NATIONAL : बारिश की कमी और अल नीनो के खतरे से चावल उत्पादन में 1 करोड़ टन कमी की संभावना : मिडिया रिपोर्ट्स

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भारत में इस साल चावल उत्पादन एक दशक में पहली बार घटने की संभावना है। कम बारिश और फसल के पकने की अवधि के दौरान नमी की कमी से पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। बिजनेस टुडे में प्रकाशित खबर के अनुसार, उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि उत्पादन में करीब 1 करोड़ मीट्रिक टन की गिरावट आ सकती है। वर्ष 2026-27 में चावल का उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन से घटकर करीब 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यह लगभग 6.5 प्रतिशत की गिरावट होगी और 2009-10 के बाद सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट हो सकती है। वर्ष 2009-10 में अल नीनो के कारण पड़े सूखे से चावल उत्पादन प्रभावित हुआ था।

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्ण राव ने रॉयटर्स को बताया कि, बारिश में कमी के कारण पैदावार घटने की संभावना है। उनके अनुमान के अनुसार, चावल उत्पादन में करीब 1 करोड़ मीट्रिक टन की कमी आ सकती है।भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है। इस समय देश में बारिश की भारी कमी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से शुरू हुए चार महीने के मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। देश के कुछ प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी 42 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

धान की बुवाई का रकबा भी घटा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11 सितंबर तक गर्मी के मौसम में बोए गए धान का क्षेत्रफल 4.268 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 4 प्रतिशत कम है। गर्मी के मौसम में बोई जाने वाली धान की फसल भारत के कुल चावल उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है। शेष उत्पादन सर्दियों में बोई जाने वाली फसल से आता है।

जलाशयों में कम पानी से रबी चावल पर भी असर की आशंका

ओलम एग्री इंडिया के डिप्टी कंट्री हेड नितिन गुप्ता ने रॉयटर्स को बताया कि, जलाशयों में सामान्य से कम पानी होने के कारण सर्दियों में बोई जाने वाली चावल की फसल का उत्पादन अनुमान भी कमजोर हो सकता है। उत्पादन में संभावित गिरावट का असर बाजार पर दिखाई देने लगा है। कम उत्पादन की आशंका के बीच घरेलू चावल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। इसके चलते निर्यात कीमतें एक साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। हालांकि, भारत के पास चावल का बड़ा सरकारी भंडार मौजूद है, जो निर्यात पर उत्पादन में कमी के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है।

रिकॉर्ड भंडार से निर्यात को मिल सकता है सहारा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक राज्यों के पास बिना मिलिंग किए धान सहित चावल का कुल भंडार रिकॉर्ड 5.96 करोड़ टन था। इसके मुकाबले सरकार ने 1 अक्टूबर तक करीब 1.03 करोड़ टन का लक्ष्य रखा था। नई दिल्ली स्थित एक वैश्विक ट्रेडिंग कंपनी के एक डीलर ने रॉयटर्स को बताया कि बड़े भंडार के कारण भारत बिना निर्यात प्रतिबंध लगाए भी चावल का निर्यात जारी रखने की स्थिति में रह सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, उत्पादन में अनुमानित गिरावट के बावजूद पर्याप्त भंडार भारत को निर्यात को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, घरेलू बाजार में उपलब्धता कम होने और स्थानीय कीमतों में बढ़ोतरी से भारतीय चावल का निर्यात महंगा हो सकता है। ऐसे समय में थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों में भी चावल की कीमतें बढ़ रही हैं।

अल नीनो से सूखे मानसून का खतरा

मजबूत हो रहा अल नीनो भारत को 17 वर्षों के सबसे कमजोर मानसून की ओर ले जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन पर असर पड़ने और व्यापक खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून से सितंबर के मानसून सीजन में संचयी बारिश दीर्घकालिक औसत से 15 प्रतिशत कम चल रही है। यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो भारत 2009 के बाद अपने सबसे कमजोर मानसून का सामना कर सकता है। वर्ष 2009 में बारिश सामान्य से 18 प्रतिशत कम रही थी। यह बारिश की कमी मौसम विभाग के मई में जारी अनुमान से भी काफी अधिक है। उस समय पूरे मानसून सीजन में सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश होने का अनुमान लगाया गया था।

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