Sunday, June 28, 2026
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NATIONAL : ‘मेरी गाड़ी रोज चेक करो, प्रधानमंत्री की क्यों नहीं?’, चुनाव आयोग पर आगबबूला हुईं ममता बनर्जी

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ममता बनर्जी ने अपनी गाड़ी की जांच को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं को चुनाव के दौरान चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. ममता ने चुनौती देते हुए कहा कि उनकी गाड़ी रोज चेक की जाए, लेकिन प्रधानमंत्री की गाड़ी की जांच क्यों नहीं होती.

ममता बनर्जी ने अपनी कार की जांच को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने बुधवार को इस्लामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘अगर हिम्मत है तो मेरी गाड़ी रोज चेक करो, लेकिन प्रधानमंत्री की गाड़ी क्यों नहीं?’ उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने और दबाव बनाने की राजनीति की जा रही है.

ममता बनर्जी के मुताबिक दमदम एयरपोर्ट के पास उनकी गाड़ी की जांच की गई. उन्होंने कहा कि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि केवल चुनिंदा नेताओं को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है. ममता ने कहा कि बीजेपी की राजनीति अब सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बंगाल को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने बीजेपी को चेतावनी देते हुए कहा, ‘गिरफ्तारी की धमकियां और डराने की रणनीति यहां काम नहीं करेगी.’ ममता बनर्जी ने दावा किया कि कोलकाता एयरपोर्ट जाते समय केंद्रीय बलों ने उनकी गाड़ी को रोककर जांच करने की कोशिश की. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी पश्चिम बंगाल चुनाव जीतने के लिए केंद्र सरकार की मशीनरी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर रही है. 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे.

टीएमसी ने एक दिन पहले आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग (ECI) उसके नेताओं को चुनिंदा तरीके से निशाना बना रहा है और उनकी गाड़ियों की ‘सख्त जांच’ के आदेश दिए जा रहे हैं. टीएमसी के मुताबिक, पार्टी के नेताओं, खासकर अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा कर्मियों द्वारा बार-बार रोका जा रहा है. पार्टी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अपने ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ को निर्देश दिया है कि टीएमसी के सभी नेताओं और मंत्रियों की सार्वजनिक रूप से जांच की जाए.

NATIONAL : लखनऊ में 15 से 20 सिलिंडर हुए ब्लास्ट, युवक बोला- मेरे 4 बच्चे जलकर मर गए

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लखनऊ के विकास नगर में भीषण आग का तांडव, 50 झुग्गियां खाक, 20 सिलेंडर ब्लास्ट। एक पीड़ित का दावा- ‘मेरे 4 बच्चे जलकर मर गए’।विकास नगर की झुग्गी-झोपड़ी बस्ती में बुधवार शाम साढ़े पांच बजे भीषण आग लग गई है। आग इतनी विकराल है कि 50 से ज्यादा झुग्गी-झोपड़ियां जलकर राख हो चुकी हैं। अब तक 15 से 20 सिलेंडरों में जोरदार ब्लास्ट हो चुके हैं। आग की लपटें करीब 10 किलोमीटर दूर से भी साफ दिख रही हैं।

आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के करीब 20 मकानों को खाली करा लिया गया है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग रोते-चिल्लाते मौके पर पहुंच रहे हैं। जिनकी झोपड़ियां जल गईं, वे बार-बार अपनी झोपड़ी में घुसने की जिद कर रहे हैं। इलाके की बिजली काट दी गई है।एक पीड़ित युवक रहमान ने रोते हुए बताया, “मेरे 4 बच्चे घर में खेल रहे थे। मैंने देखा आग लग गई है। जैसे ही पहुंचा, तो देखा मेरे बच्चे जल चुके थे। मेरे 4 बच्चे जलकर मर गए। मेरी मां है, पिता नहीं है।” पुलिस ने रहमान को बाद में पकड़कर वापस लाया।

UP : ट्रेन से कटकर पांच लोगों की मौत, ट्रैक पर पेशाब कर रहे थे; गाड़ी का हॉर्न सुन दौड़े थे सभी

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रेलवे प्रशासन द्वारा आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कार्यवाही की जा रही है। यात्रियों एवं आमजन से अपील है कि ट्रेन के रुकने की स्थिति में अनावश्यक रूप से ट्रेन से न उतरें और रेलवे ट्रैक पर जाने से बचें।उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के करछना थाना क्षेत्र स्थित पचदेवरा गांव के पास बुधवार शाम बड़ा रेल हादसा हो गया। दिल्ली-हावड़ा रूट पर कालका मेल से उतरकर पटरी पर खड़े पांच यात्री पुरुषोत्तम एक्सप्रेस की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

जानकारी के मुताबिक, कालका मेल में एक यात्री के गिरने के बाद चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका गया था। ट्रेन रुकने पर कुछ यात्री नीचे उतर गए और पटरी किनारे खड़े हो गए। इसी दौरान मिर्जापुर की ओर से आ रही पुरुषोत्तम एक्सप्रेस तेज रफ्तार से गुजरी और पांच लोगों को रौंद दिया।

हादसे में फिरोजाबाद जिले के खैरगढ़ थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव निवासी 19 वर्षीय आकाश पुत्र गिरिराज की मौत हो गई। वह कोलकाता में एक रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था। उसके साथ अजय पुत्र मुन्ना पासी निवासी कोलकाता भी सफर कर रहा था। मृतकों में मिर्जापुर निवासी सुनील की भी पहचान हुई है, जबकि दो अन्य की शिनाख्त नहीं हो सकी है।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर रेलवे पुलिस, स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, सभी मृतक कालका मेल से यात्रा कर रहे थे और ट्रेन रुकने के बाद नीचे उतर गए थे। शुरुआती जांच में लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

NATIONAL : नौसेना प्रमुख बोले- अब धारणा की जंग जीतना भी जरूरी, प्रतिस्पर्धा से संघर्ष की ओर बढ़ चुकी दुनिया

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नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आधुनिक युद्ध में धारणा की लड़ाई जीतना भी अहम है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि दुनिया अब प्रतिस्पर्धा से संघर्ष की ओर बढ़ चुकी है और इसके असर दूर तक पड़ रहे हैं। कमांडर सम्मेलन में एडमिरल त्रिपाठी ने क्या कुछ कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री यातायात में आ रही बाधाओं का जिक्र करते हुए नौसेना प्रमुख ने कहा कि किसी संघर्ष से भौगोलिक दूरी का यह अर्थ नहीं है कि आप उसके परिणामों से भी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया प्रतिस्पर्धा से संघर्ष की ओर बढ़ चुकी है। एडमिरल त्रिपाठी ने गैर-राज्य तत्वों के पास आधुनिक तकनीक की आसान पहुंच और दुश्मनों की बढ़ती क्षमताओं को नौसेना के लिए चुनौती भरा बताया।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना ने आवंटित बजट का 100 प्रतिशत उपयोग किया है और 90 से अधिक पूंजीगत अनुबंध संपन्न किए हैं। इस साल नौसेना का 15 से अधिक युद्धपोत व नौसैनिक प्लेटफॉर्म मिलने वाले हैं। नौसेना प्रमुख ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के समावेश पर जोर दिया। उन्होंने नौसेना के लिए कुछ प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं। इनमें उच्चस्तरीय युद्ध क्षमता बनाए रखना, अपनी क्षमताओं का विकास करना, नवाचार व नई तकनीकों का एकीकरण और सेना के तीनों अंगों के बीच संयुक्तता पर जोर दिया गया।

नौसेना का सम्मेलन आने वाले दिनों में नौसेना की रणनीतिक दिशा तय करने और भविष्य की नौसेना बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।नैरेटिव वॉरफेयर आधुनिक युद्ध का वह पहलू है, जहां जीत सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि सूचना और धारणा के जरिये हासिल की जाती है। इसका उद्देश्य किसी संघर्ष के बारे में सार्वजनिक सोच प्रभावित कर अपने पक्ष में जनमत तैयार करना होता है। इसमें सूचनाओं, प्रोपेगेंडा और सोशल मीडिया का उपयोग इस तरह किया जाता है कि किसे नायक या खलनायक माना जाए, यह तय हो सके। आज के दौर में युद्ध केवल मैदान पर नहीं जीता जाता, बल्कि दुनिया को संघर्ष की जो कहानी सुनाई जाती है, वह यह तय करती है कि सैन्य ऑपरेशन वास्तव में सफल रहा या नहीं। इस युद्ध में कभी-कभी भ्रामक जानकारी का सहारा लेकर एक प्रभावशाली कहानी (नैरेटिव) बनाई जाती है। डिजिटल मीडिया के फैलाव के कारण नैरेटिव वॉरफेयर काफी शक्तिशाली बन गया है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भी नौसेना कमांडरों के साथ बातचीत की। उन्होंने नौसेना कमांडरों से कहा कि भू-राजनीतिक हालात और युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुसार अपनी योजना बनाएं।

WORLD : अमेरिका ने माना लापता ‘MQ-4सी ट्राइटन’ ड्रोन हुआ था क्रैश, अब तक 25 ड्रोन का नुकसान

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अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही जंग में पहली बार माना है कि उन्हें बड़ी तादात में अपने ड्रोन खोने पड़े हैं। 9 अप्रैल को फारस की खाड़ी में अमेरिका का 2000 करोड़ रुपये की कीमत का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन भी क्रैश हुआ था।

पिछले एक महीने से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब डोनाल्ड ट्रंप के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिका अभी तक इस युद्ध में सबसे उन्नत एफ-35 समेत कई विमान और ड्रोन को गंवा चुका है। अब अमेरिका ने माना है कि उसे हाल ही में बड़ी तादात में उन्नत ड्रोन खोने पड़े हैं। अमेरिकी नौसेना ने आधिकारिक पुष्टि की कि उसका लापता ड्रोन ‘एमक्यू-4सी ट्राइटन’ खाड़ी क्षेत्र में क्रैश हो गया। यह पहली बार है जब अमेरिका ने अपने बड़े नुकसान को कबूला है।

यह जानकारी यूनाइटेड स्टेट्स नेवल सेफ्टी कमांड की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। यह हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस (एचएलीई) निगरानी ड्रोन समुद्री इलाकों में जासूसी और दुश्मनों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल होता है, जिसकी कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई जा रही है। यह 24 घंटे तक हवा में रहने के लिए डिजाइन किया गया है। अमेरिकी नौसेना सुरक्षा कमांड की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा है-9 अप्रैल 2026 (स्थान गोपनीय-ऑपरेशनल सिक्योरिटी) एमक्यू-4सी क्रैश।

दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग के नियमानुसार, 2.5 मिलियन डॉलर से अधिक नुकसान वाले हादसों को क्लास ए मिसहैप माना जाता है। ये भी इसी श्रेणी में बताया गया है यानी 2000 करोड़ रुपये के करीब होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि ड्रोन किसी के हमले का शिकार नहीं हुआ, बल्कि 9 अप्रैल को ये “क्रैश” हुआ था। मानवरहित ड्रोन होर्मुज में इंटरनेशनल एयरस्पेस में तीन घंटे के रूटीन मिशन पर निकला था।

फारस की खाड़ी के ऊपर उड़ान भरते समय जब विमान अचानक ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकिंग साइट्स से गायब हो गया, ब्रॉडकास्ट इमरजेंसी कोड 7700 नजर आने लगा, जो आमतौर पर इन-फ्लाइट इमरजेंसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि उसे ईरानी हवाई सुरक्षा बलों ने मार गिराया था; हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। ‘द वॉर जोन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन 50,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे गिरा और 10,000 फीट से भी नीचे पहुंचने के बाद उसका संपर्क टूट गया था।

नेवी ने ऑपरेशनल सुरक्षा कारणों से उसने दुर्घटना की सटीक जगह का खुलासा नहीं किया है। विमान में अमेरिका का कोई भी कर्मी सवार नहीं था, और किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। ट्राइटन ड्रोन को नॉर्थरॉप ग्रुम्मन ने बनाया है। यह अमेरिकी नेवी के पावरबैंक का सबसे एडवांस मानवरहित एरियल सिस्टम है। इसे बेहद ऊंचाई पर उड़ने और लंबे वक्त के मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। ग्रुम्मन की आधिकारिक साइट पर दावा किया गया है कि यह रक्षा के लिए सबसे उन्नत, ऊंची उड़ान भरने वाली और लंबे समय तक टिकने वाली क्षमता रखता है।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। इसी अवधि में अमेरिका ने अपने 24 और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवाए हैं। इनकी कुल कीमत लगभग 6727 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस तरह कुल 25 ड्रोन के नुकसान ने अमेरिकी सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्राइटन, एमक्यू-4 ग्लोबल हॉक का ही एक रूप है, और समुद्री निगरानी में विशेषज्ञता हासिल है। इस विमान की रेंज 13,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है, जो बड़े इलाके की लगातार निगरानी के लिए जरूरी है। ये खराब मौसम में भी काम करने की कुव्वत रखता है। इसके एयरफ्रेम को समुद्र के खराब मौसम का सामना करने के लिए काफी मजबूती से गढ़ा गया है, जिससे यह हर तरह के हालात में समुद्र के ऊपर अपनी जगह पर डटा रह सकता है।

हर विमान में एएन/जेडपीवाई-3 मल्टी-फंक्शन एक्टिव सेंसर रडार लगा होता है, जिसे 360 डिग्री समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है और विस्तृत इलाके में जहाजों को ट्रैक करने की खूबी से लैस है। ड्रोन को रीयल टाइम में डेटा दूसरे सैन्य जहाजों और विमानों तक भेजने में महारत हासिल है। इससे अमेरिकी सेना को समुद्री इलाकों में लगातार नजर रखने में मदद मिलती है; अन्य विमानों के मुकाबले इसकी लागत आधी होती है। यही वजह है कि विदेशी मीडिया इसे ट्रंप प्रशासन के लिए बहुत बड़ा झटका मान रही है। इस संघर्ष में ईरान तबाह कर देने का दावा ट्रंप बार-बार करते हैं लेकिन 25 ड्रोन का नुकसान भी अमेरिका के लिए बड़ा आघात है।

NATIONAL : राहुल गांधी का सरकार पर हमला: ‘परिसीमन से सत्ता हथियाने की कोशिश’, छोटे राज्यों के साथ अन्याय का भी लगाया आरोप

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के संविधान संशोधन प्रस्तावों को परिसीमन और गरिमैंडरिंग के जरिए सत्ता हथियाने का प्रयास बताया है। उन्होंने महिला आरक्षण पर समर्थन जताते हुए राज्यों के साथ अन्याय का आरोप लगाया।

नई दिल्ली में संविधान संशोधन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रस्तावित संशोधन सत्ता हथियाने की कोशिश है, जिसे परिसीमन और जेरीमैंडरिंग (निर्वाचन क्षेत्रों का अनुचित हेरफेर) के जरिए अंजाम दिया जा रहा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण कानून का पूरी तरह समर्थन करती है। संसद ने वर्ष 2023 में इसे सर्वसम्मति से पारित किया था और यह अब संविधान का हिस्सा बन चुका है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की यह पहल महिलाओं के आरक्षण से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा छिपी है। उन्होंने दावा किया कि इससे ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि जाति जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण, पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले यह विवाद और तेज हो गया है। सरकार की योजना के अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक की जा सकती है, ताकि महिला आरक्षण कानून को लागू किया जा सके। इसके साथ ही राज्य विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की तैयारी है।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बैठक की। बैठक के बाद कहा गया कि विपक्ष डीलिमिटेशन संबंधी प्रावधानों का सामूहिक रूप से विरोध करेगा। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से इसे लागू किया जा रहा है, वह राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

NATIONAL : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज से गुजरात और महाराष्ट्र के चार दिन दौरे पर रहेंगी

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 13 से 16 अप्रैल तक गुजरात और महाराष्ट्र के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगी, जिसके दौरान वे कई शैक्षणिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी। इस दौरे में वे कई दीक्षांत समारोहों की अध्यक्षता करेंगी और सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय विकास को उजागर करने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगी।

13 अप्रैल को राष्ट्रपति एम्स राजकोट के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। इसके अगले दिन, वे बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में गांधीनगर के लोक भवन में आयोजित ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ में शिरकत करेंगी। उसी दिन वे राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में भी शामिल होंगी।

अपने व्यस्त कार्यक्रमों को जारी रखते हुए, राष्ट्रपति मुर्मू 15 अप्रैल को नागपुर में एम्स नागपुर के दूसरे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेंगी। वे राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) अधिकारी प्रशिक्षुओं के 78वें बैच के विदाई समारोह में भी शामिल होंगी।अपनी यात्रा के अंतिम दिन, 16 अप्रैल को, राष्ट्रपति वर्धा में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी।

NATIONAL : विपक्ष महिला आरक्षण के साथ, परिसीमन के खिलाफ:बिल पर कल चर्चा होगी, खड़गे ने कहा- लोकसभा की सीटें बढ़ाने के खिलाफ वोट करेंगे

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लोकसभा में सीटें बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विपक्ष विरोध करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यह बात कही। मीटिंग खड़गे के घर पर हुई, जिसमें राहुल गांधी और टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और AAP नेता भी शामिल हुए।खड़गे ने कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। इसलिए हमने परिसीमन बिल के विरोध का निर्णय लिया है। पूरा विपक्ष बिल के खिलाफ वोट करेगा।

सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में तीन बिल लाने वाली है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 शामिल हैं। सरकार का प्रस्ताव लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करना है।इनमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल दो विधेयक पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह एक विधेयक पेश करेंगे। इन पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है। इसके बाद राज्यसभा में चर्चा होगी। पीएम मोदी कल ही चर्चा के दौरान अपनी बात रख सकते हैं।

महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिया जाए। इसे मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर 2029 के चुनाव से ही लागू किया जाए।
सारी विपक्षी पार्टियां परिसीमन के प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ हैं। लोकसभा और राज्यसभा की बहस में भाग लेंगे और इसका विरोध करेंगे।
बिल पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं

राहुल गांधी ने कहा- सरकार अब जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। यह संशोधन, परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों के मनमाने फेरबदल के जरिए सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश है। हम OBC, दलित और आदिवासियों के हिस्से की चोरी नहीं होने देंगे। साथ ही, हम दक्षिणी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे।

TVK अध्यक्ष विजय ने कहा, “परिसीमन केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया एक पक्षपातपूर्ण कदम है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026′ पारित हो जाता है तो दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में आनुपातिक अंतर काफी बढ़ जाएगा।

IUML सांसद ई टी मोहम्मद बशीर ने कहा- हम परिसीमन बिल का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह असल में एक जाल है। वे 2023 में भी आरक्षण दे सकते थे, और हम अब भी उसका समर्थन करते हैं। लेकिन साथ ही, यह संवैधानिक संशोधन एक खतरनाक चीज है। हम विरोध करेंगे।

RSP सांसद एन के. प्रेमचंद्रन ने कहा- परिसीमन बिल और साथ ही संविधान संशोधन बिल के जरिए, वे अनुच्छेद 81 के खंड 3 में संशोधन कर रहे हैं। सरकार पूरे देश को नियंत्रित करना चाहती है। उत्तर भारत में सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी, लेकिन दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए, सीटों में कमी आएगी। यह अलोकतांत्रिक है।

सवाल-जवाब में जानिए, इस बदलाव को

  1. सीटें कितने बढ़ेंगी: लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 हो जाएंगी। राज्यों में 815 व केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 35 सीटें। इस बदलाव का असर राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाओं पर भी होगा। यहां भी सीटें की संख्या बदल जाएंगी।
  2. महिला आरक्षण कितने साल के लिए होगा : कुल सीटों में से 33% यानी 273 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। इसके बाद इसे बढ़ाने का फैसला संसद करेगी।

आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी।

  1. आरक्षण कैसे होगा: परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा।
  2. संसद में महिलाओं की अभी क्या स्थिति है:
  3. परिसीमन में क्या होगा: अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी।

सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है।

संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते।

  1. क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी: संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत।

लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई‌) को इसके पक्ष में वोट देना होगा।

वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं।

यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ सकती है

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।

परिसीमन बिल में PoK को लेकर भी प्रावधान

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के नए परिसीमन बिल में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस बिल में PoK के लिए भी संसदीय सीटों का प्रावधान किया गया है, हालांकि ये सीटें फिलहाल खाली रहेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि PoK को शामिल करना यह दर्शाता है कि भारत उसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और भविष्य के राजनीतिक ढांचे में भी उसकी भूमिका तय की जा रही है।

NATIONAL : व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य: एजेडईसी-प्लस मीटिंग में एस जयशंकर

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भारत ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधानों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षित और निर्बाध समुद्री परिवहन की आवश्यकता पर जोर दिया है। जापान द्वारा आयोजित ‘एजेडईसी’ बैठक में भाग लेते हुए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता के लिए समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। भारत ने कहा कि व्यापारिक जहाजों (मर्चेंट शिपिंग) पर किसी भी प्रकार के हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं, और इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

बैठक के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा, “एनर्जी मार्केट में सप्लाई चेन में रुकावटों पर चर्चा करने के लिए जापान की ओर से बुलाई गई ‘एजेडीईसी’ मीटिंग में हिस्सा लिया। सुरक्षित और बिना रुकावट वाले समुद्री परिवहन को लेकर भारत की प्रतिबद्धता जताई।”

जयशंकर ने रेखांकित किया कि “इन समुद्री मार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर किसी भी तरह का हमला हम स्वीकार नहीं करते हैं। ग्लोबल ग्रोथ की मांग है कि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। बड़े उपभोक्ता के तौर पर भारत सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने के लिए अपने साझेदारों संग काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

बैठक के दौरान भारत ने सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयासों के जरिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। जापान सरकार की तरफ से आयोजित ‘एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी (एजेडईसी) प्लस ऑनलाइन समिट ऑन एनर्जी रेजिलिएंस’ को मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, थाईलैंड के पीएम अनुतिन चार्नविराकुल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान समेत कई बड़े नेताओं ने भी वर्चुअली संबोधित किया।

मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, तिमोर-लेस्ते, सिंगापुर, बांग्लादेश और थाईलैंड के नेताओं के अलावा, समिट में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, ब्रुनेई, श्रीलंका और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) जैसे संगठनों के मंत्री भी शामिल हुए।

इब्राहिम ने कहा, “मलेशिया एजेडईसी के जरिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि स्थिर, पर्याप्त और लचीली एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित हो सके। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) सहित एक ऊर्जा उत्पादक के तौर पर, मलेशिया क्षेत्रीय एनर्जी सुरक्षा को सपोर्ट करने में एक रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा, साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी सहित एनर्जी सोर्स में विविधता लाएगा और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हमारे एनर्जी सिस्टम को मजबूत करेगा।”

वहीं अपने संदेश में, फिलीपींस के राष्ट्रपति आर. मार्कोस जूनियर ने ग्लोबल ऑयल सप्लाई में आने वाले झटकों से देश के कमजोर होने की बात रखी। उन्होंने फरवरी में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने को एक बड़ी रुकावट बताया, जिससे फ्यूल की कीमतें बढ़ीं।फिलीपीन न्यूज़ एजेंसी ने मीटिंग के दौरान फिलीपींस के लीडर के हवाले से कहा, “एक आइलैंड वाले देश के तौर पर… हम ज्यादातर आयातित पेट्रोलियम पर निर्भर हैं।” उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटें देश में “बहुत ज्यादा महसूस” हो रही हैं। (इनपुट-आईएएनएस)

WORLD : ईरान की अमेरिका को सीधी धमकी, हम समुद्री रास्ते बंद करेंगे

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ईरान ने दुनिया के 3 अहम समुद्री रास्ते बंद करने की धमकी दी है। उसने कहा है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज और उसके बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी, तो वह रेड सी, ओमान सागर और पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) में समुद्री व्यापार पूरी तरह रोक देगा।

ईरानी सेना के केंद्रीय कमांड सेंटर चीफ अली अब्दोल्लाही ने कहा कि अमेरिकी पाबंदियां और ईरानी जहाजों व तेल टैंकरों की सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिशें उकसावे की कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करेगा। अमेरिका ने सोमवार से ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रखी है। यह कदम पाकिस्तान में हुई करीब 21 घंटे की अमेरिका-ईरान वार्ता के नाकाम रहने के बाद उठाया गया।

इस बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर एक हाईलेवल डेलिगेशन के साथ तेहरान पहुंचे हैं। यह डेलिगेशन अमेरिका का संदेश लेकर आया है और अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर चर्चा करेगा। रिपोट्र्स के मुताबिक, वार्ता के दूसरे दौर का समय अभी तय नहीं हुआ है।

अमेरिकी प्रतिबंध झेल रहा चीनी टैंकर रिच स्टैरी बुधवार को फिर से होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी नहीं तोड़ पाया। यह टैंकर संयुक्त अरब अमीरात के हमरियाह पोर्ट से चला था। वहां से इसमें करीब 2.5 लाख बैरल मेथेनॉल लोड किया था।यह टैंकर खाड़ी से निकलने की कोशिश कर रहा था। लेकिन होर्मुज के आगे अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से इसे वापस लौटना पड़ा। इससे पहले भी इस टैंकर ने मंगलवार को होर्मुज पार करने की कोशिश की थी।

रॉयटर्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को अमेरिकी युद्धपोत ने दो तेल टैंकरों को रोक दिया, जो ओमान की खाड़ी में स्थित ईरान के चाबहार बंदरगाह से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। रिच स्टैरी और इसकी मालिक कंपनी शंघाई जुआनरन शिपिंग पर अमेरिका ने 2023 से प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि वे ईरान के साथ व्यापार कर रहे थे।

इजराइल लेबनान में एक हफ्ते का अस्थायी सीजफायर लागू कर सकता है। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजराइल की सिक्योरिटी कैबिनेट इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और आने वाले कुछ दिनों में इस पर फैसला लिया जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इजराइल पर दबाव बना रहा है, ताकि लेबनान में तनाव कम किया जा सके और क्षेत्रीय स्तर पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। प्रस्ताव के तहत एक हफ्ते का युद्धविराम लागू किया जाएगा, जिसके बाद हालात के अनुसार आगे की कार्रवाई तय होगी। शुरुआत में इजराइल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, लेकिन अब इसके लागू किया जा सकता है।

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