मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन अब तेज करने की पूरी तैयारी है. 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. इसी प्रदर्शन के लिए अनुमति और पुलिस सहयोग की मांग को लेकर AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संसद मार्ग थाना पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस को प्रदर्शन की जानकारी देने के साथ शांतिपूर्ण कार्यक्रम के लिए सहयोग करने की अपील की. यह कदम 25 सितंबर को जंतर-मंतर के पास हुए SIR विरोधी प्रदर्शन के बाद उठाया गया है. उस प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था. पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी.
2 अक्टूबर के प्रदर्शन की पहले से सूचना
नेहा बोरा ने कहा कि पिछले प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से अनुमति को लेकर सवाल उठाए गए थे. इसलिए इस बार आयोजक पहले से पुलिस को कार्यक्रम की जानकारी दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए पुलिस को समय रहते सूचना दी गई है. उन्होंने कहा कि SHO और DCP स्तर के अधिकारियों से भी अनुरोध किया जाएगा कि वे प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित कराने में सहयोग करें.

संसद मार्ग थाने क्यों पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
2 अक्टूबर के कार्यक्रम को लेकर आयोजकों और पुलिस के बीच अनुमति का मुद्दा जरूरी हो गया है. 25 सितंबर को पुलिस ने कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी. दूसरी ओर, प्रदर्शन से जुड़े लोगों का कहना था कि उन्होंने पुलिस को कार्यक्रम की जानकारी दी थी. इसी विवाद के बीच इस बार प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग थाना जाकर लिखित रूप से कार्यक्रम की सूचना देने और पुलिस से सहयोग मांगने का फैसला किया. प्रतिनिधिमंडल में नेहा बोरा के साथ योगेंद्र यादव, नंदिता नारायण भी शामिल थे.
‘पुलिस सहयोग करे तो शांतिपूर्ण तरीके से होगा प्रदर्शन’
दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर नंदिता नारायण ने कहा कि 2 अक्टूबर के कार्यक्रम को लेकर पुलिस को लिखित जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों के लिए उपयोग होता रहा है. ऐसे में आयोजकों की कोशिश है कि पुलिस के साथ पहले से समन्वय हो, जिससे कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की परेशानी ना हो. नंदिता नारायण ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को रोकने या बल प्रयोग की स्थिति बनती है तो तनाव बढ़ सकता है.
SIR को वोट के अधिकार से जोड़कर उठाए सवाल
नंदिता नारायण ने SIR को लेकर मतदाता सूची और वोट देने के अधिकार पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम हटने का असर सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली कुछ सरकारी सुविधाओं और सेवाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.
जिनके नाम कटे हैं, वे भी प्रदर्शन में आएं
नंदिता नारायण ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा लोगों से शामिल होने की अपील की. उन्होंने खास तौर पर उन लोगों से आने को कहा, जिनका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायत है. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन आगे भी बढ़ सकता है और SIR के मुद्दे पर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी.
25 सितंबर के प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 25 सितंबर को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन हुआ था. इसमें AISA और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग शामिल हुए थे. पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था. पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और नई दिल्ली जिले में लागू प्रतिबंधों के कारण कार्रवाई की गई. वहीं, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है.

