NATIONAL : 15 मौतों का जिम्मेदार कौन? UP से MP कैसे पहुंची शराब…कहां हुई चूक, जानिए सागर जहरीली शराब कांड की पूरी कहानी

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सागर के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद 3 आबकारी अधिकारियों को सस्पेंड किया गया, जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है. वहीं बंडा थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. बंडा तहसील में जहरीली शराब पीने के बाद अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 50 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. घटना के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मामले में आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. वहीं उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. इसके अलावा कई शराब दुकानों को सील कर जांच की जा रही है.

सागर जिले की बंडा तहसील में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात जहरीली शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद मरीजों का अस्पतालों में आना शुरू हो गया और मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ गई. इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें हरकत में आईं और प्रभावित इलाकों में जांच शुरू की. शराब के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब में मौजूद किस चीज की वजह से लोगों की जान गई.

यूपी से एमपी कैसे पहुंची जहरीली शराब
इस मामले की शुरुआती जांच से पता चलता है कि इसका संबंध उत्तर प्रदेश के ललितपुर से होने वाली शराब की तस्करी से है. अधिकारियों के अनुसार, इस बात का पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां बनी थी, इसे सागर तक कैसे पहुंचाया गया और इसके वितरण में कौन-कौन शामिल था. इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने अपनी जांच तेज कर दी है. सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि घटना सुबह 4 बजे सामने आई और प्रशासन का मुख्य ध्यान अभी प्रभावित लोगों का इलाज कराने पर है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर से सागर में नकली शराब लाई गई है. उनका कहा है कि, ललितपुर का एक गिरोह ऐसी गतिविधियों में शामिल है. चूंकि यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा है, इसलिए शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है. मामले की जांच की जा रही है.

कौन बांट रहा था मौत का जहर?
जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोगों तक यह शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क कौन चला रहा था? पुलिस अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. जांच ​​में शराब के स्रोत से लेकर उसके बंटवारे तक की घटनाओं की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है. सैंपल रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि शराब जहरीली कैसे बनी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.

कहां हुई चूक?

इस घटना ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अवैध शराब की बिक्री और तस्करी को रोकने में विभाग की अहम भूमिका होती है. इसके चलते विभाग ने तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर (सागर) कीर्ति दुबे, असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट एक्साइज ऑफिसर दिलीप खंडाते और एक्साइज सब-इंस्पेक्टर (बांदा सर्कल) रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, डिप्टी कमिश्नर और डिविजनल फ्लाइंग स्क्वाड की इंचार्ज नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. अब जांच से यह पता चलेगा कि अवैध शराब को रोकने और उसकी निगरानी करने में किस स्तर पर चूक हुई.

स्थानीय थाना प्रभारी और एक चौकी प्रभारी निलंबित
सागर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) शशेंद्र चौहान ने बताया कि पीड़ितों के परिवारों की शिकायतों के आधार पर तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं. उन्होंने बताया कि प्रभावित 54 लोगों में से 49 में धुंधला दिखाई देने और चक्कर आने जैसे लक्षण दिख रहे हैं. सभी को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (BMCH) में भर्ती कराया गया है. वहीं, मामूली समस्या वाले लोगों को शुरुआती इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई. इस मामले में पांच लोगों को सस्पेंड किया गया है, जिनमें तीन आबकारी अधिकारी, एक स्थानीय थाना प्रभारी और एक चौकी प्रभारी हैं. DIG चौहान ने बताया कि जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर के कुछ लोगों और एक स्थानीय शराब ठेकेदार के बीच संबंध सामने आए हैं. मामले की जांच चल रही है.

सीएम ने जताया दुख
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शराब पीने से हुई मौतों की खबर को दुखद बताया और कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएग. उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री और अधिकारियों को जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

7 दुकानें क्यों सील की गईं?
इस घटना के बाद, प्रशासन ने शराब की दुकानों और बिक्री व्यवस्था की जांच तेज कर दी है. अब तक 7 दुकानों को सील कर दिया गया है. इसका मकसद शराब की सप्लाई चेन से जुड़े कनेक्शन की जांच करना और संदिग्ध शराब की बिक्री को रोकना है.

अब आगे क्या?
फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की जांच चल रही है. शराब के सैंपल की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह का पता चलने की उम्मीद है. इस बीच, जांच एजेंसियां ​​शराब सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब ललितपुर से सागर कैसे पहुंची, इसे लोगों तक किसने पहुंचाया और इस गैर-कानूनी नेटवर्क के खिलाफ समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएंगे.

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