भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 1,577 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं. इस डील के तहत इंडियन आर्मी के लिए 840 स्वदेशी वन-वे अटैक ड्रोन खरीदे जाएंगे. ये ड्रोन दुश्मन के ठिकानों को दूर से निशाना बनाने में सेना की मदद करेंगे.
टाटा और निबे को मिला 1,577 करोड़ रुपये का ऑर्डर
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय सेना के लिए लोइटर मुनिशन सिस्टम, मुनिशन और दूसरी जरूरी एक्सेसरीज खरीदी जाएंगी. इनकी कुल लागत करीब 1,577 करोड़ रुपये है. यह डील रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में नई दिल्ली में किया गया. इस डील के जरिए सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है.
840 वन-वे अटैक ड्रोन की होगी खरीद
इस डील के तहत भारतीय सेना को कुल 840 लॉन्ग-रेंज वन-वे अटैक ड्रोन मिलेंगे. इन ड्रोन की खासियत यह है कि ये 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक जाकर टारगेट पर हमला कर सकते हैं.इनका इस्तेमाल दुश्मन के ऐसे ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है, जो सीमा के काफी अंदर मौजूद हों. सेना इन ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर दुश्मन की आर्टिलरी पोजीशन पर हमला करने के लिए कर सकती है.

12 महीने में सेना को मिलेंगे ड्रोन
यह भारतीय सेना के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत वन-वे अटैक ड्रोन की पहली बड़ी खरीद है. इस प्रक्रिया का मकसद हथियारों की खरीद में ज्यादा समय न लगाना है.डील के मुताबिक अगले 12 महीनों के भीतर सेना को ये ड्रोन मिलने हैं. फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया में करार होने के बाद कंपनियों को करीब छह महीने के भीतर आपूर्ति शुरू करने की क्षमता रखनी होती है.
टाटा को मिला बड़ा हिस्सा, निबे भी करेगी सप्लाई
इस 1,577 करोड़ रुपये की डील को टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे के बीच बांटा गया है. इसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स करीब 64 फीसदी ऑर्डर की सप्लाई करेगी, जबकि बाकी हिस्सा निबे डिफेंस को मिलेगा.
ट्रायल और तकनीकी जांच के बाद जब व्यावसायिक बोली खोली गई, तो टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही. इसके बाद निबे डिफेंस का नंबर आया.
जामिंग और स्पूफिंग में भी काम करेंगे ड्रोन
इन ड्रोन को ऐसे माहौल में काम करने के लिए तैयार किया गया है, जहां दुश्मन जामिंग और स्पूफिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकता है. यानी दुश्मन अगर ड्रोन के संचार या दिशा को प्रभावित करने की कोशिश करे, तब भी ये सिस्टम काम कर सकें.इनकी टेस्टिंग भी काफी मुश्किल परिस्थितियों में की गई. परीक्षण के दौरान टेकऑफ के समय से ही जामिंग वाले माहौल में ड्रोन की क्षमता को परखा गया.
रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया संघर्ष तक दिखा असर
वन-वे अटैक ड्रोन यानी लोइटरिंग मुनिशन आज के जमाने की जंग का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट की लड़ाई में दुनिया देख चुकी है कि ये ड्रोन कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.बदलते वक्त के साथ भारत भी अपनी सेना को इन आधुनिक हथियारों से मजबूत कर रहा है.ये ड्रोन काफी कम खर्च में तैयार हो जाते हैं.इन्हें ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए जामिंग और स्पूफिंग से बचने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है.
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह खरीद ‘बाय इंडियन’ कैटेगरी के तहत की जा रही है. इससे देश में रक्षा उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम मान रही है. यानी सेना की जरूरत के लिए ऐसे आधुनिक हथियार देश में ही तैयार करने पर जोर बढ़ रहा है.
1,500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाले ड्रोन पर भी काम
सेना के लिए वन-वे अटैक ड्रोन की खरीद का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता. ऐसे कई और बड़े ऑर्डर भी प्रक्रिया में हैं. इनमें ऐसे सिस्टम शामिल हैं जो 1,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक टारगेट पर हमला करने में सक्षम होंगे. इस तरह 1,577 करोड़ रुपये की यह डील भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ देश की स्वदेशी रक्षा मैन्युफैक्चरिंग को भी बड़ा बढ़ावा देगी.

