NATIONAL : बंगाल में नियुक्तियों पर बवाल: कांग्रेस ने लगाया आरोप, जयराम रमेश बोले- चुनाव आयोग और भाजपा में साठगांठ

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कांग्रेस का सीधा आरोप है कि चुनाव कराने वाले अफसरों को मलाईदार पद देना भाजपा की ‘एहसान चुकाओ’ नीति है। पार्टी ने इसे लोकतंत्र की पीठ में छुरा घोंपने वाली वैधानिक धांधली और संस्थानों की मिलीभगत करार दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी ने और क्या-क्या आरोप लगाए हैं? खबर में जानिए…

कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को कांग्रेस ने राज्य के नए मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सलाहकार की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का दावा है कि ये नियुक्तियां चुनाव आयोग और भाजपा के बीच ‘खुली मिलीभगत’ का सबूत हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पर्दे के पीछे बड़ा खेल खेला गया था।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इन नियुक्तियों को लेकर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। अग्रवाल चुनाव के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसी तरह सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। गुप्ता ने चुनाव के दौरान स्पेशल रोल ऑब्जर्वर के रूप में काम किया था। जयराम रमेश के अनुसार इन नियुक्तियों से साफ है कि निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए काम किया। उन्होंने दावा किया कि बंगाल चुनाव से पहले लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए। इसमें 27 लाख लोगों को वोट डालने से वंचित रखा गया। कांग्रेस के मुताबिक, यह सब एक रणनीति के तहत किया गया। इसका उद्देश्य भाजपा के लिए चुनावी राह आसान करना था।

पश्चिम बंगाल सरकार ने रविवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया था। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो आईएएस और सात डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों की तैनाती की गई है। शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही सेवानिवृत्त आईएएस सुब्रत गुप्ता को उनका सलाहकार नियुक्त कर दिया गया। वहीं शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि अब साठगांठ को छिपाने की कोशिश भी नहीं की जा रही है।

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