दक्षिण भारतीय दिग्गज गायिका जमुना रानी का निधन हो गया है। उम्र संबंधी समस्याओं के चलते बीते दिन गुरुवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।अपनी सुरीली आवाज से संगीत जगत में खास पहचान बनाने वाली जमुना रानी उम्र संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। उन्होंने कल गुरुवार शाम बेंगलुरु में अपने निवास पर आखिरी सांस ली। गायिका के निधन की खबर से साउथ इंडियन फिल्म जगत में शोक की लहर है। जमुना रानी का जन्म 1938 में आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने सात साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।
अलग और अनोखी आवाज से मिली पहचान
फिल्म ‘त्यागय्या’ के जरिए जमुना रानी को बतौर प्लेबैक सिंगर पहचान मिली। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम समेत कई भाषाओं में 6000 से अधिक गानों को अपने सुरीले कंठ से सजाया। उनकी आवाज दूसरे गायकों से अलग और अनोखी ती। उन दिनों क्लब डांस सॉन्ग्स, जिप्सी सॉन्ग्स और लोकगीतों के लिए भी उनकी सुरीली आवाज बहुत शानदार थी। यही वजह रही कि उन्होंने ऐसे गाने खूब गाए। साल 1952 में रिलीज हुई फिल्म ‘कल्याणी’ से उन्होंने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री की।

जमुना रानी ने तेलुगु सिनेमा में अपनी अनोखी आवाज से ‘सरदा सरदा सिगरेट्टू’, ‘एंथा तक्करी वडू नाराजु’, ‘मुक्कुमिधु नृखी… नी मुखानिके आडा’, ‘कोटू बूटु वीडा बावा वचदय्या’, ‘पदपदवे वैयारी गलीपतमा’ जैसे शानदार गाने गाकर दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। जमुना रानी की गायिकी सिर्फ भारतीय भाषाओं तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि श्रीलंकाई सिंहली फिल्मों में भी उन्होंने गाने गाए और छा गईं। इससे उन्होंने इंटरनेशनल स्तर पर पहचान मिली।

