कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि अगर बंगलूरू विकास प्राधिकरण (बीडीए), पूर्व शहर सुधार न्यास बोर्ड (सीआईटीबी), नगर निकायों या सहकारी समितियों की ओर से दिए गए भूखंड पर पांच साल के भीतर घर नहीं बनाया गया, तो सरकार उसे वापस ले लेगी। हालांकि, भूखंड खरीदने के लिए जमा की गई रकम ब्याज सहित लौटा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि खाली पड़े भूखंड कूड़ा फेंकने की जगह न बन जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार से जमीन पाने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे उस पर घर बनाएं और अपनी संपत्ति की देखभाल करें।
हेब्बल जंक्शन के पास ‘फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट’ अभियान की शुरुआत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, चाहे वह बीडीए का भूखंड हो या नगर निगम का, मालिक की जिम्मेदारी है कि वह उसे साफ रखे। इसलिए भूखंड मिलने के पांच साल के भीतर घर बनना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो या तो दोगुना कर (टैक्स) लगाया जाएगा या फिर भूखंड वापस ले लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब भूखंड पर घर नहीं बनता, तो वह कूड़ा फेंकने की जगह बन जाता है। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार सच में उन भूखंडों को वापस ले लेगी, जहां घर नहीं बने हैं, तो शिवकुमार ने कहा, इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हमें ऐसा करना पड़ेगा। हम लोगों को घर बनाने के लिए ही भूखंड देते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने भूखंड मिलने के 20, 30 या 40 साल बाद भी घर नहीं बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा, हम उनकी जमा की गई रकम ब्याज सहित वापस करेंगे और भूखंड अपने पास ले लेंगे। जिन लोगों को सीआईटीबी, बीडीए या सहकारी समितियों से भूखंड मिले हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे घर बनाएं। वे बिना चारदीवारी बनाए भूखंड को खाली कैसे छोड़ सकते हैं, जिससे वह कूड़ा फेंकने की जगह बन जाए? अगर वे खुद वहां कूड़ा नहीं भी फेंकते हैं, तब भी अपनी संपत्ति की सुरक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार बंगलूरू को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही सरकार चाहती है कि संपत्ति मालिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अपने खाली प्लॉट को कूड़ा फेंकने की जगह न बनने दें।


