Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : अन्ना हजारे ने किया अनशन का ऐलान, RTI नियमों में बदलाव वापस न लेने पर 5 जुलाई से शुरू करेंगे आंदोलन

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मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे एक बार फिर से अनशन कर सकते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर राज्य सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) नियमों में किए गए बदलावों को तुरंत वापस नहीं लिया तो वह 5 जुलाई से अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हजारे ने अपने पत्र में कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 जून को लागू किए गए ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ RTI कानून की मूल भावना के खिलाफ हैं।

नए नियमों से पारदर्शिता कमजोर होगी
उनका कहना है कि इन नए नियमों से पारदर्शिता कमजोर होगी और आम नागरिकों के लिए जानकारी हासिल करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। अन्ना हजारे ने खास तौर पर RTI आवेदन फीस में बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने फीस बढ़ाने के पीछे कोई ठोस तर्क या वित्तीय विश्लेषण पेश नहीं किया है। हजारे ने स्पष्ट किया कि RTI कानून का उद्देश्य सरकार के लिए राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि जनता को सूचना का अधिकार देना है। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि फीस बढ़ाई जाती है, तो जानकारी देने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़ाया जाना चाहिए।

हजारे ने कड़ा विरोध जताया
इसके अलावा, नए नियमों में RTI आवेदन के साथ पहचान पत्र देना अनिवार्य किए जाने पर भी हजारे ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि RTI एक्ट की धारा 6(2) के तहत आवेदक को अपनी निजी जानकारी या आवेदन का कारण बताने की कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान व्हिसलब्लोअर और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
सरकार को RTI कानून की धारा 4 के तहत स्वेच्छा से अधिक जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार आवेदन करने की जरूरत ही न पड़े।
अन्ना हजारे

इस नए नियम को भी अनावश्यक बताया
हजारे ने ‘एक विषय, एक आवेदन’ जैसे नए नियम को भी अनावश्यक बताया। उनका कहना है कि इससे नागरिकों को बार-बार अलग-अलग आवेदन करने पड़ेंगे, जिससे प्रक्रिया जटिल और महंगी हो जाएगी। उन्होंने अपील खारिज करने, सुनवाई में कानूनी मदद पर रोक और आवेदक की मौत पर केस बंद करने जैसे प्रावधानों की भी आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो वह 5 जुलाई से रालेगण सिद्धि के यादव बाबा मंदिर में अनशन शुरू करेंगे।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज, SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा से पूछे ये सवाल

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अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित चोरी को लेकर एसआईटी ने महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से दान राशि की गिनती को लेकर कई सवाल पूछे हैं.

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित चोरी को लेकर एसआईटी का गठन किया गया है. जहां, एसआईटी ने मंदिर से संलिप्त ट्रस्ट पदाधिकारियों से दान राशि को लेकर कई सवाल पूछे हैं. बताया जा रहा है कि दान राशि की गड़बड़ी का यह मामला 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन किया था. जिसमें कल (18 जून) टीम राम मंदिर पहुंची और लगातार जांच जारी रखी.

वहीं इस मामले में एसआईटी ने मामले पर श्री राम जन्मभूमि के महासचिव चंपत राय और तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से दान राशि की गिनती और इस प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल पूछे गए हैं .

राम मंदिर निर्माण में चंदे के कथित घोटाले को लेकर समाजवादी पार्टी के आरोपों पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और मंत्री राजभर ने कहा कि जांच में सरकार ने SIT का गठन किया है. रिपोर्ट में जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी. अगर SIT की जांच से पहले सपा के पास कोई कानून हो तो वो बताए? मंत्री ने आगे कहा कि जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका भी चर्चा में है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर विवाद में सपा से जुड़े नाम क्यों सामने आते हैं?

अजय राय की हाई कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने कि की मांग
श्री राम मंदिर में भक्तों के चढ़ाए चढ़ावे की डकैती एवं भ्रष्टाचार में संलिप्त ट्रस्ट पदाधिकारियों पर कार्रवाई हेतु कथावाचक, कौशल किशोर ठाकुर ने जांच समिति के गठन से लेकर रघुवंशी सूर्यवंशी समाज के प्रतिनिधित्व तक पांच मांगो का पत्र मुख्यमंत्री योगी को लिखा है. पत्र में कथावाचक द्वारा मांग की गई है कि ट्रस्ट की गतिविधियों में पारदर्शिता लाने हेतु रघुवंशी सूर्यवंशी समाज को सम्मिलित किया जाए. वहीं यूपी के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मामले पर कहा कि ‘हमारी मांग है कि हाई कोर्ट के सिटिंग जज से तुरंत जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके’.

NATIONAL : ‘हमें नहीं पता जांच में क्या हो रहा, अगर लीपापोती की कोशिश हुई तो…’, चंदा चोरी को लेकर भड़का VHP

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अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक फिर दोहराया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच में क्या-क्या हो रहा है इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमारा भी सरकार से आग्रह है कि जो-जो आरोप लगे हैं सबकी जांच होनी चाहिए. जिसके भी खिलाफ आरोप लगे हैं उसकी जांच हो. अगर लीपापोती करने की कोशिश हुई तो हिंदू समाज कभी माफ नहीं करेगा.

आलोक कुमार ने कहा, ‘चंपत राय को उनके खिलाफ हो रहे क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन को पूरा करने तक जनता के सामने आना है कि नहीं आना है ये उनका निर्णय है और इसलिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि वे कैमरे को फेस करें. कुछ लोगों ने कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट से करा लीजिए. मैं कांग्रेस के एक सांसद का पत्र भी देखा जो उन्होंने पीएम मोदी को लिखा था. इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने का फैसला प्रधानमंत्री नहीं कर सकते. वो इसका आदेश नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट ये आदेश दे सकता है.’

इस पूरे विवाद के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने सफाई देते हुए कई अहम बातें कही हैं. ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि दान की रकम की गिनती ट्रस्ट के कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि बैंक की ओर से नियुक्त आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से की जाती थी. ऐसे में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट की नहीं बल्कि बैंक और उसकी व्यवस्था की बनती है. उनके अनुसार, कई बार बिना ठोस आधार के भी आरोप लगाए जाते हैं, खासकर तब जब कोई संगठन या संस्था बड़े धार्मिक या सार्वजनिक कार्यों से जुड़ी हो.

उन्होंने आरोप लगाने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग पहले से ही ट्रस्ट के विरोध में रहे हैं, वे इस तरह के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं.प्रकाश गुप्ता ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ना अपने आप में अच्छी बात है क्योंकि इससे पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह तय करना होगा कि वे किस समय से जांच शुरू करें, क्या यह जांच ट्रस्ट के गठन से शुरू होगी या किसी विशेष अवधि से. यह पूरी तरह जांच एजेंसी यानी एसआईटी पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में जांच को आगे बढ़ाती है.

NATIONAL : क्या आपका PF, पेंशन या बीमा दावा 20 दिन में नहीं निपटा?: अब अधिकारी पर होगी कार्रवाई, जानिए EPFO के नए नियम

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत ईपीएफओ की तीन नई योजनाएं अधिसूचित की हैं। नई व्यवस्था में पीएफ, पेंशन और बीमा दावों का 20 दिनों में निपटारा अनिवार्य होगा। देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की तीन नई योजनाएं अधिसूचित कर दी हैं। इनमें कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-2026 शामिल हैं। नई योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने और भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन तथा बीमा दावों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत यदि भविष्य निधि, पेंशन या बीमा का दावा सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूरा होने के बावजूद 20 दिनों के भीतर नहीं निपटाया जाता, तो संबंधित आयुक्त पर 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकेगा। यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी। मंत्रालय का कहना है, इससे दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी और कर्मचारियों को समय पर उनका पैसा मिलेगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले भी देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे स्पष्ट रूप से 12 प्रतिशत तय कर दिया गया है। पहले अधिकारियों को पीएफ पर घोषित ब्याज दर के अनुसार भुगतान करना पड़ता था।

कर्मचारियों और नियोक्ताओं का अंशदान पहले जैसा रहेगा
नई योजनाएं लागू होने के साथ कर्मचारी भविष्य निधि योजना-1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना-1971, कर्मचारी पेंशन योजना-1995 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-1976 की जगह लेंगी। हालांकि, कर्मचारियों व नियोक्ताओं के अंशदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान देंगे। नियोक्ता के अंशदान में से 8.33 प्रतिशत राशि पेंशन योजना में जाएगी, जबकि केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत का योगदान देगी।

नई योजनाओं में नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि सदस्य पीएफ निकासी, पेंशन, बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ पूरी तरह ऑनलाइन और बिना देरी के ले सकें।

NATIONAL : भारतीय सेना को मिलेंगी हैमर मिसाइलें: रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक आज, आधुनिक सैन्य हथियारों की खरीद का रास्ता साफ

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रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है।इनमें हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल, वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम), स्यूडो सैटेलाइट और ड्रोन रोधी प्रणालियां प्रमुख हैं। इन प्रस्तावों के लागू होने से तीनों सेनाओं की मारक क्षमता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

कई महीनों बाद हो रही इस बैठक में चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन पहली बार अपने नए पद पर शामिल होंगे।

स्वदेशी एमपी-एटीजीएम पर सबसे ज्यादा जोर
बैठक में डीआरडीओ द्वारा विकसित मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना है। करीब 2,600 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत सेना को 100 लांचर, 2,300 मिसाइलें और पांच सिमुलेटर मिलेंगे। इनका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करेगी, जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों की भी भागीदारी प्रस्तावित है।

राफेल और तेजस की ताकत बढ़ाएंगी हैमर मिसाइलें
डीएसी के सामने करीब 600 हैमर प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। लगभग 2,400 करोड़ रुपये की लागत वाली इन मिसाइलों का निर्माण फ्रांस की सैफरन कंपनी और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) के सहयोग से भारत में किया जाएगा।

इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना के राफेल और एलसीए तेजस लड़ाकू विमान लैस होंगे, जबकि नौसेना इन्हें राफेल-एम विमानों के लिए इस्तेमाल करेगी। गलवान संघर्ष के बाद इन मिसाइलों को आपात खरीद के तहत भी शामिल किया गया था।

वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा
थलसेना के लिए रूसी मूल के वर्बा वेरी शार्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (वी-शोर्ड्स) की खरीद पर भी मुहर लग सकती है। यह मौजूदा इगला मिसाइल प्रणाली का उन्नत संस्करण है और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान, हेलीकॉप्टर तथा ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम है। इसका उत्पादन भारत में अडाणी डिफेंस करेगी।

ड्रोन और स्यूडो सैटेलाइट पर भी फैसला संभव
बैठक में साफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, कामिकाजी ड्रोन, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, स्कार्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों से जुड़े उपकरण, फिक्स्ड-विंग स्यूडो सैटेलाइट और नेवल शिपबोर्न एरियल सिस्टम जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने पर भारतीय सशस्त्र बलों की निगरानी, वायु रक्षा और सटीक हमले की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

BUSINESS : Whatsapp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर लग सकती है रोक, मोदी सरकार को सता रही धोखाधड़ी की चिंता

Whatsapp के अपकमिंग फीचर ‘यूजरनेम’ को लेकर केंद्र सरकार चिंतित है। रिपोर्टों के अनुसार, इस फीचर की जांच की जाएगी। सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। उसे चिंंता है कि इस फीचर के कारण धोखाधड़ी हो सकती है। ऐसे में इस फीचर पर रोक लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर इस तरह के स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे हैं जो दावा करते हैं कि लोग दूसरों के नाम पर यूजरनेम को बुक करा रहे हैं।
Whatsapp के इस साल आने वाले ‘यूजरनेम’ फीचर पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार को इस फीचर के कारण धोखाधड़ी और दूसरों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाने की चिंता सता रही है। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी सरकार इस फीचर की जांच करेगी। हमारी सहयोगी वेबसाइट ET ने बताया है कि सरकार वॉट्सऐप के अपकमिंग ‘यूजरनेम’ (Username) फीचर पर रोक लगाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। सोमवार रात वॉट्सऐप यूजरनेम फीचर की बुकिंग शुरू हुई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने यूजरनेम रिजर्व कराए हैं। हालांकि ऐसी खबरें भी सोशल मीडिया में आई थीं कि लोगों ने दूसरों के नाम पर यूजरनेम बुक किए हैं, जिनमें PMNarendraModi और Whatsapp जैसे नाम रिजर्व किए जाने की खबरें हैं।

क्या है वॉट्सऐप यूजरनेम
वॉट्सऐप के अनुसार, वॉट्सऐप यूजरनेम कंपनी का अबतक का सबसे बड़ा प्राइवेसी फीचर है। इसे लोगों के फोन नंबर को सेफ रखने के लिए डिजाइन किया गया है। लोग अपना फोन नंबर किसी को बताए बिना उनसे वॉट्सऐप पर कनेक्ट हो पाएंगे। खास बात है कि लोग अपनी पसंद का यूजरनेम चुन सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि वह यूजरनेम किसी अन्य ऐप के हैंडल से मेल खाता हो। वॉट्सऐप ने स्पष्ट किया है कि यह एक प्राइवेसी फीचर है, सोशल मीडिया हैंडल नहीं।

कंपनी ने बताया है कि फीचर को इस साल के अंत तक लाया जाएगा। हालांकि उससे पहले ही यूजरनेम को रिजर्व कराया जा सकता है। वॉट्सऐप के अनुसार, जब यह फीचर आ जाएगा, तो लोगों को उनके ऐप में नोटिफिकेशन मिल जाएगा। वॉट्सऐप ने सुझाव दिया है कि लोगों के लिए ऐसा अनोखा वॉट्सऐप यूजरनेम चुनना सही रहेगा, जो सिर्फ उन्हीं लोगों को पता हो जिनसे यूजर संपर्क करना चाहता है।

धोखाधड़ी की संभावना
हालांकि केंद्र सरकार ने जिस चिंता को जाहिर किया है, वह गंभीर है। अगर इस फीचर का गलत उपयोग हुआ तो लोगों के साथ धोखाधड़ी हो सकती है। ऐसे में संभव है कि कानूनी विकल्पों पर विचार के कारण इस फीचर का भारत में आना इतना आसान ना हो।

BUSINESS : क्या कम होने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कर दिया क्लियर

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केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने की केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें दुनिया के अनेक देशों की तुलना में पहले से ही कम हैं। वह शनिवार को लोढ़ी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उपलब्धियां गिनाते हुए मंत्री ने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सबसे कम वृद्धि हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में लगभग 80 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि भारत में वृद्धि अपेक्षाकृत काफी कम रही।

बताया कि केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 और मई 2022 में एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी तथा हाल के वर्षों में भी उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कदम उठाए गए हैं। एलपीजी की उपलब्धता पर उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के बीच देश में गैस संकट से बचने के लिए उत्पादन बढ़ाया गया।

युद्ध से पहले जहां देश में प्रतिदिन 32 से 33 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होता था, उसे बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि गैस सिलिंडरों की दैनिक मांग 53 लाख से बढ़कर 90 लाख से अधिक हो गई थी, जिससे जमाखोरी की आशंका बनी। इससे निपटने के लिए डीएसी (डिलीवरी आथेंटिकेशन कोड) व्यवस्था लागू की गई।

एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने स्वीकार किया कि सोनभद्र में हर घर जल योजना के क्रियान्वयन में कुछ समस्याएं सामने आई हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित बाधाओं को दूर कर योजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा।

NATIONAL : भारत में पेट्रोल-डीजल कब होगा सस्ता?; पेट्रोलियम मंत्री बोले- अभी महंगा क्रूड आयल हो रहा प्रोसेस, US-ईरान जंग की वजह से ₹74,781 करोड़ का घाटा हुआ

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पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अभी महंगा कच्चा तेल प्रोसेस हो रहा है। जानिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब कम हो सकती हैं और तेल कंपनियों को कितना नुकसान हुआ। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम होंगी? यह सवाल इन दिनों करोड़ों लोगों के मन में है। इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में कटौती को लेकर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। अगले 2 से 3 महीनों में स्थिति की समीक्षा के बाद ही राहत मिलने की संभावना पर निर्णय होगा।

आलिया भट्ट का सबसे बड़ा एक्शन अवतार, लेकिन क्या YRF Spy Universe की नई फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरी? मंत्री ने बताया कि ईरान संकट के दौरान भारतीय तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी महंगा कच्चा तेल खरीदा था। फिलहाल रिफाइनरियां उसी स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं, इसलिए कीमतों में तुरंत कमी करना संभव नहीं है। Also Read – EPFO New Rules 2026: अब ₹1,800 तक ही अनिवार्य PF योगदान, 12% अतिरिक्त कटौती होगी स्वैच्छिक महंगा कच्चा तेल बना सबसे बड़ी वजह हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, जब ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, तब भारतीय तेल कंपनियों को भी ऊंची कीमत पर क्रूड ऑयल खरीदना पड़ा। Also Read – स्मॉल सेविंग्स ब्याज दरें अपडेट: PPF पर 7.1% और सुकन्या पर 8.2% ब्याज; लगातार 10वीं तिमाही में नहीं हुआ कोई बदलाव अब जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम फिर नीचे आने लगे हैं, तब भी पुराने महंगे स्टॉक का असर बना हुआ है।

यही वजह है कि सरकारी कंपनियां फिलहाल ईंधन के दाम घटाने की स्थिति में नहीं हैं। इधर, दिल्ली सरकार ने एक जुलाई 2026 से नई EV पालिसी लागू की है। नई EV नीति के अनुसार 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। इसके बाद केवल नए इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। Also Read – PF निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव: अब 25% बैलेंस रखना होगा; ₹1 लाख में सिर्फ ₹75 हजार निकाल सकेंगे 2-3 महीने बाद मिल सकती है राहत पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले दो से तीन महीनों तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और भविष्य का फैसला वैश्विक कीमतों के आधार पर लिया जाएगा।

सरकारी तेल कंपनियों को हुआ बड़ा नुकसान सरकार के अनुसार, लागत से कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को 30 जून तक कुल ₹74,781 करोड़ का नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ा है। मंत्री ने बताया कि अप्रैल से जून की अवधि में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को भारी वित्तीय दबाव झेलना पड़ा। पिछली तिमाहियों के नुकसान को जोड़ने पर यह बोझ और भी बढ़ गया है। मई में बढ़ाए गए थे पेट्रोल-डीजल के दाम मई 2026 में इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे क्रूड ऑयल का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चरणबद्ध तरीके से ₹7.50 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। देश के 90 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल पंप इन्हीं तीन सरकारी कंपनियों के नियंत्रण में हैं। फिलहाल इन कंपनियों ने कीमतों में कोई नई कटौती नहीं की है। प्राइवेट कंपनी ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी कंपनियों के विपरीत, निजी ईंधन रिटेलर नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल पर ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर ₹3 प्रति लीटर की कटौती की है। भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत घटकर ₹114.79 प्रति लीटर और डीजल ₹99.57 प्रति लीटर हो गया है। इससे निजी कंपनियों और सरकारी कंपनियों के दामों में अंतर भी बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में क्या बदलाव आया? मंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल थीं।

युद्ध के दौरान यह बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। अब वैश्विक हालात सामान्य होने और तनाव कम होने के बाद कीमतें फिर लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। यदि यह गिरावट स्थिर रहती है तो आने वाले महीनों में भारतीय उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। क्या होती है अंडर-रिकवरी? जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, लेकिन सरकार या तेल कंपनियां आम लोगों को राहत देने के लिए उसी अनुपात में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कीमतें नहीं बढ़ातीं, तब लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर अंडर-रिकवरी कहलाता है। यही अंतर तेल कंपनियों के वित्तीय नुकसान का कारण बनता है। लंबे समय तक अंडर-रिकवरी बढ़ने पर कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है और भविष्य में कीमतों की समीक्षा की जरूरत पड़ती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है? फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता बना रहता है और महंगा स्टॉक खत्म हो जाता है, तो अगले कुछ महीनों में ईंधन की कीमतों में कटौती की उम्मीद की जा सकती है।

BUSINESS : इंतजार खत्म; पचपदरा रिफाइनरी का पहला चरण तैयार, 21 को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

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इंतजार खत्म; पचपदरा रिफाइनरी का पहला चरण तैयार, 21 को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। 79 हजार करोड़ की इस परियोजना दो दशक पहले शुरू की गई थी। सत्ता बदलने के साथ परियोजना में कितने बदलाव आए जानिए इस रिपोर्ट में-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था।

मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।

यह रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड(HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है। इसे देश की सबसे आधुनिक बीएस-6 मानक की रिफाइनरी माना जा रहा है, जहां रिफाइनरी के साथ पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स भी विकसित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह जीरो लिक्विड डिस्चार्ज परियोजना होगी, यानी रिफाइनिंग के दौरान कोई तरल अपशिष्ट बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।
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रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा।

कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी
रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है।

वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई।

राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017)
वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। 79 हजार करोड़ की इस परियोजना दो दशक पहले शुरू की गई थी। सत्ता बदलने के साथ परियोजना में कितने बदलाव आए जानिए इस रिपोर्ट में-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था।

मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।

यह रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड(HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है। इसे देश की सबसे आधुनिक बीएस-6 मानक की रिफाइनरी माना जा रहा है, जहां रिफाइनरी के साथ पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स भी विकसित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह जीरो लिक्विड डिस्चार्ज परियोजना होगी, यानी रिफाइनिंग के दौरान कोई तरल अपशिष्ट बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।
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रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा।

कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी
रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है।

वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई।

राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017)
वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।

NATIONAL : लोकतंत्र हमारी मजबूती, भारत पर बढ़ रहा दुनिया का भरोसा, ट्रंप टैरिफ के बीच गरजे पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मारुति सुजुकी के ईवी प्लांट का उद्घाटन किया, मेक इन इंडिया की उपलब्धियां गिनाईं और भारत जापान संबंधों की मजबूती पर जोर दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात में मारुति सुजुकी के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) प्लांट के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके कारण दुनिया का भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस पहल ने भारत को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनाया है. पीएम ने बताया कि बीते करीब 11 साल के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 500 फीसदी, मोबाइल फोन उत्पादन में 2700 फीसदी और रक्षा उत्पादन में 200 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में हमने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान शुरू किया था, ताकि भारत आत्मनिर्भर बने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए. इसके लिए हमने वैश्विक और घरेलू कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाया. प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव (PLI) योजना के जरिए निवेश को बढ़ावा दिया गया. उन्होंने बताया कि PLI योजना ने इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और रक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन को गति दी है, जिससे भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है.

मोबाइल प्रोडक्शन में 2700 फीसदी की बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रगति पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 500 फीसदी की वृद्धि हुई है. मोबाइल फोन उत्पादन में 2014 की तुलना में 2700 फीसदी की वृद्धि अभूतपूर्व है. आज भारत दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल विनिर्माण केंद्रों में से एक बन गया है. रक्षा क्षेत्र में भी 200 फीसदी की वृद्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वदेशी रक्षा उपकरणों और हथियारों के निर्माण ने भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है.

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