NATIONAL : दिल्ली साकेत में 5 मंजिला इमारत ढही, 4 की मौत और कई घायल

0
33

नई दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुआ हादसा राजधानी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया और वहां मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दस लोग घायल हैं जिन्हें तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी में जुटे हैं।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो लोग पास में मौजूद थे, उन्होंने सबसे पहले शोर सुना और फिर धूल का बड़ा गुबार उठता देखा। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार जिस जगह इमारत गिरी वहां एक मेडिकल संस्थान से जुड़ी कैंटीन भी संचालित हो रही थी, जिससे हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। देर रात तक कई बार रुक-रुक कर काम किया गया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब तक की जानकारी के मुताबिक लगभग 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से कुछ को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के इलाज में जुटी है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोग जो इमारत के पास मौजूद थे, उन्होंने बताया कि पहले हल्की आवाज आई और फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग गिर गई। आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया, जिससे कुछ देर के लिए दृश्यता भी बेहद कम हो गई।

पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। आसपास के भवनों को भी एहतियातन खाली कराया गया है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल इमारत गिरने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में निर्माण संबंधी कमजोरी या संरचनात्मक खामी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत अचानक कैसे गिर गई।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मरम्मत और निरीक्षण किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को धीमी लेकिन बेहद सावधानीपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रातभर मशीनों की आवाज और राहत दलों की गतिविधियां घटनास्थल पर जारी रहीं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास जमा हैं, हालांकि पुलिस उन्हें सुरक्षित दूरी पर रखने की कोशिश कर रही है। माहौल में चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। कई लोग अपने परिचितों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

यह हादसा न सिर्फ जान-माल का नुकसान लेकर आया है, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजरें राहत कार्य और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।

नई दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुआ हादसा राजधानी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया और वहां मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दस लोग घायल हैं जिन्हें तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी में जुटे हैं।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो लोग पास में मौजूद थे, उन्होंने सबसे पहले शोर सुना और फिर धूल का बड़ा गुबार उठता देखा। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार जिस जगह इमारत गिरी वहां एक मेडिकल संस्थान से जुड़ी कैंटीन भी संचालित हो रही थी, जिससे हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। देर रात तक कई बार रुक-रुक कर काम किया गया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब तक की जानकारी के मुताबिक लगभग 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से कुछ को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के इलाज में जुटी है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोग जो इमारत के पास मौजूद थे, उन्होंने बताया कि पहले हल्की आवाज आई और फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग गिर गई। आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया, जिससे कुछ देर के लिए दृश्यता भी बेहद कम हो गई।

पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। आसपास के भवनों को भी एहतियातन खाली कराया गया है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल इमारत गिरने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में निर्माण संबंधी कमजोरी या संरचनात्मक खामी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत अचानक कैसे गिर गई।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मरम्मत और निरीक्षण किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को धीमी लेकिन बेहद सावधानीपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रातभर मशीनों की आवाज और राहत दलों की गतिविधियां घटनास्थल पर जारी रहीं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास जमा हैं, हालांकि पुलिस उन्हें सुरक्षित दूरी पर रखने की कोशिश कर रही है। माहौल में चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। कई लोग अपने परिचितों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

यह हादसा न सिर्फ जान-माल का नुकसान लेकर आया है, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजरें राहत कार्य और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here