भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम 26 मई को अपने 30 साल पूरे करने जा रही है। कर्नाटक के बीदर में विशेष समारोह आयोजित होगा। टीम ने अब तक देश-विदेश में 800 से ज्यादा हवाई शो किए हैं। आधुनिक हॉक मार्क-132 विमानों से लैस यह टीम भारतीय वायुसेना की ताकत और अनुशासन का प्रतीक बन चुकी है।
भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम अपने शानदार सफर के 30 साल पूरे करने जा रही है। देश और दुनिया के आसमान में अपनी हैरतअंगेज कलाबाजियों से पहचान बनाने वाली यह टीम 26 मई को कर्नाटक के बीदर एयरबेस में विशेष समारोह के साथ अपना स्थापना दिवस मनाएगी। वायुसेना की यह टीम पिछले तीन दशकों से भारतीय वायुसेना की ताकत, अनुशासन और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करती रही है। सूत्रों के अनुसार समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी हिस्सा ले सकते हैं और संभव है कि वह खुद विमान उड़ाते हुए नजर आएं।
सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम का गठन 27 मई 1996 को कर्नाटक के बीदर स्थित एयरफोर्स स्टेशन में किया गया था। शुरुआत में टीम ने किरण मार्क-2 विमानों के साथ उड़ान भरना शुरू किया। इसके बाद सितंबर 1996 में कोयंबटूर में टीम ने अपना पहला सार्वजनिक हवाई प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। साल 2006 में इस टीम को औपचारिक रूप से 52 स्क्वाड्रन ‘शार्क्स’ के रूप में पहचान मिली। वायुसेना के लिए यह टीम केवल प्रदर्शन का हिस्सा नहीं रही, बल्कि देश की हवाई ताकत और पेशेवर क्षमता का प्रतीक बन गई।
साल 2015 में सूर्यकिरण टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए आधुनिक हॉक मार्क-132 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया। इन विमानों के आने के बाद टीम की गति, संतुलन और प्रदर्शन क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इन जेट विमानों की मदद से टीम और ज्यादा सटीक तथा जटिल हवाई करतब दिखाने लगी। यही कारण है कि सूर्यकिरण टीम आज दुनिया की चुनिंदा बेहतरीन एरोबेटिक टीमों में गिनी जाती है।
बीते 30 वर्षों में सूर्यकिरण टीम 800 से अधिक हवाई शो कर चुकी है। चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, लाओस, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में टीम ने अपने प्रदर्शन से दुनिया को प्रभावित किया। हाल ही में चेन्नई तट पर हुए एयर शो को देखने रिकॉर्ड 17 लाख लोग पहुंचे थे। वहीं साल 2026 में टीम ने पहली बार हिमालयी क्षेत्र के आसमान में भी अपने करतब दिखाए। सूर्यकिरण टीम को भारतीय वायुसेना का “हवाई राजदूत” भी कहा जाता है क्योंकि यह टीम हर प्रदर्शन में देश की शक्ति और गौरव का संदेश देती है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज से भारत के दौरे पर पहुंच गए हैं। वे ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो आज से 26 मई तक भारत के चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पहुंच गए हैं। विदेश मंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख विषय रहेगा। क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए आ रहे मार्को रूबियो के एजेंडे में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय सबसे अहम रहेंगे। इस दौरान आधुनिक रक्षा उपकरणों की तकनीक के हस्तांतरण पर चर्चा होने की संभावना भी है.
भारत रवाना होने से पहले वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका ऊर्जा, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करना है।
ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के मौकों पर होगी चर्चा- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच दोनों देश आपूर्ति सुरक्षा और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। हालांकि किसी नई नीति या बड़े समझौते की आधिकारिक घोषणा फिलहाल नहीं की गई है।अमेरिकी दूतावास का संदेश- अमेरिकी दूतावास ने इस यात्रा को लेकर एक्स पर लिखा कि मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साझेदारी इस दौरे का केंद्रीय संदेश है। क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने तक, रुबियो की भारत यात्रा क्वॉड साझेदारी का महत्व रेखांकित करती है।चार शहरों का दौरा करेंगे रूबियो- अपने प्रवास के दौरान मार्को रूबियो कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे। यह दौरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मार्को रूबियो आज सुबह कोलकाता पहुंचें हैं, वहां एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह नई दिल्ली आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता पहुंचने की जानकारी दी है।
विदेश विभाग की जानकारी के अनुसार रूबियो अपने दौरे के दौरान राजधानी दिल्ली सहित भारत के प्रमुख शहरों का दौरा करेंगे और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। रूबियो के इस दौरे को द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूबियो स्वीडन में नाटो के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद भारत रवाना हुए हैं। उन्होंने स्वीडन रवाना होने से पहले कहा था कि वॉशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी को काफी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का इच्छुक है। अमेरिका उतनी ऊर्जा की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जितनी नई दिल्ली खरीदने को तैयार है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक सहयोग मजबूत करने के लिए भारत 26 मई को क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक यह बैठक स्वतंत्र और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र का साझा नजरिया आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी। बैठक में पिछली क्वॉड बैठकों में लिए गए निर्णयों और सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श भी किया जाएगा। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्री जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। सभी नेताओं के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिष्टाचार भेंट किए जाने की संभावना है।
यह बैठक वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत का संकल्प दोहराना इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है। मुख्य बैठक के इतर होने वाली द्विपक्षीय वार्ताएं भारत को अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने रणनीतिक, व्यापारिक और रक्षा संबंधों को और गहरा करने का मौका देंगी। राजधानी में इस बैठक का आयोजन वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है।
केंद्र सरकार के डीपीआईआईटी (DPIIT) विभाग ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए ‘भव्य योजना’ (BHAVYA Scheme) के दिशानिर्देश जारी किए हैं. इस योजना के तहत अगले 6 सालों (2026-27 से 2031-32) में ₹33,660 करोड़ के भारी-भरकम बजट से देश भर में 100 अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे.
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब (उत्पादन केंद्र) बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले डीपीआईआईटी (DPIIT-उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) ने आज (23 मई 2026) ‘भव्य योजना’ (BHAVYA Scheme) को लागू करने के लिए दिशानिर्देश (Operational Guidelines) जारी कर दिए हैं.
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर में निवेश के लिए पूरी तरह तैयार (Investment-Ready) और विश्व स्तरीय इंडस्ट्रियल पार्क बनाना है. इस योजना को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएम गति शक्ति’ के सपनों को सच करने के लिए तैयार किया गया है. आइए इस पूरी योजना की हर छोटी-बड़ी बात को समझते हैं.
भव्य योजना (BHAVYA) की सबसे मुख्य बातें इस योजना के स्वरूप और नियमों को नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
कुल बजट और समय सीमा: इस केंद्रीय योजना के लिए कुल ₹33,660 करोड़ का वित्तीय बजट तय किया गया है. इसके तहत साल 2026-27 से 2031-32 के बीच (6 सालों में) पूरे देश में 100 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे.
पहला चरण (Phase 1): शुरुआत में पहले चरण के तहत 50 इंडस्ट्रियल पार्कों को चुना जाएगा. इनका चुनाव राज्यों के बीच एक निष्पक्ष कम्पटीशन (Challenge-Based Competitive Selection) के आधार पर होगा.
जमीन की जरूरी सीमा (Land Requirement): सामान्य राज्यों (मैदानी इलाकों) के लिए पार्क का आकार कम से कम 100 एकड़ होना जरूरी है. पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर (North-East) के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और छोटे राज्यों के लिए यह सीमा कम से कम 25 एकड़ रखी गई है. योजना के तहत 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार किया जा सकता है.
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां आने वाले निवेशकों और कंपनियों को फैक्ट्री शुरू करने के लिए कोई कागजी या बुनियादी ढांचा खुद नहीं बनाना होगा. यहां सब कुछ पहले से तैयार (Plug-and-Play) मिलेगा. इन पार्कों में ये वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं दी जाएंगी:
राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को बहुत कड़े और पारदर्शी पैमानों पर परखा जाएगा. पार्कों का चुनाव करते समय देखा जाएगा कि वहां मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (सड़क, रेल और पोर्ट से जुड़ाव) कैसी है, जमीन कितनी उपयुक्त है, डिजिटल गवर्नेंस की क्या तैयारी है और लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना यह प्रोजेक्ट कैसे चलेगा. इसमें नए (Greenfield) और पुराने लेकिन पात्र (Brownfield) दोनों तरह के पार्कों को शामिल किया जा सकता है.
भव्य योजना के तहत बनने वाले हर एक इंडस्ट्रियल पार्क को चलाने और संभालने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक विशेष कंपनी बनाई जाएगी, जिसे स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) कहा जाता है. यह एसपीवी ही पार्क की प्लानिंग, विकास, मैनेजमेंट, नए निवेशकों को जमीन सौंपने और भविष्य में पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख के लिए जिम्मेदार होगी. सरकार इस एसपीवी में अपनी तरफ से इक्विटी (पूंजी) के रूप में वित्तीय मदद देगी, जो कि एसपीवी को ट्रांसफर की गई जमीन की वैल्यू और काम के माइलस्टोन (लक्ष्यों) को पूरा करने पर निर्भर करेगी.
इस योजना में देश के बड़े प्राइवेट डेवलपर्स (निजी कंपनियों) को भी शामिल होने का पूरा मौका दिया गया है. वे भी प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक एसपीवी के जरिए इन पार्कों को विकसित कर सकते हैं, बशर्ते वे पारदर्शिता और जवाबदेही के कड़े सरकारी नियमों का पालन करें. इसके अलावा, भव्य योजना को केंद्र और राज्य सरकार की अन्य बड़ी योजनाओं (जैसे लॉजिस्टिक्स, स्किलिंग और रिन्यूएबल एनर्जी मिशन) के साथ जोड़ा (Convergence) जाएगा ताकि पैसों और संसाधनों की बचत हो सके.
NICDC संभालेगी कमान: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) को इस योजना की मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (PMA) बनाया गया है, जो पूरे काम को लागू और मॉनिटर करेगी.GIS से होगी ट्रैकिंग: पार्कों के निर्माण की प्रगति को सैटेलाइट और GIS-बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए लाइव ट्रैक किया जाएगा.कमेटी रखेगी नजर: समय-समय पर ऑडिट होगा और डीपीआईआईटी (DPIIT) के सचिव की अध्यक्षता वाली नेशनल लेवल स्टीयरिंग कमेटी पूरे प्रोजेक्ट की सर्वोच्च निगरानी करेगी.
‘भव्य योजना’ के इन नियमों का जारी होना भारत के औद्योगिक इतिहास में एक बहुत बड़ा कदम है. इससे विदेशी कंपनियों को भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए एक ऐसा बेंचमार्क इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा जो चीन या वियतनाम को कड़ी टक्कर दे सकता है. जब देश में 100 नए औद्योगिक शहर जैसे पार्क बनकर तैयार होंगे, तो इससे न केवल हमारी घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए और शानदार अवसर पैदा होंगे.
CFD अनिल चौहान ने शिर्डी के NIBE डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान अपनी बात रखी. उन्होंने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और टेक्निकल इनोवेशन के लिए उभरते हुए केंद्र के तौर पर बताया. नई दिल्ली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने शनिवार को भविष्य में होने वाले युद्ध को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भविष्य में युद्ध कई मोर्चों पर लड़े जाएंगे. इनमें जमीन, हवाल, समुद्र के अलावा साइबर स्पेस और कॉन्गिटिव वॉरफेयर शामिल है.
उन्होंने शिर्डी के NIBE डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान अपनी बात रखी. उन्होंने शहर को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और टेक्निकल इनोवेशन के लिए उभरते हुए केंद्र के तौर पर बताया.
चौहान ने उद्घाटन के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि मॉर्डन वॉरफेयर तेजी से पारंपरिक मैनपावर और प्लेटफॉर्म ऑपरेशंस से आगे बढ़ रहे हैं. अब एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और साइबर सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी नए मोर्चों को आकार दे रही हैं.
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध बहुक्षेत्रीय होंगे. जहां जमीन, समुद्र, साइबर स्पेस, कॉन्गिटिव वॉरफेयर मिलकर काम करेंगे. यानी भविष्य के युद्ध भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे. युद्ध आने वाले समय में सूचना नेटवर्क, डिजिटल इकोसिस्टम, साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा वातावरण भी इस युद्ध क्षेत्र का हिस्सा बन जाएंगे.
जनरल चौहान ने कहा है कि भविष्य के संघर्षों में तकनीकी इनोवेशन अहम भूमिका निभाएंगे. साथ ही स्पीड और अनुकूलन क्षमता पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिस्टम, ड्रोन, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म, अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी, सटीक मार करने वाले हथियार और सूचना के क्षेत्र में बढ़त भविष्य के युद्धक्षेत्र को एक निर्णायक रूप दे रहे हैं.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि शिरडी में जो लंबे समय से आध्यात्मिकता और आस्था से जुड़ा रहा है. अब इंडस्ट्रियल और डिफेंस डेवलपमेंट, मॉर्डन टेक्नोलॉजी का अद्भुत संगम बनकर उभरा है.
उन्होंने कहा कि भारत का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन 1.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. वहीं डिफेंस इम्पोर्ट 38 हजार करोड़ रुपए को पार कर गया है. इससे भारत में बने डिफेस प्रोडक्ट 100 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने युवा इंजीनियर्स और इनोवेटर्स से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया है. इस कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस भी शामिल हुए.
ग्वालियर से सामने आया नवविवाहित जोड़े का दोहरा सुसाइड केस अब एक ऐसी मिस्ट्री बन चुका है, जिसने पुलिस प्रशासन के भी होश उड़ा दिए हैं. हुरावली लिंक रोड की मेघा उर्फ ज्योति और पिंटो पार्क के सिद्धार्थ कांदिल की मौत ने कई ऐसे सुलगते सवाल पीछे छोड़ दिए हैं, जिनका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है. 25 दिन पहले जिस घर से धूमधाम से बारात निकली थी, वहां से अब दो अर्थियां उठ चुकी हैं. सात जन्मों का सफर महज पांच दिन के साथ के बाद श्मशान घाट पर जाकर खत्म हो गया.
25 दिन की शादी, 5 दिन का साथ और 48 घंटे में दो मौतें… दूल्हा-दुल्हन को था किस बात का गम? ग्वालियर में साइलेंट सुसाइड मिस्ट्री की पॉइंट टू पॉइंट जो शादियां धूमधाम से शुरू होती हैं, अमूमन उनके पीछे खुशियों की एक लंबी दास्तान होती है. लेकिन मध्य प्रदेश में ग्वालियर के हुरावली लिंक रोड और पिंटो पार्क इलाके की यह कहानी किसी खौफनाक सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है. महज 25 दिन पहले जिस घर से शहनाइयां गूंजी थीं, वहां आज दोनों परिवारों में ऐसा सन्नाटा है कि कोई रोने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा. सात जन्मों का वादा सिर्फ 5 दिन के साथ में ही दम तोड़ गया. पहले 23 साल की नई नवेली दुल्हन मेघा उर्फ ज्योति ने अपने मायके में फांसी लगाई, और ठीक 48 घंटे बाद 26 वर्षीय पति सिद्धार्थ कांदिल ने उसी दूल्हे के साफे से बाथरूम में फंदा बनाकर अपनी जान दे दी.
इस दोहरे सुसाइड ने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन 5 दिनों में बंद कमरे के भीतर ऐसा क्या हुआ था, जिसने दो हंसते-खेलते युवाओं को मौत के रास्ते पर धकेल दिया.इस पूरे दर्दनाक घटनाक्रम को समझने के लिए इन तारीखों को देखना जरूरी है, जो किसी भी हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ने के लिए काफी हैं.
25 अप्रैल 2026 : हुरावली के रहने वाले गुरुवीर सिंह ने अपनी बेटी मेघा की शादी पिंटो पार्क निवासी ठेकेदार सिद्धार्थ कांदिल से बड़े ही धूमधाम से की. शादी में पानी की तरह पैसा बहाया गया, दोनों तरफ खुशियां थीं.
1 मई 2026 : शादी के महज 5 दिन बाद रस्मों के मुताबिक मेघा अपने मायके लौट आई. ऊपरी तौर पर वह बेहद खुश दिख रही थी.
20 मई 2026 : दोपहर मेघा के पिता एक रिश्तेदार की गमी में गए थे. घर पर मां गीता ने जब पहली मंजिल के कमरे में जाकर देखा, तो पैरों तले जमीन खिसक गई. मेघा का शव दुपट्टे के फंदे पर लटका हुआ था. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
22 मई 2026 : सुबह पत्नी की मौत के सदमे में डूबा सिद्धार्थ दो दिनों से गुमसुम था. शुक्रवार सुबह जब पिता परमाल सिंह ने उसे बेड पर नहीं देखा, तो बाथरूम की तरफ गए तो देखा अंदर से दरवाजा बंद था. भतीजे श्यामवीर ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर सिद्धार्थ दूल्हे के साफे के फंदे से लटका हुआ था.
कहते हैं कि शादी की मेहंदी का रंग जितनी देर से छूटता है, रिश्ता उतना ही गहरा होता है. मेघा के हाथों में रची वो मेहंदी अभी पूरी तरह से फीकी भी नहीं पड़ी थी कि उसे कफन में लपेट दिया गया. पिता गुरुवीर सिंह ने अपनी लाडली को विदा करते वक्त जो सपने देखे थे वे 20 मई की दोपहर को एक झटके में टूट गए. वहीं दूसरी तरफ, सिद्धार्थ का अपनी पत्नी के जाने के गम को बर्दाश्त न कर पाना इस कहानी को और ज्यादा मार्मिक और पेचीदा बनाता है. जिस साफे को सिर पर बांधकर वह मेघा को ब्याहने गया था, उसी पवित्र कपड़े को उसने मौत का फंदा बना लिया. महज 48 घंटे के भीतर एक ही मंडप के नीचे बंधा जोड़ा, अलग-अलग श्मशान घाटों पर पंचतत्व में विलीन हो गया.
इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला मोड़ दोनों परिवारों का रवैया है. आम तौर पर ऐसे मामलों में मायके और ससुराल पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगते हैं, लेकिन यहां कहानी बिल्कुल उलट है. हादसे के बाद से दोनों ही परिवारों ने मीडिया और जांच से बनाई दूरी बना ली है. सिद्धार्थ के परिजन इस कदर टूट चुके हैं कि वे शुरुआत में बेटे के शव का पोस्टमॉर्टम तक नहीं कराना चाहते थे. वहीं, मेघा के मायके वालों ने भी इस पूरे मामले पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है.
पुलिस के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि शादी के बाद मेघा सिर्फ 5 दिन ही ससुराल में रही. अगर कोई बड़ा विवाद था, तो मेघा ने मायके आने के तुरंत बाद कदम क्यों नहीं उठाया, वह 1 मई से 20 मई तक मायके में सामान्य रही, फिर अचानक 20 तारीख को ऐसा क्या हुआ जिसने उसे उकसाया. आत्महत्या से पहले दोनों में से किसी ने भी मरने से पहले कोई खत या संदेश नहीं छोड़ा, जो कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
वहीं, पूरे मामले में सीएसपी अतुल सोनी का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू पर बारीकी से काम कर रही है. दोनों मृतकों के स्मार्टफोन जब्त कर लिए गए हैं. उनके डिलीटेड चैट्स, कॉल रिकॉर्डिंग्स CDR, और आखिरी 24 घंटों की सोशल मीडिया एक्टिविटी की जांच की जा रही है. मोबाइल का डेटा रिकवर होते ही यह साफ हो जाएगा कि दोनों के बीच आखिरी बातचीत क्या हुई थी. इसके साथ ही दोनों पक्षों के विस्तृत बयान भी दर्ज किए जाएंगे.
मामला हाई-प्रोफाइल और नवविवाहित जोड़े की संदिग्ध मौत से जुड़ा है. इसलिए पुलिस प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है. मुरार और गोला का मंदिर थाना पुलिस के साथ-साथ अब साइबर एक्सपर्ट्स को इस केस में लगाया गया है. सबूतों से छेड़छाड़ न हो, इसके लिए दोनों घटनास्थलों कमरों को पूरी तरह सीज कर दिया गया है. क्या यह मामला किसी पुराने रिश्ते का था या शादी के बाद उपजा कोई ऐसा गंभीर विवाद जिसे दोनों बर्दाश्त नहीं कर पाए इन तमाम सवालों का जवाब अब सिर्फ फॉरेंसिक लैब में बंद उन दो मोबाइल फोनों के लॉक खुलने के बाद ही सामने आ पाएगा.
अमेरिका और ईरान 60 दिन के युद्धविराम विस्तार के करीब पहुंच गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, ईरान के यूरेनियम भंडार को कम करने और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील जैसे मुद्दे शामिल हैं। ईरान और पाकिस्तान ने अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बातचीत में प्रगति होने के संकेत दिए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों देश 60 दिन के लिए युद्धविराम बढ़ाने के करीब पहुंच गए हैं। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे दोबारा खोलने और ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने या सौंपने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों में ढील देने और कुछ प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी ने कहा कि युद्धविराम वार्ता में सम्मानजनक आधार पर सकारात्मक प्रगति हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कूटनीतिक प्रयास क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता खोल सकते हैं। मोगहदम ने बताया कि पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान वार्ता के बाद उन्हें बातचीत में हुई प्रगति पर बधाई दी। रिपोर्ट के अनुसार ईरान और पाकिस्तान ने मिलकर अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना शामिल है। अब वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपने पर विचार कर सकता है। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देगा और विदेशों में फंसी तेहरान की संपत्तियों को जारी करने पर सहमति दे सकता है। इस समझौते का एक अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे खोलना भी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
रुबियो ने कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। भारत यात्रा पर आए रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि जल्द ही इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान सामने आ सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस मुद्दे का समाधान हर हाल में निकाला जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ लगातार मध्यस्थों के संपर्क में हैं। वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका अब सिर्फ नट-बोल्ट बनाने तक सीमित नहीं। बल्कि अब हम न सिर्फ अपनी जरूरत के सभी हथियार बना रहे हैं और इसमें बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निजी क्षेत्र की कंपनियां निभा रही हैं।
रक्षामंत्री ने आज यह बात महाराष्ट्र के शिरडी नगर में निजी क्षेत्र की रक्षा उत्पादक कंपनी निबे लिमिटेड के आर्टिलरी शेल्स (तोप के गोले) बनानेवाले कारखाने का उद्घाटन करते हुए कही। इस मेगा प्रोजेक्ट का नेतृत्व निबे लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गणेश निबे कर रहे हैं, जो शिरडी के ही मूल निवासी हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का कार्यक्रम, एक नहीं, दो नहीं, बल्कि कई ‘मील के पत्थर’ स्थापित करनेवाला है। पहला तो यह कि तोप के गोले बनानेवाले एक आधुनिक कारखाने का उद्घाटन हो रहा है, जिसकी वार्षिक क्षमता पांच लाख शेल्स बनाने की होगी।
दूसरा, यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम से जुड़े मिसाइल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी जा रही है। तीसरा, अमरीकी कंपनी ब्लैक स्काई के साथ एक ऐसा समझौता किया जा रहा है, जो सैटेलाइट एसेंबलिंग की दिशा में हमारी प्राइवेट इंडस्ट्री को अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक ले जाएगा।सिंह ने कहा कि आज जिस प्लांट का उद्घाटन हो रहा है, वह एडवांस्ड एक्सप्लोजिव्स, आरडीएक्स एवं आधुनिक प्रोपल्सन तकनीक पर आधारित होगा। इसलिए यह प्लांट हमारे सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करते हुए भारत के रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रक्षामंत्री ने रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद एक लंबा समय ऐसा रहा, जब हम अपनी पुरानी क्षमताओं और आधुनिक रक्षा जरूरतों के बीच प्रभावी तालमेल नहीं बिठा सके। इसकी एक वजह रही रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों को पर्याप्त अवसर न मिलना।इसके कारण रक्षा उद्योग मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों एवं आयुध कारखानों तक ही सीमित रहा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने यह समझा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लिए निजी क्षेत्र की ऊर्जा का उपयोग आवश्यक है।
इसलिए नीतिगत सुधार किए गए, एफडीआई लिबरलाइज किया गया, रणनीतिक साझेदारी का मॉडल लाया गया, पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट लाई गई तथा कई योजनाओं के जरिए युवा उद्द्यमियों को प्रोत्साहन दिया गया।इन प्रयासों के फलस्वरूर रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी आज 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हमारा लक्ष्य है कि आनेवाले वर्षों में हम इसे 50 प्रतिशत तक ले जाएं। निबे लि. का यह आर्टिलरी शेल्स बनाने का कारखाना, मिसाइल काम्प्लेक्स और अंतरिक्ष काम्प्लेक्स इसी बदलाव का जीवंत प्रमाण है।
रक्षामंत्री ने निजी क्षेत्र की कंपनियों की दक्षता की तारीफ करते हुए कहा कि आज भारत का निजी क्षेत्र भी भविष्य की युद्ध जरूरतों को अच्छी तरह समझता है और उस दिशा में काम कर रहा है।राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को म्यूनिशन (रक्षा क्षेत्र की सभी जरूरतों) और आटोमेशन का हब बनाने के लिए सबको मिलजुलकर काम करना होगा। तभी देश का सुरक्षा चक्र और अधिक मजबूत होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं, तो हमारी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। इसलिए हमारी सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड सिस्टम्स में मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिले।म्यूनिशन और आटोमेटेड सिस्टम्स में भारत अगुआ बनकर उभरे। इसके लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।
वाशिंगटन, 24 मई (हि.स.)। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस के पास शनिवार शाम हुई गोलीबारी से पूरा इलाका दहल गया। बताया गया है कि घटना के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान समझौते पर कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। गोलीबारी के बाद सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने समूचा इलाका घेर लिया। सुरक्षा के लिए से कुछ समय के लिए व्हाइट हाउस को बंद कर दिया गया। अनहोनी की आशंका के मद्देनजर व्हाइट हाउस को कवर करने वाले मीडिया कर्मियों को तत्काल ब्रीफिंग रूम में जाने का आदेश दिया गया। पता चला है कि गोलीबारी में दो लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीक्रेट सर्विस एजेंट्स की गोलीबारी में घायल एक संदिग्ध ने कुछ देर बाद दम तोड़ दिया।
सीबीएस न्यूज, एबीसी न्यूज और सीएनएन चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के बाहर सीक्रेट सर्विस के चेकपॉइंट के अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी के बाद घायल संदिग्ध को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। गोलीबारी एक राहगीर भी घायल हो गया। सीक्रेट सर्विस के किसी भी एजेंट को कोई नुकसान नहीं हुआ। सीक्रेट सर्विस के प्रवक्ता ने बताया कि घटना के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में ही थे।
जांच अधिकारियों के अनुसार, मारे गए संदिग्ध की पहचान 21 वर्षीय नासिर बेस्ट के रूप में हुई है। बेस्ट का जुलाई 2025 में भी सीक्रेट सर्विस के साथ आमना-सामना हो चुका है। तब उसने व्हाइट हाउस में घुसने की कोशिश की थी। उसे गिरफ्तार कर मनोरोग वार्ड में भेज दिया गया था। यह गोलीबारी व्हाइट हाउस के बाहर 17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू एनडब्ल्यू पर आइजनहावर एग्जीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग के पास हुई। इस दौरान लगभग 15 से 30 गोलियां चलाई गईं। व्हाइट हाउस में मौजूद पत्रकारों के अनुसार उन्हें पूर्वी समयानुसार करीब 6 बजे व्हाइट हाउस परिसर की तरफ से गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। इसके बाद सीक्रेट सर्विस एजेंट्स उन्हें अंदर ले गए। लगभग एक घंटे तक व्हाइट हाउस बंद रहा।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन च्युंग ने पहले बताया था कि शाम चार बजे तक राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में ही थे। इसके बाद कुछ अधिकारियों ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति घटना के समय भी अपने आधिकारिक आवास पर मौजूद थे। परिसर में मौजूद पत्रकार एम्मा निकोलसन कहती हैं कि हम रिकॉर्डिंग की तैयारी कर रहे थे। तभी उन्हें व्हाइट हाउस के पास कई गोलियों की आवाज सुनाई दी। वह तत्काल जमीन पर झुक गईं। इसके बाद व्हाइट हाउस को बंद कर दिया गया। करीब एक घंटे बाद मीडिया को व्हाइट हाउस के नॉर्थ लॉन में वापस आने की अनुमति दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, संदिग्धों ने सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स को निशाना बनाया पर वह कामयाब नहीं हो सके। सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने भी माकूल जवाब दिया। एजेंट्स को भी गोली चलानी पड़ी। यूएस सीक्रेट सर्विस के प्रवक्ता एंथनी गुग्लिएल्मी ने कहा कि एजेंसी ने संदिग्धों के मंसूबे को विफल कर दिया। संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निदेशक काश पटेल ने एक्स पर कहा कि सूचना पाते ही मौके पर हमारे अधिकारी पहुंचे।
सीक्रेट सर्विस और एफबीआई ने एक्स पर कहा कि शनिवार शाम कथित तौर पर गोलियों की आवाज सुनाई देने के बाद व्हाइट हाउस के नॉर्थ लॉन को खाली करवा लिया गया। यहां मौजूद सभी पत्रकारों को ब्रीफिंग रूम ले जाया गया। नॉर्थ लेन में गोली की आवाज सुनाई देने पर पत्रकारों में क्या प्रतिक्रिया हुई, इस पर संवाददाता सेलिना वांग कहती हैं, हम सब लोग तुरंत छुप गए। गोलीबारी बंद होने पर दौड़कर व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफिंग रूम में चले गए।
यह घटना व्हाइट हाउस पत्रकारों के डिनर के एक महीने से भी कम समय बाद हुई है। तब भी गोलियां चली थीं और पत्रकारों के साथ अधिकारियों को मेजों के नीचे छुपना पड़ा था। सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स राष्ट्रपति को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले गए थे।वीडियो फुटेज के अनुसार गोलीबारी का संदिग्ध कोल टॉमस एलन हाथ में शॉटगन लिए एक सुरक्षा चौकी से तेजी से भागा और अपना पीछा कर रहे सीक्रेट सर्विस एजेंट्स पर गोलीबारी की। उस पर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की कोशिश करने का आरोप लगा है। यह घटना व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान वाशिंगटन हिल्टन होटल में हुई थी।
लखनऊ, 24 मई (हि.स.)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में पंजाब किंग्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लखनऊ सुपर जायंट्स को सात विकेट से हराकर प्लेऑफ की दौड़ में खुद को मजबूती से बनाए रखा है। इकाना स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पंजाब ने दमदार बल्लेबाजी के दम पर 197 रन के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की।
पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ सुपर जायंट्स ने निर्धारित 20 ओवर में छह विकेट खोकर 196 रन बनाए। टीम के लिए जोश इंग्लिस ने सबसे बड़ी पारी खेलते हुए 72 रन बनाए और मध्यक्रम में आयुष बडोनी ने तेज बल्लेबाजी करते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया। अंतिम ओवरों में अब्दुल समद ने तेज रन जुटाकर टीम को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि लखनऊ की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। पंजाब के गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में रन गति पर नियंत्रण बनाए रखा। युजवेंद्र चहल और मार्को यानसन ने दो-दो विकेट लेकर विपक्षी टीम को बड़े स्कोर की ओर बढ़ने से रोका।
197 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब की टीम ने आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की। प्रभसिमरन सिंह ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए टीम को तेज शुरुआत दिलाई और अर्धशतकीय पारी खेली। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभालते हुए जिम्मेदारी के साथ खेल को आगे बढ़ाया।
अय्यर ने अपनी पारी के दौरान बेहतरीन शॉट्स लगाए और अंत तक नाबाद रहते हुए टीम को जीत दिलाई। उन्होंने छक्का लगाकर अपना पहला आईपीएल शतक पूरा किया, जो उनकी टी-20 करियर की सबसे यादगार पारियों में शामिल हो गया। उनकी यह कप्तानी पारी पंजाब के लिए बेहद अहम साबित हुई।
इस जीत के साथ पंजाब किंग्स के अंक बढ़ गए हैं और टीम की प्लेऑफ में पहुंचने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वहीं लखनऊ सुपर जायंट्स को इस हार से बड़ा झटका लगा है और उसकी राह अब पहले से अधिक कठिन हो गई है।
जयपुर, 24 मई (हि.स.)। नौतपा शुरू होने से पहले ही राजस्थान भीषण गर्मी और लू की चपेट में आ गया है। प्रदेश के 18 जिलों में रविवार को हीटवेव का ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया गया है। शनिवार को जयपुर समेत कई जिलों में आंधी और हल्की बारिश हुई, लेकिन उमस और गर्मी से लोगों को राहत नहीं मिल सकी। पश्चिमी राजस्थान में सीवियर हीटवेव के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। जैसलमेर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस मापा गया।
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने अगले 2 से 4 दिनों तक तेज गर्मी और लू चलने की चेतावनी जारी की है। सोमवार से नौतपा की शुरुआत हो रही है। इस बार गंगा दशहरा के दिन नौतपा शुरू होने का संयोग बन रहा है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 1980 में बना था।
शनिवार सुबह श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में हल्की बारिश हुई, जबकि दोपहर बाद जयपुर, अलवर, टोंक और सवाई माधोपुर के कुछ इलाकों में आंधी के साथ बूंदाबांदी हुई। जयपुर-अलवर सीमा क्षेत्र में कहीं-कहीं ओले भी गिरे। इसके बावजूद गर्म हवाओं और उमस ने लोगों को बेहाल रखा।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पराबैंगनी विकिरण (यूवी इंडेक्स) बेहद ऊंचे स्तर पर रहेगा। ऐसे में सीधी धूप आंखों और त्वचा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। लोगों को धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
राजधानी जयपुर में दोपहर तक तेज धूप और लू का असर रहा। बाद में मौसम बदला और कई इलाकों में धूलभरी आंधी चली। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई। अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री और न्यूनतम 30.8 डिग्री सेल्सियस रहा। लेकसिटी उदयपुर में गर्मी लगातार बढ़ रही है। गर्मी से राहत के लिए शहर में कई सामाजिक संस्थाओं ने छाछ और ठंडे पानी की नि:शुल्क व्यवस्था की। अजमेर में सुबह से ही तेज गर्मी और उमस बनी रही। अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री और न्यूनतम 29.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों तक राहत की संभावना कम है।
सीकर में देर रात से तेज हवाएं चलीं और शनिवार दोपहर बूंदाबांदी हुई। बादलों के कारण उमस बनी रही। अलवर में दोपहर बाद मौसम बदला और करीब 15 मिनट तक बारिश हुई। हालांकि तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में पारा 46 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई है।
जोधपुर शहर में अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री और न्यूनतम 32 डिग्री सेल्सियस मापा गया। गर्मी और उमस के कारण बाजारों और अस्पतालों में भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कम रही। कोटा में अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस मापा गया। गर्मी का असर वन्य जीवों पर भी दिखाई दे रहा है। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में जानवरों के लिए कूलर और डक्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं।