ईरान-पाकिस्तान के बीच इस समय भरोसे का गंभीर संकट पैदा हो गया है जिसके बाद ईरान-अमेरिका बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान के सरकारी मीडिया ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया है कि वह अमेरिका के साथ मिलकर “डबल गेम” खेल रहा है और ईमानदारी से मध्यस्थता नहीं कर रहा। ईरान की सबसे बड़ी नाराजगी पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर (Asim Munir) को लेकर है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पाकिस्तान की भूमिका पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।

एक प्रमुख विश्लेषक के जरिए प्रसारित रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मुनीर ने ईरान का प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन अब तक कोई साफ जवाब नहीं आया। इससे ईरान को शक है कि या तो प्रस्ताव सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया या जानबूझकर देरी की जा रही है।ईरानी पक्ष का आरोप है कि पाकिस्तान बाहर से खुद को न्यूट्रल (तटस्थ) दिखाता है, लेकिन अंदरखाने अमेरिका का साथ दे रहा है। यही वजह है कि ईरान को लग रहा है कि पूरी बातचीत की प्रक्रिया उसके खिलाफ बनाई जा रही है। मामला तब और बिगड़ गया जब ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया गया और अमेरिकी पक्ष जिसमें जे.डी. वैंस (JD Vance) जैसे नेता शामिल हैं । ईरान का मानना है कि पाकिस्तान ने एक सच्चे मध्यस्थ की तरह उसका पक्ष मजबूत करने के बजाय चुप्पी साध ली।
ईरान ने पाकिस्तान पर “मीडिया गेम” खेलने का भी आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि इस्लामाबाद यह झूठा माहौल बना रहा है कि बातचीत जल्द शुरू होगी, जबकि ईरान ने अभी ऐसी किसी प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दी है। इससे दुनिया के सामने ईरान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ईरान को अब डर है कि अगर यही स्थिति रही, तो पूरी बातचीत फेल हो सकती है। उसका साफ कहना है कि अगर मध्यस्थ पूरी तरह निष्पक्ष नहीं होगा, तो किसी भी समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती। कुल मिलाकर, ईरान का गुस्सा साफ दिख रहा है और उसने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विवाद न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति को भी और अस्थिर बना सकता है।


