NATIONAL : तिरुवनंतपुरम में यूथ कांग्रेस-SFI कार्यकर्ताओं में पत्थरबाजी, एकदूसरे पर मशालें फेंकीं, पुलिस का लाठीचार्ज, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर निकला था मार्च

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केरल की राजधानी स्थित ‘यूनिवर्सिटी मेन्स हॉस्टल’ के पास युवा कांग्रेस और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) कार्यकर्ताओं के बीच बुधवार शाम भारी झड़प हो गई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया और जलती हुई मशालें फेंकीं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हॉस्टल के भीतर प्रवेश करना पड़ा।

पलायम स्थित विश्वविद्यालय के पुरुष छात्रावास के निकट युवा कांग्रेस और एसएफआई कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव और जलती मशालें फेंकी, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर स्थिति को नियंत्रित किया।

यह हिंसा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर महाधिवक्ता कार्यालय की ओर युवा कांग्रेस के मार्च के दौरान हुई।

विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने बुधवार को आरोप लगाया कि छात्रावास में हुई हिंसा युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का ‘एकतरफा हमला’ था और दावा किया कि छात्रावास के अंदर एसएफआई के सदस्यों और छात्रों को निशाना बनाया गया।

पुलिस ने छात्रावास में प्रवेश किया

इसके बाद पुलिस विश्वविद्यालय के छात्रावास में दाखिल हुई और वहां मौजूद लोगों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।

आरोप थे कि हस्तक्षेप के दौरान कई छात्र घायल हो गए। उपलब्ध जानकारी में चोटों की गंभीरता और प्रभावित लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं हो पाई।

युवा कांग्रेस विरोध प्रदर्शन क्यों कर रही थी?

युवा कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सचिवालय मार्च का आयोजन किया था।

यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग के प्रति राजनीतिक विरोध और चुनाव संचालन संबंधी आरोपों की पृष्ठभूमि में हो रहा था। चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए विशिष्ट आरोपों और प्रतिक्रियाओं की अलग से पुष्टि करनी होगी।

यह घटना इस बात को उजागर करती है कि प्रतिद्वंद्वी छात्र या युवा समूह जब एक-दूसरे से भिड़ते हैं तो राजनीतिक प्रदर्शन कितनी जल्दी हिंसक रूप ले सकते हैं।

वर्णित घटनाक्रम में हॉस्टल से कथित तौर पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं, प्रदर्शनकारियों ने जलती हुई मशालों से जवाबी कार्रवाई की, और झड़पें हुईं और पुलिस ने हस्तक्षेप किया।

जब तक पुलिस की जांच या अन्य स्वतंत्र साक्ष्य हिंसा के लिए जिम्मेदारी स्थापित नहीं कर देते, तब तक परस्पर विरोधी आरोपों को स्थापित तथ्यों से अलग माना जाना चाहिए।

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