नई दिल्ली। खाड़ी संकट के कारण उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में आई तेजी के बावजूद किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
खरीफ सीजन से पहले केंद्र सरकार एक साथ 25 लाख टन यूरिया आयात करने जा रही है, जो देश के कुल वार्षिक आयात का लगभग एक चौथाई है।

आयात की जिम्मेदारी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को दी गई है। खास बात यह है कि यह यूरिया महज दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदा जा रहा है, मगर इसका बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा।
ग्लोबल मार्केट से महंगा यूरिया खरीद रही सरकार
खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित है। इससे अमोनिया और यूरिया जैसे उर्वरकों की उपलब्धता घटने के साथ उनकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
यही वजह है कि भारत को इस बार यूरिया 935 से 959 डॉलर प्रति टन की दर पर खरीदना पड़ रहा है, जबकि दो महीने पहले यही करीब पांच सौ डॉलर प्रति टन थी।
सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अनुदानित दर पर मिलने वाली खाद की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। यूरिया का 45 किलो का बैग 266.50 रुपये एवं डीएपी का 50 किलो का बैग 1350 रुपये में ही उपलब्ध रहेगा।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को राहत देने के लिए सरकार अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ उठाएगी। इसी क्रम में केंद्रीय कैबिनेट ने इसी महीने खरीफ सीजन के लिए 41,533.81 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी है, जो पिछले साल से चार हजार करोड़ अधिक है।
हालांकि इसका सीधा असर सरकारी कोष पर पड़ेगा। जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं और घरेलू कीमतें स्थिर रखी जाती हैं तो दोनों के बीच का अंतर सरकार को सब्सिडी के रूप में देना पड़ता है।
देश में अभी यूरिया का संकट नहीं है, लेकिन निरंतरता को बनाए रखने के लिए यह आयात जरूरी है। सरकार ने आयात प्रक्रिया को केंद्रीकृत रखते हुए इंडियन पोटाश लिमिटेड को प्रमुख एजेंसी बनाया है।
बड़े पैमाने पर एकमुश्त खरीद का फायदा यह भी मिला कि टेंडर में जरूरत से ज्यादा आपूर्ति के प्रस्ताव आए और प्रतिस्पर्धा के चलते सप्लायरों ने न्यूनतम दर पर सौदा करने को सहमति दी।
रूस-ओमान से खरीद रहे यूरिया
आपूर्ति में निरंतरता के लिए रूस, मिस्त्र, नाइजीरिया, ओमान, इंडोनेशिया एवं मलेशिया आदि से यूरिया खरीदा जाएगा। पारंपरिक समुद्री मार्गों में बाधा को देखते हुए केप ऑफ गुड होप जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, ताकि समय पर खेप पहुंच सके। इतनी बड़ी खरीद का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।
भारत सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश है और एक बार में इतनी बड़ी मात्रा खरीदने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे अन्य देशों के लिए उर्वरक हासिल करना महंगा और कठिन हो सकता है।
देश में अभी उर्वरकों का भंडार बेहतर है। पिछले वर्ष मार्च में 138.79 लाख टन का स्टॉक था। इस बार अभी 180.04 लाख टन है, जो 29.72 प्रतिशत अधिक है।


