Tuesday, April 7, 2026
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MAHARASHTRA : YouTube से चोरी खीख ATM को खाली करने पहुंचे शातिर, पुलिस ने पहले ही धर दबोचा

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धुले SP श्रीकांत धिवरे ने बताया कि पुलिस ने संदिग्ध पिकअप वाहन का पीछा किया, जिसके बाद आरोपी भोरखेड़ा (चोपड़ा रोड) इलाके में वाहन छोड़कर फरार हो गए. दो को गिरफ्तार कर लिया है.महाराष्ट्र के धुले जनपद के शिरपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम को निशाना बनाने की कोशिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया है. रात करीब 2:30 बजे एक व्यक्ति ने 112 पर फोन कर सूचना दी कि बैंक ऑफ बड़ौदा, शिरपुर के एटीएम के सामने तीन संदिग्ध युवक एक पिकअप वाहन के साथ चेन बांधकर खड़े हैं. सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई.

धुले SP श्रीकांत धिवरे ने बताया कि पुलिस ने संदिग्ध पिकअप वाहन का पीछा किया, जिसके बाद आरोपी भोरखेड़ा (चोपड़ा रोड) इलाके में वाहन छोड़कर फरार हो गए. मौके से पुलिस को पिकअप वाहन, एक मोबाइल फोन और फास्टैग बरामद हुआ. इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया. जबकि एक फरार हो गया, उसकी तलाश शुरू हो गयी है.धिवरे ने आगे बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अमळनेर और धुले शहर में हुई एटीएम चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर एटीएम चोरी के तरीके सीखे और वारदातों को अंजाम दिया.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमंत सुकलाल माली (उम्र 21 वर्ष), निवासी भिलडाई, तालुका व जिला धुले और विधुर देवा जाधव उर्फ विजू (उम्र 38 वर्ष), निवासी वसंत नगर (मुकटी), तालुका पारोळा, जिला जळगांव के रूप में हुई है. दोनों आरोपी धुले के रहने वाले हैं.

धिवरे ने बताया कि पुलिस ने पिकअप वाहन और अन्य सबूत जब्त कर लिए हैं और मामले की आगे की जांच जारी है. साथ ही फरार तीसरे आरोपी की तलाश भी की जा रही है. पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय जनता ने राहत की सांस ली है. एकाके वारदातों से शहर में दहशत फैल गयी थी. पुलिस के मुताबिक एटीएम चचोरों पर अभियान चलाकर शिंकजा कसा जाएगा, ताकि फिर कोई ऐसी वारदात की न सोचे.

ENTERTAINMENT : धर्मेंद्र हाउस होगा और बड़ा, सनी-बॉबी देओल जोड़ रहे हैं जुहू के 60 करोड़ के बंगले में नया फ्लोर

देओल परिवार का मशहूर घर, जिसे धर्मेंद्र हाउस कहा जाता है, अब और बड़ा होने जा रहा हैं. सनी देओल और बॉबी देओल मिलकर जुहू के 60 करोड़ के बंगले में नया फ्लोर बनवा रहे हैं.

देओल परिवार का मशहूर घर, जिसे धर्मेंद्र हाउस कहा जाता है, मुंबई के पॉश इलाके जुहू में स्थित है. रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म नोब्रोकर के मुताबिक, इस बड़े बंगले की कीमत करीब 60 करोड़ रुपये है. अब यह मशहूर प्रॉपर्टी और भी बड़ी होने वाली है. यहां कंसट्रक्शन का काम शुरू हो चुका है और घर में एक नई मंजिल जोड़ी जा रही है.

विक्की ललवानी के मुताबिक, धर्मेंद्र के जुहू वाले बंगले में जल्द ही एक और फ्लोर बनेगा. इन दिनों बंगले में काफी हलचल है. हाल ही में परिसर में क्रेन भी देखी गई और छत पर जोर-शोर से काम चल रहा है. जानकारी के मुताबिक, सनी देओल और बॉबी देओल मिलकर परिवार के इस घर में पूरा एक नया फ्लोर बनवा रहे हैं. बंगले के पास मौजूद एक शख्स ने इसे आसान शब्दों में कहा, ‘बच्चे बड़े हो रहे हैं.’ ‘उन्हें ज़्यादा जगह की ज़रूरत है.’ सूत्रों के मुताबिक, यह रिनोवेशन काफी बड़ा होगा और इसे पूरा होने में कम से कम 4 से 5 महीने, या उससे भी ज़्यादा समय लग सकता है.

धर्मेंद्र हाउस आज भी जॉइंट फैमिली होम के रूप में चलता है. यहां बॉबी देओल अपनी पत्नी तान्या देओल और बेटों आर्यमान देओल व धरम देओल के साथ रहते हैं. वहीं सनी देओल भी इसी घर में पत्नी पूजा देओल और बेटों करण देओल व राजवीर देओल के साथ रहते हैं. इस घर में धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर, उनकी बहन और भतीजी भी रहती हैं. यही वजह है कि यह घर बॉलीवुड की उन गिनी-चुनी मिसालों में से एक है, जहां इतना बड़ा परिवार एक ही छत के नीचे साथ रहता है.

धर्मेंद्र हाउस एक बड़ा और शानदार घर है, जहां मॉडर्न और ट्रैडिशनव डिजाइन दोनों का मेल है. पहले Curly Tales को दिए इंटरव्यू में बॉबी देओल ने बताया था कि इस घर का इंटीरियर उनकी पत्नी तान्या देओल ने बनाया है, जो पेशे से इंटीरियर डिज़ाइनर हैं. घर में इंडियन चीज़ें, लकड़ी का नक्काशीदार फर्नीचर और परिवार की तस्वीरें लगी हैं. पूरा घर साधारण दिखता है लेकिन बहुत पर्सनल और दिल से जुड़ा हुआ है.

देओल परिवार का जुहू वाला घर कई खास पारिवारिक पलों का गवाह रहा है. सनी देओल के बड़े बेटे करण देओल की शादी दृशा देओल से इसी धर्मेंद्र हाउस में हुई थी, जहां पूरे देओल परिवार ने मिलकर धूमधाम से जश्न मनाया. शादियों से लेकर जन्मदिन और सालगिरह तक, यह बंगला लंबे समय से देओल परिवार के इमोशन्स से जुड़ा रहा है. अब एक नया फ्लोर जुड़ने के साथ यह घर और भी बड़ा होने जा रहा है.

24 नवंबर 2025 को 89 साल की उम्र में धर्मेंद्र के निधन के बाद परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कई प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया. सनी देओल, बॉबी देओल और धर्मेंद्र की बेटियां अजीता और विजेता ने एक होटल में प्रेयर मीट रखी. वहीं अलग से हेमा मालिनी ने अपनी बेटियों ईशा देओल और अहाना देओल के साथ अपने घर पर प्रेयर मीट रखी. इसके अलावा हेमा मालिनी ने दिल्ली और मथुरा में भी प्रेयर मीट रखी. इन सभाओं में परिवार के करीबी सदस्य और दोस्त शामिल हुए और इस तरह देओल परिवार के मुखिया और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को विदाई दी गई.

PUNJAB : पंजाब के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, बार्डर पर बेरोकटोक खेती का रास्ता होगा साफ

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सीएम की मांग पर बार्डर पर तार शिफ्ट करने के लिए केंद्र सरकार ने सहमत जताई है. वहीं आने वाले दिनों में बार्डर पर स्थित हजारों एकड़ जमीन पर पंजाब के किसान बेरोकटोक खेती कर सकेंगे.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और पंजाब से संबंधित विभिन्न लंबित मुद्दों के जल्द और समयबद्ध समाधान के लिए विचार-विमर्श किया, जिनमें सीमावर्ती सुरक्षा प्रबंध, कृषि संकट, अंतर राज्यीय पानी संबंधी विवाद और केंद्र द्वारा ग्रामीण विकास फंड के बकाए की अदायगी में देरी शामिल है. इसके साथ ही सीमावर्ती सुरक्षा दीवार जीरो लाइन से काफी दूर होने के कारण किसानों को पेश मुश्किलों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और कंटीली तार के बीच पड़ने वाली कृषि योग्य भूमि के बड़े हिस्से पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए रोजाना इसे पार करना पड़ता है.

पंजाब के मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित बीज बिल 2025, अनसुलझे सतलुज यमुना लिंक (एस.वाई.एल) विवाद, एफ.सी.आई. द्वारा अनाज की धीमी ढुलाई, आढ़तिया कमीशन रोकने, ग्रामीण विकास फंड (आर.डी.एफ.) और मार्केट फीसों का भुगतान न करने और चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब की भूमिका को घटाने संबंधी पंजाब के एतराज उठाते हुए इन मुद्दों के तुरंत और समयबद्ध समाधान की मांग की है.

प्रस्तावित बीज बिल 2025 पर गंभीर एतराज उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और देश के अन्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान देता है, फिर भी बीज बिल का खाका संबंधित धारा तहत शेड्यूल अनुसार राज्य की प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित नहीं बनाता. बिल में पेश किया गया जोन आधारित सिस्टम मौजूदा प्रणाली के विपरीत, केंद्रीय बीज समिति में पंजाब की प्रतिनिधित्व की गारंटी नहीं देता, जिससे बीज क्षेत्र को सीधे प्रभावित करने वाले फैसलों में राज्य की आवाज दबाई गई है.’

पंजाब के मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘प्रस्तावित बीज बिल में राज्य की मौजूदा शक्ति को घटा दिया गया है क्योंकि बीज रजिस्ट्रेशन में राज्य बीज समिति की कोई भूमिका नहीं है और खाके में उन किसानों के लिए एक मजबूत मुआवजा ढांचा सुनिश्चित बनाने के बारे में भी कोई बात नहीं की गई, जिन्हें रजिस्टर्ड बीज संबंधी दर्शाए नतीजे न मिलने के कारण नुकसान होता है.’

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि विदेशों में टेस्ट की गईं और छोड़ी गईं बीज किस्मों को पंजाब और अन्य राज्यों में आयात व बिक्री के लिए राज्य के कृषि-जलवायु हालात तहत अनिवार्य स्थानीय टेस्टिंग के बिना अनुमति दी गई है, जिससे किसानों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि कृषि पंजाब की रीढ़ की हड्डी है, जहां किसान फसलें उगाते हैं, उपज का कुछ हिस्सा बेचते हैं और अगले सीजन के लिए बीज संभालकर रखते हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को बीजों के लिए पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर करने के लिए मजबूर करना न तो उचित है और न ही किसानों के हित में है. उन्होंने अपील की कि बिल को मौजूदा रूप में संसद के सामने नहीं लाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने समस्याओं की जांच का भरोसा दिया है.

नदियों के पानी के बारे में पंजाब के स्पष्ट स्टैंड को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है. सतलुज, रावी और ब्यास के पानी की उपलब्धता में काफी कमी आई है और इसलिए सतलज यमुना लिंक नहर का निर्माण व्यावहारिक नहीं है.’

उन्होंने कहा कि इन नदियों के 34.34 एम.ए.एफ. पानी में से पंजाब को सिर्फ 14.22 एम.ए.एफ. आवंटित किया गया था, जो लगभग 40 प्रतिशत है और बाकी 60 प्रतिशत हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को आवंटित किया गया था. हालांकि इनमें से कोई भी नदी वास्तव में इन राज्यों से नहीं बहती. उन्होंने कहा कि यह पंजाब के साथ घोर अन्याय है और इस नहर को बनाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि यह राज्य और इसके लोगों के हितों के पूरी तरह विरुद्ध है.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आगे पंजाब का स्टैंड स्पष्ट है कि किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.

अनाज की ढुलाई और भंडारण की समस्या को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एफ.सी.आई. द्वारा पिछले पांच महीनों में राज्य से सिर्फ 4 से 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 से 6 लाख मीट्रिक टन चावलों की ही ढुलाई की जा रही है. खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के 95 लाख मीट्रिक टन चावलों की डिलीवरी की जानी है लेकिन इस समय सिर्फ 20 लाख मीट्रिक टन जगह उपलब्ध है.’

उन्होंने कहा कि खरीफ खरीद सीजन 2025-26 के कस्टम मिल्ड चावलों की समय पर डिलीवरी और 01.04.2026 से शुरू होने वाले रबी मंडीकरण सीजन (आर.एम.एस.) 2026-27 के दौरान गेहूं के भंडारण के लिए जगह की उचित उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के लिए राज्य से कम से कम 20 लाख मीट्रिक टन अनाज (गेहूं और चावल के लिए 10-10 एल.एम.टी.) की मासिक ढुलाई करना जरूरी है. उन्होंने स्टॉक की ढुलाई के लिए विशेष रेल गाड़ियां चलाने की अपील करते हुए कहा कि पंजाब राष्ट्रीय पूल में लगभग 125 एल.एम.टी. गेहूं का योगदान देता है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए उचित स्टोरेज जरूरी है.

आढ़तिया कमीशन के मुद्दे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘आढ़तिया कमीशन को 2019-20 के खरीद सीजन से पंजाब कृषि उत्पाद और मार्केटिंग एक्ट 1961 के उपबंधों के विपरीत फ्रीज किया गया है और इस समय गेहूं के लिए कमीशन 46 रुपए प्रति क्विंटल और धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल तक सीमित किया गया है.’

उन्होंने बताया कि साइलोज पर अनाज की खरीद के लिए आढ़तिया कमीशन घटाकर रेगुलर मंडियों के मुकाबले आधा कर दिया गया है और जनवरी 2024 में आढ़तिया कमीशन की संशोधन के लिए गठित कमेटी ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है. उन्होंने कहा, ‘आढ़तिए एजेंट नहीं हैं, वे जरूरी सेवाएं प्रदान करते हैं और उन्हें बनता हक मिलना चाहिए. कमीशन में संशोधन में हो रही देरी के कारण राज्य की निर्विघ्न खरीद प्रक्रिया में अड़ंगा पैदा हो सकता है और दरों को जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए.’

ग्रामीण विकास फंड की अदायगी न होने का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘संबंधित पंजाब एक्टों के तहत स्पष्ट कानूनी उपबंधों के बावजूद राज्य सरकार को आर.डी.एफ. की अदायगी नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि भले ही राज्य सरकार ने भारत सरकार की हिदायतों के तहत पंजाब ग्रामीण विकास एक्ट में संशोधन किया है लेकिन दुख की बात है कि खरीफ खरीद सीजन 2021-22 से आर.डी.एफ. की इजाजत नहीं दी गई है.’

उन्होंने बताया कि आर.डी.एफ. के 9030.91 करोड़ रुपए और मार्केट फीस के 2267.83 करोड़ रुपए लंबित हैं. उन्होंने कहा कि बनता हिस्सा न मिलने के कारण ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर बुरा प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा कि ‘आर.डी.एफ. कोई चैरिटी नहीं है. यह पंजाब का हक है और हम अपना हक मांग रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि पहली किस्त जारी करने पर विचार के लिए जल्द मीटिंग बुलाई जाएगी.

प्रशासकीय चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के लंबे समय से चल रहे 60:40 अनुपात को बनाए रखना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि पंजाब के आई.ए.एस. और पी.सी.एस. अधिकारियों को चंडीगढ़ प्रशासन में मुख्य पदों से बाहर रखा गया है और आबकारी, शिक्षा, वित्त और स्वास्थ्य जैसे विभागों में पदों को स्टेट यू.टी. कैडर के लिए खोला जा रहा है, जिससे यू.टी. प्रशासन के प्रभावशाली कामकाज में पंजाब की भूमिका पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि मौजूदा अनुपात को बरकरार रखा जाएगा.

मुख्यमंत्री ने पंजाब कैडर के अधिकारी को एफ.सी.आई. पंजाब के जनरल मैनेजर के रूप में नियुक्त करने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पंजाब कैडर के अधिकारियों को अनाज की खरीद, मंडियां, भंडारण और ढोई-ढुआई बारे जरूरी जानकारी है. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि इस पद पर रेगुलर नियुक्तियां पंजाब कैडर से होती रही हैं, जबकि अन्य कैडर के अधिकारियों को सिर्फ अस्थायी चार्ज होता है. उन्होंने कुशलता और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के हित में इस नियम की पालना करने की अपील की.

सीमावर्ती इलाकों बारे मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय नियमों अनुसार, दीवार जीरो लाइन से 150 मीटर से दूर होनी चाहिए लेकिन पंजाब के कई इलाकों में सीमावर्ती कंटीली तार 2 से 3 किलोमीटर अंदर स्थित है.” उन्होंने कहा कि हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि इस तार से परे है, जिसके कारण किसानों को रोजाना पहचान पत्र दिखाना और बी.एस.एफ. की सुरक्षा के तहत अपने खेतों में खेती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. यदि तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक दोबारा बनाया जाता है तो भारतीय भूमि का बड़ा हिस्सा दीवार के इस पार आ जाएगा, जिससे किसान बिना किसी डर और रोजाना की पाबंदियों के खेती कर सकेंगे और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता भी नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें बताया कि यह मुद्दा विचाराधीन है और पठानकोट में भी इसी तरह की व्यवस्था संबंधी कोशिश की जा चुकी है.

ENTERTAINMENT : विवेक ओबेरॉय ने फिल्मों से क्यों बनाई थी दूरी? ट्रेनर ने खोला सीक्रेट, कहा- डिप्रेशन…

विवेक ओबेरॉय अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. मगर उन्होंने अचानक फिल्मों से दूरी बनाकर बिजनेस का रुख कर लिया था. एक्टिंग में उनके करियर ने बैकसीट ले ली थी. अब विवेक के फिटनेस ट्रेनर रह चुके विनोद चन्ना ने एक्टर को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

विवेक ओबेरॉय इंडस्ट्री के बेहतरीन एक्टर्स में शुमार किए जाते हैं. उन्होंने अपने करियर में कई हिट फिल्मों में काम किया है. मगर उन्हें इंडस्ट्री में वो नाम और फेम नहीं मिला, जिसकी हर कलाकार को चाहत होती है. उनके फिल्मी करियर ने एक समय पर बैकसीट ले ली थी. एक्टिंग करियर में उतार-चढ़ाव देखने के बाद विवेक ओबेरॉय ने बिजनेस का रुख कर लिया था. अब विवेक के फिटनेस ट्रेनर ने खुलासा किया है कि आखिर उन्होंने फिल्मों में काम करना कम क्यों कर दिया था?

विवेक ओबेरॉय को एक समय पर विनोद चन्ना ट्रेन करते थे. अब उन्होंने लेटेस्ट इंटरव्यू में बताया है कि एक्टर का खतरनाक एक्सीडेंट हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने फिल्में करनी कम कर दी थीं. विनोद चन्ना ने कहा- उनका एक बहुत बुरा एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उन्हें काफी चोटें आई थीं. इंडस्ट्री से उनके दूर जाने की एक बड़ी वजह यही थी. अक्सर लोगों को लगता है कि उन्होंने डिप्रेशन के कारण काम छोड़ा, लेकिन यह पूरा सच नहीं है. एक्सीडेंट में लगी चोटों की वजह से भी उन्हें इंडस्ट्री से दूर रहने का फैसला लेना पड़ा था.

एक्टिंग से हटकर विवेक के बिजनेस स्किल्स की तारीफ करते हुए विनोद ने कहा- वो बहुत ही टैलेंटेड इंसान हैं. वो बेहतरीन बिजनेस टाइकून हैं. उनके बिजनेस मैनेजमेंट स्किल्स ने मुझे दंग कर दिया था. उन्हें MBA के लोग लेक्चर के लिए बुलाते हैं. उनके पास एक अलग ही लेवल का टैलेंट है.

बता दें कि विवेक ओबेरॉय ने एक पुराने इंटरव्यू में अपने एक्सीडेंट के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि उनका एक्सीडेंट साल 2002 में फिल्म ‘रोड’ की शूटिंग के दौरान हुआ था. एक्टर ने कहा था- मैं ‘रोड’ के लिए राजस्थान में शूटिंग कर रहा था. हम बीकानेर से जैसलमेर जा रहे थे. सड़कें सुंदर थीं, ड्राइव भी बहुत अच्छी थी, लेकिन रात का समय था. मैंने ड्राइवर को कम से कम 15 से 20 बार धीरे चलने के लिए कहा था. ‘रात है, तो विजिबिलिटी कम है, गाड़ी धीरे चलाओ.’ मैं फ्रंट सीट पर बैठा था. मगर उस हादसे के बाद से मैं कभी फ्रंट सीट पर नहीं बैठा.

एक्टर ने आगे बताया था- मैंने अपनी सीट पीछे की तरफ झुका रखी थी और तभी अचानक एक बहुत बड़ा क्रैश हुआ, एक जोरदार आवाज आई. सड़क पर अचानक एक ऊंटगाड़ी आ गई, जिसमें लोहे की रॉड लदी हुई थीं. रॉड ने विंडशील्ड को तोड़ दिया था, और अगर मेरी सीट सीधी होती, तो वो रॉड मेरे शरीर के आर-पार हो जातीं. मैं कार से बाहर नहीं निकल पा रहा था, क्योंकि रॉड मेरे ठीक ऊपर थीं. लेकिन मैं सुरक्षित बच गया. लगभग मरते-मरते बच गया था. उसके बाद, मैंने रात में कभी ट्रैवल ना करने का फैसला किया था.

विवेक ओबेरॉय की बात करें तो उन्होंने फिल्म ‘कंपनी’ से अपना एक्टिंग डेब्यू किया था. वो ‘साथिया’, ‘दम’, ‘मस्ती’, ‘ओमकारा’, ‘मस्ती 4’ समेत कई शानदार फिल्मो में अपनी दमदार एक्टिंग से फैंस को इंप्रेस कर चुके हैं. उनकी कुछ फिल्में पाइपलाइन में भी हैं.

UP : झांसी में प्रेमी युगल ने की आत्महत्या, पेड़ पर मिले दोनों के शव, जांच में जुटी पुलिस

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उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से प्रेम संबंधों के नाम पर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां के चिरगांव थाना क्षेत्र के गांव कुम्हर्रा पट्टी में एक युवक और युवती ने समाजिक दबाव और परिस्थितियों से तंग आकर एक साथ आत्महत्या कर ली. दोनों के शव गांव के बाहर एक पेड़ पर एक ही रस्सी के सहारे लटके हुए मिले, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.

घटना की सूचना सुबह ग्रामीणों को मिली, ग्रामीण जब खेतों की ओर गए लोगों ने पेड़ पर दोनों के शव देखे. देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को नीचे उतरवाकर कब्जे में लिया. स्थानीय लोगों के अनुसार, मृत युवती की मांग में सिंदूर भरा हुआ था, जिससे यह संकेत मिला कि आत्महत्या से पहले दोनों ने खुद को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. यह दृश्य देख ग्रामीण भी भावुक हो गए.

युवक और युवती अलग-अलग समुदाय से थे, जिसके चलते दोनों को सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था. मामले को और भी संवेदनशील बना देने वाली बात यह है कि युवती की शादी की तारीख महज एक दिन पहले ही तय हुई थी. परिजन उसकी शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह प्रेम कहानी इतना दर्दनाक मोड़ ले लेगी. पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान युवक रियाजुल और युवती मुस्कान के रूप में हुई है. दोनों ही अविवाहित बताए जा रहे हैं. घटना के बाद से दोनों परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और परिजन सदमे की हालत में हैं.

पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग और सामाजिक दबाव से जुड़ा माना जा रहा है. हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है. इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज में प्रेम संबंधों को लेकर मौजूद बाधाओं और दबावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ENTERTAINMENT : ‘जहां भगवान है, वहां शैतान भी है..’ ब्लैक मैजिक से हुई शेफाली जरीवाली की मौत, पति पराग त्यागी बताई एक-एक डिटेल

पॉपुलर एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला का निधन ब्लैक मैजिक की वजह से हुई थी.अक्सर सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर कयास लगाए जाते रहते हैं. अब उनके पति ने इस बारे में बात की है.शेफाली जरीवाला ने महज 42 साल की उम्र में 2025 में दुनिया को अलविदा कह दिया था. ये उनकी फैमिली और फैंस के लिए किसी तगड़े झटके से बिल्कुल भी कम नहीं था.लोगों के लिए अभी भी विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि एक्ट्रेस इस दुनिया में नहीं हैं.

वहीं, पराग त्यागी तो अभी भी अपनी पत्नी की मौत के दर्द से नहीं उभरे हैं.उन्होंने अपनी वाइफ याद में यूट्यूब चैनल और पॉडकास्ट शुरू किया है. इतना ही नहीं वो अपनी वाइफ के अधूरे सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं.पराग ने तो अपनी जिंदगी ही शेफाली की यादों को समर्पित कर दी है.इसी बीच उन्होंने शेफाली की मौत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. पराग ने कहा कि शेफाली पर काला जादू किया गया और उन्हें पूरी विश्वास है.पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में पराग त्यागी ने कहा कि उन्हें लगता नहीं बल्कि पता है कि किसी ने शेफाली पर काला जादू किया था

पराग ने कहा,’यार पता है, बहुत सारे लोग इन चीजों को नहीं मानते, लेकिन मैं बहुत मानता हूं. जहां पर भगवान है, वहां शैतान भी है.पता है लोग अपने दुख से दुखी नहीं होते लेकिन दूसरे के सुख से दुखी होते हैं.मुझे लगता नहीं, मुझे पता है किसी ने किया है.’पराग ने आगे कहा,’मैं ये नहीं बोल सकता कि किसने किया, लेकिन किसी ने तो किया है.और मुझे महसूस होता है कि कुछ तो ड़बड़ है. एक बार नहीं दो बार हुआ है ऐसा महसूस और एक बार तो निकल गए लेकिन इस बार थोड़ी हैवी रही चीजें.मुझे नहीं पता, आइडिया नहीं क्या चीज थी क्या नहीं.’

पराग ने ये भी दावा किया कि ये पहली बार नहीं बल्कि दूसरी बार था.जब उन पर और शेफाली पर काला जादू किया गया था.’ पराग के अनुसार,’उन्हें लग रहा था कि शेफाली के संग कुछ तो गलत हुआ है.’ वो बोले,’मैं जब बैठा हूं ना भक्ति में, मुझे महसूस हो जाता है कुछ तो गड़बड़ है. पहली बार में वो इतनी हंसमुख लड़की है, उनको वही मेन लक्षण तो नहीं बता पाऊंगा. मैं ज्यादा डिटेल्स में नहीं जाना चाहूंगा, लेकिन मुझे उनको टच करके समझ आता था कि भाई कुछ तो गड़बड़ है.इस बार कुछ ज्यादा था तो मैं थोड़ा सा, पूजा बढ़ा दी थी. मैं 100 पर्सेंट श्योर हूं कि किसी ने तो किया है.’

पराग ने आगे कहा,’कर्मा आप साथ लेकर जाओगे. कुछ नहीं रहेगा और कुछ नहीं लेकर जाओगे.मेरी बीवी एक ट्रैक पैंट और शर्ट में गई है. मैं माफी मांगते हुए कह रहा हूं कि आज के समय पर मां-बाप नहीं भाते, भाई-बहन तो बिल्कुल नहीं भाते. लोग इमोशन से खेलते हैं.’

NATIONAL : पतंगबाजी का ऐसा जुनून! लाखों रुपये में किराए पर ली गईं छतें…, पूरी रात रोशन रहा हैदराबाद का आसमान

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हैदराबाद की ओल्ड सिटी में रात के समय पतंगबाजी एक नए उत्सव के रूप में उभर रही है. गोशामहल और बेगमबाजार इलाके में हर रात हजारों लोग इस अनोखे नजारे का हिस्सा बन रहे हैं. बड़ी बात ये है कि इसके लिए लाखों रुपये में छतें किराए पर ली जा रही हैं.

तेलंगाना के हैदराबाद की ओल्ड सिटी में इन दिनों एक अनोखा और रंगीन नजारा देखने को मिल रहा है. मकर संक्रांति और अन्य मौकों तक सीमित रहने वाली पतंगबाजी अब रात के समय भी बड़े पैमाने पर की जा रही है. खासतौर पर गोशामहल और बेगमबाजार इलाके में यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जहां हर रात हजारों लोग पतंग उड़ाने के लिए जुट रहे हैं.

सूरज ढलते ही इस पूरे इलाके का दृश्य बदल जाता है. इमारतों और घरों की छतों पर तेज रोशनी की व्यवस्था की गई है, जो सीधे आसमान की ओर की जाती है ताकि पतंगें साफ दिखाई दें. अंधेरे आसमान में चमकती रोशनी के बीच रंग-बिरंगी पतंगें एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं. यह नजारा न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि शहर के अन्य हिस्सों से आने वाले युवाओं और परिवारों को भी आकर्षित कर रहा है.

इस बढ़ते क्रेज का असर रियल एस्टेट पर भी साफ नजर आ रहा है. कई मकान मालिकों ने अपनी छतें रात की पतंगबाजी के लिए किराए पर दे दी हैं, जिनका किराया लाखों रुपये तक पहुंच गया है. छतें अब सिर्फ घर का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि मनोरंजन और उत्सव का प्रमुख केंद्र बन गई हैं.रात की पतंगबाजी में सुरक्षा और सुविधा का भी खास ध्यान रखा जा रहा है. कई स्थानों पर वॉलंटीयर व्यवस्था संभालते नजर आते हैं, वहीं स्थानीय दुकानदारों को भी इससे अच्छा खासा फायदा हो रहा है. पतंग, मांझा, लाइटिंग उपकरण और खाने-पीने की चीजों की बिक्री में तेजी आई है.

गोशामहल के विधायक राजा सिंह ने इस ट्रेंड को वर्षों की मेहनत का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि लगभग 15 वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद बेगमबाजार और गोशामहल क्षेत्र में रात की पतंगबाजी को पहचान मिली है. उनके अनुसार, यहां की नाइट काइट फ्लाइंग अब दिन की पतंगबाजी से कहीं ज्यादा जोशीली और कंपटीटिव हो गई है.कुल मिलाकर, हैदराबाद के ओल्ड सिटी में रात की पतंगबाजी न सिर्फ एक नया शौक बन चुकी है, बल्कि यह सांस्कृतिक उत्सव, सामाजिक मेलजोल और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा दे रही है.

NATIONAL : बुजुर्ग से 58 करोड़ की हुई थी ठगी… महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने पीड़ित को 2 करोड़ रुपये वापस दिलाए

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महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने साइबर ठगी के केस में कार्रवाई की है. मुंबई के रहने वाले 72 साल के बुजुर्ग से 58.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पहली किस्त के रूप में 2 करोड़ रुपये की राशि वापस कराई गई है. पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों की संपत्तियां फ्रीज की हैं, जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार है.

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने देश के अब तक के सबसे बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़ित को 2 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाई है. यह राशि 58.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पहली किस्त के तौर पर कोर्ट के आदेश के बाद रिफंड कराई गई है. पीड़ित 72 साल के बुजुर्ग मुंबई के रहने वाले हैं, जिन्हें साइबर अपराधियों ने महीनों तक डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बनाया था.

एजेंसी के अनुसार, ठगों ने खुद को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर पीड़ित और उनकी पत्नी से संपर्क किया. उन्हें कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेनदेन के मामले में फंसाने की धमकी दी गई. इसके बाद दंपति को करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया, यानी वीडियो कॉल और फोन के जरिए लगातार निगरानी और डर का माहौल बनाया गया.

इस दौरान ठगों ने अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराने के लिए दबाव डाला, जिससे कुल 58.13 करोड़ रुपये की ठगी हो गई. जब दंपति को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने महाराष्ट्र साइबर पुलिस से संपर्क किया.

राज्य पुलिस की साइबर टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की. अधिकारियों ने कई बैंक खातों और आरोपियों की संपत्तियों को फ्रीज कराया. लगातार कानूनी प्रयासों और कोर्ट के आदेश के बाद 2 करोड़ रुपये की राशि पीड़ित को वापस दिलाई गई.पुलिस का कहना है कि यह केवल पहली किस्त है और आगे भी फ्रीज की गई संपत्तियों और खातों के जरिए और रकम रिकवर करने की कोशिश जारी है.

इस मामले में देवेंद्र सैनी को मुख्य ऑपरेशनल हैंडलर बताया गया है, जो अब भी फरार है. महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 3 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है. पुलिस का मानना है कि सैनी की गिरफ्तारी से इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं.

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती. यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर पैसे की मांग करे या डराने की कोशिश करे, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.

NATIONAL : ‘मेरी कोई बहन नहीं है…’ से शुरू हुई कहानी, इंस्टाग्राम पर भाई बनकर महिला से साइबर फ्रॉड, चौंका देगी ये कहानी

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धनबाद में साइबर फ्रॉड का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इंस्टाग्राम के जरिए खुद को भाई बताने वाले ठग ने डराकर और धमकी देकर एक महिला से लाखों की ठगी कर ली. पुलिस की धमकी और फर्जी वीडियो भेजकर पीड़िता को मानसिक दबाव में रखा गया. फिलहाल इस मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई गई है.

डिजिटल अरेस्ट स्कैम का चौंकाने वाला मामला झारखंड के धनबाद से सामने आया है. यहां इंस्टाग्राम के जरिए मैसेज भेजकर खुद को भाई बताने वाले एक युवक ने डर और धमकी से एक परिवार से लाखों रुपये की ठगी कर ली. दरअसल, यह मामला पुटकी थाना इलाके के भागाबांध ओपी के भागाबांध बस्ती का है. महिला की बेटी को ठग ने इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजा था.

दरअसल, तिलकी देवी की बेटी को एक लड़के ने इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजा और कहा कि मेरी कोई बहन नहीं है. तुम ही मेरी बहन हो. मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट भेज रहा हूं. गिफ्ट भेजने के लिए एयरपोर्ट जा रहा हूं. डिलीवरी के लिए आए तो तुम रिसीव कर लेना.बेटी ने कहा कि ठीक है भाई. थोड़ी देर बाद फिर उसी नंबर से बताया गया कि उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है, कुछ पैसों की जरूरत है. इसके बाद बेटी ने अपनी मां को फोन दे दिया. फिर उसी नंबर से कॉल आया और कहा गया कि आपकी वजह से ही मेरा एक्सीडेंट हुआ है. पैसे नहीं देंगी तो पुलिस पहुंचेगी और तुम्हें घसीटते हुए लेकर आएगी.

तिलकी देवी ने कहा कि मोबाइल पर एक वीडियो भी भेजा, जिसमें एक महिला को पुलिस ले जा रही थी. यह सब देखकर डर गई. उसके बाद सऊदी अरब में रहने वाले भाई को फोन किया, उसने मेरे बैंक अकाउंट में पैसे भिजवाए. फोन करने वाले लड़के ने स्कैनर भेजा.स्कैनर के जरिए उसे 2 लाख 7 हजार 201 रुपए भेजे. इतने पैसे मिलने के बाद भी ठग ने 3 लाख रुपये और मांगने शुरू कर दिए.

जब ठग की मांग लगातार बढ़ने लगी तो महिला ने पड़ोसियों और आसपास के लोगों को पूरे मामले की जानकारी दी. तब उन्हें बताया गया कि यह साइबर फ्रॉड का केस है. इसके बाद वह सरायढेला स्थित साइबर थाने पहुंचीं, जहां पुलिस ने उन्हें नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने को कहा. पीड़िता ने हीरापुर के एक साइबर कैफे जाकर नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की और फिर साइबर थाने में लिखित आवेदन भी सौंपा.

साइबर थाना प्रभारी रविकांत प्रसाद ने कहा कि पीड़िता की ओर से लिखित आवेदन मिला है और नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई है. उन्होंने कहा कि पोर्टल पर दर्ज शिकायत 24 घंटे बाद साइबर थाने को प्राप्त होती है. शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर भावनात्मक बातें और डर दिखाकर ठग आसानी से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं. साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं, पैसे की मांग या पुलिस की धमकी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने से संपर्क करें. डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस या एजेंसी बताकर वीडियो कॉल, फर्जी वीडियो और गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं.

BIHAR : मिड-डे मील बना जहर, खिचड़ी खाने के बाद 50 से अधिक बच्चे बीमार

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मधेपुरा के सिंहेश्वर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद 50 से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए. बच्चों ने भोजन में छिपकली गिरने का आरोप लगाया है. सभी बच्चों को इलाज के लिए जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.

बिहार के मधेपुरा में एक सरकारी स्कूल में थाली में परोसी गई खिचड़ी बच्चों के लिए पोषण नहीं, बल्कि संकट बन गई. सिंहेश्वर प्रखंड के गहुमणि मध्य विद्यालय में मिड-डे मील के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां खिचड़ी खाने के बाद 50 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए. बच्चों की हालत बिगड़ते ही स्कूल से लेकर अस्पताल तक अफरा-तफरी मच गई.

घटना शनिवार की है. विद्यालय में बच्चों को मिड-डे मील के तहत खिचड़ी परोसी गई थी. भोजन करने के कुछ ही देर बाद कई बच्चों को उल्टी, चक्कर और पेट दर्द की शिकायत होने लगी. देखते ही देखते बच्चों की तबीयत बिगड़ती चली गई और वो घबराने लगे. बच्चों का आरोप है कि खाने में छिपकली गिरी हुई थी. कुछ बच्चों ने बताया कि जब उन्होंने इसकी शिकायत रसोईया से की, तो कथित तौर पर उनकी थाली छीन ली गई और मामले को दबाने की कोशिश की गई.

बच्चों की हालत बिगड़ने पर वो किसी तरह घर पहुंचे और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद आक्रोशित परिजन बच्चों को लेकर आनन-फानन में जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज, मधेपुरा पहुंचे. अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने से वहां भी हड़कंप मच गया. डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया और लगातार निगरानी में बच्चों को रखा गया. चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है.

घटना की सूचना मिलते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे. उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों से मुलाकात कर उनका हाल जाना. इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इस घटना ने एक बार फिर मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषण देना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं अभिभावकों की चिंता और नाराज़गी को और बढ़ा रही हैं.

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