Sunday, September 20, 2026
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NATIONAL : म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग पांच दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे भारत

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म्यांमार: राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर 30 मई से 3 जून तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। वह शनिवार को बोधगया से भारत के अपने दौरे की शुरुआत करेंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग अपने दौरे के दौरान 1 जून को पीएम मोदी के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत करेंगे। बता दें, राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का जिम्मेदारी संभालने के बाद यह पहला भारत दौरा होगा।राष्ट्रपति ह्लाइंग भारत में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे। अपने दौरे पर, उनके साथ एक उच्च स्तरीय डेलिगेशन भी होगा, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, सीनियर अधिकारी और बिजनेस लीडर शामिल होंगे। वह व्यवसाय और उद्योगों के लोगों से बातचीत और साइट विजिट के लिए 2 जून को मुंबई भी जाएंगे।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “म्यांमार भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर नीति के संगम पर है। राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के भारत के आधिकारिक दौरे से दोनों देशों के बीच कई तरह के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। इस महीने की शुरुआत में, वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम ने भी अपना भारत दौरा बोधगया से शुरू किया और महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की। बोधगया में ही भगवान बुद्ध को ज्ञान मिला था। यू मिन आंग ह्लाइंग ने इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। इस मौके पर विदेश राज्य मंत्री (एमओएस) कीर्ति वर्धन सिंह म्यांमार प्रेसिडेंट के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए म्यांमार गए थे। इसके साथ ही सिंह ने 10 अप्रैल को यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और उन्हें म्यांमार के राष्ट्रपति के तौर पर पद Also Read – Bengal : कैबिनेट विस्तार, 35 नए मंत्रियों ने ली शपथ संभालने पर पीएम मोदी की तरफ से बधाई पत्र दिया। उन्होंने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीतियों के तहत आपसी सहयोग को और मजबूत करने और म्यांमार के लोगों के फायदे के लिए विकास में मदद देने का भारत का वादा जताया। कीर्ति वर्धन सिंह ने मुलाकात के बाद एक्स पर पोस्ट किया, “आज म्यांमार के राष्ट्रपति के तौर पर पद संभालने पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बधाई पत्र यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और उन्हें दिया।

NATIONAL : 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का कार्यक्रम जारी, जानें पूरा शेड्यूल

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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तीसरे चरण का कार्यक्रम जारी किया। यह 1 अक्तूबर से 23 दिसंबर के बीच आयोजित किया जाएगा। इसमें 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

कौन से राज्य हैं शामिल?
एक अधिकारी ने एक बयान में कहा कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची में शामिल होने के लिए मतदाता की पात्रता की अंतिम तिथि 1 जुलाई से 1अक्तूबर तक है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर-चरण तीन आयोजित किया जाएगा। उनमें तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, नागालैंड, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, दादरा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। नगर हवेली और दमन और दीव, ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर शामिल हैं।

घर-घर जाकर होगा सत्यापन
तीसरे चरण के प्रारंभ होने के साथ ही एसआईआर अभ्यास हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश को प्रभावी ढंग से कवर करेगा। व्यापक पुनरीक्षण अभियान के तहत, जनगणना चरण के दौरान 394 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) लगभग 3673 करोड़ मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से नामित लगभग 342 लाख बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) बीएलओ की सहायता करेंगे।

अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर को प्रकाशित होगी
चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में एसआईआर के काम पूरा करने की आखिरी तारीख 1 जुलाई होगी। इन राज्यों में दस्तावेजों की तैयारी, प्रशिक्षण और छपाई 20 मई से शुरू होगी। वहीं, 29 मई तक जारी रहने की उम्मीद है। बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर 30 मई से 28 जून के बीच मतदान किया जाएगा। मतदाता सूची का मसौदा 5 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा। वहीं, आपत्तियों और दावों के बाद अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।

दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव में एसआईआर की आखिरी तारीख 1 जुलाई होगी। इन राज्यों में दस्तावेजों की तैयारी, प्रशिक्षण और छपाई का काम 25 मई से शुरू होगा। 3 जून तक जारी रहने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि मतदाता सूची का मसौदा 10 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 11 सितंबर को जारी की जाएगी।

आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ में एसआईआर की आखिरी तारीख 1 जुलाई होगी।
मतदाता सूची का मसौदा 21 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 22 सितंबर को जारी की जाएगी।
कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली में एसआईआर (निर्वाचन सीमा) की तिथि 1 अक्टूबर होगी।
बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर मतदान 30 जून से 29 जुलाई के बीच किया जाएगा।
मतदाता सूची का मसौदा 5 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा और आपत्तियों और दावों के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।
तेलंगाना और पंजाब में, बीएलओ द्वारा 25 जून से 24 जुलाई के बीच घर-घर जाकर निरीक्षण किया जाएगा।
मतदाता सूची का मसौदा 31 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा, और आपत्तियों और दावों के बाद, अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।
नागालैंड में मतदाता सूची का मसौदा 20 सितंबर को प्रकाशित किया जाएगा और दावों और आपत्तियों के बाद, अंतिम मतदाता सूची 11 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
उत्तराखंड में मतदाता सूची का मसौदा 14 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा और दावों और आपत्तियों के बाद, अंतिम मतदाता सूची 9 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।

RAJASTHAN : राजस्थान के 20 जिलों में आंधी-बारिश का यलो अलर्ट

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जयपुर, 01 जून (हि.स.)। राजस्थान में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। लगातार दो दिन तक रेत के बवंडर और धूलभरी आंधी के बाद सोमवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से सोमवार सुबह सवाई माधोपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश हुई, जबकि जयपुर और दौसा सहित कई जिलों में बादल छाए रहे।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के 20 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम में यह बदलाव 4 जून तक जारी रहने की संभावना है। सोमवार सुबह सवाई माधोपुर शहर में करीब छह बजे मौसम बदला और लगभग 15 मिनट तक तेज बारिश हुई। वहीं रविवार को जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज रेत का बवंडर उठने से कई इलाके धूल-मिट्टी से ढक गए। बाद में बारिश और ओलावृष्टि होने से तापमान में गिरावट आ गई।

प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू, जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर, बाड़मेर और जालोर जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। जैसलमेर में रविवार दोपहर तक तेज गर्मी रही और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। दोपहर बाद पाकिस्तान सीमा क्षेत्र की ओर से रेत का बवंडर उठा, जिसने सुल्ताना, मोहनगढ़ और सुथार मंडी सहित कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। तेज हवाओं के कारण आसमान धूल से भर गया और दृश्यता प्रभावित हुई।

रविवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान बाड़मेर में 42 डिग्री सेल्सियस मापा गया। इसके अलावा जैसलमेर में 41.5, जालोर में 39.1, जोधपुर में 38.9, उदयपुर और वनस्थली (टोंक) में 38.2, चित्तौड़गढ़ में 38, कोटा में 37.4, श्रीगंगानगर में 37.3 और अलवर में 37 डिग्री सेल्सियस तापमान मापा गया।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में तेज हवाएं, धूलभरी आंधी और हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिससे भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

BUSINESS : आज से कमर्शियल गैस सिलेंडर और पांच किग्रा का छोटा हुआ महंगा, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटी

नई दिल्ली, 01 जून (हि.स.)। पेट्रोल और डीजल के बाद आज से 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है। दिल्ली में इसकी कीमत में 42 रुपये का इजाफा किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये हो गई है। कोलकाता में इसकी कीमत 3255.50 रुपये पहुंच गई है। इसके साथ पांच किलोग्राम वाले छोटे एफटीएल सिलेंडर की कीमत में 11 रुपये की वृद्धि की गई है। 14.2 किलोग्राम के घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में हुई बढ़ोतरी की दर आज से लागू हो गई है।

राहत की बड़ी बात यह है कि केंद्र सरकार ने आज से पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ़्यूल (एटीएफ) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाने की घोषणा की है। गैस प्रदाता कंपनियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पांच किलोग्राम वाला छोटा सिलेंडर अब 821.50 रुपये का मिलेगा। कोलकाता में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे वहां 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3255.50 रुपये हो गई है।

केंद्र ने 01 जून से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर अपनी एक्सपोर्ट ड्यूटी को कम करने की घोषणा की है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल गेन टैक्स को आधा करके 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। डीजल पर टैक्स को घटाकर 13.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर कर को घटाकर 9.50 रुपये प्रति लीटर किया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस शून्य होगा। साथ ही, घरेलू इस्तेमाल में आने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

WORLD : अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान तैयार, लेकिन रखी अहम शर्त

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ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने बीबीसी से कहा है कि अगर अमेरिका दोबारा ईरान के साथ बातचीत शुरू करना चाहता है तो उसे भरोसा दिलाना होगा कि वो (अमेरिका) कोई और हमला नहीं करेगा.

माजिद तख्त-रवांची ने कहा, “ट्रंप प्रशासन ने मध्यस्थों के जरिए ईरान से कहा कि वो इस हफ्ते वार्ता दोबारा शुरू करना चाहता है. लेकिन आगे के हमलों से जुड़े बेहद ही महत्वपूर्ण सवाल पर अमेरिका ने स्थिति साफ नहीं की है.”

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी. लेकिन तभी इस महीने की शुरुआत में इसराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बुनियादी सैन्य ढांचे पर हमला किया. ईरान ने भी मिसाइलों के साथ जवाबी कार्रवाई की.

अमेरिका 21 जून को इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हुआ और उसने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बम गिराए.

तख्त-रवांची ने ये भी कहा कि ईरान शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन करने पर जोर देगा. उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि ईरान गुप्त तरीके से परमाणु बम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि ईरान को रिसर्च प्रोग्राम के लिए ‘परमाणु सामग्री’ नहीं मिल पा रही थी, इसलिए वे (ईरान) इसके लिए खुद पर ही निर्भर थे.

उप विदेश मंत्री ने कहा, “उसके (परमाणु प्रोग्राम) स्तर पर चर्चा की जा सकती है. क्षमता पर चर्चा की जा सकती है. लेकिन ये कहना कि आपको संवर्धन नहीं करना चाहिए. आपको बिल्कुल भी संवर्धन नहीं करना चाहिए. अगर आप इसके लिए सहमत नहीं होंगे तो हम आप पर बम गिरा देंगे. ये जंगल का क़ानून है.”

WORLD : प. एशिया संकट: होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी बरकरार, ईरान से सीजफायर पर भी सस्पेंस; वैश्विक बाजार में बढ़ा तनाव

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होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को सख्ती से जारी रखा है। हालांकि ईरान के साथ 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार पर बातचीत चल रही है, लेकिन परमाणु शर्तों और लेबनान विवाद के कारण दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य तनाव फिलहाल कम नहीं हो रहा है। सिंगापुर के सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह लागू है। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ 60 दिनों के युद्धविराम पर विचार कर रहे हैं। इस नाकेबंदी से दुनिया के इस सबसे जरूरी तेल रास्ते में जहाजों की आवाजाही ठप है। अमेरिकी कार्रवाई के कारण अप्रैल के मध्य से अब तक 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों को वापस भेजा गया है।

युद्ध के लिए तैयार अमेरिका:पीट हेगसेथ
अमेरिकी युद्ध सचिव ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक के बाद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दोबारा युद्ध शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हथियारों का भंडार इस काम के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की है। सेना ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी बल पूरी तरह मुस्तैद हैं। दूसरी तरफ ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी सेना ने शनिवार को एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। वहीं, होर्मुज के बंद होने से वैश्विक बाजार में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है।

क्या है सीजफायर समझौते की शर्तें और विवाद?
पाकिस्तानी मध्यस्थों की मदद से एक अस्थायी समझौता तैयार किया गया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच लड़ाई को रोकना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में दो घंटे बैठक की। हालांकि अभी तक इस समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। इस समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुख्य विवाद इस प्रकार हैं:-

परमाणु प्रतिबंध: अमेरिका की शर्त है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मान रहा है।

मुक्त व्यापार: ट्रंप चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह टोल-फ्री हो। ईरान का कहना है कि वे नाकेबंदी हटने के बाद ही जहाजों को रास्ता देंगे।

समुद्री बारूदी सुरंगें: समझौते के तहत ईरान को 30 दिनों में समुद्री सुरंगें हटानी होंगी। अमेरिका ने पहले ही कई सुरंगों को नष्ट करने का दावा किया है।

लेबनान संकट से उलझा कूटनीतिक गणित
इस पूरे विवाद में लेबनान का मोर्चा सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान संकट नहीं सुझलगा, तब तक अमेरिका से कोई समझौता नहीं होगा। इस बीच इस्राइली सेना लेबनान के भीतर 30 किलोमीटर तक घुस चुकी है। वहां गांवों को खाली करने के आदेश जारी हैं। दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधि पेंटागन में सीधे बातचीत भी कर रहे हैं। कूटनीतिक बातचीत के बावजूद जमीन पर युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है।

IPL 2026 Final: महामुकाबले से पहले जानें बेंगलुरु और गुजरात की पूरी राइवलरी, हेड-टू-हेड आंकड़े में कौन आगे?

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आईपीएल 2026 का फाइनल आज आरसीबी और गुजरात टाइटंस के बीच अहमदाबाद में खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच इस सीजन तीन मैच खेले जा चुके हैं और यह चौथी बार है जब दोनों टीम एक ही सीजन में भिड़ने जा रही है।

अहमदाबाद: क्रिकेट फैंस का लंबा इंतजार अब खत्म हो चुका है। आईपीएल 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर है और आज अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इस सीजन का सबसे बड़ा महामुकाबला होने जा रहा है। खिताबी भिड़ंत के लिए जो दो टीमें आमने-सामने खड़ी हैं, वे हैं डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस। इस ऐतिहासिक फाइनल मैच से पहले आइए पूरी तरह समझते हैं इन दोनों टीमों के बीच की राइवलरी, हेड-टू-हेड रिकॉर्ड, इस सीजन की जंग और उन खिलाड़ियों के बारे में जो आज मैच का पासा पलट सकते हैं।

हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में किसका पलड़ा भारी
आईपीएल के इतिहास में अब तक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच कुल 9 बार आमना-सामना हुआ है। इन आंकड़ों में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलती है। अब तक खेले गए इन 9 मुकाबलों में से आरसीबी ने 5 मैचों में जीत दर्ज की है, जबकि गुजरात टाइटंस की टीम 4 मैचों में विजयी रही है। इस प्रतिद्वंद्विता में आरसीबी का गुजरात के खिलाफ सर्वोच्च स्कोर 254 रन रहा है, जो इसी सीजन के क्वालीफायर-1 में बना था, जबकि उनका न्यूनतम स्कोर 155 रन रहा है। आंकड़ों के लिहाज से आरसीबी की टीम 5-4 से मामूली बढ़त बनाए हुए है, लेकिन आज होने वाला 10वां मुकाबला सीधे आईपीएल ट्रॉफी का फैसला करेगा।

एक ही सीजन में चौथी बार भिड़ेंगी दोनों टीमें
इस साल इन दोनों टीमों के बीच की सबसे रोमांचक चैप्टर लिखा गया है क्योंकि फाइनल से पहले इस सीजन में दोनों टीमें तीन बार आमने-सामने आ चुकी हैं। पहली भिड़ंत 24 अप्रैल को बेंगलुरु में हुई थी, जहां गुजरात ने साई सुदर्शन के 58 गेंदों में जड़े शानदार शतक की बदौलत 205/3 का विशाल स्कोर बनाया था, लेकिन जवाब में किंग विराट कोहली की 44 गेंदों में 81 रनों की आतिशी पारी और देवदत्त पडिक्कल के 27 गेंदों में 55 रनों की बदौलत आरसीबी ने इस लक्ष्य को 7 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया था।

NATIONAL : दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत के लोगों को मिलने वाली है भीषण गर्मी से राहत, आंधी और गरज-चमक से साथ बारिश का अलर्ट

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उत्तरी और मध्य भारत भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में अगले 4-5 दिनों तक लू की स्थिति जारी रहेगी। उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में करोड़ों लोग झुलसा देने वाली गर्मी झेल रहे हैं और उन्हें तुरंत कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हालांकि अगले 4 दिन के बाद मौसम का मिजाज बदलने वाला है।

28 मई से बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के पुर्वानुमान के अनुसार, 28 मई से एक ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) एक्टिव हो रहा है। इसकी वजह से 28 और 29 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ , दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके साथ 60-70 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जगहों पर 80 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। पूर्वी यूपी में 28 मई से 31 मई तक खराब मौसम बना रह सकता है।

इन राज्यों में बारिश के आसार

मौसम विभाग ने मंगलवार को बताया कि 27-30 मई के दौरान पश्चिम बंगाल में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। बिहार, झारखंड और ओडिशा में अगले 7 दिनों के दौरान, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 40-50 किमी की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। बिहार में 29 मई को 60-80 किमी रफ्तार से आंधी चल सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में 28-30 मई के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की काफी संभावना है।

27-28 मई के दौरान केरल माहे, लक्षद्वीप में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की काफी संभावना है। 27-30 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना और रायलसीमा में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की छिटपुट संभावना है।

दिल्ली में बुधवार को आसमान ज़्यादातर साफ़ रहेगा। कुछ जगहों पर लू चलने की स्थिति रहेगी। दिन के समय 40 किमी की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 44°C से 46°C और 27°C से 29°C के बीच रहने की संभावना है।

28 मई को आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। शाम/रात के समय गरज/बिजली कड़कने और 40-50 किमी की तेज़ हवाओं के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 42°C से 44°C और 28°C से 30°C के बीच रहने की संभावना है। 29 मई आसमान आम तौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह या दोपहर के समय हल्की बारिश का एक दौर आ सकता है। इस दौरान 40-50 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 35°C से 37°C और 25°C से 27°C के बीच रहने की संभावना है।

BUSINESS : कॉटन इंपोर्ट पर ड्यूटी छूट से MSME टेक्सटाइल यूनिट्स को मिलेगा बड़ा फायदा, सस्ता होगा कच्चा माल

केंद्र सरकार द्वारा 30 अक्टूबर 2026 तक कॉटन इंपोर्ट पर सभी कस्टम ड्यूटी हटाने के फैसले का टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने कहा कि यह कदम घरेलू इंडस्ट्री के लिए कॉटन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, प्रोडक्शन कॉस्ट को कम करेगा और इंडियन टेक्सटाइल प्रोडेक्ट्स की ग्लोबल प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाएगा। वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार यह ड्यूटी छूट 1 जून 2026 से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने कहा कि कपास के ऑफ-सीजन के दौरान लागू किया गया यह फैसला टेक्सटाइल इंडस्ट्री, विशेष रूप से MSME इकाइयों को राहत देगा। इससे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी, इनपुट कॉस्ट पर दबाव कम होगा और किसानों के हितों की रक्षा के साथ बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने इसे अपैरल इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत बताया है। AEPC के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि कपास और यार्न की बढ़ती कीमतों से जूझ रही छोटी और मध्यम इकाइयों को इस फैसले से बड़ा फायदा होगा। उन्होंने स्पिनिंग मिलों से भी अपील की कि वे सस्ती कॉटन का लाभ यार्न की कीमतों में कमी के रूप में आगे बढ़ाएं, ताकि पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन को फायदा मिल सके और निर्यातक अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर ऑर्डर हासिल कर सकें।

इंडस्ट्री के लिए क्या थी बड़ी बाधा
वहीं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टैक्सटाइल इंडस्ट्री के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए बड़ी बाधा बन गया था, जबकि एशिया के कई प्रतिस्पर्धी देशों को ड्यूटी-फ्री कपास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क के कारण पूरी वैल्यू चेन में लागत बढ़ रही थी और भारत के टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाने के प्रयास प्रभावित हो रहे थे।

भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट मुख्य रूप से कपास आधारित है और देश ने वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल एवं अपैरल एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है। इंडस्ट्री का मानना है कि कॉटन इंपोर्ट पर अस्थायी ड्यूटी छूट से भारतीय निर्यातक विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगे और ग्लोबल बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेंगे।

NATIONAL : दिल्ली साकेत में 5 मंजिला इमारत ढही, 4 की मौत और कई घायल

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नई दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुआ हादसा राजधानी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया और वहां मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दस लोग घायल हैं जिन्हें तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी में जुटे हैं।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो लोग पास में मौजूद थे, उन्होंने सबसे पहले शोर सुना और फिर धूल का बड़ा गुबार उठता देखा। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार जिस जगह इमारत गिरी वहां एक मेडिकल संस्थान से जुड़ी कैंटीन भी संचालित हो रही थी, जिससे हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। देर रात तक कई बार रुक-रुक कर काम किया गया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब तक की जानकारी के मुताबिक लगभग 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से कुछ को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के इलाज में जुटी है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोग जो इमारत के पास मौजूद थे, उन्होंने बताया कि पहले हल्की आवाज आई और फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग गिर गई। आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया, जिससे कुछ देर के लिए दृश्यता भी बेहद कम हो गई।

पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। आसपास के भवनों को भी एहतियातन खाली कराया गया है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल इमारत गिरने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में निर्माण संबंधी कमजोरी या संरचनात्मक खामी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत अचानक कैसे गिर गई।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मरम्मत और निरीक्षण किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को धीमी लेकिन बेहद सावधानीपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रातभर मशीनों की आवाज और राहत दलों की गतिविधियां घटनास्थल पर जारी रहीं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास जमा हैं, हालांकि पुलिस उन्हें सुरक्षित दूरी पर रखने की कोशिश कर रही है। माहौल में चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। कई लोग अपने परिचितों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

यह हादसा न सिर्फ जान-माल का नुकसान लेकर आया है, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजरें राहत कार्य और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।

नई दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुआ हादसा राजधानी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया और वहां मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दस लोग घायल हैं जिन्हें तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी में जुटे हैं।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो लोग पास में मौजूद थे, उन्होंने सबसे पहले शोर सुना और फिर धूल का बड़ा गुबार उठता देखा। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार जिस जगह इमारत गिरी वहां एक मेडिकल संस्थान से जुड़ी कैंटीन भी संचालित हो रही थी, जिससे हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। देर रात तक कई बार रुक-रुक कर काम किया गया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब तक की जानकारी के मुताबिक लगभग 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से कुछ को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के इलाज में जुटी है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोग जो इमारत के पास मौजूद थे, उन्होंने बताया कि पहले हल्की आवाज आई और फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग गिर गई। आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया, जिससे कुछ देर के लिए दृश्यता भी बेहद कम हो गई।

पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। आसपास के भवनों को भी एहतियातन खाली कराया गया है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल इमारत गिरने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में निर्माण संबंधी कमजोरी या संरचनात्मक खामी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत अचानक कैसे गिर गई।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मरम्मत और निरीक्षण किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को धीमी लेकिन बेहद सावधानीपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रातभर मशीनों की आवाज और राहत दलों की गतिविधियां घटनास्थल पर जारी रहीं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास जमा हैं, हालांकि पुलिस उन्हें सुरक्षित दूरी पर रखने की कोशिश कर रही है। माहौल में चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। कई लोग अपने परिचितों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

यह हादसा न सिर्फ जान-माल का नुकसान लेकर आया है, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजरें राहत कार्य और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।

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