Tuesday, May 12, 2026
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UP : चार दिन में दो भाइयों की मौत से मातम में डूबा परिवार… एक को आया हार्ट अटैक, दूसरे ने सदमे में तोड़ा दम

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यूपी में लखनऊ के सरोजनी नगर के बंथरा गांव में चार दिन के भीतर दो भाइयों की मौत ने पूरे परिवार को गमगीन कर दिया. छोटे भाई की अचानक मौत ने बड़े भाई को ऐसा सदमा दिया कि वह खुद भी हार्ट अटैक से चल बसे. एक भाई की मौत का गम दूसरा भाई सह नहीं पाया और देखते ही देखते खुशियों से भरा घर मातम में बदल गया.

लखनऊ के सरोजनी नगर थाना क्षेत्र के बंथरा गांव में रहने वाले 25 वर्षीय पवन सिंह की अचानक मौत हो गई. इसके बाद बड़े भाई 45 वर्षीय मोनू सिंह इस सदमे को सह नहीं सके. शुक्रवार सुबह उन्होंने भी दम तोड़ दिया. बहन प्रियंका ने कहा कि भैया को बहुत समझाया, लेकिन वो कहते थे कि अब किसके लिए जिएं? भाई के गम में उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी जान चली गई.

पवन सिंह की मौत 9 जून को हुई थी. वह पेशे से वकील थे और बिजनौर में रजिस्ट्री का काम निपटाकर तहसील लौटे थे. तहसील परिसर में अचानक उन्हें चक्कर आया और वे वहीं गिर पड़े. सिर दीवार से टकराया और फिर होश नहीं आया. साथी वकील उन्हें आनन-फानन में SGPGI लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ लाया गया. ECG में हार्ट बीट पूरी तरह फ्लैट लाइन थी.

पवन की मौत के बाद से मोनू सिंह बुरी तरह टूट गए थे. उनकी बहन प्रियंका बताती हैं कि वह डिप्रेशन में चले गए थे. वह बार-बार कहते थे कि पवन को तो कभी बुखार भी नहीं आया, फिर ऐसा कैसे हो गया? मोनू की हालत लगातार बिगड़ती गई और अंतत: दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई. प्रियंका कहती हैं कि मां बेसुध हैं, पापा कोने में बैठे रोते रहते हैं. बेटी दिनभर मामा-मामा करती है, उसे कैसे समझाऊं कि अब उसके मामा नहीं रहे.

परिजनों और रिश्तेदारों का मानना है कि यह मौतें हीटवेव और अत्यधिक गर्मी का नतीजा भी हो सकती हैं. एडवोकेट मनोज यादव ने कहा कि पवन मेरा जूनियर था. घटना से पहले ही चैंबर में मिला था. उसके जाने के बाद मोनू की मौत ने हमें झकझोर दिया. दोनों भाइयों का रिश्ता राम-लक्ष्मण जैसा था. गांव के बुजुर्ग शेर बहादुर यादव कहते हैं कि पवन 15 साल से मेरे बेटे के साथ कोर्ट आता-जाता था, बहुत सेवा करता था.

इन दोनों भाइयों की मौत से परिवार उजड़ गया है. पवन की फरवरी में शादी तय थी और घर में तैयारियां चल रही थीं. अब परिवार मातम में डूबा है. बहन प्रियंका मोबाइल में तस्वीर दिखाते हुए कहती हैं कि दोनों भाई मेरी शादी में साथ खड़े थे, अब दोनों नहीं रहे.

KANPUR : पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जिस भाई के लिए बहन रो रही थी, वो थाने पहुंचकर बोला- मैं जिंदा हूं सर’

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कानपुर के घाटमपुर में हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक बहन अपने जिस भाई के शव का पोस्टमार्टम कराने पहुंची थी, वही भाई कुछ देर बाद जिंदा थाने पहुंच गयाय. युवक ने पुलिस से कहा- सर, मैं तो जिंदा हूं, लेकिन मेरी मौत की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई! यह सुनकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए और उधर जिस शव का पोस्टमार्टम हो रहा था, उसे रोक दिया गया.

कानपुर के घाटमपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जब एक बहन अपने भाई की लाश का पोस्टमार्टम कराने पहुंची और कुछ ही देर बाद वही भाई थाने में जिंदा लौट आया. थाने में युवक ने पुलिस से कहा कि सर, मैं जिंदा हूं… मेरी मौत का फोटो ही वायरल कर दिया गया. इस घटना से पुलिस से लेकर परिजन तक हर कोई सन्न रह गया. उधर शव का पोस्टमार्टम तुरंत रुकवाया गया और असली पहचान के लिए शव को मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया.

जानकारी के अनुसार, कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में गुरुवार को ओवरब्रिज के नीचे एक युवक की लावारिस लाश मिली थी. पुलिस ने फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, ताकि शिनाख्त की जा सके. घाटमपुर की रहने वाली सुमन नाम की महिला ने फोटो देखकर दावा किया कि यह उसके भाई अजय की बॉडी है. वह रोते हुए मौके पर पहुंची और कहा कि यह मेरे छोटे भाई की लाश है, मैंने इसे गोद में खिलाया है.

पुलिस ने कहा ठीक से पहचान लो, सुमन ने कहा कि भला मैं कैसे नहीं पहचानूंगी. सभी को लगा कि अजय गर्मी में बीच के नीचे बैठा होगा, इस वजह से उसकी मौत हो गई. पुलिस ने बहन की शिनाख्त पर बॉडी का पंचनामा किया और उसको पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. सुमन का कहना था कि मेरा भाई अजय कानपुर देहात का रहने वाला है.

शुक्रवार को सुमन अपने पिता, पति और परिवार वालों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंची. परिवार वाले रो रहे थे, तभी उधर घाटमपुर थाने में एक युवक थानेदार धनंजय पांडे के सामने पहुंचा. उसने कहा कि मेरा नाम अजय है, मैं तो जिंदा हूं. पुलिस ने मेरे मरने की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कराई है. थानेदार धनंजय पांडे हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत पोस्टमार्टम हाउस में पुलिस कर्मियों को कॉल किया और कहा कि अजय की बॉडी का पोस्टमार्टम हो गया क्या, तो बताया गया कि नंबर आने वाला है. थानेदार ने अधिकारियों को जानकारी दी. इसी के साथ जिस शव का पोस्टमार्टम होने वाला था, उसे रुकवाया.

इस दौरान सुमन को जैसे ही पता चला कि भाई जिंदा थाने पहुंच गया है तो घर वाले विश्वास ही नहीं कर पाए और तुरंत गाड़ी से घाटमपुर थाने पहुंचे. वहां अपने भाई को जिंदा देखते ही सुमन लिपटकर रोने लगी. सुमन ने कहा कि मैं रास्ते भर यही मनाते आ रही थी कि पुलिस ने जो सूचना दी है, वह सही हो.

पुलिस ने जब सुमन से पूछा कि तुमने अपने भाई की पहचान कैसे की तो उसने कहा मेरे भाई का चेहरा ठीक बॉडी से मिलता था, उसकी कदकाठी भी उतनी थी. शव के कपड़े काफी गंदे थे, इसलिए लगा कि मेरा भाई ही होगा. इसके बाद पुलिस ने उस शव को मोर्चरी में रखवा उसकी पहचान के लिए फोटो आसपास जिलों में भेजा है.

NATIONAL : सोनम की प्रेमी राज के साथ सामने आई एक और तस्वीर… हंसते हुए आ रही नजर

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राजा रघुवंशी हत्याकांड को पत्नी सोनम ने प्रेमी राज के साथ मिलकर अंजाम दिया था. फिलहाल पुलिस ने सोनम व प्रेमी राज समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इसी बीच सोनम की राज के साथ एक और तस्वीर सामने आई है.

राजा रघुवंशी हत्याकांड को पत्नी सोनम ने प्रेमी राज के साथ मिलकर अंजाम दिया था. फिलहाल पुलिस ने सोनम व प्रेमी राज समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. पांचों इस वक्त शिलांग पुलिस की कस्टडी में हैं. इसी बीच सोनम और राज की एक और तस्वीर सामने आई है. इससे पहले भी दोनों की एक तस्वीर सामने आ चुकी है.

सोनम और राज की जो लेटेस्ट फोटो आई है. उसमें सोनम राज के साथ खुश नज़र आ रही है. सोनम साड़ी में है, जबकि राज कुर्ता पहने हुए है. राज टीका भी लगाया हुआ है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों किसी मंदिर में दर्शन करके आ रहे हैं.राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर पहुंची थी और वह एक किराए के घर में रुकी थी. इस घर को रेंट पर आरोपी विशाल चौहान ने लिया था. जिसका उसने किराया भी जमा किया था और एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी किया था. इसको लेकर जानकारी खुद एक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट फर्म के मालिक ने दी है.

इंदौर के राजा रघुवंशी के परिजनों ने शुक्रवार को पवित्र नगरी उज्जैन में दिवंगत आत्मा के लिए पिंडदान किया. इस अनुष्ठान में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी का भाई गोविंद भी शामिल हुआ. राजा के भाई सचिन ने मीडिया से कहा कि सिद्धवट घाट पर जब हमने पिंडदान किया तो गोविंद हमारे साथ थे.गोविंद ने दोहराया कि वह न्याय की लड़ाई में राजा के परिवार के साथ खड़े हैं. आपको बता दें कि राजा के पूर्वी खासी हिल्स जिले में लापता होने के बाद 23 मई को शुरू हुई जांच में सोनम पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से पकड़ा गया था. राजा रघुवंशी को खत्म करने की साजिश 11 मई को शादी से कुछ समय पहले इंदौर में रची गई थी. राजा का शव 2 जून को वेइसाडोंग फॉल्स के पास एक घाटी में मिला था.

UP : हापुड़ में नाबालिग लड़की का अपहरण कर गैंग रेप, प्रधान सहित 3 गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ से नाबालिग लड़की के अपहरण के बाद गैंगरेप का मामला सामने आया है. पीड़िता द्वारा कोर्ट में दिए बयान के अनुसार ग्राम प्रधान ने पहले दो युवकों द्वारा नाबालिग का अपहरण कराया और उसके बाद ग्राम प्रधान और उसके दोनों साथियों ने मिलकर बलात्कार की घटना को अंजाम दिया.

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ से नाबालिग लड़की के अपहरण के बाद गैंगरेप का मामला सामने आया है. पीड़िता द्वारा कोर्ट में दिए बयान के अनुसार ग्राम प्रधान ने पहले दो युवकों द्वारा नाबालिग का अपहरण कराया और उसके बाद ग्राम प्रधान और उसके दोनों साथियों ने मिलकर बलात्कार की घटना को अंजाम दिया. पीड़िता के पिता की तहरीर पर पिलखुवा कोतवाली पुलिस ने अपहरणकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया था. वहीं, अब घटना के 20 दिन बाद पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया है. सभी आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस साक्ष्यों की जांच कर कार्रवाई की बात कह रही है.

जानकारी के अनुसार जनपद हापुड़ के पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम फगौता में एक 15 वर्षीय नाबालिग से गांव का ही एक युवक सुमित एकतरफा प्यार करता था. लड़की इसका कई बार विरोध भी कर चुकी थी. वहीं, इसी बीच एक दिन लड़की किराने की दुकान पर सामान लेने गई थी. इसी दौरान मौका पाकर सुमित अपने साथी ललित के साथ मिलकर लड़की को बहला फुसलाकर अपहरण कर अपने साथ ले गया.

लड़की के परिजन लड़की को ढूंढ ही रहे थे कि इसी बीच लड़की के पिता को 20 मई को सुमित पुत्र नैपाल निवासी ग्राम शाहपुर फगौता थाना पिलखुवा ने फोन किया. इसके बाद उसने कहा कि तुम अपनी बेटी की शादी मेरे साथ कर दो, लड़की मेरे पास है. वहीं, लड़की के पिता ने जब मना किया तो सुमित ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी.

इसके बाद लड़की के पिता ने मामले में FIR दर्ज करवाई. जिसके बाद से ही आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस ने 20 दिनों बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया है.

NATIONAL : 15 जून को होने वाले कैंची धाम स्थापना दिवस को लेकर जगमग हुआ बाबा नींब करौरी आश्रम, 3 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना

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हर साल की तरह इस साल भी कैंची धाम में 15 जून को प्रसिद्ध भंडारे का आयोजन किया जाएगा. जहां लाखों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं. कैंची आश्रम में हनुमानजी और अन्य मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा 15 जून को अलग अलग वर्षों में की गई थी.

हर साल की तरह इस साल भी कैंची धाम में 15 जून 2025 को प्रसिद्ध भंडारे का आयोजन किया जाएगा. जहां लाखों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं. कैंची आश्रम में हनुमानजी और अन्य मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा 15 जून को अलग अलग वर्षों में की गई थी. इस तरह से 15 जून को प्रतिवर्ष प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है. नीम करोली बाबा ने स्वयं भी कैंची धाम का प्रतिष्ठा दिवस 15 जून को तय किया था. नीम करोली बाबा ने 10 सितंबर 1973 को महासमाधि ली थी और भौतिक शरीर को छोड़ा था. उनके अस्थि कलश को कैंची धाम में स्थापित किया गया था और इस तरह बाबा के भक्तों ने बाबा के मंदिर का निर्माण कार्य 1974 में शुरू किया.

15 जून 1976 को महाराज की मूर्ति की स्थापना और अभिषेक किया गया और उस समय सभी ने नीम करोली बाबा की भौतिक उपस्तिथि को महसूस किया. फिर वैदिक मंत्रोचार के साथ विशिष्ट विधि से बाबा की मूर्ति की स्थापना हुई और नीम करोली बाबा कैंची धाम में गुरुमूर्ति रूप में विराजित हुए.

बाबा नीम करौली 20 शताब्दी में उत्तराखंड आये थे, यहीं 1942 में कैंची गांव का उन्होंने पहली बार भ्रमण किया. उस समय एक स्थानीय ग्रामीण से उनकी भेंट हुई थी. उन्होंने बाबा से पूछा था कि उनके अगले दर्शन कब होंगे. तब बाबा ने कहा था कि 20 वर्ष बाद मैं फिर कैंची आऊंगा. सन 1962 में उन्होंने पुनः कैंची की यात्रा की तथा नदी के तट पर खड़े होकर तट के दूसरी तरफ जहां दो महान संतों प्रेमी बाबा एवं सोमवारी बाबा ने हवन किया था, जाने की इच्छा प्रकट की थी. मां के साथ नदी के साथ चलते हुए 25 मई 1962 के ऐतिहासिक दिन बाबा ने उसी जगह अपने पवित्र पग रखे थे. जहां आज कैंची मंदिर है.

वर्ष 1965 में हनुमान मंदिर को पूरा किया गया, एवं उसी वर्ष 15 जून को पहली बार भंडारा का आयोजन किया गया था. जिसके बाद से प्रत्येक वर्ष इसी तिथि के दिन मंदिर परिसर में प्रतिष्ठापन समारोह आयोजित किया जाता है. बाबा ने कहा था एक समय ऐसा आएगा कि कैंची धाम में भक्तों का सैलाब आएगा और यहां एक छोटा शहर बस जाएगा. कैंची धाम” के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है. बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे.

कैंची धाम को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला व्यक्ति कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता. यहां पर मांगी गई मनोकामना पूर्णतया फलदायी होती है. बाबा मंदिर परिसर एक ऐसा दिव्य शांति स्थल है जहां सब एक हो सूक्ष्म में विलीन होने की अनुभूति करते हैं. विभिन्न धर्मों के लोग इस दिव्य स्थल पर आते हैं. बीते वर्ष कैंची धाम में करीब 24 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि इससे पहले के वर्षों में यह आंकड़ा महज 8 लाख के आसपास रहता था. इस वर्ष 15 जून को मनाए जाने वाले कैंची धाम स्थापना दिवस के मौके पर श्रद्धालुओं की संख्या 2.5 से 3 लाख तक पहुंचने की संभावना है. धाम की धारण क्षमता सीमित है, जबकि भीड़ उससे कई गुना अधिक होती है, जिससे यातायात व्यवस्था और सुरक्षा पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी.

कहते हैं कि भोजन ग्रहण करने वालों कि संख्या अधिक होने पर भी कभी भोजन की कमी यहां नहीं होती क्योंकि इस दिन नीम करोली बाबा स्वयं इस भंडारे की देख रेख करते हैं और किसी भी चीज़ की कमी नहीं होने देते. एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई थी. बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती शिप्रा नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया. उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया. फिर कुछ देर बाद घी लाया गया तो बाबा जी ने कहा कि अब शिप्रा नदी को उनका घी वापिस कर आओ तो भक्तों ने वह घी नदी में बहा दिया.

कैंची धाम मेले के सकुशल एवं व्यवस्थित आयोजन के सम्बन्ध में बैठक के दौरान आईजी कुमायू रिद्धिम अग्रवाल ने व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए. उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल कैंची धाम में 15 जून 2025 को आयोजित होने वाले वार्षिक मेले को लेकर प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं. इस वर्ष श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया गया है.

पहली बार मेले में आतंकवाद-निरोधक दस्ता (ATS) एवं सशस्त्र सीमा बल (SSB) की तैनाती की जा रही है. पीए सिस्टम, ड्रोन और हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी से निगरानी होगी. श्रद्धालुओं के जन सैलाब को देखते हुए उनकी सुविधा के लिए पहली बार बाबा जी का प्रसाद दिनांक 15 जून से 18 जून तक वितरित होगा. मेले में पहली बार 3 जनपदों के पुलिस अधीक्षकों को भी तैनात किया गया है.

नैनीताल-भीमताल- भवाली और कैंची धाम तक सड़क मार्ग में किसी भी प्रकार के भंडारे, फ़ूड वैन और ठेले वाले पूरी तरह से बंद रहेंगे. धाम तक हल्द्वानी, भीमताल, नैनीबैंड, भवाली, नैनीताल और गरमपानी से शटल सेवा के माध्यम से ही पहुंचा जा सकेगा. भवाली से आगे दोपहिया वाहन भी पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे प्रतिबंधित रहेंगे. श्रद्धालु शटल सेवा के माध्यम से ही जाएंगे.

बुजुर्ग, बीमार एवं दिव्यांग के लिए दो अतिरिक्त शटल सेवा लगाई गई हैं जो उन्हें मंदिर के गेट तक पंहुचाएंगी व वापस लाऐंगी. हल्द्वानी से भीमताल शटल सेवा में करीब 100 छोटे-बड़े वाहन, भीमताल से कैंची 40, नैनीताल से सेनिटोरियम तक 50 छोटे बड़े वाहन शटल सेवा में चलेंगे. जिससे श्रद्धांलुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. शार्ट कट मार्ग (छोटा रास्ता) बंद रहेंगे. जिलाधिकारी ने बताया कि कैंची धाम के समीप शार्ट कट मार्ग (छोटा रास्ता ) से आवाजाही पूर्ण रूप से बंद रहेगी.

NATIONAL : राजा रघुवंशी की आत्मा की शांति के लिए उज्जैन में तर्पण, सोनम का भाई गोविंद भी हुआ शामिल

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उज्जैन के सिद्धवट घाट पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ राजा रघुवंशी का तर्पण किया गया. इस दौरान गोविंद रघुवंशी भी परिवार के साथ मौजूद रहा, जिसे राजा के परिवार ने सोनम की साजिश में शामिल न होने के कारण माफ कर दिया है.

मेघालय में राजा रघुवंशी हत्याकांड के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए उज्जैन के पवित्र सिद्धवट घाट पर तर्पण किया. राजा के भाई विपिन रघुवंशी और सचिन रघुवंशी के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में आरोपी सोनम रघुवंशी का भाई गोविंद भी शामिल हुआ. सोनम पर अपने पति राजा की हत्या की साजिश रचने का आरोप है.

शुक्रवार सुबह को रघुवंशी परिवार उज्जैन पहुंचा, जहां सिद्धवट घाट पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ राजा का तर्पण किया गया. विपिन और सचिन ने अपने भाई की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. इस दौरान गोविंद रघुवंशी भी परिवार के साथ मौजूद रहा, जिसे राजा के परिवार ने सोनम की साजिश में शामिल न होने के कारण माफ कर दिया है. गोविंद ने पहले भी अपनी बहन सोनम को फांसी की सजा दिलवाने का संकल्प लिया था. गोविंद का राजा के परिवार के साथ उज्जैन पहुंचना इस बात का प्रतीक है कि वह अपनी बहन के अपराध से खुद को अलग मानता है.

सचिन रघुवंशी ने कहा, ”राजा की आत्मा की शांति के लिए हमने तर्पण किया. गोविंद हमारे साथ है, क्योंकि उसे सोनम की साजिश का कोई अंदाजा नहीं था.” गोविंद ने इस मौके पर राजा के परिवार के प्रति अपनी संवेदना दोहराई और कहा, ”मैं राजा के लिए न्याय की लड़ाई में उनके साथ हूं.”

मेघालय पुलिस के ‘ऑपरेशन हनीमून’ ने खुलासा किया कि सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाह और तीन सुपारी किलर्स आकाश राजपूत, विशाल ठाकुर और आनंद कुर्मी के साथ मिलकर 23 मई को सोहरा के जंगल में राजा की हत्या करवाई. सोनम ने 8 जून को गाजीपुर में सरेंडर किया था. शिलांग SP विवेक स्येम ने बताया कि राज कुशवाहा मास्टरमाइंड था और सभी आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया है. पुलिस के पास 42 सीसीटीवी फुटेज, खून से सना रेनकोट और अन्य सबूत हैं.

उधर, राजा के परिवार और रघुवंशी समाज ने सोनम और अन्य आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है. पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है, और 90 दिन में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है.

NATIONAL : अहमदाबाद विमान हादसे में शिकार आगरा दंपति, परिवार के लोग बोले- ‘कोई चमत्कार होगा और…’

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अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया के विमान में आगरा के दंपत्ति नीरज लवानिया और अपर्णा लवानिया भी सवार थे. इस खबर के बाद उनके पैतृक गांव में दुख पसर गया है.अहमदाबाद में गुरुवार को हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया के विमान में आगरा के रहने वाले नीरज लवानिया और उनकी पत्नी अपर्णा लवानिया भी सवार थे. हादसे के बाद से उन्हें लेकर अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है. परिवार को लोग अहमदाबाद पहुंच गए हैं. इस बीच आगरा में उनके पैतृक गांव में गम का माहौल है. हर कोई इस ख़बर को जानने के बाद सहम गया है और उनकी सलामती दुआएं कर रहा है. उनके भाई, आसपास के लोग सभी को लगता है कि कोई चमत्कार होगा और खबर आएगी कि वो ठीक हैं.

अहमदाबाद विमान हादसे में नीरज लवानिया और अपर्णा लवानिया को लेकर कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. नीरज आगरा से 25 किमी दूर अकोला गांव के रहने वाले हैं. उनके बड़े भाई सतीश लवानिया ने बताया कि उन्हें इस हादसे की जानकारी टीवी से मिली, जिसके बाद उन्होंने नीरज की बेटी को फोन किया तो पता चला कि वो भी अपनी पत्नी के साथ इस फ्लाइट में थे.

नीरज के भतीजे शुभम लवानिया ने कहा कि वो नवंबर में ही आए थे, जब भी छुट्टियां होती तो वो गांव आ जाते थे. उन्हें घूमने का बहुत शौक था. गर्मियों में वो अक्सर बाहर घूमने निकल जाते थे. कुछ दिन पहले ही उन्होंने लंदन जाने के बारे में बताया था. वो 28 जून को लौटने वाले थे. हमें मीडिया के जरिए ही हमें पता चला. उम्मीद है कि ऐसी कोई खबर आ जाए कि वो ठीक है और उनका इलाज चल रहा है.

नीरज ने कहा कि परिवार में वो सबके साथ मिलकर रहते थे. हमारे लिए गिफ्ट लाते थे, वो दोस्त की तरह रहते थे. ऐसा ही कुछ नीरज के दोस्त अरविंद ने बताया. उन्होंने कहा कि वो मेरे छोटे भाई जैसा था. कुछ दिन पहले ही उनसे बात हुई थी, उन्होंने कहा था कि मैं लंदन से लौटकर आऊंगा तो सब लोगों से मिलूंगा. वो बहुत मिलनसार थे, सबको ख़ुश रखते थे. व्यवहार बहुत अच्छा था. हम प्रार्थना कर रहे हैं कि कैसे भी चमत्कार हो जाए और वो सकुशल वापस आ जाएं.

नीरज के चाचा के बेटे प्रमेंद्र कुमार ने कहा कि उन्हें गाने का बहुत शौक था. होली पर हमेशा उन्हीं से गाना गाने को कहा जाता था. वो कहते थे कि आगरा की यादें उन्हें वहां भी सताती हैं. सबको लगता है कि कोई चमत्कार होगा. किसी को ऐसा नहीं लग रहा कि वो हमारे बीच नहीं रहे. वहीं इस हादसे की सूचना मिलने के बाद बीजेपी नेता राजकुमार चाहर ने भी नीरज के परिवार से मुलाक़ात की. उन्होंने कहा कि ये दुखद घटना है. इस फ्लाइट में सवार यात्रियों की सूची में उनका नाम है. हमारी यही प्रार्थना है कि कोई चमत्कार हो जाए और उनके कुशलता का समाचार मिले.

 

NATIONAL : जिस बिल्डिंग से टकराया प्लेन, उसी में बैठकर खाना खा रहा था अयोध्या का मेडिकल स्टूडेंट अक्षत, परिजनों ने बताया हाल

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जैसे ही विमान हादसे की सूचना अयोध्या पहुंची, देवकाली के भीखापुर इलाके में सन्नाटा पसर गया. यहां रहने वाले अक्षत के पिता राजेश जायसवाल और अन्य परिजन रातोरात अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए. फिलहाल, इकलौते बेटे की सलामती के लिए पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना कर रहा है.

गुजरात के अहमदाबाद में हुए भयावह प्लेन क्रैश हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस दिल दहला देने वाली घटना में अयोध्या के होनहार मेडिकल छात्र अक्षत जायसवाल भी गंभीर रूप से घायल हो गया. अक्षत अहमदाबाद के मशहूर बी.जे. मेडिकल कॉलेज में MBBS प्रथम वर्ष का छात्र है, जिसकी बिल्डिंग पर एयर इंडिया का विमान पर गिरा था.

दरअसल, 12 जून की दोपहर का वक्त था और अक्षत कॉलेज की मेस में दोस्तों संग भोजन कर रहा था. तभी आसमान से एयर इंडिया का प्लेन सीधे कॉलेज की इमारत से टकरा गया. इसके बाद तेज धमाका हुआ, चीख पुकार मच गई, अफरा-तफरी का माहौल हो गया, कुछ देर बाद अयोध्या का लाल अक्षत खून से लथपथ जमीन पर पड़ा मिला.

अक्षत के सिर हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है. जैसे ही हादसे की सूचना अयोध्या पहुंची, देवकाली के भीखापुर इलाके में सन्नाटा पसर गया. यहां रहने वाले अक्षत के पिता राजेश जायसवाल और अन्य परिजन रातोरात अहमदाबाद रवाना हो गए. इकलौते बेटे की सलामती के लिए पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना कर रहा है.

अक्षत के पड़ोसी बद्री तिवारी ने ‘आजतक’ से बात करते हुए भावुक स्वर में कहा- जो घायल हुआ है उससे मेरा पारिवारिक संबंध है. इतना होनहार बच्चा, सबका लाड़ल, भगवान से बस यही दुआ है कि अक्षत जल्दी स्वस्थ हो और फिर से हंसता-खिलखिलाता नजर आए. फिलहाल, परिवार के साथ हम सब भी उसके लिए दुआ कर रहे हैं.

आपको बता दें कि गुरुवार दोपहर अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद मेघाणीनगर इलाके में बी. जे. मेडिकल कॉलेज के परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई.

इस फ्लाइट में 232 यात्री और 10 क्रू मेंबर्स समेत कुल 242 लोग सवार थे. क्रैश में सिर्फ एक शख्स की जान बची, बाकी 241 लोग मृत घोषित कर दिए गए हैं. वहीं, मेडिकल कॉलेज परिसर में मलबा गिरने से मेडिकल के चार स्टूडेंट्स और एक डॉक्टर की पत्नी की भी जान गई है. दर्जन भर से अधिक छात्र घायल भी हुए हैं.

AHMEDABAD : ‘जीत खाना खा रहा था, तभी अचानक धमाका हुआ और…’, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बचे मेडिकल छात्र की मां ने क्या बताया?

नाना लिलिया प्राथमिक विद्यालय की प्रिंसिपल कैलाशबेन सतानी ने बताया कि अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और चारों ओर धुआं फैल गया. मेरे बेटे ने हिम्मत दिखाई और सुरक्षित बाहर निकल आया.

गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार दोपहर एक भयावह विमान दुर्घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. लंदन के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद मेघानीनगर क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. विमान का एक हिस्सा बीजे मेडिकल कॉलेज की इमारत से टकराया, जिसमें कई छात्रों की मौत की सूचना है. हालांकि, कॉलेज की इमारत में भोजन कर रहा एमबीबीएस छात्र जीत सतानी सुरक्षित बच गया. उसके परिवार के लोग ईश्वर को धन्यवाद दे रहे हैं.

नाना लिलिया प्राथमिक विद्यालय की प्रिंसिपल कैलाशबेन सतानी का बेटा जीत सतानी बीजे मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है. कैलाशबेन ने बताया, “जब विमान दुर्घटना हुई, तब जीत खाना खा रहा था. अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और चारों ओर धुआं फैल गया. सभी बच्चे घबरा गए, लेकिन मेरे बेटे ने हिम्मत दिखाई और सुरक्षित बाहर निकल आया. मेरा बेटा पढ़ाई में मेहनती है और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहता है. इस हादसे ने हमें जीवन की नाजुकता का अहसास कराया.”

उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं भगवान की आभारी हूं कि मेरे बेटे को कुछ नहीं हुआ. यह उसके लिए दूसरा जन्म है. हमें जैसे ही खबर मिली कि जीत सुरक्षित है, हमारी जान में जान आई. हम उन सभी आत्माओं के लिए प्रार्थना करते हैं जो इस हादसे में चल बसे.” जीत के सुरक्षित बचने की खबर सुनकर उनके परिवार और नाना लिलिया गांव के लोगों ने राहत की सांस ली.

विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक सवार थे. हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित 265 लोगों की जान चली गई. विमान यात्रियों में सिर्फ एक जिंदा बचा है.

NATIONAL : लंदन से नर्स की नौकरी छोड़ भारत शिफ्ट होने वाली थीं रंजीता, नया घर भी तैयार था… अहमदाबाद विमान हादसे ने छीन लीं खुशियां

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केरल के तिरुवल्ला की रहने वाली रंजीता ने शायद ही सोचा होगा कि अपने दो बच्चों और बुजुर्ग मां को आखिरी बार देखने के बाद जब वह अहमदाबाद एयरपोर्ट से फ्लाइट लेंगी, तो वह सफर वापसी का नहीं, हमेशा की जुदाई का होगा. अहमदाबाद में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने रंजीता की जिंदगी छीन ली, और उसके साथ-साथ उनके परिवार की उम्मीदें, सपने और सुकून भी. रंजीता यूके में नर्स की नौकरी कर रही थीं. वह कुछ समय पहले ही अपने घर लौटी थीं.

अहमदाबाद विमान हादसे में जिन यात्रियों की जान गई, उनमें केरल के पतनमत्तिट्टा जिले के तिरुवल्ला की रहने वाली रंजीता भी शामिल थीं. वह यूके में बतौर नर्स काम कर रही थीं और हाल ही में कुछ जरूरी दस्तावेजों पर साइन करने भारत आई थीं. वह वापस यूके लौट रही थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. रंजीता की मौत ने उनके परिवार और पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है.

रंजीता ने अपने करियर की शुरुआत 2014 में ओमान के सलालाह में बतौर नर्स की थी. वहां वह अपने परिवार के साथ कुछ वर्षों तक रहीं. बाद में जब उन्हें यूके में नौकरी मिली तो उन्होंने सरकारी सेवा से लंबी छुट्टी लेकर विदेश में काम करने का फैसला लिया. बीते साल उनका परिवार ओमान छोड़कर तिरुवल्ला में शिफ्ट हो गया, ताकि बच्चे यहीं पढ़ाई कर सकें और परिवार का साथ मिल सके.

रंजीता यूके में अस्थायी रूप से काम कर रही थीं. वह भारत में दोबारा सरकारी सेवा में शामिल होना चाहती थीं. वे स्थायी रूप से भारत में अपने परिवार के साथ रहना चाहती थीं. वह अपना नया घर भी बनवा रही थीं. घर का काम लगभग पूरा हो चुका था और परिवार जल्द ही उसमें शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था.हादसे में जान गंवाने वाली रंजीता अपने पीछे अपनी मां और दो बच्चों को छोड़ गई हैं. उनका बेटा 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है जबकि बेटी 7वीं कक्षा में है. बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर वह हमेशा चिंतित रहती थीं. रंजीता का सपना था कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें और उनके साथ ज्यादा वक्त बिता सकें.

परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, रंजीता यूके की नौकरी छोड़कर सरकारी सेवा में फिर से शामिल होने की प्रक्रिया में थीं. इसीलिए वह कुछ दिनों के लिए भारत आई थीं. नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया. रंजीता की मौत ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है. परिजन गहरे सदमे में हैं. तिरुवल्ला इलाके में शोक की लहर है.

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