Monday, September 21, 2026
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NATIONAL : सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक का 38 वर्ष की आयु में निधन

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लखनऊ, 13 मई (हि.स.)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को लखनऊ में निधन हो गया। अभी उनकी उम्र महज 38 वर्ष थी। सूत्रों के मुताबिक वह बीमार थे।

सिविल अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक, प्रतीक यादव को सिविल अस्पताल प्रातः 6:00 बजे लाया गया । अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मृत्यु हो चुकी थी। प्रतीक फिटनेस के प्रति काफी गंभीर रहते थे। वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे हैं। उनकी पत्नी अपर्णा यादव भाजपा की नेता हैं और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।

NATIONAL : केरल में CM पर सस्पेंस बरकरार, 3 घंटे मंथन के बाद भी फैसला नहीं; खरगे-राहुल ने दावेदारों से की बात

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बैठक में राहुल गांधी और खरगे ने सीएम पद के तीनों दावेदारों से बात की और कहा कि जो भी पार्टी का फैसला होगा, उसे धैर्यपूर्वक स्वीकार करें. कांग्रेस नेतृत्व ने सभी नेताओं से एक साथ विचार-विमर्श करने के बाद उनसे अलग-अलग भी बात की.

केरल के नए सीएम के नाम को लेकर कांग्रेस नेताओं ने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को अधिकृत किया हैकांग्रेस नेताओं की 3 घंटे चली बैठक में सीएम पद के तीन दावेदारों वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्निथला पर चर्चा हुईकांग्रेस आलाकमान ने विधायकों से एक लाइन के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है

केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर करीब तीन घंटे तक चली उच्च स्तरीय बैठक के बाद भी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे का ऐलान नहीं किया. पार्टी नेताओं के मुताबिक, अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर छोड़ा गया है. बैठक में खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, वी डी सतीशन तथा कांग्रेस के दोनों पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक एवं प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी शामिल हुए.

बैठक के बाद रमेश चेन्नीतला ने एनडीटीवी से कहा कि केरल में मुख्यमंत्री का फैसला कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व करेगा. आज की बैठक में हमने चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रदेश में बदले राजनीतिक हालात पर चर्चा की. हम सभी एकजुट हैं. कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सब साथ हैं. जल्द ही दिल्ली कमान से निर्देश मिलने के बाद सीएम के नाम की घोषणा हो जाएगी.

चेन्निथला ने कहा, ‘‘यह एक अच्छी बैठक थी. सभी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ राहुल गांधी के संग भी अपने विचार साझा किए. आलाकमान अंतिम निर्णय लेगा.” यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री के लिए उनके नाम पर चर्चा की गई तो चेन्नीथला ने कहा कि सबके नाम पर चर्चा की गई.

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में राहुल गांधी और खरगे ने सीएम पद के तीनों दावेदारों से बात की और कहा कि जो भी पार्टी का फैसला होगा, उसे धैर्यपूर्वक स्वीकार करें. कांग्रेस नेतृत्व ने सभी नेताओं से एक साथ विचार-विमर्श करने के बाद उनसे अलग-अलग भी बात की. सीएम पद के तीनों दावेदारों वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्नीथला ने पार्टी आलाकमान पर भरोसा जताया.
केरल के सभी नेता आज रात वापस लौट रहे हैं. बैठक के बाद जिस तरह कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन नहीं करने की अपील की गई है, उससे संकेत मिल रहा है कि रेस में सतीशन पिछड़ गए हैं.

TAMIL NADU : चुनाव के बाद अन्नाद्रमुक में फूट, पलानीस्वामी और वेलुमणि को सदन में नेता बनाने पर विधायक दो-फाड़

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तमिलनाडु में एआईएडीएमके के भीतर मतभेद गहरा गए हैं। पार्टी के विधायक दो गुटों में बंट गए हैं, जिनमें एक गुट पलानीस्वामी को और दूसरा वेलुमणि को विधानसभा में दल का नेता बनाने की मांग कर रहा है। विधानसभा सत्र में दोनों गुट अलग-अलग पहुंचे। पार्टी की चुनावी हार के बाद नेतृत्व बदलने की मांग तेज हो गई है।

तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक के भीतर आंतरिक कलह सोमवार को और गहरा गया। पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट ने एडप्पाडी के. पलानीस्वामी और दूसरे ने एसपी वेलुमणि को सदन में पार्टी का नेता घोषित करने की मांग की है। 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र के दौरान पार्टी की यह फूट साफ तौर पर नजर आई।

पूर्व मंत्री सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाले एक समूह ने प्रोटेम स्पीकर एमवी करप्पैया को पत्र सौंपकर एसपी वेलुमणि को अन्नाद्रमुक के विधायक दल का नेता घोषित करने का आग्रह किया। सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाले इस गुट को कथित तौर पर 30 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व मंत्री एन थलवई सुंदरम के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी महासचिव पलानीस्वामी को नेता बनाए रखने का अनुरोध किया है। इस गुट को 17 विधायकों का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है।

विधानसभा चुनावों में हार के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। अन्नाद्रमुक ने 234 में से 167 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल 47 सीटों पर जीत मिली। सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाले गुट के कुछ विधायकों ने पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग की है। ज्ञात हो कि सीवी षणमुगम और वेलुमणि जैसे वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव परिणामों के बाद पलानीस्वामी द्वारा बुलाई गई बैठकों से भी दूरी बनाए रखी थी।

पार्टी के भीतर एक बड़ा विवाद विजय के नेतृत्व वाली पार्टी टीवीके को समर्थन देने को लेकर भी है। षणमुगम और वेलुमणि समर्थित गुट टीवीके को बाहर से समर्थन देने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट विरोध कर रहा है। यदि यह गतिरोध दूर नहीं हुआ, तो पार्टी में बड़ी टूट की संभावना है।

NATIONAL : बंगाल में नियुक्तियों पर बवाल: कांग्रेस ने लगाया आरोप, जयराम रमेश बोले- चुनाव आयोग और भाजपा में साठगांठ

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कांग्रेस का सीधा आरोप है कि चुनाव कराने वाले अफसरों को मलाईदार पद देना भाजपा की ‘एहसान चुकाओ’ नीति है। पार्टी ने इसे लोकतंत्र की पीठ में छुरा घोंपने वाली वैधानिक धांधली और संस्थानों की मिलीभगत करार दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी ने और क्या-क्या आरोप लगाए हैं? खबर में जानिए…

कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को कांग्रेस ने राज्य के नए मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सलाहकार की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का दावा है कि ये नियुक्तियां चुनाव आयोग और भाजपा के बीच ‘खुली मिलीभगत’ का सबूत हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पर्दे के पीछे बड़ा खेल खेला गया था।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इन नियुक्तियों को लेकर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। अग्रवाल चुनाव के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसी तरह सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। गुप्ता ने चुनाव के दौरान स्पेशल रोल ऑब्जर्वर के रूप में काम किया था। जयराम रमेश के अनुसार इन नियुक्तियों से साफ है कि निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए काम किया। उन्होंने दावा किया कि बंगाल चुनाव से पहले लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए। इसमें 27 लाख लोगों को वोट डालने से वंचित रखा गया। कांग्रेस के मुताबिक, यह सब एक रणनीति के तहत किया गया। इसका उद्देश्य भाजपा के लिए चुनावी राह आसान करना था।

पश्चिम बंगाल सरकार ने रविवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया था। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो आईएएस और सात डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों की तैनाती की गई है। शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही सेवानिवृत्त आईएएस सुब्रत गुप्ता को उनका सलाहकार नियुक्त कर दिया गया। वहीं शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि अब साठगांठ को छिपाने की कोशिश भी नहीं की जा रही है।

BUSINESS : देश में उर्वरकों का रिकॉर्ड भंडार: मांग से 51% ज्यादा स्टॉक, कीमतों में नहीं होगा बदलाव, किसानों को बड़ी राहत

खरीफ 2026 से पहले केंद्र सरकार ने देश में उर्वरकों का रिकॉर्ड भंडार सुनिश्चित किया है। वर्तमान में देश के पास 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है, जो अनुमानित मांग का 51% से अधिक है। सरकार ने घरेलू उत्पादन, आयात और वैश्विक निविदाओं के जरिए आपूर्ति मजबूत की है, जबकि किसानों के लिए उर्वरकों की कीमतें स्थिर रखी गई हैं।

उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि उर्वरक स्टॉक आवश्यकता से 51% से अधिक है।
उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि उर्वरक स्टॉक आवश्यकता से 51% से अधिक है।

खरीफ 2026 सीजन से पहले केंद्र सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की है। सरकार के अनुसार देश में वर्तमान समय में उर्वरकों का भंडार मजबूत और स्थिर स्थिति में है, जिसके चलते किसानों को पीक सीजन में किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने खरीफ सीजन के लिए 390.54 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता का अनुमान लगाया है, जबकि देश में अभी 199.65 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है। यह कुल मांग का 51 प्रतिशत से अधिक है और सामान्य स्टॉक स्तर से काफी ज्यादा माना जा रहा है।

उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया है कि “खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DoAFW) द्वारा आकलित उर्वरक आवश्यकता के आधार पर वर्तमान स्टॉक 51% से अधिक है। यह हमारे सामान्य आवश्यकता स्तर 33% से काफी ज्यादा है, जिसे हम आमतौर पर बनाए रखते हैं। उर्वरकों का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है। प्रमुख उर्वरकों की एमआरपी लगभग पहले जैसी ही बनी हुई है।”

घरेलू उत्पादन-आयात से बढ़ी उपलब्धता
पश्चिम एशिया में हालिया संकट के बाद सरकार ने उर्वरकों की आपूर्ति मजबूत करने के लिए घरेलू उत्पादन और आयात दोनों पर जोर दिया। देश में कुल 97 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। इसमें घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 लाख टन रहा, जबकि करीब 19.94 लाख टन उर्वरक आयात के जरिए भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाया गया।

यूरिया के मामले में 46.28 लाख टन घरेलू उत्पादन और 12.51 लाख टन आयात हुआ है। वहीं डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी जैसे उर्वरकों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। सरकार ने मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने के लिए लगभग 7 लाख टन एनपीके उर्वरक भी सुरक्षित कर लिया है।

भविष्य की मांग को लेकर सरकार सतर्क
सरकार ने आने वाले महीनों में उर्वरकों की मांग को देखते हुए वैश्विक स्तर पर खरीद प्रक्रिया भी तेज कर दी है। भारतीय उर्वरक कंपनियों ने 12 लाख टन डीएपी, 4 लाख टन टीएसपी और 3 लाख टन अमोनियम सल्फेट खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए हैं।

किसानों के लिए कीमतों में नहीं कोई बदलाव
किसानों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने प्रमुख उर्वरकों की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में कोई बदलाव नहीं किया है। उर्वरक विभाग कंपनियों को सब्सिडी भुगतान नियमित रूप से कर रहा है, जिससे बाजार में आपूर्ति बनी हुई है। उपलब्धता की स्थिति की लगातार निगरानी के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (EGoS) की अब तक आठ बैठकें हो चुकी हैं।

सरकार का कहना है कि बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के कारण देश में उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। इससे किसानों को खरीफ सीजन में किफायती दरों पर आसानी से उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।

MAHARASHTRA : सड़कों पर फेंकी हजारों क्विंटल प्याज, लगातार गिरते दामों से संकट में किसान, आंदोलन की चेतावनी

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महाराष्ट्र के नासिक जिले में लगातार गिरती प्याज की कीमतों से किसान भारी संकट में हैं। मंडियों में प्याज के बेहद कम दाम मिलने से नाराज किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर प्याज फेंक दिया। गुस्साए किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

महाराष्ट्र के नासिक समेत कई जिलों में लगातार गिरती प्याज की कीमतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंडियों में बेहद कम दाम मिलने से नाराज किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर प्याज फेंक दिया। किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी फसल का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा, जिससे वे आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

बाजार आंकड़ों के मुताबिक, प्याज का न्यूनतम भाव घटकर 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि औसत कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई है। वहीं, छोटे आकार के ‘गुल्टी’ प्याज की कीमत सिर्फ 1 रुपये प्रति किलो तक रह गई है। किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत पर फसल बेचने से खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक अध्यक्ष भरत दिघोले के अनुसार, पिछले कई महीनों से प्याज के दाम लगातार गिर रहे हैं, जबकि खेती में इस्तेमाल होने वाले बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, सिंचाई, बिजली, परिवहन और भंडारण की लागत तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि लागत बढ़ने और बाजार भाव गिरने से किसानों की आय बुरी तरह प्रभावित हुई है।

दो दिन पहले भरत दिघोले ने किसानों की खराब स्थिति का उदाहरण देते हुए न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि बीड जिले के नेकनूर गांव का एक किसान 41 बोरे प्याज लेकर सोलापुर मंडी पहुंचा था। लेकिन वहां उसके केवल 20 बोरे ही बिक सके। मजदूरी, कमीशन, बाजार शुल्क और परिवहन खर्च कटने के बाद किसान के हाथ में सिर्फ 519 रुपये बचे। इस घटना ने किसानों की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया।

नासिक जिले की सटाना कृषि उपज बाजार समिति में एक किसान को उसकी प्याज फसल के लिए सिर्फ 50 रुपये प्रति क्विंटल यानी 50 पैसे प्रति किलो का भाव मिला। इतनी कम कीमत मिलने से परेशान किसान ने बाजार परिसर में ही आत्महत्या करने की कोशिश की। इस घटना के बाद किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

छत्रपति संभाजीनगर जिले की वैजापुर कृषि उपज बाजार समिति में भी किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्याज की नीलामी रोक दी। किसानों का कहना है कि लगातार घाटे के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने राज्य और केंद्र सरकार से कई मांगें की हैं। किसानों ने मांग की है कि प्याज किसानों को प्रति क्विंटल 1500 रुपये की सब्सिडी दी जाए। प्याज निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं। मंडियों में लगने वाले भारी कमीशन को नियंत्रित किया जाए। किसानों को सीधे बाजार में बिक्री की सुविधा मिले और प्याज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाए। किसानों का कहना है कि MSP लागू होने से उन्हें कम से कम लागत के अनुसार उचित दाम मिल सकेगा।

भरत दिघोले ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो हजारों किसान आर्थिक तबाही की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

प्याज उत्पादक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द राहत पैकेज और जरूरी कदमों की घोषणा नहीं की, तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से घाटा झेल रहे हैं और अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है

ASSAM : हिमंत के साथ चार मंत्रियों ने ली शपथ, सीएम की नई टीम तैयार, स्पीकर के नाम का भी हुआ एलान

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असम में हिमंत बिस्वा सरमा सरकार की नई पारी शुरू हो गई है। चार अनुभवी मंत्रियों के साथ शपथ लेकर सीएम राज्य के विकास को नई गति देंगे। सहयोगी दलों का साथ और अनुभवी चेहरों का तालमेल इस नई कैबिनेट की मुख्य पहचान है। इस सूची में कौन-कौन शामिल हैं? खबर में जानिए…

असम में नई एनडीए सरकार का गठन हो गया है और हिमंत बिस्व सरमा ने सीएम और चार मंत्रियों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस नई टीम में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों को जगह दी है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंत्रियों के नामों की घोषणा की। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। शपथ लेने वाले मंत्रियों में असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा और बोडलैंड पीपुल्स फ्रंट के विधायक चरण बोरो शामिल हैं। ये दोनों नेता पिछली सरकार में भी कैबिनेट का हिस्सा थे।

कैबिनेट में महिला नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करने के लिए अजंता नेओग को शामिल किया गया है। वह पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुकी हैं। इनके अलावा, रामेश्वर तेली ने भी मंत्री पद की शपथ ली। तेली पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव में वापस राज्य की राजनीति में सक्रिय हुए हैं।

सरकार गठन के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर भी मुहर लग गई है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रंजीत कुमार दास असम विधानसभा के अगले स्पीकर होंगे। मुख्यमंत्री सरमा ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि पूरी टीम राज्य के विकास और समृद्धि के लिए पूरी निष्ठा से काम करेगी।

इस चुनाव में भाजपा नीत एनडीए ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए 126 में से 102 सीटों पर कब्जा किया है। भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की है। इस प्रचंड बहुमत के साथ हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। उनकी लोकप्रियता और कुशल रणनीतियों ने गठबंधन को इस ऐतिहासिक सफलता तक पहुंचाया है।

NATIONAL : ’32 लाख वोट से जीती बीजेपी, 35 लाख को तो SIR में बाहर कर दिया’, TMC ने की जांच की अपील तो SC बोला- हम आदेश…

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कल्याण बनर्जी ने पिछली सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर जीत का अंतर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या से कम होगा तो कोर्ट दखल देगा.

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने सोमवार (11 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उससे बहुत कम है, जितने लोगों की अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित हैं. उन्होंने बंगाल में चल रहे स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह दावा किया है. टीएमसी ने कहा कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अगर ऐसी स्थिति होती है तो वह उसमें दखल देगा.

टीएमसी की तरफ से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि 31 विधानसभा सीटों पर टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जीत और हार का अंतर एसआईआर में वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या से कम है और इन लोगों की अपील ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं. उन्होंने कहा कि कई जगह पर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या और हार का मार्जिन बराबर है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कल्याण बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि एक विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार सिर्फ 863 वोटों के अंतर से हार गया और यहां वोटर लिस्ट से हटाए गए 5432 लोगों की अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है. एसआईआर के दौरान लिस्ट से हटाए गए लोग, जिनकी अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं, उन्हें इस विधानसभा चुनाव में वोट करने की इजाजत नहीं दी गई थी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को कल्याण बनर्जी ने बताया कि टीएमसी और बीजेपी के बीच जीत और हार का अंतर करीब 32 लाख वोट हैं और 35 लाख लोग वोट नहीं कर सके क्योंकि उनकी अपील ट्रिब्यूनल में पेंडिंग हैं. कल्याण बनर्जी ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची की उस टिप्पणी का जिक्र करते हुए हस्तक्षेप का अनुरोध किया है, जिसमें जज ने कहा था कि अगर जीत का अंतर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या से कम होगा तो कोर्ट दखल देगा. उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच का जरूरत हो सकती है

बेंच ने कल्याण बनर्जी को निर्देश दिया कि वह विस्तृत डिटेल के साथ अंतरिम आवेदन दाखिल करें. कोर्ट ने उनसे कहा, ‘आप चुनाव के नतीजों को लेकर जो भी कहना चाहते हैं… अगर आप कह रहे हैं कि वोटर लिस्ट से लोगों को हटाए जाने का असर रिजल्ट पर पड़ा है तो उसके लिए आपको अंतरिम आवेदन करने की जरूरत है.’ उनकी दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल हम यह देखना चाहते हैं कि ट्रिब्यूनल में काम तेजी से हो.

सुनवाई के दौरान टीएमसी का पक्ष रखने के लिए सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी भी पेश हुईं. मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट में कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल्स के पास लंबित अपीलों का निपटारा करने में तो चार साल लग जाएंगे, तब तक कई और चुनाव हो जाएंगे.

चुनाव आयोग के वकील दामा शेषाद्री ने टीएमसी की दलीलों पर कहा कि किसी सीट के नतीजे को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है. इसके बाद कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से यह आदेश पारित करने का अनुरोध किया कि एसआईआर में नाम हटाए जाने को चुनाव याचिका दाखिल करने का आधार माना जा सकता है. सीजेआई सूर्यकांत ने उनके अनुरोध पर कहा, ‘हम ऐसा आदेश कैसे दे सकते हैं?’

WEST BENGAL : सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पहले दिन लिए कई अहम फैसले, कहा- यह सरकार जनता की सरकार है, जनता के लिए है

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नबन्ना में पहली कैबिनेट बैठक की। इसमें कई अहम फैसले भी लिए गए। वहीं देर रात एक्स पर एक पोस्ट में सीएम शुभेंदु ने पहले दिन को कई अहम घटनाओं से भरा दिन बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह सरकार जनता की सरकार है, जनता के लिए है।

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को अपने कार्यकाल के पहले दिन को ‘घटनाओं से भरा’ बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की शुरुआत कर दी है और पहली ही कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ‘असल परिवर्तन’ की दिशा में छह अहम फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि अब राज्य में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी, जिससे पश्चिम बंगाल के लोगों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल सकेगा।

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम को तेज करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। नई सरकार ने राज्य सरकारी नौकरियों के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की बढ़ोतरी करने का भी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान युवाओं का काफी समय खराब हुआ, इसलिए उन्हें राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कैबिनेट बैठक में भारतीय न्याय संहिता (BNS) को राज्य में औपचारिक रूप से लागू करने का फैसला भी लिया गया। इसके अलावा जनगणना प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भी मंजूरी दी गई, ताकि लोगों को सही प्रतिनिधित्व मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार उन 321 परिवारों की मदद के लिए भी कदम उठाएगी, जिनके परिजनों की कथित तौर पर ‘लोकतंत्र की रक्षा करते हुए’ मौत हुई थी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे पीएम विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पीएम उज्ज्वला योजना के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को भी हटाया जाएगा।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को विभाग बांटने की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक समेत कई नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठकें भी कीं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह सरकार जनता की सरकार है, जनता के लिए है, किसी पार्टी विशेष के लिए नहीं।’ उनके इस बयान को पिछली सरकार पर निशाना माना जा रहा है।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को राज्य भर में अवैध सिंडिकेट, खनन और पशु तस्करी पर नकेल कसने को कहा है। एक बैठक में अधिकारी ने अवैध गतिविधियों की निगरानी पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से शासन को राजनीतिक प्रतिशोध से मुक्त रखने के निर्देश दिए। पुलिस को ‘सिंडिकेट राज’ खत्म करने का आदेश मिला। अवैध खनन पर तत्काल कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए। बीरभूम में कड़ी निगरानी के विशेष निर्देश दिए गए। उन्होंने ग्रामीण रोजगार योजना के लाभार्थियों को सत्यापित करने को कहा। धोखाधड़ी वाले जॉब कार्ड से पैसे निकालने वालों की पहचान करने को भी कहा। सीमावर्ती जिलों में पशु तस्करी रोकने के निर्देश दिए गए। पुलिस को आदतन अपराधियों पर कार्रवाई करने को कहा। चुनाव बाद की हिंसा में शामिल लोगों का पता लगाने के भी निर्देश मिले।

NATIONAL : बंगाल में मंत्रियों को विभाग बांटे:गृह मंत्रालय सुवेंदु ने रखा; दिलीप घोष को पंचायतीराज, अग्निमित्रा को महिला–बाल विकास, निषिथ को युवा कल्याण विभाग दिया

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की नई सरकार में सोमवार को मंत्रालयों का बंटवारा किया गया है। PTI के मुताबिक, निषिथ प्रमाणिक को उत्तर बंगाल विकास, खेल और युवा कल्याण मंत्रालय सौंपा गया है।दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पशु संसाधन विकास, कृषि विपणन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, नगर निकाय विभाग दिए गए हैं।अशोक कीर्तनिया को खाद्य एवं आपूर्ति, सहकारिता मंत्रालय दिया गया है। क्षुदिराम टूडू को जनजातीय विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने IAS अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया है। यह आदेश 11 मई 2026 को जारी हुआ और अगले आदेश तक लागू रहेगा। अग्रवाल फिलहाल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर और होम एंड हिल अफेयर्स विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। सरकार ने कहा कि यह फैसला सार्वजनिक सेवा के हित में लिया गया है। उन्हें तुरंत नया कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

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