Saturday, June 20, 2026
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WORLD : मोजतबा खामेनेई ने इजराइल को बताया कैंसर, तो नेतन्‍याहू के मंत्री बोले- आपके अब्‍बू ने भी यही कहा था

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मोजतबा खामेनेई के लिखित बयानों के जवाब में इजरायली विदेश मंत्री गिदोन साआर ने X पर लिखा, “यह जाना-पहचाना सा लग रहा है. मुझे याद है कि इसी तरह के सरनेम वाले किसी व्यक्ति ने यही बात कही थी. वैसे, आप कहाँ हैं?”

ईरान पर अमेरिका के ताबड़तोड़ हमलों से गुस्से में लाल सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इजराइल और अमेरिका पर बरस पड़े. एक लंबे-चौड़े ट्वीट में उन्होंने इजराइल को कैंसर का ट्यूमर तक बता दिया. इसके बाद इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सा’आर ने पलटकर जवाब दिया और संकेतों में कहा कि आपके अब्बू भी यही कहा करते थे.

सुप्रीम लीडर खामेनेई ने ट्वीट करते हुए कहा, “लड़खड़ाता हुआ ज़ायोनी शासन और इजराइल नाम का कैंसर का ट्यूमर अपने घिनौने अस्तित्व के अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहे हैं.” अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “अमेरिका मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद इस्लामी उम्माह और दुनिया के दमित लोगों के आम नारे बन जाएँगे.”

उनके इस ट्वीट पर कुछ घंटे पहले इजराइली विदेश मंत्री ने खामेनेई के लिखित संदेश का जवाब दिया. मोजतबा खामेनेई के लिखित बयानों के जवाब में इजरायली विदेश मंत्री गिदोन साआर ने X पर लिखा, “यह जाना-पहचाना सा लग रहा है. मुझे याद है कि इसी तरह के सरनेम वाले किसी व्यक्ति ने यही बात कही थी. वैसे, आप कहाँ हैं?”
खामेनेई ने अपने एक ट्वीट में 10 साल पहले अपने पिता के बयानों को याद करते हुए कहा कि इजराइल “25 साल बाद का इतिहास नहीं देख पाएगा.”

मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा.

भले ही सीजफायर को बढ़ाने का ऐलान हो चुका है लेकिन अमेरिका की दक्षिण ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद अब आईआरजीसी ने बड़ा दावा किया है. पहले अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपनी रक्षा में दक्षिणी ईरान की नावों पर हमला किया है. इसके जवाब में अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है.

इसके बाद दोनों नेताओं के बीच यह ट्वीट पर वॉर देखने को मिल रही है. मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा.

NATIONAL : महायुद्ध 2.0 की शुरुआत: ईरान का बड़ा दावा- अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया

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खाड़ी क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध का दूसरा चरण शुरू होता दिख रहा है। अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान की नावों पर किए गए हमले के जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने एक बड़ा दावा किया है। ईरानी न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने पर अमेरिका के एक अत्याधुनिक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और खतरनाक F-35 लड़ाकू विमान को भी अपने एयरस्पेस से खदेड़ने का दावा करते हुए चेतावनी दी है कि युद्धविराम के उल्लंघन पर वे कड़ी जवाबी कार्रवाई करेंगे।

इस सैन्य टकराव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने साफ लफ्जों में कहा है कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे और यह क्षेत्र अब अमेरिका के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा। उन्होंने बकरीद के मौके पर अपने संदेश में कहा कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका का प्रभाव लगातार कमजोर हो रहा है और अब क्षेत्र के देश पहले जैसे पुराने हालातों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

तनाव के इस माहौल के बीच दोनों देशों के बीच परदे के पीछे युद्ध रोकने की बातचीत भी चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौते पर चर्चा आगे बढ़ी है, जिसमें 60 दिनों का युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को फिर से खोलना शामिल हो सकता है। हालांकि, अंतिम समझौता अभी दूर है क्योंकि मामला परमाणु मुद्दे पर अटका हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे, जिस पर तेहरान पूरी तरह राजी नहीं है। इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल और प्रतिबंधों को लेकर भी मतभेद बरकरार हैं।

ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने दक्षिण ईरान में अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देते हुए अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) से पीछे हटने और भागने पर मजबूर कर दिया।

दोनों देशों के बीच बातचीत मुख्य रूप से परमाणु मुद्दे पर अटकी है, जहाँ अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट करे। इसके अलावा ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और हिज्बुल्लाह जैसे समूहों को ईरान के समर्थन को लेकर भी दोनों पक्षों में गहरे मतभेद हैं।

WORLD : ईरान पर फिर अमेरिका का हमला, होर्मुज से लगे बंदर अब्बास में धमाके, कहा- सेल्फ डिफेंस में किया

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सीजफायर के बीच ईरान पर फिर अमेरिका का हमला, इसबार होर्मुज से लगे ईरान के दक्षिणी इलाके बंदर अब्बास में मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइन्स बिछाने वाली नावों को निशाना बनाया गया है.

अमेरिका ने ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और बारूदी सुरंगें लगाने वाली नावों पर आत्मरक्षा के लिए हमला किया हैअमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि यह हमला सैनिकों की सुरक्षा के लिए और खतरे से बचाने के लिए किया गया हैईरान के बंदर अब्बास में तीन धमाकों की आवाज सुनाई दी और वहां एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने के लिए सीजफायर और बातचीत चल रही थी, लेकिन इसी दौरान अमेरिका ने ईरान पर “सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक” यानी आत्मरक्षा के नाम पर हमला कर दिया. इस हमले के बाद शांति वार्ता पर खतरा मंडराने लगा है. अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइन्स बिछाने वालीं नावों को निशाना बनाया है. दूसरी तरफ ईरान के बंदर अब्बास इलाके में कई धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद वहां एयर डिफेंस सिस्टम भी सक्रिय कर दिया गया. इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ा दिया है.

अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी सेना ने सोमवार को ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद नावों पर “सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक” यानी आत्मरक्षा में हमला किया. यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दी. CNN की रिपोर्ट के अनुसार सेंटकॉम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिंस ने कहा, “अमेरिकी सेना ने आज दक्षिणी ईरान में आत्मरक्षा के तहत हमला किया, ताकि ईरानी बलों से हमारे सैनिकों को होने वाले खतरे से बचाया जा सके.”

उन्होंने आगे कहा, “निशानों में मिसाइल लॉन्च साइट्स और ऐसी ईरानी नावें शामिल थीं जो समुद्र में बारूदी सुरंगें (माइन्स) लगाने की कोशिश कर रही थीं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड सीजफायर के दौरान संयम बरतते हुए भी अपने सैनिकों की रक्षा करता रहेगा.”

बता दें कि इससे पहले भी सीजफायर के दौरान अमेरिका और ईरानी बलों के बीच झड़प हो चुकी है. मई की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने ईरान की उन सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया था, जिन पर अमेरिकी युद्धपोतों पर “बिना उकसावे” के मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमले करने का आरोप था. ये युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे.

ईरान से क्या खबर आई है?
मंगलवार तड़के ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में तीन धमाकों की आवाज सुनी गई. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने “सूत्रों” के हवाले से एक छोटे बयान में यह जानकारी दी. धमाकों की वजह की तुरंत आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई लेकिन अब अमेरिका ने खुद बता दिया है कि हमला उसकी तरफ से किया गया.

बाद में IRGC ने एक और बयान में कहा कि बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास विस्फोट की आवाज सुनी गई है. यह भी कहा कि बंदर अब्बास में ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम “दुश्मन के निशानों का मुकाबला करने के लिए सक्रिय कर दिया गया है.” वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (इरना) ने भी बताया कि आधी रात के आसपास बंदर अब्बास शहर में लगातार कई धमाकों की आवाज सुनी गई. ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने चश्मदीदों के हवाले से कहा कि फारस की खाड़ी में सीरिक और जास्क के पास भी इसी तरह की आवाजें सुनी गईं.

इससे पहले खबरों में कहा गया था कि ईरान की सेना ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में एक दुश्मन ड्रोन को मार गिराया है.
बंदर अब्बास दक्षिणी ईरान में स्थित है जहां ईरान का एक अहम नौसैनिक और वायुसेना अड्डा मौजूद है. बंदर अब्बास रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के किनारे है.

NATIONAL : महिलाओं को मिलेंगे 3 हजार और ₹5 में मछली-चावल, स्कूल-मंदिरों के पास शराबबंदी, बंगाल सरकार का एलान

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पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने राज्य की जनता के लिए लोक-कल्याणकारी योजनाओं का पिटारा खोल दिया है। मंगलवार, 26 मई 2026 को एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गरीब, महिला और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई ऐतिहासिक नीतिगत फैसलों का एलान किया।

सरकार ने जहां एक तरफ बेहद रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के सशक्तिकरण और राज्य में ‘कानून का शासन’ स्थापित करने के लिए आबकारी नियमों में कड़ा विधिक बदलाव किया है।

मुख्यमंत्री ने गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि पूरे पश्चिम बंगाल में विशेष सरकारी कैंटीनें शुरू की जाएंगी। इन कैंटीनों के माध्यम से राज्य के नागरिकों को मात्र ₹5 में मछली-चावल (Fish-Rice) का पौष्टिक और भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस कूट योजना के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘अन्नपूर्णा योजना’ की आधिकारिक समय-सीमा की घोषणा भी कर दी।

राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक व्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने आबकारी नीति (Excise Policy) पर कड़ा प्रहार किया है। नए विधिक नियमों के तहत अब पश्चिम बंगाल में किसी भी स्कूल, कॉलेज और मंदिर के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों के संचालन की अनुमति नहीं होगी।

शासक का नहीं, कानून का शासन: मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, “बंगाल में अब एक पूरी तरह नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। यहां अब किसी विशिष्ट शासक का तानाशाही शासन नहीं, बल्कि पूरी निष्पक्षता से ‘कानून का शासन’ (Rule of Law) चलेगा।”
यह भी पढ़ें- बंगाल में कार्रवाई के खौफ से बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़, बॉर्डर पर लगी भारी भीड़, सरकार ने चलाया ‘डिटेक्स, डिलीट एंड डिपोर्ट’

मुख्यमंत्री ने अपने जनसंपर्क दौरों का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी, जो हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) के सिद्धांत पर विश्वास रखती है, उसे बंगाल की जनता ने अपना भरपूर आशीर्वाद दिया है। इसी जन-आदेश के कारण राज्य में नए लोग विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री बने हैं। हमारा दृष्टिकोण बिल्कुल साफ है कि हमारा घोषणापत्र और सुशासन के विचार सबसे पहले प्रशासन के हर स्तर और हर कर्मचारी तक पहुंचने चाहिए, ताकि बिना किसी कूट भेदभाव के जनता के काम त्वरित गति से हो सकें।

NATIONAL : ‘दो-तीन साल पहले बांग्लादेश से आए थे’: सीमा पर अवैध प्रवासियों का कबूलनामा, बंगाल में घुसपैठियों पर कार्रवाई

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पश्चिम बंगाल में कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। सीमा पर पहुंचे कई लोगों ने खुद माना कि वे दो-तीन साल पहले बांग्लादेश से भारत आए थे। राज्य में डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट अभियान के बाद बड़ी संख्या में लोग सीमा की ओर लौट रहे हैं।

सीमा पर मौजूद एक युवक ने बातचीत में बताया कि वह बांग्लादेश से दो-तीन साल पहले भारत आया था। उसने कहा कि उसे दूसरे लोग यहां लेकर आए थे और यहां आने के बाद कहा गया कि अब खुद काम करके रहो। युवक ने बताया कि वह बाइक मैकेनिक का काम करता था और हावड़ा इलाके में रहता था। उसने यह भी कहा कि उसके साथ करीब दस लोग आए थे, लेकिन अब वह अकेला है। कई लोगों के पास आधार कार्ड और राशन कार्ड भी नहीं मिले। इन बयानों के बाद प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार और प्रशासन ने कथित अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए अभियान तेज कर दिया है। उत्तर 24 परगना के बसीरहाट इलाके के हाकिमपुर चेकपोस्ट पर मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं पहुंचीं। इनमें कई लोग ऐसे बताए जा रहे हैं जो लंबे समय से बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे थे। हाल में घुसपैठियों को पकड़ने, पहचान करने और वापस भेजने की बात सामने आने के बाद सीमा पर भीड़ बढ़ गई। प्रशासन अब दस्तावेजों की जांच कर रहा है और संदिग्ध लोगों को होल्डिंग सेंटर भेजा जा रहा है।

मालदा जिला इस कार्रवाई का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां इंग्लिश बाजार इलाके के चंदन पार्क में पहला होल्डिंग सेंटर शुरू किया गया है। यहां फिलहाल नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। इनमें तीन महिलाएं और छह नाबालिग शामिल हैं। इन लोगों को गाजोल थाना क्षेत्र से पकड़ा गया था। सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस के साथ सिविल डिफेंस तथा अन्य कर्मचारी चौबीस घंटे निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यहां लोगों के दस्तावेज और पहचान की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

राज्य में डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म है। प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं होंगे और जो नागरिकता कानून के दायरे में नहीं आएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। नए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पुलिस को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। इस कानून के तहत संदिग्ध विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया जा सकता है और उनकी जानकारी केंद्रीय डाटाबेस में अपलोड की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध लोगों को 30 दिन तक होल्डिंग सेंटर में रखा जा सकता है।

NATIONAL : हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज कितनी खतरनाक? जहां जनसंख्या में अचानक बदलाव, वहां करेगी जांच! घुसपैठिए पहला टारगेट

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खुद प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से इसके गठन का बिगुल बजाया था. फिर 26 मई 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने इस कमेटी के ऐलान पर आखिरी मोहर लगा दी.

समझिए, आप अपने घर में रहते हैं. शुरू में परिवार के कुछ ही लोग थे, फिर धीरे-धीरे पड़ोसी, रिश्तेदार आते गए और एक दिन आपको लगा कि घर का पूरा माहौल ही बदल गया. कुछ वैसा ही हाल हमारे पूरे देश का हो रहा है, कम से कम सरकार को तो ऐसा ही लग रहा है. सरकार का कहना है कि देश की आबादी का जो ताना-बाना है, वो बहुत तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है- जानबूझकर की जा रही घुसपैठ. इसी पूरे मसले की जांच के लिए सरकार ने एक खास टीम बना दी है, जिसका नाम है हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज. आखिर ये कमेटी है क्या, इसमें कौन-कौन है और आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

ये कमेटी है क्या बला?

ये कोई अदालत या संसद नहीं है. इसे ऐसे समझिए कि सरकार ने देश के बदलते चेहरे की जांच के लिए एक ‘ऑफिशियल जांच बैठा दी है’. ये टीम पूरे देश का दौरा करेगी, आंकड़े जुटाएगी और पता लगाएगी कि किन इलाकों में किस तरह से आबादी का ताना-बाना बदल रहा है. इसके बाद ये सरकार को बताएगी कि अब आगे क्या करना है, ताकि देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक ढांचा मजबूत बना रहे.

कौन-कौन है इस टीम में?

ये टीम बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इसके सदस्य बेहद तगड़े बैकग्राउंड से आते हैं. कुल 6 लोग हैं जिनको ये जिम्मेदारी सौंपी गई है:

टीम के मुखिया (अध्यक्ष): सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर.
सदस्य: मृत्युंजय कुमार नारायण. ये हमारे देश के जनगणना आयुक्त हैं, मतलब इनके पास देश की पूरी आबादी का हिसाब-किताब रहता है.
सदस्य: दुर्गा शंकर मिश्रा. ये रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं और प्रशासन के मामले में इनका बहुत गहरा अनुभव है.
सदस्य: बालाजी श्रीवास्तव. ये रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं, जांच और सुरक्षा के मसले इनकी हथेली पर हैं.
सदस्य: डॉ. शमिका रवि. ये एक जानी-मानी अर्थशास्त्री हैं, जो आंकड़ों और उसके पीछे की अर्थव्यवस्था को बखूबी समझती हैं.
सदस्य सचिव: गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-I). ये सदस्य टीम में सबकी मदद करने और पूरी कार्यवाही को सुचारू रखने का काम देखते हैं.
इस कमेटी के हाथ में क्या-क्या ताकत और काम हैं?

सरकार ने इस कमेटी को खाली हाथ नहीं भेजा है. इसे 5 बड़े काम सौंपे गए हैं:

पूरा हिसाब लगाना: ये कमेटी अवैध घुसपैठ और दूसरी असामान्य वजहों से देश के कोने-कोने में आबादी के ढांचे में आए बदलाव का बारीकी से आकलन करेगी.

पैटर्न खोजना: ये देखना कि अलग-अलग धर्मों और सामाजिक समुदायों में जनसंख्या का जो अनुपात बदल रहा है, उसका कोई खास तरीका या पैटर्न तो नहीं है.

जड़ तक जाना: सिर्फ ऊपर-ऊपर से नहीं, बल्कि इस बदलाव के पीछे जो असली वजह है, उसकी तह तक जाकर पूरी गुत्थी सुलझानी होगी.
रास्ता सुझाना: जब पूरी पड़ताल हो जाए, तो इन बदलावों से निपटने के लिए एक पक्का, चरणबद्ध और समयसीमा वाला खाका तैयार करना होगा.
नए उपाय बताना: जरूरत पड़ने पर सरकार को सुझाव देना कि क्या नए कानून बनाने पड़ सकते हैं, क्या नई नीतियां लानी होंगी और प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव करने होंगे.

क्या पहले भी ऐसी कोई कमेटी बनी थी?

जी हां, आबादी के मसले पर सरकार का ध्यान पहली बार नहीं गया है. इससे पहले भी दो बड़े कदम उठ चुके हैं, जिनका जिक्र करना जरूरी है:

राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग (NCP, 2000): तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इस विशाल आयोग का गठन किया था, जिसमें 100 से भी ज्यादा सदस्य थे. इसका काम ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000’ को लागू करना और उस पर नजर रखना था, ताकि देश की बढ़ती आबादी को स्वैच्छिक तरीके से स्थिर किया जा सके.

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PM-EAC) की रिपोर्ट, 2024: एक बेहद चर्चित रिपोर्ट आई, जिसका शीर्षक था ‘शेयर ऑफ रिलीजियस माइनॉरिटीज: ए क्रॉस कंट्री एनालिसिस’. ये कोई कमेटी नहीं थी, बल्कि एक गहरा अध्ययन था. इसके मुताबिक 1950 से 2015 के बीच भारत में हिंदू आबादी का अनुपात 7.82% घट गया, जबकि मुस्लिम आबादी का अनुपात 9.84% से बढ़कर 14.09% हो गया.
अब तक सरकार ने जनसंख्या के बदलाव पर क्या कहा?

सरकार और उसकी संस्थाओं ने समय-समय पर जनसंख्या के बदलते चेहरे पर चिंता जताई है:

  1. PM-EAC रिपोर्ट, 2024 की खास बातें

1950-2015 के 65 सालों के आंकड़ों ने दिखाया कि देश में बहुसंख्यक हिंदू आबादी का अनुपात लगातार घटा है.
भारत में अल्पसंख्यकों के रहने के लिए एक ‘अनुकूल माहौल’ है, जो उनकी आबादी के बढ़ने का एक कारण हो सकता है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में बहुसंख्यक आबादी का अनुपात बढ़ा है, जबकि अल्पसंख्यकों की संख्या में भारी गिरावट आई है. भारत में ये रुझान बिल्कुल उल्टा है.

  1. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 का रुख

इस नीति का पूरा जोर परिवार नियोजन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के जरिये, लोगों को खुद से छोटा परिवार रखने के लिए प्रेरित करने पर था. इसमें किसी भी तरह की जबरदस्ती की कोई जगह नहीं थी.

  1. जनगणना के आंकड़ों का सहारा

सरकार अपनी बात को साबित करने के लिए स्थानीय स्तर के आंकड़े भी पेश करती रही है. जैसे, झारखंड के संथाल परगना इलाके का उदाहरण दिया जाता है. वहां 1951 से 2011 के बीच जनजातीय आबादी 45% से गिरकर सिर्फ 27% रह गई, जबकि इसी दौरान वहां मुस्लिम आबादी में 13% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई.

अब इस कमेटी का सबसे ज्यादा फोकस किन पर होगा?

ये कमेटी पूरे देश का आकलन करेगी, लेकिन सरकार के बयानों और कमेटी के कामों से साफ है कि इसका पूरा जोर किन मुद्दों और इलाकों पर रहेगा:

अवैध घुसपैठिए: गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि घुसपैठ की वजह से जो जनसंख्या बदलाव

UP : यूपी का बांदा लगातार 8वें दिन 47°C पार:देश में सबसे गर्म शहर; ; मानसून अटका

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देश के उत्तर-पश्चिम में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर में दिल्ली-हिमाचल, यूपी, दक्षिण-पश्चिम में ओडिशा और तेलंगाना भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। पश्चिम में गुजरात, महाराष्ट्र और सेंट्रल इंडिया में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के एमपी से लगा हिस्सा और छत्तीसगढ़ में गर्मी का सबसे खतरनाक दौर चल रहा है।भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को यूपी के बांदा और विदर्भ का ब्रह्मपुरी में सबसे ज्यादा गर्म रहे। यहां लगातार 8वें दिन 47°C से ज्यादा तापमान दर्ज किया गया।

छतरपुर का खजुराहो 47.2°C के साथ तीसरे नंबर पर और नौगांव 46.8°C के साथ चौथा सबसे गर्म शहर रहा।बढ़ती गर्मी के कारण पंजाब सरकार ने सरकारी दफ्तरों और स्कूलों का समय बदल दिया है। सरकारी स्कूल और दफ्तर सुबह साढ़े 7 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक खुलेंगे। चंडीगढ़ के स्कूलों में समर कैंपों में आउटडोर एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई है। मानसून तो यह पिछले तीन दिन से केरल के तट से 30-35 किमी दूर अटका है। केरल के तटीय इलाके, तमिलनाडु और कर्नाटक में बारिश हो रही है। लेकिन, मानसून आने की सभी शर्तें पूरी नहीं हो पा रहीं।

WORLD : 75 साल की दोस्ती पर चीन-पाकिस्तान का खुला ऐलानः “हर मुश्किल में एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे

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China और Pakistan ने अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने साझा भविष्य, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कई अहम समझौतों पर सहमति बनाई।

पाकिस्तान-चीन ने साझा भविष्य के निर्माण के लिए मिलकर काम करते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों की “दृढ़तापूर्वक रक्षा” करने और उन्हें विकसित करने पर सहमति व्यक्त की। मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गयी। यह बयान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की 23 से 26 मई तक चीन की आधिकारिक यात्रा के समापन पर आया, जो उन्होंने प्रधानमंत्री ली क्विंग के निमंत्रण पर की थी। शरीफ की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग संबंधी कई दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की और दोनों पक्षों ने चीन-पाकिस्तान सर्वकालिक रणनीतिक सहयोग साझेदारी को और गहरा करने तथा पारस्परिक हित के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर एक नई व्यापक समझ पर सहमति व्यक्त की।

शरीफ ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भी भाग लिया और झेजियांग प्रांत के हांगझोऊ का सफल दौरा किया। बयान में कहा गया, “75 वर्षों के राजनयिक संबंधों के दौरान, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय परिस्थितियों में आए बदलावों के बावजूद यह मित्रता अटूट बनी रही है, और दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे पर भरोसा, सम्मान और समर्थन किया है तथा कठिनाइयों और चुनौतियों के समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।” इसमें आगे कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान “नए युग में साझा भविष्य वाले चीन-पाकिस्तान समुदाय” के निर्माण में और अधिक तेजी लाने पर सहमत हुए हैं, जो चीन और उसके पड़ोसी देशों को जोड़ने वाले साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के प्रयास के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा।

पाकिस्तान ने एक-चीन सिद्धांत के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय एकीकरण के लिए चीन द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन करता है और “ताइवान की स्वतंत्रता” के किसी भी रूप का कड़ा विरोध करता है। चीन ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपने अटूट समर्थन को दोहराया और पाकिस्तान द्वारा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थिरता, विकास और समृद्धि की रक्षा के प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन किया। दोनों पक्षों ने किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध दोहराते हुए दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व की पुनः पुष्टि की तथा सभी लंबित विवादों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया।

NATIONAL : सिद्धारमैया ने 28 मई को बुलाई कैबिनेट की ब्रेकफास्ट मीटिंग, CM पद से दे सकते हैं इस्तीफा

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सिद्धारमैया 28 मई को अपने आवास पर कैबिनेट के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग की मेजबानी करेंगे. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बुधवार को बेंगलुरु पहुंचेंगे. इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सुरजेवाला पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ मीटिंग कर सकते हैं.

कर्नाटक में सियासी उथल-पुथल पर विराम लगता नजर आ रहा है. खबर है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई यानी गुरुवार को पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इससे पहले आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की बैठक हुई थी.अब कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. वह इससे पहले बुधवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे.

सिद्धारमैया 28 मई को अपने आवास पर कैबिनेट के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग की मेजबानी करेंगे. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बुधवार को बेंगलुरु पहुंचेंगे. इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सुरजेवाला पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ मीटिंग कर सकते हैं.

इससे पहले आज दिल्ली में कई घंटे चली मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि आज की मैराथन बैठकों में आगामी राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव पर ही चर्चा हुई है. आप लोग मुख्यमंत्री बदलने की जो अटकलें लगा रहे हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है.

वेणुगोपाल ने कहा था कि आज हमारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ विस्तृत बैठक हुई. सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, कर्नाटक के पार्टी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और मैं इस बैठक का हिस्सा थे. पूरी बातचीत आगामी राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव पर केंद्रित थी. आप लोग जो भी अटकलें लगा रहे हैं, उनमें कोई दम नहीं है. कोई वास्तविकता नहीं है. आज की बैठक में बस यही तय हुआ है.

लेकिन इस बयान के बाद सूत्रों के हवाले से खबर आई कि बैठक में कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इस्तीफा देने को कहा था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा भेजने की बात कही थी और दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी का आश्वासन दिया था लेकिन सिद्धारमैया इसके लिए तैयार नहीं हुए. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सिद्धारमैया पार्टी के प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर उभरें. राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सामाजिक न्याय और जातिगत प्रतिनिधित्व की रणनीति को और मजबूत कर रहे हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की इन मैराथन बैठकों के दौरान बताया गया कि पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी वोटों को मजबूत करने के लिए दिल्ली में सिद्धारमैया की जरूरत है. सिद्धारमैया का राजनीतिक कद कांग्रेस की चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाएगा. सूत्रों ने यह भी बताया कि अगर सिद्धारमैया पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा के ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो पार्टी नेतृत्व उन्हें आश्वासन देता है कि उनकी बाकी सभी चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. कुछ देर बाद खबर आई कि सिद्धारमैया पद से इस्तीफा दे सकते हैं. लेकिन देर रात खबर आई कि सिद्धारमैया गुरुवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर सत्ता साझेदारी की अटकलें बार-बार लगती रही हैं. डीके शिवकुमार के समर्थकों का कहना है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया गया था. कांग्रेस नेतृत्व ने कर्नाटक में किसी संभावित नेतृत्व परिवर्तन पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.

WORLD : चीन-पाकिस्तान की ‘कश्मीर चाल’ पर भारत का करारा जवाब, MEA ने सुना दी खरी-खरी

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भारत ने सिर्फ कश्मीर के जिक्र पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC परियोजनाओं को लेकर भी अपना विरोध दोहराया।

भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर किसी भी दूसरे देश की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। चीन और पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे “बिल्कुल बेवजह और अनुचित” बताया है।

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हाल ही में चीन के दौरे पर गए थे। इस दौरान चीन और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में दोनों देशों ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया और इसे “इतिहास से जुड़ा हुआ लंबित मुद्दा” बताया। इसी बयान पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत का जम्मू-कश्मीर को लेकर रुख हमेशा से साफ और स्थिर रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने यह भी कहा कि किसी दूसरे देश को इस मामले पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा कि भारत चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी संदर्भों को पूरी तरह खारिज करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न सिर्फ अनुचित हैं बल्कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ भी हैं।

भारत ने सिर्फ कश्मीर के जिक्र पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC परियोजनाओं को लेकर भी अपना विरोध दोहराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस परियोजना के कुछ हिस्से भारत के उस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया हुआ है। ऐसे में भारत किसी भी ऐसी गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा जो पाकिस्तान के कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश करे।

भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत के कुछ हिस्सों पर गैरकानूनी और जबरन कब्जा कर रखा है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की निर्माण परियोजना या निवेश भारत की संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा। यही वजह है कि भारत पहले भी कई बार CPEC का विरोध करता रहा है और अब फिर से उसने अपना रुख दोहराया है।

विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के बीच हुए तथाकथित “सीमा पार जल संसाधन सहयोग” पर भी सवाल उठाए। रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच ऐसी किसी सीमा का अस्तित्व ही नहीं है, जिसके आधार पर “ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन” जैसी बात की जा सके। भारत ने इसे भी भ्रामक और तथ्यों से परे बताया।

भारत ने इस दौरान 1963 में हुए चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने उस समय अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र का एक हिस्सा चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत आज भी स्वीकार नहीं करता।

गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान अक्सर कश्मीर मुद्दे पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। लेकिन भारत लगातार यह कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इस पर किसी तीसरे देश को बोलने का अधिकार नहीं है। भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान को सबसे पहले सीमा पार आतंकवाद बंद करना चाहिए।

इस पूरे मामले में भारत ने एक बार फिर बेहद स्पष्ट और सख्त संदेश देने की कोशिश की है। सरकार ने साफ कर दिया है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की बाहरी टिप्पणी या दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत का रुख पहले जैसा ही मजबूत और अडिग बना हुआ है।

वैश्विक व्यापार के विस्तार के लिए यह जरूरी है कि समुद्री क्षेत्र पूरी तरह खुले एवं स्वतंत्र हों। विश्व की मौजूदा व्यवस्था में हर देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर काफी हद तक निर्भर करती है। ऐसे में अगर किसी समुद्री क्षेत्र पर एक देश का कब्जा हो जाए, तो वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला बाधित होने से अन्य देशों के हित स्वाभाविक रूप से प्रभावित होंगे, जैसा कि होर्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध करने से दुनिया भर में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है।

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