राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शरद पवार की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने बड़ा हमला बोला है। सुप्रिया सुले बुधवार को मुंबई में केंद्र सरकार द्वारा जीडीपी के 7.8 ग्रोथ पर होने के बाद दावों के बीच कहा कि यह मुश्किल समय है। लोगों पर टैक्स लगाया जा रहा है। खाने की महंगाई आसमान छू रही है। इस देश में अब कोई खाना कैसे खरीदेगा? दूध, गेहूं, चावल, चीनी की कीमतें, आम आदमी, जो मेहनती है, इस देश में कैसे जिएगा। जीडीपी की ग्रोथ रेट का जिक्र करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि ये नंबर्स बहुत चिंताजनक लगते हैं क्योंकि एक्सपर्ट्स को ऐसा नहीं लगता।महंगाई के खिलाफ सुप्रिया सुले का हल्लाबोल
सुप्रिया सुले ने एनसीपी के कार्यकर्ताओं के साथ महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। तेल, दालें, दूध, चीनी, चावल जैसी जरूरी चीजों से लेकर रिक्शा और टैक्सी के किराए तक, सब कुछ महंगा हो गया है, जिससे आम नागरिक का बजट बिगड़ गया है। बीजेपी सुप्रिया सुले को याद दिलाया है कि जीडीपी तेजी से आगे बढ़ रही है। गौरतलब हो कि एक दिन पहले सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहाा था कि जब तक लोग आंदोलन न करें महायुति सरकार को सुनाई नहीं देता है।

‘अब कुछ भी सस्ता नहीं है’
सरकार की आलोचना करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि अब कुछ भी सस्ता नहीं है। जब आप दुकान पर जाते हैं, तो सामान की कीमतें देखकर चौंक जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने गणेशोत्सव, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के आने पर महंगाई में भारी बढ़ोतरी करके मज़दूर वर्ग की कमर तोड़ने का पाप किया है। सरकार ज़रूरी चीजों पर कोई सब्सिडी नहीं दे रही है, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण आम लोगों, मजदूर वर्ग, शोषित और समाज के वंचित तबकों के लिए जीना मुश्किल हो गया है। सुप्रिया सुले ने साफ किया कि उनका कहना है कि महंगाई कम होनी चाहिए।
जीडीपी ग्रोथ पर उठाए सवाल
सुप्रिया सुले ने देश की आर्थिक हालत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि GDP ग्रोथ को लेकर सरकार और एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है। उन्होंने बताया कि कई इकोनॉमिस्ट और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर भी कह चुके हैं कि उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ नहीं हो रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे घर जाकर अपनी मां-बहनों से पूछें कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई से आम आदमी के घरों की हालत कितनी खराब हो गई है।
सरकार पर सुप्रिया सुले ने बोला हमला
सुप्रिया सुले ने पूछा कि गरीबों को राहत देने वाला आनंद अनुष्ठान अब कहां गायब हो गया है। उन्होंने इस गंभीर बात का भी जिक्र किया कि चुनाव के समय शुरू की गई स्कीमों जैसे लड़की बहन योजना से चुनाव के बाद करीब 80 लाख से एक करोड़ महिलाओं के नाम बाहर कर दिए गए हैं। सुले ने कहा कि जिन बहनों ने सरकार को वोट दिया था, उन्हें अब महंगाई के रूप में बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि कर्ज माफी की खुशी के बाद भी मेहनतकश किसानों को इंसाफ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि काली मिट्टी से ईमानदार अन्नदाता को न्याय नहीं मिल रहा है, जबकि शहर में मेहनतकश लोगों को महंगाई झेलनी पड़ रही है, इससे वे कैसे गुजारा कर रहे है


