Tuesday, April 28, 2026
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NATIONAL : एक पुरुष, दो महिलाएं और बैंकॉक वाली फ्लाइट… एयरपोर्ट पर पकड़े गए, बैग से मिला 13 करोड़ का मैटेरियल

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एक पुरुष और दो महिलाएं बैंकॉक से आई फ्लाइट से लखनऊ एयरपोर्ट पर पहुंचीं. जब उनके बैगों की तलाशी ली गई तो उनमें 13 करोड़ रुपये कीमत का मादक पदार्थ मिला. DRI को मिली सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में यात्रियों को तुरंत पकड़ लिया गया. अधिकारियों का कहना है कि मादक पदार्थ तस्करी के इस मामले की जांच जारी है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नारकोटिक्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई. एयरपोर्ट पर तैनात डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की टीम ने 2.7 किलो हाई क्वालिटी वाला गांजा बरामद किया. यह खेप बैंकॉक से आई एयर एशिया की फ्लाइट FD-146 के जरिए लाई जा रही थी. इस मामले में तीन भारतीय यात्रियों को अरेस्ट किया गया है, जिनमें एक पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं.

DRI को कुछ दिनों पहले विदेशी रूट से चल रही मादक पदार्थों की तस्करी के बारे में इनपुट मिला था. गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने सुबह लखनऊ एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ाई. फ्लाइट संख्या FD-146 के लैंड होते ही संदेह होने पर तीन यात्रियों को रोककर उनके बैग की जांच की गई. तलाशी के दौरान यात्रियों के सामान से वैक्यूम-सील्ड पैकेट बरामद हुए, जिनमें हाई क्वालिटी वाला गांजा भरा हुआ था.

DRI के अधिकारियों के अनुसार, बीते छह महीनों में लखनऊ एयरपोर्ट पर तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं. इस अवधि में 75 किलो से अधिक ड्रग्स जब्त किया गया है, जिनकी कीमत बाजार में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है. यह आंकड़े बताते हैं कि मादक पदार्थों की तस्करी के लिए लखनऊ एयरपोर्ट को तस्कर एक नए ट्रांज़िट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

गिरफ्तार तीनों यात्रियों से DRI पूछताछ कर रही है. टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके भारत में किससे संपर्क थे, और नशीले पदार्थों को आगे कहां पहुंचाया जाना था. अधिकारियों का मानना है कि इस केस के जरिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा संभव है. DRI ने साफ किया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा. एयरपोर्ट पर आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों पर निगरानी और बढ़ाई जाएगी.

SPORTS : कोहली ने 53वां शतक जड़कर शादी की अंगूठी को चूमा,अनुष्का शर्मा ने दिया दिल छू लेने वाला रिएक्शन…..

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विराट कोहली ने रायपुर में एक और शतकीय पारी खेलकर इतिहास रच दिया. अनुष्का शर्मा की दिल छू लेने वाली प्रतिक्रिया और इरफान पठान की जबरदस्त तारीफ ने इस पारी को और खास बना दिया.

रायपुर के स्टेडियम में रविवार का दिन एक बार फिर विराट कोहली के नाम रहा. भारतीय बल्लेबाज ने दूसरे वनडे में न सिर्फ शानदार शतक जड़ा, बल्कि अपनी लय और क्लास से आलोचकों का जवाब भी दिया. 53वें ODI शतक तक पहुंचने के बाद कोहली ने बैट हवा में उठाया और फिर अपनी शादी की अंगूठी को चूमते हुए आसमान की ओर देखा. यह सेलिब्रेशन देखते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने भी अपना रिएक्शन दिया.

अनुष्का शर्मा, जो अक्सर विराट के बड़े पलों पर दिल छू लेने वाली प्रतिक्रिया देती हैं, इस बार भी पीछे नहीं रहीं. इंस्टाग्राम पर उन्होंने विराट के शतक वाली फोटो के साथ छोटा-सा रिएक्शन शेयर किया. उन्होंने उनके रिंग सेलिब्रेशन का जवाब उनकी फोटो में दिल वाला इमोजी के साथ दिया. यह तस्वीर देखते ही फैंस ने सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते को लेकर ढेरों प्यारे कमेंट्स किए.

विराट का यह शतक ऐसे समय पर आया, जब भारत को मैच में स्थिरता की जरूरत थी. भारतीय टीम को सीरीज में बढ़त दिलाने के लिए एक बड़े खिलाड़ी की पारी की जरूरत थी. कोहली ने वही किया, शांति से शुरुआत, फिर क्लासिक ड्राइव, स्ट्रेट बैट और हर कमजोर गेंद पर कड़ा प्रहार. कोहली पूरी तरह अपने पुराने रंग में दिखाई दिए.

मैच के बाद क्रिकेट जगत से भी प्रतिक्रियाएं आने लगीं. पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने X (पूर्व ट्विटर) पर कोहली के शतक की तारीफ करते हुए लिखा, “किंग रविवार को तो जरूर खेलता है, लेकिन बाकी दिनों में वह आपकी सारी योजनाएं बिगाड़ देता है. विराट कोहली की शानदार शतकीय पारी!”

आखिर और फाइनल मैच को देखते हुए कोहली की यह फॉर्म भारत के लिए बड़ी राहत है. टीम के अनुभवी खिलाड़ी के रूप में वह न सिर्फ रन बना रहे हैं, बल्कि बीच के ओवरों में टीम को संभाल भी रहे हैं. उनकी फिटनेस, रनिंग बिटवीन द विकेट्स और मैच को आखिरी तक फिनिश करने की क्षमता भारत की जीत का अहम हथियार है.

ENTERTAINMENT : ‘काम करो, तो दिल से करो’, अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया के डेब्यू को लेकर इमोशनल पोस्ट, बताया फैमिली का रूल

अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाजिया फ़िल्म ‘इक्कीस’ से डेब्यू कर रही हैं. अक्षय ने इमोशनल पोस्ट में उनकी मेहनत और कॉन्फिडेंस की तारीफ की.बॉलीबुड स्टार अक्षय कुमार अपनी भांजी सिमर भाटिया को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं. सिमर फ़िल्म ‘इक्कीस’ से अपना पहला कदम रखने जा रही हैं. और अक्षय ने इंस्टाग्राम पर उनकी तस्वीर के साथ एक इमोशनल मैसेज शेयर किया, जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे हैं.

एक्टर ने लिखा कि उन्होंने सिमर को शर्मीली बच्ची से एक कॉन्फिडेंट लड़की बनते देखा है. उन्हेंने कहा कि यह सफर आसान नहीं होगा, लेकिन सिमर इसे दिल से निभांएगी. अक्षय ने अपनी फैमिली रूल को भी बताया कि ‘काम करो, तो दिल से करो फिर जादू खुद हो जाता है’.

‘इक्कीस’ में सिमर, अगस्त्य नंदा की लव इंटरेस्ट बनी हैं. फ़िल्म को मैडॉक फ़िल्म्स और दिनेश विजन ने प्रोड्यूस किया है. इसमें धर्मेंद्र, जयदिप अहलावत और सिकंदर खेर जैसे दमदार एक्टर भी शामिल हैं.

फ़िल्म को ट्रेलर पहले ही रिलीज हो चुका है. और बुधवार को आया रोमांटिक गाना ‘सितारे’ सोशल मीडिया पर लोगों के दिल छू रहा है. ऑडियंस इस गाने पर बढ़िया रिएक्शन दे रहे हैं.

‘इक्कीस’ 1971 के भारत-पाक वॉर के हीरो और परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की रियल स्टेरी पर फ़िल्म है. फ़िल्म में अदस्त्य नंदा अरुण का किरदार निभा रहे हैं, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल बने हैं. फ़िल्म की स्टोरी काफी इंट्रेस्टिंग है. और लोगों को पसंद आ रही हैं.

ENTERTAINMENT : स्मृति मंधाना-पलाश मुच्छल की शादी पोस्टपोन होने के बाद इवेंट कंपनी की पोस्ट, लिखा- हर मैच में फिनिश लाइन पार नहीं करते

स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की पर्सनल लाइफ विवादों में घिरी हुई है. उनकी शादी आखिरी मौके पर पोस्टपोन हो गई थी. अब इवेंट कंपनी ने एक पोस्ट शेयर की है.

क्रिकेटर स्मृति मंधाना और म्यूजिक कंपोजर पलास मुच्छल की शादी होते-होते रह गई. एक दिन पहले ही उनकी शादी पोस्टपोन हो गई. स्मृति मंधाना के पिता की तबीयत खराब होने के बाद शादी को पोस्टपोन करने का निर्णय लिया गया था. हालांकि, इसके बाद कई विवाद सामने आए. पलाश पर स्मृति को चीट करने के भी आरोप लगे.

स्मृति और पलाश की शादी हैंडल करने वाली इवेंट कंपनी ने एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा- ‘हम जिंदगी के हर मैच में फिनिश लाइन पार नहीं करते. पर आखिर में स्पोर्ट्समैन स्पिरिट मायने रखती है. हमारी टीम ने बहुत मेहनत की. खुशी और गर्व के साथ वो सभी भी जिक्र के लायक हैं. जल्द मिलेंगे चैंपियन.’

बता दें कि स्मृति और पलाश की शादी 23 नवंबर को होने वाली थी. लेकिन स्मृति के पिता की तबीयत खराब हुई और उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया. 24 नवंबर को इवेंट कंपनी ने ये पोस्ट शेयर की थी. इस पोस्ट में उन्होंने क्रिकेट और स्पोर्ट्स मेटाफर भी यूज किए हैं.

स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की बात करें तो वो काफी समय से डेट कर रहे थे. उनका प्रपोजल भी काफी वायरल हुआ था. दोनों शादी को लेकर बहुत एक्साइटेड थे. शादी 23 नवंबर को थी और प्री-वेडिंग फेस्टिविटीज शुरू हो गई थी. उनकी हल्दी, मेहंदी और संगीत के फोटोज और वीडियोज काफी वायरल थे.

लेकिन शादी पोस्टपोन होने के बाद खबरें आई कि पलाश ने स्मृति को धोखा दिया है. पलाश की एक लड़की के साथ की चैट भी वायरल हुई. हालांकि, स्मृति और पलाश ने इसे लेकर अभी तक कुछ भी रिएक्ट नहीं किया है. हाल ही में पलाश को एयरपोर्ट पर देखा गया था. इस दौरान पलाश ऑल ब्लैक लुक में थे. इसके बाद वो प्रेमानंद महाराज की शरण में पहुंचे थे. वहां से उनकी एक फोटो वायरल हुई थी.

NATIONAL : चार डॉक्टरों की एक साथ मौत, नेशनल हाईवे पर हुए हादसे में चली गई जान

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अमरोहा के रजबपुर इलाके में NH-9 पर खड़ी एक डीसीएम से कार के टकरा जाने पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी के चार एमबीबीएस छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई. आवाज सुनकर पहुंचे लोगों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने भारी मशक्कत से शव निकाले और पोस्टमार्टम को भेजा. चारों छात्र 2020 बैच के थे और इंटर्नशिप कर रहे थे. पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है.

अमरोहा के नेशनल हाईवे-9 पर हुई एक भयानक टक्कर ने चार युवा होनहारों को हमेशा के लिए खो दिया. चारों छात्र डॉक्टर बनने की राह पर थे, इंटर्नशिप कर रहे थे, और देर रात अपनी यूनिवर्सिटी लौट रहे थे. लेकिन रजबपुर थाना क्षेत्र में खड़ी एक डीसीएम से उनकी कार की जोरदार भिड़ंत ने सब कुछ खत्म कर दिया.

घटना रात लगभग 10 बजे की है. हाईवे के सर्विस लेन पर एक डीसीएम ट्रक खड़ा था. सड़क सूनी थी, वाहनों की रफ्तार सामान्य. तभी तेजी से आ रही स्विफ्ट डिज़ायर कार डीसीएम से सीधे जा टकराई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आसपास के घरों में रहने वाले लोग घबराकर बाहर निकल आए. कुछ ही सेकंड में लोग मौके की ओर दौड़ पड़े लेकिन दृश्य देखकर किसी के पैरों में हिम्मत नहीं बची. कार का अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक चुका था, दरवाजे अंदर धंस गए थे और चारों युवक उसी में फंसे हुए थे. कोई आवाज़ नहीं, कोई हरकत नहीं मंज़र किसी को भी अंदर तक झकझोर देने वाला था.

हाईवे से गुजर रहे कुछ लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. थोड़ी ही देर में रजबपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव शुरू किया. कट्टर से कार के दरवाजे काटे गए, ग्लास हटाया गया और बमुश्किल चारों युवकों को बाहर निकाला गया. उन्हें तुरंत सीएचसी भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि चारों की मौत मौके पर ही हो चुकी है.

छात्रों की पहचान दिल्ली निवासी आयुष शर्मा, त्रिपुरा निवासी सप्तऋषि दास, त्रिपुरा के ही अरनब चक्रवर्ती, और गुजरात के श्रेयस पंचोली के रूप में हुई. चारों एक निजी यूनिवर्सिटी में MBBS के 2020 बैच के छात्र थे और इन दिनों इंटर्नशिप कर रहे थे. घटना की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारी अस्पताल पहुंचे. कुलपति राजीव त्यागी ने शवों की पहचान कर परिजनों को सूचित किया. उनकी आंखों में स्तब्धता थी, शब्द टूट रहे थे, और माहौल इतना भारी कि किसी को एक-दूसरे की ओर देखने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी. यह चारों छात्र कई महीनों से इंटर्नशिप के दौरान अलग-अलग अस्पतालों में सेवाएं दे रहे थे. मरीजों से व्यवहार, इलाज में मेहनत, और अपनी पढ़ाई को लेकर उनका समर्पण सबकुछ उन्हें एक उज्ज्वल चिकित्सक बनाता दिख रहा था. लेकिन हाईवे के एक हादसे ने यह भविष्य छीन लिया.

हादसा जिस जगह हुआ, वह अतरासी चौकी के सामने सर्विस लेन है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि डीसीएम सड़क किनारे खड़ी थी, लेकिन उस पर उचित रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत नहीं लगे थे. डिप्टी एसपी अभिषेक यादव ने बताया कि रात करीब 10 बजे एक डीसीएम के पीछे से कार की टक्कर हुई है. चारों युवकों की मौके पर मौत हो गई. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. फील्ड यूनिट जांच कर रही है और अग्रिम कार्रवाई की जा रही है.

जब चारों परिवारों को सूचना दी गई, उनके दिलों पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा. किसी मां की आंखों के सामने अपने डॉक्टर बेटे का सफेद कोट घूम रहा होगा, कोई पिता शायद आखिरी वीडियो कॉल याद कर रहा होगा, और किसी बहन को भाई की हंसी सुनाई दे रही होगी. चारों घरों में रोने की आवाज़ के अलावा कुछ नहीं. इन छात्रों ने जीवन का वह मोड़ पार कर लिया था, जहां से उनका करियर शुरू होने वाला था. उन्होंने लंबी पढ़ाई पूरी कर ली थी, इंटर्नशिप के आखिरी महीनों में थे, और कुछ ही समय बाद अपने-अपने परिवारों का सहारा बनने वाले थे. लेकिन एक रात की दुर्घटना ने सब खत्म कर दिया.

अगले दिन यूनिवर्सिटी परिसर में अजीब-सी शांति छाई रही. हॉस्टल में उनके कमरे बंद पड़े थे. टेबल पर नोट्स, स्टेथोस्कोप, आधे खुले बैग, और दीवारों पर लगे टाइम-टेबल उसी तरह पड़े थे जैसे वे छोड़कर गए थे. किसी की पसंदीदा कॉफी मग वहीं रखा हुआ था, किसी के टेबल पर परीक्षा की तैयारी की किताबें खुली थीं. दोस्तों को आज भी विश्वास नहीं हो रहा कि कल तक हंसते-बोलते दिखने वाले ये चार चेहरे अब कभी वापस नहीं आएंगे.

NATIONAL : मुंबई के कॉलेज में फिर उठा बुर्का विवाद, क्लास में पाबंदी के बाद छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठीं

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मुंबई के विवेक जूनियर कॉलेज में कक्षा में बुर्का पर रोक से विवाद बढ़ा. छात्राएं धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए बुर्का पहनने की अनुमति मांग रही हैं.
मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक जूनियर कॉलेज में एक बार फिर बुर्का ड्रेस कोड विवाद गहरा गया है. कॉलेज प्रशासन ने क्लास में बुर्का पहनने पर रोक लगा रखी है, जबकि हिजाब की अनुमति दी गई है. यही बात कई छात्राओं और अभिभावकों को खटक रही है, जो इसे धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं. विरोध में छात्राएं कॉलेज के बाहर भूख हड़ताल पर बैठी हैं.

कई छात्राओं ने कॉलेज से साफ कहा है कि अगर हिजाब की अनुमति है तो बुर्का पर प्रतिबंध का कोई तर्क नहीं बनता. उनका कहना है कि बुर्का उनका धार्मिक विश्वास और निजी चुनाव है, और कॉलेज में पढ़ाई के दौरान भी इसे पहनने की इजाजत मिलनी चाहिए. छात्राओं का कहना है कि पहनावे को लेकर नियम ऐसे होने चाहिए कि कोई भी छात्रा असहज या अलग-थलग महसूस न करे.इस मुद्दे पर AIMIM पार्टी की मुंबई महिला विंग की उपाध्यक्ष और वकील जाहनारा शेख ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि लड़कियों को बुर्का पहनकर क्लास में जाने से रोकना सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि हिजाब की अनुमति है, लेकिन कई छात्राएं असहज महसूस कर रही हैं. उन्हें बुर्का पहनने की भी अनुमति मिलनी चाहिए. जब तक यह पढ़ाई या कॉलेज अनुशासन में बाधा न डाले, छात्राओं को अपने धार्मिक पहनावे का अधिकार मिलना चाहिए.दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा और अनुशासन को मुख्य कारण बताते हुए बुर्का पर रोक लगाई है. प्रशासन के मुताबिक बुर्का से चेहरा पूरी तरह ढक जाता है, जिससे छात्राओं की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और कैंपस में निगरानी पर असर पड़ता है.

प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय धार्मिक भावनाओं के खिलाफ नहीं है, बल्कि कैंपस सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

इस फैसले से अभिभावकों में भी नाराजगी बढ़ी है. कई अभिभावकों ने कहा कि हिजाब और बुर्का दोनों पहनना धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा है, और किसी छात्रा को सिर्फ उसके पहनावे की वजह से परेशान या असहज महसूस नहीं होना चाहिए. अभिभावकों का मानना है कि कॉलेज को बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिसमें सुरक्षा भी बनी रहे और धार्मिक अधिकार भी सुरक्षित रहें.

ENTERTAINMENT : किसको बिग बॉस 19 की ट्रॉफी जीतते देखना चाहते हैं शहबाज बदेशा? बताया कौन हैं उनके लिए विनर

शहबाज बादशाह बिग बॉस 19 के घर से एविक्ट हो गए है. शो से बाहर आने के बाद से शहबाज बदेशा लगातार सोशल मीडिया पर अपने दोस्त अमाल मलिक को वोट करने की अपील कर रहे हैं. अब उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए बिग बॉस के घर में बिताए दिनों को याद किया और तान्या मित्तल, अशनूर कौर और गौरव को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने ये भी बताया कि उनके लिए बिग बॉस 19 का असली विनर कौन है.

तान्या मित्तल ने हमेशा शहबाज बदेशा को अपना भाई माना, लेकिन वे हर मुद्दे पर उनके विरोध में दिखाई दिए. इस सवाल का जवाब देते हुए शहबाज ने कहा कि वे हमेशा उनके लिए एक बहुत अच्छी बहन रही हैं और वे उनका उतना ही सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि “जो भी मुद्दे उठे, वे उनकी तरफ से शुरू हुए और उन्हें अपनी ही हरकतों का नतीजा भुगतना पड़ा.”

अशनूर कौर के एविक्शन पर बात करते हुए शहबाज ने कहा कि उनके साथ जो हुआ, वो बिल्कुल ठीक हुआ क्योंकि उन्होंने किसी के साथ मारपीट की और अपनी हार स्वीकार नहीं कर पा रही थीं. ऐसे में उनके लिए जाना जरूरी था. उन्होंने आगे कहा कि पहले भी बिग बॉस में थप्पड़ और धक्का-मुक्की हुई है, लेकिन वो अलग बात है. किसी को ऐसे मारना खतरनाक हो सकता है.

अपने खुद के एविक्शन पर बात करते हुए शहबाज ने कहा कि फिनाले से पहले निकाले जाने का उन्हें कोई पछतावा नहीं है. बिग बॉस के घर में मेरा समय बहुत अच्छा बीता. मुझे यह अनुभव देने के लिए मैं बिग बॉस का धन्यवाद करता हूं दिवंगत एक्टर सिद्धार्थ और शहनाज का नाम लेकर सुर्खियों बटोरने के मुद्दे पर शहबाज का कहना है कि वे उनके भाई के जैसे थे. उन्होंने कहा कि बिग बॉस के घर में मैंने एक बार सिद्धार्थ का नाम लिया था और यह एक मुद्दा बन गया. वह मेरे भाई जैसा है. मैं उसका नाम क्यों नहीं ले सकता? हमने साथ में इतना समय बिताया है. यह गलत नहीं होना चाहिए, मुझे जब लगेगा तब उनका नाम लूंगा और मुझे कोई नहीं रोक सकता.

वहीं शहबाज से पूछा गया कि बिग बॉस 19 की टॉफी कौन जीत सकता है के सवाल पर शहबाज ने कहा कि मुझे लगता है अमाल को शो जीतना चाहिए. मैं प्रणित मोरे को दूसरे नंबर पर देखता हूं, लेकिन दिल से चाहता हूं कि अमाल शो जीते.

ENTERTAINMENT : बॉलीवुड के इस एक्टर की 140 साल पुरानी पुश्तैनी हवेली को बेचने की कोशिश, DM से मिले अभिनेता

इसका निर्माण 1885 में अतरौली (अवागढ़) के राजा द्वारा अलीगढ़ के पूर्व विधायक और चंद्रचूड़ सिंह के पिता कैप्टन बलदेव सिंह के परदादा ठाकुर कल्याण सिंह को 3 गांव उपहार में दिए जाने के बाद हुआ था.

‘माचिस’ जैसी हिट फिल्मों के अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह ने 19वीं सदी की एक बड़ी पुश्तैनी जायदाद पर बढ़ते पारिवारिक विवाद को लेकर अलीगढ़ जिला प्रशासन से संपर्क किया है. चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई ने मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार एवं जिलाधिकारी संजीव रंजन से मुलाकात की और इस दौरान उनकी मां भी उनके साथ थीं. अभिनेता ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें डर है कि उनकी पुश्तैनी हवेली चुपके से बेची जा रही है.

चंद्रचूड़ सिंह ने बुधवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा को दिए एक बयान में कहा, “जिलाधिकारी साहब हमारा ध्यान रखेंगे. हम इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं क्योंकि हमारी पुश्तैनी जमीन और हवेली पर विवाद है. कुछ गलत हो रहा है और हम इसे रोकने आए हैं. जो भी हो वह सही और इंसाफ वाला होना चाहिए.” उन्होंने कहा कि यह 1885 की एक संयुक्त पारिवारिक संपत्ति है, जिसे ‘कल्याण भवन’ के नाम से जाना जाता था. विवाद की जड़ ‘कल्याण भवन’ है, जो छह एकड़ में फैला है.

इसका निर्माण 1885 में अतरौली (अवागढ़) के राजा द्वारा अलीगढ़ के पूर्व विधायक और चंद्रचूड़ सिंह के पिता कैप्टन बलदेव सिंह के परदादा ठाकुर कल्याण सिंह को तीन गांव उपहार में दिए जाने के बाद हुआ था. यह संपत्ति मूल रूप से तत्कालीन जलालपुर गांव का हिस्सा थी, जो आज अलीगढ़ की शहरी सीमा में स्थित है. परिवार के सदस्यों ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समकालीन दिवंगत कैप्टन बलदेव सिंह के वंशजों और उनके सबसे छोटे भाई गंगा सिंह के बच्चों के बीच मतभेद वर्षों से गहराते गए.

गंगा सिंह 1965 के युद्ध में शामिल हुए थे और उन्होंने 1960 के दशक के अंत में परिवार की बड़ी संपत्ति संभालने के लिए सेना छोड़ दी थी. कभी कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे कैप्टन बलदेव सिंह ने 1989 में वी.पी. सिंह के साथ पार्टी छोड़ दी थी. बाद में उन्होंने जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन बीजेपी की शीला गौतम से मामूली अंतर से हार गए. उनकी पत्नी कृष्णा देवी ओडिशा के एक शाही परिवार से ताल्लुक रखती हैं.

रिश्तेदारों के अनुसार, गंगा सिंह ने 1990 के दशक के अंत में इस संपत्ति पर नियंत्रण तब संभाला था, जब कैप्टन बलदेव सिंह राजनीति में और बाद में अपने बेटों चंद्रचूड़ और अभिमन्यु सिंह के फिल्म निर्माण कार्यों में व्यस्त थे. उनकी चाची गायत्री देवी ने भी चंद्रचूड़ सिंह के दावों को चुनौती देते हुए जिला अधिकारियों से संपर्क किया था. गायत्री देवी गुजरात के एक शाही परिवार से ताल्लुक रखती हैं और दिवंगत गंगा सिंह की तलाकशुदा पत्नी हैं. चूंकि यह संपत्ति अब राष्ट्रीय राजमार्ग के पास घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है, इसलिए इसकी कीमत में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे यह विवाद और भी गहरा गया है.

ENTERTAINMENT : सुधीर दलवी के इलाज का खर्चा उठाएगा शिरडी संस्थान, कोर्ट से मिली मंजूरी, 11 लाख की मिलेगी मदद

मशहूर एक्टर सुधीर दलवी सेप्सिस बीमारी से पीड़ित हैं. उन्हें इलाज के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिरडी साई बाबा संस्थान को सुधीर के इलाज के लिए 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की अनुमति दी है. फैंस उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं.

मशूहर एक्टर सुधीर दलवी बुरे दौर से गुजर रहे हैं. वो सेप्सिस इंफेक्शन से जूझ रहे हैं. एक्टर के इलाज के लिए उनके परिवार ने आर्थिक मदद की मांग की थी. अब राहत की बात ये है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिरडी साई बाबा संस्थान को एक्टर सुधीर दलवी को आर्थिक मदद देने की अनुमति दे दी है.

बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने सुधीर दलवी को 11 लाख की आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी है. क्योंकि सुधीर इस वक्त मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हैं. उन्हें इलाज के लिए पैसे की जरूरत है. सुधीर ने लेजेंडरी एक्टर मनोज कुमार की फिल्म ‘शिरडी के साई बाबा’ में साई बाबा का किरदार निभाया था. इस रोल ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई. उनका काम लोगों ने इतना पसंद किया कि वो उन्हें साई बाबा का रूप समझकर पूजने लगे.

सुधीर को 11 लाख की फाइनेंशियल मदद देने की परमिशन के लिए संस्थान की ओर से कोर्ट में एप्लीकेशन फाइल की गई थी. क्योंकि हाई कोर्ट की तरफ से दिए आदेश के तहत, संस्थान को खर्चों के लिए हाईकोर्ट से इजाजत लेनी होगी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान संस्थान के वकील अनिल एस. बजाज ने बताया कि कोर्ट द्वारा गठित एड-हॉक कमेटी ने 86 साल के सुधीर को आर्थिक मदद देने का फैसला किया है.

बजाज ने बताया कि सुधीर को साई बाबा के रोल के लिए पूरे इंडिया में जाना जाता है. वो मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती थे. संस्थान को 30 अक्टूबर 2025 को एक लेटर मिला था जिसमें सुधीर के लिए 15 लाख की मदद मांगी गई थी.

जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और हितेन वेनेगांवकर की बेंच ने संस्थान से कहा कि वो डॉक्यूमेंट्स के साथ नया एफिडेविट फाइल करें. जिसमें ये मेंशन हो कि क्या सुधीर हॉस्पिटल के बिल चुकाने में असमर्थ हैं और उनकी फाइनेंशियल कंडीशन क्या है. कुछ ऐसे डॉक्यूमेंट्स भी पेश करने को कहा गया जिनसे पता चले कि सुधीर का क्या इलाज किया गया था. संस्थान ने सुधीर की पत्नी की तरफ से उनकी बीमारी को लेकर एक एक्सप्लेनेशन सौंपा. जिसमें बताया गया है कि सुधीर बिस्तर पर हैं. घर पर दो केयरटेकर और एक फिजियोथेरेपिस्ट की मदद से उनकी देखभाल की जा रही है.

सुधीर की हालत में सुधार 1 से डेढ़ साल साल में होगा. बेंच ने इन दस्तावेजों को देखकर माना कि सुधीर को फाइनेंशियल हेल्प की जरूरत है. इसके बाद कोर्ट ने संस्थान को एक्टर की मदद करने की अनुमति दी. सुधीर के जल्द ठीक होने के लिए फैंस दुआ मांग रहे हैं.

एक्टर ने फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काफी योगदान दिया है. उन्होंने फिल्म शिरडी के साई बाबा के अलावा सीरियल रामायण में भी काम किया है. वो ऋषि वशिष्ठ के रोल में दिखे. सुधीर शो विष्णु पुराण, बुनियाद, जुनून, क्योंकि सास भी कभी बहू थी भी कर चुके हैं.

NATIONAL : विश्वास, ममता और मासूमियत की हत्या… जिसने बेटी छीनी, उसी के बेटे को पिला रही दूध, पानीपत की थर्राती हुई कहानी

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हरियाणा के पानीपत में पुलिस ने पूनम नाम की साइको किलर को गिरफ्तार किया, जिसने 2023 से 2025 के बीच सुंदर बच्चों से जलन के कारण परिवार के चार मासूमों को पानी में डुबोकर मार डाला. संदेह से बचने के लिए उसने अपने बेटे को भी मार दिया. ताजा मामला नौलखा में 6 वर्षीय विधि की हत्या से खुला. विडंबना यह कि जिसकी बेटी मारी गई, वही पूनम के 2 साल के बेटे को आज दूध पिला रही है.

हरियाणा के पानीपत में ऐसी सनसनीखेज कहानी सामने आई है, जिसने सभी की संवेदनाओं को झकझोर दिया है. रिश्तों के विश्वास, मां की ममता और मासूमियत की सुरक्षा को एक ही झटके में तोड़ने वाली ‘साइको लेडी किलर’ पूनम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पानीपत पुलिस के मुताबिक, पूनम ने अपने ही परिवार और रिश्तेदारों के चार मासूम बच्चों की हत्या की. और हत्या भी इतनी खौफनाक वजह से, जिसे सुनकर पुलिस अफसर भी दंग रह गए. पूनम किसी भी अपने से ज्यादा सुंदर बच्चे को देख लेती, तो उसके अंदर जलन भड़क उठती थी और वह योजना बनाकर बच्चियों को पानी में डुबोकर मार देती थी.

यह कहानी इसलिए और भी भयावह हो जाती है क्योंकि संदेह से बचने के लिए उसने अपने सगे बेटे को भी उसी तरह मौत के घाट उतार दिया था. लेकिन आज विडंबना यह है कि उसी महिला के दो साल के बेटे को दूध पिलाने और संभालने वाली वही जेठानी है, जिसकी छह साल की बेटी विधि को पूनम ने बेरहमी से पानी में डुबोकर मार दिया.

पानीपत एसपी भूपेन्द्र सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि शुरुआती पूछताछ में पूनम ने चार बच्चों की हत्या का गुनाह कबूल कर लिया है. वह स्वीकारती है कि खूबसूरत बच्चों को देखकर उसके मन में अजीब सी आग जलती थी. उसे लगता था कि परिवार में उससे सुंदर, प्यारा या आकर्षक कोई भी बच्चा नहीं होना चाहिए. यही मानसिक बीमारी उसके अपराधों का कारण बनी. हर घटना में उसने बच्चों को अकेला पाकर पानी की हौद, टंकी या बड़े टब में डुबोकर जान ली.

13 जनवरी 2023 को सोनीपत के गांव भावड़ में पहली वारदात घटित हुई. पूनम की ननद पिंकी अपनी 11 साल की बेटी इशिका के साथ मायके आई हुई थी. जैसे ही पूनम को मौका मिला, उसने इशिका को घर के भीतर बने पानी के हौद में धक्का देकर डुबो दिया. हत्या के बाद उसे लगा कि परिवार को उस पर शक हो सकता है. इसलिए उसने अपने तीन साल के बेटे शुभम को भी उसी तरह डुबोकर मार दिया. इसके बाद उसने कहानी रची कि शुभम खेलते-खेलते टंकी में गिर गया था और इशिका उसे बचाने के चक्कर में डूब गई. परिवार सदमे में इसे हादसा मान बैठा.

18 अगस्त 2025 को पूनम अपने मायके, गांव सिवाह, आई हुई थी. रात में वह अपने भाई दीपक के घर सोने चली गई. वहीं उसकी नजर दीपक की 10 साल की बेटी जिया पर पड़ी. जिया गहरी नींद में थी. पूनम उसे उठाकर बहाने से अपने पशुबाड़े की तरफ ले गई. वहां पानी की हौद में सिर दबाकर उसे मार दिया. जिया के ताऊ ने संदेह भी जताया, लेकिन पूनम की मां उसकी ढाल बन गईं और आरोपों को झूठ बताते हुए उल्टा कार्रवाई की धमकी दे दी. परिवार फिर चुप हो गया, और हत्या हादसे में बदल गई.

सबसे ताजा घटना ने पूरे पानीपत को हिला दिया. 1 दिसंबर को नौलखा गांव में शादी समारोह था. पूनम की जेठानी की छह साल की बेटी विधि भी शादी में आई हुई थी. बच्ची की मासूम सुंदरता को देखकर पूनम के भीतर वही पुरानी जलन भड़क उठी. दिन में अमन की बारात रवाना हो चुकी थी, घर में सिर्फ महिलाएं और कुछ बच्चे बच गए थे. इसी बीच पूनम ने विधि को सीढ़ियों से ऊपर छत की तरफ जाते देखा. वह उसके पीछे चली गई. छत के स्टोर रूम के बाहर बड़े प्लास्टिक के टब में पानी भरा था. पूनम ने विधि को टब में बैठने को कहा. जैसे ही बच्ची अंदर हुई, उसने उसकी गर्दन दबाकर पानी में डुबो दिया. कुछ देर बाद जब विधि दिखाई नहीं दी, तो परिवार ने तलाश शुरू की, और बच्ची टब में मृत मिली. शुरू में इसे फिर हादसा माना गया, लेकिन परिवार में लगातार बच्चों के इसी तरह मरने की श्रृंखला ने पुलिस को सचेत कर दिया. जांच में जब पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ी गईं, तो पूरा खेल सामने आ गया.

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