NATIONAL : क्या कहते हैं नए एग्जिट पोल्स?: बंगाल में सत्ता से बाहर हो सकती हैं ममता, असम के 12वें पोल में भी भाजपा

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चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के रणक्षेत्र में मतदान की आहुति पड़ने के बाद अब एग्जिट पोल के आंकड़ों ने सियासी हलचल तेज कर दी है। पश्चिम बंगाल में 93% अभूतपूर्व मतदान ने दीदी के गढ़ में सेंधमारी और भाजपा के उभार के बीच ऐसी लकीर खींची है कि मुकाबला अब नाक की लड़ाई बन चुका है। जहां असम में हिमंत बिस्वा सरमा का विजय रथ बेरोकटोक दौड़ता दिख रहा है, वहीं केरल और तमिलनाडु के सर्वेक्षणों ने सत्ता की चूलें हिला दी हैं। कहीं वामपंथ का ढहने का अनुमान है तो कहीं फिल्मी पर्दे से राजनीति के मैदान में उतरे ‘विजय’ का जादू डीएमके के समीकरण बिगाड़ रहा है। इन तमाम अनुमानों के बीच अब सबकी निगाहें चार मई की तारीख पर जमी हैं, जब ईवीएम से निकलने वाला जनादेश यह तय करेगा कि जनता ने काम पर मुहर लगाई है या बदलाव का परचम बुलंद किया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुए हैं। कई सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल के अनुमान जारी कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या तृणमूल कांग्रेस इस बार भी सत्ता को बनाए रखने में कामयाब हो पाएगी या भाजपा पहली बार भद्रलोक कहे जाने वाले बंगाल में अपने दम पर राजनीतिक पैठ बनाने में सफल रहेगी। 2021 के चुनाव में अनुमानों के उलट नतीजे आए थे। ममता बनर्जी बीते 15 वर्ष से बंगाल में मुख्यमंत्री हैं। खेला होबे जैसे चुनावी नारे के साथ भाजपा को पटखनी देने वाली सीएम ममता और उनके प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य कैसा है?

पांच साल के बाद 2026 चुनाव में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों और दलों की क्या स्थिति रहेगी? ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक चिह्न जोड़ा फूल के मुकाबले भाजपा के चुनावी निशान कमल में कौन कितना दमदार है? इतिहास में हुई सर्वाधिक वोटिंग के बाद सर्वे एजेंसियों राज्य की जनता का मिजाज कैसा है? क्या बंगाल की जनता बदलाव का मूड बना चुकी है?


पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। सर्वे ने भारतीय जनता पार्टी को 48% के भारी-भरकम वोट शेयर के साथ सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरते हुए दिखाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए यह रुझान चिंताजनक है, क्योंकि पार्टी 38% मतों के साथ भाजपा से करीब 10 प्रतिशत पीछे नजर आ रही है। राज्य में हुए रिकॉर्डतोड़ 92.93% मतदान के बाद आए इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में परिवर्तन की सुनामी की चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि इतना बड़ा वोट गैप सीटों के समीकरण में भाजपा को बहुमत के आंकड़े 148 से कहीं आगे ले जा सकता है।

अगर सीटों की बात करें तो सर्वे में 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 192 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान जताया है। सर्वेक्षण के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि राज्य में हुए रिकॉर्डतोड़ 93% मतदान ने परिवर्तन की ऐसी लहर पैदा की, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस महज 100 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। यदि 4 मई के परिणाम इन अनुमानों के अनुरूप रहते हैं, तो यह न केवल बंगाल में टीएमसी के एक दशक से अधिक पुराने शासन का अंत होगा, बल्कि भारतीय राजनीति के इतिहास में भाजपा की सबसे बड़ी वैचारिक और चुनावी जीत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

असम विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है। सीट प्रोजेक्शन के मुताबिक, 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा+ को 102 सीटें मिलने का अनुमान है, जो दो-तिहाई बहुमत से कहीं अधिक है। हालांकि, इसमें 9 सीटें आगे पीछे हो सकती है। वहीं, कांग्रेस नीत गठबंधन महज 23 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। इसमें भी 9 सीटें आगे पीछे हो सकता है। यह आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि राज्य की जनता ने विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर एक बार फिर एनडीए पर भरोसा जताया है, जिससे विपक्ष का पूरी तरह सूपड़ा साफ होने की उम्मीद है।

पोल मंत्रा के एग्जिट पोल ने केरल की राजनीति में बड़े उलटफेर की भविष्यवाणी करते हुए सत्तारूढ़ एलडीएफ की विदाई और यूडीएफ की शानदार वापसी का अनुमान जताया है। सर्वे के अनुसार, 140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस नीत यूडीएफ 38.5% मतों के साथ 88 से 92 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर सकता है, जबकि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला एलडीएफ गठबंधन महज 42 से 46 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। वहीं, भाजपा नीत एनडीए को 20.2% वोट शेयर के साथ सीटों में मामूली बढ़त मिलने की संभावना है।

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों को बेहद रोमांचक मोड़ पर ला खड़ा किया है। विश्लेषण के अनुसार, 140 सदस्यीय सदन में कांग्रेस नीत यूडीएफ 69 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े के करीब है, जबकि सत्तारूढ़ एलडीएफ 64 सीटों के साथ उन्हें कड़ी टक्कर दे रहा है। इसमें 9 सीटें घटने बढ़ने का अनुमार लगाया गया है। सर्वे में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा भाजपा गठबंधन का है, जिसे सात सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जो त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सत्ता की चाबी अपने हाथ में रख सकती है। इसमें भी चार सीट घट बढ़ सकती है। मार्जिन ऑफ एरर को देखते हुए दोनों मुख्य गठबंधनों के बीच फासला बेहद कम है, जिससे चार मई को आने वाले वास्तविक परिणाम किसी भी पक्ष में झुक सकते हैं।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला डीएमके+ गठबंधन 125 सीटें जीतकर बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकता है। इसमें 11 सीटें बढ़ घट सकती हैं। वहीं, अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को 63 सीटों के साथ राज्य की दूसरी सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरते हुए दिखाया गया है। इसमें 11 सीटें घट बढ़ सकती हैं। एआईएडीएमके महज 45 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसकता नजर आ रहा है।

प्रमुख सर्वे एजेंसी एक्सिस माई इंडिया ने इस बार पश्चिम बंगाल का एग्जिट पोल जारी नहीं करने का निर्णय लिया है। एजेंसी ने डाटा की गुणवत्ता और सांख्यिकीय भरोसे में कमी को इसका मुख्य कारण बताया है। यह घोषणा चुनाव नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे करोड़ों दर्शकों के लिए काफी चौंकाने वाली है। एजेंसी ने बताया कि पिछले सात दिनों के दौरान राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर सघन फील्ड रिसर्च की थी। इस बड़े अभियान के लिए 80 प्रशिक्षित सर्वेक्षकों की एक विशेष टीम तैनात की गई थी। इन सर्वेक्षकों को 16 स्वतंत्र इकाइयों में बांटा गया था। टीम ने मतदाताओं से बात करने के लिए मानक एग्जिट पोल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया। इस दौरान 13,250 से अधिक लोगों का सैंपल लिया गया था।

एक्सिस माई इंडिया के मुखिया प्रदीप गुप्ता खुद भी जमीन पर उतरे थे। उन्होंने सर्वे की पूरी प्रक्रिया और जमीनी हालात का जायजा लिया। हालांकि, पश्चिम बंगाल में सर्वे के दौरान टीम को एक बेहद कठिन और सांख्यिकीय चुनौती मिली। एजेंसी ने मतदाताओं के बीच नॉन-रिस्पॉन्स यानी जवाब न देने की दर बहुत ज्यादा पाई। आंकड़ों के मुताबिक, सर्वे के लिए संपर्क किए गए लगभग 70 प्रतिशत मतदाताओं ने हिस्सा लेने से मना कर दिया। आमतौर पर सर्वे मॉडल में कुछ हद तक हिचकिचाहट को शामिल किया जाता है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों का इनकार करना ऐतिहासिक रिकॉर्ड से बहुत ज्यादा है। इससे सटीक नतीजे निकालना लगभग असंभव हो जाता है।

प्रदीप गुप्ता ने कहा, ‘एक कड़ी चुनावी लड़ाई में शांत मतदाता व्यवहार से जोखिम बहुत बढ़ जाता है। यह किसी भी अनुमान की मजबूती को सीमित कर देता है।’ सांख्यिकीय नजरिए से देखें तो जवाब न देने का यह स्तर वोट-शेयर के सटीक अनुमान में बड़ी रुकावट डालता है। एजेंसी किसी भी गलत अनुमान से बचना चाहती है। एक्सिस माई इंडिया ने जानकारी दी है कि टीम ने 8,324 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया था। एक्सिस माई इंडिया बंगाल चुनाव के अपने निष्कर्षों को प्रकाशित करने के लिए तैयार थी। लेकिन डाटा की आंतरिक समीक्षा और सांख्यिकीय विश्वास के स्तर को देखने के बाद फैसला बदल दिया गया। एजेंसी ने बहुत सोच-समझकर एग्जिट पोल के अनुमानों को सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया।

प्रदीप गुप्ता ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा, ‘हम जानते हैं कि इस फैसले से दर्शकों को निराशा होगी। लेकिन कार्यप्रणाली की ईमानदारी और डाटा की साख के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सबसे ऊपर है। हम उन अनुमानों को पेश करना जिम्मेदारी भरा नहीं समझते जो हमारे आंतरिक मानकों पर खरे नहीं उतरते। इसलिए हमने प्रकाशन रोकने का फैसला किया है। बताते चलें कि पश्चिम बंगाल में साइलेंट वोटर हमेशा से चुनावी पंडितों के लिए पहेली रहे हैं।

भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा ‘जब 4 मई को नतीजे घोषित होंगे, तो दो बातें स्पष्ट हो जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत 2047 का विजन मजबूत होगा और भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाएगी। इसके अलावा असम, पुदुचेरी और तमिलनाडु जैसे राज्यों में एनडीए आगे बढ़ेगी। दूसरा, इंडी गठबंधन के भीतर राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठेंगे और यह गठबंधन बिखर जाएगा। पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार हिंसा मुक्त वातावरण में मतदान हुआ है और चुनाव के दौरान किसी की जान जाने की खबर नहीं है। जो पिछले 70 वर्षों में कांग्रेस, कम्युनिस्ट और तृणमूल कांग्रेस के शासन में नहीं हुआ, वह अब हुआ है क्योंकि बंगाल के लोगों ने भयमुक्त और शांतिपूर्ण मतदान देखा। मतदाताओं ने बड़ी संख्या में बाहर आकर स्वतंत्र रूप से अपना वोट डाला।’

कोलकाता में मीडिया से मुखातिब होते हुए भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने बंगाल में सत्ता परिवर्तन का हुंकार भरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब टीएमसी की चोरी और कुशासन से ऊब चुकी है और विकास के लिए भाजपा की ओर देख रही है। सिन्हा ने ममता सरकार पर राज्य के सांप्रदायिक संतुलन को बिगाड़ने और इसे बांग्लादेश बनाने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों ने अब इस साजिश को समझ लिया है। उन्होंने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षाबलों का आभार व्यक्त किया। भाजपा सांसद ने दावा किया कि गुंडागर्दी पर लगाम लगने के कारण लोगों ने निडर होकर वोट दिया है।

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संपन्न होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का रथ अब और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, वामपंथ और टीएमसी के पिछले 70 वर्ष के इतिहास में पहली बार बंगाल ने बिना किसी हिंसा और जनहानि के पूरी तरह भयमुक्त मतदान देखा है। भंडारी के अनुसार, भारी संख्या में जनता का बाहर निकलकर वोट देना इस बात का प्रमाण है कि बंगाल में बदलाव तय है और इन नतीजों के बाद इंडी गठबंधन के भीतर राहुल गांधी का नेतृत्व और अधिक कमजोर साबित होगा।

दक्षिण 24 परगना के कैनिंग पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार प्रशांत बायन ने दूसरे चरण के मतदान के बाद अपनी जीत और राज्य में सत्ता परिवर्तन का भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के इस दूसरे पड़ाव में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत है और जनता का समर्थन स्पष्ट रूप से उनके पक्ष में दिख रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चार मई को आने वाले चुनावी नतीजे बंगाल में नई शुरुआत करेंगे और पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी।

आसनसोल दक्षिण से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल ने पश्चिम बंगाल में हुए ऐतिहासिक मतदान पर खुशी जाहिर करते हुए निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में बिना राष्ट्रपति शासन लगाए इतना शांतिपूर्ण और भयमुक्त चुनाव संपन्न होना एक बड़ी उपलब्धि है। एग्जिट पोल के आंकड़ों पर अपनी असहमति जताते हुए पॉल ने दावा किया कि उन्होंने पिछले छह महीनों में जनता की जो नब्ज टटोली है, वह साफ तौर पर परिवर्तन की सुनामी की ओर इशारा कर रही है। उन्होंने कहा कि चार मई को बंगाल की जनता का उद्देश्यपूर्ण मतदान सत्ता परिवर्तन का नया इतिहास लिखेगा।

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