Wednesday, May 13, 2026
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NATIONAL : दिल्ली में 29 साल का युवक किराए के रूम में चला रहा था फर्जी कॉल सेंटर… क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर हो रही थी ठगी

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क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर देशभर के लोगों को ठगने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है. इस मामले में मुंबई पुलिस ने दिल्ली से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. साइबर ठगी के इस मामले में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों की गोपनीय जानकारी लेकर लाखों की ठगी को अंजाम दे रहा था. एक व्यक्ति ने सायन पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.

मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने दिल्ली में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल करता था और फिर उनके खातों से लाखों रुपये उड़ा लेता था. पुलिस ने इस कॉल सेंटर से 11 लोगों को पकड़ा है, जो देशभर में लोगों को फोन कर ठगी की कोशिश कर रहे थे.

एजेंसी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत अगस्त 2023 में हुई, जब मुंबई के सायन पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके क्रेडिट कार्ड से 4.54 लाख रुपये निकाल लिए गए. शिकायतकर्ता के फोन पर अज्ञात कॉल आया था, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को बैंक का एजेंट बताया और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का लालच दिया.

कॉल पर भरोसा करके शिकायतकर्ता ने एक लिंक के जरिए अपनी क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां शेयर कर दीं. इसके बाद उसके खाते से बड़ी राशि निकाल ली गई. शिकायत मिलने के बाद जब पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड और तकनीकी जांच की, तो पता चला कि कॉल दिल्ली से की गई थी.

जांच के बाद सायन पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और एक कमरे में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा. वहां से 29 वर्षीय आरोपी मनजीत कुमार महावीर सिंह को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में सामने आया कि मनजीत ने दिल्ली में एक कमरा किराए पर लेकर कॉल सेंटर शुरू किया था, जहां 11 लोग काम कर रहे थे. ये सभी लोग अलग-अलग मोबाइल नंबरों से देशभर में कॉल कर लोगों को ठगने का काम करते थे. पुलिस जांच में यह भी पता चला कि जिस मोबाइल नंबर से शिकायतकर्ता को कॉल किया गया था, उसी नंबर से की गई 16 अन्य ऑनलाइन शिकायतें भी दर्ज हैं.

NATIONAL : बिलासपुर के बाजार में लगी भीषण आग… 15 दुकानें जलकर खाक

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के एक बाजार में बुधवार तड़के आग लगने से एक दर्जन से अधिक दुकानें जलकर खाक हो गईं. बताया जाता है कि आग शॉर्ट सर्किट के चलते लगी थी.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के एक बाजार में बुधवार तड़के आग लगने से एक दर्जन से अधिक दुकानें जलकर खाक हो गईं. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के शनिचरी बाजार में सुबह करीब 3 बजे हुई. स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) विवेक पांडे ने बताया कि घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं. हालांकि, सुबह आग पर काबू पाने से पहले एक गोदाम, कपड़ों की दुकान और एक भोजनालय समेत 12 से 15 व्यापारिक प्रतिष्ठान जलकर खाक हो गए.फिलहाल आग से हुए नुकसान का आकलन अभी नहीं किया जा सका है. अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी. हालांकि, मामले की जांच की जा रही है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, दुकान मालिकों ने बताया कि इस घटना में उनका लाखों से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुधवार सुबह शॉर्ट सर्किट से बाजार में आग लग गई. जिसके बाद तुरंत फायर ब्रिगेड की टीम को सूचना दी गई. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम आग पर काबू पाया. फिलहाल इस घटना में कई व्यापारिक प्रतिष्ठान जल गए. जिससे लाखों से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

BIHAR : रेप पीड़िता के घर इलाज के लिए पहुंचे डॉक्टर की पिटाई, दबंगों ने पेड़ से बांधकर पीटा

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बिहार के गया जिले में एक रेप पीड़िता के घर महिला का इलाज करने पहुंचे डॉक्टर की दबंगों ने पिटाई कर दी. जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

बिहार के गया जिले के गुरपा गांव में मंगलवार को रेप पीड़िता के घर महिला का इलाज करने पहुंचे डॉक्टर को गांव के ही दबंगों ने पेड़ से बांधकर पीट दिया. बताया जाता है कि रेप केस के आरोपी पीड़ित परिवार पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे थे. इसी बीच रेप पीड़िता के मां की तबीयत खराब हो गई.

इसकी सूचना जब डॉक्टर जितेंद्र यादव को लगी तो वो इलाज के लिए घर पहुंच गए. तभी गांव के 10 से 12 की संख्या में रहे दबंगों ने डॉक्टर जितेंद्र यादव को पेड़ में बांधकर पिटाई कर दी. जिससे डॉक्टर जितेंद्र यादव बुरी तरह से घायल हो गए. जिस वक्त दबंगों द्वारा डॉक्टर जितेंद्र यादव की पिटाई की जा रही थी. उस वक्त दबंगों के खौफ से गांव के लोगों ने छिपकर वीडियो बना ली.इसके बाद ग्रामीणों में से किसी ने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. वहीं, वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए मौके पर डायल 112 की टीम भी पहुंच गई. जिसके बाद टीम ने पेड़ से बंधे खून से सने डॉक्टर को रस्सी खोलकर छुड़ाया और फिर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया.

रेप पीड़िता की मां ने बताया कि वर्ष 2021 में गांव के हीं 3 लोगों द्वारा रेप की घटना को अंजाम दिया गया था. जिसको लेकर हम लोगों ने केस किया था जो कोर्ट में चल रहा है और 30 मई 2025 को इसी मामले में हम लोगों की गया कोर्ट में गवाही हुई थी. जिसके बाद एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.वहीं अन्य आरोपी फरार चल रहे हैं. गांव के दबंगों द्वारा केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है. इसी को लेकर बदमाशों ने आज हमारे घर इलाज करने आये डॉक्टर जितेंद्र यादव पर हम लोगों की मदद करने का आरोप लगाकर पेड़ से बांध कर पीट दिया.

एसएसपी आनंद कुमार ने बताया कि गुरपा में एक व्यक्ति की पिटाई की जा रही थी, जिसकी सूचना पर डायल 112 की टीम घटना स्थल पर पहुंची थी और घायल व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है. मामले में आगे की जांच की जा रही है.

NATIONAL : ‘वोट कटुआ’ से लेकर किंगमेकर तक… बिहार चुनाव से पहले चिराग पासवान की वापसी से एनडीए में बेचैनी

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चिराग पासवान की पार्टी के लिए 2020 के चुनाव में मिली हार का सबसे बड़ा सबक यह है कि वह इस बार अकेले चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते. 2020 के चुनाव में उनकी पार्टी को वोट कटवा कहा गया था. बिहार की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करनी है तो चिराग का इस बार गठबंधन के साथ बने रहना जरूरी है.

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने बिहार चुनाव में विधायकी लड़ने के संकेत दिए हैं. इसके बाद पूरे राज्य में ‘चिराग फॉर सीएम’ के पोस्टर नजर आने लगे हैं. चिराग की पार्टी एलजेपीआर 33 विधानसभा सीटों के लिए दावेदारी कर रही है. इन सबके बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में 2020 के बिहार चुनाव जैसी हलचल देखने को मिल रही है. चिराग का लक्ष्य पार्टी की पुरानी पहचान लौटाने के साथ ही नीतीश कुमार के बाद एनडीए में सीएम के लिए अपनी दावेदारी पेश करना भी है. एलजेपीआर के नेताओं का कहना है कि बीजेपी में अभी भी ऐसे नेता का अभाव नजर आता है, जिसकी पैन बिहार पकड़ हो और वह तेजस्वी यादव को सीधे मुकाबले में टक्कर दे सके.

बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव में चिराग पासवान 30 सीटें मांग रहे थे. डिमांड पूरी नहीं हुई, तो चिराग अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. चिराग खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताते रहे और बीजेपी का समर्थन किया, लेकिन नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) के कोटे वाली सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए. तब उन्होंने बीजेपी के कई बागियों को भी टिकट दिया था, जिसके बाद उनके इस कदम के पीछे भगवा पार्टी का हाथ होने की बातें भी कही गईं. कथित तौर पर चिराग के इस कदम के पीछे एंटी एनडीए वोटबैंक के एक हिस्से को अपने पाले में कर महागठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने की रणनीति थी. बहुत ही करीबी मुकाबले में महागठबंधन और एनडीए का वोट शेयर करीब-करीब बराबर (37 फीसदी) रहा था. 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा की 125 सीटों पर तब एनडीए को जीत मिली थी और महागठबंधन की गाड़ी तब 110 सीटों पर ही ठिठक गई थी.

चिराग की अगुवाई वाली एलजेपी ने तब 137 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 73 सीटों पर उसके उम्मीदवार जीत-हार के अंतर से अधिक वोट पाने में सफल रहे थे, जिनमें 40 सीटों पर एनडीए और 32 सीटों पर महागठबंधन के जीतने की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा था. चिराग की पार्टी के उम्मीदवार उतारने से जेडीयू को खासा नुकसान हुआ. नीतीश कुमार को सीएम कैंडिडेट बनाने के फैसले से नाखुश बीजेपी के वोटर्स का एक वर्ग जेडीयू के कोटे वाली सीटों पर एलजेपी के पक्ष में शिफ्ट हो गया. नतीजा ये रहा कि साल 2015 में 71 सीटें जीतने वाली जेडीयू 2020 में 43 पर आ गई. सीएम नीतीश कुमार ने खुद भी जेडीयू के संख्याबल में आई कमी के लिए चिराग पासवान और उनकी पार्टी को जिम्मेदार बताया था.

एलजेपी ने जेडीयू को 33 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था. 28 ऐसी सीटों पर एलजेपी को मिले वोट जीत-हार के अंतर से अधिक वोट मिले, जहां जेडीयू दूसरे स्थान पर रही थी. चिराग की पार्टी पांच सीटों पर दूसरे स्थान पर रही और जेडीयू को तीसरे नंबर पर धकेल दिया. एलजेपी सिर्फ एक ही सीट जीत पाई, लेकिन जेडीयू का गणित बिगाड़ दिया.

चिराग पासवान और नीतीश कुमार की पार्टियों के बीच असहज रिश्तों के पीछे एक ऐतिहासिक कारण भी है. 2005 के बिहार चुनाव में एलजेपी दलित मतदाताओं की पसंद बनकर उभरी थी. तब पार्टी को 12 फीसदी वोट शेयर के साथ 29 सीटों पर जीत मिली थी. तब बिहार के नतीजे त्रिशंकू रहे थे और किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था. सत्ता की चाबी एलजेपी के हाथ आई थी और रामविलास पासवान मुस्लिम सीएम की डिमांड पर अड़ गए थे. इसके छह महीने बाद फिर विधानसभा चुनाव हुए और तब एलजेपी ने वोट शेयर मेंटेन रखा, लेकिन पार्टी की सीटें घटकर 10 रह गईं और एनडीए को बहुमत के साथ बिहार में नीतीश युग की शुरुआत हो गई. नीतीश कुमार की सरकार ने राज्य महादलित आयोग की सिफारिश पर अमल करते हुए 2007 में हाशिए पर पड़ी एससी कैटेगरी की जातियों के लिए महादलित नाम से अलग वर्ग बना दिया.

नीतीश के इस कदम को रामविलास पासवान (चिराग पासवान के पिता) और उनकी पार्टी को कमजोर करने, दलित मतदाताओं के बीच अपनी जमीन बनाने की रणनीति से जोड़कर देखा गया. तब बिहार में 16 फीसदी दलित आबादी थी, जिसमें छह फीसदी दुसाध यानी पासवान थे. नीतीश सरकार ने पासवान को छोड़कर अन्य सभी दलित जातियों को महादलित का दर्जा दे दिया. इसका लाभ जेडीयू को मिला या नहीं, यह अलग विषय है लेकिन एलजेपी को नुकसान हुआ. 2010 के बिहार चुनाव में पार्टी का वोट शेयर पिछले चुनाव के 11 फीसदी से घटकर सात फीसदी पर आ गया, जो 2020 आते-आते छह फीसदी के करीब रह गया. एलजेपी की सीटें भी 2005 में 29 से घटकर 2010 में तीन और फिर 2020 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ एक रह गई. नीतीश युग में एलजेपी का दबदबा कम हुआ है क्योंकि वह महादलितों के नेता के रूप में उभरे हैं और पासवान परिवार की पकड़ सिर्फ़ अपनी जाति तक सिमट कर रह गई है.

बिहार चुनाव में 2005 के बाद 2020 आते-आते एलजेपी के प्रदर्शन में गिरावट का ट्रेंड देखने को मिलता है. 2005 में अकेले चुनाव लड़ने वाली एलजेपी ने 2010 का चुनाव राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ मिलकर लड़ा और तीन सीटों पर सिमट गई. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले एलजेपी ने एनडीए का दामन थाम लिया और 2015 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ा. 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अकेले मैदान में उतर गई और एक सीट ही जीत सकी. विधानसभा चुनाव के विपरीत लोकसभा चुनावों में पार्टी का स्ट्राइक रेट सौ या इसके आसपास रहा है. 2014 में एलजेपी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा और छह जीतीं. 2019 में पार्टी ने छह में से छह, 2024 में पांच में से पांच सीटें जीतीं.

चिराग पासवान की पार्टी के लिए 2020 के चुनाव में मिली हार का सबसे बड़ा सबक यह है कि वह इस बार अकेले चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते. 2020 के चुनाव में उनकी पार्टी को वोट कटवा कहा गया था. बिहार की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करनी है तो चिराग का इस बार गठबंधन के साथ बने रहना जरूरी है. यही वजह है कि एलजेपीआर कार्यकर्ताओं के अति उत्साह के बावजूद चिराग ने साफ कहा दिया है कि नीतीश कुमार ही सीएम फेस रहेंगे. चिराग की रणनीति एलजेपीआर के छह फीसदी वोटबैंक को बेस बनाकर पार्टी के लिए अधिक से अधिक सीटें हासिल करने, जीतने की है.

चिराग पासवान का लक्ष्य अब अपने पिता की अगुवाई में पार्टी के 12.6 फीसदी वोट शेयर के स्तर तक पहुंचना, पार्टी को पुराना गौरव वापस दिलाना है. चिराग बस पासवान जाति तक सीमित पार्टी को फिर से पैन एससी पार्टी बनाना चाहते हैं. बिहार की जातिगत जनगणना 2023 के मुताबिक सूबे में पासवान समाज की आबादी 5.31 फीसदी है. अब एलजेपी ने चिराग के किसी सामान्य सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव पारित किया है, तो उसके पीछे गैर दलित मतदाताओं के बीच पार्टी की पैठ मजबूत करने की रणनीति भी वजह बताई जाती है. जेडीयू खेमे में चिराग की चुनावी एंट्री को नीतीश कुमार को कमजोर करने के लिए बीजेपी की एक और चाल के तौर पर भी देखा जा सकता है.

हो सकता है कि बिहार सरकार में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी इस तरह की संभावनाओं से असहज हों, जिनकी महत्वाकांक्षा सीएम बनने की है. चिराग युवा हैं, पैन बिहार नेता माने जाते हैं और युवाओं के बीच लोकप्रिय भी हैं. सी-वोटर के सर्वे में चिराग को अप्रैल में 5.8 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया था, जो मई में बढ़कर 10.6 फीसदी हो गया है. वहीं, सम्राट चौधरी की लोकप्रियता अप्रैल के 12.5 फीसदी से गिरकर मई में 6.6 फीसदी पर पहुंच गई है.

UP: सास से लड़ाई के बाद महिला ने फांसी लगाकर दी जान… जांच में जुटी पुलिस

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उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक गांव में बुधवार को 32 वर्षीय एक महिला ने अपने घर में हुए झगड़े के बाद फांसी लगा ली. जलेसर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) सुधीर राघव ने बताया कि पारिवारिक तनाव से परेशान होकर उसने पसियापुर बेगमपुर गांव में अपनी जान दे दी.

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक गांव में बुधवार को 32 वर्षीय एक महिला ने अपने घर में हुए झगड़े के बाद फांसी लगा ली. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच से पता चला है कि महिला का अपनी सास से झगड़ा था. जलेसर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) सुधीर राघव ने बताया कि पारिवारिक तनाव से परेशान होकर उसने पसियापुर बेगमपुर गांव में अपनी जान दे दी.

रचना के परिवार में उसके पति सुरजीत कुमार और दो बेटे हैं. उसकी शादी को करीब 10-12 साल हो चुके थे. अधिकारी ने बताया कि उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और उसके परिवार को सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में आता है खुदकुशी का ख्याल तो ये बेहद गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)

ENTERTAINMENT : रेचल गुप्ता ने लौटाया मिस ग्रैंड इंटरनेशनल का क्राउन, लगाए सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप, लड़ेंगी कानूनी लड़ाई

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रेचल गुप्ता ने बताया कि वो क्राउन को वापस कर चुकी हैं. साथ ही उन्होंने MGI पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ बदसलूकी की गई है. रेचल ने ऑर्गनाइजर्स पर सेक्सुअल ओर मेंटली हैरेसमेंट के गंभीर आरोप लगाए हैं.

मिस ग्रैंड इंटरनेशनल 2024 जीत कर इतिहास रचने वालीं जालंधर की रेचल गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आपबीती सुनाई है. ब्यूटी पेजेंट विनर ने दावा किया है कि उन्हें मिस ग्रैंड इंटरनेशल के खिताब से बेदखल नहीं किया गया है बल्कि उन्होंने खुद इसे लौटाया है. इसकी वजह वो अपने साथ होने वाले बुरे बर्ताव को बताती हैं.

रेचल ने बताया कि वो क्राउन को वापस कर चुकी हैं. साथ ही उन्होंने MGI पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ बदसलूकी की गई है. रेचल ने ऑर्गनाइजर्स पर सेक्सुअल ओर मेंटली हैरेसमेंट के गंभीर आरोप लगाए हैं.

रेचल ने कहा कि मेरे साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया और गलत शब्दों का इस्तेमाल कर मुझे परेशान किया गया. उन्होंने MGI के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट को लेकर कहा कि जो कॉन्ट्रैक्ट हुआ था मैं उसी तरह से कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक काम कर रही थी. लेकिन MGI के मेंबर और CEO द्वारा मुझे परेशान किया गया और सेक्सुअल हैरेसमेंट की गई. यही नहीं मुझ पर दवाब भी बनाया गया. लेकिन मैं उनके आगे झुकी नहीं और क्राउन वापस कर दिया. अब कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर दिया गया है.

रेचल ने आगे बताया कि कांट्रैक्ट के मुताबिक उन्हें एक भी रुपया नहीं दिया गया है. जो भी दूसरी बातें सामने आ रही हैं वह सब MGI द्वारा मनगढ़ंत बातें बनाई जा रही हैं. रेचल ने ऑर्गनाइजर्स पर बैड टच के भी गंभीर आरोप लगाए हैं. मीडिया से बातचीत में रेचल ने कहा कि उन्हें कपड़ों से लेकर रहन-सहन तक के खर्चे उन्होंने खुद किए हैं. MGI के कांट्रैक्ट के मुताबिक उन्हें एक भी रुपया नहीं दिया गया.

बातचीत के बाद रेचल ने फिलीपिंस की क्रिस्टीन ओपियाजा को ‘मिस ग्रैंड इंटरनेशनल’ का क्राउन मिलने पर बधाई दी. वह पहली रनरअप है इसलिए अब यह क्राउन उन्हें दिया जा रहा है. लेकिन वह भगवान से प्राथना भी करती हैं कि उस लड़की के साथ कुछ भी गलत न हो. रेचल ने आगे कहा कि वह अपनी इज्जत के साथ किसी तरह का कोई भी समझौता नहीं करेंगी और अब वह इस लड़ाई को लीगल तरीके की तरह लड़ेंगी.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेचल के पिता राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि MGI ने उनकी लड़की के साथ गलत किया है. उन्होंने कहा कि उन्हें रुपए नहीं चाहिए लेकिन उन्हें पूरी इज्जत तो देनी चाहिए थी. उन्होंने बताया कि रेचल ने पहले क्राउन वापस करने की पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली थी और उसके बाद MGI द्वारा पोस्ट डाली गई थी. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को दो कंपनियों के बीच फंसा दिया गया था और कॉन्ट्रैक्ट के कारण ही वह आगे कुछ नहीं कर पा रही थी.

दोनों देशों के एडवोकेट इस केस को देख रहे हैं और दोनों देशों के कानून अलग-अलग हैं इसलिए इसमें समय लग रहा है. उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी के साथ खड़े हैं और हिंदुस्तान की लड़कियों के लिए एक मैसेज है कि अगर कोई भी ऐसा करता है तो उनके घर वाले उन्हें संभालने के लिए बैठे हैं. हिंदुस्तान की लड़कियों ने कभी झुकना नहीं सीखा.

परिवार ने बताया कि रेचल जल्द ही बॉलीवुड की फिल्मों में भी नजर आएंगी. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले रेचल नाराज थी और थोड़ी अपसेट भी थी लेकिन अब वह ठीक है और खुश है. उन्होंने कहा कि रेचल ने पहले रिजाइन किया था और नोटिस भी भेजा था.

बता दें, रेचल के बाद मिस ग्रैंड इंटरनेशनल की ओर से ऑफिशियल पोस्ट कर ये कहा गया था कि उनकी ओर से रेचल को क्राउन की हकदार होने से बेदखल किया गया है. उन्होंने रेचल के अनप्रोफेशनल बिहेवियर को इसका जिम्मेदार ठहराया था.

IPL 2025 Final: क्लोजिंग सेरेमनी में शंकर महादेवन ने दी दमदार परफॉरमेंस, आर्मी को किया सलाम

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3 जून की शाम आईपीएल 2025 के फाइनल की क्लोजिंग सेरेमनी का जोरदार आगाज सिंगर शंकर महादेवन ने किया. शंकर के साथ उनके दोनों बेटे सिद्धार्थ और शिवम महादेवन ने भी जोरदार परफॉरमेंस दी. शंकर, शिवम और सिद्धार्थ ने मिलकर दर्शकों के मन में देशभक्ति की भावना जगाई.

आईपीएल 2025 का फाइनल मैच आज अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स के बीच खेला जा रहा है. इस मैच पर देशभर के क्रिकेट फैंस की नजरें जमी हुई हैं. आज की शाम क्रिकेट के दीवानों के लिए बेहद खास है. पंजाब किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु दोनों ही टीमों के फैंस पिछले 18 सालों से आईपीएल की ट्रॉफी अपनी फेवरेट टीम को उठाते देखने का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में सभी के लिए माहौल एकदम सेट है.

3 जून की शाम आईपीएल 2025 के फाइनल की क्लोजिंग सेरेमनी का जोरदार आगाज सिंगर शंकर महादेवन ने किया. शंकर के साथ उनके दोनों बेटे सिद्धार्थ और शिवम महादेवन ने भी जोरदार परफॉरमेंस दी. शंकर, शिवम और सिद्धार्थ ने मिलकर दर्शकों के मन में देशभक्ति की भावना जगाई. तीनों ने अपनी सुरीली आवाज से भारत के ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना को सलाम भेजा. इतना ही नहीं, शंकर महादेवन ने भारत के जवानों की हमारे देश को सुरक्षित रखने के लिए तारीफ भी की.

अपने जोरदार परफॉरमेंस के दौरान शंकर महादेवन ने ‘सुनो गौर से दुनियावालों’, ‘लक्ष्य’, ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, ‘कदमों से मिलते हैं कदम’, ‘ये देश है मेरा’, ‘मां तुझे सलाम’ जैसे गाने गाए. शंकर की परफॉरमेंस सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. यूजर्स सिंगर की तारीफ करते हुए कई वीडियो शेयर कर रहे हैं. शंकर महादेवन के अलावा आईपीएल 2025 की क्लोजिंग सेरेमनी में दमदार डांस परफॉरमेंस भी देखने को मिली, जिसने दर्शकों का दिल खुश कर दिया है.

आईपीएल 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स के बीच तगड़ा मुकाबला होना लाजिमी है. दोनों ही टीमों ने अभी तक आईपीएल ट्रॉफी को अपने नाम नहीं किया है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु इससे पहले तीन बार, 2009, 2011 और 2019 में आईपीएल फाइनल में पहुंच चुकी है, लेकिन अंत में जीत पाने में नाकामयाब रही थी. वहीं 11 सालों के लंबे इंतजार के बाद पंजाब किंग्स ने आईपीएल फाइनल में जगह बनाई है. देखना होगा कि कौन ट्रॉफी अपने नाम करता है.

UP : आगरा में मां-बेटी की गला घोंटकर हत्या… वारदात के बाद से पति गायब, तलाश में जुटी पुलिस

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उत्तर प्रदेश के आगरा से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. यहां वृथा गांव में एक घर में मां और बेटी की संदिग्ध हालात में हत्या कर दी गई. दोनों के शव घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिले. वारदात का शक महिला के पति पर है, जो घटना के बाद से फरार है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस महिला के पति की तलाश में जुटी है.

उत्तर प्रदेश के आगरा से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है. यहां इरादतनगर थाना क्षेत्र के वृथा गांव में एक घर के अंदर मां और बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी गई. दोनों के शव खून से लथपथ हालत में घर के भीतर पाए गए. इस दोहरे हत्याकांड का शक महिला के पति पर है, जो घटना के बाद से लापता है. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर दी है. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.,

जानकारी के अनुसार, वृथा गांव में कृष्णकांत नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता था. उसके परिवार में पत्नी कृष्णा और तीन बच्चे थे. मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे पुलिस को सूचना मिली कि कृष्णकांत के घर में दो शव पड़े हैं. जब पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के अंदर कृष्णा और उसकी बेटी लाड़ो की लाशें पड़ी थीं. यह नजारा बेहद भयावह था.

एसीपी शमसाबाद अमरदीप के मुताबिक, महिला के चेहरे पर चोट के निशान थे और गले पर भी दबाव के निशान मिले हैं. शुरुआती जांच से साफ है कि पहले उसका गला घोंटा गया और फिर चेहरे को ईंट या किसी भारी वस्तु से कुचला गया. वहीं बेटी के मुंह से झाग निकल रहा था, जिससे आशंका है कि उसकी भी गला दबाकर हत्या की गई है.

स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह करीब 5 बजे कृष्णकांत को घर से बाहर जाते हुए देखा गया था, तभी से वह गायब है और उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ है. पुलिस को यह भी पता चला है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे. ऐसे में पुलिस को शक है कि घरेलू विवाद के चलते ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है. फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है. आसपास के गांवों और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है.

AGRA : जिस घर में आनी थी बारात, वहां पहुंची परिवार की 6 लड़कियों की लाश, कलेजा चीर देगा मंजर

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आगरा जिले में मंगलवार को यमुना नदी में नहाते समय छह लड़कियां डूब गई थीं, जिसमें चार लड़कियों की मौके पर ही डूबने से मौत हो गई थी, जबकि दो लड़कियों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन बाद में उन्होंने भी दम तोड़ दिया.

यूपी के आगरा जिले में मंगलवार को यमुना नदी में नहाते समय छह लड़कियां डूब गई थीं, जिसमें चार लड़कियों की मौके पर ही डूबने से मौत हो गई थी, जबकि दो लड़कियों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन बाद में उन्होंने भी दम तोड़ दिया. एक ही परिवार की छह लड़कियों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है. मरने वाली लड़कियों में तीन सगी बहनें, एक चचेरी बहन, एक मौसेरी बहन और एक रिश्तेदार थी.

बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान जिस लड़की की मौत हुई उसकी शादी अगले हफ्ते होनी थी. यानी कि जिस घर में बारात आनी थी, उस घर के आंगन में छह लड़कियों की लाश आई. जिसके बाद शादी का माहौल मातम में बदल गया. जिसने भी ये मंजर देखा उसका कलेजा फट गया. परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल है.

फिलहाल, आगरा के डीएम ने सभी पीड़ित परिवारों को 4-4 लाख रुपये सहायता राशि देने की बात कही है. सीएम योगी ने भी घटना का संज्ञान लिया है और गहरा शोक प्रकट किया है. उन्होंने अधिकारियों को मृतकों के परिवार को हर संभव मदद दिलाने का निर्देश दिया.

आपको बता दें कि घटना थाना सिकंदरा क्षेत्र के नगला नाथू मौजा स्वामी की है, जहां बीते दिन करीब 10 बजे ये सभी छह लड़कियां नहाने के लिए यमुना नदी में उतरी थीं. इससे पहले उन्होंने रील बनाई और खूब मौज मस्ती की. नहाने के दौरान वो गहरे पानी में चली गईं और एक-एक कर डूबने लगीं. लड़कियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए. आनन-फानन में घटना की सूचना पुलिस को दी गई.

सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स यमुना किनारे पहुंची और फौरन ही गोताखोरों को बुलाया. गोताखोर नदी में कूदे और रेस्क्यू ऑपरेशन किया, लेकिन तब तक सभी लड़कियां डूब चुकी थीं. काफी देर की मशक्कत के बाद चार लड़कियों को निकाल लिया गया. उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

किसी तरह दो और लड़कियों को बचाया गया. उन्हें भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया. मगर दोपहर के बाद उन दोनों ने भी दम तोड़ दिया. जिसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर सभी छह लड़कियों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. फिलहाल, प्रशासन की ओर से शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है.

वहीं, इस हादसे के पहले का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सभी लड़कियां अठखेलियां करते हुए दिखाई दे रही हैं. वीडियो में लड़कियां नहाने के दौरान रील बना रही थीं. इसी के बाद वो गहरे पानी में चली गईं और डूबने से उनकी मौत हो गई. मृतकों की पहचान दिव्या (14), संध्या (12), शिवानी (17), नैना (14) सोनम (12) और मुस्कान (18) के रूप में हुई है. मुस्कान की अगले हफ्ते शादी होने वाली थी.
इनपुट- अरविंद शर्मा

UP : बहराइच में भेड़िया रिटर्न? मां के साथ सोए बच्चे को उठा ले गया आदमखोर, गन्ने के खेत में मिली क्षत-विक्षत लाश……..

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घटना के बाद जहां एक ओर इलाके के लोग इसे भेड़िए का हमला मानकर दहशत में हैं, वहीं जिले के डीएफओ ने घटनास्थल पर सियार का फुटमार्क मिलने की बात कही है. उन्होंने भेड़िए के हमले की बात को नकार दिया है. जबकि, क्षेत्रीय बीजेपी विधायक ने डीएफओ के बयान को असंवेदनशील बताकर उन्हें जिले से हटाने की मांग की है.

यूपी के बहराइच जिले में अपनी मां के साथ सोए एक मासूम बच्चे को आदमखोर जंगली जानवर उठा ले गया. काफी खोजबीन के बाद रात में बच्चे का पता नहीं चला. सुबह उस बच्चे का क्षत विक्षत शव गन्ने के खेत से बरामद हुआ है. घटना के बाद जहां एक ओर इलाके के लोग इसे भेड़िए का हमला मानकर दहशत में हैं, वहीं जिले के डीएफओ ने घटनास्थल पर सियार का फुटमार्क मिलने की बात कही है. उन्होंने भेड़िए के हमले की बात को नकार दिया है. जबकि, क्षेत्रीय बीजेपी विधायक ने डीएफओ के बयान को असंवेदनशील बताकर उन्हें जिले से हटाने की मांग की है.

दरअसल, अपनी ससुराल कोतवल कला से अपने मायके थाना हरदी क्षेत्र के ग़दमार गढ़ीपुरवा घूमने आई खुशबू ने बताया कि 2/3 जून की रात गांव में जब वह अपने दो वर्षीय पुत्र आयुष व बेटी के साथ घर के बरामदे में सोई थी उसी दौरान रात में भेड़िया आया और उसके बच्चे को उठा ले गया. जब उसने देखा तो वह उसके पीछे-पीछे दौड़ी लेकिन उसे पकड़ नहीं सकी. रात में बच्चे को बहुत ढूंढा गया लेकिन वह नहीं मिला. सुबह गन्ने के खेत में उसकी लाश मिली. भेड़िया उसके बच्चे का हाथ व पैर खा गया था. बच्चे के मुंह पर जानवर के दांत व सीने पर पंजे के निशान मिले थे. घटना के बाद से इलाके में एक बार फिर भेड़िए के हमले की याद ताजा हो गई है.

इस घटना पर वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अजीत सिंह ने बताया कि घटनास्थल से उन्हें जो पगमार्क मिले हैं वह सियार के हैं. वहीं, जब उनकी टीम ने ड्रोन से तस्वीरें ली तो उस क्षेत्र में दो सियार भी नजर आए. उधर, डीएफओ अजीत सिंह के बयान पर महसी से क्षेत्रीय बीजेपी विधायक सुरेश्वर सिंह ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें बहराइच से हटाने की मांग की है. घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक सुरेश्वर सिंह ने गढ़ी गांव जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उसे ढाढस बंधाया और डीएफओ के बयान को गैर जिम्मेदाराना करार दिया.

उन्होंने कहा कि जब वो बहराइच से प्रभावित क्षेत्र की ओर आ रहे थे तो वन विभाग की गाड़ियां उन्हें रास्ते में सड़क के किनारे खड़ी मिलीं और कर्मचारी उसी में बैठे थे. इस जिले में वन विभाग के एसडीओ जिनके पास डीएफओ का प्रभार है वो अपने को बहुत ज्ञानी समझते हैं, वो न ही मौके पर गए न ही घटने के कारण का पता लगाया, बस बता दिया कि इस घटना को सियार ने किया है.

बीजेपी विधायक ने आगे कहा कि क्षेत्र की चार लाख जनता ने उन्हें चुना है इसलिए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी मेरी है. मैं अपनी बंदूक लेकर निकला था, वो इसलिए की अगर कोई जंगली जानवर किसी बच्चे को उठाकर भागे तो मुझे किसी हथियार की प्रतीक्षा न करनी पड़े.

गौरतलब है लगभग 9 महीने पहले इसी महसी इलाके में आदमखोर भेड़िए के हमले में एक महिला समेत 10 मासूमों की जान चली गई थी. साथ ही कई अन्य घायल हो गए थे. उस दौरान क्षेत्रीय विधायक सुरेश्वर सिंह ग्रामीणों को सुरक्षा देने के लिए बंदूक लेकर स्वयं रात-रात जाग कर घूम रहे थे. सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं भेड़िया प्रभावित महसी इलाके का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सरकारी सहायता प्रदान की थी. सीएम ने लोगों को आश्वासन भी दिया था कि जब तक सारे भेड़िए पकड़ नहीं लिए जाते तब तक वन विभाग क्षेत्र में काम करता रहेगा. लेकिन अब एक बार फिर इलाके में हुई इस नई घटना से लोग सहमे हैं और आदमखोर की दहशत लोगों के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही है.

 

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