Monday, May 11, 2026
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UP : कासगंज में दाल में नमक ज्यादा होने पर पति ने पत्नी को छत से दिया धक्का, आरोपी गिरफ्तार

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कासगंज में एक गर्भवती महिला की हत्या दाल में नमक ज्यादा होने की वजह कर दी गई है. महिला की हत्या का आरोप उसके पति पर लगा है. फिलहाल आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है. यहां खाने में नमक अधिक पड़ने पर एक पति ने पत्नी को इतना पीटा कि उसकी ईलाज के दौरान मौत हो गयी. बताया जाता है कि कासगंज जनपद में दाल में नमक ज्यादा होने पर एक पति रामू ने पत्नी ब्रजमाला के साथ दाल में नमक अधिक हो जाने की वजह से जमकर मारपीट की जिससे उसकी हालत बिगड़ गयी और अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी.

आरोप है कि पति ने मारपीट के दौरान अपनी भाभी के साथ मिलकर पत्नी को छत से धक्का दे दिया था. घायल महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालात को नाजुक देखते हुए पत्नी को जिला चिकित्सालय से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया था. घायल ब्रजबाला की अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गयी.

वहीं इस घटना के संबंध में मृतका के भाई विजय पाल ने सनसनीखेज आरोप अपने जीजा पर लगाया है. मृतका के भाई ने अपने बहनोई पर भाभी के साथ अवैध सम्बंधों का आरोप लगाया है. उसने बताया कि मेरी बहन जब अवैध संबंधों के विरोध करती थी तो छोटी छोटी बातों पर मारपीट किया करता था. इन बातों के कारण अक्सर पति-पत्नी में झगड़े होते रहते थे. मृतका ब्रजबाला 5 माह की गर्भवती बताई गई. ये पूरा मामला कासगंज जनपद के ढोलना थाना क्षेत्र के नगला ढक का है.

वहीं इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक राजेश भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने आरोपी रामू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में मामूली विवाद को हत्या का कारण बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस गहराई से जांच कर रही है.

 

PUNJAB : घरेलू झगड़े में रिटायर्ड CRPF DSP ने की फायरिंग, बहू-पत्नी घायल, बेटे की मौत

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अमृतसर के मजीठा रोड पर एक घरेलू विवाद जानलेवा साबित हुआ जब रिटायर्ड CRPF DSP तरसेम सिंह ने अपने बेटे, पत्नी और बहू पर फायरिंग कर दी. इस घटना में बेटे की मौत हो गई जबकि पत्नी और बहू घायल हो गए. उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है.

पंजाब की राजधानी अमृतसर से सनसनीख़ेज़ मामला सामने आया है. यहां घरेलू विवाद में एक पिता ने अपने बेटे, पत्नी और बहु पर फायरिंग कर दी. इस फायरिंग में बेटे को तीन गोलियां लगीं और उसकी मौत हो गई है. यह पूरी घटना मजीठा रोड पर एक पुलिस थाने के क़रीब हुआ. ऐसे में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शख्स को पकड़ लिया और उसे हिरासत में ले लिया. वहीं, घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया. गोलीबारी की यह वारदात दिनदहाड़े हुई, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया.

गोली चलाने वाले शख्स की पहचान सीआरपीएफ के रिटायर्ड डीएसपी तरसेम सिंह के तौर पर हुई है. पुलिस के अनुसार, परिवार में वैवाहिक और संपत्ति विवाद चल रहा था और विवाद इतना बढ़ गया कि तरसेम ने दिनदहाड़े अपने ही परिवार पर फायरिंग कर दी.पुलिस मामले की विस्तार से जांच कर रही है और जल्द ही मामले की अगली कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी. अब इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है और परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति लेकर आई है.

RAJASTHAN : पाकिस्तानी कपल, भारत में अवैध एंट्री और रेगिस्तान में मौत… जैसलमेर में मिले थे लड़के-लड़की के शव, अब सामने आई पूरी कहानी

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राजस्थान के जैसलमेर में बॉर्डर के पास बीते दिनों पाकिस्तान के लड़के और लड़की की लाशें मिली थीं. जांच में पता चला कि दोनों पाकिस्तान के घोटकी जिले से रेगिस्तान पार कर अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे. अब बताया जा रहा है कि दोनों रेगिस्तान में रास्ता भटक गए थे, इसी के चलते भीषण गर्मी और प्यास से तड़पते हुए दोनों की मौत हो गई.

बीते दिनों राजस्थान के जैसलमेर में बॉर्डर के पास रेगिस्तान में एक लड़का और लड़की की लाश मिली थी. जांच हुई तो पता चला कि दोनों पाकिस्तानी हैं. इसके बाद से एजेंसियां इस बात की जांच कर रही थीं कि आखिर दोनों भारत के इस इलाके में कैसे पहुंचे और दोनों की मौत कैसे हुई. अब दोनों के रिश्तेदारों ने दोनों की मौत की कहानी साझा की है. बताया जा रहा है कि दोनों जैसलमेर में बॉर्डर के पास बसे गांव सादेवाला में रास्ता भटक गए थे, इसके बाद प्यास और डिहाइड्रेशन की वजह से दोनों की मौत हो गई.

 

जानकारी के अनुसार, 17 साल का रवि कुमार और शांति बाई पाकिस्तान के घोटकी जिले के सिंध के बीरपुर माथेलो तहसील के रहने वाले थे. दोनों पाकिस्तान के घोटकी से रवाना हुए, तब वे बाइक पर थे, साथ में कपड़ों का बैग सहित पानी का 5 लीटर का केन था. मृतक के परिजन गुलशन कुमार ने बताया कि पाकिस्तान का घोटकी जिला अंतरराष्ट्रीय भारत-पाक बॉर्डर से करीब 50 किलोमीटर दूर है.

रवि और शांति बाई घोटकी से पहले बाइक से नूरफकीर (नूरपुरी) की दरगाह पहुंचे, उन्हें बीच में रोका, तब उन्होंने दरगाह पर हाजिरी लगाने की बात कही, फिर वे दरगाह गए. भारत-पाक बॉर्डर नूरफकीर (नूरपुरी) दरगाह से 20 किलोमीटर है, जबकि दोनों का गांव इस दरगाह से करीब 30 किलोमीटर दूर है.

दरगाह पर हाजिरी लगाने के बाद आगे रेगिस्तान देखकर बाइक और कपड़ों से भरा बैग वहीं छोड़ दिया और रेतीले इलाके में भारतीय सीमा की ओर रवाना हो गए. दोनों के पास पानी का केन था. 22 जून की सुबह भारतीय सीमा में घुसकर साधेवाला क्षेत्र में पहुंचे. इसके बाद बॉर्डर से करीब 12 किलोमीटर दूर दोनों मृत पाए गए.

जिस जगह पर दोनों के शव मिले, वह जगह अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 12 से 13 किमी दूर है. अनुमान है कि दोनों कम से कम 35 से ज्यादा किलोमीटर तक रेतीले टीलों पर पैदल चले होंगे और भारत में आकर टीलों में रास्ता भटक गए होंगे. इस क्षेत्र में उन दिनों भीषण गर्मी थी. तापमान 48 से 50 डिग्री तक पहुंच गया था. परिजनों का कहना है कि 21 जून को रवि कुमार की अपने पिता के साथ कहासुनी हो गई थी. इसके बाद बाइक, कपड़ों से भरा बैग और पानी का केन, बिस्किट लेकर पाकिस्तान से रवाना हो गया था.

इस मामले को लेकर पाकिस्तान में उनके पिता ने यहां के एक अन्य रिलेटिव को ये भी जानकारी दी थी कि भारत-पाकिस्तान की सीमा क्रॉस करने से पहले उसने भारत आने के लिए वीजा अप्लाई करने की कोशिश की थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के कारण दोनो देशों के बीच आवाजाही बंद हो गई थी. इसी के बाद उसने अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर क्रॉस करने का निर्णय किया था, जिसका उसके पिता और भाई ने विरोध किया था. 21 जून को हुए झगड़े के बाद रवि ने घर छोड़ दिया था.

जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदू विस्थापतो के नेता दिलीप कुमार सोढा ने बताया कि रवि कुमार और शांति बाई की शादी 4 महीने पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी जिले के तहसील मीरपुर मिथलो में हुई थी. दोनों ने शादी रचाकर भारत में सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी बिताने के सपने संजोए थे.

उन्होंने भारत आने के लिए वीजा भी एप्लाई किया था, लेकिन वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात के कारण वीजा नहीं मिल पा रहा था. ऐसे में उन्होंने अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में घुसने का प्लान बनाया. हालांकि, उसके पिता ने उसे ऐसा करने से मना भी किया. इसको लेकर पिता-पुत्र में झगड़ा भी हुआ था, लेकिन रवि कुमार शांति बाई के साथ भारत के लिए निकल पड़ा था. इसके बाद रवि और शांति बाई अवैध रूप से तारबंदी क्रॉस कर भारत में घुस तो गए, लेकिन कई किलोमीटर चलने के बाद बिबियांन रेगिस्तान में रास्ता भटक गए और भीषण गर्मी में प्यास व डिहाइड्रेशन के कारण दोनों ने दम तोड़ दिया.

MP : पद्मश्री डॉ. एमसी डाबर का निधन, 20 रुपये में करते थे इलाज, मरीजों के लिए थे ‘मसीहा’

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए ‘मसीहा’ माने जाने वाले पद्मश्री डॉक्टर एमसी डाबर का निधन हो गया है. महज 20 रुपये में इलाज करने वाले डॉक्टर डाबर ने अपनी पूरी जिंदगी सेवा को समर्पित कर दी थी. इलाज को आम आदमी की पहुंच में रखने वाले डॉक्टर डाबर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके काम और मानवता के लिए उनके समर्पण की मिसाल हमेशा याद की जाएगी.

मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक बेहद मार्मिक खबर सामने आई है. मानवता की सेवा को ही अपना धर्म मानने वाले पद्मश्री डॉ. एमसी डाबर का उनके निवास पर निधन हो गया. वह 84 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे. सुबह 4 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. डॉ. डाबर ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों की नि:स्वार्थ सेवा में लगाया. उन्हें कम फीस में इलाज करने वाले डॉक्टर के रूप में जाना जाता था.

डॉ. डाबर ने साल 1972 में चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखा था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महज 2 रुपये फीस से की थी, जो समय के साथ बढ़कर भी 20 रुपये तक ही पहुंची, जबकि उनके समकक्ष डॉक्टरों की फीस हजारों में होती रही, मगर उन्होंने अपने उस सिद्धांत से कभी समझौता नहीं किया कि इलाज आम आदमी की पहुंच में होना चाहिए.

उनकी इस सेवा भावना और समर्पण के चलते उन्हें साल 2020 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा. यह सम्मान न केवल उनके पेशेवर योगदान का, बल्कि उनके मानवीय दृष्टिकोण और सेवा भावना का भी प्रतीक था. वे एक डॉक्टर नहीं, बल्कि हजारों-लाखों गरीब परिवारों के लिए ‘उम्मीद की आखिरी किरण’ थे.

डॉ. डाबर जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र में क्लिनिक चलाते थे, जहां दूर-दराज से मरीज इलाज के लिए आते थे. भीड़ इतनी होती थी कि रोजाना सैकड़ों मरीज उनके घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे. वे खुद ही मरीजों की जांच करते, दवा लिखते और जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी करते थे.उनकी मृत्यु से चिकित्सा जगत और समाज ने एक सच्चे सेवक को खो दिया है. अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग उनके निवास पर पहुंचने लगे. कई लोगों की आंखें नम थीं. हर कोई यही कह रहा है कि डॉ डाबर जैसा डॉक्टर इस युग में मिलना मुश्किल है.

ENTERTAINMENT : जेठालाल-मुनमुन दत्ता हुए गायब, TRP पर नहीं पड़ा फर्क, ‘तारक मेहता’ बना नंबर 1 शो

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रुपाली गांगुली का शो ‘अनुपमा’ पिछले कई सालों से नंबर वन की पोजिशन पर बना हुआ था, लेकिन ‘तारक मेहता’ अब इस शो पर भारी पड़ता दिख रहा है. असित मोदी के शो को फैन्स ने नंबर वन बना दिया है.

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ टेलीविजन का पॉपुलर शो है. ये शो 2008 में शुरू हुआ था और 17 सालों से फैन्स का दिल जीतता आ रहा है. इतने सालों में कई स्टार्स शो में आए गए, लेकिन इससे इसकी TRP पर कोई फर्क नहीं पड़ा. एक बार फिर ‘तारक मेहता’ टेलीविजन का नंबर 1 शो बन गया है.

रुपाली गांगुली का शो ‘अनुपमा’ पिछले कई सालों से नंबर वन की पोजिशन पर बना हुआ था, लेकिन ‘तारक मेहता’ अब इस शो पर भारी पड़ता दिख रहा है. असित मोदी के शो को फैन्स ने नंबर वन बना दिया है. यही नहीं, पिछले कुछ दिनों से ‘तारक मेहता’ में जेठालाल और बबीता जी नदारद दिख रहे हैं. लेकिन उनके ना रहने से शो की टीआरपी पर कोई फर्क नहीं पड़ा. चर्चा है कि जेठालाल का रोल निभाने वाले दिलीप जोशी और बबीता जी के किरदार में फेम पाने वाली मुनमुन दत्ता ने शो छोड़ दिया है. पर शो के प्रोड्यूसर असित मोदी ने इन खबरों को झूठ बताया है.

‘तारक मेहता’, ‘अनुपमा’ को पछाड़ते हुए नंबर वन शो बन गया है. वहीं ‘अनुपमा’ TRP लिस्ट में दूसरे नंबर पर आ गया है. ‘तारक मेहता’ में इन दिनों भूतनी ट्रैक चल रहा है, जिसे फैन्स काफी पसंद कर रहे हैं. जब से शो में भूतनी ट्रैक शुरू हुआ है, दर्शक इससे जुड़े हुए हैं और इसका रिजल्ट शो की पॉपुलैरिटी में देखने को मिल रहा है.

 

NATIONAL : पत्नी के जेवर गिरवी रखे, बेटे की FD तोड़ी, ‘डिजिटल अरेस्ट’ में 22 लाख गंवा बैठा सीआरपीएफ SI

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अंबिकापुर में सीआरपीएफ के एसआई से 22 लाख की ठगी का मामला सामने आया है. खुद को सरकारी अधिकारी बताकर ठगों ने 17 दिन तक उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा. डर के कारण एसआई ने पत्नी के जेवर गिरवी रखे, बेटे की FD तोड़ी और लाखों रुपये ट्रांसफर किए. मामला सामने आने के बाद गांधीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है.

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में सीआरपीएफ में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर आर. महेन्द्रन से साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी अफसर बताकर 22 लाख रुपये की ठगी कर ली. हैरानी की बात यह रही कि आरोपी ने एसआई को 17 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और उसे परिवार को खतरे में डालने की धमकी दी गई.

घटना 5 जून की सुबह शुरू हुई जब तमिलनाडु निवासी महेन्द्रन को एक अज्ञात कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग, भारत सरकार का अफसर बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़ी सिम से गैरकानूनी गतिविधियां हो रही हैं.

गहने गिरवी रखकर ठगों को दिए पैसे

इसके बाद एसआई से कहा गया कि आरबीआई खाते में वेरिफिकेशन के लिए पैसे भेजने होंगे, जो 72 घंटे में वापस आ जाएंगे. डरा हुआ एसआई पहले अपनी सैलरी अकाउंट से पैसे भेजता है, फिर पत्नी के जेवर गिरवी रखकर लोन लेता है और अंत में अपने बेटे की FD तोड़कर 5 लाख रुपये ट्रांसफर करता है.

9 जून से 11 जून तक, लगातार फोन कर उससे अलग-अलग बहानों से पैसे लिए गए. हर घंटे व्हाट्सएप पर रिपोर्ट भेजने को कहा गया, जिससे वह पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गया. जब ठगों की ओर से कॉल आने बंद हुए और नंबर बंद हो गए, तब 17 दिन बाद एसआई को समझ आया कि वह ठगी का शिकार हो चुका है. इसके बाद उसने गांधीनगर थाने में मामला दर्ज कराया.

थाना प्रभारी के अनुसार, 22 लाख रुपये की ठगी की एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की वैधानिक जांच की जा रही है. पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66(डी) और 118(4) के तहत केस दर्ज किया है.

 

NAGPUR : नागपुर में इंटरनेशनल सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, विदेशी लड़कियों से करवाई जा रही थी जिस्मफरोशी

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नागपुर के एक होटल में चल रहे इंटरनेशनल सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ है. दिल्ली से ऑपरेट हो रहे इस रैकेट में रूस और उज्बेकिस्तान से लड़कियों को बुलाकर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था. पुलिस ने छापेमारी कर एक महिला को गिरफ्तार किया है. विदेशी युवती को रैकेट से छुड़ाया गया है. मुख्य आरोपी अब भी फरार है.

जानकारी के अनुसार होटल को ढाई लाख रुपये प्रति माह किराए पर लिया गया था. यहां रूस, उज्बेकिस्तान सहित अन्य देशों की लड़कियों को बुलाकर ग्राहकों को सेवा देने की पेशकश की जाती थी.

नागपुर पुलिस के सामाजिक सुरक्षा विभाग ने एक पुलिसकर्मी को नकली ग्राहक बनाकर होटल भेजा. उसने पहले 2000 रुपये जमा किए और बाद में उज्बेक लड़की को बुलाने के लिए 5500 रुपये और होटल का अलग से बिल चुकाया.इसके बाद जैसे ही विदेशी लड़की कमरे में भेजी गई, पुलिस ने टीम के साथ होटल में छापा मार दिया. मौके से उज्बेकिस्तान की 23 वर्षीय युवती को बचाया गया और रैकेट चला रही महिला रश्मि आनंद खत्री को गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह रैकेट दिल्ली से कृष्ण कुमार उर्फ राधे देशराज चला रहा था. वह अलग-अलग देशों की लड़कियों को टूरिस्ट वीजा पर भारत बुलाकर विभिन्न राज्यों में भेजकर वेश्यावृत्ति करवाता था. फिलहाल कृष्ण कुमार फरार है. पुलिस ने उसके खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है. rescued युवती को रेस्क्यू किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.

NATIONAL : भोपाल में ‘सांप’ के शेप वाला पुल, मोड़ के तुरंत बाद आने वाले डिवाइडर से टकरा रही गाड़ियां!

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भोपाल के मैदा मिल से प्रभात पेट्रोल पंप तक जाने के लिए या फिर भोपाल रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए यह पुल समय की बचत और ट्रैफिक जाम के लिहाज से बेहद ही जरूरी है. लेकिन इसकी डिजाइन की खामियां इस पुल की खासियत पर भारी पड़ रही है. पुल पर मैदा मिल तरफ उतरने के लिए रेलवे ट्रैक के उपर एक टर्न है और जैसे ही मोड़ खत्म होता है वैसे ही डिवाइडर शुरू हो जाता है. मोड़ के बाद अचानक से डिवाइडर आने से हादसे हो रहे है.

भोपाल में 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज के बाद अब राजधानी के ही एक और पुल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. महज 8 घंटे में हुए दो हादसों ने भोपाल के ही सुभाष नगर आरओबी के डिजाइन की खामी को सामने ला दिया है. हादसों से जानमाल का नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं हो इससे इंकार नहीं किया जा सकता.

भोपाल के सुभाष नगर में करीब 40 करोड़ की लागत से बने इस आरओबी को शुरू हुए दो साल हो चुके हैं लेकिन इसकी डिजाइन को लेकर जो शंकाए तब उठ रही थी वो अब हादसों के रूप में सामने आ रही है. इस पुल का डिजाइन सांप की तरह है. सर्पाकार डिजाइन वाला यह पुल तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वालों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसका अंदाज लगाना आसान है. इसी पुल पर मोड़ के बाद आने वाला रोड डिवाइडर किसी खतरे से कम नहीं है. इस डिवाइडर से टकरा कर एक गाड़ी हवा में उछल कर पलट जाती है तो दूसरी स्कूल वैन टकराकर क्षतिग्रस्त हो जाती है.

जाम से बचने में मदद करता है पुल

भोपाल के मैदा मिल से प्रभात पेट्रोल पंप तक जाने के लिए या फिर भोपाल रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए यह पुल समय की बचत और ट्रैफिक जाम के लिहाज से बेहद ही जरूरी है लेकिन इसकी डिजाइन की खामियां इस पुल की खासियत पर भारी पड़ रही है. पुल पर मैदा मिल तरफ उतरने के लिए रेलवे ट्रैक के उपर एक टर्न है और जैसे ही मोड़ खत्म होता है वैसे ही डिवाइडर शुरू हो जाता है. मोड़ के बाद अचानक से डिवाइडर आने से हादसे हो रहे है. डिवाइडर की उंचाई भी छोटी है जिससे कई बार यह दिखता भी नहीं है. बोर्ड ऑफिस से प्रभात पेट्रोल पंप जाने के लिए इस पुल पर चढ़ने के लिए जिंसी चौराहे की तरफ से आ रहे ट्रैफिक को क्रॉस करना होता है. लेकिन यहां लगा सिग्नल कभी काम करता है और कभी नहीं इससे जिंसी की तरफ से आ रहा ट्रैफिक और पुल पर चढ़ने वाला ट्रैफिक में टकराव का खतरा बना रहता है. बोर्ड ऑफिस की तरफ से आने वाले वाहन चालक को पहले दाएं मुड़कर पुल पर चढ़ना होता है और इसके तुरंत बाद उसे बाएं मुड़ना पड़ता है.इसके कुछ ही सेकंड बाद उसे फिर दाएं मुड़ना होता है और अगले ही पल उसे बाएं मुड़ना होता है . यानि कुछ ही सेकंड के भीतर उसे चार बार मुड़ना होता है

सिविल इंजिनियर भी इस तरह के पुल की डिजाइन पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एम टेक कर चुके ब्रिज एक्सपर्ट प्रखर पगारिया ने आजतक से बात करते हुए बताया कि सर्पाकार आकार के पुल बनने ही नहीं चाहिए लेकिन कई बार जगह की कमी के चलते बना दिया जाता है लेकिन इसमें बहुत ही ज्यादा सुपरविजन रखना होता है क्योंकि एंगल का ध्यान नहीं रखा गया या बीच में डिवाइडर आ गया तो इससे हादसे हो सकते हैं जैसे रात में कोई आ रहा है तो वो टक्कर मार सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि जिस तरह से इस पुल पर कम समय में 4 टर्न आते हैं वो बहुत घातक है क्योंकि इससे गाड़ी चलाने वाले को प्रतिक्रिया देने में बेहद कम समय मिलता है. बहरहाल, पुल पर फिलहाल जो हादसे हुए हैं उसमें गनीमत रही कि फिलहाल जान का नुकसान नहीं हुआ लेकिन आगे ऐसे हादसे दोबारा ना हो और किसी को अपनी जान ना गंवानी पड़े इसके लिए सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.

Metro In Dino Review: प्यार, कॉम्प्लिकेशन, इमोशन्स में लगा बढ़िया म्यूजिक का तड़का, दिल जीत लेगई मेट्रो… इन दिनों

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पता है फिल्मों में नजर आने वाले लोगों के पास क्या है, जो हमारे पास असल जिंदगी में बहुत कम होता है? लोग कभी भी आपके ऊपर गिवअप नहीं करते. आज के मॉडर्न, जेन जी वर्ल्ड में ‘मेट्रो… इन दिनों ऐसी फिल्म है जिसकी आपको जरूरत है. क्यों? इस रिव्यू में पढ़ लीजिए.

कलाकार : अनुपम खेर, नीना गुप्ता, आदित्य रॉय कपूर, सारा अली खान, फातिमा सना शेख, अली फजल
निर्देशक :अनुराग बसु
पता है फिल्मों में नजर आने वाले लोगों के पास क्या है, जो हमारे पास असल जिंदगी में बहुत कम होता है? लोग कभी भी आपके ऊपर गिवअप नहीं करते. आज के मॉडर्न, जेन जी वर्ल्ड में ‘मेट्रो… इन दिनों ऐसी फिल्म है जिसकी आपको जरूरत है. क्यों? आइए मैं बताती हूं.

बॉलीवुड ने हमें हमेशा सिखाया है कि जिंदगी में प्यार नहीं तो कुछ भी नहीं. लेकिन असल दुनिया में ये बात पूरी तरह सच नहीं है. जिंदगी में प्यार के साथ-साथ इज्जत, मन की शांति और पैसा बहुत बड़ी जरूरतें हैं, जिनके न मिलने पर हम सभी परेशान होते हैं.

रिश्ते बहुत उलझी हुई चीज होते हैं. हमें साथ रहना है, लेकिन जो जिंदगी हम चाहते थे और जो आज जी रहे हैं, वो एकदम अलग है. जिंदगी जिसके साथ सालों बिताई आज वो मेरे साथ नहीं और जो साथ है, वो खुश नहीं. हम साथ रहते हैं लेकिन हमारे बीच का प्यार कहीं खो गया है और उसी के साथ हम भी एक दूसरे से दूर हो गए हैं. वापस जाने का रास्ता पता नहीं. और आज की जनरेशन की सबसे बड़ी दिक्कत मुझे जिंदगीभर का प्यार किसी से करना ही नहीं, पलभर के लिए काफी है, जो दे दे. यही है डायरेक्टर अनुराग बसु की ‘मेट्रो… इन दिनों’ के 6 किरदारों की कहानी.

पिक्चर की शुरुआत होती है ‘मेट्रो… इन दिनों’ के 6 किरदारों के इंट्रोडक्शन से. मोंटी (पंकज त्रिपाठी) और काजोल (कोंकणा सेन शर्मा) पति-पत्नी हैं. दोनों की एक 15 साल की बच्ची है. दोनों किसी जमाने में मिले थे और एक दूसरे के प्यार में पड़ गए. मोंटी, कोयल को मोमो खिलाने ले गया था. लेकिन अब मोमो की वो दुकान और इन दोनों का प्यार ढह चुके हैं. दोनों एक घर में रहते हैं, लेकिन जिंदगी फोन के अंदर बिता रहे हैं. उन्हें डर रहता है कि कहीं फोन से नजरें उठाकर एक दूसरे से मिला ली, तो बात करने के लिए कुछ नहीं होगा. मोंटी जिंदगी में बदलाव चाहते है और इसके लिए वो डेटिंग एप पर सेक्स, नहीं एक्सपीरिएंस लेने निकल पड़ता है.

काजोल की मां है शिबानी (नीना गुप्ता), जो सालों से अपने पति संजीव के साथ रहते हुए अब उसकी घर में तंगी तस्वीर के समान हो गई है. संजीव ने जैसे तस्वीर को भुला दिया है, वैसे ही पत्नी को भी वो अक्सर भूल जाया करता है. शादी में अडजस्ट करते-करते कब शिबानी अपना अस्तित्व खो बैठी वो भी नहीं जानती. लेकिन घुटन उसे इस जिंदगी को जीने भी नहीं देती.

शिबानी शादी में अकेली है तो कोलकाता में रहने वाला परिमल (अनुपम खेर), अपनी बीवी और बेटे को खोने के बाद सच में तन्हा है. उसका सहारा है उसकी बहू झिनुक (दर्शना बानिक), जो अपनी जिंदगी को परे रख उसकी देवा में लगी हुई है. ऐसे में परिमल इस अफसोस में जी रहा है कि उसकी वजह से झिनुक का जीवन बर्बाद हो रहा है.

शिबानी की छोटी बेटी चुमकी (सारा अली खान) कन्फ्यूजन की दुकान है. कई करियर ऑप्शन चुनने के बाद चुमकी एमबीए कर एक बड़ी कंपनी में काम कर रही है, जहां उसका बॉस उसे रोज हैरेस करता है. चुमकी, कन्फ्यूज होने के साथ-साथ फट्टू भी है. ऐसे में वो किसी से कुछ कह भी नहीं पाती. उसका एक बॉयफ्रेंड है, जिसे देखकर आपको समझ आ जाएगा कि उसे चुमकी क्या, किसी का भी बॉयफ्रेंड नहीं होना चाहिए.

चुमकी से एकदम अलग है, उसे गलती से मिस्टेक करके मिला पार्थ (आदित्य रॉय कपूर). पार्थ जिंदादिल, मस्तमौला रोज किसी के प्यार में पड़ने वाला लड़का है, लेकिन उसे पता है कि वो क्या चाहता है और चीजों को पाने के लिए वो कोशिश भी करता है.

पार्थ के दोस्त हैं श्रुति (फातिमा सना शेख) और आकाश (अली फजल). दोनों लॉन्ग डिस्टेंस में रहते थे. अपने बीच कई किलोमीटर फैली दूरियां मिटाईं तो परिवार ने शादी करवा दी. शादी के बाद आकाश का म्यूजिशियन बनने का सपना, सपना ही रह गया. वो डेस्क जॉब में फंसा है और रोज अपने अधूरे सपने की अर्थी उठते देखता है. इस बीच श्रुति का अचानक प्रेग्नेंट होना उसे कॉम्प्लेक्स में डाल देता है.

इन सभी के अलावा फिल्म में और भी बहुत-से किरदार हैं, जिनकी अपनी कहानी चल रही है. हर एक कहानी को डायरेक्टर अनुराग बसु ने सम्राट चक्रवर्ती और संदीप श्रीवास्तव संग मिलकर अच्छे से लिखा और फिर पर्दे पर उतारा है. हर किरदार की जर्नी गानों के सहारे आपके मन में उतारी जाती है. यहां नोकझोंक, धोखा, प्यार, रोना, धोना, कन्फ्यूजन, मस्ती के साथ-साथ कॉमेडी भी है. अनुराग बसु ने इस फिल्म को खुले दिन से फील करके बनाया है और आप ये स्क्रीन पर साफ देख सकते हैं. हर किरदार अपने में अलग है.

अगर आपको फिल्म ‘लाइफ इन अ मेट्रो’ याद है तो उसमें मोंटी का किरदार इरफान ने निभाया था. इस बार इरफान फिल्म का हिस्सा नहीं है बल्कि पंकज त्रिपाठी को लिया गया है. बहुत-से दर्शकों के मन में सवाल था कि इस फन लविंग और तड़क-भड़क वाली फिल्म में पंकज कैसे फिट होंगे. और यही पंकज त्रिपाठी के काम की खूबसूरती है कि वो जिस भी किरदार में ढलते हैं, उसे अपना बना लेते हैं. मोंटी के किरदार में पंकज को देखना बेहद मजेदार था. कोंकणा सेन शर्मा के साथ उनकी जोड़ी काफी यूनीक है और यही अच्छी चीज है. काजोल के रोल में कोंकणा सेनशर्मा कमाल हैं. उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया है. काजोल के रूप में कोंकणा न सिर्फ आपको इम्प्रेस करती हैं बल्कि अपना स्टैंड लेने की सीख भी देती है. फिर वो इधर-उधर निकल जाती है, वो बात अलग है.

अली फजल और आदित्य रॉय कपूर अपने किरदारों में एकदम फिट होते हैं. अली को देखकर आपको ‘फुकरे’ के जफर भाई की याद आएगी. उनका लुक और बॉडी लैंग्वेज काफी हद तक पहले जैसी है. लेकिन फिर भी उनका काम अच्छा है. आदित्य रॉय कपूर तो एकदम बिंदास हैं. फातिमा सना शेख, श्रुति के रोल में अच्छी हैं. चुमकी के रोल में सारा अली खान को देखना भी काफी अच्छा रहा. फिल्म में चुमकी की जर्नी बढ़िया है.

नीना गुप्ता, अनुपम खेर और शाश्वत चटर्जी का काम भी पिक्चर में बढ़िया है. अनुपम खेर, वो इंसान है, जो आपको रुलाते हैं. उनका किरदार परिमल बेहद प्यारा है, पर परिमल की कहानी एकदम ट्रैजिक है. अनुपम अपने किरदार के साथ आपको हंसाते भी हैं और उनके लिए आपका दिल भी दुखता है. नीना गुप्ता को देखकर काफी फन रहा. उनकी और शाश्वत की जोड़ी भी काफी अलग है. वो सीनियर काजोल और मोंटी हैं.

डायरेक्टर अनुराग बसु का स्क्रीनप्ले बढ़िया है. मेरे एक दोस्त ने मुझे कई बार ‘मेट्रो… इन दिनों’ की एल्बम सुनने को कहा था. लेकिन मैं तो ‘लाइफ इन अ मेट्रो’ की फैन हूं, तो मैंने साफ मना कर दिया था. लेकिन अब जब मैंने फिल्म देखने के साथ-साथ सारे गाने सुन लिये हैं, तो मुझे समझ आ गया है कि वो क्यों बोल रहा था. फिल्म का हर गाना बेहतरीन है. प्रीतम और पापोन को पूरी फिल्म में अलग-अलग जगह गाते देखा जा सकता है. हां, पिक्चर के VFX थोड़ा बेहतर हो सकता था. लेकिन इसकी थोड़ी बहुत जो भी कमियां हैं, उनको इग्नोर करें तो आप इसे अच्छे से एन्जॉय कर पाएंगे.

UP : कांवड़ रूट की दुकानों पर नेम प्लेट! मौलाना तौकीर रजा बोले- अपनी पहचान न छिपाएं मुसलमान, लेकिन हिंदू भी…

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मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि जिस प्रकार से मुसलमान दाढ़ी और टोपी रखते हैं, उस प्रकार से हिंदू तिलक नहीं लगाते हैं, सच्चे सनातनी हो तो तिलक जरूर लगाओ और अपनी पहचान बताओ. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने जो नेम प्लेट का आदेश दिया है वह इस बात का समर्थन करते हैं क्योंकि आस्था के मामले में किसी किस्म की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए.

मुजफ्फरनगर समेत यूपी के हर जिले में कांवड़ यात्रा के मार्ग में पड़ने वाली दुकानों, रेस्टोरेंट और ढाबों पर नेम प्लेट लगाने का फरमान जारी हो रखा है. हालांकि, इसकी तस्दीक करने के लिए मुजफ्फरनगर में हिंदू संगठन काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, जिसको लेकर विवाद हो रहा है. इस बीच बरेली के मौलाना तौकीर रजा ने भी मामले में रिएक्ट किया है. उन्होंने एक तरफ तो सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है तो दूसरी ओर कांवड़ यात्रा के दौरान हुड़दंग मचाने वाले कावड़ियों को ‘आतंकवादी’ कह दिया है.

मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि जिस प्रकार से मुसलमान दाढ़ी और टोपी रखते हैं, उस प्रकार से हिंदू तिलक नहीं लगाते हैं, सच्चे सनातनी हो तो तिलक जरूर लगाओ और अपनी पहचान बताओ. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने जो नेम प्लेट का आदेश दिया है वह इस बात का समर्थन करते हैं क्योंकि आस्था के मामले में किसी किस्म की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए.

बकौल तौकीर रजा- नेम प्लेट से शिनाख्त तक तो ठीक है, लेकिन पैंट उतरवाकर चेक करना ये जायज नहीं है. माहौल खराब न हो यह शासन की जिम्मेदारी है. आखिर क्या एक्शन लिया गया मुजफ्फरनगर की घिनौनी घटना पर. सरहद पार से जो आतंकवाद आता है उससे ज्यादा खतरनाक मैं इस आतंकवाद को समझता हूं, जो घर में है पनप रहा है. जब तक इन ‘आतंकवादियों’ पर लगाम नहीं कसी जाएगी तब तक इस तरीके के वाक्ये होते रहेंगे.

रजा ने कहा- मेरा मानना है कि सरकार ने जो नेम प्लेट का आदेश जारी किया है, उसकी मंशा कुछ भी रही है, यकीनन मकसद सिर्फ नफरत फैलाने का ही है. उन्हें मुसलमानों से नफरत है. हालांकि, मुसलमान को अपनी पहचान भी नहीं छुपानी चाहिए. उसे अपनी दाढ़ी, टोपी और लिबास से दिखा देना चाहिए कि वह एक मुसलमान है और सच्चा हिंदुस्तानी है.

तौकीर रजा ने कहा कि जब कोई ठाकुर साहब, किसी पंडित जी को खून की जरूरत पड़ती है तो वह ब्लड बैंक से जो खून लेता है, उस पर कोई नेम प्लेट लगाने का काम क्यों नहीं होता है. पंडित/ठाकुर की रगो में किसी दूसरे का खून चढाया जाता है, तो इससे उसका धर्म भ्रष्ट नहीं होता है क्या. इसलिए ब्लड बैंक में बाकायदा हर बोतल पर नेम प्लेट लगी होनी चाहिए, जैसे खाने-पीने की दुकान पर लगाई जा रही है.

मालूम हो कि बीते दिनों मुजफ्फरनगर के स्वामी यशवीर महाराज के लोगों पर आरोप लगा कि उन्होंने पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक ढाबे वाले की पैंट उतरवाने की कोशिश की. हालांकि, यशवीर महाराज ने इससे इनकार किया है. साथ ही पुलिस को चेतावनी दी कि यदि उनके लोगों पर एफआईआर हुई तो वो बड़ा आंदोलन करेंगे.

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