शराब बनाने वाली कंपनियों ने राज्य सरकारों से शराब, बीयर और वाइन की कीमतें बढ़ाने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे कांच की बोतलों, एल्युमीनियम कैन और पैकेजिंग मटेरियल की लागत काफी बढ़ गई हैं।
शराब उद्योग की प्रमुख संस्थाओं कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) और ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने राज्यों को पत्र लिखकर कीमतों में बदलाव की अनुमति मांगी है। BAI ने इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी की भरपाई के लिए 15%-20% तक दाम बढ़ाने का सुझाव दिया है।
BAI में यूनाइटेड ब्रूअर्स, एबी इनबेव और कारल्सबर्ग जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जिनकी देश के बीयर मार्केट में करीब 85% हिस्सेदारी है। कंपनियों का कहना है कि मुनाफा लगातार कम हो रहा है और लागत इतनी बढ़ गई है कि अब पुराने दामों पर बिजनेस करना मुश्किल हो रहा है।

शराब की बोतलों की सप्लाई चेन पर सबसे बुरा असर फिरोजाबाद के ग्लास मैन्युफैक्चरिंग हब में पड़ा है। CIABC के मुताबिक, गैस की कमी के कारण यहां फैक्ट्रियों को जरूरत की तुलना में केवल 60% गैस मिल पा रही है। इससे वेंडर्स को मजबूरन महंगी स्पॉट LNG या LPG खरीदनी पड़ रही है, जिससे बोतलों के दाम बढ़ गए हैं। कई यूनिट्स तो बंद होने की कगार पर हैं।
बीयर इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती एल्युमीनियम की सप्लाई है। मिडिल ईस्ट से एल्युमीनियम की आवक बुरी तरह प्रभावित हुई है। सप्लायर्स ने चेतावनी दी है कि अगर तनाव लंबा चला तो बीयर कैन का उत्पादन पूरी तरह ठप हो सकता है और कई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स बंद करने पड़ सकते हैं।
लागत के दबाव को कम करने के लिए कंपनियों ने राज्य सरकारों से ‘अंतरिम राहत’ भी मांगी है। BAI ने सुझाव दिया है कि मैन्युफैक्चरिंग लेवी में करीब ₹3 से ₹5 प्रति लीटर की कमी की जाए। इससे ग्राहकों पर पड़ने वाले बढ़ी कीमतों के बोझ को थोड़ा कम किया जा सकता है। CIABC ने भी वाइन और अन्य शराब (IMFL) के ‘एक्स-डिस्टिलरी प्राइस’ में संशोधन की मांग की है।
केंद्रीय कैबिनेट ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दे दी है। इसके जरिए छोटे उद्योग (MSMEs) ₹100 करोड़ तक और एयरलाइन कंपनी 1500 करोड़ रुपए तक का लोन ले सकेंगी।
यह लोन बिना किसी गारंटी के मिलेगा। इसके लिए सरकार नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) इस स्कीम के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों को 100% तक की क्रेडिट गारंटी कवर देगी


