NATIONAL : ‘रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका अब सिर्फ नट-बोल्ट तक सीमित नहीं’, बोले राजनाथ सिंह

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका अब सिर्फ नट-बोल्ट बनाने तक सीमित नहीं। बल्कि अब हम न सिर्फ अपनी जरूरत के सभी हथियार बना रहे हैं और इसमें बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निजी क्षेत्र की कंपनियां निभा रही हैं।

रक्षामंत्री ने आज यह बात महाराष्ट्र के शिरडी नगर में निजी क्षेत्र की रक्षा उत्पादक कंपनी निबे लिमिटेड के आर्टिलरी शेल्स (तोप के गोले) बनानेवाले कारखाने का उद्घाटन करते हुए कही। इस मेगा प्रोजेक्ट का नेतृत्व निबे लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गणेश निबे कर रहे हैं, जो शिरडी के ही मूल निवासी हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का कार्यक्रम, एक नहीं, दो नहीं, बल्कि कई ‘मील के पत्थर’ स्थापित करनेवाला है। पहला तो यह कि तोप के गोले बनानेवाले एक आधुनिक कारखाने का उद्घाटन हो रहा है, जिसकी वार्षिक क्षमता पांच लाख शेल्स बनाने की होगी।

दूसरा, यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम से जुड़े मिसाइल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी जा रही है। तीसरा, अमरीकी कंपनी ब्लैक स्काई के साथ एक ऐसा समझौता किया जा रहा है, जो सैटेलाइट एसेंबलिंग की दिशा में हमारी प्राइवेट इंडस्ट्री को अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक ले जाएगा।सिंह ने कहा कि आज जिस प्लांट का उद्घाटन हो रहा है, वह एडवांस्ड एक्सप्लोजिव्स, आरडीएक्स एवं आधुनिक प्रोपल्सन तकनीक पर आधारित होगा। इसलिए यह प्लांट हमारे सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करते हुए भारत के रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

रक्षामंत्री ने रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद एक लंबा समय ऐसा रहा, जब हम अपनी पुरानी क्षमताओं और आधुनिक रक्षा जरूरतों के बीच प्रभावी तालमेल नहीं बिठा सके। इसकी एक वजह रही रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों को पर्याप्त अवसर न मिलना।इसके कारण रक्षा उद्योग मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों एवं आयुध कारखानों तक ही सीमित रहा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने यह समझा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लिए निजी क्षेत्र की ऊर्जा का उपयोग आवश्यक है।

इसलिए नीतिगत सुधार किए गए, एफडीआई लिबरलाइज किया गया, रणनीतिक साझेदारी का मॉडल लाया गया, पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट लाई गई तथा कई योजनाओं के जरिए युवा उद्द्यमियों को प्रोत्साहन दिया गया।इन प्रयासों के फलस्वरूर रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी आज 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हमारा लक्ष्य है कि आनेवाले वर्षों में हम इसे 50 प्रतिशत तक ले जाएं। निबे लि. का यह आर्टिलरी शेल्स बनाने का कारखाना, मिसाइल काम्प्लेक्स और अंतरिक्ष काम्प्लेक्स इसी बदलाव का जीवंत प्रमाण है।

रक्षामंत्री ने निजी क्षेत्र की कंपनियों की दक्षता की तारीफ करते हुए कहा कि आज भारत का निजी क्षेत्र भी भविष्य की युद्ध जरूरतों को अच्छी तरह समझता है और उस दिशा में काम कर रहा है।राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को म्यूनिशन (रक्षा क्षेत्र की सभी जरूरतों) और आटोमेशन का हब बनाने के लिए सबको मिलजुलकर काम करना होगा। तभी देश का सुरक्षा चक्र और अधिक मजबूत होगा।

राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं, तो हमारी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। इसलिए हमारी सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड सिस्टम्स में मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिले।म्यूनिशन और आटोमेटेड सिस्टम्स में भारत अगुआ बनकर उभरे। इसके लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।

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