NATIONAL : वन नेशन, वन इलेक्‍शन को मंजूरी: 191 दिन में तैयार रिपोर्ट में क्‍या सुझाव दिए, कैसे बदलेगी चुनाव व्‍यवस्‍था; इससे देश का क्‍या फायदा?

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मोदी कैबिनेट ने आज यानी बुधवार को एक देश एक चुनाव (One Nation, One Election) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब देश की 543 लोकसभा सीट और सभी राज्‍यों की कुल 4130 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव कराने की राह खुल गई। एक देश एक चुनाव पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

इससे एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि देश में वन नेशन वन इलेक्शन हर हाल में 2029 से पहले लागू होगा। इसके एक दिन बाद ही एक देश एक चुनाव के प्रस्ताव को मोदी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के क्या मायने हैं? वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े 12 सवालों के जवाब यहां पढ़िए…

78 वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्रचार से पीएम मोदी ने कहा-
देश में हर छह माह में कहीं न कहीं चुनाव हो रहे होते हैं। ऐसे में देश को आगे ले जाने के लिए वन नेशन, वन इलेक्शन को आगे लाना ही होगा।

मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर गृह मंत्री अमित शाह –
हमारी योजना इस सरकार के कार्यकाल के दौरान ही वन नेशन वन इलेक्शन को लागू कराने की है। इसको लेकर तैयारियां की जा रही हैं।

क्या है वन नेशन वन इलेक्शन?
एक देश एक चुनाव यानी (One Nation, One Election) का मतलब है कि पूरे देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव हों। ऐसे समझिए, देश की सभी 543 लोकसभा सीटों और सभी राज्‍यों व केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 4130 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव होंगे। वोटर सांसद और विधायक चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय पर अपना वोट डाल सकेंगे।

क्या है मौजूदा चुनाव व्यवस्था?
देश में अभी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं।

क्या यह चुनाव व्यवस्था देश के लिए नई है?
नहीं, यह कांसेप्ट भारत के लिए नया नहीं है। देश में आजादी के बाद 1952 से लेकर 1957, 1962 और 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे। 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं तय समय से पहले भंग कर दी गई थीं। 1970 में लोकसभा भी समय से पहले भंग कर दी गई थी। इसके चलते एक देश एक चुनाव की गाड़ी पटरी से उतर गई।

कमेटी ने कितने दिन में तैयार की रिपोर्ट?
वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर 2 सितंबर, 2023 को एक कमिटी गठित की गई थी। इसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे थे। कमेटी के सदस्यों ने सात देशों की चुनाव व्यवस्था का अध्ययन किया।

स्टेकहोल्डर्स-एक्सपर्ट्स से चर्चा और रिसर्च के बाद 191 दिन में 18 हजार 626 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की गई। कमेटी ने यह रिपोर्ट 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई। रिपोर्ट में सभी विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 तक करने का सुझाव दिया है।

राष्‍ट्रपति मुर्मू को रिपोर्ट सौंपते पूर्व राष्‍ट्रपति और क‍मेटी अध्‍यक्ष रामनाथ कोविंद, साथ में गृहमंत्री अमित शाह। फाइल फोटो

वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी कितने और कौन-कौन है सदस्य?
पूर्व राष्‍ट्रपति, एक वकील, तीन नेता और तीन पूर्व अफसर समेत आठ लोग कमेटी के सदस्य हैं।

रामनाथ कोविंद, अध्यक्ष (पूर्व राष्ट्रपति)
हरीश साल्वे, वरिष्ठ अधिवक्ता
अमित शाह, गृह मंत्री (बीजेपी)
अधीर रंजन चौधरी, कांग्रेस नेता
गुलाम नबी, डीपीए पार्टी
इनके सिंह, 15वें वित्त आयोग पूर्व अध्यक्ष
डॉ. सुभाष कश्यप, लोकसभा के पूर्व महासचिव
संजय कोठारी, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त
कमेटी ने क्या सुझाव दिए?
सभी विधानसभाओं का कार्यकाल अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक बढ़ाया जाए।
पहले चरण में लोकसभा-विधानसभा चुनाव और फिर दूसरे चरण में 100 दिन के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग लोकसभा, विधानसभा व स्थानीय निकाय चुनावों के लिए सिंगल वोटर लिस्ट और वोटर आईडी कार्ड बनाए।
देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, जनशक्ति और सुरक्षा बलों की एडवांस प्लानिंग करने की भी सिफारिश की है।

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