सेबी की मंजूरी के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की राह का बड़ा नियामकीय पड़ाव पार हो गया है। कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अब शेयर का भाव और आईपीओ से जुटाई जाने वाली कुल रकम तय होना बाकी है।
जियो प्लेटफॉर्म्स को अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और कनेक्टिविटी कंपनी ने शेयर बाजार में उतरने की दिशा में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है।
27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करने की तैयारी में कंपनी
कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की तैयारी में है। हर शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। खास बात यह है कि आईपीओ में ऑफर फॉर सेल का कोई हिस्सा नहीं होगा। यानी मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।
सेबी ने जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट की प्रोसेसिंग स्थिति में बताया कि 28 अगस्त, 2026 वाले सप्ताह में कंपनी को टिप्पणियां जारी की गईं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आधिकारिक ऑफर डॉक्यूमेंट पोर्टल पर भी जियो के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी की स्थिति पहले ‘अप्रूव्ड’ दिखाई गई थी।

19 जून को डीआरएचपी दाखिल
कंपनी ने 19 जून को डीआरएचपी दाखिल किया था। दस्तावेज के मुताबिक, शेयरों का भाव बुक बिल्डिंग प्रक्रिया से तय होगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि आईपीओ के जरिए कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी। जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 19 जून को आईपीओ की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की थी। उस दिन जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने डीआरएचपी को मंजूरी दी थी। इसके बाद रिलायंस ने शेयर बाजारों को बताया था कि प्रस्तावित आईपीओ जरूरी नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा। इसी दिन रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, “जियो की प्रस्तावित लिस्टिंग दुनिया को दिखाएगी कि भारत वैश्विक स्तर, वैश्विक क्षमता और वैश्विक मूल्य वाली टेक्नोलॉजी कंपनियां बना सकता है।”
कई साल पुरानी है जियो की योजना
जियो को शेयर बाजार में लाने की योजना कई साल पुरानी है। 2019 में रिलायंस की वार्षिक आम बैठक में मुकेश अंबानी ने जियो और रिलायंस रिटेल, दोनों को अगले पांच वर्षों में सूचीबद्ध करने की दिशा में बढ़ने की बात कही थी। इसके बाद नवंबर 2019 में जियो प्लेटफॉर्म्स को रिलायंस के डिजिटल और कनेक्टिविटी कारोबार की होल्डिंग कंपनी के रूप में शामिल किया गया।

