Sunday, June 28, 2026
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NATIONAL : आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई, सोनिया-राहुल को ट्रायल कोर्ट से राहत के खिलाफ ED की अपील

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यह याचिका ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ करेगी।नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। यह याचिका ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ करेगी। यह मामला सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों से जुड़ा है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित साजिश और वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। ईडी का कहना है कि आरोपियों ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया। एजेंसी के अनुसार, यह काम यंग इंडियन नाम की कंपनी के जरिए किया गया, जिसमें गांधी परिवार की बहुमत हिस्सेदारी बताई गई है।

ट्रायल कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 के आदेश में कहा था कि ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनी रूप से सही नहीं है, क्योंकि मामला किसी एफआईआर पर आधारित नहीं था। इसी आदेश को ईडी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ईडी का तर्क है कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में सिर्फ एफआईआर होना जरूरी नहीं है और ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत है।

ईडी का यह भी कहना है कि इस तरह के फैसले गंभीर आर्थिक अपराधों की जांच को प्रभावित कर सकते हैं। इससे पहले 22 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन और अन्य को भी शामिल किया गया था।
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WORLD : भारत-अमेरिका में आज से फिर शुरू होगी ट्रेड डील पर बात, जानिए सहमति के बाद क्यों फंसा पेंच?

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भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी, कीमती धातुओं और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर तक के आयात बढ़ाने की इच्छा भी जताई है. वहीं अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है.

भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर बातचीत का अगला दौर आज से वाशिंगटन डीसी में तीन दिन चलेगाअमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव से भारत को मिलने वाला तुलनात्मक लाभ कम हो गया हैअमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा शुरू की गई सेक्शन 301 जांचों और टैरिफ मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है
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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (बीटीए) को लेकर बातचीत का अगला दौर 20 अप्रैल से वाशिंगटन डीसी में शुरू होगा. तीन दिनों तक चलने वाली इस वार्ता में भारतीय अधिकारियों की एक टीम हिस्सा लेगी. इस बैठक का नेतृत्व भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे, जो वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं. उनके साथ कस्टम विभाग और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका की टैरिफ नीति में बड़े बदलाव हुए हैं.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को चुनौती मिली थी. इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों के आयात पर 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया. इस बदलाव के कारण दोनों देशों को अपने प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया है. यह समझौता प्रारंभिक रूप से 7 फरवरी को पेश किया गया था.

अधिकारियों का मानना है कि नए टैरिफ ढांचे के चलते प्रस्तावित डील में संशोधन जरूरी हो सकता है. पहले अमेरिका भारत के उत्पादों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था, जिसमें रूस से तेल खरीद से जुड़े कुछ दंडात्मक शुल्क हटाना भी शामिल था. हालांकि, अब सभी देशों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से भारत को मिलने वाला तुलनात्मक लाभ कम हो गया है, जिससे पुनर्विचार की आवश्यकता बढ़ गई है.

वार्ता में टैरिफ के अलावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा शुरू की गई सेक्शन 301 के तहत दो एकतरफा जांचों पर भी चर्चा होने की संभावना है. भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है और इन्हें खत्म करने की मांग की है. बीटीए के शुरुआती ढांचे में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती या समाप्ति का प्रस्ताव दिया था. इनमें सोयाबीन तेल, ड्राई फ्रूट्स, फल, वाइन, स्पिरिट्स और पशु आहार जैसे उत्पाद शामिल हैं.

भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी, कीमती धातुओं और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर तक के आयात बढ़ाने की इच्छा भी जताई है. वहीं अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है. वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने दफ्तर के बजट पर एक कांग्रेस सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा कि अमेरिका पिछले एक साल से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि एक “पारस्परिक व्यापार ढांचा” तैयार किया जा सके. इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर सामने आया है.

ग्रीर ने यह भी बताया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी बड़ी समस्या हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की पकड़ कमजोर हुई है. हमने सेब के बारे में कई बार बात की है. मैंने खुद यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है. उन्होंने कहा, जिससे साफ है कि यह मामला उच्च स्तर पर भी उठाया गया है. अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत की ओर से सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो एक बड़ा उदाहरण है. इस वजह से अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी भारत के बाजार में काफी कम हो गई है. 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है. इस बीच ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है.

NATIONAL : ‘एक्सप्रेसवे मौत का गलियारा ना बने’: सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नई गाइडलाइन बनाने के दिए आदेश

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देश में बढ़ते हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि एक्सप्रेसवे लापरवाही से मौत के गलियारे न बनें। आंकड़ों में सामने आया कि सिर्फ 2% हाईवे पर 30% मौतें होती हैं। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और राज्यों को सख्त सुरक्षा कदम लागू करने के निर्देश दिए हैं।

देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक्सप्रेसवे मौत के गलियारे नहीं बनने चाहिए और छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से जान नहीं जानी चाहिए।

मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस जेके महेश्वरी और एएस चांदुरकर की बेंच ने बताया कि देश की कुल सड़कों में राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ 2% हैं, लेकिन यहां करीब 30% सड़क हादसों में मौतें होती हैं, जो बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सभी राज्यों को सड़क सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

अब नेशनल हाईवे पर भारी या कमर्शियल वाहनों को सड़क या किनारे खड़ा करने पर रोक होगी, सिर्फ तय जगहों पर ही पार्किंग होगी।

हाईवे के किनारे नए ढाबे, दुकान या कोई भी अवैध निर्माण तुरंत रोक दिए जाएंगे।

60 दिनों के अंदर ऐसे सभी अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया गया है।

हर जिले में हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो सड़क सुरक्षा पर नजर रखेगी।

हाईवे पर कैमरे, स्पीड मॉनिटर और इमरजेंसी सिस्टम (एटीएमएस) लगाए जाएंगे।

पुलिस और प्रशासन को नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) सिर्फ जीने का हक नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल में जीने की गारंटी भी है। अगर लापरवाही से किसी की जान जाती है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी में कमी मानी जाएगी। यह फैसला 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में हुए बड़े सड़क हादसों के बाद लिया गया, जिनमें कई लोगों की जान चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर इन निर्देशों को लागू करने को कहा है और 75 दिनों के अंदर रिपोर्ट भी मांगी है। कोर्ट ने साफ किया कि सड़क सुरक्षा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

JAMMU KASHMIR : पहलगाम हमले की बरसी से पहले कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ी

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इस आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले का जवाब देने के लिए सेना को खुली छूट दी थी. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने सीमा पार किए बिना पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमले किए.

पहलगाम आतंकी हमले की बरसी से पहले कश्मीर घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई, खासकर पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. पिछले साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. खुफिया सूत्रों के अनुसार, सभी सुरक्षा बलों को 22 अप्रैल के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, खासकर पर्यटन स्थलों पर, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके.

कश्मीर जोन के आईजीपी वीके बिर्दी ने श्रीनगर के पुलिस कंट्रोल रूम में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. जमीनी स्तर पर पुख्ता सुरक्षा योजना बनाने के लिए बैठकें की गईं और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन तैयारियों का जायजा लिया.

इस आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले का जवाब देने के लिए सेना को खुली छूट दी थी. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने सीमा पार किए बिना पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमले किए. ये हमले लाहौर के पास मुरीदके, बहावलपुर, और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित ठिकानों पर किए गए.इसके बाद हालात और बिगड़ गए, जब पाकिस्तान सेना ने पलटवार शुरू किया. भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 18 रक्षा ठिकानों को नष्ट कर दिया, जिनमें कुछ एयरफील्ड भी शामिल थे.

प्रशासन ने पहलगाम जैसे अन्य हमले को रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर में 50 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया था, जिन्हें बाद में धीरे-धीरे खोला गया.
हमले से पहले कश्मीर में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन इस घटना ने पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका दिया और इससे जुड़े हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए पहलगाम में कैबिनेट बैठक की और खुद साइकिल यात्रा कर यह संदेश दिया कि यह जगह सुरक्षित है. पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इनमें सेवा प्रदाताओं और दुकानदारों की पुलिस जांच, और क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली शामिल है, जिससे पर्यटक आसानी से उनकी जानकारी जांच सकते हैं.

NATIONAL : ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर बड़ा हमला: सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का लगाया आरोप, शिकायत लेकर जाएंगी चुनाव आयोग

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुनावी लाभ के लिए सरकारी तंत्र के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। हुगली की रैली में उन्होंने पीएम के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने उन पर राजनीतिक अभियानों के लिए सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया। हुगली जिले के तारकेश्वर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के जरिए भाजपा के लिए प्रचार किया है.ममता बनर्जी ने कहा, ‘पीएम मोदी ने कल राजनीतिक अभियानों के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया। हम इसकी निंदा करते हैं और चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करेंगे। टीएमसी प्रमुख ने पीएम पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप भी मढ़ा।

गौरतलब है कि शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के बहाने कांग्रेस के साथ-साथ सभी विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला। पीएम ने कहा था कि भारत की महिलाएं विपक्ष को ‘भ्रूणहत्या के पाप’ के लिए कड़ी सजा देंगी।

वहीं, अब इसपर पलटवार करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को भारत के लोगों को जवाब देना होगा कि वह अपनी पार्टी के लिए अवैध अभियान क्यों चला रहे हैं? दीदी ने सवाल किया कि जब महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में ही पास हो गया था, तो इसे अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया? ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार ने जानबूझकर महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा में इतनी धृष्टता थी कि संख्या बल न होने के बावजूद वे इसे लोकसभा में लाए। अब भाजपा का पतन शुरू हो गया है।’

इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई-पैक कर्मचारियों के भविष्य को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए एक बड़ा एलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों के डर या किसी अन्य दबाव के कारण आई-पैक के कामकाज में बाधा आती है, तो तृणमूल कांग्रेस उन सभी कर्मचारियों को काम देगी। ममता बनर्जी ने वादा किया कि वह किसी भी युवा को बेरोजगार नहीं रहने देंगी और जरूरत पड़ने पर इन पेशेवरों को पार्टी में शामिल कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ उनकी विस्तृत चर्चा पहले ही हो चुकी है। सीएम ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों के दौरान डराने-धमकाने की राजनीति कर रही है और टीएमसी के लिए काम करने वाली रणनीतिक टीम को निशाना बना रही है।

NATIONAL : खाड़ी देशों में तनाव का प्याज किसानों पर सीधा असर, निर्यात में गिरावट; घरेलू मांग कमजोर

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खाड़ी देशों में तनाव ने भारत के प्याज बाजार का संतुलन बिगाड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटने, शि¨पग महंगा होने और घरेलू बाजार में मांग कमजोर रहने से प्याज की कीमतों पर भारी दबाव बन गया है।स्थिति ऐसी हो गई है कि किसानों को लागत से भी आधी कीमत पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालात पर जल्दी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर खेती के पैटर्न पर भी पड़ सकता है और किसान प्याज की खेती से दूरी बना सकते हैं।

हालांकि सरकार ने स्थिति संभालने के लिए नेफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों को बाजार से प्याज खरीदकर बफर स्टाक बनाने के निर्देश दिए हैं। भारत दुनिया के बड़े प्याज निर्यातकों में शामिल है और कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों जैसे यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, इराक और ओमान आदि देशों में जाता है।

मगर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़ा तनाव बढ़ने के बाद इन देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। परिणाम है कि प्याज निर्यात में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट आई है। खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में तो 55-60 प्रतिशत तक कमी आ गई है।

इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। जो प्याज पहले विदेश जाता था, वह अब घरेलू बाजार में ही ग्राहकों का इंतजार कर रहा है। इससे सप्लाई अचानक बढ़ गई है, किंतु मांग उतनी नहीं बढ़ी। थोक बाजारों में कई शहरों में प्याज 800 से 1000 रुपये प्रति ¨क्वटल तक बिक रहा है, जबकि उत्पादन लागत 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है।

हार्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विकास सिंह का कहना है कि बढ़ते शिपिंग खर्च ने स्थिति को और खराब कर दिया है। कुछ महीने पहले तक जहां एक कंटेनर का भाड़ा 500-800 डालर के बीच था, वह अब बढ़कर 6000-7500 डालर तक पहुंच गया है।

व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा बना निर्यात
ऐसे में निर्यात करना व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। नतीजा है कि निर्यातक पीछे हट रहे हैं और इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ा है। खाड़ी संकट से घरेलू मांग में भी कमजोरी आई है। होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर की धीमी रफ्तार और एलपीजी आपूर्ति में अनियमितता के कारण खपत पर असर पड़ा है।

इसके अलावा बांग्लादेश जैसे पारंपरिक खरीदारों ने भी पिछले दो सालों में अपनी खरीद घटा दी है, जिससे मांग और कमजोर हुई है। हालांकि इस साल उत्पादन में कुछ कमी का अनुमान है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 10-11 प्रतिशत गिरावट आई है, लेकिन निर्यात घटने के कारण देश में प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। यानी उत्पादन कम होने के बावजूद कीमतें इसलिए नहीं बढ़ रहीं, क्योंकि माल देश के भीतर ही ज्यादा मात्रा में मौजूद है।

NATIONAL : महिला आरक्षण बिल पर PM मोदी ने सभी पार्टियों को लिखी चिट्ठी, खरगे बोले- हमें विश्वास में लिए बिना…

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि राज्यों में चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना इस धारणा को बल देता है कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण कानून को लागू करने में जल्दबाजी कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने इस मांग को दोहराया कि परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलायी जाए. इस परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों से जोड़ा जा रहा है. खरगे का यह पत्र प्रधानमंत्री के उस पत्र के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र का उल्लेख किया था.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने मोदी को शनिवार (11 अप्रैल 2026) को लिखे पत्र में कहा, ‘‘मुझे अभी-अभी 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र के संबंध में आपका पत्र प्राप्त हुआ है.’’ खरगे ने कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था. उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से मैंने मांग की थी कि यह महत्वपूर्ण कानून तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए.’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इसके तत्काल कार्यान्वयन के लिए व्यापक सहमति थी, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे लागू नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘‘तब से 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष बैठक बुलाई गई है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है. आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना असंभव होगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है. हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद है कि यह सच्चाई के विपरीत है क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा दौर के चुनाव समाप्त होने के बाद संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.’’

खरगे ने कहा कि राज्यों में जारी चुनावों के दौरान विशेष सत्र बुलाना केवल कांग्रेस के इस विश्वास को पुष्ट करता है कि सरकार महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए कानून के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मुझे यह लिखते हुए भी दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड किसी भी तरह का विश्वास पैदा नहीं करता- चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी हो, जनगणना हो या फिर संघीय ढांचे से संबंधित मामले जैसे वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना और करों का हस्तांतरण.’’

खरगे ने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों से केंद्र और राज्य दोनों प्रभावित होंगे और यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में सभी दलों और राज्यों की बात सुनी जाए, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों. उन्होंने, ‘‘अगर विशेष बैठक का उद्देश्य ‘हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना’ और ‘सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है’, जैसा कि आपने पत्र में लिखा है, तो मैं सुझाव दूंगा कि सरकार परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक सर्वदलीय बैठक बुलाए.’’ प्रधानमंत्री और खरगे के बीच यह पत्राचार संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले हुआ है, जिसमें सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 816 तक बढ़ाने (जिसमें 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी) से जुड़े विधेयक ला सकती है.

कांग्रेस ने पिछले सप्ताह भी आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति की जा रही है और इससे जुड़ा परिसीमन ‘‘संवैधानिक नहीं’’ है तथा इसके ‘‘गंभीर परिणाम’’ हो सकते हैं. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में यह भी तय किया गया कि खरगे 15 अप्रैल के आसपास सभी विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर 16 से 18 अप्रैल तक होने वाले इस विशेष सत्र को लेकर साझा रणनीति बनाएंगे. इस बीच पुडुचेरी, असम और केरल में नौ अप्रैल को मतदान हो चुका है, जबकि पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में चुनाव होंगे.

WORLD : होर्मुज में तनाव के बीच भारत के लिए आई अच्छी खबर, ‘देश गरिमा’ सुरक्षित भारत की ओर रवाना

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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारतीय टैंकर देश गरिमा सुरक्षित पार होकर मुंबई की ओर बढ़ रहा है। वहीं, दो अन्य भारतीय जहाजों को गोलीबारी की घटना के बाद वापस लौटना पड़ा। हालांकि किसी भी नाविक को नुकसान नहीं हुआ।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। भारतीय झंडे वाला कच्चा तेल टैंकर “देश गरिमा” 18 अप्रैल 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर गया। इस जहाज में 31 भारतीय नाविक सवार हैं और इसके 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस अहम समुद्री मार्ग पर लगातार तनाव बना हुआ है।

हालांकि पिछले 24 घंटे में दो अन्य भारतीय जहाजों को खतरे का सामना करना पड़ा। वीएलसीसी सन्मार हेराल्ड और बल्क कैरियर जग अर्नव ने होर्मुज से गुजरते समय गोलीबारी की घटना की जानकारी दी, जिसके बाद दोनों जहाजों को वापस फारस की खाड़ी की ओर लौटना पड़ा।


होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां हाल के दिनों में अमेरिका और इस्राइल से जुड़े तनाव के कारण हालात संवेदनशील बने हुए हैं। इसी वजह से जहाजों की आवाजाही पर खतरा बढ़ गया है और कई घटनाएं सामने आ रही हैं।भारत सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया और अपनी चिंता जाहिर की। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत के लिए समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा बेहद अहम है। साथ ही भारत ने ईरान से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की है।

सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पर्याप्त भंडार मौजूद है। लोगों से अपील की गई है कि घबराकर ईंधन की खरीद न करें और अफवाहों से दूर रहें।सरकार ने बताया कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियां मिलकर पश्चिम एशिया में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों की वापसी और सहायता के लिए भी व्यवस्था की गई है।

NATIONAL : ‘किसी को छेड़ते नहीं, कोई छेड़े तो छोड़ते नहीं’, ऑपरेशन सिंदूर पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तमिलनाडु की रैली में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं, लेकिन उकसाने वालों को छोड़ता भी नहीं। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में भारत की सख्त कार्रवाई को याद दिलाया।

तमिलनाडु में चुनावी माहौल के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर कोई देश या ताकत भारत को छेड़ती है तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए देश की सुरक्षा नीति को साफ शब्दों में सामने रखा।

राधापुरम में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन अगर कोई हमें छेड़ता है तो हम उसे छोड़ते भी नहीं हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश पहलगाम आतंकी हमले की बरसी के करीब पहुंच रहा है।रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए बताया कि यह भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई थी। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया था।

यह बयान उस हमले की बरसी से पहले आया है, जिसमें पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद भारत ने निर्णायक जवाबी कार्रवाई की थी।ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन ठिकानों से भारत के खिलाफ साजिश रची जा रही थी। सेना की इस कार्रवाई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को और मजबूत किया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की सेना लगातार मजबूत हो रही है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने साफ किया कि भारत शांति में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई खतरा पैदा करता है तो उसका जवाब भी उतनी ही ताकत से दिया जाएगा।तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे आएंगे। ऐसे में रक्षा मंत्री का यह बयान चुनावी माहौल के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को भी केंद्र में ले आया है।

NATIONAL : बंगाल के झाड़ग्राम में चुनावी रैली के बाद झालमुड़ी की दुकान पर रुके PM मोदी….

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रविवार को बंगाल के झाड़ग्राम में पीएम नरेंद्र मोदी अचानक सड़क किनारे स्थित एक झालमुड़ी की दुकान पर रुके. पीएम मोदी का काफिला रुकते ही वहां अचानक लोगों की भारी भीड़ जुट गई.

बंगाल के झाड़ग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान PM नरेंद्र मोदी अचानक झालमुड़ी की दुकान पर रुके थे.पीएम मोदी ने दुकान मालिक विक्रम साह से बेहतर झालमुड़ी बनाने को कहा और खुद भी उसका स्वाद चखा था.पीएम मोदी ने स्थानीय महिलाओं से बातचीत की और बच्चों को झालमुड़ी खिलाई, जिससे वहां की भीड़ उत्साहित हुई.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए रविवार को झाड़ग्राम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक सड़क किनारे स्थित एक झालमुड़ी की दुकान पर रुके. पीएम मोदी का काफिला रुकते ही वहां अचानक लोगों की भारी भीड़ जुट गई. लोग जय श्री राम के नारे लगाने लगे. अपनी गाड़ी से निकल कर पीएम मोदी झालमुड़ी की दुकान पर गए. वहां उन्होंने झालमुड़ी बनवाया, मौके पर जुटे कुछ बच्चों को खिलाया, साथ ही खुद भी झालमुड़ी का आनंद लिया. इसका वीडियो भी सामने आया है.

झालमुड़ी की दुकान पर रुके PM मोदी ने वहां पहुंचीं स्थानीय महिलाओं से भी मुलाकात की. पीएम मोदी वहां मौजूद बच्चों को झालमुड़ी भी खिलाया. फिर खुद भी झालमुड़ी का आनंद लिया. इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भीड़ जय श्री राम और नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाती दिखी.

कुछ देर बाद पीएम मोदी ने खुद के एक्स अकाउंट पर झालमुड़ी की दुकान रुकने और उसका आनंद लेने की तस्वीरें साझा की. पीएम मोदी ने एक्स अकाउंट पर झाड़ग्राम में झालमुड़ी की दुकान की 4 तस्वीरें साझा करते हुए लिखा- रविवार को बंगाल की चार रैलियों के बीच बंगाल के झाड़ग्राम में झालमुड़ी का आनंद लेते हुए.

झाड़ग्राम में चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी चॉपर की ओर बढ़ रहे थे, इसी बीच रास्ते में सड़क किनारे स्थित एक झालमुड़ी की दुकान पर अचानक रुके. यहां बिहार के गया जिले के विक्रम साह 12 साल से झालमुड़ी की दुकान लगाते आ रहे हैं. उनकी दुकान पर पीएम मोदी का काफिला अचानक रुका.

दुकानदार विक्रम साह ने बताया कि पीएम मोदी के आने की कोई पूर्व सूचना नहीं थी. पीएम मोदी अचानक दुकान पर आए और कहा बढ़िया झालमुड़ी बनाओ. फिर मैंने मिर्च, मसाला और आचार के साथ झालमुड़ी बनाई. दुकानदार ने बताया कि झालमुड़ी का स्वाद चखने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि बढ़िया बना है.

दुकान में विक्रम साह के साथ मौजूद एक महिला ने बताया कि पीएम मोदी ने मेरा हालचाल भी पूछा. इस पर उन्होंने बताया कि आपके दिए पैसों से दुकान आगे बढ़ाया है. दरअसल महिला बिहार की है, ऐसे में बीते साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को मिले पैसे का वो जिक्र कर रही थी. पीएम मोदी के इस दुकान पर रुकने से वहां के स्थानीय लोग बेहद खुश नजर आए.

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