Saturday, September 19, 2026
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WORLD : मेक्सिको के तट पर आया शक्तिशाली भूकंप, रिक्टर पैमाने पर 7.4 तीव्रता; सुनामी की चेतावनी जारी

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मेक्सिको के चियापास तट के पास 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी को लेकर चेतावनी जारी की गई। भूकंप का केंद्र प्यूर्टो मादेरो के पास और जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। इसके झटके ग्वाटेमाला सिटी और एल सल्वाडोर तक महसूस किए गए। पढ़िए रिपोर्ट-

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप का केंद्र मेक्सिको के शहर प्यूर्टो मादेरो के पास था। इसकी गहराई जमीन से केवल 10 किलोमीटर नीचे थी।

सुनामी की चेतावनी जारी
भूकंप के बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी की आशंका जताते हुए चेतावनी जारी की है।

रॉयटर्स ने एक चश्मदीद के हवाले से कहा, भूकंप के झटकों से ग्वाटेमाला सिटी में इमारतें हिल गईं। एक अन्य चश्मदीद ने रॉयटर्स को बताया कि एल सल्वाडोर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।

ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति ने क्या कहा?
ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति बर्नार्डो अरेवालो ने कहा कि भूकंप के कारण अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, अभी तक कोई मौत नहीं हुई है और हम हर मिनट स्थिति पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और ऐसे हालात में जारी की जाने वाली सलाह का पालन करने की अपील की।

मेक्सिको के ओआक्साका राज्य के गवर्नर ने क्या कहा?
मेक्सिको के दक्षिणी राज्य ओआक्साका के गवर्नर ने कहा कि भूकंप के झटके राज्य की राजधानी में ‘मध्यम तीव्रता’ के साथ महसूस किए गए। सलोमोन जारा ने सोशल मीडिया पर बताया कि अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

ग्वाटेमाला में एहतियात के तौर पर लोगों को निकाला गया
भूकंप के बाद ग्वाटेमाला की राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया एजेंसी (कॉनरेड) ने एहतियाती कदम उठाते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

एजेंसी की ओर से ऑनलाइन साझा की गई तस्वीरों में यह दिखाया गया है। कॉनरेड ने लोगों से अपील की है कि वे शांत रहें, अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें और केवल आधिकारिक माध्यमों से मिली जानकारी पर भरोसा करें।

NATIONAL : पीएम मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, हरियाणा के जींद से हुई रवाना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।

जींद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद से सोनीपत के बीच में यह ट्रेन चलेगी, जिसका किराया पांच से 26 रुपये रखा गया है। इस ट्रेन से शून्य प्रदूषण होगा। वहीं, 26,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ परियोजना का हिस्सा है। इस पहल के साथ भारत हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया।

भारतीय रेल की एक बड़ी उपलब्धि
जींद और सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारतीय रेल की एक बड़ी उपलब्धि है। यह परियोजना नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन के प्रति रेलवे के संकल्प को दर्शाती है। साथ ही, यह स्वच्छ ऊर्जा और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगी। जींद-सोनीपत सेक्शन को इन ऑपरेशन्स के लिए पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेन के लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन ने साइट पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और डिस्पेंसिंग के लिए जरूरी लाइसेंस दे दिया है।

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के लॉन्च के साथ, भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो साफ-सुथरे रेल ट्रांसपोर्ट के लिए हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं। एक सरकारी बयान के अनुसार, टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती दौर में है। इसलिए अभी बहुत कम देश ऐसे सिस्टम चला रहे हैं या उनका परीक्षण कर रहे हैं।

कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन
हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन के ज़रिए बिजली बनाती है और इसमें सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) वाले सिस्टम का एक साफ-सुथरा विकल्प है। हाइड्रोजन-आधारित रेल सिस्टम को दुनिया भर में टिकाऊ ट्रांसपोर्ट के लिए एक अच्छे समाधान के तौर पर तेजी से पहचाना जा रहा है। रीफ्यूलिंग के काम के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है। साथ ही, भरोसेमंद और सुरक्षित कामकाज सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी टेक्निकल सपोर्ट और जरूरी स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट की व्यवस्था भी की जा रही है।

NATIONAL : ‘सिंधु जल संधि’ पर भारत का सख्त रुख बरकरार, ‘मध्यस्थता कोर्ट’ के फैसले को MEA ने फिर नकारा

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भारत ने सिंधु जल संधि मामले में तथाकथित ‘मध्यस्थता न्यायालय’ के नए फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह अदालत अवैध है और सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अब भी जारी रहेगा।

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में तथाकथित ‘मध्यस्थता कोर्ट’ के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 15 मई को इस तथाकथित अदालत ने ‘अधिकतम जल-भंडारण’ से जुड़े मुद्दे पर एक निर्णय जारी किया, जिसे भारत मान्यता नहीं देता।

बता दें कि बीते साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है। भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।

विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने कभी भी इस तथाकथित ‘मध्यस्थता कोर्ट’ के गठन को स्वीकार नहीं किया। सरकार के मुताबिक, इस अदालत की ओर से जारी कोई भी कार्यवाही, फैसला या निर्णय पूरी तरह शून्य और अमान्य है। भारत ने दोहराया कि पहले दिए गए सभी फैसलों की तरह इस नए फैसले को भी सिरे से खारिज किया जाता है।

सिंधु जल संधि पर कायम है भारत का फैसला
भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला अभी भी लागू है। विदेश मंत्रालय के बयान से संकेत मिले हैं कि भारत इस मुद्दे पर अपने रुख में कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।

जल विवाद को लेकर बढ़ सकती है कूटनीतिक तनातनी
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है। ऐसे समय में भारत का यह कड़ा बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।

‘भारत अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के बयान को भारत की स्पष्ट और सख्त कूटनीतिक लाइन माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में किसी भी बाहरी या ‘गैरकानूनी’ व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

BUSINESS : टेक जगत में बड़ा उलटफेर, एनवीडिया को पछाड़कर एपल फिर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

एपल ने एनवीडिया को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब फिर हासिल कर लिया है। जानिए एपल के इस बदलाव की पूरी कहानी और क्या है निवेशकों की नई रणनीति। पूरा विश्लेषण पढ़ने के लिए अभी क्लिक करें।

तकनीक की दुनिया में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। दिग्गज टेक कंपनी एपल ने चिप निर्माता एनवीडिया को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब फिर हासिल कर लिया है। अप्रैल 2025 के बाद यह पहला मौका है जब एपल शीर्ष पर लौटी है, जो दर्शाती है कि निवेशक अब एआई बूम के शुरुआती विजेताओं से आगे देखने लगे हैं। शुक्रवार को एपल का मार्केट कैप लगभग 4.88 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि एनवीडिया के शेयर 3.5% गिरने से उसकी मार्केट वैल्यू 4.86 ट्रिलियन डॉलर रह गई।

आखिर एपल ने एनवीडिया को पीछे छोड़कर कैसे हासिल किया नंबर एक का स्थान?
एनवीडिया जून 2025 से इस खिताब पर काबिज थी, जिसे उसके एआई चिप्स की भारी मांग से मजबूती मिली थी। लेकिन हाल ही में सेमीकंडक्टर बाजार में आई अस्थिरता का फायदा एपल को मिला। फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स जुलाई की बिकवाली में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 19% गिर चुका है। इस बिकवाली ने एनवीडिया के शेयरों पर दबाव डाला, जिससे एपल मामूली बढ़त के साथ शीर्ष पर पहुंच गई।

निवेशक एनवीडिया के बजाय एपल के बिजनेस मॉडल पर क्यों भरोसा जता रहे हैं?
एआई की रेस में लंबे समय तक एपल को प्रतिद्वंद्वियों से पीछे (लैगार्ड) माना जा रहा था। लेकिन अब निवेशकों का नजरिया बदला है। एनवीडिया जहां डेटा सेंटर्स के भारी पूंजीगत खर्च पर निर्भर है, वहीं एपल के पास उपकरणों और सेवाओं का विशाल इकोसिस्टम है। बीआरआई वेल्थ मैनेजमेंट के टोनी मीडोज के अनुसार, “एपल पर भारी पूंजीगत खर्च का दबाव कम है और वह सेवाओं, इकोसिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड के जरिए एआई से कमाई की बेहतर स्थिति में है, जो इसकी स्थायी कमाई के प्रति निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है”।

क्या एपल की एआई रणनीति और सिरी का नया अवतार गेम-चेंजर साबित होगा?
एपल ने पिछले महीने अपने वॉयस असिस्टेंट ‘सिरी’ को अधिक सक्षम रूप में पेश किया। कंपनी का मानना है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत करोड़ों यूजर्स के पास मौजूद आईफोन हैं। इनमें मौजूद व्यक्तिगत डेटा के जरिए सिरी अधिक उपयोगी और व्यक्तिगत सेवाएं दे सकती है। हालांकि, इसके साथ ही एपल को ब्रांड की पहचान बन चुकी प्राइवेसी सुरक्षा को भी बनाए रखना होगा।

क्या एनवीडिया और सेमीकंडक्टर बाजार की बादशाहत अब कमजोर पड़ रही है?
एपल का शीर्ष पर आना एनवीडिया के दबदबे का अंत नहीं है। अक्टूबर में एनवीडिया पांच ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप पार करने वाली दुनिया की पहली कंपनी बनी थी। सेगल मार्को के बेंजामिन हॉल के अनुसार, मामूली अंतर के कारण शेयरों में सुधार होते ही एनवीडिया दोबारा यह स्थान हासिल कर सकती है, और भविष्य में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी।

क्या एआई की इस रेस में अब नए खिलाड़ियों की एंट्री हो रही है?
एआई बाजार में अब निवेशकों की दिलचस्पी सिर्फ एनवीडिया तक सीमित नहीं है। मेमोरी चिप निर्माता माइक्रोन ने मई में एक ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप पार किया, जबकि दक्षिण कोरिया की एसके हाइनिक्स नैस्डैक पर लिस्ट हुई है। बेंजामिन हॉल के अनुसार, नए खिलाड़ियों के आने से बाजार का ध्यान केवल ‘मैग्नीफिसेंट सेवन’ कंपनियों से हट रहा है। एपल की वापसी दर्शाती है कि एआई का ध्यान अब इंफ्रास्ट्रक्चर से हटकर सीधे उपभोक्ताओं तक सेवाएं पहुंचाने वाली कंपनियों पर है।

NATIONAL : देश में फिर मंडराया कोरोना का खतरा! ग्वालियर के GR मेडिकल कॉलेज में तैयारियों को लेकर ये हैं हाल

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एक बार फिर भारत में कोविड-19 के नए मामले सामने आए हैं। इनमें से महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और केरल में नए केस सामने आए हैं। यहां कुल मिलाकर 157 एक्टिव केस मिले हैं। भारत में कोविड की एंट्री से ग्वालियर जिले के जेआर मेडिकल कॉलेज में तैयारी की गई है।

ग्वालियर: देश में एक बार फिर कोरोना वायरस का खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत में कोविड के 157 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। जिनमें से कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिंता की बात यह है कि संक्रमितों में एक प्रसिद्ध फिल्म कलाकार भी शामिल हैं, जिससे संक्रमण को लेकर सतर्कता और बढ़ गई है।

कोरोना के नए वेरिएंट जेएन.1 और एलएफ.7 की विदेशों से देश में एंट्री हो चुकी है। मुंबई में दो लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी कड़ी में ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में कोविड से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कॉलेज प्रशासन ने वायरोलॉजिकल लैब को फिर से एक्टिव करते हुए कोविड टेस्ट की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जीआरएमसी के डीन डॉ आरकेएस धाकड़ ने बताया कि, ‘कोरोना से निपटने के लिए मेडिकल स्टाफ पूरी तरह तैयार है। हमने पहले ही ऐसे हालातों से निपटने के लिए स्टाफ को ट्रेनिंग दी हुई है। फिलहाल शासन से किसी प्रकार की नई गाइडलाइन प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी तैयारियां कर ली गई हैं। गाइडलाइन आने पर उसी अनुसार और कदम उठाए जाएंगे।’

डॉ धाकड़ ने आगे कहा कि, ‘हमारी लैब पूरी तरह तैयार है और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पिछली बार जैसी भयावह स्थिति फिर से न हो।’

गौरतलब है कि कोविड-19 की शुरुआत को अब लगभग पांच साल होने को है। ग्वालियर में अब तक 67880 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 1,231 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2021 के अप्रैल, मई और जून माह कोरोना के सबसे खतरनाक दौर के रूप में सामने आए थे।फिलहाल ग्वालियर सहित देश भर में सतर्कता बरती जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग आम जनता से अपील कर रहा है कि वे कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें और किसी भी लक्षण के दिखने पर तत्काल जांच करवाएं।

NATIONAL : ई20 कार विवाद में नया मोड़: उपभोक्ता कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी मारुति सुजुकी, कहा- E20 अनुकूल थी गाड़ी

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मारुति सुजुकी ने रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग के उस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें कंपनी और उसके अधिकृत डीलर को एक ग्राहक की Grand Vitara Strong Hybrid बदलकर नई E20-कम्पैटिबल SUV देने का निर्देश दिया गया था। आयोग ने अपने फैसले में माना था कि संबंधित वाहन E20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं था।

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा मारुति ग्रैंड विटारा को बदलने के अहम फैसले के बाद अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसके खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।

मारुति सुजुकी ने कोर्ट के फैसले पर क्या बड़ा दावा किया है?
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में मारुति सुजुकी ने उपभोक्ता आयोग के फैसले पर असहमति जताई और अपने रुख को स्पष्ट किया:

कार पूरी तरह E20 अनुकूल थी:
कंपनी ने साफ तौर पर कहा कि पीड़ित ग्राहक की ग्रैंड विटारा कार पूरी तरह से E20 ईंधन के अनुकूल थी।

ओनर्स मैनुअल में था जिक्र:
मारुति ने दावा किया कि कार के E20 अनुकूल होने की यह जानकारी गाड़ी के साथ मिलने वाले ‘ओनर्स मैनुअल’ में भी स्पष्ट रूप से दर्ज की गई थी।

ईंधन में मिलावट के सबूत:
कंपनी का कहना है कि उनके पास गाड़ी के ईंधन में मिलावट होने के पुख्ता सबूत थे, जिन्हें आयोग के फैसले में सही ढंग से शामिल या प्रदर्शित नहीं किया गया।

ऊपरी फोरम में अपील की तैयारी:
इन तर्कों के आधार पर मारुति सुजुकी ने घोषणा की है कि वह इस फैसले के खिलाफ संबंधित उच्च फोरम में कानूनी चुनौती देगी।

उपभोक्ता आयोग ने मारुति पर क्या जुर्माना और आदेश सुनाया था?
रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 14 जुलाई को सुनाए अपने फैसले में मारुति सुजुकी और उसके डीलर ‘नेक्सा मैग्नेटो’ को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया था। आयोग ने अपने आदेश में कहा था:

45 दिनों में नई कार देने का हुक्म:
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया था कि वे रायपुर के डॉक्टर प्रेमराज देबता की खराब कार को वापस लें और उन्हें 45 दिनों के भीतर E20-अनुकूल इंजन वाली बिल्कुल नई Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus सौंपें।

₹20.50 लाख रिफंड का विकल्प:
यदि कंपनी तय समय सीमा में नई कार नहीं दे पाती है, तो उन्हें गाड़ी की कुल कीमत, रजिस्ट्रेशन (RTO) और बीमा खर्च को मिलाकर 20.50 लाख रुपये का पूरा रिफंड ग्राहक को लौटाना होगा।

मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च का जुर्माना:
इसके अलावा, कंपनी को ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये और अदालती खर्च के लिए 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।

देरी होने पर 7% ब्याज:
यदि कंपनी तय समय में इस राशि का भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे इस पूरी राशि पर 7 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देना होगा।

क्या था पूरा मामला और गाड़ी में क्या दिक्कतें आ रही थीं?
डॉक्टर प्रेमराज देबता ने जून 2024 में नेक्सा के रायपुर स्थित अधिकृत डीलर से 20.5 लाख रुपये (बीमा और आरटीओ सहित) भुगतान कर ग्रैंड विटारा का टॉप-एंड मॉडल खरीदा था।

22,000 किमी बाद आई दिक्कतें:
गाड़ी करीब 22,000 किलोमीटर चलने के बाद इंजन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का शिकार होने लगी। इसमें बार-बार वार्निंग लाइट जलना, गाड़ी का अचानक बंद हो जाना और परफॉर्मेंस का गिरना शामिल था।

बार-बार रिपेयर भी रहा बेअसर:
अधिकृत सर्विस सेंटर में कई चक्कर लगाने, फ्यूल टैंक की बार-बार सफाई करने और रिपेयर के अनगिनत प्रयासों के बाद भी गाड़ी की समस्या दूर नहीं हुई।

कंपनी के वकीलों ने दलील दी कि कार का निर्माण E20 मानकों के अनुरूप हुआ था। गाड़ी में आ रही खराबी का कारण ईंधन में मिलावट, रख-रखाव की कमी, सामान्य टूट-फूट या कोई अन्य बाहरी कारण हो सकते हैं, जिसके लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है।

शिकायतकर्ता और आयोग का दृष्टिकोण:
आयोग ने पाया कि गाड़ी का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था, जबकि इसे बेचा जून 2024 में गया। आयोग ने शिकायतकर्ता के इस तर्क को स्वीकार किया कि कार E20 ईंधन के लिए पर्याप्त रूप से अनुकूल नहीं थी। क्योंकि बार-बार फ्यूल टैंक साफ करने पर भी खराबी जस की तस रही।

NATIONAL : फडणवीस के गढ़ नागपुर में गरजेंगे उद्धव ठाकरे, ‘राम रक्षा’ आंदोलन का किया ऐलान

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शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने अगले सप्ताह नागपुर में (जहां संघ का मुख्यालय है) ‘राम रक्षा’ आंदोलन करने की घोषणा की. इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मुंबई स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ में पार्टी के विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन की चिंगारी कभी मातोश्री से उठी थी और अब राम मंदिर के नाम पर हुए कथित धन घोटाले के खिलाफ जनआक्रोश की शुरुआत भी यहीं से होगी.

उन्होंने पार्टी विधायकों को निर्देश दिया कि वे पूरे महाराष्ट्र में इस मुद्दे को लेकर सक्रिय रूप से प्रदर्शन करें और जनता के बीच जाएं. ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं, इसलिए शिवसेना (यूबीटी) को भी मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए.

बैठक में ठाकरे ने एसआईआर की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान देने को कहा. उन्होंने पार्टी नेताओं से इस मुद्दे पर नजर बनाए रखने और भविष्य की चुनावी तैयारियां तेज करने को कहा. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके बावजूद संगठन को चुनावी नजरिये से तैयार रहना होगा.

संगठन को मजबूत बनाने के लिए उद्धव ठाकरे ने जिला स्तर पर पार्टी ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत दिया. उन्होंने स्थानीय नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने और संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करने की योजना का ऐलान किया.

इसके साथ ही उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि पार्टी छोड़ चुके बागी नेताओं और उनके समर्थकों के कारण खाली हुए सभी संगठनात्मक पदों को जल्द से जल्द भरा जाए. उनका कहना था कि मजबूत संगठन ही आगामी राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा.उद्धव ठाकरे का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है. ऐसे में नागपुर में प्रस्तावित ‘राम रक्षा’ आंदोलन को राज्य की राजनीति में एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.

NATIONAL : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले की सुनवाई टली, अब 17 जुलाई को होगी सुनवाई

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मूल वाद संख्या 1 वर्ष 2023 सहित कुल 18 मामलों की सुनवाई अब 10 जुलाई के बजाय 17 जुलाई 2026 को होगी। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की अदालत की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 10 जुलाई को दोपहर 2 बजे निर्धारित सुनवाई किसी कारणवश नहीं हो सकेगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मूल वाद संख्या एक वर्ष 2023 सहित कुल 18 मामलों की सुनवाई अब 10 जुलाई के बजाय 17 जुलाई 2026 को होगी। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की अदालत की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 10 जुलाई को दोपहर दो बजे निर्धारित सुनवाई किसी कारणवश नहीं हो सकेगी।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (लिस्टिंग) को भेजे गए पत्र में सभी संबंधित अधिवक्ताओं को नई तिथि से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब इन सभी मामलों की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को दोपहर दो बजे निर्धारित की गई है। यह आदेश नौ जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना के निजी सचिव शरद कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी किया गया।

NATIONAL : पुरी रथयात्रा में 10 लाख श्रद्धालु शामिल, दो की मौत: सरकार बोली- भगदड़ नहीं, बीमारी से जान गई; आज पूजा-भोग के बाद फिर शुरू होगी यात्रा

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ओडिशा के पुरी में गुरुवार को लगातार बारिश के बीच भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा हुई। सरकार ने रथयात्रा के दौरान हुई दो श्रद्धालुओं की मौत पर कहा कि दोनों मौतें भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में किसी कमी की वजह से नहीं हुईं।CMO के मुताबिक, रथयात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 7 श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया था। इनमें 60 साल के एक श्रद्धालु की मौत हुई, जिसकी वजह का अभी पता लगाया जा रहा है। वहीं, 35 वर्ष से ज्यादा उम्र के दूसरे श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत हुई।

राज्य सरकार के मुताबिक, रथयात्रा में करीब 10 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। देर शाम तक महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 200 मीटर, भगवान बलभद्र का रथ 500 मीटर और देवी सुभद्रा का रथ 700 मीटर बढ़कर रुक गया। अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे पूजा-भोग के बाद रथ यात्रा फिर शुरू होगी।

पुरी में गुरुवार सुबह से बारिश हो रही थी। कई अनुष्ठान भी पानी के बीच हुए। शाम 5 बजे रथ आगे बढ़े। एक घंटा ही बीता था कि बारिश रुक गई। जो श्रद्धालु लॉज या होटल में रुके थे, वे भी इकट्‌ठा होने लगे। इसके चलते रथों के आसपास भीड़ बढ़ी और धक्का-मुक्की होने लगी।

दरअसल, मौसम विभाग ने रथ यात्रा के दौरान भारी बारिश का अंदेशा जताया था। तमाम तैयारियों के बावजूद पुलिस-प्रशासन का अनुमान था कि बारिश के चलते श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल होने से बचेंगे। लेकिन, बारिश थमते ही भीड़ बेकाबू हो गई। रथ यात्रा मार्ग पर हालात ये थे कि श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिर रहे थे।

मान्यता है कि गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर है। साल में सिर्फ एक बार रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा यहां आते हैं। तीनों देवता यहां 7 दिन तक विराजमान रहते हैं।इसके बाद आठवें दिन बहुड़ा यात्रा के जरिए वापस जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने ही जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। इसलिए मंदिर का नाम राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी रानी गुंडिचा के नाम पर पड़ा। साल में सिर्फ रथयात्रा के दौरान 7 दिन तक भगवान जगन्नाथ यहां विराजमान होते हैं।

बाकी समय मंदिर खाली रहता है। रथयात्रा के बाद लाखों श्रद्धालु यहीं भगवान के दर्शन करते हैं। रथयात्रा से एक दिन पहले पूरे मंदिर की सफाई की जाती है। इसे गुंडिचा मार्जन कहते हैं। रथयात्रा के आठवें दिन वापसी (बहुड़ा यात्रा) के दौरान भगवान मौसी मां मंदिर में रुकते हैं। यहां उन्हें ओडिशा का पारंपरिक ‘पोडा पीठा’ भोग लगाया जाता है।

NATIONAL : संसद का मानसून सत्र: विपक्ष कर रहा सरकार को घेरने की तैयारी, सत्ता पक्ष ने इतिहास रचने के लिए कसी कमर

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20 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में संसद के मानसून सत्र के लिए विपक्ष सरकार को घेरने की जोरदार तैयारी में है, जबकि सरकार के रणनीतिकार इतिहास रच देना चाहते हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी संसद के घेराव का एलान कर दिया है। कुल मिलाकर हंगामा तो होगा।

विपक्ष केन्द्र सरकार से नीट परीक्षा के पेपर लीक, ऑपरेशन सिन्दूर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए बयान, अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, मणिपुर में जारी हिंसा, बेरोजगारी और बढ़ती मंहगाई, ई-20(एथेनॉल) को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी जैसे मुद्दे को उठाकर केन्द्र सरकार को घेरेगा। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा है कि केन्द्र सरकार एक देश एक चुनाव के प्रस्ताव, परिसीमन और संविधान संशोधन विधेयक सदन में लाती है तो विपक्ष उसका विरोध करेगा।

मानसून सत्र के लिए केन्द्र सरकार के पास महत्वपूर्ण प्रस्ताव हैं। सरकार संसद के मानसूत्र में 130 वां संविधान संशोधन विधेयक लाने का संकेत दे रही है। इसके लिए सहयोगियों और लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की रणनीति पर काम हो रहा है। ऐसा हुआ तो परिसीमन का रास्ता साफ हो जाएगा। सितंबर 2023 से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पारित विधेयक प्रभावी हो सकेगा। सरकार एक देश, एक चुनाव के अपने प्रस्ताव को आगे बढ़ा सकेगी और उसके एफसीआरए विधेयक को भी संसद की मंजूरी दिलाने में बहुत दिक्कत नहीं आएगी।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने युवाओं, देश के लोगों से 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुग 19 दिन से का जंतर मंतर पर धरने पर हैं। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत तमाम नेता उनसे मिल आए हैं। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यह मुद्दा युवाओं में तेजी से चल रहा है। इसकी पूरी संभावना है कि 20 जुलाई दिल्ली में बड़ी संख्या में युवा आएं। यह संसद की तरफ मार्च करने के लिए विभिन्न रास्तों का रुख करें। माना जा रहा है कि ऐसा हुआ तो संसद सत्र के समय चुनौती बढ़ सकती है। सूत्र बताते हैं कि इसके बाबत केन्द्र और दिल्ली की राज्य सरकार को सूचना दी जा चुकी है। दिल्ली पुलिस सतर्कता बरत रही है और राज्यों से भी इसके बाबत सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

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