Monday, September 21, 2026
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WORLD : ट्रम्प बोले- ईरान के साथ ओबामा जैसी डील नहीं करेंगे:वह इतिहास की सबसे खराब डील, उससे ईरान को परमाणु हथियार बनाने का मौका मिला

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान के साथ ओबामा जैसी डील नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि तब ईरान के साथ हुआ परमाणु समझौता अमेरिका के इतिहास की सबसे खराब डील्स में से एक था।

ट्रम्प ने आरोप लगाया कि उस समझौते ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने का सीधा रास्ता दे दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अभी ईरान के साथ जिस समझौते पर बातचीत कर रही है, वह बिल्कुल अलग है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को जल्दबाजी न करने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि वक्त अमेरिका के पक्ष में है। ट्रम्प ने कहा कि जब तक नया समझौता पूरी तरह फाइनल होकर उस पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरान पर लगाया गया अमेरिकी घेराबंदी अभियान पूरी तरह जारी रहेगा।

ट्रम्प ने कहा, “दोनों पक्षों को समय लेना चाहिए और चीजों को सही तरीके से करना चाहिए। इसमें कोई गलती नहीं हो सकती।” उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार या परमाणु बम विकसित करने या हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

WORLD : ‘प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा प्रशंसक हूं, भारत मुझ पर 100% भरोसा कर सकता है’: ट्रंप का वाशिंगटन से विशेष संदेश

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए हार्दिक संदेश देते हुए कहा कि भारत उन पर “100%” भरोसा कर सकता है और मोदी को अपना घनिष्ठ मित्र बताया। उनके ये शब्द नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में प्रसारित एक संदेश में कहे गए।

इस संदेश को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कार्यक्रम के दौरान लाइव प्रसारित किया, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित वरिष्ठ अमेरिकी और भारतीय अधिकारी उपस्थित थे। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, “मैं प्रधानमंत्री को पसंद करता हूं। मोदी महान हैं। वह मेरे मित्र हैं।”

“आप बहुत अच्छे हैं। हम भारत के इतने करीब पहले कभी नहीं थे, और भारत मुझ पर और हमारे देश पर शत प्रतिशत भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत हो, तो वे जानते हैं कि किसे बुलाना है। वे सीधे यहीं फोन करते हैं।”

ट्रम्प ने अमेरिका के आर्थिक प्रदर्शन पर भी प्रकाश डालते हुए कहा, “हम अच्छा कर रहे हैं। हम रिकॉर्ड बना रहे हैं। हमारी अर्थव्यवस्था रिकॉर्ड स्तर पर है, शेयर बाजार भी रिकॉर्ड स्तर पर है।”

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा, “जब भी राष्ट्रपति (ट्रम्प) और मैं बात करते हैं, तो राष्ट्रपति द्वारा पूछे जाने वाले पहले सवालों में से एक यह होता है कि मेरे मित्र, प्रधानमंत्री (मोदी) कैसे हैं? और यह बताना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रिश्ता नया नहीं है।”

इससे पहले दिन में, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन दावों को खारिज कर दिया कि मौजूदा प्रशासन के तहत वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संबंध कमजोर हो गए हैं।

रुबियो ने कहा, “अमेरिका-भारत संबंधों की गति में कोई कमी नहीं आई है,” और उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान सहित अन्य देशों के साथ अमेरिका की भागीदारी को भारत के साथ उसकी साझेदारी की कीमत पर नहीं देखा जाना चाहिए।

विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एक संयुक्त कार्यक्रम में रूबियो ने कहा, “मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ अपने संबंधों को भारत के साथ हमारे रणनीतिक गठबंधन की कीमत पर नहीं देखता।”

रुबियो ने दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में जयशंकर की प्रशंसा करते हुए उन्हें “वास्तव में एक बुद्धिमान सज्जन” बताया और कहा कि वह भारतीय विदेश मंत्री के प्रति “अत्यधिक आदर और सम्मान” रखते हैं।

BUSINESS : पेट्रोल 2.61 और डीजल 2.71 रुपये हुआ महंगा

नई दिल्ली, 25 मई (हि.स.)। पेट्रो ईंधन की कीमतों में आज फिर बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। दो हफ्ते से भी कम समय में ऐसा चौथी बार हुआ है। अब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

प्रमुख तेल कंपनियों के मुताबिक, देश के प्रमुख शहरों में कोलकाता में पेट्रोल 113.51, मुंबई में 111.21, नोएडा में 101.9 रुपये, बेंगलुरु में 110.6 रुपये, भूवनेश्वर में 108.8 रुपये, चंडीगढ़ में 101.5 रुपये, जयपुर में 113.4 रुपये, लखनऊ में 101.9 रुपये और पटना में 113.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

पिछले 10 दिन में यह चौथी बार है, जब कीमतें बढ़ाई गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इससे पहले शनिवार को भी पेट्रोल-डीजल के दाम में 87 से 91 पैसे तक की बढ़ोतरी हुई थी। कोलकाता में डीजल की कीमत 99.82 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

WORLD : बीएलए ने ली बलूचिस्तान में ट्रेन विस्फोट की जिम्मेदारी

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क्वेटा, 24 मई (हि.स.)। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक यात्री ट्रेन से जुड़े शटल को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट के बाद सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने लेने का दावा किया है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बलों ने तलाशी और जांच अभियान तेज कर दिया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह विस्फोट क्वेटा क्षेत्र में उस समय हुआ जब जाफर एक्सप्रेस से जुड़ा एक शटल अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रहा था। धमाके के कारण ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और कुछ को गंभीर नुकसान पहुंचा। प्रारंभिक जानकारी में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत और घायल होने की बात कही जा रही है, हालांकि आधिकारिक स्तर पर आंकड़ों की पुष्टि लगातार अपडेट की जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रेन में सुरक्षा बलों से जुड़े कर्मियों की आवाजाही भी बताई जा रही थी। घटना के बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

उधर, हमले के संबंध में बीएलए की ओर से जारी कथित बयान में हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

बलूचिस्तान लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों और अलगाववादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में समय-समय पर सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाकर हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं।

NATIONAL : ट्विशा शर्मा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, CJI की अगुवाई में सोमवार को सुनवाई

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देश की सर्वोच्च अदालत ने ट्विशा शर्मा से जुड़े संवेदनशील मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है. देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की विशेष पीठ आगामी सोमवार, 25 मई को इस मामले पर बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रही है.

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 मई (सोमवार) को सुनवाई की तारीख तय की है. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी. बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल रहेंगे.

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष स्वत: संज्ञान लेने की अनुमति के लिए रखा था. नोट में मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य परिस्थितियों के आधार पर जांच के प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए गए थे.

नोट में यह भी उल्लेख किया गया था कि 33 वर्षीय कॉरपोरेट प्रोफेशनल और पूर्व अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में मौत हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स और बाद की घटनाओं के आधार पर यह धारणा बनाई जा रही है कि निष्पक्ष जांच कथित तौर पर न्यायिक प्रभाव के कारण प्रभावित हुई हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा रखे गए नोट में कहा गया है कि मृतका की सास एक रिटायर्ड जिला जज हैं, जिसके कारण संस्थागत स्तर पर मामले को दबाने के आरोप लगाए जा रहे हैं. नोट में मानसिक प्रताड़ना, दहेज से जुड़ी मांगों और कथित संस्थागत कवर-अप के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है.

नोट में मुख्य न्यायाधीश से यह निर्देश मांगा गया था कि क्या इस मामले में जांच की निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी से जुड़े मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लिया जाए. साथ ही सुझाव दिया गया था कि यदि अनुमति दी जाती है तो मामले को “सुओ मोटू रिट पिटीशन (क्रिमिनल)” के रूप में दर्ज कर संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया मजबूत करने के निर्देश दिए जाएं.

मृतका के परिवार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है. परिवार ने यह आरोप भी लगाया है कि न्यायपालिका से ससुराल पक्ष के गहरे संबंध होने के कारण जांच प्रभावित हो सकती है.

मामले में मृतका के परिवार ने हाईकोर्ट का भी रुख किया था. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि सभी संदेह दूर करने और आम लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए दूसरा पोस्टमार्टम जरूरी है.इसके बाद अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम गठित कर भोपाल जाकर दूसरा पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए थे.

अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा दोनों प्रार्थनाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में स्वत: संज्ञान का मामला औपचारिक रूप से दर्ज हो चुका है और इस पर सोमवार को सुनवाई होगी.

बता दें कि ट्विशा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की इस मॉडल-एक्टर के परिवार ने उनके ससुराल वालों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनकी बेटी को मौत के मुंह में धकेल दिया. वहीं, ससुराल वालों का दावा है कि ट्विशा को नशे की लत थी. हालांकि, ट्विशा का पोस्टमॉर्टम AIIMS भोपाल में ही किया गया था, लेकिन उनके परिवार ने प्रक्रिया में कुछ कमियों का हवाला देते हुए दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग की थी.

ट्विशा शर्मा के परिजनों ने ससुराल वालों पर दहेज की मांग, मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना और जबरदस्ती गर्भपात करवाने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं. पहले भोपाल की निचली अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने निर्देश दिया कि दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स एक विशेष टीम करेगी.

NATIONAL : जलवायु परिवर्तन और गर्मी ने उड़ाई नींद: डिहाइड्रेशन के बढ़े मरीज, सूरज ढलने के बाद भी नहीं मिल रही राहत

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भारत में गर्मी अब केवल दिन तक सीमित नहीं रही, बल्कि रातें भी लगातार गर्म और उमस भरी हो रही हैं। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन, बढ़ती नमी और अनियोजित शहरीकरण के कारण हीटवेव पहले से ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। 2010 से 2024 के बीच रात के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों, बुजुर्गों, बच्चों और गरीब आबादी पर पड़ रहा है।

भारत में गर्मी अब केवल दोपहर की झुलसाती धूप तक सीमित नहीं रही। हालात ऐसे हो चुके हैं कि दिन में लू लोगों को झुलसा रही है, तो रात में भी तापमान और उमस शरीर को ठंडा नहीं होने दे रहे। पंखे और कूलर के बावजूद लोगों की नींद टूट रही है, जबकि अस्पतालों में हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं। शहर धीरे-धीरे ऐसे हीट ट्रैप में बदलते जा रहे हैं, जहां सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती

क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट व्हाई इंडियाज हीटवेव्स फील मोर ब्रूटल दैन बिफोर ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती नमी, सूखी मिट्टी और बेतरतीब शहरीकरण मिलकर भारत की गर्मियों को पहले से कहीं ज्यादा लंबा, दमघोंटू और खतरनाक बना रहे हैं। देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दिन और रात दोनों असामान्य रूप से गर्म बने हुए हैं।

कई शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज हो रहा है। इसका मतलब यह है कि सूर्यास्त के बाद भी शरीर को ठंडक नहीं मिल पा रही। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार 2010 से 2024 के बीच भारत में रात के औसत न्यूनतम तापमान में हर दशक करीब 0.21 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 35 में रातें लगातार गर्म होती जा रही हैं।

NATIONAL : देश के बड़े शहरों में 25-60% तक की पानी बर्बादी:मुंबई में भोपाल-इंदौर की जरूरत से ज्यादा पानी बर्बाद; इंदौर में 65% पानी लीकेज

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देश के लगभग सभी बड़े शहरों में 25-60% तक पानी बर्बाद हो रहा है। या तो पेयजल लाइनों में बड़े लीकेज हैं या फिर पाइपलाइन में अवैध कनेक्शन जोड़ लिए गए हैं। हालात ये हैं कि मुंबई को रोज लगभग 3,850 एमएलडी (मिलियन लीटर रोज) पानी सप्लाई होता है।

इसमें से करीब 30% लीकेज माना जाता है। रोज लगभग 1000 एमलडी पानी पाइपलाइन लीकेज व अन्य तरह से बेकार जा रहा है। ये बर्बाद पानी इंदौर-भोपाल की कुल रोजाना जरूरत से भी ज्यादा है। इन दोनों शहरों को रोज 900 एमएलडी ही पानी चाहिए।

स्मार्ट सिटी और अमृत 2.0 जैसी परियोजनाओं के तहत 2016 में शहरी निकायों ने सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (एससीएडीए) प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके तहत लीकेज और चोरी वाले नॉन रिवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) को घटाकर 20% पर लाने का लक्ष्य था।

इस प्रोजेक्ट के तहत पिछले 10 साल में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी हालात नहीं बदले। भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में पानी का लीकेज 35%-65% तक है। भोपाल ने तो 2021 तक ही पेयजल लीकेज 16% करने का दावा किया था। लेकिन कैग रिपोर्ट 2019 के मुताबिक भोपाल में वाटर लीकेज 48% है। इंदौर में 65% तक है।

NATIONAL : कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा विदेशी मीडिया में भी, जानिए इसे वहाँ कैसे देखा जा रहा है?

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इमेज कैप्शन,एआई से तैयार की गई यह तस्वीर पैरोडी पार्टी के लोगो दिखाता है और यह उन कई मीम्स और छोटे वीडियो में शामिल है, जिन्हें सीजेपी ने बनाया ह.भारत में राजनीतिक पार्टियों का जन्म सामान्य तौर पर आंदोलनों से होता है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म 16 मई को सोशल मीडिया पर अचानक से हुआ था.

दरअसल, 15 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, “समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.”

जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई. हालांकि इस आलोचना के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है.

उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल (15 मई को) एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं.”

लेकिन तब तक कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल हो चुका था. 16 मई को 30 साल के अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक गूगल फॉर्म पोस्ट किया, जिसमें लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया.

इमेज कैप्शन,सीजेपी के एक्स अकाउंट को भारत में बैन करने के बाद कॉकरोच इज़ बैक नाम से अकाउंट बनाया गया है
कुछ ही घंटों में अभिजीत को 5,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन मिल गए और इंटरनेट पर शुरू हुआ एक मज़ाक धीरे-धीरे सार्वजनिक असंतोष, हास्य और राजनीतिक हताशा को अभिव्यक्त करने वाले एक अनौपचारिक संगठन में बदल गया.

अभिजीत इस समय अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पार्टी को लेकर कहा, ”कॉकरोच युवाओं की उस असहमति के भाव को व्यक्त करती है, जो माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी कहा था. भारत जैसे लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं था, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षक माना जाता है. उन्होंने आलोचना करने के कारण युवाओं को अपमानित किया.”

देखते ही देखते भारत में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स लाखों में हो गए. इंस्टाग्राम पर तो कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स दो करोड़ के क़रीब हो गए हैं जो सत्ताधारी बीजेपी के फॉलोवर्स से दोगुने हैं.सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच पार्टी की चर्चा भारत में आम लोगों की बातचीत में भी शुरू हो गई है. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस पर अच्छी ख़ासी चर्चा हो रही है.

ब्रिटिश न्यूज़ वेबसाइट द गार्डियन ने 21 मई को कॉकरोच जनता पार्टी पर विस्तार से एक कहानी प्रकाशित की है.

गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”कॉकरोच जनता पार्टी को लाखों भारतीय युवा अपनी हताशा और ग़ुस्से को व्यक्त करने के माध्यम के रूप में अपना रहे हैं. कॉकरोच को चुनाव चिह्न बनाने वाली एक पैरोडी राजनीतिक पार्टी ने हास्यास्पद और व्यंग्यात्मक हास्य को विरोध के माध्यम में बदलते हुए भारतीय सोशल मीडिया पर विस्फोटक लोकप्रियता हासिल कर ली है.”

”भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अव्यवस्था का मज़ाक उड़ाने वाले मीम्स और छोटे वीडियो सोशल मीडिया पर भर गए हैं. लाखों यूज़र्स अब कॉकरोच, एक ऐसा कीड़ा जो कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है, को संघर्ष और टिके रहने के प्रतीक के रूप में व्यंग्यात्मक अंदाज़ में अपना रहे हैं. इस ऑनलाइन आंदोलन का विस्तार असाधारण रूप से रहा है.

द गर्डियन से सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा , “यह सब जानबूझकर नहीं हुआ. इसमें लोगों की दिलचस्पी युवाओं के भीतर बढ़ती हताशा को दर्शाती है. असल में युवा बहुत निराश हैं. उनके पास अपनी बात कहने का कोई माध्यम नहीं है. वे सरकार से बेहद नाराज़ हैं.”

गार्डियन ने लिखा है, ”दीपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी 2012 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी थी. दीपके कहते हैं, हमें समझना होगा कि पाँच साल पहले तक कोई भी मोदी या सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने को तैयार नहीं था लेकिन अब समय बदल रहा है.”

क़तर के प्रसारक अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”सीजेपी के अभियान से जुड़ने वालों में कई बड़े राजनीतिक नाम भी शामिल हैं. इनमें पश्चिम बंगाल से टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद शामिल हैं. इसी साल केंद्र सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुए नौकरशाह आशीष जोशी भी उन शुरुआती लोगों में थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में पढ़ने के बाद पार्टी में रजिस्ट्रेशन कराया.”

जोशी ने अल जज़ीरा से कहा, “पिछले एक दशक में देश में बहुत डर का माहौल रहा है. लोग खुलकर बोलने से डरते हैं. भारत इतना नफ़रत से भर गया है कि सीजेपी ताज़ी हवा के झोंके जैसी लगती है. युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने का एक दूसरा पहलू भी है. कॉकरोच बेहद जुझारू जीव होते हैं. वे हर हाल में जीवित रहते हैं.”

अल जज़ीरा ने लिखा है, ”हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया जेन-ज़ी आंदोलनों का बड़ा केंद्र बना है. श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में युवा आंदोलनों ने सरकारों को गिरा दिया. दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश भारत भी कई समस्याओं से जूझ रहा है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन असमानता, बेरोज़गारी और महंगाई बढ़ी है. भारत हर साल 80 लाख से अधिक ग्रैजुएट तैयार करता है लेकिन उनमें बेरोज़गारी दर 29.1 प्रतिशत है.”

ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि महज़ पांच दिन पुराना एक समूह, जो जेन-ज़ी की चिंताओं को आवाज़ देता है, भारत में वायरल हो गया है.

रॉयटर्स ने लिखा है, ”यह इंस्टाग्राम पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से भी अधिक फॉलोअर्स हासिल कर चुका है. सीजेपी राजनीति, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर हल्के व्यंग्य और हास्य के साथ चर्चा कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी जो ख़ुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती है के इंस्टाग्राम पर 90 लाख से भी कम फॉलोअर्स हैं जबकि सीजेपी के क़रीब दो करोड़ फॉलोवर्स हो चुके हैं.”

रॉयटर्स ने लिखा है, ”सीजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर ग्राफिक्स और वीडियो पोस्ट किए जाते हैं, जिनमें मीडिया की स्वतंत्रता से लेकर संसद और मंत्रिमंडल की आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने जैसे मुद्दों तक पर चर्चा होती है. इसने हाल ही में नीट प्रवेश परीक्षा रद्द किए जाने के मुद्दे को भी उठाया, जिसका प्रश्न नपत्र लीक हो गया था और इससे लगभग 23 लाख छात्र प्रभावित हुए.”

रॉयटर्स ने लिखा है, ”भारत के युवाओं के भीतर बेचैनी इस सप्ताह प्रकाशित डीलॉइट ग्लोबल सर्वे में भी दिखाई दी.सर्वे में कहा गया कि भारत की जेन-ज़ी आबादी यानी 1995 से 2007 के बीच जन्मे युवा रोज़गार की कमी और बढ़ती महंगाई से बुरी तरह प्रभावित हुई है. सर्वे के अनुसार, “जेन-ज़ी में वित्तीय तनाव ज़्यादा है. बड़ी संख्या में युवा घर ख़रीदने की मुश्किलों और आर्थिक असुरक्षा की बात कर रहे हैं.”

भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और यहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भी रहती है. देश की 1.42 अरब आबादी में लगभग 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं.सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में बेरोज़गारी दर 3.1 प्रतिशत थी. लेकिन 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में यह दर कहीं अधिक, 9.9 प्रतिशत रही. इसमें शहरी क्षेत्रों में 13.6 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 8.3 प्रतिशत बेरोज़गारी दर्ज की गई.

यूएई की न्यूज़ वेबसाइट खलीज टाइम्स ने भी सीजेपी पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. खलीज टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”हालांकि इस आंदोलन का नाम किसी राजनीतिक पार्टी जैसा है, लेकिन फ़िलहाल ऐसा नहीं लगता कि यह पार्टी चुनाव लड़ेगी. क्या भारत अगला नेपाल या बांग्लादेश बनेगा? सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अकाउंट पर पिन की गई पोस्ट में इसका जवाब नहीं में दिया है.

उन्होंने लिखा, “मैं यह बिल्कुल साफ़ कर देना चाहता हूँ कि इस तरह की तुलना करके भारत की जेन-ज़ी का अपमान या उसे कमतर मत आंकिए. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के युवा बदलाव लाने के लिए असंवैधानिक रास्तों का सहारा नहीं लेंगे.

उन्होंने लिखा, “इस देश के युवा परिपक्व, जागरूक और राजनीतिक रूप से सचेत हैं. वे अपने संवैधानिक अधिकारों को समझते हैं और अपनी असहमति शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीक़ों से व्यक्त करेंगे.”

NATIONAL : कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले का विहिप ने किया स्वागत, पूरे देश में गौहत्या पर रोक की मांग की

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में पशु बलि पर रोक लगाने वाले सरकारी आदेश को सही ठहराया है। विश्व हिंदू परिषद ने इस फैसले का स्वागत करते हुए पूरे देश में गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग की।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के पशु बलि से जुड़े आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया है। यह आदेश ईद-उल-अजहा के दौरान पशु बलि को नियंत्रित करने के लिए दिया गया था। विहिप ने उन राज्यों से भी कानून बनाने की अपील की है जहां अभी तक गौहत्या पर प्रतिबंध नहीं है।

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक वीडियो संदेश में हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश से गौहत्या का पाप हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार के नोटिस में साफ कहा गया है कि बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी जानवर की बलि नहीं दी जाएगी। इसमें गाय, बैल, बछड़े, सांड और भैंस जैसे जानवर शामिल हैं। पशु मालिकों को अधिकारियों से यह प्रमाण पत्र लेना होगा कि जानवर बलि के लिए फिट है।

जैन ने दावा किया कि कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि गौहत्या मुस्लिम समुदाय का कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन राज्यों ने गौहत्या पर रोक लगाई है, उनका फैसला सही है। उन्होंने राज्यों से पूछा कि वे गौहत्या का समर्थन करते हैं या संविधान के साथ खड़े हैं। विहिप नेता ने कहा कि भारत के लगभग तीन-चौथाई हिस्से में गौहत्या पर पहले से ही रोक है। उन्होंने पूरे देश में इसे लागू करने की मांग दोहराई ताकि हिंदू भावनाओं और संविधान का सम्मान हो सके।

उन्होंने कुछ समुदाय विशेष नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने समुदाय को उकसा रहे हैं। जैन के अनुसार, दुनिया में कहीं भी धर्म गौहत्या का आदेश नहीं देता, तो फिर भारत में ऐसा क्यों हो रहा है? उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया। विहिप और बजरंग दल ने कहा है कि वे कानून को पूरी तरह लागू करवाएंगे। बजरंग दल की टीमें ईद-उल-अजहा के दौरान निगरानी रखेंगी ताकि गौहत्या को रोका जा सके।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें बिना सर्टिफिकेट के बलि देने पर सजा की चेतावनी दी गई है। साथ ही, खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस 2018 के एक पुराने आदेश को लागू करने के लिए है, इसलिए इस पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।

NATIONAL : सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी पर सख्त हुए धर्मेंद्र प्रधान, छात्रों की शिकायतों पर मांगी रिपोर्ट

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सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों और पेमेंट समस्याओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। छात्रों और अभिभावकों ने सर्वर डाउन, पेमेंट फेल और स्कैन कॉपी में दिक्कतों की शिकायत की थी। सीबीएसई ने आवेदन की तारीख 24 मई तक बढ़ा दी है। बोर्ड ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों के शैक्षणिक हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार सख्त हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। छात्रों ने पोर्टल ठप होने, पेमेंट फेल होने और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी में दिक्कतों की शिकायत की थी। बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसी दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई।

क्या पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी हुई?
सूत्रों के मुताबिक शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई अधिकारियों से पूछा है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान सर्वर डाउन क्यों हुआ और पेमेंट गेटवे में दिक्कतें कैसे आईं। छात्रों का कहना था कि आवेदन करते समय वेबसाइट बार-बार बंद हो रही थी। कई लोगों का भुगतान कट गया लेकिन आवेदन पूरा नहीं हुआ। कुछ छात्रों ने यह भी शिकायत की कि उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी धुंधली थी या कुछ पन्ने गायब थे। कई छात्रों ने कॉपियों में उत्तरों के गलत मूल्यांकन और बिना जांचे जवाबों को लेकर भी सवाल उठाए। शिक्षा मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है कि तकनीकी तैयारी में कहां कमी रह गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों को क्या भरोसा दिया?
सीबीएसई ने बयान जारी कर कहा है कि बोर्ड छात्रों के शैक्षणिक हितों की पूरी सुरक्षा करेगा। बोर्ड के अनुसार इस साल ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम प्रणाली के तहत 98.6 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद छात्रों को स्कैन कॉपी लेने, सत्यापन कराने और री-इवैल्यूएशन का मौका दिया गया। बोर्ड ने माना कि बहुत कम समय में भारी संख्या में आवेदन आने के कारण पोर्टल पर दबाव बढ़ गया था। इसी वजह से कुछ समय के लिए तकनीकी दिक्कतें आईं। हालांकि बोर्ड का कहना है कि सभी शिकायतों पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है।

आवेदन की तारीख क्यों बढ़ाई गई?
सीबीएसई ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए री-इवैल्यूएशन और सत्यापन के आवेदन की अंतिम तारीख एक दिन बढ़ाकर 24 मई कर दी गई है। इसके अलावा जिन छात्रों को अभी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी नहीं मिली है, उनके लिए पोर्टल आखिरी कॉपी भेजे जाने के बाद भी दो दिन तक खुला रहेगा। बोर्ड का कहना है कि इसका मकसद किसी भी छात्र को नुकसान से बचाना है। इससे पहले भी ओएसएम प्रणाली को लेकर कुछ छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई थी, जिसके बाद बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की थी।

फीस में बदलाव से छात्रों को क्या राहत मिली?
सीबीएसई ने इस साल फीस ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया है। अब छात्र सिर्फ 100 रुपये देकर अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं, जबकि पहले इसके लिए 700 रुपये देने पड़ते थे। इसी तरह उत्तर पुस्तिका सत्यापन की फीस 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी गई है। वहीं, पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये तय किए गए हैं। बोर्ड का कहना है कि फीस कम करने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा छात्रों को पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ देना है। हालांकि तकनीकी दिक्कतों ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया, लेकिन अब सरकार और बोर्ड दोनों इसे सुधारने में जुट गए हैं।

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