Tuesday, September 15, 2026
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NATIONAL : मुश्किल में नेपाल, मदद को आगे आया भारत; जयशंकर बोले- बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी 10 टन राहत सामग्री

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नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के बीच भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने 10 टन आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में वह नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।

नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल की बाढ़ से निपटने की कोशिशों में सहायता के लिए 10 टन आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं।

हर मुश्किल में नेपाल के साथ भारत
जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति भी अपनी सहानुभूति व्यक्त की। भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और दवाइयां नेपाल के राहत प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम हैं।

बाढ़ से प्रभावित नेपाल को सहायता भेज रहा भारत
भारत पड़ोसी देश नेपाल के उत्तरी जिलों में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ के बाद भारतीय वायु सेना के विमानों से राहत सामग्री भेज रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) पहल के तहत नेपाल को दवाइयों और राशन समेत आपातकालीन सहायता की खेप भेजी जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, सरकार प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचावकर्मियों को भी नेपाल भेजने की योजना बना रही है।तिब्बत से लगे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता करीब 400 लोगों में कम से कम 105 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।बाढ़ से नदी किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही हुई और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत की ओर से सुबह करीब नौ बजे (स्थानीय समयानुसार) भोटे कोशी नदी में बाढ़ आई। उन्होंने बताया कि अचानक आई बाढ़ से रसुवा और धादिंग जिलों के अलावा काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला भी प्रभावित हुआ।

NATIONAL : परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी, केंद्र ने मांगे सुझाव; 13 सितंबर तक दे सकेंगे छात्र और अभिभावक

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केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए जनभागीदारी शुरू की है. नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स सुरक्षा, पारदर्शिता, तकनीक और छात्र हितों पर सुझाव ले रही है.

नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है. सरकार ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं. यह कवायद नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स कर रही है. इसका दायरा परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया से लेकर सुरक्षा, प्रश्नपत्र की संरचना, तकनीक, शिकायत निवारण और छात्रों के कल्याण तक रखा गया है.

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है. इसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणि कर रहे हैं. टास्क फोर्स को सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और प्रशासन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा कर केंद्र को सुधार संबंधी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी दी गई है. इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाएं भी शामिल हैं.

छात्रों से लेकर तकनीकी विशेषज्ञों तक से सुझाव
सरकार ने इस प्रक्रिया में अलग-अलग वर्गों की भागीदारी मांगी है. छात्र और अभ्यर्थी, अभिभावक, शिक्षक, शिक्षण संस्थान, परीक्षा कराने वाली एजेंसियां, विषय विशेषज्ञ और तकनीकी पेशेवर सुझाव दे सकते हैं. इसके अलावा उद्योग संगठन, सिविल सोसायटी संस्थाएं और अन्य इच्छुक लोग भी अपनी राय भेज सकते हैं. सरकार का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का अनुभव और व्यावहारिक सुझाव सुधार की दिशा तय करने में मददगार होंगे.

टास्क फोर्स परीक्षा की सुरक्षा और उसकी विश्वसनीयता मजबूत करने के उपायों पर विचार कर रही है. परीक्षा डिजाइन और मूल्यांकन पद्धति के साथ शासन, जवाबदेही और संस्थागत व्यवस्था की भी समीक्षा होगी. नकल और दूसरी अनियमितताओं की रोकथाम, पहचान और शिकायतों के समाधान के लिए बेहतर व्यवस्था पर सुझाव लिए जाएंगे. सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT के इस्तेमाल और परीक्षा केंद्रों के भौतिक तथा तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान रहेगा.

समान अवसर और छात्र हित भी एजेंडे में
नई परीक्षा व्यवस्था में सामाजिक, आर्थिक, क्षेत्रीय और भाषाई आधार पर उम्मीदवारों की पहुंच और भागीदारी बेहतर बनाने पर भी जोर है. पारदर्शिता, शिकायत निवारण और अभ्यर्थियों के साथ बेहतर संवाद को लेकर सुझाव मांगे गए हैं. परीक्षा के दौरान छात्रों के मानसिक और समग्र कल्याण से जुड़े उपाय भी समीक्षा का हिस्सा होंगे. सरकार ने कहा है कि हितधारक इसके अलावा किसी ऐसे मुद्दे या उपाय का सुझाव भी दे सकते हैं, जो परीक्षा प्रणाली को बेहतर बना सके.

13 सितंबर तक भेज सकेंगे अपनी राय
सार्वजनिक परामर्श में शामिल होने की अंतिम तारीख 13 सितंबर 2026 तय की गई है. सुझाव अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में दिए जा सकते हैं. इसके लिए सरकार ने एक समर्पित सार्वजनिक परामर्श पोर्टल उपलब्ध कराया है. इसके अलावा 1800-180-4747 पर फोन, +91 78270 42830 पर WhatsApp में “hptf” लिखकर या ExamReformsTaskforce@dopt.gov.in पर ईमेल के जरिए भी सुझाव भेजे जा सकते हैं. प्राप्त सुझावों के आधार पर टास्क फोर्स अपनी

NATIONAL : धर्मेंद्र प्रधान से पहले इन शिक्षा मंत्रियों को भी देना पड़ा था इस्‍तीफा, जानें तब क्‍या रही थी वजह

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धमेंद्र प्रधान से पहले कई ऐसे शिक्षा मंत्री रहे हैं, जिनको अपने पद से इस्‍तीफा देना पड़ा था. आज भले ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफे के पीछे बड़ी वजह नीट पेपल लीक के बाद खड़ा हुआ बवाल रहा है. लेकिन, इनसे पहले शिक्षा मंत्रियों को किन हालात में इस्‍तीफे देने पड़े, आइए जानते हैं विस्‍तार से.

नई दिल्ली. नीट-यूजी मामले में आज केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्‍तीफे का ऐलान कर दिया है. अतीत के पन्‍ने पलटे तो यह पहला मौका नहीं है, जब किसी केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने अपने पद से इस्‍तीफा दिया हो. इससे पहले भी अलग अलग सरकारों में कई ऐसे मौके आ चुके हैं, जिब अलग अलग वजहों से केंद्रीय शिक्षा मंत्रियों को अपना इस्‍तीफा देना पड़ा था. हां कई बार इस इस्‍तीफे की वजह तात्‍कालिक राजनैतिक सरगर्मियां रहीं, तो कभी व्‍यक्तिगत कारणों से इस्‍तीफे देने पड़े.

पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने राजनीतिक कारणों से मंत्री पद से इस्तीफा दिया था. दिसंबर 1994 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार से अपना इस्तीफा दे दिया था. बताया जाता है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे. अर्जुन सिंह ने इन्हीं राजनीतिक विवादों और मतभेदों के चलते मानव संसाधन विकास मंत्री का पद छोड़ दिया था.

अर्जुन सिंह के इस्‍तीफे के बाद यह मंत्रालय करीब दो महीने तक खाली रहा. इन दो महीनों में इस मंत्रालय का प्रभार तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्‍हा राव के पास रहा. इसके बाद, 10 फरवरी 1995 को इस मंत्रालय की जिम्‍मेदारी माधवराव सिंधिया को सौंपी गई. लेकिन, वह भी इस मंत्रालय में सिर्फ 11 महीने तक रह सके. जनवरी 1996 में उन्‍हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. दरसअल, उस समय उनका नाम चर्चित जैन हवाला मामले में सामने आया था. माधवराव सिंधिया ने मामले की जांच के दौरान नैतिक आधार पर मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया. हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के तौर पर इस्‍तीफा देने वालों में तीसरा नाम रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में रमेश पोखरियाल निशंक ने 30 मई 2019 को शिक्षा मंत्री के तौर पर जिम्‍मेदारी संभाली थी. उन्‍हें तत्‍कालीन शिक्षा मंत्री स्‍मृति इरानी की जगह शिक्षा मंत्री बनाया गया था. मंत्रिमंडल फेरबदल में स्‍मृति इरानी को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया था. रमेश पोखरियाल शिक्षा मंत्री के पद पर करीब करीब दो साल तक रहे. उन्‍होंने अपने पद से 7 जुलाई 2021 को इस्‍तीफा दे दिया था. बताया जाता है कि उनके इस्‍तीफे की मुख्‍य वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं.

WORLD : कितनी खतरनाक है जैवलिन मिसाइल? भारतीय सेना में होगी शामिल, अमेरिका ने लगाई मुहर

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यूक्रेन युद्ध में रूसी टैंकों के खिलाफ अपनी क्षमता दिखा चुकी अमेरिकी जैवलिन मिसाइल अब भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने जा रही है। भारत ने इस घातक एंटी-टैंक सिस्टम की खरीद को आगे बढ़ा दिया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इसे भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के लिए अहम कदम बताया है। खास बात यह है कि दोनों देश भविष्य में इसके भारत में निर्माण की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर जैवलिन में ऐसा क्या खास है, जो इसे भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

युद्ध में क्यों खास है जैवलिन मिसाइल?
दरअसल, जैवलिन एक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। यानी इसे सैनिक अपने साथ लेकर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं। यही वजह है कि पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में यह काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

इसकी सबसे खासियत है फायर एंड फॉरगेट तकनीक। सैनिक लक्ष्य को लॉक करता है और मिसाइल दाग देता है। इसके बाद मिसाइल खुद अपने लक्ष्य को ट्रैक करती है। ऑपरेटर को लगातार इसकी दिशा नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती।

मिसाइल में इन्फ्रारेड सीकर लगा है। इससे यह दिन और रात दोनों समय लक्ष्य की पहचान कर सकती है। खराब मौसम में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

टैंक बनाती है निशाना
जैवलिन की सबसे चर्चित क्षमता इसका टॉप-अटैक मोड है। इसमें मिसाइल सीधे टैंक के सामने से हमला करने के बजाय ऊपर उठकर उसके कमजोर ऊपरी हिस्से पर वार कर सकती है।

किसी टैंक की छत आमतौर पर उसके सामने वाले हिस्से जितनी मजबूत नहीं होती। इसलिए यह तकनीक भारी बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ काफी प्रभावी हो सकती है। जरूरत पड़ने पर जैवलिन डायरेक्ट-अटैक मोड में भी इस्तेमाल की जा सकती है। इसकी रेंज करीब 4 किलोमीटर तक बताई जाती है। सिस्टम का वजन लगभग 22.3 किलोग्राम है। मिसाइल लॉन्च होने के बाद सैनिक तुरंत अपनी जगह बदल सकते हैं। इससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचने में मदद मिल सकती है।

चीन-पाक सीमा पर क्यों बढ़ेगी ताकत?
भारत के लिए जैवलिन की अहमियत सिर्फ इसकी मारक क्षमता तक सीमित नहीं है। भारत की सीमाओं पर कई ऐसे इलाके हैं, जहां भारी हथियारों को तेजी से पहुंचाना मुश्किल होता है।

लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्का और पोर्टेबल एंटी-टैंक सिस्टम सैनिकों के लिए उपयोगी हो सकता है। चीन या पाकिस्तान की तरफ से बख्तरबंद वाहनों के इस्तेमाल की स्थिति में यह हर मोर्चे पर तैनात जवानों को अतिरिक्त क्षमता देगा। बता दें इस सौदे में मिसाइलों और लॉन्चिंग यूनिट के साथ प्रशिक्षण सिमुलेटर, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहायता भी शामिल है। सेना ने इस गाइडेड मिसाइल प्रणाली को खरीदने के लिए आधिकारिक हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इस 292 करोड़ रुपये के सौदे के तहत सेना को 100 जैवलिन मिसाइलें और 25 स्पेशल लॉन्चिंग यूनिट मिलेंगी।

जैवलिन को अमेरिकी कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के संयुक्त उपक्रम ने विकसित किया है। अब भारत की कोशिश सिर्फ इसे खरीदने तक सीमित नहीं रहने की है। अगर इसके उत्पादन की तकनीक और निर्माण क्षमता भारत में आती है, तो यह देश की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए भी बड़ा कदम साबित हो सकता है।

NATIONAL : मनुस्मृति विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की चेतावनी, राहुल गांधी माफी मांगें वरना होगा बहिष्कार

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मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई है। शंकराचार्य ने माफी की मांग करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस के खिलाफ हिंदू बहिष्कार अभियान पर विचार किया जाएगा।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई है। शंकराचार्य ने राहुल गांधी पर मनुस्मृति में कही गई बातों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार मनुस्मृति के खिलाफ बोलते हैं, लेकिन जिन बातों का उल्लेख वे करते हैं, उसे लेकर कोई ठोस उदाहरण नहीं देते। शंकराचार्य ने कहा कि अगर राहुल गांधी अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगते हैं तो वे कांग्रेस के खिलाफ हिंदू बहिष्कार की मुहिम चलाने पर विचार करेंगे।

शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने पहले संसद में मनुस्मृति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना है कि राहुल गांधी ने मनुस्मृति को ऐसी बातों से जोड़ा, जो वास्तव में उसमें नहीं कही गई हैं। शंकराचार्य के मुताबिक उन्होंने राहुल गांधी से यह बताने को कहा था कि मनुस्मृति में वह बात आखिर कहां लिखी है, लेकिन उन्हें इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसी वजह से उन्होंने राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी विचारों पर सवाल उठाया। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपरा में वेद और स्मृतियों का विशेष महत्व है और मनुस्मृति भी इसी परंपरा का हिस्सा है। सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों लोग मनुस्मृति को श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। उन्होंने कहा कि किसी धर्मग्रंथ को गलत तरीके से प्रस्तुत करके बदनाम करना उचित नहीं है।

पुणे में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा दिए उस बयान पर भी शंकराचार्य ने सवाल उठाया, जिसमें मनुस्मृति को महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जो बातें कही गई हैं, उन्हें आज के संदर्भ में केवल बंधन के रूप में देखना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मनुस्मृति में पिता द्वारा बेटी की रक्षा की बात कही जाती है तो इसे महिला की स्वतंत्रता छीनने के रूप में नहीं देखा जाए। बच्ची के जन्म के बाद उसकी सुरक्षा करना पिता की जिम्मेदारी होती है और परिवार में भी माता-पिता अपनी बेटियों की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला की सुरक्षा और उसकी स्वतंत्रता को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। किसी महिला की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेना अपने आप में उसे बंधन में डालना नहीं है।

शंकराचार्य ने बुजुर्ग महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि उम्र बढ़ने के बाद मां की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी बेटे की भी होती है। उन्होंने सवाल किया कि अगर परिवार का कोई सदस्य अपने माता-पिता की देखभाल करता है तो इसे स्वतंत्रता के खिलाफ कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवार में एक-दूसरे की जिम्मेदारी निभाने की परंपरा भारतीय समाज की पुरानी व्यवस्था का हिस्सा रही है। मनुस्मृति में भी अलग-अलग उम्र और परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारियों की बात की गई है।

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर राहुल गांधी को पत्र भी भेजा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य राहुल गांधी से व्यक्तिगत दुश्मनी रखना नहीं है। वे किसी राजनीतिक नेता के विरोधी नहीं हैं लेकिन धर्मग्रंथों के अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कई मौकों पर अच्छी बातें भी कही हैं और जब उन्हें कोई बात सही लगी तो उन्होंने उसका समर्थन किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी राजनीतिक नेता के समर्थक या भक्त बन जाएंगे।

शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी धर्म के ग्रंथ के बारे में बोलने से पहले उसके मूल संदर्भ और अर्थ को समझना जरूरी है। मनुस्मृति के किसी श्लोक या व्यवस्था की व्याख्या करते समय उसके समय, संदर्भ और मूल अर्थ को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी के मन में कोई भ्रम या सवाल है तो वे बैठकर इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं लेकिन बिना सही संदर्भ के धर्मग्रंथ पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।

शंकराचार्य ने चेतावनी दी कि अगर मनुस्मृति को लेकर इसी तरह की टिप्पणियां जारी रहीं और माफी नहीं मांगी गई तो वह इस मुद्दे को लेकर अभियान चलाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं को भी इस विषय को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता को धर्मग्रंथों का अपमान करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य दल धार्मिक आस्था के विषय पर मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि वे राहुल गांधी के व्यक्तिगत विरोधी नहीं हैं। उनका विरोध केवल उन बयानों को लेकर है, जिन्हें वह सनातन धर्म और उसके ग्रंथों के प्रति अपमानजनक मानते हैं।

NATIONAL : मुंबई में Gen Z और Gen Alpha से संवाद करेंगे मोहन भागवत, 2 हजार से ज्यादा छात्र लेंगे हिस्सा

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मोहन भागवत 6 अगस्त को I.I.M.U.N. की 15वीं वर्षगांठ पर जेन ज़ी और जेन अल्फा से संवाद करेंगे. I.I.M.U.N. के संस्थापक ऋषभ शाह ने कहा कि यह आयोजन 15 सालों से लगातार हो रहा है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को जेन ज़ी और जेन अल्फा से संवाद करेंगे. यह कार्यक्रम ‘इण्डियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (I.I.M.U.N.) की 15वीं वर्षगांठ और उसकी वार्षिक चैंपियनशिप कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह के मौके पर आयोजित किया जा रहा है. मुंबई स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश के 100 से ज्यादा शहरों से 15 से 19 साल के 2,000 से भी ज्यादा छात्र हिस्सा लेंगे.

इस साल सम्मेलन की थीम द रोल ऑफ यूथ इन यूनाइटिंग द वर्ल्ड: द इंडियन वे रखी गई है, जिसके तहत छात्र राष्ट्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे. इस बीच I.I.M.U.N. के संस्थापक ऋषभ शाह ने कहा कि यह कोई नया आयोजन नहीं है, बल्कि उनकी संस्था 15 सालों से हर साल अगस्त महीने में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है.

15 सालों से चल रहा है आयोजन
ऋषभ शाह ने बताया कि उनकी संस्था हर साल 1 से 15 अगस्त के बीच कार्यक्रम आयोजित करती है. उन्होंने बताया कि भारत और कई अन्य देशों में 11 से 19 साल की उम्र के बच्चों और युवाओं के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि आज इस उम्र के ग्रुप को ‘जेन Z’ और ‘जेन अल्फा’ कहा जाता है.

चार दिन तक चलेगा कार्यक्रम
उन्होंने बताया कि यह चार दिवसीय इस कार्यक्रम में ‘जेन Z’ और ‘जेन अल्फा’ के प्रतिभागियों के लिए डिबेट और चर्चाएं शामिल होती हैं. उन्होंने बताया कि पहले दिन मुख्य वक्ता आते हैं और उनका संबोधन होता है. वहीं दूसरे, तीसरे और चौथे दिन स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर डिबेट आयोजित की जाती है. उन्होंने बताया कि भारत के 108 शहरों और 15 देशों में यही तरीका अपनाया जाता है. इसके बाद अगस्त में इसका समापन कार्यक्रम होता है.

शाह ने कहा कि बहुत से लोगों के लिए यह नई बात हो सकती है, उनका हमारा संगठन पिछले 15 सालों से यह काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह अब इतना बड़ा मुद्दा इसलिए बन गया है, क्योंकि चर्चा ‘जेन Z’ पर केंद्रित है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शामिल सभी करीब 2,000 प्रतिभागी ‘जेन Z’ आयु वर्ग से हैं.

कार्यक्रम में शिरकत करेंगे
इसके साथ ही ऋषभ शाह ने स्पष्ट किया कि मोहन भागवत इस कार्यक्रम में वर्चुअल नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि हमने पहले भी 2016 और फिर 2020 में RSS प्रमुख मोहन भागवत को युवाओं से बातचीत करने, उन्हें मार्गदर्शन देने और अपने विचार साझा करने के लिए आमंत्रित किया था, और वो उन मौकों पर भी शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि उन्होंने इस बार भी हमारा निमंत्रण स्वीकार किया.

कई प्रमुख हस्तियां जुड़ चुकी हैं
शाह ने कहा कि पिछले कुछ सालों में अलग-अलग क्षेत्रों की कई जानी-मानी हस्तियों ने I.I.M.U.N. के मंच पर युवाओं को संबोधित किया. उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी I.I.M.U.N. की लीडरशिप टीम के साथ बातचीत की है. उन्होंने कहा कि इस मंच का मकसद नई पीढ़ी तक भारतीयता की भावना पहुंचाना है.

‘युवाओं के साथ सार्थक संवाद जरूरी’
IMUN के संस्थापक ऋषभ शाह का कहना है कि नेतृत्व केवल अगली पीढ़ी को दिशा देने का नाम नहीं है, बल्कि उनकी बात सुनना भी उतना ही जरूरी है. उनके मुताबिक, भारत ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां युवाओं के साथ सार्थक संवाद पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

2011 में हुई थी संगठन की स्थापना
I.I.M.U.N. भारत का एक प्रमुख युवा संगठन और मंच है, जो मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN), नेतृत्व विकास कार्यक्रमों और सम्मेलनों का आयोजन करता है. यह भारत में 275 शहरों और 40 से अधिक देशों में फैला हुआ है. इस संगठन की स्थापना साल 2011 में हुई थी, जिसे 15 से 24 साल के युवा संचालित करते हैं. इसके अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए से अब तक 7.5 करोड़ से ज्यादा युवा और 1.5 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज जुड़ चुके हैं.

भागवत का युवाओं से संवाद अहम
भागवत का यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल ही में नीट पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों के आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे. इस आंदोलन के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग तेज हुई और केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए नया कानून लागू किया. इसी दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया था.ऐसे माहौल में RSS प्रमुख का युवाओं से सीधा संवाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

WORLD : भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ शांति ला सकती है।उन्होंने कहा कि दुनिया में भले ही अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष हों, लेकिन अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो दुनिया में बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है।

भागवत 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इसे मैचलैस गिफ्ट्स भी कहा जाता है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस्कॉन के 120 देशों में 1,300 मंदिर हैं।

RSS प्रमुख 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वे RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर तीन देशों, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे पर हैं। इस दौरान वे भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं।

भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम आयोजक है। कार्यक्रम में भागवत का संबोधन भी होगा।

भागवत के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का विरोध भी हो रहा है। अमेरिका के कई हिंदू संगठनों समेत 61 इंटरफेथ और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ खुला पत्र जारी किया है।मंगलवार को हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क समेत कई संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इन संगठनों ने कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की है।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी कार्यक्रम को लेकर अपनी असहमति जता चुके हैं। उन्होंने RSS को ‘बांटने वाली सोच’ वाला बताया। ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कार्यक्रम से पहले सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने की अपील की है।

HAF ने कहा कि कार्यक्रम को रोकने और रद्द कराने की कोशिशें की गई हैं। संगठन ने न्यूयॉर्क प्रशासन से कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा और उनके नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

अमेरिकी आयोग ने RSS पर बैन की मांग की थी

भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की है। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की।

भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

मार्च की रिपोर्ट में RSS और RAW पर कार्रवाई की सिफारिश

USCIRF ने मार्च में अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट में RSS और RAW समेत कुछ संगठनों और लोगों पर बैन लगाने की सिफारिश की गई थी।

भारत ने रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार ने कहा था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं और इसमें भारत की स्थिति की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है।

2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत

मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था।

2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

WORLD : भारत-कनाडा बातचीत: द्विपक्षीय निवेश संधि पर वार्ता को हरी झंडी, 2030 तक ₹4.65 लाख करोड़ के कारोबार का लक्ष्य

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भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों में नया अध्याय जुड़ रहा है। नई दिल्ली में मार्च 2026 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक की प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों के वित्त मंत्रियों के बीच पहली आर्थिक और वित्तीय वार्ता संपन्न हुई। बैठक के बाद भारत ने कनाडा के साथ जल्द से जल्द ‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ (बीआईटी) पर बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई है। यह रणनीतिक कदम निवेश संबंधों को मजबूत करेगा और वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) और नया व्यापार लक्ष्य क्या है?
इस वार्ता का मुख्य ध्यान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना रहा। दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाने के संकल्प को दोहराया है। यह महत्वपूर्ण कदम मार्च 2026 में नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक की प्रतिबद्धताओं पर आधारित है। दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 के अंत तक ‘कनाडा-भारत व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता’ (सीईपीए) वार्ता को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।

इस बातचीत में किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया?
वित्त मंत्रियों- निर्मला सीतारमण और फ्रांसिस-फिलिप शैम्पेन ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और अपनी घरेलू नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा की। वार्ता में भारतीय बाजार में कनाडाई पेंशन फंडों की बड़ी मौजूदगी को रेखांकित किया गया और वित्तीय संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई। दोनों पक्षों ने निवेशकों के लिए स्थिर और निश्चित घरेलू कर कानूनों की आवश्यकता को महत्वपूर्ण माना।

संवाद में भुगतान प्रणालियों के आधुनिकीकरण, वित्तीय स्थिरता, फिनटेक इनोवेशन और वित्तीय अपराधों से निपटने पर सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई। इसमें सबसे बड़ा कदम कनाडा में भारत के ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) के विस्तार का स्वागत करना है। इसके लिए स्थानीय भुगतान सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी की जाएगी, जिससे सीमा पार प्रेषण (रेमिटेंस) तेज और सस्ता होगा। इसका लाभ दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा, व्यापार और छोटे व मध्यम स्तर के उद्यमों (एमएसएमई) को मिलेगा।

द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति क्या है और आगे क्या होगा?
वर्ष 2025-26 में भारत-कनाडा द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा है, जिसमें भारत का निर्यात 4.67 अरब डॉलर और आयात 3.28 अरब डॉलर था। इसे देखते हुए 2030 तक इसे 4.65 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य बेहद महत्वाकांक्षी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस यात्रा के दौरान कनाडाई कंपनियों के साथ ऊर्जा, एआई और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में चर्चा कर रही हैं। इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अगली आर्थिक और वित्तीय वार्ता वर्ष 2027 में आयोजित की जाएगी, जहां इसकी प्रगति की समीक्षा होगी।

NATIONAL : ‘मैं BJP की कठपुतली नहीं हूं’, कंगना रनौत का बड़ा बयान, खुद को बताया ‘बेहद डिमांडिंग एक्ट्रेस’

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बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने विचारों को खुले रूप से रखने के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, 2024 में बीजेपी से जुड़ने और हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद भी कई मौकों पर उनके बयान पार्टी की राय से अलग नजर आए हैं।

हाल ही में एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि वह बीजेपी की “कठपुतली” नहीं हैं। उन्होंने यह भी माना कि भविष्य में ऐसा हो सकता है कि पार्टी किसी मुद्दे पर उनका साथ न दे। इसके साथ ही कंगना ने अपने फिल्मी करियर को लेकर कहा कि आज भी कई निर्देशक उन्हें “बेहद डिमांडिंग एक्ट्रेस” मानते हैं।

कंगना ने आगे कहा कि अब उनकी दिलचस्पी ऐसे किरदार निभाने में ज्यादा है, जो उनकी उम्र के हिसाब से हों और जिनमें उन्हें किसी “खान या कुमार” के साथ कास्ट किया जाए। दूरदर्शन के साथ बातचीत में कंगना ने कहा कि “ऐसा नहीं है कि मैं अपनी पार्टी से दूर जाना चाहती हूं। लेकिन जब बहुत ज्यादा शोर होता है, तो अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए आवाज थोड़ी ऊंची करनी पड़ती है।”

एक्ट्रेस ने कहा “इसलिए कभी-कभी मैं कुछ कड़े बयान देती हूं। मेरा इरादा पार्टी की विचारधारा से अलग होने का बिल्कुल नहीं है। लेकिन अगर कभी एक इंसान के तौर पर मेरी राय अलग हो भी जाए, तो यह याद रखना चाहिए कि मैं कोई कठपुतली नहीं हूं। आज बीजेपी मेरे साथ है, हो सकता है कल न हो। मैं पिछले दो साल से सांसद हूं, जबकि एक अभिनेत्री के तौर पर मेरी पहचान और मेरा करियर पिछले 20 साल से है। मेरी अपनी एक पहचान पिछले 20 सालों से बनी हुई है।”

पहले एक्ट्रेस हूं फिर बीजेपी सांसद
कंगना का कहना था कि वो पहले एक एक्ट्रेस हैं, बाद में बीजेपी सांसद। उनकी पहचान आज भी बतौर अभिनेत्री ज्यादा है। एक्ट्रेस से जब पूछा गया कि उनके अगले 10 साल के प्लान क्या हैं। इस पर कंगना ने कहा कि ये बहुत मुश्किल सवाल है। आज भी कई निर्देशक उनके साथ काम करने के लिए एक्साइटेज हैं और उन्हें फिल्मों के ऑफर का इंतजार है। कंगना का कहना था कि कई डायरेक्टर उनसे पूछते हैं कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी क्यों बनाई।

बॉलीवुड में वापस फिल्मों में काम करने के बारे में एक्ट्रेस ने कहा कि अगर वह दोबारा पूरी तरह फिल्मों में लौटती हैं, तो क्या बॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउस उन्हें काम देंगे। इस पर उन्होंने कहा कि वह पहले खुद ही इन बड़े ऑफर्स को ठुकरा चुकी हैं।

अपनी फिल्म जयललिता का हवाला देते हुए कंगना कहती हैं कि कुछ रोल निभाने के लिए एक खास तरह का व्यक्तित्व, उम्र और अंदाज होना जरूरी है। इसलिए मुझे लगता है कि ये भूमिकाएं मेरे लिए किसी खान या कुमार के साथ पारंपरिक हीरोइन का किरदार निभाने से ज्यादा बेहतर और सहज हैं।

WORLD : नेपाल त्रासदी: 288 भारतीय लापता, इनमें अधिकतर कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री; विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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TGWनेपाल त्रासदी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में लापता लोगों के बारे में जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में 288 लोग ऐसे हैं, जिनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। साथ ही विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भेजी गई राहत सामग्री की भी जानकारी दी।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। इनके अलावा 37 और 39 लोगों के दो समूह तमिलनाडु के हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा तीसरा समूह 32 लोगों का है, जो पश्चिम बंगाल के हैं, वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा 61 लोग विभिन्न राज्यों के हैं, जो नेपाल में लापता हैं। साथ ही केरलम के 33 लोगों का भी एक समूह नेपाल में लापता है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूह लापता हैं।

केरलम
नोरका रूट्स ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के कारण केरलम के 53 लोग (जिनमें बच्चे भी शामिल हैं) वहां फंस गए हैं। नोरका रूट्स केरल सरकार की वह एजेंसी है जो विदेश में रहने वाले केरल के लोगों के मामलों और कल्याणकारी सेवाओं का कामकाज देखती है।

तमिलनाडु
तमिलनाडु और पुडुचेरी से कुल 106 लोग मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इनमें से 20 लोगों को बचा लिया गया है, जबकि 37 लोग अभी भी लापता हैं। सरकार ने कहा कि वह चेन्नई से गए अन्य 49 लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

कर्नाटक
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के कार्यालय ने गुरुवार को बताया कि कर्नाटक के कम से कम 13 लोग (जिनमें से 11 बंगलूरू शहरी जिले के हैं) नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

तमिलनाडु के 21 लोगों को सुरक्षित बचाया गया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तमिलनाडु के 21 लापता लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। जल्द ही इन लोगों को काठमांडू से नई दिल्ली लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कई कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री चीन में भी फंसे हुए हैं। इन लोगों का करीब 200 का आंकड़ा है। जिन्हें जल्द भारत लाया जाएगा।

भारत ने नेपाल भेजी 47 टन राहत सामग्री
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेपाल को इस मुश्किल समय में मदद के लिए भारत ने दो विमान भेजे हैं। जिनमें से एक सी-130 जे विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर बुधवार को नेपाल हुआ था। इनमें अस्थायी शेल्टर, दवाईयां आदि लेकर गया है। आज भी एक सी-17 विमान 37 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इनमें से आठ टन दवाईयां हैं और एक टन खाद्य पदार्थ हैं। इस तरह दो दिनों में नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जो भी राहत सामग्री भेजी गई है, वह नेपाल की मांग के आधार पर ही भेजी गई है।

दूतावास हेल्पलाइन चलाकर लोगों की मदद कर रहे
विदेश मंत्रालय ने बताया कि एक कंट्रोल रूम विदेश मंत्रालय में स्थापित किया गया है और भारतीय दूतावास के हम लगातार संपर्क में हैं। रणधीर जायसवाल ने बताया कि बाढ़ के चलते नेपाल में नेटवर्क बुरी तरह से बाधित हुआ है, जिसके चलते भी कई लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। हमारे नेपाल और बीजिंग में मौजूद दूतावास 24 घंटे हेल्पलाइन चलाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। जायसवाल ने बताया कि जैसे-जैसे उनके पास अपडेट आएगा, वे लोगों को जानकारी देते रहेंगे।

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