Monday, September 21, 2026
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SPORTS : 6 बॉल में चाहिए थे 15 रन, तिलक वर्मा-विल जैक्स ने पंजाब के मुंह से छीनी जीत, बॉल दर बॉल देखें आखिरी ओवर का रोमांच

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हिमाचल प्रदेश क्रिकेट ऐसोसिएशन स्टेडियम में पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। इस मैच को मुंबई ने 6 विकेट से जीत लिया।

शार्दुल ठाकुर की धारदार गेंदबाजी बाद तिलक वर्मा के तूफानी अर्धशतक से मुंबई इंडियंस ने इंडियन प्रीमियर लीग में गुरुवार को पंजाब किंग्स को छह विकेट से हरा दिया। मेजबान टीम पंजाब किंग्स की लगातार पांचवीं हार है। पंजाब के 201 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई ने तिलक वर्मा (75 रन, 33 गेंद, छह चौके, छह छक्के) के तेजतर्रार अर्धशतक और विल जैक्स (10 गेंद में नाबाद 25, दो चौके, दो छक्के) के साथ उनकी पांचवें विकेट की 20 गेंद में 56 रन की अटूट साझेदारी से 19.5 ओवर में चार विकेट पर 205 रन बनाकर जीत दर्ज की।

सलामी बल्लेबाज रेयान रिकेल्टन (48) ने भी उम्दा पारी खेली। तिलक ने शेरफेन रदरफोर्ड (20) के साथ भी चौथे विकेट के लिए 61 रन जोड़े। हालांकि मैच काफी ज्यादा रोमांच हो गया था। आखिरी ओवर में जीत के लिए मुंबई इंडियंस को 15 रन की दरकार थी। मैच किसी भी और जा सकता था। आइये बॉल दर बॉल जानते हैं कि आखिरी ओवर में क्या-क्या हुआ और कैसे मुंबई ने जीत दर्ज की।

बॉल दर बॉल देखें आखिरी ओवर का रोमांच

पंजाब किंग्स की तरफ से आखिरी ओवर जेवियर बार्टलेट डाल रहे थे।

19.1- जेवियर बार्टलेट की ओवर की पहली गेंद पर विल जैक्स स्ट्राइक पर थे। उन्होंने पहली बॉल पर ही छक्का लगा दिया।

19.2- ओवर की दूसरी गेंद पर विल जैक्स सिर्फ सिंगल ही ले पाए। इसके बाद तिलक वर्मा स्ट्राइक पर आ गए थे।

19.3- ओवर की तीसरी गेंद पर तिलक वर्मा स्ट्राइक पर थे। लेकिन इस बॉल पर कोई रन नहीं आया। यह गेंद डॉट रही। इसके बाद अब मुंबई को 3 गेंद में 8 रन की जरूरत थी।

19.4- ओवर की चौथी बॉल पर तिलक वर्मा ने जेवियर बार्टलेट को शानदार छक्का लगाया। इसके बाद एमआई को जीत के लिए 2 बॉल में 2 रन चाहिए थी।

19.5- ओवर की पांचवीं बॉल पर तिलक वर्मा ने छक्का लगाया और मुंबई को जीत दिला दी।

NATIONAL : विजय के फ्लोर टेस्ट के बाद AIADMK में फूट: बागी गुट ने खोला मोर्चा, क्या तमिलनाडु में भी शिवसेना जैसा ही संकट आने वाला है?

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चेन्नई में अन्नाद्रमुक के भीतर सियासी संग्राम अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी और बागी गुट के बीच टकराव गुरुवार को और गहरा गया। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम और एसपी वेलुमणि अपने समर्थक विधायकों और नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों में जुटे और आगे की रणनीति पर मंथन किया।

दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान अन्नाद्रमुक में खुली बगावत देखने को मिली। बागी गुट के 25 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर सत्तारूढ़ टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद पलानीस्वामी ने कड़ा कदम उठाते हुए शनमुगम, वेलुमणि समेत कई नेताओं और विधायकों को पार्टी पदों से हटा दिया।अब सियासी लड़ाई कानूनी मोर्चे तक पहुंच गई है। शनमुगम-वेलुमणि गुट ने विधानसभा अध्यक्ष से पलानीस्वामी और उनके समर्थक 22 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

बागी गुट का दावा है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान पार्टी व्हिप का पालन 25 विधायकों ने किया, जबकि पलानीस्वामी गुट ने निर्देशों की अनदेखी की।पार्टी सूत्रों के मुताबिक शनमुगम-वेलुमणि खेमे का दावा है कि उनके पास पलानीस्वामी से अधिक विधायकों का समर्थन है। यही वजह है कि यह गुट दोबारा जनरल काउंसिल बैठक बुलाने की मांग भी उठा सकता है।

शनमुगम ने साफ कहा कि जब तक उनके गुट को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे पार्टी मुख्यालय नहीं जाएंगे। स्टालिन ने ली हार की जिम्मेदारीइस बीच एमके स्टालिन ने द्रमुक की चुनावी हार की जिम्मेदारी खुद लेते हुए कहा कि उनकी पार्टी हार के बाद भी अपने विधायकों को रिसार्ट में छिपाने वाली राजनीति नहीं करती।

उन्होंने अन्नाद्रमुक पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के भीतर की स्थिति देखकर आगे क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।अन्नाद्रमुक मुख्यालय पर कड़ी सुरक्षाइसी बीच, चेन्नई स्थित अन्नाद्रमुक मुख्यालय के बाहर गुरुवार को भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पार्टी में बढ़ते विवाद और दो गुटों के आमने-सामने आने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। पुलिस को आशंका है कि 2022 की तरह फिर से ¨हसक झड़प हो सकती है। उस समय नेतृत्व विवाद के दौरान पार्टी मुख्यालय में तोड़फोड़ और हंगामा हुआ था। इसी कारण इस बार अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

आगे क्या?
तमिलनाडु विधानसभा में AIADMK में हुई टूट के बाद पार्टी के विधायी नेता ई. पलानीस्वामी बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद स्पीकर जेसीडी प्रभाकर को यह तय करना होगा कि क्या बागी विधायकों ने दसवीं अनुसूची के तहत पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है।

हालांकि, स्पीकर का कोई भी फैसला अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना है।

इसी बीच, AIADMK और उसके चुनाव चिन्ह “दो पत्तियां” (Two Leaves) पर नियंत्रण को लेकर लड़ाई आखिरकार चुनाव आयोग तक पहुंच सकती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि दलबदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर के फैसले चुनाव आयोग पर बाध्यकारी नहीं होते।

अगर AIADMK पर नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई अदालत तक पहुंचती है, तो उसका आधार 2023 में शिवसेना विभाजन मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला हो सकता है।

“शिवसेना बनाम शिवसेना” मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि सदन में व्हिप और नेता नियुक्त करने का अधिकार केवल विधायक दल को नहीं, बल्कि मूल राजनीतिक पार्टी को होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल ज्यादा विधायकों के समर्थन के आधार पर स्पीकर किसी गुट को “असली” पार्टी नहीं मान सकते। इसके बजाय स्पीकर को मूल राजनीतिक दल की संरचना और संविधान की जांच करनी होगी।

NATIONAL : NEET पेपर लीक में इनसाइडर की भूमिका? CBI जांच में गहराया शक, पुणे-लातूर से 2 और गिरफ्तार

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सीबीआई ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में अपनी जांच को काफी तेज कर दिया है। अब जांच का मुख्य केंद्र इस बात पर है कि क्या इस पेपर लीक में किसी इनसाइडर की भूमिका थी।इसी कड़ी में पुणे से एक और संदिग्ध महिला को गिरफ्तार किया गया है, जबकि महाराष्ट्र के लातूर में एक सेवानिवृत्त केमिस्ट्री प्रोफेसर को हिरासत में लिया गया है।मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात तक पहुंचने के साथ ही, जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह सेंधमारी उस उच्च-सुरक्षा वाली चेन ऑफ कस्टडी के भीतर से हुई थी, जिसके पास 3 मई को होने वाली परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की पहुंच थी।

सीबीआई ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से उन सभी हितधारकों का विवरण मांगा है जिनके पास पेपर सील होने से पहले उसकी पहुंच थी। इस महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया में उन सभी प्रमुख व्यक्तियों और चरणों को शामिल किया गया है जो परीक्षा प्रणाली का मुख्य हिस्सा रहे हैं।विशेष रूप से, प्रश्न पत्र तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों तथा पैनल में शामिल सभी प्रोफेसरों और शिक्षकों की भूमिकाओं की गहनता से जांच की जा रही है।

इसके साथ ही, किसी भी संभावित खामी या सुराग का पता लगाने के लिए प्रश्न पत्र निर्माण की शुरुआत से लेकर अंत तक की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा भी खंगाला जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा में चूक किस स्तर पर हुई।

पुणे के सुखसागर नगर इलाके से CBI ने मनीषा वाघमारे नाम की महिला को गिरफ्तार किया है, जो एक ब्यूटी पार्लर चलाती है। आरोप है कि वाघमारे ने धनंजय के लिए बिचौलिए के रूप में काम किया। जांच में सामने आया है कि परीक्षा से पहले वाघमारे के पास लगभग दो दर्जन बैंक खातों से पैसे भेजे गए थे।

वहीं, लातूर में हिरासत में लिए गए सेवानिवृत्त प्रोफेसर दयानंद सागर कॉलेज से जुड़े थे। सूत्रों के अनुसार, यह प्रोफेसर उस अनुवाद पैनल का हिस्सा थे जो प्रश्न पत्र का मराठी अनुवाद किया था।

नीट 13 भाषाओं में आयोजित की जाती है, इसलिए अनुवाद प्रक्रिया के दौरान कड़ी गोपनीयता का पालन करना होता है, लेकिन यहीं से लीक की संभावना जताई जा रही है।

लातूर में एक माता-पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत ने हड़कंप मचा दिया है। शिकायत में आरोप लगाया है कि शहर के एक निजी कोचिंग संस्थान द्वारा आयोजित मॉक टेस्ट के 42 सवाल सीधे तौर पर नीट के मूल प्रश्न पत्र से मेल खाते थे। CBI अब इस कोचिंग संस्थान और गिरफ्तार प्रोफेसर के संबंधों की जांच कर रही है।

राजस्थान में गिरफ्तार तीन संदिग्धों में से एक दिनेश बिवाल पर आरोप है कि उसने लीक हुए पेपर की हार्ड कॉपी को स्कैन कर उसे डिजिटल रूप से शेयर किया। बिवाल ने कथित तौर पर यह पेपर गुड़गांव के यश यादव से प्राप्त किया था। यह पेपर पहले उसने अपने बेटे को दिया और बाद में सीकर जिले के अन्य छात्रों को बेचा।

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत में आरोपियों की रिमांड मांगते हुए CBI ने इसे एक बड़ी साजिश करार दिया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस पूरे राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने, वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और डिजिटल साक्ष्य बरामद करने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। CBI ने यह भी अंदेशा जताया है कि इसमें NTA के कुछ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

NATIONAL : सैन्य सुधारों में सोच का बदलाव बड़ी चुनौती: सीडीएस चौहान बोले- थिएटरीकरण में भारत अन्य देशों से 15 साल पीछे

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सैन्य सुधारों में सोच का बदलाव बड़ी चुनौती है। ये कहना है देश के सर्वोच्च सैन्य अफसर का। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कलम और कवच सम्मेलन के दौरान कहा कि थिएटरीकरण में भारत अन्य देशों से 15 साल पीछे है। जानिए उन्होंने और किन बातों को रेखांकित किया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सुधारों की प्रक्रिया पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ी बाधा ढांचागत बदलाव नहीं, बल्कि पुरानी मानसिकता को बदलना है। कलम और कवच 2026 सम्मेलन में सीडीएस ने थिएटरीकरण, आत्मनिर्भरता और सेना की तैयारियों पर विस्तार से बात की।

चौहान ने कहा, सेनाओं में थिएटर कमानों का गठन केवल संरचनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके लिए मानसिकता में बदलाव लाना सबसे बड़ी चुनौती है। जब एक बार सोच बदल जाती है, तो ढांचागत सुधार अपने आप आसान हो जाते हैं। दुनियाभर के जिन देशों ने भी एकीकरण की कोशिश की है, उन्हें सेनाओं के बीच मतभेद, कार्यक्षेत्र बचाने की होड़ और संरक्षणवाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

जनरल चौहान ने कहा, भारत इस समय थिएटरीकरण की प्रक्रिया में अन्य विकसित देशों से लगभग 10 से 15 साल पीछे है। इस अंतर को पाटने के लिए क्रमिक रूप से काम करने की बजाय एकसाथ कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जॉइंट ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए लगभग 500 अधिकारियों और 2,000 जवानों की जरूरत होगी, जिन्हें मौजूदा संसाधनों से ही व्यवस्थित किया जाएगा।

सीडीएस ने कहा, भारत ने थिएटरीकरण के लिए आम सहमति का रास्ता चुना है। ढेरों सैन्य संस्थानों और अधिकारियों से बात की है, ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके। जब लोग यह समझ जाते हैं कि हमें भविष्य के मल्टी-डोमेन युद्धों के लिए तैयार रहना है, तो वे बदलाव को स्वीकार करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार देश के रक्षा इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी बदलावों में से एक होगा।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पास बेहतर परिस्थितिजन्य आकलन और युद्धक्षेत्र की स्पष्ट जानकारी थी। इसके चलते संघर्ष के सभी चार दिनों में भारत ने बढ़त बनाए रखी। भारतीय सेना को न सिर्फ अपनी तरफ की स्थिति की सटीक जानकारी थी, बल्कि सीमा पार की गतिविधियों पर भी पूरी नजर थी। हम जानते थे कि हमने क्या निशाना बनाया है और जमीन पर क्या हो रहा है। इसी वजह से हम संघर्ष के हर स्तर पर बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

NATIONAL : BJP का दावा- राहुल की विदेश यात्राओं पर 60 करोड़ खर्च, कांग्रेस बोली- आर्थिक नाकामी से ध्यान भटका रहे

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भाजपा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर तीखा हमला बोला। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों के दौरान 54 विदेश यात्राएं की और इन पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च हुए। पार्टी ने कहा कि उनकी घोषित आय और विदेश यात्राओं पर स्पष्ट विसंगति नजर आती है। साथ ही, यात्राओं के फंडिंग के स्रोतों की जानकारी भी मांगी।

भाजपा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में कहा कि 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये रही, जबकि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद से उनके विदेश दौरों पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

पात्रा ने बृहस्पतिवार को सवाल उठाया कि इतने बड़े खर्च की फंडिंग किसने की? क्या विदेशी संस्थाओं ने फंडिंग की? अगर हां, तो एफसीआरए की मंजूरी कहां है? उन्होंने आगे कहा अगर खर्च निजी फंड से हुआ, तो टैक्स और विदेशी मुद्रा संबंधी खुलासे कहां हैं? या फिर किसी तीसरे पक्ष ने खर्च उठाया? पात्रा ने कहा, यात्रा का विवरण तो सार्वजनिक है लेकिन पैसे का लेन-देन पूरी तरह गायब है। उन्होंने राहुल गांधी के पद को देखते हुए इन दौरों की पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू पर भी चिंता जताई।

कांग्रेस ने कहा-भाजपा आर्थिक नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए राहुल के विदेश दौरों को उठा रही
भाजपा पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक नाकामी से जुड़े विषयों से ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर निशाना साध रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि भाजपा नेता संबित पात्रा ने मंत्री पद पर अपना दावा पेश करने के लिए राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का मामला उठाया है। लेकिन उन्हें मंत्री बनने के लिए बेहतर विषय की तलाश करनी चाहिए। रमेश ने कहा, यह सब भाजपा के संबित पात्रा की ध्यान भटकाने की कोशिश है।

असली मुद्दा अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने का है। असली मुद्दे विदेश नीति में असफलताएं हैं। रमेश ने दावा किया कि मोदी समझौता करने वाले प्रधानमंत्री हैं और वह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से बेनकाब हो चुके हैं।

WORLD : होर्मुज समेत सभी जलमार्गों से सुरक्षित आवाजाही बहुत जरूरी, ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की दो टूक

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नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में भारत ने होर्मुज और लाल सागर जैसे सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से सुरक्षित आवाजाही को जरूरी बताया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के संकट पर चिंता जताते हुए शांति की अपील की। साथ ही, उन्होंने आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की बात कही। आइए विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं…

नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के बड़े सम्मेलन में भारत ने कहा है कि होर्मुज और लाल सागर समेत दुनिया के सभी रास्तों और जलमार्गों से जहाजों का सुरक्षित आना-जाना बहुत जरूरी है। अगर इन रास्तों में कोई रुकावट आती है, तो इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसलिए सभी समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना दुनिया के सभी देशों की एक बड़ी और सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस दो दिन के सम्मेलन के पहले दिन बृहस्पतिवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के सामने अपनी बात पूरी मजबूती से रखी। उन्होंने समझाया कि पश्चिम एशिया में जो लड़ाई और तनाव चल रहा है, उस पर खास ध्यान देने की जरूरत है। समंदर के रास्तों में जहाजों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है और ऊर्जा व तेल की सप्लाई वाले ढांचे में भी मुश्किलें आ रही हैं। भारत ने साफ कहा है कि वह इस तनाव को कम करने और शांति वापस लाने के लिए जो भी कोशिशें होंगी, उनका पूरा समर्थन करेगा।

NATIONAL : 19 राज्य-UT में SIR का ऐलान, यहां 37 करोड़ वोटर्स:30 मई से 23 दिसंबर के बीच होगा वेरिफिकेशन; पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल चुनाव

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चुनाव आयोग ने गुरुवार को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की है। यह SIR का तीसरा फेज होगा।पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।

NATIONAL : मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद की बैठक 21 मई को संभव, क्या बनने जा रही है कोई नई राष्ट्रीय रणनीति?

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मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद की बैठक 21 मई को होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सभी केंद्रीय मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्रियों और अन्य केंद्रीय राज्य मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है।सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी।

यह बैठक बंगाल और असम में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत और पुडुचेरी में राजग की दोबारा सरकार बनने के बाद हो रही है।
प्रधानमंत्री प्रमुख नीतिगत और शासन संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए समय-समय पर मंत्रिपरिषद की बैठकें करते रहे हैं, लेकिन 21 मई की बैठक का राजनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि यह विधानसभा चुनावों के बाद हो रही है।

NATIONAL : क्यों इस तरह की आजादी का दिखावा? मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर SC ने उठाए सवाल

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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (14 मई 2026) को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में कैबिनेट मंत्री को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि कोई मंत्री निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं जा सकता. मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पैनल के स्ट्रक्चर पर चिंता व्यक्त की. वर्तमान में इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, ‘अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है? एक मंत्री कभी भी अपने प्रधानमंत्री के फैसले के खिलाफ नहीं जाएगा, जिससे फैसला हमेशा 2:1 के बहुमत से सरकार के पक्ष में ही रहेगा.’

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के लिए नियुक्ति प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बनाए रखने से संबंधित है. अदालत ने आगे कहा कि यदि भारत के चीफ जस्टिस केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया जा सकता है?

बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा, ‘अगर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए CBI की नियुक्ति में निष्पक्षता जरूरी है तो लोकतंत्र को बचाने और साफ-सुथरे चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में और भी ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए. चयन समिति में तीसरा सदस्य सरकार का ही मंत्री क्यों होना चाहिए? इस कमेटी में सरकार के मंत्री की जगह कोई स्वतंत्र सदस्य होना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे.’

लाइव लॉ के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए रिटायर IAS अधिकारी एस.एन. शुक्ला ने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए न केवल चुनाव आयुक्तों को चुनने वाले नए कानून को चुनौती दी, बल्कि उस कानून के तहत हुई वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए.

एस.एन. शुक्ला ने स्पष्ट किया कि उनकी यह चुनौती सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पिछले (अनूप बरनवाल) फैसले के आधार पर नहीं है, बल्कि उन्होंने RTI के जरिए ऐसे ठोस सबूत जुटाए हैं जो इन नियुक्तियों में कानूनी खामियों को साबित करते हैं. उनका कहना है कि वर्तमान नियुक्तियां कानून के सही मापदंडों पर खरी नहीं उतरती हैं, इसलिए उन्हें रद्द किया जाना चाहिए.

WORLD : होर्मुज के पास गुजरात के एक और जहाज पर हमला, समुद्र में डूबा ‘हाजी अली’; सभी 14 क्रू मेंबर्स सुरक्षित

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मिडिल ईस्ट में जारी तनातनी के बीच होर्मुज स्ट्रेट से सटे ओमान तट पर गुजरात का एक और मालवाहक जहाज डूब गया। हाजी अली’ नाम का जहाज 13 मई की सुबह ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था, इसी दौरान उसपर ड्रोन या मिसाइल जैसा हथियार से हमला किया गया, हमले के बाद जहाज में आग लग गई। हालांकि, ओमान कोस्टगार्ड ने सभी 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया।

भारत ने बुधवार को ओमान के तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान अनुसार ओमान के तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुआ हमला किसी भी हालत में मंजूर नहीं है। हम इस बात की निंदा करते हैं कि व्यावसायिक जहाजों और आम नाविकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं, विदेश मंत्रालय ने सभी भारतीय चालक दल के सुरक्षित होने की पुष्टि करते हुए ओमानी अधिकारियों का आभार जताते हुए लिखा, “जहाज पर सवार भारतीय क्रू सुरक्षित हैं और हम उन्हें बचाने के लिए ओमानी अधिकारियों को धन्यवाद देते हैं।” भारत फिर से कहता है कि कमर्शियल शिपिंग को टारगेट करने और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालने, या किसी और तरह से नेविगेशन और कॉमर्स की आजeदी में रुकावट डालने से बचना चाहिए।

यह जहाज बेरबेरा पोर्ट से शारजाह जा रहा था। सुबह करीब 3:30 बजे ओमान के समुद्री तट के पास जहाज हादसे का शिकार हुआ। जहाज में सवार क्रू मेंबर्स ने बताया कि जहाज से किसी विस्फोटक जैसी चीज के टकराने की आवाज सुनाई दी थी। इसके बाद जहाज में आग लग गई। हालात बिगड़ने पर सभी 14 क्रू मेंबर्स ने लाइफ बोट की मदद से जहाज छोड़ा। इस दौरान ओमानी अधिकारियों ने आगे बढ़कर भारतीय क्रू मेंबर्स की मदद की।

गौरतलब है कि इससे पहले 7 मई को होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा गुजरात के द्वारका का एक और मालवाहक जहाज MSV AL फैज नूरे सुलेमानी-I भी अमेरिका और ईरान नेवी के बीच फायररिंग का शिकार हुआ था।

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