Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : 36 घंटे की बारिश ने मचाई तबाही: सूरत आधा डूबा, गुरुग्राम में हाईवे धंसा, जबलपुर में गिरी 5 मंजिला इमारत

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देशभर में मानसून अब आफत बनकर बरस रहा है। गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों तक मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे ज्यादा असर गुजरात के सूरत में देखने को मिला, जहां महज 36 घंटे में 18 इंच बारिश ने शहर को पानी-पानी कर दिया। कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं, सड़कें दरिया में बदल गई हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है।

सूरत में 36 घंटे में 18 इंच बारिश, 2100 लोगों का रेस्क्यू

गुजरात के सूरत में रिकॉर्ड बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में कमर तक पानी भर गया। तेज बहाव में कई कारें बह गईं और घरों-दुकानों में पानी घुस गया। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब 2100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सूरत और नवसारी में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। लोगों से केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है।

गुरुग्राम में हाईवे धंसा, 10 किलोमीटर लंबा जाम

हरियाणा के गुरुग्राम में लगातार बारिश के कारण दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया। इसके चलते करीब 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। कई इलाकों में दो-दो फीट तक पानी भर गया, जबकि जलभराव के कारण एक स्कूल बस भी सर्विस लेन के नाले में फंस गई।गुरुग्राम पुलिस ने हालात को देखते हुए निजी कंपनियों से कर्मचारियों को अगले कुछ दिनों तक वर्क फ्रॉम होम (WFH) देने की अपील की है।

जबलपुर में पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिरी

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। हालांकि इमारत गिरने के कारणों की जांच की जा रही है।वहीं प्रदेश के पन्ना, छतरपुर और खंडवा समेत कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने इंदौर, उज्जैन सहित 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

राजस्थान में बिजली गिरने से एक परिवार के तीन लोगों की मौत

राजस्थान के जालोर में तेज बहाव के बीच एक जीप नदी में पलट गई। वहीं चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।

अरुणाचल में बाढ़-भूस्खलन से 94 हजार लोग प्रभावित

अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। राज्य के 26 जिलों के 94 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोग घायल और दो महिलाएं लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

केरल के वायनाड में लैंडस्लाइड, 4 की मौत

केरल के वायनाड जिले में टनल निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।

रेल और हवाई सेवाओं पर भी असर

भारी बारिश का असर रेल और हवाई यातायात पर भी पड़ा है। गुजरात में रेलवे ट्रैक पर जलभराव के कारण पश्चिम रेलवे ने 9 ट्रेनें रद्द कर दी हैं और कुछ ट्रेनों का रूट छोटा किया गया है।वहीं दिल्ली और मुंबई में खराब मौसम के कारण कई उड़ानें देरी से चल रही हैं। एयरलाइंस ने यात्रियों से एयरपोर्ट रवाना होने से पहले फ्लाइट स्टेटस जांचने की अपील की है।

देश के 95% हिस्से में पहुंचा मानसून, कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार मानसून देश के करीब 95 प्रतिशत हिस्से में पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा समेत कई राज्यों में अगले दो से चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। कम समय में अत्यधिक बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं अब पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं। ऐसे में लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई है।

NATIONAL : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक पहल ,कई राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ हुआ : गृह मंत्री अमित शाह

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गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ यह हुआ है कि हम में एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है, राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं।

इन राज्यों को हुआ लाभ
मंत्री शाह ने कहा कि इस परियोजना से विशेषकर मध्यप्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान को बहुत लाभ हुआ। बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची। उन्होंने कहा कि राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, पर जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल के नेतृत्व में देश में चल रहे जल विवाद या जल वितरण से जुड़े विवाद एक-एक कर सुलझाए जा रहे हैं।
गुजरात को एमपी देगा 550 करोड़ रुपए
वहीं, इस समौझते में यह तय हुआ है कि मध्य प्रदेश समेत तीनों भागीदार राज्य गुजरात को 550-550 करोड़ रुपए देंगे। गुजराज को कुल 1650 करोड़ रुपए मिलेंगे।

डैम से एमपी को हुआ है नुकसान
दरअसल, नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर डैम का निर्माण गुजरात ने करवाया था। लेकिन जमीन सबसे अधिक एमपी की डूबी। जंगल से लेकर खेती की जमीन तक शामिल है। 178 गांव भी उजड़े हैं। इसके लिए एमपी लगातार मुआवजे की राशि की मांग करता रहा है। वहीं, गुजरात बढ़ी हुई राशि की मांग एमपी से करता रहा है। इसकी वजह से यह विवाद 30 सालों से चल रहा था।

NATIONAL : पंजाब कांग्रेस में कलह, सीधे हाईकमान से मिलना चाहते हैं चन्नी, बघेल की बैठक से बनाई दूरी; इस संकेत के बाद नाराजगी

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पंजाब कांग्रेस में बगावत जारी है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने की जिद पर अड़े हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब प्रभारी एवं पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया मगर चन्नी पहले हाईकमान से मिलना चाहते हैं। लिहाजा मंगलवार को उन्होंने बघेल की बैठक से दूरी बनाई रखी। उनके समर्थक विधायक, पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक भी प्रदेश प्रभारी की बैठक में नहीं गए।

पार्टी सूत्र बताते हैं कि चन्नी दिल्ली से लौट आए हैं और वे मंगलवार को चंडीगढ़ में ही रहे मगर बघेल से मिलने नहीं पहुंचे। उनके समर्थकों ने यही बताया कि चन्नी जरूरी काम के चलते दो दिन बाद बघेल से मिलेंगे। उधर, सूत्र बताते हैं कि मंगलवार शाम को कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की टीम ने पूर्व सीएम चन्नी से संपर्क साधा है। उनकी मुलाकात जल्द राहुल गांधी से हो सकती है जबकि प्रियंका गांधी की ओर से भेजी गई टीम चन्नी से मिलकर जा चुकी है।

हालांकि इस मुलाकात के बाद से पूर्व सीएम चन्नी और उनके समर्थक फिलहाल शांत हैं मगर पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से अंदरूनी हालात चल रहे हैं, उस देखते हुए हाईकमान को पार्टी में टूट का डर सता रहा है। चन्नी के एक समर्थक विधायक ने बताया कि मोरिंडा में हुई बैठक में सभी नेताओं ने पूर्व सीएम चन्नी को इस मसले पर हाईकमान से बात करने के लिए अधिकृत किया था, इसलिए सभी नेता चाहते हैं कि प्रदेश प्रभारी से पहले पूर्व सीएम चन्नी राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के समक्ष पंजाब के नाराज नेताओं की बात रखें। उनके अनुसार अधिकतर नेता वड़िंग का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
एक कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष, छह जिला प्रधान नहीं पहुंचे
मंगलवार को बघेल ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया जोकि देर शाम तक जारी रहा। पहले प्रदेश प्रभारी बघेल ने नवनियुक्त प्रदेश कार्यवाहक प्रधानों सुखजिंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को बुलाया था मगर गिलिजियां नहीं पहुंचे। इसी तरह उन्होंने सभी जिला प्रधानों को भी बैठक के लिए बुलाया था, उसमें भी छह जिलाध्यक्ष नहीं पहुंचे।

इससे पहले बघेल ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा, चुनाव घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता राणा केपी सिंह, चुनाव प्रचार समिति के सह अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैहरा, घोषणा पत्र समिति के सह-अध्यक्ष हरदयाल कंबोज, चुनाव प्रबंधन समिति के सह अध्यक्ष कुलजीत नागरा, ब्रह्म मोहिंद्रा, बलबीर सिंह सिद्धू, शमशेर सिंह दूलों सहित अन्य नेताओं के साथ बैठक की।

नेताओं, कार्यकर्ताओं में एकजुटता : बघेल
पंजाब प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं में एकजुटता है और सभी मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जल्द जुटेंगे। जिनके जो गिल-शिकवे हैं, वे जल्द दूर कर लिए जाएंगे। वे एक-एक कर सभी नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। बघेल ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उद्देश्य और मिशन को लेकर पूरी एकजुटता है। बघेल ने कहा, बैठक में चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कहना-सुनना जारी है, मिलना-जुलना जारी है।

बदलाव न होने के संकेत पर बढ़ी नाराजगी
बघेल ने पंजाब कांग्रेस मुख्यालय में जिलाध्यक्षों की बैठक के दौरान मौजूदा नेतृत्व में बदलाव न होने के संकेत दिए। जिसके बाद पूर्व सीएम चन्नी के समर्थक और नाराज हो गए हैं। उनका कहना है कि अधिकतर नेता यही मांग कर रहे हैं कि मौजूदा नेतृत्व बदला जाए, यदि ऐसा नहीं होता तो नाराजगी और बढ़ेगी।

NATIONAL : दशकों पुराना विवाद सुलझा: नर्मदा परियोजना पर चार राज्यों में समझौता, गृह मंत्री शाह की उपस्थिति में बनी सहमति

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नर्मदा नदी से जुड़े विस्थापन और भूमि मुआवजे के दशकों पुराने विवाद का समाधान हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है।

क्या बोले गृह मंत्री शाह?
शाह ने कहा, नर्मदा परियोजना के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के विस्थापन और भूमि मुआवजे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। अब चारों राज्यों ने आपसी सहमति से इस मामले का समाधान करने पर सहमति जताई है। इस परियोजना से विशेषकर मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को लाभ हुआ। बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची। राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, लेकिन जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है।

गृह मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं। कई राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ हुआ है, जिससे एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है। राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं।

जल विवादों के समाधान में प्रगति
गृह मंत्री ने कहा, हाल के समय में राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे कई जल विवादों के समाधान में भी प्रगति हुई है। पिछले महीने 29 जून को राजस्थान और हरियाणा के बीच भी सहमति बनी थी। दोनों राज्यों ने लगभग 30 साल पुराने विवाद को खत्म करते हुए यमुना जल परियोजना के निर्माण व क्रियान्वयन के लिए समझौता किया था। इसके अलावा 16 जून को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति जताई थी। इन समझौतों से राज्यों के बीच सहयोग और संसाधनों के बेहतर उपयोग का रास्ता मजबूत होगा।

NATIONAL : क्या शरद पवार की NCP का NDA में होगा विलय? महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस ने कर दिया साफ

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महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर चर्चा में है। इस बार शरद पवार की पार्टी एनसीपी के NDA के साथ विलय को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस पर अब महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस का बयान सामने आ गया है। दिल्ली दौरे पर आए सीएम फडणवीस ने शरद पवार की पार्टी का NDA में विलय पर कहा, ‘महाराष्ट्र में इस वक्त ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। कोई भी नया पक्ष, जो पहले से हमारे साथ है। उसके अलावा NDA में कोई नहीं आ रहा है। शरद पवार जी के पार्टी के सांसद या विधायक किसी को नहीं तोड़ा जाएगा।’NCP की ओर से नहीं आया कोई आधिकारिक बयान

महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि एनडीए के साथ पार्टी का विलय होने वाला है। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक NDA में विलय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दूसरी ओर, विपक्षी दल इन चर्चाओं को लेकर एनडीओ और एनसीपी पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। जबकि NCP की ओर से कोई बयानबाजी सामने नहीं आई है।

बदल रहीं राजनीतिक परिस्थितियां 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी दल अपने-अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में नेताओं के बयान राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे रहे हैं।

पार्टी नेतृत्व पर सभी की नजरें

फिलहाल एनसीपी के एनडीए में विलय को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व के अगले कदम और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

ऐसे चर्चा में आई NCP का NDA के साथ विलय की खबर 

बता दें कि शरद पवार की एनसीपी से लोकसभा सांसद अमोल कोल्हे के बयान से चर्चाएं तेज हो गई थीं। पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि अगर महायुति (NDA) की ओर से कोई अच्छा प्रस्ताव आता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है।’ इस टिप्पणी के बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि क्या शरद पवार गुट एनडीए के करीब जा रहा है।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के कई सांसद बागी रुख अपना लिए हैं। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कई सांसद बागी होकर एक अलग दल में शामिल हो गए हैं, जो कि एनडीए का समर्थन करता है। ऐसे में पार्टी के टूट और विलय की खबरें तेज हो गई हैं।

NATIONAL : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा पर हैं। आज उनके इंडोनेशिया दौरे का आखिरी दिन है। इसके बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई, 2026 को तीन देशों (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड) की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा पर हैं। आज उनके इंडोनेशिया दौरे का आखिरी दिन है, इसके बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे।

इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री मोदी 6-8 जुलाई, 2026 को इंडोनेशिया की यात्रा करेंगे। यह प्रधानमंत्री की चौथी और मई 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय के मुताबिक जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और दोनों देशों के बीच साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वह भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रांबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे, जो भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

दोनों देशों के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं। इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि बने थे। दुनिया में हिंदू देवता की सबसे ऊंची प्रतिमा भी इंडोनेशिया में स्थित है। 

8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया रहेंगे पीएम मोदी

इंडोनेशिया के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। मेलबर्न में, प्रधानमंत्री मोदी, प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वह ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।

पीएम मोदी 10-11 जुलाई आधिकारिक यात्रा के लिए जाएंगे न्यूज़ीलैंड

इसके बाद, न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन के निमंत्रण पर पीएम मोदी 10-11 जुलाई, 2026 को आधिकारिक यात्रा के लिए ऑकलैंड जाएंगे। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन ने 3 जुलाई को एक एक्स पोस्ट में लिखा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत के प्रधानमंत्री अगले हफ़्ते न्यूज़ीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। भारत दुनिया की सबसे बड़ी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और न्यूज़ीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण देश है।

उन्होंने कहा, “हम अप्रैल में हुए न्यूज़ीलैंड-भारत मुक्त व्यापार समझौते के ज़रिए दोनों देशों के रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं। इससे न्यूज़ीलैंड में ज़्यादा नौकरियां मिलेंगी, निर्यात बढ़ेगा और आर्थिक विकास मज़बूत होगा। इससे 1.4 अरब लोगों के बाज़ार में हमारे सामान और सेवाओं के निर्यात को बढ़ाने के नए मौके खुलेंगे – जिससे कीवी समुदायों में ज़्यादा पैसा आएगा, नौकरियां पैदा होंगी और वेतन बढ़ेगा।”

किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा

करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे, जिनमें पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऑकलैंड में प्रधानमंत्री प्रमुख कारोबारी और खेल जगत की हस्तियों से भी बातचीत करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों की एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे।

SPORTS : आखिरी मिनट में टूटा रोनाल्डो का सपना, मेरिनो के एक गोल ने पुर्तगाल को विश्व कप से किया बाहर

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फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में स्पेन ने आखिरी पलों में गोल दागकर पुर्तगाल को 0-1 से हरा दिया। मैच का एकमात्र गोल मिकेल मेरिनो ने इंजरी टाइम (90+1वें मिनट) में किया। इस जीत के साथ स्पेन ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जबकि क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

पहले हाफ में दोनों टीमों को नहीं मिली सफलता

मैच के पहले हाफ में दोनों टीमों ने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन कोई भी उन्हें गोल में नहीं बदल सका। स्पेन के लिए मिकेल ओयारजाबाल के पास बढ़त दिलाने का बेहतरीन मौका था, लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से बाहर चला गया। वहीं, गोलकीपर डियोगो कोस्टा ने एलेक्स बेना के शानदार कर्लिंग शॉट को बचाकर पुर्तगाल को शुरुआती झटका लगने से बचाया।

पुर्तगाल ने भी लगातार स्पेन की रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाया। कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कुछ अच्छे हमले किए, जबकि नूनो मेंडेस का डिफ्लेक्टेड शॉट क्रॉसबार से टकराकर लौट आया। इसके बावजूद पुर्तगाल पूरे मैच में गोल करने में नाकाम रही।

इंजरी टाइम में मेरिनो बने स्पेन के हीरो

दूसरे हाफ में दोनों टीमें सतर्क रहीं और मुकाबला गोलरहित आगे बढ़ता रहा। ऐसा लग रहा था कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन 90+1वें मिनट में स्पेन के दो सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने मैच का फैसला कर दिया। फेरान टोरेस ने बेहतरीन पास दिया, जिस पर मिकेल मेरिनो ने शानदार फिनिश करते हुए स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। यही गोल अंत में निर्णायक साबित हुआ।

इस हार के साथ 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप 2026 अभियान समाप्त हो गया। मैच से पहले ही रोनाल्डो ने कहा था कि यह उनके करियर का आखिरी फीफा विश्व कप होगा। उन्होंने अपने विश्व कप करियर में 27 मैचों में 11 गोल किए और लगातार छह अलग-अलग विश्व कप संस्करणों में गोल करने वाले पहले पुरुष फुटबॉलर बनने का रिकॉर्ड बनाया।

स्पेन ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में लगातार छह मैचों में क्लीन शीट रखने वाली पहली टीम बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। अब स्पेन क्वार्टर फाइनल में अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से भिड़ेगा।

WORLD : डील करो वरना करेंगे…, खामनेई की अंतिम सलामी के बीच बौखलाए ट्रंप की ईरान को फिर धमकी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ईरान में उनके मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का कई दिनों तक चलने वाला अंतिम संस्कार हो रहा है.

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को फिर धमकी दी है. ट्रंप ने सोमवार (लोकल टाइम) को दो टूक कहा, ‘या तो वे हमारे साथ समझौता कर लें या फिर हम उनका काम तमाम कर देंगे.’ यूएस प्रेसिडेंट की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ईरान में उनके मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का कई दिनों तक चलने वाला अंतिम संस्कार हो रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने टीवी इंटरव्यू के दौरान जोर देते हुए कहा, वह किसी भी तरह जीतेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम या तो एक समझौता करेंगे या फिर काम को पूरा करके रहेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि ईरान को खत्म करना बहुत आसान होगा, इसमें कोई मुश्किल नहीं आएगी. ट्रंप ने आगे कहा कि वह एक डील करना पसंद करेंगे, क्योंकि वह नहीं चाहते हैं कि ईरान के 9.1 करोड़ लोग प्रभावित हों, लेकिन अगर वह चाहें तो एक घंटे में ईरान के सारे ब्रिज और पावर ग्रिड तबाह कर सकते हैं.

ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ने ईरान में घुसकर केवल इसीलिए कार्रवाई की थी, क्योंकि हम ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मैं सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता, लेकिन यह सत्ता परिवर्तन ही है. उन्होंने फिर दोहराया कि उन्होंने ईरानी नेवी के जहाजों और वायु सेना के सभी विमानों को नष्ट कर दिया था.

उन्होंने यह भी कहा, ‘यूएस की पॉवरफुल नेवी ने अब तक की सबसे बड़ी नाकाबंदी लगाई और दो महीने तक एक भी जहाज नाकाबंदी को पार नहीं कर सका. फिर हम शायद एक समझौते के करीब पहुंचे, इसलिए हमने नाकाबंदी में ढील दी. मुझे नहीं पता लेकिन शायद हम एक समझौते पर पहुंच जाएं.’ ट्रंप ने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद तेल की कीमतों में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ.

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम सलामी सोमवार (6 जुलाई) सुबह तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर से शुरू हुई. यात्रा की शुरुआत ईरान का राष्ट्रगान बजाकर की गई. हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम सुबह से ही सड़कों पर जुटने लगा. खामेनेई के ताबूत को तेहरान के प्रमुख मार्गों से ले जाया जाएगा. इस दौरान सीनियर सरकारी अफसर, धार्मिक नेता और सेना के टॉप अधिकारी भी मौजूद रहे.

ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम और सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी के मुताबिक, यह ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक जमावड़ा है. तेहरान से होते हुए जनाजा पवित्र शहर कोम पहुंचेगा, जहां पार्थिव शरीर को दफन करने की अंतिम रस्में अदा की जाएंगी.

BUSINESS : माइक्रोसॉफ्ट ने एक झटके में खत्म कीं 4800 नौकरियां, AI निवेश के बीच क्यों उठाया बड़ा कदम?

अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी (Microsoft Layoffs) का फैसला किया है। यह कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 2.1 फीसदी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर तेजी से बढ़ते निवेश और कारोबार में दक्षता बढ़ाने की रणनीति के तहत कंपनी ने यह कदम उठाया है।

टेक सेक्टर में AI पर भारी खर्च के बीच छंटनी का यह नया दौर लगातार जारी है। इस साल अमेजन और मेटा (Amazon Meta Layoffs) भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं।

अनुमान है कि बड़ी टेक कंपनियां 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 700 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करेंगी। ऐसे में कंपनियों पर AI से बेहतर रिटर्न हासिल करने और बढ़ती लागत को नियंत्रित करने का दबाव भी बढ़ रहा है।

माइक्रोसॉफ्ट ने सोमवार को यह घोषणा ऐसे समय की है, जब कंपनी के शेयर इस साल दबाव में रहे हैं। 2026 की पहली छमाही में माइक्रोसॉफ्ट का शेयर करीब 23 फीसदी गिर चुका है। यह 2022 के बाद उसका सबसे खराब पहला छह महीनों का प्रदर्शन माना जा रहा है।

इससे पहले भी कंपनी 2026 में अमेरिका में अपने करीब 7 फीसदी कर्मचारियों, यानी लगभग 9,000 लोगों को स्वैच्छिक सेपरेशन (Voluntary Buyout) का ऑफर दे चुकी है। माइक्रोसॉफ्ट हर साल जून में वित्त वर्ष खत्म होने के बाद नए बजट और खर्च की योजना बनाते समय कर्मचारियों की संख्या में बदलाव करती रही है।

हालांकि AI की बढ़ती मांग से माइक्रोसॉफ्ट के Azure Cloud कारोबार को लगातार फायदा मिल रहा है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के AI मॉडल बेचने वाला एक्सक्लूसिव प्लेटफॉर्म था। लेकिन AI सेवाओं के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने की लागत कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव डाल रही है।

2026 के लिए $190 अरब के खर्च का अनुमान
कंपनी ने अप्रैल में चालू तिमाही के लिए Azure की बिक्री का अनुमान वॉल स्ट्रीट की उम्मीदों से बेहतर बताया था। साथ ही 2026 के लिए करीब 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान भी जारी किया, जो बाजार के अनुमान से काफी ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब कई नियमित कारोबारी कामों को ऑटोमेट कर रहा है। इससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर बिजनेस पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से मेमोरी चिप्स महंगे होने के कारण Microsoft को Xbox कंसोल की कीमतें भी बढ़ानी पड़ी हैं, जबकि इसकी मांग पहले से ही कमजोर बनी हुई है।

NATIONAL : पंजाब कांग्रेस में होगी टूट!: राहुल के खास चन्नी नाराज, रंधावा शाह से मिले; चुनाव से पहले होगा बड़ा खेला

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पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुरों ने पार्टी की फूट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राहुल गांधी के खास माने जाने वाले पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी हाईकमान के फैसले से नाराज हो गए हैं।

जिस दिन पंजाब में बगावत हुई उसी दिन सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलते हैं और इस पूरे प्रकरण पर पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों कहते हैं कि भाजपा में सबका स्वागत है।

सूबे में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस में बगावत की टाइमिंग ने पार्टी के समक्ष एक बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने सितंबर 2021 में अंदरूनी राजनीतिक विवाद और कलह के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस्तीफा लेकर दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का सीएम बनाया था। आज वही पूर्व सीएम चन्नी राहुल गांधी के फैसले को चुनौती दे रहे हैं।

कई नाखुश नेता भाजपा के संपर्क में
शुक्रवार को जो घटनाक्रम हुआ उससे सूबे की सियासत में बड़े खेल की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। उधर, भाजपा सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के कई नाखुश नेता भाजपा के संपर्क में हैं। दरअसल, भाजपा पंजाब में अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में लगी है। सत्ता में आने के लिए भाजपा हर तरह की रणनीति पर काम करने की तैयारी में है क्योंकि पार्टी जानती है कि पंजाब में उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अभी सूबे में भाजपा के केवल दो ही विधायक हैं।

ढिल्लों बोले-भाजपा में सबका स्वागत
सात महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसी स्थिति में पंजाब कांग्रेस में एक बड़ी कलह छिड़ जाने को भाजपा अपने लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं देख रही है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी जून 2022 से पहले कांग्रेस के बड़े नेता और दो बार के विधायक रहे हैं।

लिहाजा कई कांग्रेसी नेताओं के गैर सियासी संबंध आज भी उनके साथ बहुत अच्छे हैं। चूंकि अब कांग्रेस में बगावत के सुर उठ रहे हैं तो लाजिमी है कि ढिल्लों भी नाराज नेताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। शुक्रवार को कांग्रेस में बगावत संबंधी प्रकरण पर ढिल्लों ने साफ कहा कि भाजपा एक बहुत बड़ा परिवार है और यहां आने वाले हर नेता का स्वागत है।

ढिल्लों के अलावा सूबे के कई कांग्रेसी नेता राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा के भी संपर्क में हैं। उधर, सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा की शुक्रवार को ही शाह से मीटिंग की टाइमिंग ने भी अटकलों का बाजार खासा गर्म रखा। हालांकि इन सभी अटकलों को रंधावा ने खारिज कर दिया है।

कांग्रेस हाईकमान के पंजाब में पार्टी नेतृत्व को न बदलने के फैसले के बाद चन्नी ने कुछ विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों समेत 60 से अधिक नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को दबाव में लेने की कोशिश की है।

हालांकि इसी मसले पर कांग्रेस हाईकमान ने पिछले दिनों पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठक कर उन्हें नेतृत्व न बदलने के फैसले पर संतुष्ट किया था मगर उसके बावजूद बगावत हो गई। ऐसी स्थिति में अब कांग्रेस हाईकमान का रुख अहम होगा। यदि हाईकमान ने फैसला नहीं बदला तो चन्नी गुट के नेता बड़ा फैसला ले सकते हैं और ऐसे में भाजपा इस पूरे प्रकरण में अपना सियासी फायदा उठाने में चूकेगी नहीं।

हाईकमान पीछे नहीं हटेगा : वैद
पंजाब में 16 में से 5 विधायक ही पूर्व सीएम चन्नी की बैठक में पहुंचे। सात सांसदों में से चन्नी और वड़िंग को छोड़ दिया जाए तो अन्य पांच सांसदों ने भी इस बैठक से दूरी बनाए रखी। इसी तरह कई पूर्व विधायक और अन्य पूर्व मंत्री, सांसद व अन्य नेता भी चन्नी की बैठक में नहीं गए। इन सभी नेताओं का मौन हाईकमान के साथ खड़े रहने का इशारा कर रहा है।

पंजाब कांग्रेस के एससी विंग के अध्यक्ष व पूर्व विधायक कुलदीप वैद कहते हैं कि यह घटनाक्रम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि किसी को हाईकमान के फैसले पर ऐतराज था तो केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर वहां अपनी बात रखी जा सकती थी। चन्नी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में तो फैसले पर सहमति जताई थी तो अब अचानक क्या हो गया। वैद कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में कौन, किसके लिए क्या रोल प्ले कर रहा है, हाईकमान सब जानता है। उनके अनुसार हाईकमान न तो कमजोर है न ही पीछे हटने वाला है। यह प्रेशर पाॅलिटिक्स उचित नहीं है।

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