NATIONAL : मन की बात का 138वां एपिसोड आज: पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक को किया याद, जनगणना को बताया राष्ट्रीय जिम्मेदारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 138वें एपिसोड में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और 9/11 हमले के पीड़ितों को याद किया। अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मोढेरा सूर्य मंदिर के इतिहास का भी जिक्र किया। पीएम ने आज और किन-किन मुद्दों का जिक्र किया। आइए, विस्तार से जानते हैं…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मन की बात के 138वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने 10 वर्ष पहले 28-29 सितंबर, 2016 को हुई स्ट्राइक को याद किया। पीएम ने बताया कि उस दिन एलओसी के पार जाकर भारतीय सेना के वीर जवानों ने जिस तरह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की थी, वो देख दुनिया हैरान थी। सर्जिकल स्ट्राइक ने डंके की चोट पर पूरी दुनिया के सामने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया था। आतंकवादी हमलों के कारण भारत ने लंबे समय तक, जो दर्द झेला था, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ उस कष्ट के खिलाफ हमारी निर्णायक प्रतिक्रिया थी।

प्रधानमंत्री ने बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत ने अपना रुख बार-बार साफ किया कि अगर कोई आतंकवादी भारत पर आंख उठाकर भी देखेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है। उन्होंने 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और 26/11 मुंबई हमले को भी याद किया। साथ ही साथ ही 9/11 हमले के 25 साल पूरे होने की याद दिलाई। उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना भी जताई।

अशोक सिंहल पर क्या बोले प्रधानमंत्री?
पीएम मोदी ने कहा कि अशोक सिंहल 27 सितंबर 1926 को आज के ही दिन आगरा में उनका जन्म हुआ था। उनकी जन्म शताब्दी पर श्रद्धांजलि देता हूं। उन्होंने समाज में रहकर तपस्वियों जैसा जीवन जिया। उन्होंने राम-जन्मभूमि आंदोलन को जो दिशा दी, जो ऊर्जा दी, आज उसी का परिणाम है कि हम अयोध्या में भव्य मंदिर को साक्षात देख रहे हैं। बता दें, सिंहल विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष और अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेता थे।

गुजरात के सूर्य मंदिर को क्यों किया याद?
प्रधानमंत्री ने कहा कि 1026 ईस्वी में जब गजनी के हमले में सोमनाथ मंदिर का विध्वंस हुआ था, उसी साल गुजरात के मोढेरा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पर भी हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि उस दौरान मोढेरा मंदिर को भी तोड़ा गया था। इस लिहाज से मोढेरा मंदिर के विध्वंस की घटना को भी इस साल एक हजार वर्ष पूरे हो रहे हैं।

उन्होंने आगे बताया कि मोढेरा के सूर्य मंदिर का निर्माण 1025 ईस्वी में राजा भीमदेव ने कराया था। यानी मंदिर के निर्माण के महज एक साल बाद ही उस पर हमला हुआ और उसे नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि आज मोढेरा केवल अपने प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि गुजरात का यह गांव देश का पहला सोलर विलेज यानी सूर्य ग्राम भी बन चुका है।

मनप्पारई में कैसे जीवंत रखी जा रही है अतीत की विरासत?
प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत से भारत का जुड़ाव आज भी बहुत जीवंत है। इसके पीछे उन लोगों का समर्पण और मेहनत है, जो अपनी कोशिशों से इस जुड़ाव को और गहरा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के मनप्पारई में भी ऐसा ही एक अनूठा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मनप्पारई के इस प्रयास का जिक्र करते हुए बताया कि देश की पुरानी विरासत और परंपराओं को बचाने में स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रयास अतीत को आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने का काम करते हैं।

सोनाई रुपाई अभयारण्य में हाथी फिर क्यों लौटे?
पीएम ने असम के सोनाई रुपाई वन्यजीव अभयारण्य का जिक्र करते हुए बताया कि एक समय यहां हाथियों का बसेरा हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे जंगल की जमीन पर इंसानी दखल बढ़ने लगा, जिससे हाथियों ने इस इलाके से दूरी बना ली। करीब तीन साल पहले इस जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इसके बाद अब इसके नतीजे सामने आने लगे हैं और हाथी फिर इस इलाके में लौट आए हैं। प्रधानमंत्री ने इसे प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों से सामने आए सकारात्मक बदलाव के तौर पर बताया।

सिर्फ छह पिग्मी हॉग से शुरू हुआ अभियान, अब संख्या 190 से ज्यादा
इस दौरान उन्होंने असम में पिग्मी हॉग को बचाने के लिए चलाए गए संरक्षण कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक समय इस छोटे जीव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था। तब केवल छह पिग्मी हॉग के साथ संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया और बाद में उन्हें दोबारा जंगलों में बसाया गया। पिग्मी हॉग के रहने के लिए घास के मैदानों को भी बेहतर बनाया गया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन प्रयासों का असर अब दिखाई दे रहा है और संरक्षण कार्यक्रम की वजह से पिग्मी हॉग की संख्या 190 से ज्यादा हो चुकी है।

झारखाली की महिलाएं कैसे बना रही हैं मैंग्रोव का सुरक्षा-कवच?
पीएम ने पश्चिम बंगाल के झारखाली की महिलाओं के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पति बाघ के हमले में मारे गए। पति को खोने के बाद इन महिलाओं को सुंदरबन से ही आजीविका का सहारा मिला और अब वे मैंग्रोव के जंगल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं द्वारा लगाए गए मैंग्रोव के पेड़ अब गांवों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा-कवच का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही मैंग्रोव लगाने के काम से इन महिलाओं की कमाई भी हो रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और आजीविका दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

नशे के खिलाफ युवाओं ने लिया कौन सा संकल्प?
प्रधानमंत्री ने नशा मुक्त युवा अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि देश के लाखों युवाओं ने नशे और ड्रग्स के खिलाफ महत्वपूर्ण संकल्प लिया है। युवाओं ने खुद नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा की है और इस संदेश को दूसरे लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है। साथ ही आगे कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। जब युवा खुद नशे से दूर रहने का संकल्प लेते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं, तो इससे समाज में नशामुक्ति का संदेश मजबूत होता है।

राजिंदर सिंह सीनियर कैसे तलाश रहे हैं गांवों की हॉकी प्रतिभाएं?
प्रधानमंत्री ने राजिंदर सिंह सीनियर के प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि वह युवा हॉकी प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें प्रशिक्षण देने में मदद कर रहे हैं। उनकी कोशिशों से गांवों के बच्चों को हॉकी में आगे बढ़ने और इस खेल में बेहतर अवसर हासिल करने का मौका मिल रहा है। आगे उन्होंने बताया कि भारत को खेलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते रहना है तो गांवों और कस्बों तक पहुंचकर प्रतिभाओं की तलाश करना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण और अवसर देने से देश के लिए नए खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

प्रतापगढ़ का आंवला कैसे किसानों और महिलाओं की आय बढ़ा रहा है?
प्रधानमंत्री ने प्रतापगढ़ के मशहूर आंवले का जिक्र करते हुए बताया कि इससे किसानों और स्वयं-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रतापगढ़ में आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी करीब 100 इकाइयां काम कर रही हैं और इनमें स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने देवगढ़ कमासी गांव के सावित्री फुले स्वयं-सहायता समूह का उदाहरण दिया। इस समूह से जुड़ी महिलाएं आंवले से कैंडी, मुरब्बा और जूस बना रही हैं। एक जिला एक उत्पाद के तहत नए बाजारों तक पहुंच बढ़ने से इन महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी हुई है।

कुपोषण से लड़ने के लिए राज्यों ने क्या-क्या पहल की?
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुपोषण से मुकाबला करने के लिए इस साल कई सराहनीय पहल की गई हैं। छत्तीसगढ़ ने ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत लोगों को पौष्टिक मुनगा यानी मोरिंगा को अपने खान-पान में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। गुजरात ने भी मिलेट्स से बने व्यंजनों को लेकर ‘वांगी स्पर्धा’ शुरू की है। आगे उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र भी पोषण के क्षेत्र में प्रयास कर रहा है। वहीं, मिजोरम में लोगों ने मिलकर पोषण वाटिकाओं की देखभाल के लिए अभियान शुरू किया है। इन पहलों का उद्देश्य लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना है।

थाईलैंड में गणेश जी की 10 हजार से ज्यादा मूर्तियां क्यों हैं?
प्रधानमंत्री ने भगवान श्री गणेश के प्रति भारत से बाहर तक फैली आस्था का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थाईलैंड के गणेश हिमाल म्यूजियम में गणेश जी की 10 हजार से ज्यादा मूर्तियां हैं। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। आगे वो बोले कि भगवान गणेश के प्रति लोगों की आस्था भारत की सीमाओं से आगे भी दिखाई देती है। उन्होंने कामना की कि गणपति बप्पा का आशीर्वाद सभी लोगों पर हमेशा बना रहे।

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