NATIONAL : कभी हां, कभी न… अराघची अचानक PAK के लिए रवाना, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की सुगबुगाहट तेज

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कायम गतिरोध और खाड़ी में तीसरे अमेरिकी युद्धपोत के पहुंचने से बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक शुक्रवार से तीन देशों की यात्रा पर रवाना हुए। उनकी यात्रा का पहला पड़ाव पाकिस्तान है। इसके बाद वह ओमान और रूस भी जाएंगे।

अराघची की यात्रा दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता जल्द शुरू कराने के कूटनीतिक प्रयासों के तहत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि अराघची के साथ एक छोटा दल भी इस्लामाबाद पहुंचेगा। वहां वे पहले से मौजूद अमेरिकी लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम के साथ बैठक करके शांति वार्ता की रूपरेखा तय करेंगे। इसके बाद उच्चस्तरीय अमेरिकी दल शनिवार रात तक इस्लामाबाद पहुंच सकता है।
अराघची के दौरे को लेकर अमेरिका ने दी प्रतिक्रिया
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अराघची के दौरे को लेकर कहा कि ईरान के पास समझौता करने का अच्छा मौका है। ईरान को केवल अपना परमाणु हथियार छोड़ना है। इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने भी कहा था कि वह समझौते को लेकर किसी तरह की हड़बड़ी में नहीं हैं। हालांकि, ट्रंप पर ईरान युद्ध जारी रखने के लिए एक मई से पहले संसद की मंजूरी लेने का दबाव बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर उनकी अपनी ही पार्टी के कई सांसद विरोध में हैं।अराघटी ने रखी ये मांग
इससे पहले अराघची ने अमेरिका से विभिन्न देशों में फ्रीज ईरान की 11 खरब डॉलर की रकम को डीफ्रीज करने की मांग की। उन्होंने इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया और युद्धविराम खत्म करने की चेतावनी भी दी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि संपत्ति जारी होने तक होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा। बीते 24 घंटे में केवल पांच मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सके हैं।

दौरे से पहले अराघची ने की पाकिस्तान से बात
अमेरिकी सेंटकाम ने कहा है कि ईरान के दो जहाजों को इंटरसेप्ट किया है, जो गुपचुप तरीके से होर्मुज पार करने का प्रयास कर रहे थे। प्रेट्र के अनुसार, तीन देशों के दौरे से पहले अराघची ने पाकिस्तानी समकक्ष इसहाक डार और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ चर्चा की।

हालांकि ईरानी पक्ष ने बातचीत का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया, लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय घटनाक्रम, युद्धविराम और अमेरिका-ईरान संवाद को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।

डार ने इस दौरान लंबित मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर संवाद और सहयोग को क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए अनिवार्य बताया। डान अखबार के अनुसार, अराघची के साथ एक छोटा वार्ता दल भी शामिल होगा। हालांकि, शांति वार्ता का नेतृत्व करनेवाले ईरानी संसद प्रमुख एमबी गलीबाफ नहीं आएंगे।

अराघची ने चेताया, 48 घंटे में खत्म कर देंगे युद्धविराम
अराघची ने चेतावनी दी है कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा, जब तक ईरान की करीब 11 खरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति जारी नहीं की जाती। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो संदेश में कहा कि अगर अगले 48 घंटों के भीतर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आता है, तो मौजूदा युद्धविराम भी टूट सकता है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर प्रतिबंधों के चलते विभिन्न देशों को ईरानी तेल व गैस निर्यात के बदले मिलनेवाली 50 से 100 अरब डालर की रकम उन्हीं देशों के बैंकों में जब्त पड़ी हुई है। ईरान ने शांति समझौते के लिए इस रकम को जारी करने की भी शर्त रखी है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर उस पर कई सालों से आर्थिक पाबंदियां लगी हैं।

युद्ध मंजूरी के लिए ट्रंप के पास केवल छह दिन शेष
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पास ईरान युद्ध को जारी रखने के लिए केवल छह दिन बचे हैं। अमेरिकी संविधान के अनुसार, किसी भी युद्ध को 60 दिन में संसद की मंजूरी लेनी पड़ती है। उन्होंने 28 फरवरी को शुरू युद्ध के बारे में संसद को दो मार्च को सूचित किया, जिसके चलते एक मई को 60 दिनों की अवधि पूरी हो रही है। इससे पहले उन्हें मंजूरी लेनी होगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध को लेकर संसद में ट्रंप की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। 100 सदस्यों वाली सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के 53 सांसद हैं, जबकि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 47 सदस्य हैं। ट्रंप की पार्टी के ही लगभग 10 सांसद ईरान युद्ध के विरोध में आवाज उठा चुके हैं।

हालांकि, ट्रंप के पास एक और विकल्प है। राष्ट्रपति एक बार के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय ले सकते हैं, लेकिन यह सिर्फ सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए होता है, न कि युद्ध जारी रखने के लिए।

2003 के बाद खाड़ी में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा
रायटर के अनुसार, खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए तीसरा विमानवाहक पोत भी तैनात कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि 2003 के बाद यह पहला मौका है, जब एक साथ तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।

हेगसेथ के अनुसार, इस संयुक्त तैनाती में लगभग 200 लड़ाकू विमान, युद्धपोतों का बेड़ा और हजारों नौसैनिक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ई्रान को पता है कि उनके पास अब भी समझौते की खिड़की खुली हुई है। वे चाहें तो वार्ता की मेज पर बुद्धिमानी से चुनाव कर सकते हैं। उन्हें बस इतना करना है कि सार्थक और साबित तरीके से परमाणु हथियार छोड़ दें।

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