Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : अल नीनो और सूखे की आंशका को लेकर केंद्र अलर्ट: केंद्रीय गृहमंत्री और कृषि मंत्री की बैठक, जानें क्या दिए आदेश?

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देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और अल नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इसके साथ ही बैठक में असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ एवं भूस्खलन से हुए नुकसान के आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी टीम भेजने का फैसला किया गया।

जून के महीने में देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान शाह ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सतर्क रहने तथा खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर किसानों को समय पर और सही सलाह देने के लिए राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

अल नीनो की आशंका पर गृहमंत्री ने क्या कहा?
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अमित शाह ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ देश के कुछ हिस्सों में अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश और उसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की। बैठक में किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने, सभी जलाशयों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। जून महीने में देशभर में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक असर मध्य भारत में देखने को मिला, जहां वर्षा में 50.4 प्रतिशत की कमी रही। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में भी औसत मासिक वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है।

खरीफ की बुवाई पर कितना पड़ा असर?
कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी दिखाई दिया। 25 जून तक खरीफ फसलों का रकबा 23 प्रतिशत घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गया। इस दौरान अमित शाह ने कहा, ‘सरकार अल नीनो के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। ऐसे में अधिकारी राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलें बोने की सलाह दें।

जल और बिजली मंत्रालय के अधिकारियों को क्या निर्देश?
बैठक में गृह और कृषि सचिवों के अलावा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। शाह ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को देशभर के सभी जलाशयों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने चारा, मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों जैसी कम पानी में उगाई जाने वाली वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। गृह मंत्री ने बिजली सचिव को किसानों और आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध एवं पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान अमित शाह ने बताया कि देश में चावल और गेहूं सहित आवश्यक खाद्यान्नों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा आवश्यक वस्तुओं की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।

इन मंत्रालयों और एजेंसियों ने लिया हिस्सा
बैठक में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, उपभोक्ता मामले विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव शामिल हुए। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारी, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (National Remote Sensing Centre) सहित कई संस्थानों के अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।

NAATIONAL : सेना की और बढ़ेगी ताकत, 79 हजार करोड़ के डिफेंस डील को मिली मंजूरीइस डील पर मुहर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लगाई है. रक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल थे.

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सेना की और बढ़ेगी ताकत, 79 हजार करोड़ के डिफेंस डील को मिली मंजूरीनई दिल्ली:
भारत की तीनों सेनाओं की मारक क्षमता आने वाले समय में और बढ़ने जा रही है. दरअसल, इसे लेकर एक 79,000 करोड़ रुपये की डील की गई है. इस डील के तहत भारतीय सेनाओं के लिए सैन्य हार्डवेयर खरीदा जाएगा. रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बैठक की और वायु सेना, नौसेना और सेना की कई योजनाओं को मंजूरी दी है.

थेल सेना के लिए क्या कुछ होगा खास
DAC ने पटरियों पर नाग मिसाइल प्रणाली, जिसे Mk-II NAMIS कहा जाता है, खरीदने के प्रस्ताव पर ‘आवश्यकता की स्वीकृति (AoN)’ का दर्जा दिया. सरकार ने बैठक के बाद एक बयान में कहा कि ग्राउंड-आधारित मोबाइल ईएलआईएनटी सिस्टम जिन्हें जीबीएमईएस कहा जाता है, और उन पर स्थापित क्रेन के साथ उच्च गतिशीलता वाले वाहन डीएसी द्वारा अधिग्रहण के लिए मंजूरी दे दी गई कुछ अन्य सैन्य हार्डवेयर हैं.

ट्रैक किए गए NAMIS से दुश्मन के लड़ाकू वाहनों, बंकरों और अन्य फील्ड किलेबंदी को नष्ट करने की सेना की क्षमता में सुधार होगा. जीबीएमईएस दुश्मन उत्सर्जकों की 24 घंटे की इलेक्ट्रॉनिक खुफिया जानकारी प्रदान करेगा और सामरिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए उन पर जासूसी करेगा. जारी बयान में कहा गया है कि उच्च गतिशीलता वाले वाहनों के शामिल होने से विभिन्न इलाकों में बलों को रसद समर्थन में काफी सुधार होगा.

नौसेना को भी मिलेगा काफी कुछ
इस डील से नौसेना भी पहले से और मजबूत होगी. नौसेना की खरीदारी सूची में लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक (एलपीडी), 30 मिमी नेवल सरफेस गन, उन्नत हल्के टॉरपीडो, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम और 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट के लिए स्मार्ट गोला-बारूद शामिल हैं. लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक भारतीय नौसेना के लिए सेना और वायु सेना के साथ संयुक्त उभयचर आक्रमण अभियान चलाने में बहुत उपयोगी होगा.

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इन प्लेटफार्मों को शांति स्थापना अभियानों, मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए भी तैनात किया जा सकता है.उन्नत हल्का टारपीडो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित एक घरेलू प्रणाली है. यह पारंपरिक,परमाणु और बौनी पनडुब्बियों को निशाना बना सकता है.बयान में कहा गया है कि 30 मिमी नौसैनिक सतह बंदूकें नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल की कम तीव्रता वाले समुद्री और समुद्री डकैती विरोधी अभियान चलाने की क्षमता को बढ़ाएंगी.

वायुसेना के लिए क्या कुछ होगा खास
इस डील में अगर वायुसेना की बात करें तो वायुसेना के लिए, डीएसी ने सहयोगात्मक लंबी दूरी लक्ष्य संतृप्ति/विनाश प्रणाली (सीएलआरटीएस/डीएस) और अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दे दी. इसे लेकर जो बयान जारी किया गया है उसमें कहा गया है कि यह प्रणाली मिशन क्षेत्र में स्वायत्त रूप से उड़ान भरने, उतरने, नेविगेट करने, पता लगाने और पेलोड वितरित करने की क्षमता रखती हैं.

NATIONAL : Instagram पर बाल यौन शोषण संबंधी विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार सख्त, मेटा को तलब करने का निर्देश

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सरकार ने चिंता जताई थी कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों तथा किसी अन्य व्यक्ति के तौर पर खुद को पेश करने जैसे मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों मामले में मेटा(Meta) को तलब करने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस मामले में मेटा से स्पष्टीकरण मांगेगा।इस सप्ताह यह दूसरा मौका है जब सरकार ने मेटा पर सख्ती दिखाई है। केंद्र ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर के मामले में बुधवार को मेटा को नोटिस जारी किया था।

सरकार ने चिंता जताई थी कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों तथा किसी अन्य व्यक्ति के तौर पर खुद को पेश करने (इम्पर्सनेशन) जैसे मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

सरकार ने कहा था कि इन मुद्दों पर उसकी संतुष्टि होने और परामर्श प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस सेवा को लागू नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र ने मेटा से यह भी पूछा था कि व्हाट्सऐप के इस नए फीचर के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए जबकि इससे साइबर अपराध बढ़ सकते हैं।

सरकार ने मेटा को यह भी याद दिलाया था कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ (सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी) के रूप में व्हाट्सऐप सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत आवश्यक सावधानी बरतने संबंधी दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य है। यह कदम बीबीसी की एक जांच रिपोर्ट के बाद उठाया गया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा की एल्गोरिद्म प्रणाली ऐसे वीडियो भी लोगों को देखने का सुझाव दे रही थी, जिनमें बाल यौन शोषण सामग्री हो सकती है।

रिपोर्ट में पाया गया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन दिखाई दे रहे थे, जो आपत्तिजनक सामग्री से जुड़े हो सकते हैं।मेटा की नीति में साफ तौर पर कहा गया है कि आपत्तिजनक सामग्री वाले विज्ञापन पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। सरकार की कार्रवाई और बीबीसी की रिपोर्ट पर टिप्पणी के लिए मेटा को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

DFराम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर RSS का पहला रिएक्शन, कहा- राम भक्तों की भावना को आघात पहुंचा

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बड़ा बयान सामने आया है। खुद आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने इस पूरे विवाद पर आधिकारिक तौर पर पक्ष रखा। होसबाले ने कहा कि राम मंदिर में चोरी दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे रामभक्तों की भावना को आघात पहुंचा है। SIT जांच का हम स्वागत करते हैं। इस मामले में जो भी दोषी हो, उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर प्रबंधन और सरकार से व्यवस्था की सभी कमियों को तुरंत दूर करने की मांग भी की है।

RSS ने क्यों जताई चिंता?
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, ”श्री राम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष, करोड़ों राम भक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। यही वजह है कि यह मंदिर पूरे हिंदू समाज की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में अयोध्या स्थित श्री रामलला मंदिर के दान पात्रों में जमा धनराशि की चोरी की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” आरएसएस ने कहा कि इस घटना से पूरे समाज और राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए इस मामले को सामान्य अपराध की तरह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े गंभीर विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

SIT की टीम राम मंदिर परिसर में मौजूद
उधर, SIT की टीम इस वक्त राम मंदिर परिसर में मौजूद है और चंपत राय के करीबियों से पूछताछ हो रही है। आज लगातार दूसरे दिन अनिल मिश्रा और गोपाल राव से चढ़ावा चोरी के मामले में पूछताछ की जा रही है। कल करीब 8 घंटे तक दोनों से पूछताछ हुई थी। आज फिर SIT की टीम अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ कर रही है।

आपको बता दें कि 30 जून को अयोध्या पुलिस ने करीब 3 घंटे तक चंपत राय से पूछताछ की थी, उनका बयान रिकॉर्ड किया था। अब SIT गोपाल राव और अनिल मिश्रा का बयान रिकॉर्ड कर रही है।

चंपत राय जेल जा सकते हैं- विनय कटियार
SIT को शक है कि चढ़ावा चोरी में सिर्फ वही आठ लोग शामिल नहीं हैं जो इस वक्त जेल में हैं बल्कि इस लूट में कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं इसलिए SIT अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। वहीं, इस मामले में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे विनय कटियार का बड़ा बयान सामने आया है। विनय कटियार का भी कहना है कि राम मंदिर के चढ़ावा में गबन हुआ है। उनका कहना है कि चंपत राय भी जेल जाएंगे।

NATIONAL : पीएम मोदी का राजस्थान-गुजरात दौरा आज: देश को समर्पित करेंगे रिफाइनरी, सेमीकंडक्टर केंद्र का भी करेंगे उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान और गुजरात दौरे पर रहेंगे। वह राजस्थान के बालोतरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर केंद्र का उद्घाटन करेंगे। साथ ही जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल, जयपुर मेट्रो और कई सौर परियोजनाओं की सौगात भी देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान व गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह राजस्थान के बालोतरा में देश का पहला ग्रीनफील्ड एकीककृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर देश को समर्पित करेंगे। वहीं, गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण केंद्र का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री दौरे की शुरुआत जोधपुर से करेंगे, जहां व हवाईअड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी बालोतरा के पचपदरा में जिस ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर का उद्घाटन करने वाले हैं, वह दुनिया की सबसे उन्नत रिफाइनरी में एक होगी और इसे पेट्रोरसायन क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसके बाद पीएम बालोतरा में लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। वह वहां पर जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

अपने इस दौरे के दौरान पीएम मोदी जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखेंगे, जिसकी अनुमानित लागत 13,000 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में हाल में भर्ती हुए लगभग 54,000 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपेंगे। वह चूरू-सादुलपुर और चूरू-रतनगढ़ रेल दोहरीकरण परियोजनाओं को देश को समर्पित करेंगे।

NATIONAL : पीएम मोदी का राजस्थान-गुजरात दौरा आज: देश को समर्पित करेंगे रिफाइनरी, सेमीकंडक्टर केंद्र का भी करेंगे उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान और गुजरात दौरे पर रहेंगे। वह राजस्थान के बालोतरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर केंद्र का उद्घाटन करेंगे। साथ ही जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल, जयपुर मेट्रो और कई सौर परियोजनाओं की सौगात भी देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान व गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह राजस्थान के बालोतरा में देश का पहला ग्रीनफील्ड एकीककृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर देश को समर्पित करेंगे। वहीं, गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण केंद्र का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री दौरे की शुरुआत जोधपुर से करेंगे, जहां व हवाईअड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी बालोतरा के पचपदरा में जिस ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर का उद्घाटन करने वाले हैं, वह दुनिया की सबसे उन्नत रिफाइनरी में एक होगी और इसे पेट्रोरसायन क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसके बाद पीएम बालोतरा में लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। वह वहां पर जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

अपने इस दौरे के दौरान पीएम मोदी जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखेंगे, जिसकी अनुमानित लागत 13,000 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में हाल में भर्ती हुए लगभग 54,000 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपेंगे। वह चूरू-सादुलपुर और चूरू-रतनगढ़ रेल दोहरीकरण परियोजनाओं को देश को समर्पित करेंगे। वहीं, एसजेवीएन लिमिटेड के 1,000 मेगावाट बीकानेर सौर उर्जा परियोजना (निवेश लगभग 5,500 करोड़ रुपये) और एनएचपीसी के 300 मेगावाट करणीसर बीकानेर सौर उर्जा संयंत्र को भी देश को समर्पित करेंगे।

पेट्रोरसायन क्षेत्र में बनेंगे आत्मनिर्भर
हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित नौ मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) क्षमता वाला ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर 79,459 करोड़ के निवेश से स्थापित किया गया है। इस परियोजना ने 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोरसायन क्षमता के साथ रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन उत्पादन को एकीकृत किया है। रिफाइनरी में कच्चे तेल से विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है। अधिकारियो के अनुसार यह परिसर भारत की ईंधन क्षमता को सुदृढ़ बनाने, पेट्रोरसायन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में अहम होगा।

NATIONAL : अब किसकी होगी TMC…ममता या बागी सांसदों की? समझिए पश्चिम बंगाल के इस नए समीकरण की पूरी गणित

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पश्चिम बंगाल में TMC के 20 सांसदों और 60 से ज्यादा विधायकों के बागी होने के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर असली TMC किसकी होगी? क्या ममता बनर्जी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न बचा पाएंगी या बागी गुट दावा ठोकेगा? जानिए चुनाव आयोग के नियम, कानूनी गणित और शिवसेना-NCP जैसे मामलों से जुड़े पूरे समीकरण की विस्तृत कहानी.

पिछले 15 सालों से जिस सत्ता पर ममता बनर्जी और TMC का कब्जा था, वह अब BJP के पास जा चुकी है. सत्ता जाने के बाद ममता बनर्जी का किलकिला अचानक टूटने लगा और झटके लगने लगे. पहले 60 विधायकों का बागी होना, ऋतब्रत बनर्जी का नेता विपक्ष चुना जाएगा और फिर सांसदों के बागी होने के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी पारा काफी हाई है. इसी बीच रविवार को बागी सांसद काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय समेत कई नेताओं ने लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर संसद में अलग बैठने की मांग की है. साथ ही इन 20 बागी सांसदों ने TMC को छोड़ अपने आप को NPCI से जोड़ लिया है.

लेकिन अब ममता बनर्जी की असली टेंशन शुरू होने वाली है. विधायकों और सांसदों के बागी होने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या वे ममता बनर्जी से TMC का नाम और पार्टी चिह्न भी छीन लेंगे? ऐसा मामला पहले महाराष्ट्र में शिवसेना(उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे) और NCP(शरद पवार बनाम अजीत पवार) देखा जा चुका है और ऐसी ही स्थिति में ममता बनर्जी की पार्टी भी खड़ी हो सकती है. आइए विस्तार से जानते है पूरा समीकरण.

TMC के लिए ममता और बागी गुट की लड़ाई!
TMC के 28 में से 20 सांसद बागी हो गए और उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से संसद में अलग बिठाने के लिए अनुरोध किया है. वहीं काकोली घोष ने कहा है कि हम NDA को समर्थन देंगे, इसलिए ऐसा कहा जा रहा है कि इन बागियों को NDA के आसपास बैठने को जगह मिल सकती है. वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी TMC पर दावा जता रही है. TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा और बागी गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की है.

रविवार को काकोली घोष ने भी ऐलान कर दिया कि 20 सांसदों के साथ वो NCP में विलय कर रही है. ऐसे में एक सवाल उठता है कि जब बागी गुट के पास दो तिहाई से ज्यादा सांसद है, 60 से ज्यादा बागी विधायकों का समर्थन है तो अभी ही TMC के लिए दावा क्यों नहीं ठोका गया? कानून भी कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद वहां से निकल जाए तो वे पार्टी तोड़ सकते हैं और पार्टी पर कब्जा भी कर सकते है.

लेकिन संदीप बंदोपाध्याय ने पहले ही कहा है कि, जब दो-तिहाई सांसदों के साथ अलग होते है तो पहले ही दिन मूल पार्टी पर अपना दावा नहीं कर सकते हैं. इसलिए ही उन्होंने NCPI में विलय किया और अब आगे की लड़ाई जुलाई महीने में होगी, जब TMC के बागी नेता पार्टी का नाम और चिह्म का दावा करेंगे. यानी ऐसा लग रहा है कि अब आगे मामला कोर्ट तक जा सकता है.

क्या ममता के हाथ से छिनी जा सकती हैं TMC?
अब एक बड़ा सवाल आता है कि क्या ममता बनर्जी के हाथों से बागी सांसद TMC छीन सकते हैं? तो इसका सीधा जवाब है ‘हां’. तकनीकी और कानूनी रूप से देखा जाएं तो यह मुमकिन है, लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा. TMC के बागी सांसदों ने NCPI(नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) में विलय इसलिए किया ताकि वे दल-बदल विरोधी कानून से बच सकें. इसके साथ ही बागी गुट अब चुनाव आयोग जाकर खुद को ‘असली TMC’ होने का दावा ठोकने का प्लान कर रहे है.

संदीप बंदोपाध्याय के मुताबिक जुलाई में वो TMC को लेकर अपनी दावेदारी जताएंगे. बागी खेमे का प्लान है कि जुलाई में जब संसद का सत्र शुरू होगा, तब वे बहुमत के आधार पर खुद को ‘असली TMC’ घोषित करने की मांग करेंगे. फिर बागी नेता चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे और तब जाकर ममता बनर्जी को पार्टी का नाम और सिंबल छोड़ना पड़ सकता है. यह घटनाक्रम कुछ वैसे ही होगा जैसे शरद पवार और उद्धव ठाकरे को छोड़ना पड़ा था.

लीगली कौन कितना सही?
राजनीति में देखा गया है कि जब भी किसी पार्टी के दो गुट बनते हैं तब दोनों ही गुट खुद को ‘असली पार्टी’ बताते हैं, लेकिन फाइनल फैसला चुनाव आयोग करता है. इससे जुड़ी बातें ‘इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968’ के पारा 15 में साफ-साफ लिखा हुआ है.

ऐसे स्थिति में चुनाव आयोग यह देखता है कि पार्टी के निर्वाचित जन प्रतिनिधि यानी विधायक और सांसद कितनी संख्या में किस गुट के साथ है. मौजूदा स्थिति की बात करें तो TMC के 28 लोकसभा सांसद में से 20 सांसद बागी हो गए है. इसके अलावा 80 में से 60 से ज्यादा विधायकों के भी बागी होने का दावा है. ऐसे में बागी गुट सदन में आराम से बहुमत साबित कर देगा और अपनी दावेदारी को मजबूत करेगा.

इसके अलावा चुनाव आयोग यह भी देखता है की राष्ट्रीय कार्यकारिणी, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों की सूची में किसका पलड़ा कितना भारी है. ऐसे में ममता बनर्जी का पलड़ा भारी है क्योंकि संगठन पर अभी उनकी मजबूत पकड़ है. हालांकि शिवसेना और NCP के मामले में चुनाव आयोग ने संगठन से ज्यादा सांसद और विधायकों की संख्या को ज्यादा तरजीह दी थी.

ममता बनर्जी के पास क्या है उपाय?
चुनाव आयोग के सामने मामला जाने के बाद अगर उन्हें लगता है कि मामला गंभीर, उलझा हुआ है और तुरंत फैसला नहीं लिया जा सकता है तो वो TMC का नाम और सिंबल फ्रीज कर सकते है. फिर दोनों गुटों को ही अस्थायी नाम और सिंबल दिए जाएंगे. ऐसे में आयोग के फैसले के बाद ममता या बागी गुट, सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा. महाराष्ट्र में जब मामला फंसा था तब सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबी चली थी, इसलिए अगर ऐसी स्थिति पैदा हुई तो बंगाल में भी कुछ ऐसा ही हो सकता है.

ममता बनर्जी पार्टी का नाम और सिंबल आसानी से नहीं छोड़ेगी और अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मांग की है कि बागी गुट को मान्यता ना दी जाएं. अब चुनाव आयोग या लोकसभा स्पीकर के किसी भी फैसले पर जिसकी भी हार होगी, वह गुट तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा. यानी साफ है कि आने वाले दिनों में दिल्ली से कोलकाता तक लंबी कानूनी लड़ाई तय है.

NATIONAL : सिया गोयल ने दिया सिग्नल, चेतन ने केतन अग्रवाल को दिया धक्का, पुणे के लोहागढ़ किले पर उस रोज क्या हुआ था, पढ़िए

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रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले में खाई में धक्का देकर मारने की आरोपी उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी पिछले छह महीने से लगातार संपर्क में थे, दोनों ने एक-दूसरे को 2,004 बार फोन किया था और कुल 238 घंटे बातचीत की थी। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पुणे : 26 साल के रियल एस्टेट फर्म के डायरेक्टर केतन अग्रवाल की हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। महाराष्ट्र के पुणे में हुई इस वारदात की तुलना राजा रघुवंशी हत्याकांड से की जा रही है। सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन की हत्या की साजिश रची। पुणे पुलिस ने बताया कि लोहगढ़ किले की एक चट्टान से केतन अग्रवाल को धक्का चेतन चौधरी ने दिया था। केतन को धक्का देने का सिग्नल चेतन को सिया की तरफ से मिला था।

पुलिस उपाधीक्षक गजानन टोम्पे के अनुसार, दोनों ने 18 जून को इस अपराध को अंजाम देने से पहले इसकी पूरी योजना बनाई थी। जांचकर्ताओं ने बताया कि चेतन चौधरी ने सिया गोयल और केतन अग्रवाल का पीछा किया और ‘विंचू काटा’ रिज के पास एक सुनसान चट्टान पर गोयल से पहले से तय सिग्नल का इंतजार किया।

एसपी गजानन टोम्पे ने कहा कि दोनों के बीच यह तय हुआ था कि सही समय का इशारा करने के लिए सिया गोयल नीचे बैठ जाएगी। सिग्नल मिलने के बाद चेतन चौधरी पीछे से अग्रवाल के पास गया, उसे चट्टान से धक्का दिया और मौके से भाग गया। पुलिस ने बताया कि चेतन ने पकड़े जाने से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन पुणे के मार्केट यार्ड इलाके में अपनी दुकान पर छोड़ दिया था और इसके बजाय एक कर्मचारी का फोन साथ ले गया था। उस कर्मचारी से अभी पूछताछ की जा रही है।

जांचकर्ताओं ने बताया कि अपराध के लिए चुनी गई जगह काफी सुनसान थी और वहां गवाह भी कम थे, क्योंकि आम तौर पर हफ्ते के दिनों में किले में कम लोग आते हैं। शक तब हुआ जब सिया गोयल ने घटना के बारे में अलग-अलग बातें कहीं। पुलिस ने बताया कि उसने पहले दावा किया कि तस्वीरें खिंचवाते समय अग्रवाल का पैर फिसल गया था, और बाद में कहा कि उसे पानी की बोतल देते समय वह गिर गया। जांचकर्ताओं को उसके फोन पर उस ट्रिप की कोई तस्वीर भी नहीं मिली।

आगे की जांच में पता चला कि सिया गोयल ने इस महीने की शुरुआत में बाली जाने की तय प्री-वेडिंग ट्रिप को खराब कर दिया था। उसने केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फाड़कर खालापुर टोल प्लाज़ा के पास फेंक दिया था। पुलिस ने बताया कि बाद में उसने ऐसा करने की बात कबूल कर ली क्योंकि चेतन चौधरी इस ट्रिप के खिलाफ था।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी सिया गोयल और केतन चौधरी के बीच करीबी रिश्ते का पता चला। पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच करीब आठ महीने से रिश्ता था (जबकि गोयल की सगाई हो चुकी थी) और जनवरी से जून के बीच उन्होंने 2,000 से ज़्यादा बार एक-दूसरे को कॉल किया और कुल 238 घंटे तक बात की।

सिया और चेतन ने पिछले छह महीने में एक-दूसरे को 2,004 बार फोन किया और कुल 238 घंटे बातचीत की। दोनों के बीच फोन पर कई बार दो-तीन घंटे से ज्यादा समय तक भी बातचीत हुई। जांच में यह भी पता चला है कि घटना वाले दिन सिया और चेतन लोहगढ़ किला जाने से पहले एक कैफे में मिले थे और उन्होंने केतन को खत्म करने की साजिश को अंतिम रूप दिया था।

लोहगढ़ किले की तलहटी से मिले CCTV फुटेज से मामले में बड़ी कामयाबी मिली। फुटेज में हुड पहने हुए चौधरी को जोड़े का पीछा करते हुए देखा गया। जांचकर्ताओं ने बताया कि फुटेज में सिया गोयल को उसे इशारा करते हुए भी देखा गया। पुलिस ने यह भी बताया कि चेतन चौधरी किले की चोटी पर 10 मिनट से भी कम समय तक रुका और 50 मिनट से भी कम समय में पूरी चढ़ाई पूरी कर ली। खबरों के मुताबिक, आरोपी एक-दूसरे को अपने परिवारों के बिज़नेस के ज़रिए जानते थे। जहां सिया गोयल का परिवार मसालों के व्यापार से जुड़ा है, वहीं चेतन चौधरी के परिवार की किराने की दुकान है। पुलिस अपनी जांच जारी रखे हुए है, जिसमें यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या हत्या की साजिश को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने लोहगढ़ किले की रेकी की थी।

NATIONAL : सरकार का विरोध नागरिकों का अधिकार…’, बॉम्बे HC ने मुंबई पुलिस को फटकारा

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस द्वारा एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को शहर से बाहर करने के आदेश को गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत नागरिकों को सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को शहर से एक साल के लिए बाहर (एक्सटर्न) करने के आदेश को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई को गलत बताया है. कोर्ट ने कहा कि, किसी नागरिक को सिर्फ इसलिए उसके अपने शहर से बेदखल नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया या नारे लगाए.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध और आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार है. अदालत ने मुंबई पुलिस के इस एक्शन को पुलिस शक्तियों का दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल भी बताया है.

जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी (49) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. चौधरी ने मुंबई पुलिस की ओर से जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें मुंबई और उसके उपनगरों की सीमा से 12 महीने के लिए बाहर कर दिया गया था.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पयोशी रॉय ने अदालत को बताया कि चौधरी के खिलाफ वर्ष 2019 से 2024 के बीच कुल पांच एफआईआर दर्ज की गई थीं. इनमें अधिकांश मामले केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े थे. इन आंदोलनों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), बाबरी मस्जिद ध्वंस, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन शामिल थे.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जामदार ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर ‘BJP सरकार मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने पर किसी व्यक्ति को शहर से बाहर करने जैसी कठोर कार्रवाई कैसे की जा सकती है. उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं, किसी मंत्री या सरकार के निजी कर्मचारी नहीं.

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने, प्रदर्शन करने और आंदोलन करने का अधिकार है. केवल विरोध-प्रदर्शन या नारेबाजी के आधार पर किसी व्यक्ति को उसके अपने शहर से बाहर करना कानून का दुरुपयोग है.

रिकॉर्ड के अनुसार, सईद अहमद चौधरी मुंबई के चेंबूर इलाके के निवासी हैं और सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं. उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था. उनकी याचिका में कहा गया कि 20 अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. इसके बाद दिसंबर 2025 में चेंबूर के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त ने उन्हें मुंबई शहर और उपनगरों से एक वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश पारित किया.

पुलिस ने अपने आदेश में कहा था कि चौधरी की गतिविधियों से लोगों में भय का माहौल बन रहा था और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो रहा था. बाद में कोंकण मंडल के मंडलायुक्त ने भी अपील में इस आदेश को बरकरार रखा. हालांकि चौधरी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन से जुड़े थे. इन मामलों में उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत आरोपी बनाया गया था, जो किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेश की अवहेलना से संबंधित है. उनका कहना था कि पुलिस ने निवारक कार्रवाई (Preventive Power) का इस्तेमाल लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के लिए किया.

याचिका में यह भी कहा गया कि एक्सटर्नमेंट आदेश के कारण उन्हें मुंबई नगर निगम चुनावों के महत्वपूर्ण समय में अपने ही क्षेत्र से बाहर रहना पड़ा. इससे वे अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियां नहीं कर सके. चौधरी का आरोप था कि पुलिस ने यह कहकर कार्रवाई की कि उनकी गतिविधियों से ‘आतंक का साम्राज्य’ बन गया है, जबकि स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने ऐसी किसी स्थिति से इनकार किया था.

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि इस मामले में एक्सटर्नमेंट का आदेश पुलिस शक्तियों का दुर्भावनापूर्ण और अनुचित इस्तेमाल है. अदालत ने माना कि केवल विरोध-प्रदर्शन आयोजित करना या उसमें भाग लेना महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को शहर से बाहर करने का वैध आधार नहीं हो सकता.

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस का आदेश पूरी तरह इस आधार पर टिका था कि याचिकाकर्ता ने विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन आयोजित किए और उनमें भाग लिया. अदालत के अनुसार यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार के साथ-साथ अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का भी उल्लंघन है.

इन्हीं टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस के एक्सटर्नमेंट आदेश और उसके खिलाफ अपील में पारित आदेश, दोनों को रद्द कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध को अपराध नहीं माना जा सकता तथा पुलिस अपनी निवारक शक्तियों का इस्तेमाल नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रताओं को कुचलने के लिए नहीं कर सकती.

Maharashtra: शरद पवार ने सचिन अहीर से फोन पर की बात, डिप्टी चेयरमैन बनने पर दी बधाई; सियासी चर्चाएं तेज

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सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन निर्विरोध चुने गए हैं। इस जीत के बाद शरद पवार ने उन्हें फोन कर बधाई दी। अहीर ने हाल ही में उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थामा है। इस घटनाक्रम से राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने सचिन अहीर को फोन किया है। पवार ने उन्हें महाराष्ट्र विधान परिषद का डिप्टी चेयरमैन निर्विरोध चुने जाने पर बधाई दी। सचिन अहीर का यह चुनाव राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।

अहीर का चौंकाने वाला फैसला
सचिन अहीर को शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे का बेहद भरोसेमंद साथी माना जाता था। लेकिन मंगलवार को उन्होंने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने सत्ताधारी एकनाथ शिंदे की शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में डिप्टी चेयरमैन पद के लिए अपना पर्चा भरा। अहीर पहले अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में थे। इसके बाद वह 2019 के चुनाव से पहले अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए थे। अब उनका शिंदे गुट में जाना ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा झटका है।

शरद पवार से मांगा आशीर्वाद
इस बीच, एक वीडियो सामने आया है जिसमें सचिन अहीर फोन पर शरद पवार से बात कर रहे हैं। इस बातचीत में अहीर शरद पवार से हमेशा अपना आशीर्वाद बनाए रखने के लिए कह रहे हैं। शरद पवार का अहीर को फोन करना काफी अहम है। पवार की पार्टी अभी उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सहयोगी है, जबकि अहीर ने हाल ही में उद्धव का साथ छोड़ा है।

विधान भवन में पत्रकारों ने सचिन अहीर से सवाल किया कि क्या उन्होंने उद्धव ठाकरे से बात की है। इस पर अहीर ने बताया कि उन्हें उद्धव ठाकरे का भी एक संदेश मिला है। हालांकि, उन्होंने इस संदेश में क्या लिखा था, इसकी जानकारी नहीं दी। अहीर के इस कदम ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन के भीतर खलबली मचा दी है।

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