Thursday, April 30, 2026
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NATIONAL : ‘मोबाइल छोड़ो, पढ़ाई पर ध्यान दो’, MBA स्टूडेंट को रास नहीं आई रिश्तेदार की नसीहत, कर ली खुदकुशी

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दिल्ली के विकास नगर में 20 वर्षीय एमबीए छात्र ने कथित तौर पर अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस के अनुसार, सागरपुर स्थित आईआईडीएम कॉलेज का यह छात्र तब नाराज हो गया जब एक रिश्तेदार ने उसे मोबाइल फोन छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी.

दिल्ली के विकास नगर इलाके में एक एमबीए छात्र ने कथित तौर पर अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस के अनुसार, युवक के एक रिश्तेदार ने उसे मोबाइल फोन में समय बिताने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी थी, जिसके बाद उसने यह कदम उठा लिया. पुलिस ने बताया कि 20 वर्षीय यह छात्र सागरपुर स्थित आईआईडीएम कॉलेज में पढ़ता था. उसने मंगलवार को अपने घर में दुपट्टे से पंखे पर लटककर जान दे दी.

मंगलवार को पुलिस को आशीर्वाद अस्पताल से कॉल मिली कि एक एमबीए छात्र को फांसी लगाने के बाद मृत हालत में लाया गया है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उसने तब आत्महत्या की जब एक रिश्तेदार ने उसे मोबाइल फोन छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा था. परिजन पहले उसे आशीर्वाद अस्पताल और बाद में दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले गए.

अधिकारी ने बताया, ‘शव को पोस्टमॉर्टम के लिए संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में सुरक्षित रखा गया है.’ उन्होंने बताया कि परिवार ने किसी भी तरह की साजिश का आरोप नहीं लगाया है, और जांच की प्रक्रिया चल रही है.इसी क्षेत्र में एक और घटना में 17 वर्षीय लड़की ने कथित तौर पर खुद पर टरपेंटाइन ऑयल डालकर आग लगा ली, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई. पुलिस ने बताया कि अब तक किसी भी मामले में कोई साजिश या बाहरी हस्तक्षेप का संदेह नहीं है.

पुलिस को राठी अस्पताल से सूचना मिली थी कि एक लड़की को गंभीर रूप से जलने के बाद लाया गया है. जांच में पता चला कि वह विकासनगर स्थित एक सरकारी स्कूल में कक्षा 9 की छात्रा थी और 3-4 नवंबर की रात तीसरी मंजिल पर अकेली सो रही थी.

सुबह उसकी बहन ने उसे आग की लपटों में देखा और तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे एम्स रेफर किया गया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाज के दौरान लड़की की मौत हो गई. अधिकारी ने कहा, ‘मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और फिलहाल किसी साजिश का शक नहीं है. परिवार, पड़ोसियों और स्कूल शिक्षकों से पूछताछ की जा रही है.’ एक अन्य अधिकारी ने बताया कि वह परिवार में लगातार झगड़ों से परेशान थी और कुछ महीने पहले उसने अपना सिर मुंडवा लिया था.

UP : मैरिज हॉल में बारात के स्वागत में जुटा था परिवार, उधर घर से चोरी हो गए दुल्हन के 21 लाख के जेवर

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बिजनौर जिले में बेटी की शादी की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब निकाह के दौरान चोरों ने दहेज के लिए रखे 15 तोला सोना और ₹75,000 नकद उड़ा लिए. परिजन बैंकट हॉल में शादी में व्यस्त थे, तभी घर का ताला तोड़कर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया. घटना से शादी का माहौल गमगीन हो गया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र में एक दर्दनाक वाकया सामने आया है. यहां एक बेटी की शादी की खुशियां अचानक गम में बदल गईं जब उसकी शादी में ही चोरी हो गई. दरअसल, लड़की की शादी के दिन ही में चोरों ने घर का ताला तोड़कर 15 तोला सोने के जेवर और ₹75,000 नकद चोरी कर लिए.

जानकारी के अनुसार, नगीना निवासी दिलशाद अहमद की बेटी की शादी 4 नवंबर को एक स्थानीय बैंकट हॉल में थी. बारात नजीबाबाद से नगीना पहुंच चुकी थी, निकाह की तैयारियां चल रही थीं, और परिवार के सभी सदस्य मेहमानों के स्वागत में व्यस्त थे. इधर, घर को ताला लगाकर सभी लोग बैंकट हॉल चले गए थे.

निकाह के बाद जब बेटी की विदाई का समय आया, तो दिलशाद अहमद ने अपने भतीजे को घर भेजा ताकि दहेज में दिए जाने वाले जेवर और अन्य सामान लाया जा सके. लेकिन जब भतीजा घर पहुंचा तो उसने देखा कि मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ है. अंदर जाकर देखा तो अलमारी का ताला भी टूटा हुआ था और उसके अंदर रखे सोने के जेवर और नकदी गायब थे. गौरतलब है कि चोरी हुआ 15 तोला सोना लगभग 174 ग्राम हुआ जिसकी आज के समय में कीमत तकरीबन 21 लाख हुई.

उसने तुरंत अपने चाचा दिलशाद अहमद को सूचना दी. दिलशाद अहमद के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया. परिवार की महिलाओं की आंखों में आंसू थे और शादी का खुशहाल माहौल गम में बदल गया. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरे चेक किए, लेकिन चोरों का कोई सुराग नहीं मिल सका. पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और चोरों की तलाश में टीम लगी हुई है.

पीड़ित पिता दिलशाद अहमद ने कहा, ‘बेटी की विदाई के वक्त यह हादसा हुआ. जो जेवर दहेज में देने थे, वही चोरी हो गए. हमारी खुशियां उजड़ गईं.’ चोरी की इस घटना से स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि इलाके में गश्त न होने के कारण ऐसी वारदातें बढ़ रही हैं.

NATIONAL : दरिंदगी, तस्करी और मौत से जंग… दिल दहला देगी दो साल की बेबी फलक की दर्दनाक कहानी

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दिल्ली के एम्स में भर्ती दो साल की फलक की कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इंसानी दरिंदगी, मानव तस्करी और मौत से जंग की ये दर्दनाक सच्चाई किसी भी इंसान का कलेजा छलनी कर सकती है. पढ़ें एक मासूम के साथ दरिंदगी की खौफनाक कहानी.

शेफाली शाह की वेब सीरीज़ दिल्ली क्राइम के सीज़न 3 की हर तरफ चर्चा हो रही है. समीक्षकों ने नेटफ्लिक्स की इस सीरीज़ को खूब सराहा है. यहां तक कि इस सीरीज़ ने अंतर्राष्ट्रीय एमी पुरस्कार जीता है. जघन्य अपराधों का संवेदनशील चित्रण करने वाली इस सीरीज़ का यह सीजन साल 2012 के कुख्यात बेबी फलक केस पर आधारित है. जिसकी कहानी आपको सन्न कर देगी. आइए आपको बताते हैं कि आखिर दिल्ली का बहुचर्चित बेबी फलक केस क्या था?

13 साल पहले दो साल की उस मासूम बच्ची को लहूलुहान हालत में एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया था.कोई नहीं जानता था कि वो कौन है? कहां से आई है? या किसने उसके साथ ये बर्बरता की? सब उसे बचाने में जुट गए थे. डॉक्टर, नर्सें और देशभर के लोग जो उसके लिए दुआ कर रहे थे. लेकिन किस्मत ने इस नन्ही जान पर रहम नहीं किया. फलक की कहानी सिर्फ एक बच्ची की नहीं, बल्कि उस समाज की है जहां मासूमियत भी सुरक्षित नहीं.

वो एक ठंडी शाम थी. दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में अचानक एक 15 साल की लड़की दाखिल हुई. उसकी गोद में दो साल की एक मासूम घायल बच्ची थी, जो बेहोश थी. उस लड़की ने खुद को बच्ची की मां बताया और स्टाफ से बोली कि बच्ची बिस्तर से गिर गई थी. डॉक्टरों ने बच्ची को देखा तो उसे देखकर वो सन्न रह गए. उस मासूम का सिर फट चुका था, दोनों बाजू टूटे हुए थे. पूरे शरीर पर इंसानी दांतों से काटने के निशान थे. उसके गालों पर गर्म लोहे से दागे जाने के निशान थे. यह कोई सामान्य गिरना नहीं लग रहा था. डॉक्टरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया गया.

डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने कभी इतनी बुरी हालत में किसी बच्चे को नहीं देखा. यह केस ‘बैटर्ड बेबी सिंड्रोम’ का लग रहा था, जो भारत में दुर्लभ था. जो लड़की बच्ची को लेकर वहां आई थी, वो अचानक गायब हो गई थी. बच्ची की पहचान और नाम अज्ञात था. लिहाजा, ICU में तैनात नर्सों ने ही उसे प्यार से ‘फलक’ नाम दे दिया. धीरे-धीरे देशभर के लोगों का ध्यान उस बच्ची पर गया और हर कोई उसके ठीक होने की दुआ करने लगा. लेकिन पुलिस के लिए असली सवाल था ये था कि आखिर ये बच्ची कौन थी? और उसके साथ ये दरिंदगी किसने की थी?

एम्स के ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर सुमित सिन्हा और उनकी टीम फलक का इलाज कर रहे थे. स्कैनिंग से पता चला कि उसके दिमाग में खून का थक्का था. इंसानी काटने के निशान उसके छोटे शरीर पर फैले हुए थे, जो किसी करीबी रिश्तेदार की क्रूरता की ओर इशारा कर रहे थे. डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची का ये हाल लगातार प्रताड़ना की वजह से हुआ था. फलक को वेंटिलेटर पर रखा गया था. वह कोमा में थी. सांस लेने में दिक्कत हो रही थी.

उधर, पुलिस इस मामले की छानबीन में जुट गई थी. इसी के चलते पुलिस ने 15 साल की उस लड़की को हिरासत में ले लिया था, जो बच्ची को अस्पताल लेकर आई थी. वो लड़की घबरा रही थी और साफ तौर पर कुछ बता नहीं पा रही थी. पुलिस ने उस लड़की को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हवाले कर दिया. बाद में उसे जुवेनाइल होम भेज दिया गया.

दिल्ली पुलिस उस मासूम की असली मां की तलाश शुरू कर चुकी थी. इसी के चलते 1 फरवरी 2012 को पुलिस ने दावा करते हुए कहा कि उन्होंने बच्ची की असली मां ‘मुन्नी’ को ढूंढ निकाला है. 27 साल की मुन्नी बिहार की रहने वाली थी. जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि मुन्नी के तीन बच्चे थे. फलक, उसका पांच साल का भाई और तीन साल की बहन सनोबर. मुन्नी को दो महिलाओं ने धोखा दिया था. वे दोनों वादा करके उसे बिहार से दिल्ली लाईं, फिर दूसरे विवाह के नाम पर उसे बेच दिया. उन दोनों ने मुन्नी की शादी राजस्थान के एक किसान से करवा दी थी. बदले में उसके बच्चों को रखने का वादा किया. लेकिन उन दोनों महिलाओं ने उसके तीनों बच्चों को अलग अलग लोगों को बांट दिया. फलक की बहन सनोबर को बिहार भेज दिया. फलक और उसके भाई को कहीं और भेजा. आखिरकार फलक एक किशोरी के पास पहुंच गई. वो 15 साल की नाबालिग लड़की खुद एक शादीशुदा आदमी के साथ रह रही थी. हकीकत ये थी कि मुन्नी की जिंदगी मानव तस्करों के झांसे में आ गई थी.

मुन्नी ने पुलिस को बताया कि सितंबर 2011 में लक्ष्मी नाम की महिला ने उसे दिल्ली लाने का लालच दिया. फिर लक्ष्मी और कांति चौधरी नामक महिलाओं ने उसे धोखे से दूसरी शादी के लिए राजस्थान भेज दिया. उन दोनों ने मुन्नी के बच्चों को दिल्ली में ही रखने का वादा किया था. लेकिन लक्ष्मी ने फलक को मनजोत नाम के आदमी को सौंप दिया. मनजोत ने उसे राजकुमार को दे दिया. राजकुमार एक आपराधिक पृष्ठभूमि का शख्स था. उसका असली नाम मोहम्मद दिलशाद बताया गया. उसने फलक को अपनी 15 साल की प्रेमिका को सौंप दिया था. जबकि वो नाबालिग लड़की खुद तस्करी की शिकार थी. उस नाबालिग लड़की के बारे में पता चला कि उसके पिता विजेंद्र ने उसे बेचा था. उसे खरीदने वाले संदीप और आरती ने उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया. यही नहीं, राजकुमार ने भी जमकर उसका शोषण किया. अब मासूम फलक भी इसी चक्र में फंस गई थी.

आईसीयू में भर्ती होने के साथ ही फलक को ब्रेन सर्जरी की जरूरत थी. डॉक्टर दीपक अग्रवाल के मुताबिक, उसके दिमाग में पानी जमा हो रहा था. यही वजह थी कि उसकी छह ब्रेन सर्जरी हुईं थी. पहली सर्जरी में खून का थक्का निकाला गया था. शंट सर्जरी से उसके दिमाग का पानी निकाला गया. वह मेनिन्जाइटिस की चपेट में आ गई थी. फेफड़ों, खून और दिमाग में संक्रमण फैल गया था. डॉक्टरों ने कई एंटीबायोटिक्स उस पर आजमाए. वो एक महीने से ज्यादा वक्त तक वेंटिलेटर पर रही. उसे सांस लेने में तकलीफ थी. 17 फरवरी 2012 को वो ब्रेन इंफेक्शन से उबर गई थी. लेकिन उसे दो हार्ट अटैक हो चुके थे. लेकिन वो जिंदा थी. उस वक्त डॉक्टरों ने कहा था कि यह चमत्कारिक बच्ची है.

उस वक्त नर्सें कहतीं थीं कि फलक रोती थी तो पूरा वार्ड उसकी तरफ दौड़ पड़ता था. वह आंखें खोलती थी, उसके अंगों में हलचल दिखती थी. लेकिन वो दर्द से तड़पने लगती थी. उसका इलाज महंगा था, लेकिन एम्स की टीम ने हार नहीं मानी. फलक की जिंदगी उनके लिए एक जंग बन गई थी.

फरवरी के अंत तक फलक की सेहत में सुधार दिखने लगा था. लिहाजा 2 मार्च 2012 को उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया. अब उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था. डॉक्टरों ने कहा कि वह पूरी तरह ठीक हो रही है. नर्सें बतातीं है कि फलक खुद सांस ले रही थी. वह नर्सों के साथ खेलने लगी थी. आईसीयू से बाहर आने पर सबने उसे ‘मिरेकल बेबी’ कहना शुरू कर दिया था. डॉक्टरों का मानना था कि डिस्चार्ज जल्द हो सकता है. लेकिन उसकी अनियमित दिल की धड़कनें समस्या बन रही थीं. उस वक्त फलक की कहानी मीडिया में छाई रही. पूरे भारत में लोग उसके लिए दुआएं मांग रहे थे. अमेरिका और कनाडा से एडॉप्शन के ऑफर आ रहे थे. लोग कहते थे कि अगर वो ठीक हो जाए तो हम गोद लेंगे. नर्सों का कहना था कि फलक से सब जुड़ गए थे. उसकी मुस्कान पर सब मुस्कुराते थे. लेकिन डॉक्टर जानते थे कि ब्रेन डैमेज स्थायी हो सकता है. फिर भी उम्मीद की किरण जल रही थी.

15 साल की जिस किशोरी को पुलिस ने हिरासत में लिया था, उसका नाम गुड़िया उर्फ लक्ष्मी था. उसने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि राजकुमार ने नवंबर 2011 में फलक को उसके हवाले किया था. मगर वह अकेली बच्ची को संभाल नहीं पा रही थी. फलक रोती रहती थी, तो वो उसने गुस्से में दीवार से मासूम का सिर ठोक दिया था. गर्म लोहे से उसके गाल दागे थे. उसी ने मासूम बच्ची के जिस्म पर जगह जगह काटा था. मासूम फलक के साथ उसी ने ये दरिंदगी की थी. 17 जनवरी की रात फलक रोती रही तो तब वो खुद उसे लेकर एक निजी अस्पताल में गई थी. जहां से उसे एम्स रैफर किया गया था.

पुलिस ने उस लड़की के बयान दर्ज किए. लड़की ने पुलिस को आगे बताया कि वह खुद शोषित थी. उसके पिता ने उसे बेच दिया था. संदीप नाम के एक शख्स ने तीन दिन तक उसके साथ बलात्कार किया था. इस काम में एक महिला भी उसके साथ थी. फिर संदीप ने उसे वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया था. इसी दौरान वो लड़की राजकुमार से मिली, लेकिन वह भी उसका जिस्म नोंचता रहा. उसका शोषण करता रहा.

पुलिस की टीम ने फलक केस में छापेमारी शुरू की. पहले लक्ष्मी और कांति चौधरी को गिरफ्तार किया. वे दोनों ही तस्करी की मुख्य आरोपी थीं. फिर संदीप और आरती को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने किशोरी को वेश्यावृत्ति में धकेला था. बाद में किशोरी के पिता विजेंद्र को भी पकड़ा लिया गया. जबकि राजकुमार फरार था, लेकिन 13 मार्च 2012 को उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में कुल 10 लोग गिरफ्तार किए गए थे. फलक का पांच साल का भाई उत्तम नगर के एक विक्रेता के घर से बरामद हुआ. जबकि उसकी बहन सनोबर मुजफ्फरपुर, बिहार में ट्रेस की गई.

पुलिस ने इस मामले में पांच टीमें बनाईं थी. डीसीपी छाया शर्मा ने बताया था कि यह किडनैपिंग और मानव तस्करी का केस है. मुन्नी को राजस्थान से लाया गया. 15 फरवरी को मुन्नी फलक से मिली थी. उसका रो रो कर बुरा हाल था. उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी बच्ची इस हाल में होगी. इसके बाद मुन्नी को नई दिल्ली के निर्मल छाया कॉम्प्लेक्स शेल्टर होम में रखा गया था. इन गिरफ्तारियों ने मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया था. लेकिन फलक की जिंदगी बचाने का समय निकल चुका था.

मार्च 2012 तक फलक ठीक लग रही थी. डॉक्टर डिस्चार्ज की तैयारी कर रहे थे. लेकिन 15 मार्च की रात 9:40 बजे उसे तीसरा हार्ट अटैक आया. वह बिस्तर पर सो रही थी. अचानक ‘कार्डियक एरिद्मिया’ से दिल की धड़कन बिगड़ गई. डॉक्टरों ने रिवाइव करने की पूरी कोशिश की, लेकिन 9:40 पर फलक के दिल की धड़कन हमेशा के लिए थम गई थी. डॉक्टर दीपक अग्रवाल ने कहा था कि यह अचानक हुआ. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ‘कार्डियक एरिद्मिया’ यानी हार्टबीट के अनियमित होने की पुष्टि हुई. वह जिंदगी के लिए 56 दिनों तक लड़ी. 6 सर्जरी झेलीं. दो हार्ट अटैक से उबरी. लेकिन तीसरा अटैक उसे हमेशा के लिए सुला गया. उसकी मौत पर अस्पताल में मातम का मंजर था. नर्सें रो रही थीं. तब एक नर्स ने कहा था कि फलक उनकी बेटी बन गई थी. अब वह नहीं रही, दिल टूट गया. उसकी मौत की खबर से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी.

16 मार्च 2012 को फलक को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला कब्रिस्तान में दफनाया गया. हजारों लोग शोक में डूबे थे. उसके दफीने में एम्स के डॉक्टर भी शामिल हुए थे. मुन्नी फूट-फूटकर रोई थी. सनोबर और उसके भाई को सुरक्षा में रखा गया था. पुलिस ने कहा था कि केस मेडिको-लीगल है, जांच जारी है.

गृह मंत्रालय ने इसे मानव तस्करी का केस घोषित किया था. साल 2010 में भारत में तस्करी के मामले 20% बढ़े थे. फलक की कहानी हजारों अनजान बच्चों का दर्द बयां करती है. मुख्य आरोपी राजकुमार उर्फ मोहम्मद दिलशाद और उसकी किशोर प्रेमिका लक्ष्मी को सजा मिली. फलक की कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई नई नीतियों की मांग उठी थी. आज भी जब कोई ‘बेबी फलक केस’ का नाम लेता है, तो लोगों की आंखों में आंसू और दिल में सवाल उठता है कि इंसानियत इतनी बेरहम कैसे हो सकती है?

JK : मुस्लिम संगठनों के समूह ने सरकार से स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ आदेश वापस लेने को कहा

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जम्मू-कश्मीर के मुस्लिम संगठनों के समूह MMU ने स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ गायन को अनिवार्य करने का आदेश तुरंत वापस लेने की मांग की है. MMU ने कहा कि राष्ट्रगीत के कुछ अंश इस्लाम के एकेश्वरवाद (तौहीद) के खिलाफ हैं, क्योंकि यह अल्लाह के अलावा किसी और के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की अनुमति नहीं देता है. MMU ने आरोप लगाया कि यह “सांस्कृतिक उत्सव की आड़ में” हिंदुत्व विचारधारा थोपने का प्रयास है और प्रशासन से धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करने का आग्रह किया है.

जम्मू-कश्मीर के कई धार्मिक संगठनों के समूह मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) ने सरकार से स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ के गायन से संबंधित आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है. MMU का कहना है कि राष्ट्रगीत के कुछ अंश इस्लामिक अकीदे (एकेश्वरवाद/तौहीद) के खिलाफ हैं.

मीरवाइज उमर फारूक की अध्यक्षता वाली MMU ने एक बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा जारी हालिया निर्देश पर गंभीर चिंता है. इस निर्देश में स्कूलों से ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है, जिसमें सभी छात्रों और कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

MMU ने स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम’ गाना या उसका पाठ करना गैर-इस्लामी है, क्योंकि इसमें भक्ति के ऐसे भाव शामिल हैं जो इस्लाम के मूल विश्वास, यानी अल्लाह की परम एकता (तौहीद), के विपरीत हैं.

बयान में कहा गया है कि इस्लाम किसी भी ऐसे कार्य की अनुमति नहीं देता है जिसमें निर्माता (Creator) के अलावा किसी और की पूजा या उसके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती हो. MMU ने तर्क दिया कि मुसलमानों को अपने देश से प्यार करना और उसकी सेवा करना सिखाया जाता है, लेकिन यह भक्ति सेवा, करुणा और समाज में योगदान के माध्यम से व्यक्त की जानी चाहिए, न कि आस्था के खिलाफ जाने वाले कृत्यों से.

MMU ने इस सरकारी निर्देश को “सांस्कृतिक उत्सव की आड़ में” मुस्लिम-बहुल क्षेत्र पर “आरएसएस-प्रेरित हिंदुत्व विचारधारा” थोपने का जानबूझकर किया गया प्रयास बताया. MMU ने कहा कि यह कदम वास्तविक एकता और विविधता के प्रति सम्मान को बढ़ावा नहीं देता है.MMU ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इस “जबरन आदेश” को तुरंत वापस लें, जिसने सभी मुसलमानों को पीड़ा पहुंचाई है. संगठन चाहता है कि किसी भी छात्र या संस्था को उनकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत कार्य करने के लिए बाध्य न किया जाए.

NATIONAL : बीमार बेटियां, विदेश की प्रॉपर्टी और दैवीय साया… पुणे के कपल से 14 करोड़ की ठगी की सनसनीखेज कहानी

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पुणे में अंधविश्वास की ऐसी चौंकाने वाली कहानी सामने आई है, जिसमें एक कपल अपनी बीमार बेटियों के इलाज की उम्मीद में एक महिला के झांसे में आकर करीब 14 करोड़ रुपये गंवा बैठे. आरोपी महिला खुद को किसी दिव्यात्मा का माध्यम बताती थी. तीन साल तक ‘चमत्कार’ के नाम पर परिवार से पैसा, घर, जमीन, यहां तक कि विदेश में मौजूद प्रॉपर्टी तक बिकवा दी.

यह कहानी पुणे में रहने वाले एक परिवार की है. निजी फर्म में कार्यरत पति-पत्नी की जिंदगी अपने घर, नौकरी और दो प्यारी बेटियों के साथ गुजर रही थी. इनकी दो बच्चियों की बीमारी ने माता-पिता को झकझोर कर रख दिया. एक बेटी को एलोपेशिया (सिर के बाल झड़ना) और दूसरी को भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या थी. इलाज, डॉक्टर, दवाइयां सब कुछ आजमाया जा चुका था, लेकिन राहत नहीं मिली. यहीं से शुरू होती है एक ऐसी कहानी जो अंधविश्वास, भरोसे और दहला देने वाली ठगी तक जा पहुंचती है.

जानकारी के अनुसार, एक दिन एक पड़ोसी के माध्यम से इस कपल की मुलाकात होती है वेदिका कुणाल पंढरपुरकर से. वेदिका अपने आपको साधारण महिला नहीं, बल्कि यह कहती थी कि उनके शरीर में समय-समय पर पुण्यात्मा का प्रवेश होता है. वह बड़े शांत स्वर में कहती थी- बाबा खुद आए हैं तुम्हारे घर की बच्चियों को ठीक करने… लेकिन इसके लिए पूर्ण त्याग और दान जरूरी है.

दंपति, जिनकी दुनिया बस अपनी बेटियों की खुशी थी, एक उम्मीद की किरण देख लेते हैं. वेदिका की आंखें बंद होतीं, वह कांपती, बदली हुई आवाज में बोलती- बेटियों की बीमारी जल्द खत्म होगी… लेकिन तुम्हें घर में नारियल, सुपारी, काले पत्थर रखने होंगे और महादान देना होगा.

धीरे-धीरे वेदिका उसके पति कुणाल और उनके साथी दीपक खडके ने इस कपल को विश्वास के ऐसे जाल में फंसाया कि वे अपनी पूरी जिंदगी की कमाई दान करने लगे. सबसे पहले बेचा गया छोटा घर. फिर खेत, जमीन, और विदेश में मौजूद उनकी प्रॉपर्टी. बेटियों को ठीक करने की ‘मन्नत’ में उन्होंने सोना गिरवीं रखा, बैंक से कर्ज लिया और खाते से करोड़ों रुपये ट्रांसफर करते गए.

हर बार जब कपल चिंतित होते, तो वेदिका महाराज की आवाज में समझाती – इतनी बड़ी बीमारी उतने बड़े त्याग से ही मिटेगी. बाबा सब देख रहे हैं… देर हो रही है, जल्दी करो. समय बीतता गया, लेकिन बच्चियों की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ. वहीं, वेदिका का रहन-सहन बदलने लगा. एक दिन बच्चियों के पिता ने साहस करके पूछा कि इलाज कब पूरा होगा? वेदिका ने कहा कि आस्था कम पड़ रही है… इसलिए चमत्कार भी रुक रहा है. इसके बाद संदेह शुरू हुआ.

आखिरकार, बच्चियों के माता-पिता ने हिम्मत जुटाकर पूरा ब्योरा और सबूतों के साथ पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि किस तरह वेदिका और उसके साथियों ने उन्हें चमत्कार के नाम पर मानसिक रूप से कंट्रोल कर पूरी संपत्ति हड़प ली. अब पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस मामले में तीनों आरोपी वेदिका, उसका पति कुणाल और दीपक खडके जांच के दायरे में हैं.

सवाल सिर्फ रकम का नहीं, भरोसे के टूटने का भी है. यह कहानी 14 करोड़ रुपये के नुकसान के साथ यह भी सवाल करती है कि क्या अंधविश्वास इतना शक्तिशाली है कि इंसान अपनी वास्तविकता से दूर हो जाए? या फिर यह दर्द किसी भी माता-पिता के दिल का है, जो अपनी संतानों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर जांच में जुटी है और ठगी की पूरी कहानी की पड़ताल कर रही है.

UP : गहरी नींद में थे यात्री, तभी हाइवे से 20 फीट नीचे गिर गई स्लीपर बस, मची चीख-पुकार

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उन्नाव में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर 60 यात्रियों को ले जा रही डबल डेकर बस पिकअप से टकराकर 20 फीट खाई में पलट गई. बुधवार देर रात हुए इस हादसे में लगभग 20 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है. पुलिस ने बस की खिड़कियां तोड़कर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर करीब 60 यात्रियों को ले जा रही एक डबल डेकर स्लीपर बस पलट गई. इस हादसे में लगभग 20 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए और कई अन्य को मामूली चोटें आईं. क्षेत्राधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि यह दुर्घटना बुधवार देर रात जिले के हसनपुर इलाके के पास हुई.

पुलिस के मुताबिक, आगरा से लखनऊ जा रही बस सब्जियों से भरे एक पिकअप वाहन से टकरा गई, जिसके बाद बस डिवाइडर तोड़कर सड़क किनारे खाई में गिर गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दुर्घटना के समय बस तेज गति से चल रही थी. वहीं, सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस की टीमें मौके पर पहुंची और बस की खिड़कियां तोड़कर यात्रियों को बचाया. घायलों में कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

उन्नाव पुलिस ने बताया कि घायलों को औरास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायलों को उन्नत इलाज के लिए लखनऊ के अस्पतालों में रेफर कर दिया गया. उन्हें लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया है.

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हसनगंज थाना क्षेत्र में बीती रात करीब 2 बजे, बिहार नंबर की एक डबल डेकर बस (BR28 P 9488) अनियंत्रित होकर हाइवे से 20 फीट नीचे गिर गई. हादसे के वक्त बस में सवार लगभग 60 यात्री गहरी नींद में थे, जिससे चीख-पुकार मच गई.

दुर्घटना में 20 सवारियां गंभीर रूप से घायल हो गईं. सूचना मिलते ही सीओ हसनगंज भारी पुलिस बल और यूपीडा (UPIDA) अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. पुलिस ने सभी घायलों को एम्बुलेंस से लखनऊ के अस्पताल भेज दिया, जहां उनका इलाज चल रहा है. बस लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, और अंबेडकर नगर के यात्रियों कोलेकर बनारस की ओर जा रही थी. कुछ यात्रियों के अनुसार, यह दुर्घटना ड्राइवर को नींद आने के कारण हुई. अन्य यात्रियों को दूसरी बस से रवाना किया गया.

BIHAR : बिहार की जनता से कन्हैया कुमार की अपील- ‘घर-घर नौकरी पाने और पलायन रोकने के लिए करें वोट’

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बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बीच कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार का बड़ा बयान आया है. उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि लोकतंत्र के महापर्व को धूमधाम से मनाएं और अपने मताधिकार का प्रयोग करें.

कन्हैया कुमार ने कहा, “लोकतंत्र में किसी भी नागरिक की सबसे पहली जिम्मेदारी है कि महापर्व (चुनाव) में हिस्सा लें. बिहार के सभी मतदाताओं से अपील करते हैं कि पहले चरण की वोटिंग हो रही है. पहले मतदान फिर कोई दूजा काम.” कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा, “हम जो लोगों से बात कर रहे हैं उनके भीतर जो एक शांति है… दरअसल, नाराजगी पल रही है. इस नाराजगी को बदलाव के रूप में परिवर्तित करें और घर-घर नौकरी के लिए मतदान करें. पलायन को रोकने के लिए मतदान करें.”

BUSINESS : देव दिवाली पर फीकी पड़ी सोने की चमक, जानें 5 नवंबर को आपके शहर का ताजा रेट

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देव दिवाली के शुभ अवसर पर देश में हर तरफ त्योहार की उत्साह है. वहीं आज सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिल रहा हैं. दोनों ही बहुमूल्य धातु की कीमत पिछले दो दिनों से लगातार गिर रही है. देव दिवाली के शुभ अवसर पर देश में हर तरफ त्योहार की उत्साह है. वहीं आज सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिल रहा हैं. दोनों ही बहुमूल्य धातु की कीमत पिछले दो दिनों से लगातार गिर रही है.

बाजार जानकारों का मानना हैं कि, डॉलर की मजबूती और फेड के आक्रामक रुख के कारण गोल्ड पर दबाव है. वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है. आज, 5 नवंबर को जानें आपके शहर में सोने के क्या है ताजा रेट.

दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,630 रुपए
22 कैरेट – 1,11,500 रुपए
18 कैरेट – 91,260 रुपए

मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,480 रुपए
22 कैरेट – 1,11,350 रुपए
18 कैरेट – 91,110 रुपए

चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,970 रुपए
22 कैरेट – 1,11,800 रुपए
18 कैरेट – 93,250 रुपए

कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,480 रुपए
22 कैरेट – 1,11,350 रुपए
18 कैरेट – 91,110 रुपए

अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,530 रुपए
22 कैरेट – 1,11,400 रुपए
18 कैरेट – 91,160 रुपए

लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,630 रुपए
22 कैरेट – 1,11,500 रुपए
18 कैरेट – 91,260 रुपए

चंडीगढ़ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,630 रुपए
22 कैरेट – 1,11,500 रुपए
18 कैरेट – 91,260 रुपए

भुवनेश्वर में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,630 रुपए
22 कैरेट – 1,11,500 रुपए
18 कैरेट – 91,260 रुपए

हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,21,480 रुपए
22 कैरेट – 1,11,350 रुपए
18 कैरेट – 91,110 रुपए

नवंबर महीने की शुरुआत हो गई है. इस महीने से भारत में शादियों का सीजन शुरु हो रहा है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि, सोने की मांग बढ़ सकती है. सोने के भाव में हर दिन उतार-चढ़ाव हो रहा है. हालांकि, आज, 5 नवंबर को इसकी कम हुई कीमतों से निवेशकों के पास एक मौका है कि, वे सोना में निवेश कर सकते हैं.

निवेशक तो शुरु से ही सोने और चांदी जैसे बहुमूल्य धातु पर अपना दांव लगाते आए है. सोना वैश्विक स्तर पर चल रही अनिश्चितताओं से निवेशकों का बचाने का काम करती हैं. यहीं कारण है कि, लोग सोना में निवेश को एक सेफ निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं. भारत में सोना और चांदी की खरीदी तो सांस्कृतिक रुप से भी भारतीयों से जुड़ा हुआ हैं. भारतीय किसी शुभ अवसर पर सोना खरीदने को शुभ मानते हैं.

ENTERTAINMENT : ‘तुम कौन हो?’, फरहाना ने मारे ताने, गुस्से से तिलमिलाए गौरव खन्ना, बोले- मैं TV का सुपरस्टार हूं…

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रियलिटी शो बिग बॉस में गौरव खन्ना छाए हुए हैं. बीते हफ्तों में उनका गेम बेहतर हुआ है. आने वाले एपिसोड में दिखाया जाएगा कि उनकी फरहाना भट्ट संग लड़ाई हुई है. गौरव ने फरहाना को चुनौती दी कि वो शो में आखिर तक रहेंगे. फिनाले में वो उनके लिए ताली बजाएंगी.

बिग बॉस 19 में गेम रोमांचक मोड़ पर है. फिनाले के करीब आते ही हर कंटेस्टेंट ने अपना बेस्ट गेम खेलना शुरू कर दिया है. गौरव खन्ना और मृदुल तिवारी का गेम भी अप हुआ है. गौरव जो कि पहले एपिसोड में पासिंग शॉट देते नजर आते थे. अब खुलकर अपनी राय रखने लगे हैं. उनका गेम देखकर बीबी फैंस को लगता है वो सीजन 19 के विनर बनेंगे.

अपकमिंग शो का प्रोमो फैंस के इस दावे को और भी पुख्ता करता नजर आया है. गौरव का पहली बार शो में एग्रेसिव साइड दिखा है. उनकी घर में फरहाना भट्ट संग जमकर बहसबाजी हुई है. प्रोमो में दिखाया गया है कि घर में कैप्टेंसी टास्क चल रहा है. सभी को म्यूजिकल गिटार पर थिरकना है. ये गिटार घर में कैप्टेंसी के तार छेड़ेगा. टास्क के दौरान घरवाले एक दूसरे को पुश करते दिखे. मृदुल और फरहाना में धक्का मुक्की हुई. नीमल गिरी-कुनिका सदानंद की अभिषेक बजाज संग लड़ाई हुई. उन्होंने अभिषेक को जोर का धक्का मारा, इससे वो नीचे गिर गए.

घर का माहौल कैप्टेंसी को लेकर गरमाया नजर आया. फिर शुरू होती है फरहाना और गौरव की लड़ाई. नीलम, तान्या और फरहाना उन्हें पोक करते हुए नजर आए. उन्होंने शहबाज को ताना मारा कि उसने गौरव के साथ गलत किया है. चिल्लाते हुए गौरव ने कहा- तुम लोग जितना भी ताली बजाओ, मैं यहीं करूंगा और तू देखेगी. फिर फरहाना ने पूछा- तुम कौन हो? टीवी के सुपरस्टार के साथ ये क्या हो गया? जवाब में एक्टर ने कहा- मैं पावर ऑफ टेलीविजन दिखाऊंगा. तू फिनाले में खड़ी होकर मेरे लिए ताली बजाएगी. मैं हूं सुपरस्टार टीवी का. तू पहचानी जाएगी कि तू मेरे सीजन में आई थी.

ये कैप्टेंसी टास्क घर के समीकरणों को बदलता हुआ दिख रहा है. गौरव और फरहाना की ये पहली बड़ी फाइट होगी. गौरव घर में अभी तक कैप्टन नहीं बन पाए हैं. तो क्या इस बार गौरव के हाथ कैप्टेंसी लगेगी या फिर मायूसी, जल्द मालूम पड़ेगा. लेकिन फैंस को इसका मलाल नहीं है. क्योंकि उनके मुताबिक, एक्टर बिना कैप्टन बने भी शो में रूल कर रहे हैं. ये प्रोमो देखने के बाद उन्हें लगता है गौरव फुली गेम मोड पर आ गए हैं. उन्होंने ठान ली है कि वो शो की ट्रॉफी लेकर ही जाएंगे. वैसे आपको कैसा लगा गौरव का गेम?

ENTERTAINMENT : शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की कंपनी के 4 कर्मचारियों को EOW का समन, 60 करोड़ की धोखाधड़ी के केस में होगी पूछताछ

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शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की कंपनी पर 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने जांच तेज कर दी है. EOW ने अब इनकी कंपनी से जुड़े चार कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए समन किया है.

एक व्यवसायी के साथ 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा की कंपनी बेस्ट डील प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े चार कर्मचारियों को पूछताछ के लिए समन दिया है.

इन चार में से एक कर्मचारी ने ईओडब्ल्यू के सामने पेश होकर अपना बयान दर्ज भी करा दिया है. ईओडब्ल्यू ने अन्य तीन कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है. मुंबई पुलिस की EOW अब इस केस की मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी है. जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि राज कुंद्रा की कंपनी में खर्च और निवेश के दावे कितने सही हैं और क्या वास्तव में कंपनी के पास 60 करोड़ रुपये के निवेश को सही ठहराने लायक कारोबार था?

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले हफ्ते एक कर्मचारी का बयान दर्ज किया जा चुका है. अन्य तीन कर्मचारियों को जल्द बुलाया गया है. इन कर्मचारियों से पूछताछ में जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या वाकई कंपनी के दफ्तर की फर्निशिंग पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जैसा राज कुंद्रा ने दावा किया है.

ईओडब्ल्यू की पूछताछ में फोकस इस बात पर भी है कि कर्मचारियों को वेतन कैसे दिया जाता था. कंपनी के कर्मचारियों के वेतन की रकम कमाई से आती थी या किसी अन्य स्रोत से? क्या कंपनी के पास वास्तव में उतने ऑर्डर थे, जितने का ऑर्डर बताकर 60 करोड़ रुपये का निवेश लिया गया था?

ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के मुताबिक राज कुंद्रा की कंपनी से जुड़े प्रोडक्ट सप्लायर, विज्ञापनदाताओं से भी पूछताछ की जाएगी, जिससे यह पता किया जा सके कि कंपनी की कमाई और खर्च के बीच इतना अंतर कैसे आ रहा था. अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों और अन्य से पूछताछ के बाद जरूरत पड़ी तो राज कुंद्रा को दोबारा समन जारी कर फिर से पूछताछ भी की जा सकती है.

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