Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : जलालाबाद नहीं, अब परशुरामपुरी कहिए… योगी सरकार ने बदला यूपी के इस बड़े जिले में शहर का नाम

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उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख शहर का नाम बदल दिया है। सूबे के शाहजहांपुर का जलालाबाद शहर अब परशुरामपुरी के नाम से जाना जाएगी। इस संबंध में बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से मंजूरी देते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र जारी कर दिया गया। यूपी सरकार ने गृह मंत्रालय को भेजे अपने प्रस्ताव में कहा था कि शाहजहांपुर का जलालाबाद शहर भगवान परशुराम की जन्मस्थली के तौर पर जाना जाता है। परशुराम का प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर भी शहर में मौजूद है। ऐसे में जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का प्रस्ताव नगर पालिका परिषद की बैठक में पारित कर दिया गया है।

गृह मंत्रालय की तरफ से आई इस मंजूरी में कहा गया है कि 27 जून 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से जलालाबाद का नाम बदलने के लिए पत्र भेजा गया था। केंद्र सरकार को शाहजहांपुर के इस शहर का नाम परशुरामपुरी करने में कोई आपत्ति नहीं है। पत्र में आगे कहा गया है कि यूपी सरकार से गृह मंत्रालय का अनुरोध है कि वह नए नाम की वर्तनी देवनागरी (हिंदी), रोमन (अंग्रेजी) और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखते हुए अधिसूचना जारी करे।

जलालाबाद का नाम बदले जाने पर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से लोकसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर स्थित जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ करने की अनुमति देने पर गृह मंत्री अमित शाह का हार्दिक धन्यवाद और आभार।’

जितिन प्रसाद ने आगे लिखा है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार, वंदन और अभिनंदन। आपके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आए इस निर्णय ने सम्पूर्ण सनातनी समाज को गर्व का क्षण प्रदान किया है। भगवान परशुराम जी के चरणों में कोटि-कोटि नमन। आपकी कृपा मात्र से ही इस पुनीत कार्य में निमित्त बन सका। आपकी कृपा दृष्टि संपूर्ण जगत पर बनी रहे।’

NATIONAL : दिल्ली में रोजाना निकलने वाले कचरे से बनी गैस से चल सकती हैं 17 हजार कारें, CSE की रिपोर्ट में दावा

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सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे से 17 हजार कारें चलाई जा सकती हैं। दिल्ली में हर
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। क्या आपको पता है, यदि कचरे का सदुपयोग कर लिया जाए तो उससे आपकी गाड़ी का ईंधन भी बन सकता है। इतना ही नहीं दिल्ली-एनसीआर को वायु प्रदूषण जैसे बड़े संकट से भी निजात मिल सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार घरों से निकलने वाला कचरा ईंधन का बड़ा स्रोत है।

लेकिन देश की राजधानी दिल्ली इस दिशा में इसलिए पस्त हो जाती है क्योंकि यहां अब तक भी गीला-सूखा कचरा दिखावों और कागजों में ही अधिक अलग होता है। लोगों की खराब आदतें और सरकारी एजेंसियों की अन्यमनस्कता के चलते इस पर कभी सफल परिणाम नहीं निकल सके।

हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की ‘बायो सीएनजी फ्राम म्युनिसिपल सालिड वेस्ट’ पर एक रिपोर्ट आई है जिसके अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन जितना कचरा निकलता है उससे रोजाना करीब 17 हजार कार चलाई जा सकती हैं। सीएसई की यह रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में हर दिन 5,210 टन गीला कचरा पैदा होता है।


इस कचरे से हर दिन 174 टन यानी एक लाख 74 हजार किलो बायो-सीएनजी तैयार की जा सकती है। राजधानी में यदि किसी वाहन चालक की कार दिनभर औसतन दस किलो सीएनजी खर्च करती है तो इस हिसाब से 17,400 कारों के लिए ईंधन की जरूरत पूरी हो सकती है। इसी तरह यदि इस कचरे से एलपीजी गैस बनाई जाए तो 94 टन एलपीजी तैयार होगी, जिससे हर रोज 6,600 सिलिंडर भरे जा सकते हैं।

गीले कचरे से खाद बनाने की तुलना में बायो सीएनजी बनाना कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल है। रिपोर्ट बताती है कि गीले कचरे से खाद बनाने के दौरान आसपास के लोग बदबू की शिकायत करते हैं। इसका सही प्रबंधन नहीं होने की स्थिति में कचरा सड़ते समय उससे निकलने वाला द्रव (लिचेट) भूजल में जाकर उसे जहरीला बनाता है।

इसकी तुलना में बायो सीएनजी संयंत्र के पास बदबू नहीं होती व खाद बनाने वाले संयंत्र की तुलना में यह दो से तीन गुना कम जमीन पर ही काम कर सकता है। बड़े स्थानीय निकायों को इस तरह के संयंत्र लगाने चाहिए जिससे बायो-सीएनजी का उत्पादन किया जा सके।

साथ ही शहरों को हर तीन साल में अपने यहां से निकलने वाले कचरे का आडिट भी कराना चाहिए। इसके जरिए पता लगाया जाना चाहिए कि किसी खास शहर में कितना और कैसा कचरा पैदा हो रहा है। उसी अनुसार उसके प्रबंधन की योजना बनाई जाए।

विदेश में : जर्मनी, कनाडा और अमेरिका में भी इसका सफल प्रयोग हो रहा।
दिल्ली ही नहीं, सभी बड़े शहरों को गीले कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए खाद से बायो सीएनजी बनाने की तरफ शिफ्ट होना चाहिए। शहरी स्थानीय निकाय अपने कचरे से ईंधन बनाकर खुद के वाहनों की ईंधन जरूरतों को भी पूरा कर सकते हैं। इससे ईंधन का खर्च बचेगा और कचरे का प्रबंधन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। -कैफी जावेद, ठोस कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ, सीएसई

सूखे और गीले कचरे के बेहतर निपटान की दिशा में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। बायोगैस प्लांट हालांकि एक पुरानी तकनीक है, लेकिन दिल्ली में अभी तक इस पर ढंग से काम नहीं किया गया। कचरे के स्मार्ट प्रबंधन से प्रदूषण भी कम होगा और ईंधन के नए स्रोत भी मिलेंगे। लैंडफिल साइट्स के अलावा गोशालाओं के गोबर से भी गैस बनाई जा सकती है। – डॉ. जेपीएस डबास, पूर्व प्रधान विज्ञानी, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा

देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित बायो सीएनजी प्लांट की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य प्रतिदिन 28 टन सीएनजी उत्पादन का है। ऐसा करने के लिए हमें एजेंसी को रोजाना 800 टन गीला कचरा देना होगा। इसकी तैयारी चल रही है। -रोहित सिसोनिया, अपर आयुक्त इंदौर नगर निगम

NATIONAL : भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग पर खरगे ने सरकार से पूछे तीखे सवाल; कन्हैया ने शिक्षा पर कैसे घेरा?

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कांग्रेस ने वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी ने कहा कि सरकारी नीतियों से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई है, जबकि पासपोर्ट सेवाएं महंगी और वीजा व्यवस्था कमजोर हुई है। कांग्रेस ने विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या पर भी सवाल उठाए। पढ़िए रिपोर्ट-

वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत की स्थिति को को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कथित पुराने बयान का जिक्र किया और उसको लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले दावा किया था कि विदेश जाने और वहां रहने वाले लोग भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को जानते हैं।

उन्होंने कहा, सेवाओं में सुधार करने के बजाय मोदी सरकार ने पासपोर्ट बनवाना महंगा कर दिया है। उनके अनुसार, सामान्य पासपोर्ट का शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि तत्काल सेवा का शुल्क बढ़कर 5,000 रुपये हो गया है।

खरगे ने कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अभी तक कोविड महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि 2019 में 1.09 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए थे। जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 99.5 लाख रह गई।

उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार इस कमी को छिपाने के लिए एनआरआई (प्रवासी भारतीय) के आगमन को भी विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों में जोड़ रही है? खरगे ने यह भी पूछा, भारत का आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल अब भी इतना पुराना और जटिल क्यों है कि वह 1990 के दशक की वेबसाइट जैसा लगता है?

उन्होंने कहा, ‘अतिथि देवो भवः’ की भूमि भारत में कोई भी पर्यटकों का इस तरह स्वागत नहीं करना चाहता।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, अगर भारतीय पासपोर्ट की ताकत कम हुई है। पर्यटन अब तक पूरी तरह नहीं संभला है। वीजा सेवाएं कमजोर हैं और लोगों को खराब सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, तो फिर सरकार जिस वैश्विक सम्मान का प्रचार करती है, वह आखिर कहां है? उन्होंने कहा कि सच्चाई कुछ और है और मोदी सरकार की वजह से भारत की छवि प्रभावित हो रही है।

NATIONAL : असम राइफल्स के काफिले पर मणिपुर में हमला, दो जवान बलिदान; घात लगाकर किए गए हमले में पांच घायल

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मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई है। शुक्रवार को राज्य के बिष्णुपुर जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने असम राइफल्स के काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में असम राइफल्स के दो जवान बलिदान हो गए, जबकि पांच घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में दो जवानों बलिदान हो गए, जबकि कम से कम पांच अन्य जवान घायल हुए हैं। इस हमले ने एक बार फिर राज्य में सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में हुआ। असम राइफल्स के जवानों का वाहन इंफाल से बिष्णुपुर की ओर जा रहा था। तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।

मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमलावरों ने अचानक गोलीबारी की, जिसमें एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दो जवान, जिनमें एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) और एक जवान शामिल हैं, मौके पर ही बलिदान हो गए। जबकि पांच जवान गंभीर रूप से घायल हैं।’ घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत इलाज के लिए भेजा गया। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उनमें से एक की स्थिति नाजुक है।

‘सफेद वैन में सवार होकर भाग निकले आंतकी’
मामले में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि व्यस्त सड़क पर जवानों के वाहन पर हमला करने के बाद हमलावर एक सफेद वैन में सवार होकर भाग निकले। जवानों ने संयम बरतते हुए जवाबी कार्रवाई की ताकि कोई नागरिक हताहत न हो। सुरक्षा बल ने हमले के पीछे छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इस घटना को लेकर गुवाहाटी के रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि शाम लगभग 5:50 बजे, 33 असम राइफल्स के जवानों की एक वाहन-आधारित टुकड़ी अपने पटसोई कंपनी ऑपरेटिंग बेस से नाम्बोल कंपनी ऑपरेटिंग बेस की ओर बढ़ रही थी। मणिपुर के विमुक्त क्षेत्र, नाम्बोल सबल लेईकाई में, हाईवे पर अज्ञात आतंकवादियों ने इस टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया। इस कार्रवाई में, असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए और पांच घायल हो गए, जिन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। अभी तक, किसी भी समूह ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। घटना में शामिल आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी है।

हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
मणिपुर पिछले कुछ समय से हिंसा और तनाव की चपेट में है। ऐसे में इस ताजा हमले ने राज्य में शांति बहाली के प्रयासों को चुनौती दी है। अधिकारियों का कहना है कि हमले के पीछे किन संगठनों का हाथ है, इसकी जांच की जा रही है। असम राइफल्स पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीमा सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात सबसे अहम अर्धसैनिक बल है। जवानों पर इस तरह का हमला सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस घटना पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार बातचीत की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और हमलावरों को पकड़ने के लिए संयुक्त अभियान की योजना बनाई जा रही है।

पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह ने जताया दुख
वहीं इस घटना पर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘नाम्बोल सबल लेईकाई में हमारे बहादुर 33 असम राइफल्स के जवानों पर हुए हमले की खबर सुनकर मैं बहुत दुखी हूं। दो जवानों की जान जाना और कई अन्य का घायल होना हम सभी के लिए एक गहरा आघात है। शहीदों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। उनका साहस और बलिदान हमेशा हमारे दिलों में रहेगा। इस जघन्य अपराध के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।’

NATIONAL : 2019 से जेल में बंद नीरव मोदी के पास कानूनी विकल्प खत्म, क्या जल्द लाया जाएगा भारत?

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भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को अंतिम कानूनी जंग में भी शिकस्त मिली है। माना जा रहा है कि अब नीरव मोदी को जल्द भारत लाया जा सकता है। दरअसल, यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट ने एक अहम फैसले में किसी भी तरह की राहत देने से इन्कार कर दिया।

13,000 करोड़ रुपये से अधिक के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का भगोड़ा नीरव मोदी यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में अंतिम कानूनी जंग हार गया है। इसके साथ ही उसके भारत प्रत्यर्पण में बची आखिरी कानूनी रुकावट भी दूर हो गई। सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन सरकार की ओर से नीरव के प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और उसे जल्द ही भारत लाया जा सकता है।

यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में कैसे पहुंचा मुकदमा?
ब्रिटेन की अदालतों में अपील के सभी रास्ते खत्म होने जाने के बाद नीरव ने इस साल अप्रैल में स्ट्रॉसबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने मोदी की याचिका को गुमनाम रखने की अनुमति दी थी। इससे पूरी प्रक्रिया गोपनीय बनी रही। यह कोर्ट ऐसे मामलों के लंबित रहने के दौरान उनसे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है।

क्या भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नीरव को कोई राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रत्यर्पण को चुनौती देने के उसके सारे कानूनी रास्ते अब आधिकारिक रूप से बंद हो गए हैं। उसने यह याचिका तब दायर की गई थी जब ब्रिटेन हाईकोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण को चुनौती देने की इजाजत देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि जेल की स्थितियों और व्यवहार के बारे में भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं।

2019 से जेल में बंद है, भारत प्रत्यर्पण कब?
नीरव मार्च 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। राजनयिक सूत्रों ने यह भी बताया कि ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से उसे सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है।

NATIONAL : चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, 8 आरोपियों को जेल… राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में क्या-क्या हुआ?

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अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है. इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे, आठों आरोपियों की न्यायिक हिरासत, 79.85 लाख रुपए की बरामदगी और सीसीटीवी फुटेज में चोरी के सबूत सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी केस में दिन-प्रतिदिन नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. शुक्रवार को भी तीन नए घटनाक्रम हुए, जिसमें पहला सुबह-सुबह ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा हुआ. इसके बाद दोपहर में सभी आठों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इसके तीसरा घटनाक्रम- यह पता चला कि सात आरोपियों के पास से 79.85 लाख कैश मिला है, जबकि 8वें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से कुछ नहीं मिला. बता दें कि 25 जून को ट्रस्ट की तरफ से श्रीराम जन्मभूमि कोतवाली में चंदा चोरी के आरोप में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर केस दर्ज कराया गया था. FIR में कुछ अज्ञात का भी नाम है. आइए जानते हैं आज का पूरा घटनाक्रम…

अयोध्या के चर्चित राम मंदिर चंदा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है. इस बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो प्रमुख सदस्यों चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. चंपत राय जहां ट्रस्ट महासचिव थे तो वहीं अनिल मिश्रा ट्रस्टी (ट्रस्टी वह व्यक्ति या संस्था होती है, जिसे किसी संपत्ति, पैसे या व्यवसाय को संभालने की कानूनी जिम्मेदारी सौंपी जाती है) थे. चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को SIT की प्रारंभिक जांच और सीएम योगी के कड़े रुख से जोड़कर देखा जा रहा है.

SPORTS : श्रेयस अय्यर फिसड्डी कप्तान, लास्ट 10 मैचों में सिर्फ एक जीत; इंग्लैंड के खिलाफ भी कर दी बड़ी गलती

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श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) की कप्तानी में टीम इंडिया को इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में 4 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. बीते शनिवार (04 जुलाई) मेनचेस्टर में खेले गए मैच में मेजबान इंग्लैंड ने भारत के जरिए दिए गए 190 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एकतरफा जीत हासिल की. इस हार के साथ श्रेयस एक बार फिर फिसड्डी कप्तान साबित हुए.

अय्यर ने भारत के टी20 कप्तान के रूप में पहली सीरीज आयरलैंड के खिलाफ खेली. इस सीरीज में मेन इन ब्लू को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा था. यह पहला मौका था कि टीम इंडिया ने आयरलैंड के खिलाफ किसी सीरीज में या फिर किसी भी मैच में हार का सामना किया था. वहीं कप्तान के रूप में अय्यर के पिछले 10 मैचों पर नजर डालें तो वह पूरी तरह ही फ्लॉप रहे हैं, क्योंकि उनकी टीम ने 10 में से सिर्फ 1 ही मैच जीता था.

श्रेयस अय्यर के पिछले 10 मैचों का रिकॉर्ड (बतौर कप्तान)
अय्यर कप्तान के रूप में भारत के लिए चार टी20 खेल चुके हैं, जिसमें एक मुकाबला बारिश के कारण बेनतीजा (इंग्लैंड के खिलाफ पहला टी20) रहा. बाकी के तीन टी20 (आयरलैंड के खिलाफ 2 मैच और इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा मैच) में हार का सामना किया. ये हो गए 3 मैच, जिसमें श्रेयस की कप्तानी वाली टीम इंडिया को हार मिली.

अब जरा इससे पहले चलते हैं. श्रेयस इससे पहले IPL 2026 में पंजाब किंग्स के लिए कप्तानी करते नजर आए थे. सीजन के पिछले 7 लीग मैचों में उनकी टीम ने सिर्फ 1 मैच जीता था और बाकी 6 में हार का सामना किया था.

इस तरह आईपीएल के 7 मैच और टीम इंडिया के लिए 3 मैच (रद्द वाला हटाकर) मिलाकर अय्यर ने पिछले 10 मैचों में कप्तान के रूप में सिर्फ 1 मुकाबले में ही जीत हासिल की है.

अब भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ अगला यानी तीसरा टी20 मंगलवार (07 जुलाई) को खेलना है. देखना दिलचस्प होगा कि इस मैच में भारतीय टीम कैसा परफॉर्म करती है.

Mumbai Rain: मुंबई में बारिश ने फिर रोकी रफ्तार, सड़कों पर भारी जाम, रेल सेवाएं प्रभावित, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

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मुंबई में शुक्रवार को भारी बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लोकल ट्रेनों की रफ्तार धीमी हो गई और कई सड़कों पर पानी भर गया, जिससे ट्रैफिक जाम लग गया। मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पुणे में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसके चलते प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

मुंबई: महाराष्ट्र के मुंबई में शुक्रवार को जमकर बारिश हुई। बारिश के कारण लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। भारी बारिश के चलते लोकल ट्रेनों की रफ्तार धीमी हो गई है। बारिश के कारण कई जगहों पर पानी भर गया है। शहर की कई सड़कों पर ट्रैफिक जाम लग गया। बता दें कि आईएमडी ने मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पुणे में भारी बारिश की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। लोगों से कहा गया है कि जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले।

बारिश से धीमी हुई ट्रेनों की रफ्तार
सेंट्रल रेलवे के अनुसार, सभी लाइनों पर लोकल ट्रेनें चल रही हैं। मेन लाइन की ट्रेनें 10-12 मिनट देरी से चल रही हैं। हार्बर लाइन की ट्रेनें 7-8 मिनट देरी से चल रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि कम दृश्यता के कारण ट्रेनों को धीमी गति से चलाया जा रहा है। यह सावधानी के तौर पर किया जा रहा है। बारिश के कारण कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम लग गया। वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर गोरेगांव ईस्ट में NESCO के पास भारी ट्रैफिक था। ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर विखरोली-छेड़ा नगर और अमर महल- Sion कॉरिडोर पर भी ट्रैफिक जाम था। अंधेरी सबवे को पहले पानी से खाली कर दिया गया था और यातायात के लिए खोल दिया गया था, लेकिन फिर से पानी भरने के कारण इसे बंद कर दिया गया।

कहां हुई कितनी बारिश
BMC के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 25 जुलाई को सुबह 8 बजे तक आइलैंड सिटी में 29.40 मिमी बारिश हुई। वीं पूर्वी उपनगरों में 29.44 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 18.88 मिमी बारिश हुई। अधिकारियों ने यात्रियों से सावधानी बरतने को कहा है। उन्होंने कहा है कि दिन भर में रुक-रुक कर भारी बारिश होने की संभावना है। इसलिए अपनी यात्रा की योजना सावधानी से बनाएं।प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे यात्रा की योजना सावधानीपूर्वक बनाएं, क्योंकि दिनभर बारी-बारी से तेज बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

NATIONAL : ‘इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा मिले’: राम मंदिर ट्रस्ट के फैसले पर विपक्ष का हमला, क्या बोली- आप-कांग्रेस-SP-शिवसेना?

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ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिंदू सनातनी को इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहिए। इस्तीफा लेकर उन्हें बचाने की कोशिश मत करो।

अयोध्या के राम मंदिर चंदा विवाद में सोमवार को जहां ट्रस्ट की ओर से बैठक की गई। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया के सामने आकर बताया कि चंपत राय का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर किया गया है। ट्रस्ट की ओर से इस्तीफा मंजूर किए जाने के बाद विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि इस्तीफा स्वीकार कर बचाने की कोशिश हो रही है।

इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली ‘चंदा चोरी’ की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं। यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हास्यास्पद बात यह है कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा की गई- वही व्यक्ति जिस पर इसके वित्त की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी संपत्तियों की रक्षा करने का दायित्व होता है। वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस दायित्व से किनारा कर सकता है, जिनकी देखरेख में इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा।

कृष्णमोहन को महासचिव बनाए जाने पर भी सवाल
उन्होंने आगे लिखा, ‘मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था। देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता। उसे ट्रस्ट को पूरी तरह भंग करके उसका पुनर्गठन चाहिए। देश ट्रस्ट के हर सदस्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट-निगरानी में एक स्वतंत्र जांच चाहता है। जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री तक भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, जिन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और उसके कई सदस्यों की नियुक्ति की। योगी आदित्यनाथ सरकार तक, जिसने वर्षों तक इस लूट और डकैती को प्रभावी जांच के बिना चलते रहने दिया और उस आरएसएस-वीएचपी माफिया की भी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है, जिसने दशकों से करोड़ों भारतीयों की कीमत पर खुद को मालामाल करने के लिए भगवान राम के नाम का दोहन किया है।’

केजरीवाल बोले- इस्तीफा नहीं सजा मिले
ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिंदू सनातनी को इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहिए। इस्तीफा लेकर उन्हें बचाने की कोशिश मत करो।

शिवसेना ने भी साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि खबरों के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर के दो ट्रस्टियों के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई है। ऐसा लगता है कि यह फैसला दान और राशि में धोखाधड़ी के आरोपों की वजह से लिया गया है। लेकिन इस बात का क्या कि उन्हें भाजपा की केंद्र सरकार ने ही नियुक्त किया था? मंदिर में हुई चोरी के बारे में क्या, उस मंदिर को लूटने की हिम्मत और अपराध के बारे में क्या, जिस पर भाजपा का पिछले दो दशकों का पूरा अभियान टिका था?

उन्होंने आगे कहा कि हमें निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है, जिसकी निगरानी या तो सुप्रीम कोर्ट करे या फिर वह किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख में हो। भाजपा हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी: CCTV में चोरी की 70 घटनाएं, 2-3 साल से एक्टिव था रैकेट; 20 पन्नों की SIT रिपोर्ट में और क्या?

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी 20 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर मामले में ऐसे खुलासे हुए हैं जो बेहद अहम हैं।

‘राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट…’ लेकिन अयोध्या में राम नाम के साथ ही राम पर चढ़ने वाले दान की चल रही है और लूटने वाले भी कोई और नहीं, वही लोग हैं, जिन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। मामले में विपक्ष की तरफ से चंदा गबन के आरोपों के बाद योगी सरकार ने एसआईटी गठित की और फिर एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में FIR दर्ज होकर 26 जून को 8 आरोपियों की गिरफ्तार कर ली गई। इस बीच राम मंदिर चढ़ावा लूट मामले में एसआईटी की 20 पन्नों की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। SIT ने दावा किया है कि सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावा चोरी की 70 घटनाएं दर्ज हुई हैं और यह कथित रैकेट पिछले दो से तीन वर्षों से संचालित हो रहा था। ऐसे में आइए जानते हैं कि एसआईटी की रिपोर्ट में और क्या-क्या है। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम में कब क्या-क्या हुआ….

सबसे पहले चढ़ावा चोरी की टाइमलाइन
7 जून 2026: समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाए कि राम मंदिर के दान-पात्रों से 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। पूर्व विधायक के इन आरोपों से अयोध्या में राजनीतिक भूचाल आ गया।
9 जून 2026: भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कथित चंदा चोरी मामले की CBI जांच की मांग की। इसके बाद PMO ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी।

14-21 जून 2026: SIT ने कैश-हैंडलिंग प्रोसेस और 35 डोनेशन बॉक्स पर ध्यान केंद्रित करके अपनी जांच को आगे बढ़ाया। इस दौरान उन्हें स्टाफ के बयानों में विरोधाभास भी नजर आया और 45 दिन बाद CCTV फुटेज के अपने-आप डिलीट हो जाने के चलते आ रही दिक्कतों पर भी गौर किया गया।
23 जून 2026: SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा किया और अधिकारियों को मंदिर के कर्मचारियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए।

25 जून 2026: SIT जांच के नतीजों के आधार पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने औपचारिक तौर पर शिकायत दर्ज करवाई। इसी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज हुई और चंदे की गिनती करने वाले कर्मचारियों सहित आठ संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया गया। खबरों के मुताबिक आय से अधिक संपत्ति की जांच के दौरान अधिकारियों ने संदिग्ध व्यक्तियों के पास से बड़ी मात्रा में बेहिसाब नगदी और महंगी चीजें जब्त कीं।
26 जून 2026: हिरासत में लिए गए सभी 8 संदिग्धों को आज गिरफ्तार कर लिया गया। कथित चंदा चोरी के इस मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया।

अब बात एसआईटी की 20 पन्नों की रिपोर्ट की
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उसने 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 तक उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच की। इस दौरान कुल 70 अवसरों पर चोरी/गबन संबंधी गतिविधियां सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान मिले अहम सबूतों से दान चोरी की पुष्टि हुई है।

साथ ही SIT ने अपनी रिपोर्ट में भेंट और चढ़ावे की गणना कक्ष तक नगदी संचालन और प्रबंधन व्यवस्था में बड़ी खामियां पाए जाने का उल्लेख किया है। जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।

ट्रस्ट को काफी पहले ही हो गई थी चोरी की आशंका- रिपोर्ट में दावा
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रस्ट को काफी पहले ही चोरी की आशंका हो गई थी। इसके तहत सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच गणना प्रक्रिया को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की गई थी। इस दस्तावेज पर स्टेट बैंक की ओर से गोविंद मिश्र और ट्रस्ट की ओर से अनिल मिश्र ने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि SIT के अनुसार, बाद में गणना प्रक्रिया में इस SOP का पालन नहीं किया गया।

चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर इसलिए सवाल
SIT ने रिपोर्ट में इसे जानबूझकर की गई लापरवाही बताया है। इसी आधार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

बिना किसी आदेश के थीं टिन्नू यादव के पास हुंडियों की चाबियां
जांच के दौरान आरोपी टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव से पूछताछ में कथित तौर पर चोरी के पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। SIT ने रिपोर्ट में लिखा है कि टिन्नू यादव के पास बिना किसी आदेश के हुंडियों की चाबियां थीं।

सरकारी बैंक के कई कर्मियों की संलिप्तता के भी संकेत
पूछताछ के दौरान कई बैंक अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। रिपोर्ट में सरकारी बैंक के कुछ कर्मचारियों की कथित संलिप्तता के संकेत मिलने की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक, कई सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई गई है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव को कथित साजिश रचने और उसे अंजाम देने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष श्रीवास्तव ने अन्य लोगों को इस नेटवर्क से जोड़ा और चढ़ावा गणना की ड्यूटी तय करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालीं।

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