पश्चिम एशिया संकट के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देने को लेकर भारत के निशाने पर रहा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकी समूहों को पाकिस्तान की ओर से दिए जाने वाले समर्थन की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए कहा कि एससीओ को राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करने वाले सरकार-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इस पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि इस आपरेशन ने भारत के इस दृढसंकल्प को प्रदर्शित किया है कि आतंकवाद के पनाहगार अब न्यायसंगत दंड से अछूते नहीं रहेंगे। किर्गिस्तान के बिश्केक में मंगलवार को एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादियों को उकसाने, आश्रय देने और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में संगठन को हिचकिचाना नहीं चाहिए।
साथ ही कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से बिना किसी अपवाद के निपटकर हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और समृद्धि की आधारशिला में बदल सकते हैं। आतंकवाद विरोधी उपायों को सर्वोपरि बताते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि संगठन आतंकवाद के खिलाफ इस खतरे से लड़ने के लिए ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा करता है। पिछले वर्ष के तियानजिन घोषणापत्र का जिक्र किया जिसमें आतंकवाद के खिलाफ भारत का दृढ और सामूहिक रुख स्पष्ट हुआ था।

उन्होंने इसे आतंकवाद और इसके अपराधियों के प्रति भारत के जीरो टालरेंस दृष्टिकोण का प्रमाण बताते हुए कहा कि सामूहिक विश्वसनीयता की असली कसौटी निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या विचारधारा नहीं होती।
एससीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण: राजनाथ
राष्ट्रों को आतंकवाद के खिलाफ दृश और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए। वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए एससीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि आज वैश्विक दृष्टि खंडित होती दिख रही तो देश खुद को तेजी से अपने में समेटते जा रहे हैं। इस संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हमें एक नई विश्व व्यवस्था की आवश्यकता है या एक अधिक व्यवस्थित दुनिया की।
हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए, जहां मतभेद विवाद न बनें और विवाद आपदाओं का कारण न बनें। क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित में एससीओ की जिम्मेदारी की चर्चा करते हुए राजनाथ ने कहा कि हमें संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए न कि बल प्रयोग का। यह हिंसा और युद्ध का युग नहीं, बल्कि शांति और समृद्धि का युग बनाना चाहिए। रक्षामंत्री ने इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस संदेश ‘आंख के बदले आंख’ सबको अंधा कर देती है की याद दिलाते हुए कहा कि रक्षा एवं सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होने के नाते, भाईचारे और सद्भाव की भावना को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।
रक्षामंत्री ने एससीओ के कार्यक्रम कार्यान्वयन में रचनात्मक योगदान देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि समानता, पारस्परिक सम्मान और गहरी समझ पर आधारित सहयोग तथा आपसी विश्वास इस संगठन को आशा और शांति का प्रतीक बना सकता है। रक्षा मंत्री ने बैठक में सदस्य देशों के साथ मिलकर क्षेत्र को प्रभावित करने वाले सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरपंथ से संबंधित पहलुओं तथा वैश्विक शांति तथा स्थिरता पर इसके व्यापक प्रभावों को लेकर चर्चा की।

