाएगा। यह बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक कार्यकारी आदेश के बाद किया गया है। इस आदेश में कई अमेरिकी स्थलों के नाम बदलने का निर्देश दिया गया था।

ट्रंप प्रशासन का आदेश
ट्रंप प्रशासन ने पिछले हफ्ते एक कार्यकारी आदेश जारी कर ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का निर्देश दिया। इसके अलावा, इस आदेश में अमेरिका के अन्य ऐतिहासिक स्थलों और स्थानों के नाम बदलने का भी जिक्र था। आदेश के बाद अमेरिकी आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि ये बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो गए हैं और “ज्योग्राफिक नेम्स सिस्टम” (Geographic Names System) इन बदलावों को जल्द ही पूरा करने की प्रक्रिया में है।

गूगल मैप्स का बयान  
गूगल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा, “हमारी लंबे समय से यह नीति है कि जब किसी आधिकारिक सरकारी स्रोत में नाम बदल दिए जाते हैं, तो हम उन्हें लागू करते हैं।”गूगल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बदलाव सिर्फ अमेरिकी यूजर्स के लिए होगा। मेक्सिको में ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ का नाम वही रहेगा। अन्य देशों में गूगल मैप्स पर दोनों नाम दिखाई देंगे ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ और ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’। “गूगल मैप्स पर नाम बदलने की प्रक्रिया हमेशा आधिकारिक सरकारी निर्देशों के अनुसार होती है।”

नाम बदलाव के पीछे का कारण 
इस कदम को ट्रंप प्रशासन के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने के एजेंडे का हिस्सा बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रशासन के दौरान कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनका उद्देश्य अमेरिकी इतिहास और पहचान को नया रूप देना रहा है।

 माउंट डेनाली का नाम बदला   
‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ का नाम बदलने के साथ, ट्रंप प्रशासन ने ‘माउंट डेनाली’ का नाम बदलकर ‘माउंट मैकिनली’ करने का आदेश भी जारी किया है। माउंट मैकिनली, जो उत्तर अमेरिका का सबसे ऊंचा पर्वत है, का नाम पहले राष्ट्रपति विलियम मैकिनली के सम्मान में रखा गया था।

 विवाद और प्रतिक्रिया  
इस फैसले ने काफी विवाद खड़ा किया है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम ट्रंप प्रशासन के “सांस्कृतिक युद्ध” का हिस्सा है, जो इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से फिर से लिखने का प्रयास कर रहा है।  मेक्सिको और अमेरिका के कई पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है। इनका कहना है कि ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ का नाम उस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, और इसे बदलना अनुचित है।  हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह बदलाव अमेरिका की शक्ति और विरासत को दर्शाने के लिए किया गया है।

मस्क के साथ मतभेद पर खुलकर बोले रामस्वामी, DOGE से निकालने के सवाल पर दिया सटीक जवाब (Video)

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विवेक रामस्वामी, जो पिछले हफ्ते एलन मस्क द्वारा नेतृत्व वाली Department of Government Efficiency (DOGE) से बाहर हो गए थे, ने मस्क के साथ किसी प्रकार के मतभेद पर खुलकर बात की।  उन्होंने  दोनों के बीच किसी भी  तरह के आपसी से इनकार करते हुए कहा कि उनके और मस्क के दृष्टिकोण में “अलग और पूरक” अंतर था, जो एजेंसी को चलाने के तरीके को लेकर था। यह एजेंसी फेडरल ब्यूरोक्रेसी को सुधारने के लिए बनाई गई थी। रामस्वामी ने कहा, “हम दोनों एक ही पृष्ठ पर थे।” Fox News के साथ एक साक्षात्कार में, 39 वर्षीय रामस्वामी ने कहा कि मस्क से बेहतर कोई नहीं हो सकता था, जो तकनीकी और डिजिटल दृष्टिकोण से DOGE का नेतृत्व कर सके। इसके साथ ही उन्होंने ओहायो राज्य के गवर्नर पद के लिए अपनी योजना का भी संकेत दिया।

जब Fox News के होस्ट जेसी वॉटर ने उनसे मस्क और उनके बीच किसी मतभेद के बारे में पूछा, तो रामस्वामी ने जवाब दिया, “यह गलत है। हम दोनों के दृष्टिकोण अलग थे, लेकिन पूरक थे। मैंने संवैधानिक कानून और विधायी दृष्टिकोण पर जोर दिया, जबकि मस्क ने तकनीकी दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। यह भविष्य का दृष्टिकोण है।” उन्होंने कहा, “जब आप संवैधानिक पुनरुत्थान की बात करते हैं, तो यह सिर्फ संघीय सरकार के माध्यम से नहीं होता। यह संघीयतावाद के माध्यम से होता है, जहां राज्य भी नेतृत्व करते हैं। और इस कार्य को करने के लिए मस्क से बेहतर कोई नहीं हो सकता।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या मस्क ने उन्हें निकाला, तो रामस्वामी ने इसका खंडन किया और मस्क के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “नहीं, हमारे बीच एक आपसी चर्चा हुई थी। हम एक ही पृष्ठ पर हैं। देश को बचाने में यह एक अकेली व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं होती, यह सभी का काम है। यही मैं चाहता हूं।”

रामस्वामी की यह सनसनीखेज विदाई “प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण” और MAGA समर्थकों के गुस्से के कारण हुई थी, जैसा कि Washington Report में बताया गया। यह घटना डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण के कुछ घंटे बाद हुई। DOGE का उद्देश्य संघीय खर्चों को कम करना, अधिशेष नियमों को घटाना और संघीय एजेंसियों का पुनर्गठन करना था। इस विभाग को संघीय सरकार के बाहर काम करने की उम्मीद थी, जैसा कि ट्रंप ने पिछले साल नवम्बर में कहा था।रामस्वामी का दृष्टिकोण था कि सरकारी परिवर्तन कानूनी ढांचे के भीतर किए जाएं। वह DOGE को संवैधानिक दृष्टिकोण से देख रहे थे, यह देखते हुए कि कौन सी एजेंसियों को बिना कांग्रेस की कार्रवाई के बंद किया जा सकता है और विभिन्न एजेंसियों के बजट प्रक्रिया और नियमों को कैसे सुधार सकते हैं।

मस्क का दृष्टिकोण तकनीकी था, जिसमें तकनीक और डेटा खनन का उपयोग DOGE के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जा रहा था, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है।इसके अलावा, रामस्वामी ने ओहायो गवर्नर पद के लिए अपनी योजनाओं का संकेत दिया और कहा कि जल्द ही एक घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं जल्द ही एक निर्वाचित पद के लिए दौड़ रहा हूं, इसके बारे में हम जल्द ही घोषणा करेंगे।”रामस्वामी, जो ओहायो के निवासी हैं, ने कहा, “हम पिछले 20 सालों में देखते हैं, सिलिकॉन वैली अमेरिकी अर्थव्यवस्था के अग्रिम मोर्चे पर थी। मुझे लगता है कि ओहायो नदी घाटी अगले 20 सालों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के अग्रिम मोर्चे पर हो सकती है।”रामस्वामी ने रिपब्लिकन राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उम्मीदवारी का असफल प्रयास किया था और जनवरी पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था।

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