Thursday, February 5, 2026
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SPORTS : शमी, आकाशदीप और मुकेश का विजय हजारे में कहर, जम्मू-कश्मीर 63 रन पर ढेर, बना ये शर्मनाक रिकॉर्ड

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विजय हज़ारे ट्रॉफी के चौथे राउंड में बंगाल के तेज़ गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जम्मू-कश्मीर को उसके सबसे न्यूनतम लिस्ट-A स्कोर 63 रन पर ढेर कर दिया. मोहम्मद शमी और आकाश दीप की अगुवाई में बंगाल की पेस यूनिट ने पूरे मैच पर दबदबा बनाया और शमी की भारतीय टीम में वापसी की दावेदारी को और मजबूत किया.

भारतीय घरेलू क्रिकेट में अगर किसी टीम के पास इस समय सबसे घातक तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण है, तो वह बंगाल है. विजय हज़ारे ट्रॉफी 2025-26 के चौथे राउंड में बंगाल के पेस तिकड़ी ने ऐसा तूफान मचाया कि जम्मू-कश्मीर की टीम अपने इतिहास के सबसे न्यूनतम लिस्ट-A स्कोर पर सिमट गई.राजकोट के सनोसारा क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए ग्रुप B के चौथे मुकाबले में बंगाल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला किया और यह निर्णय पूरी तरह सही साबित हुआ. ठंडी सुबह में बंगाल के तेज़ गेंदबाज़ों ने नई गेंद से घातक स्विंग और सीम मूवमेंट का बेहतरीन इस्तेमाल किया.

टीम की अगुवाई कर रहे अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, जिनकी भारतीय टीम में वापसी की चर्चाएं तेज़ हैं, ने पारी की दूसरी ही गेंद पर जम्मू-कश्मीर के ओपनर कमरान इकबाल को पवेलियन भेज दिया. इस शुरुआती झटके से जम्मू-कश्मीर की टीम उबर ही नहीं पाई.शमी के साथ नई गेंद संभाल रहे आकाश दीप ने भी अपने पहले ही ओवर में विकेट झटक लिया. दोनों सीनियर तेज़ गेंदबाज़ों के दबाव ने जम्मू-कश्मीर के बल्लेबाज़ों की तकनीक और आत्मविश्वास दोनों को पूरी तरह तोड़ दिया. विकेटों का पतझड़ ऐसा चला कि विपक्षी बल्लेबाज़ टिककर खेलने का कोई भी प्रयास नहीं कर पाए.

बंगाल के तेज गेंदबाज़ों ने लगातार सटीक लाइन-लेंथ पर गेंदबाज़ी की, जिससे बल्लेबाज़ या तो खेलने से चूकते रहे या फिर गलत शॉट खेल बैठे. पूरी टीम सिर्फ 63 रन पर 20.4 ओवर में ढेर हो गई, जो कि जम्मू-कश्मीर का अब तक का सबसे कम लिस्ट-A स्कोर है.इस प्रदर्शन के साथ ही बंगाल की तेज़ गेंदबाज़ी इकाई ने पूरे देश में अपनी धमक दर्ज करा दी है. मोहम्मद शमी का अनुभव, आकाश दीप की निरंतरता और अन्य पेसर्स का अनुशासित सपोर्ट इस आक्रमण को बेहद खतरनाक बनाता है.

खास बात यह रही कि इस मुकाबले में बंगाल की कप्तानी अभिमन्यु ईश्वरन कर रहे थे, जिनके नेतृत्व में गेंदबाज़ों ने योजनाबद्ध तरीके से बल्लेबाज़ों को जाल में फंसाया. फील्डिंग भी बेहद चुस्त रही, जिससे जम्मू-कश्मीर को कोई राहत नहीं मिल सकी.जम्मू-कश्मीर के लिए यह दिन पूरी तरह निराशाजनक रहा. उनकी टीम का पिछला न्यूनतम स्कोर 75 रन था, जो उन्होंने 2015 में हरियाणा के खिलाफ बनाया था. लेकिन इस बार वे उस आंकड़े से भी नीचे चले गए.

इस प्रदर्शन के बाद मोहम्मद शमी की भारतीय टीम में वापसी की मांग और तेज़ हो गई है. घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट चटकाकर शमी यह साबित कर रहे हैं कि फिटनेस के साथ-साथ उनकी धार भी पूरी तरह बरकरार है.विजय हज़ारे ट्रॉफी के इस मुकाबले ने साफ कर दिया है कि अगर बंगाल की तेज़ गेंदबाज़ी इसी तरह जारी रही, तो वे टूर्नामेंट की सबसे खतरनाक टीमों में शुमार होंगे.

इस मैच में शमी ने 6 ओवर की गेंदबाजी की और 2 मेडन के साथ 2 विकेट झटके और केवल 14 रन ही खर्च किए. वहीं, मुकेश कुमार ने 6 ओवर में 16 रन देकर 4 विकेट लिए. जबकि आकशदीप ने 8.4 ओवर में 32 रन खर्च करके 4 विकेट झटके और जम्मू-कश्मीर की कमर तोड़ दी.

NATIONAL : स्कूल में बच्चे की मौत और महीनों तक इंसाफ की लड़ाई…फटकार कर भगाते थे पुलिस वाले, निराश मां ने दे दी जान

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दरभंगा में इंसाफ की तलाश कर रही एक मां की दर्दनाक मौत ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. नौ साल के बेटे की संदिग्ध मौत के बाद महीनों तक न्याय के लिए भटकती रही महिला कथित तौर पर मानसिक दबाव नहीं झेल पाई. पुलिस कार्रवाई में देरी और बेरुखी के आरोपों के बीच यह घटना इलाके को झकझोर देने वाली है.

मात्र नौ वर्ष के अपने एकलौते बेटे की मौत के मामले में इन्साफ की लड़ाई लड़ते- लड़ते एक मां इतनी टूट गयी कि इस पीड़ा को झेल नहीं पाई. उसने सिस्टम के सामने न सिर्फ हार मान ली बल्कि सल्फास खा कर अपनी जान दे दी है. घटना की पुष्टि खुद दरभंगा सदर के SDPO अमित कुमार ने भी की है हालांकि उन्होंने घटना को बेहद दुखद भी बताया है.

दरअसल, पूरा मामला यह है की मृतक महिला का नाम मनीषा देवी है. मनीषा ने दरभंगा के लहेरियासराय स्थित एक निजी स्कुल में अपने एकलौते बेटे कश्यप का एडमिशन क्लास 2 में कराया था. कश्यप कि उम्र महज नौ वर्ष के आसपास थी और वह स्कूल के हॉस्टल में ही रहता था. 19 दिन बीतने के बाद कश्यप का शव वहीं स्कूल की खिड़की में फंदे से लटका मिला था.

परिवार वालों ने बच्चे की हत्या का आरोप स्कूल प्रशासन पर लगाया था. पुलिस जांच की बात कह बहादुरपुर थाना ने एक FIR भी दर्ज की थी. लेकिन, तकरीबन तीन महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जबकि मनीषा लगातार थाना पुलिस के आलावा ज़िले के वरीय पुलिस अधिकारी से लेकर नेता, जहां भी उसे इन्साफ की उम्मीद की छोटी सी भी किरण दिखाई देती अपने बेटे के मौत के असली दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गुहार लगाती फिर रही थी. लेकिन मनीषा को कहीं से इन्साफ मिलता नहीं दिखाई दे रहा था.

बीतते समय के साथ मनीषा का हौसला भी टूट रहा था. आरोप यह है कि पुलिस से मदद के भरोसे की जगह उसे फटकार मिलने लगी, तब मनीषा पूरी तरह टूट गयी. एकलौते मासूम बेटे की मौत का गम और पुलिस की तरफ से इंसाफ मिलने में हो रही देरी के कारण मनीषा मानसिक दबाब को झेल नहीं पाई और एक रात पहले ही परिवार की लोगों से चुराकर सल्फास खा लिया.

मनीषा की तबियत बिगड़ी तो उसे अस्पताल ले जाया गया. तब मनीषा ने सल्फास खाने की बात खुद बताई. परिवार वालों की माने तो मनीष अपने बेटे की मौत पर इन्साफ मिलने में देरी से परेशान थी. लेकिन पुलिस वाले उन्हें कोई मदद नहीं कर रहे थे. प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आजतक कभी कोई जांच करने या पूछताछ करने उनके घर नहीं आया, न ही कुछ बताया. जब भी मनीषा थाना जाती पुलिस वाले उनसे ठीक से बात भी नहीं करते थे. हताश मनीषा को परिवार के लोग बहुत समझाने का भी काम किया करते थे लेकिन आखिरकार वही हुआ जिसका किसी ने सोचा भी नहीं था. एक की मौत के इन्साफ की लड़ाई में न्याय तो नहीं मिला. अब इस न्याय की चाहत में एक और ने जान दे दी.

मृतक महिला के भाई शिव शंकर साह ने बताया की मृतक मेरी बहन है. मेरी बहन की तबियत रात को बिगड़ी तब अस्पताल लाये, अस्पताल में उसने बताया की हम सल्फास खा लिए हैं. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. इससे पहले की बात यह है कि इसका नौ वर्ष का बेटा माउन्ट समर स्कूल में ए़डमिशन के 19 दिन में ही मृत पाया गया. उसका शव स्कूल में मिला था तब पुलिस को इसकी सूचना दिए थे. प्राथमिकी भी दर्ज हुई लेकिन लगातार दौड़ने के बाद भी उसे इन्साफ नहीं मिल रहा था पुलिस वाले ने अंतिम बार में तो बहुत डांट फटकार कर भगा दिया था. उस दिन मेरी बहन पूरी तरह टूट गयी थी. बहुत रो रही थी. मेरी बहन का वह एकलौता बेटा था.

PUNJAB : घर में सोफे पर बैठे- बैठे आ लगी गोली, शख्स की एकाएक मौत, CCTV में कैद हुई वारदात

फाजिल्का जिले के अबोहर क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां घर में सोफे पर बैठे एक युवक को अचानक गोली लग गई. यह पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

पंजाब के फाजिल्का जिले के हल्का अबोहर के नजदीक गांव ढाणी सूच्चा सिंह में सोमवार देर शाम एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई. गांव निवासी 27 साल के हरपिंदर सिंह उर्फ सोनू अपने ही घर में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया. यह घटना उस समय हुई जब वह घर के अंदर सोफे पर बैठा हुआ था. जैसे ही वह खड़ा हुआ, उसी दौरान अचानक पिस्तौल से गोली चल गई, जो सीधे उसके पेट में जा लगी.

घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसका फुटेज सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. फुटेज में देखा जा सकता है कि हरपिंदर सिंह सामान्य स्थिति में सोफे पर बैठा होता है और जैसे ही वह उठने की कोशिश करता है, अचानक गोली चलने की आवाज आती है और वह नीचे गिर जाता है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोली किस पिस्तौल से चली और यह हादसा था या इसके पीछे कोई और कारण है.

गोली लगते ही परिजन उसे तुरंत सरकारी अस्पताल अबोहर लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर देखते हुए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया. बावजूद इसके, इलाज के दौरान हरपिंदर सिंह ने दम तोड़ दिया. बताया जा रहा है कि हरपिंदर सिंह एनआरआई था और कुछ समय पहले ही विदेश से गांव लौटा था.

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. मंगलवार को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया. थाना सदर अबोहर के प्रभारी रविंद्र शर्मा ने बताया कि मृतक के पिता दर्शन सिंह का बयान दर्ज कर लिया गया है. पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 194 के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गोली चलना दुर्घटनावश हुआ या इसमें किसी तरह की लापरवाही या साजिश शामिल है.

मंगलवार को गमगीन माहौल के बीच गांव में हरपिंदर सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर है और लोग सुरक्षा व हथियारों के रख-रखाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

ENTERTAINMENT : KBC 17 को मिला दूसरा करोड़पति, चंद सेकंड में दिया 1 करोड़ के सवाल का जवाब, चौंके अमिताभ

कौन बनेगा करोड़पति के 17वें सीजन में रांची के बिप्लब बिस्वास ने 1 करोड़ रुपये जीते. वो सीजन 17 के दूसरे करोड़पति बने हैं. CRPF इंस्पेक्टर बिप्लब ने तेजी से सवालों के जवाब दिए और 1 करोड़ के सवाल का सही जवाब देकर अमिताभ बच्चन को भी इंप्रेस किया.

कौन बनेगा करोड़पति सीजन 17 अपने अंतिम पड़ाव पर है. शो का 17वां सीजन खत्म होने वाला है. इससे पहले क्विज शो को इस सीजन का दूसरा करोड़पति मिल गया है. रांची के बिप्लब बिस्वास ने 1 करोड़ जीते हैं. उनकी जनरल नॉलेज और गेम खेलने के तरीके ने बिग बी को इंप्रेस किया. जिस अंदाज में बिप्लब ने 1 करोड़ के सवाल का जवाब दिया, उसने बिग बी को हैरान किया.

बीते एपिसोड में बिप्लब बिस्वास के साथ गेम शुरू हुआ. वो फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड जीतकर हॉटसीट पर बैठे. सीट पर बैठने से पहले उन्होंने सदी के महानायक अमिताभ से कहा कि वो उनसे गले मिलना चाहते हैं. बिग बी ने कंटेस्टेंट की ये मुराद पूरी की. बिप्लब CRPF में इंस्पेक्टर हैं. फिलहाल वो छत्तीसगढ़ के बिजापुर में पोस्टेड हैं. जंगल में काम करते हुए उन्हें किस तरह से सर्वाइव करना पड़ता है, इसलिए उन्होंने शो में जानकारी दी. देश के लिए उनके सहयोगियों द्वारा किए गए बलिदानों का भी उन्होंने जिक्र किया. इस दौरान वो इमोशनल हुए, तब बिग बी ने उन्हें संभाला.

फिर गेम शुरू हुआ, बिप्लब ने तेजी के साथ सभी सवालों के जवाब दिए. बिना लाइफ लाइन का इस्तेमाल किए बिप्लब ने 5 लाख जीते. उनकी समझदारी और नॉलेज को देखकर बिग बी इंप्रेस हुए. उनहोंने बिप्लब को परिवार के साथ अपने घर खाने पर इंवाइट किया. 12 लाख 50 हजार के सवाल पर उन्होंने ऑडियंस पोल लिया. 25 लाख के सवाल पर कंटेस्टेंट ने लाइफलाइन संकेत सूचक को यूज किया. इसके बाद 50 लाख के सवाल पर बिप्लब ने लाइफलाइन 50-50 का इस्तेमाल किया. अब बारी आई 1 करोड़ के सवाल की. इसका बिप्लब ने बिना देर किए तुरंत जवाब दिया.

कंटेस्टेंट ने 1 करोड़ का सवाल सुनकर कहा- मैं किसी का समय यहां पर बर्बाद नहीं करना चाहता. मैं ऑप्शन D के साथ जाऊंगा. उनका ये जवाब सही था. सेकंड में जिस तेजी के साथ बिप्लब ने अपना जवाब लॉक कराया, इससे अमिताभ भी हैरान थे. 1 करोड़ जीतने के साथ बिप्लब को एक कार भी मिली है. वो शो के रोलओवर कंटेस्टेंट बने हैं. अब अगले एपिसोड में बिप्लब से 7 करोड़ का सवाल पूछा जाएगा. देखना होगा क्या वो 7 करोड़ के सवाल का सही जवाब दे पाएंगे?

NATIONAL : कार से आए और गरीब की रेहड़ी से सब्जी चुरा ले गए, CCTV में कैद हुई शर्मनाक करतूत

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मुजफ्फरनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां लग्जरी कार सवार चोरों ने सड़क किनारे खड़ी एक गरीब की रेहड़ी को निशाना बनाया. रात के अंधेरे में कार से आए ये लोग कैरेट भरकर सब्जी चोरी कर फरार हो गए, जिनकी करतूत अब सीसीटीवी में वायरल हो रही है.

मुजफ्फरनगर के खतौली कोतवाली क्षेत्र में 27 दिसंबर की रात करीब 11 बजे कार सवार चोरों ने सब्जी विक्रेता प्रदीप की रेहड़ी से सब्जी चोरी की. पीड़ित ने रोजाना की तरह अपनी रेहड़ी को तिरपाल से ढका था, जिसे हटाकर चोर दो कैरेट सब्जी गाड़ी में भरकर ले गए. अगली सुबह चोरी का पता चलने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पास की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.

पीड़ित सब्जी विक्रेता प्रदीप ने बताया कि उसकी दुकान पक्की नहीं है, इसलिए वह हर रात सब्जी को तिरपाल और रस्सी से बांधकर घर जाता है. प्रदीप के मुताबिक, उसके साथ यह पहली बार नहीं हुआ है; इससे पहले भी दो बार उसकी रेहड़ी से सब्जी चोरी हो चुकी है.

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है. सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें चोरों की हरकत साफ नजर आ रही है. हालांकि अंधेरे के कारण गाड़ी का नंबर और मॉडल स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है. पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि उसकी रोजी-रोटी सुरक्षित रह सके.

इस पूरे मामले पर सीओ खतौली रामाशीष यादव ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित की शिकायत दर्ज कर ली गई है. वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लेकर आरोपियों की धरपकड़ के प्रयास तेज कर दिए गए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इन सब्जी चोरों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले में उचित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

UP : घर में मिली 13 साल की बच्ची की खून से सनी लाश, कागज पर लिखा था हत्यारे का नाम

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सुल्तानपुर में एक 13 वर्षीय छात्रा की उसके ही घर में हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई. घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया. घायल आरोपी का अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी हुई है.

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में मंगलवार की शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां कक्षा 9 की 13 साल की छात्रा की उसके ही घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई. इस वारदात से इलाके में सनसनी फैल गई है. पुलिस मामले की पड़ताल में जुट गयी है. दरअसल ये मामला कूरेभार थाना क्षेत्र का है जहां की रहने वाली एक 13 साल की किशोरी मंगलवार दोपहर को घर में अकेली थी. इसी दौरान गांव का ही एक युवक उसके घर में घुस आया.किशोरी द्वारा उसका विरोध करने पर छात्रा की गला रेतकर हत्या करने के मामले में फरार आरोपी को पुलिस ने बीती देर रात एनकाउंटर कर गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस और आरोपी में हुई मुठभेड़ में आरोपी के दाहिने पैर में गोली लगी है. पुलिस ने घायल आरोपी को अस्पताल में भर्ती करवा दिया, जहां उसका इलाज चल रहा है. ये आरोपी मंगलवार की दोपहर छात्रा को घर में अकेला देख घुस गया था.छात्रा ने जब आरोपी का विरोध किया तो ये उसकी हत्या कर फरार हो गया था.

किशोरी अपने दादा के साथ रहती थी. मंगलवार को हुए इस हमले के बाद घायल किशोरी ने पास पड़े एक कागज़ के टुकड़े पर आरोपी विजय का नाम लिख दिया.किशोरी की चीख पुकार सुन आस पास के लोग घायल अवस्था में उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस वारदात से इलाके में सनसनी फैल गयी.

आनन फानन में इस घटना की जानकारी पुलिस को हुई. पुलिस ने किशोरी के परिजनों से मिली तहरीर पर आरोपी विजय व उसकी मां के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर मां को तुरन्त गिरफ्तार कर लिया. इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली की किशोरी की हत्या का मुख्य अभियुक्त विजय धनजई मोड़ की तरफ से जा रहा है.पुलिस ने सूचना के आधार पर जब उसकी घेराबंदी की तो उसने पुलिस पर फायर कर दिया,पुलिस ने भी अपने बचाव में जब फायर किया,तो आरोपी विजय के दाहिने पैर में पुलिस की गोली लग गयी और वो घायल हो गया.पुलिस ने विजय को गिरफ्तार करके प्राथमिक चिकित्सा के लिए CHC कूरेभार पर उसे भर्ती करवा दिया. यहां उसका इलाज चल रहा है और इस मामले में पुलिस द्वारा आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है.

NATIONAL : फरीदाबाद में लिफ्ट के बहाने चलती कार में रेप… देर रात सहेली के यहां जाने के लिए निकली थी पीड़िता

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हरियाणा के फरीदाबाद में सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां चलती कार में एक युवती के साथ रेप किया गया. दो युवकों ने लिफ्ट देने के बहाने लड़की को फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर कार में बैठाया था. पीड़िता ने जब विरोध किया तो उसे पीटा गया. उसके चेहरे और सिर में चोटें आईं. आरोपियों ने रेप के बाद पीड़िता को सड़क के किनारे फेंक दिया.

फरीदाबाद में चलती कार में रेप की घटना सामने आई है. पीड़िता देर रात अपने घर से निकली थी. इसी दौरान कार सवार दो युवकों ने उसे लिफ्ट के बहाने कार में बैठा लिया और फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर चलती कार में रेप किया. विरोध करने पर पीटा. रेप के बाद पीड़िता को सड़क पर फेंक दिया और फरार हो गए. पीड़िता के चेहरे और सिर में चोटें आई हैं. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

जानकारी के अनुसार, पीड़िता देर रात अपने घर से बाहर निकली थी. उसके परिवार ने बताया कि वह अपनी सहेली के घर जाने के लिए घर से निकली थी. पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि पीड़िता की बहन ने शिकायत में बताया कि रात 8:30 बजे उनके पास बहन की कॉल आई थी और उसे बताया गया कि घर में मां से कहासुनी हो गई है, मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूं. उसने कहा था कि मैं 3 घंटे में वापस आ जाऊंगी.

फरीदाबाद गुरुग्राम के रास्ते में एक आरोपी कार चलाता रहा, जबकि दूसरे ने पीड़िता के साथ रेप किया. दो घंटे तक आरोपी वैन को फरीदाबाद गुरुग्राम रोड पर घुमाते रहे. पीड़िता ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई. इसके बाद करीब तीन बजे आरोपियों ने पीड़िता को चलती वैन से फेंक दिया और भाग गए. सड़क पर गिरने से उसके चेहरे और सिर पर चोट आई है.

डॉक्टरों को उसके चेहरे पर टांके लगाने पड़े. देर रात पीड़िता ने अपनी बहन को कॉल कर घटना के बारे में बताया था, इसके बाद बहन मौके पर पहुंची. पीड़िता को फरीदाबाद के सिविल अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसकी हालत को देखते हुए डॉक्टर ने उसे दिल्ली एम्स के लिए रेफर कर दिया, लेकिन फिलहाल उसका फरीदाबाद के प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस इस मामले में केस दर्ज कर जांच कर रही है.

ENTERTAINMENT : सिद्धार्थ शुक्ला-शेफाली जरीवाला की मौत ने दिया सदमा, एंग्जायटी का शिकार हुईं आरती, पति ने संभाला

आरती ने बताया कि करीबी दोस्त सिद्धार्थ शुक्ला और शेफाली जरीवाला के निधन के बाद उन्हें डर, घबराहट और बेचैनी महसूस होती है. उन्होंने कहा कि कई बार वह खुद को संभाल नहीं पातीं और भावुक हो जाती हैं, लेकिन शादी के बाद उनके पति दीपक चौहान ने उनकी जिंदगी में काफी सुकून और स्थिरता ला दी है.

गोविंदा की भांजी और टीवी एक्ट्रेस आरती सिंह बिग बॉस सीजन 13 का हिस्सा रही हैं. इसके विनर सिद्धार्थ शुक्ला थे. इसी सीजन में शेफाली जरीवाला और रश्मि देसाई भी शामिल थीं. आरती का सभी से गहरा नाता है. हाल ही में उन्होंने अपनी दोस्ती पर बात की और बताया कि सिद्धार्थ और शेफाली की मौत का उनपर कितना गहरा असर पड़ा. वो एंग्जायटी का शिकार हो गई थीं.रश्मि देसाई के पॉडकास्ट ‘रश्मि के दिल से दिल तक’ में हुई एक भावुक बातचीत में आरती सिंह ने बताया कि बिग बॉस 13 के उनके दोस्त सिद्धार्थ शुक्ला और शेफाली जरीवाला के निधन ने उनपर मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत असर डाला.

आरती ने कहा कि अपने दोस्तों को खोने के बाद उनके मन में डर, घबराहट और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है. वो बोलीं- ये बहुत डरावना है और मुझे बहुत घबराहट होती है. ये सोचकर कि सिद्धार्थ शुक्ला और शेफाली जरीवाला अब हमारे साथ नहीं हैं, मैं बहुत डर जाती हूं. कई बार मैं बहुत भावुक हो जाती हूं और खुद को संभालने के लिए पारस छाबड़ा को फोन करती हूं. ये सब मुझे बहुत डराता है.

आरती ने ये भी बताया कि उनके पति दीपक चौहान ने उनकी जिंदगी में काफी शांति ला दी है, खासकर उन पलों में जब उन्हें घबराहट और डर महसूस होता है.उन्होंने कहा- शादी के बाद मैं काफी शांत हो गई हूं. मेरी घबराहट और ज्यादा उत्तेजित होने की आदत काफी कम हो गई है क्योंकि दीपक बहुत समझदार हैं. जब मैं परेशान हो जाती हूं, तो वो स्थिति को बहुत समझदारी और शांति से संभालते हैं और मुझे भी शांत कर देते हैं.

मालूम हो कि, बिग बॉस 13 के विजेता सिद्धार्थ शुक्ला का सितंबर 2021 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. वहीं, शेफाली जरीवाला का निधन जून 2025 में हुआ. दोनों ही अपने 40s उम्र की शुरुआत में थे और उनके अचानक चले जाने से पूरा देश सदमे में आ गया था.

आरती सिंह और दीपक चौहान की बात करें तो, दोनों ने अप्रैल 2024 में मुंबई में एक ग्रैंड शादी की थी. उनकी शादी अरेंज मैरिज के जरिए हुई थी. आरती सिंह मशहूर कॉमेडियन कृष्णा अभिषेक की बहन हैं.

WORLD : बांग्लादेश में मिलकर लड़ीं हसीना और जिया, ‘बेगमों’ की दोस्ती में कैसे आई दरार; जानें पूरी कहानी

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1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं खालिदा जिया का मंगलवार (30 दिसंबर) को लंबी बीमारी के बाद 80 साल की उम्र में निधन हो गया. बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया उन दो महिलाओं में एक थीं, जिन्होंने 4 दशकों से बांग्लादेशी राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा. दूसरी महिला शेख हसीना हैं, जो 5 बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं. अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बीच उन्हें सत्ता छोड़कर भागना पड़ा और तबसे वो भारत में रह रही हैं.

अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने भी खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने एक पोस्ट में कहा, ‘मैं बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं. बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में और लोकतंत्र की स्थापना के संघर्ष में भूमिका के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा. मैं उनके बेटे तारिक रहमान और उनके शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं.’

1980 के दशक से ही बांग्लादेश की राजनीति जिया और हसीना के इर्द-गिर्द घूमती रही है. दोनों की राजनीतिक अदावत जगजाहिर है, जिसे बेगमों की लड़ाई कहा जाता है. ये शक्तिशाली महिला के लिए इस्तेमाल होने वाला सम्मानजनक नाम है. दोनों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने बांग्लादेश में सड़क पर हिंसा को बढ़ावा दिया, शासन व्यवस्था को पंगु बना दिया और लोकतांत्रिक राजनीति को भी अंदर से खोखला कर दिया.

दोनों बेगमों के बीच दुश्मनी की जड़ें 1975 तक जाती हैं, जब बांग्लादेश के संस्थापक पिता और अवामी लीग के प्रमुख शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की तख्तापलट में हत्या कर दी गई थी. इसके तीन महीने बाद जिया के पति जियाउर रहमान (जो उस समय सेना के उप प्रमुख थे) ने प्रभावी रूप से देश पर कंट्रोल कर लिया और 1977 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बन गए.

1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद जिया और हसीना ने मिलकर लोकतंत्र के लिए जन आंदोलन खड़ा किया और 1990 में सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद को सत्ता से बेदखल कर दिया. जिया और हसीना की दोस्ती अधिक समय तक नहीं चली. 1991 में बांग्लादेश में पहले स्वतंत्र चुनाव हुए. जिया ने देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी, जमात-ए-इस्लामी का समर्थन प्राप्त कर हसीना पर अप्रत्याशित जीत हासिल की. इस कारण खालिदा बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.

1996 के आम चुनाव में शेख हसीना ने जिया को परास्त किया, लेकिन 5 साल बाद फिर जिया भारी बहुमत से सत्ता में लौटीं. 2004 में हसीना की रैली पर ग्रेनेड से हमला हुआ, लेकिन हसीना बच गईं. इस हमले के लिए जिया की सरकार को दोषी ठहराया गया.

NATIONAL : लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर सतर्कता की मिसाल, RPF ने 6 साल के बच्चे को किया रेस्क्यू

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लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने सतर्कता दिखाते हुए 6 वर्षीय नाबालिग बालक निखिल कुमार साहू को सुरक्षित रेस्क्यू किया है. नियमित जांच के दौरान अकेले मिले बच्चे से पूछताछ में पता चला कि वह गलती से ट्रेन में चढ़ गया था. आरपीएफ ने तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना देकर सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद बालक को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया.

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) लोहरदगा ने नाबालिग लड़के को सुरक्षित रेस्क्यू किया है. यह मामला 28 दिसंबर 2025 का है, जब लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर नियमित जांच के दौरान आरपीएफ की सतर्क नजर एक मासूम बच्चे पर पड़ी, जो प्लेटफार्म संख्या-01 पर अकेला बैठा हुआ था.

ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ पोस्ट लोहरदगा के अधिकारी एवं जवान प्लेटफार्म पर नियमित चेकिंग कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें एक लगभग 6 वर्षीय बालक अकेले और सहमा हुआ दिखाई दिया. बच्चे की स्थिति को देखते हुए आरपीएफ कर्मियों को संदेह हुआ, जिसके बाद उससे शालीनता और संवेदनशीलता के साथ बातचीत की गई. पूछताछ में बालक ने अपना नाम निखिल कुमार साहू बताया. उसने बताया कि वह राम मंदिर चुटिया, थाना चुटिया, जिला रांची (झारखंड) का निवासी है. बालक ने अपने पिता का नाम कृष्णा साहू और माता का नाम अनीता देवी बताया. मासूम निखिल ने बताया कि वह गलती से रांची से ट्रेन संख्या 68037 में सवार हो गया था और उसे पता ही नहीं चला कि ट्रेन उसे लोहरदगा ले आई.

बालक की बात सुनते ही आरपीएफ कर्मियों ने पूरी गंभीरता से मामले को संभाला और तत्काल उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की. सबसे पहले बच्चे को शांत किया गया और उसे सुरक्षित स्थान पर बैठाकर पानी व आवश्यक सहयोग दिया गया. इसके बाद नियमानुसार मामले की सूचना मोबाइल फोन के माध्यम से चाइल्ड हेल्पलाइन लोहरदगा को दी गई.

चाइल्ड हेल्पलाइन लोहरदगा के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रवि कुमार को भी तुरंत इस संबंध में अवगत कराया गया. सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए बच्चे की पहचान, विवरण और परिस्थितियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो. इस काम को अंजाम देने में आरपीएफ के एएसआई एस. आसिमुद्दीन तथा स्टाफ एस. हस्सा और भारत सिंह की अहम भूमिका रही. स्थानीय लोगों और रेलवे प्रशासन ने आरपीएफ की इस तत्परता और मानवीय पहल की प्रशंसा की है.

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