Sunday, April 26, 2026
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NATIONAL : સરકાર દ્વારા કરોડોનું આંધણ છતાં કેરળ સહિત અન્ય રાજ્યો કરતાં પણ ગુજરાતમાં બાળમૃત્યુદર વધુ

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કુપોષણના નામે કરોડોનું આંધણ કરવામાં આવી રહ્યુ છે, તેમ છતાંય બાળ મૃત્યુદરને ઓછો કરવામાં સફળતા મળી શકી નથી. કેરળ, કાશ્મીર સહિત અન્ય રાજ્યની સરખામણીમાં ગુજરાતમાં શિશુ મૃત્યુ દર વધુ રહ્યો છે. એક હજાર બાળક દીઠ પાંચ વર્ષથી ઓછી વયના 23 નવજાત મોતને ભેટી રહ્યાં છે.

ગુજરાતમાં શિશુ મૃત્યુ અટકાવવા માટે બાળ સખા યોજના, જનની સુરક્ષા અભિયાન સહિત ઘણી સરકારી યોજનાઓ અમલમાં છે. આ ઉપરાંત કુપોષણમુક્ત ગુજરાત બનાવવા રાજ્ય સરકાર લાખો કરોડોનું આંધણ કરી રહી છે. દર વર્ષે બજેટમાં ખાસ નાણાંકીય જોગવાઈ કરવામાં આવી રહી છે. સગર્ભા માતાઓ સુધી લાભ પહોંચાડવામાં આવી રહ્યો છે તેમ છતાંય હજારો નવજાત આજે પણ હોસ્પિટલના બિછાને આખરી શ્વાસ લઇ રહ્યાં છે.

રાજ્ય શિશુ મૃત્યુ દર
ગુજરાત 23 ટકા
કેરળ 8 ટકા
તમિલનાડુ 13 ટકા
હિમાચલ 17 ટકા
કાશ્મીર 15 ટકા
પ.બંગાળ 18 ટકા
આંધ્રપ્રદેશ 21 ટકા
કર્ણાટક 17 ટકા

ગુજરાતમાં આજે પણ બાળ મૃત્યુ દર 15 ટકા રહ્યો છે, જ્યારે દિલ્હીમાં 9 ટકા, કેરળમાં 4 ટકા, પશ્ચિમ બંગાળમાં 13 ટકા, તામિલનાડુમાં 9 ટકા, પંજાબમાં 12 ટકા અને કર્ણાટકમાં શિશુ મૃત્યુદર 11 ટકા રહ્યો છે. અન્ય રાજ્યો શિશુ મૃત્યુદર પર કાબૂ મેળવવામાં સફળ રહ્યાં છે જ્યારે આરોગ્ય ક્ષેત્રે હરણફાળ ભરતાં ગુજરાતને આ મામલે સફળતા સાંપડી નથી.

પાંચ વર્ષ કરતાં ઓછી વયના બાળકોના મૃત્યુ દરમાં ગુજરાતનું પ્રદર્શન ખરાબ છે. ગુજરાતમાં દર હજાર બાળકોએ 23 નવજાત મોતને ભેટી રહ્યાં છે જ્યારે કેરળમાં હજાર દીઠ 8, કાશ્મીરમાં 15, ૫.બંગાળમાં 18, કર્ણાટકમાં 17, મહારાષ્ટ્રમાં 16 અને તામિલનાડુમાં 13 શિશુ મૃત્યુ પામે છે.

ગુજરાતમાં સરકારી યોજનાઓ છેવાડા સુધી પહોંચી છે. એટલુ જ નહીં, કુપોષણ નાબુદ કરવા લાખો કરોડો રૂપિયા સરકારી તિજોરીમાંથી ખર્ચાઈ રહ્યાં છે પણ સામે છેડે વળતર મળતુ નથી. સરકારી યોજનાઓ જાણે બિનઅસરકારક બની રહી છે. સરકારી યોજનાઓ માત્રને માત્ર મળતિયાઓને લાભ પુરતી બની રહી છે જેથી ધાર્યુ પરિણામ મળતુ નથી.

NATIONAL : भाई-बहन ने बाहर खड़ी पड़ोसी की 2 कारों में लगाई आग, वजह कर देगी हैरान!

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गुरुग्राम में एक व्यक्ति और उसकी बहन ने पुरानी दुश्मनी को लेकर घर के बाहर खड़ी पड़ोसी के 2 कारों में आग लगा दी. जिससे दोनों गाड़ियां पूरी तरह जल गईं. वहीं इस घटना से घर के एक हिस्से को भी नुकसान पहुंचा है.

गुरुग्राम के सिधरावली गांव में एक घर के बाहर खड़ी दो कारों में भाई-बहन ने आग लगा दी. एक एजेंसी के मुताबिक यह घटना मंगलवार सुबह गाड़ी के मालिक रमन यादव के घर पर लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई. उन्हें शक है कि एक आदमी और उसकी बहन, जिनकी उनके परिवार से पुरानी दुश्मनी है, इसके लिए जिम्मेदार हैं.

पुलिस ने बताया कि मामले को लेकर बिलासपुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है. CCTV फुटेज में एक नकाबपोश आदमी सुबह करीब 2.07 बजे एक महिंद्रा थार में आग लगाता हुआ दिख रहा है. जिसके बाद आग पास में खड़ी एक मारुति सुजुकी वैगन R तक फैल गई. गाड़ियों में आग लगाने के बाद वह आदमी भागता हुआ देखा गया.

पुलिस ने बताया कि चूंकि गाड़ियां घर के पास खड़ी थीं, इसलिए आग से घर के एक हिस्से को भी नुकसान हुआ. यादव ने अपनी शिकायत में कहा कि वह और उनका परिवार सो रहे थे, तभी उन्हें बाहर शोर सुनाई दिया. बाहर निकलने पर उन्होंने देखा कि थार आग की लपटों में घिरी हुई थी. जिसके तुरंत बाद वैगन आर में भी आग लग गई. उन्होंने कहा कि आग बुझाने की कोशिशें नाकाम रहीं.

अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम और फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया. लेकिन दोनों गाड़ियां पूरी तरह जल चुकी थीं. यादव ने आरोप लगाया कि गांव का एक आदमी शुभाष और उसकी बहन बबली, जिनसे उनके परिवार की पुरानी दुश्मनी थी, इस घटना के पीछे हो सकते हैं.

यादव ने यह भी दावा किया कि कुछ महीने पहले उसकी थार की खिड़कियां खराब हो गई थीं. जिसकी शिकायत दर्ज कराई गई थी. एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और जल्द ही गिरफ्तारियां की जाएंगी.

MP: मंदिर की तरह सरकारी दफ्तर में ‘मनोकामना पर्चियां’ बांध रहे किसान, यूरिया संकट ने पैदा किए अजीबोगरीब हालात

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कड़ाके की ठंड में चार दिनों से खाद के लिए भटक रहे किसानों का सब्र अब जवाब दे गया है. थक-हारकर किसानों ने अब सहकारी विपणन समिति के दफ्तर की खिड़कियों पर धागे से अपने दस्तावेजों की पर्चियां बांधना शुरू कर दिया है.

यूरिया खाद की किल्लत ने किसानों को ठंड में चक्कर लगाकर पसीने छुड़ा दिए. किसान इस समय यूरिया को लेकर परेशान हैं और शुक्रवार को इसी संकट के चलते राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में सहकारी विपणन समिति के कार्यालय में थके-हारे किसानों ने अपने आधार कार्ड एवं जमीन की पट्टी की फोटोकॉपियों की प्रतियां धागे से इस उम्मीद से बांधना शुरू कर दिया कि कभी तो हमारी सुनवाई होगी और रबी की फसलों के लिए यूरिया खाद उपलब्ध होगा.

अब देखना यह है कि इस अनोखे तरीके से किसानों के प्रयास को कितनी सफलता मिलती है. लेकिन मंदिर में मनोकामना की भांति दफ्तर में इस प्रकार पर्चियां बांधना यह बता रहा है कि जिले में इस समय यूरिया खाद का संकट है और किसान परेशान हैं.

किसानों का कहना है कि जब-जब अव्यवस्था का आलम होगा एवं सिस्टम काम नहीं करेगा तो विरोध तो होगा ही. राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में शुक्रवार की सुबह 8 बजे से ही किसानों की भीड़ सहकारी विपणन समिति के कार्यालय के सामने लगने लगी.नंबर लगाने की आस में कई किसानों एवं महिलाओं ने अपने दस्तावेज जमीन पर रखना शुरू कर दिए और उनकी कतार लगने लगी. हवा से कागज न उड़ जाएं, इसके लिए पत्थर से दबाकर उन कागजों को जमाकर रखा जाने लगा.

करीब 11 बजे खिड़की खुली तो अफरा-तफरी का माहौल हो गया, जिसे संभालने के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए लेकिन वे भी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कर पाए.किसान दिलीपसिंह ने बताया कि दो-तीन दिन से लाइन में लग रहा हूं, यहां रोज ऐसे ही चल रहा है. किसान परेशान हैं, समिति वालों के अपने खुद के नियम हैं, कभी चार कट्टे यूरिया दे देते हैं, कभी एक कट्टा देते हैं, अभी तो वह भी नहीं मिल पा रहा है.

किसान शिवसिंह चौहान ने बताया कि जो लंबी लाइन लग रही है, वह कृषि विभाग की देन है, जो किसानों की मदद नहीं कर रहे हैं, किसान परेशान हो रहे हैं.
कृषि विस्तार अधिकारी ने गलती कर रखी है. वहीं मार्केटिंग प्रबंधक गंगाधर दांगी ने बताया कि किसान सुबह जल्दी आ जाते हैं एवं लाइन लगा लेते हैं, उन्हें प्रतिदिन खाद मिल रही है. किसानों को पीने के पानी के इंतजाम किए गए हैं. शुक्रवार को करीब डेढ़ सौ टन खाद आया था जो सप्लाई किया जा रहा है. यूरिया खाद पर्याप्त है.

खाद केंद्र प्रभारी ने बताया कि नियमानुसार किसानों को खाद वितरण किया जा रहा है, जो किसान नंबर में बाकी बच जाते हैं उन्हें दूसरे दिन नंबर से पहले खाद प्रदाय किया जा रहा है.

एक किसान को दो कट्टे यूरिया प्रदाय किया जा रहा है. शुक्रवार को करीब एक हजार पांच सौ तीस कट्टे खाद के उपलब्ध थे जिनका वितरण किया जा रहा था. किसानों के अलावा अन्य व्यक्ति लाइन में न लगें, इस कारण हम जमीन की पट्टी की फोटोकॉपी मांग रहे हैं ताकि कालाबाजारी न हो.

AHMEDABAD : અમદાવાદની 3 સ્કૂલોમાં બોમ્બ મૂકાયાની ધમકી, બાળકોને ઘરે રવાના કરાયા, પોલીસ ઘટનાસ્થળે

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અમદાવાદમાં ફરી એકવાર શાળાઓમાં બોમ્બની ધમકીનો સિલસિલો યથાવત રહ્યો છે. આજે સવારે અમદાવાદની ઝેબર,અગ્રેસન અને વેજલપુરના જીવરાજ પાર્ક વિસ્તારમાં આવેલી જાણીતી ઝાયડસ સ્કૂલમાં (Zydus School) બોમ્બ મુક્યાનો ધમકીભર્યો ઈમેઈલ મળતા પોલીસ તંત્ર અને શાળા સંચાલકોમાં દોડાદોડ મચી ગઈ હતી.

પ્રાપ્ત માહિતી અનુસાર, આજે સવારે અંદાજે 10 વાગ્યાના સુમારે સ્કૂલ પ્રશાસનને એક શંકાસ્પદ ઈમેઈલ મળ્યો હતો, જેમાં સ્કૂલમાં બોમ્બ હોવાનો દાવો કરવામાં આવ્યો હતો. આ બાબતની જાણ થતાની સાથે જ સ્કૂલ સંચાલકોએ ત્વરિત ધોરણે પોલીસ કંટ્રોલ રૂમને જાણ કરી હતી.

ઘટનાની ગંભીરતાને ધ્યાનમાં લઈને સ્થાનિક પોલીસ સ્ટેશનનો કાફલો, ફાયર બ્રિગેડની ટીમ, સ્પેશિયલ ઓપરેશન ગ્રુપ (SOG) અને બોમ્બ ડિસ્પોઝલ સ્કવોડ (BDDS) તાત્કાલિક ઘટનાસ્થળે પહોંચી ગયા હતા. સાવચેતીના ભાગરૂપે શાળામાંથી તમામ વિદ્યાર્થીઓને તાત્કાલિક અસરથી વર્ગખંડોમાંથી બહાર કાઢી સલામત સ્થળે ખસેડવામાં આવ્યા હતા અને શાળાનું ગ્રાઉન્ડ ખાલી કરાવવામાં આવ્યું હતું.

હાલમાં બોમ્બ સ્કવોડ અને ડોગ સ્કવોડ દ્વારા સમગ્ર સ્કૂલ કેમ્પસમાં ખૂણે-ખૂણે સઘન ચેકિંગ હાથ ધરવામાં આવી રહ્યું છે. આ સમાચાર વાયુવેગે પ્રસરતા વાલીઓમાં પણ ચિંતાનું મોજું ફરી વળ્યું છે અને તેઓ સ્કૂલ ખાતે દોડી આવ્યા હતા. પોલીસ દ્વારા હાલ ઈમેઈલનું પગેરું શોધવાની તજવીજ પણ હાથ ધરવામાં આવી છે. ઉલ્લેખનીય છે કે, ભૂતકાળમાં પણ અમદાવાદની અનેક નામાંકિત સ્કૂલોને આવા ફેક ઈમેઈલ મળી ચૂક્યા છે.

વેજલપુર PIએ જણાવ્યા મુજબ, આજે સવારે ઈમેલ દ્વારા ઝાયડસ, ઝેબર, અગ્રેસન અને ડીએવી ઇન્ટરનેશનલ સ્કૂલ ને ઉડાવી દેવાની ધમકી મળી છે. જે બાદ બોમ્બ સ્કોડ, ક્રાઈમ બ્રાન્ચ, પોલીસ અને ફાયરનો કાફલો સ્થળ પર પહોંચી ગયો છે અને તપાસ હાથ ધરી છે. આ ધમકી ભર્યો ઈમેલ કોના દ્વારા અને ક્યાંથી કરવામાં આવ્યો છે તેની તપાસ ચાલી રહી છે.

MP : भारत में पहली बार हाइवे पर ‘टेबल-टॉप रेड मार्किंग’, जानें क्यों है यह खास

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India’s First Red Roads: इस हाइवे पर वाहन चालकों को कच्ची या घास वाली जगहों पर जाने से रोकने के लिए राजमार्ग के दोनों किनारों पर सफेद शोल्डर लाइनें भी जोड़ी गई हैं, जिससे सुरक्षा में और सुधार हुआ है.

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क सुरक्षा और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व में नौरादेही अभयारण्य) से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर भारत की पहली ‘टेबल-टॉप रेड मार्किंग’ की गई है. दुबई के फेमस शेख जायद रोड की तर्ज पर NHAI ने हाईवे के 2 किलोमीटर लंबे घाट पर सड़क की सतह को चमकीले लाल रंग में बदल दिया है.

खतरे वाले क्षेत्र में सड़क के ऊपर 5 मिमी मोटी, गर्म करके लगाई गई थर्मोप्लास्टिक की लाल सतह की परत बिछाई गई है. चमकीला लाल रंग वाहन चलाने वालों को तुरंत सचेत करता है कि वे गति-प्रतिबंधित और वन्यजीव-संवेदनशील गलियारे में प्रवेश कर रहे हैं.इसकी हल्की उभरी हुई सतह से वाहन चालक को स्पर्श और ध्वनि का संकेत मिलता है, जिससे वह बिना झटके या अचानक ब्रेक लगाए स्वाभाविक रूप से गति कम कर लेता है.

यह पहल पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है.
पारंपरिक रंबल स्ट्रिप के मुकाबले यह कम शोर करती है, जिससे जंगल के जानवरों को कम परेशानी होती है.
1.96 किलोमीटर के हिस्से में 25 समर्पित अंडरपास बनाए गए हैं ताकि जानवर सुरक्षित रूप से सड़क के नीचे से गुजर सकें.
हाइवे के दोनों ओर ऊंची बाड़ लगाई गई है ताकि जानवर सीधे सड़क पर न आएं और अंडरपास का उपयोग करें.
पुलों पर लगे कैमरे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं.
NHAI की यह परियोजना यह साबित करती है कि आधुनिक इंजीनियरिंग के माध्यम से मानव जीवन और वन्यजीवों को एक साथ सुरक्षित रखा जा सकता है. यहां ‘लाल सड़कें’ खतरे का नहीं, बल्कि सुरक्षा और हरित इरादे का प्रतीक हैं.

NHAI ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो हादसों को कम करके मानव जीवन बचाता है, वन्यजीवों को वाहनों की टक्कर से बचाता है, वन के इको-सिस्‍टम की अखंडता को संरक्षित करता है और सड़क से गुजरने वालों लिए सुगम, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है.

National : वो सड़क पर तड़पता रहा, पत्नी मदद के लिए गिड़गिड़ाती रही… युवक के साथ इंसानियत ने भी तोड़ा दम

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यह सिर्फ एक युवक की मौत की खबर नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता की शर्मनाक तस्वीर है. बेंगलुरु की सड़क पर 34 साल के युवक को कार्डियक अरेस्ट आया. वह दर्द से तड़पता रहा, उसकी पत्नी हाथ जोड़कर राहगीरों से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन लोग मदद को नहीं रुके. न समय पर एंबुलेंस मिली, न किसी ने इंसानियत दिखाई. मजबूर पत्नी ने घायल पति को खुद अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं.

बेंगलुरु में इंसानियत को झकझोर देने वाला एक दर्दनाक मामला सामने आया है. शहर की व्यस्त सड़क पर एक 34 साल के युवक की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई. हैरानी की बात यह कि सड़क पर लोग आते-जाते रहे, किसी ने भी उसकी मदद नहीं की. पत्नी चीखते-चिल्लाते हुए मदद के लिए गिड़गिड़ाती रही. यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है.

यह घटना 13 दिसंबर को बेंगलुरु के बनशंकरी इलाके के कादिरेनहल्ली क्षेत्र में हुई. युवक अपनी पत्नी के साथ बाइक से जा रहा था, तभी अचानक उसे सीने में तेज दर्द हुआ और उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया. वह सड़क पर गिर पड़ा और तड़पने लगा. उसकी पत्नी बदहवास होकर आसपास मौजूद लोगों से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन किसी ने भी आगे आकर मदद नहीं की.

इस घटना का जो वीडियो सामने आया है. उसमें देखा जा सकता है कि महिला लगातार लोगों से एंबुलेंस बुलाने और पति को अस्पताल पहुंचाने की अपील करती रही, लेकिन सड़क आने-जाने वाले लोगों ने उसकी कोई मदद नहीं की. पति सड़क पर पड़ा तड़प रहा था. उसकी पत्नी मदद मांग रही थी. सरेआम सड़क पर इस तरह की संवेदनहीनता गंभीर सवाल खड़े करती है. महिला को जब कोई मदद नहीं मिली तो मजबूर होकर खुद अस्पताल पहुंचने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही युवक की हालत और बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया.

इस घटना के सामने आने के बाद कुछ लोगों में आक्रोश फैल गया. उनका कहना है कि अगर समय पर मेडिकल हेल्प या एंबुलेंस मिल जाती तो युवक की जान बच सकती थी. इस मामले ने बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर में इमरजेंसी सेवाओं की तैयारियों और आम नागरिकों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारों का कहना है कि हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में पहले कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं. अगर उस समय सीपीआर या इमरजेंसी मेडिकल हेल्प मिल जाए तो जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. कुछ लोगों का कहना है कि क्या हम एक-दूसरे के लिए इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि किसी की जान जाती रहे और हम मूक दर्शक बने रहें.

National : 9 साल के बच्चे ने की आत्महत्या, स्कूल आईडी कार्ड बना फंदा

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हैदराबाद के राजेंद्रनगर इलाके में एक 9 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या से हड़कंप मच गया. बच्चे ने कथित तौर पर अपने घर के बाथरूम में स्कूल आईडी कार्ड के टैग से फंदा लगाकर जान दे दी. पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

हैदराबाद में एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है. बताया जा रहा है कि 9 साल के एक बच्चे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतक की पहचान प्रशांत के रूप में हुई है. यह घटना राजेंद्रनगर इलाके में चंदानगर पुलिस सीमा के अंतर्गत हुई.

शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्चा अपने घर के बाथरूम में बेहोश अवस्था में पाया गया. परिजनों द्वारा तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की.परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है. बताया जा रहा है कि बेहोश मिले बच्चे के पास स्कूल की आईडी कार्ड भी थी.

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चा किस मानसिक स्थिति में था और क्या किसी तरह का दबाव या परेशानी इसके पीछे कारण बनी.फिलहाल, पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है.

NATIONAL : उत्तराखंड में बिजली दरों पर बड़ा अपडेट, ऊर्जा निगमों के टैरिफ प्रस्तावों पर आयोग ने मांगा स्पष्टीकरण

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उत्तराखंड में बिजली दरों को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है. प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों—उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) और पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल)—द्वारा भेजे गए टैरिफ प्रस्तावों में कुछ कमियां पाए जाने के बाद उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने इन पर बिंदुवार जवाब मांगा है. आयोग ने तीनों निगमों को 17 दिसंबर तक अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं.

ऊर्जा निगमों की ओर से नियामक आयोग को भेजे गए प्रस्तावों के अनुसार, इस बार बिजली दरों में कुल मिलाकर करीब 18.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है. यूपीसीएल ने 16.23 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जबकि पिटकुल की ओर से लगभग तीन प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने की मांग की गई है. हालांकि, इस बार सबसे चौंकाने वाला प्रस्ताव यूजेवीएनएल की ओर से आया है, जिसने पहली बार ऋणात्मक यानी माइनस 1.2 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव भेजा है. नियामक आयोग के अधिकारियों के अनुसार, यूजेवीएनएल का ऋणात्मक टैरिफ प्रस्ताव अप्रत्याशित है. ऋणात्मक टैरिफ का अर्थ यह है कि निगम को आगामी वित्तीय वर्ष में किसी भी तरह की दर वृद्धि नहीं मिलेगी. आयोग के स्तर पर इस प्रस्ताव को लेकर भी गहन समीक्षा की जा रही है.

प्रस्ताव भेजने की समयसीमा की बात करें तो यूजेवीएनएल और पिटकुल ने 30 नवंबर से पहले ही अपने टैरिफ प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंप दिए थे, जबकि यूपीसीएल ने करीब नौ दिसंबर को अपना प्रस्ताव जमा कराया. आयोग के अधिकारियों ने तीनों प्रस्तावों का अध्ययन करने के बाद कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता जताई है, जिसके चलते पत्र भेजकर जवाब मांगा गया है.

आयोग को जब सभी जरूरी जानकारियां और स्पष्टीकरण प्राप्त हो जाएंगे, उसके बाद इन प्रस्तावों को औपचारिक रूप से याचिका के रूप में स्वीकार किया जाएगा. इसके पश्चात फरवरी माह में नियामक आयोग द्वारा टैरिफ प्रस्तावों पर जनसुनवाई आयोजित की जाएगी. इस दौरान उपभोक्ताओं, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी. जनसुनवाई और विस्तृत विश्लेषण के बाद आयोग वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा करेगा. यह नई दरें एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू होंगी. ऐसे में आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं की नजरें नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं.

MAHARASHTRA : ठाणे में व्यापारी से 35 लाख की ठगी, ठगों ने ऐंठे रुपये

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ठाणे में एक व्यापारी से 35 लाख की ठगी का मामला सामने आया है. बताया जाता है कि माल देने के बदले ठगों ने व्यापारी से 35 लाख रुपये की ठगी कर ली.

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक कपड़ा व्यापारी से 35 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मुंबई के चार व्यापारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. एक एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने इस साल जून और नवंबर के बीच भिवंडी शहर के गायत्री नगर में रहने वाले 42 साल के पीड़ित से ग्रे (बिना प्रोसेस किया हुआ) कपड़े की खेप खरीदी थी.

भिवंडी टाउन पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि बकाया चुकाने के बजाय, उन्होंने सामान किसी तीसरी पार्टी को बेच दिया और पेमेंट टालते रहे. जब पीड़ित ने पेमेंट की मांग की, तो आरोपियों ने उनके कॉल का जवाब देना बंद कर दिया. बाद में अपना ऑफिस बंद करके फरार हो गए.

पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है. इधर पीड़ित व्यापारी का कहना है कि इतनी बड़ी रकम की ठगी के बाद उसका व्यापार प्रभावित हो रहा है. रुपयों की कमी के चलते वह अधिक माल नहीं खरीद पा रहा है.

WORLD : हुसैनिया पैलेस में शानदार स्वागत से लेकर रॉयल बिदाई तक, जॉर्डन में पीएम मोदी की यादगार यात्रा

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जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय पीएम मोदी को अपनी गाड़ी से खुद ड्राइव कर करके ‘द जॉर्डन म्यूजियम’ तक लेकर पहुंचे. पीएम ने गेस्ट बुक पर साइन किया.

प्रधानमंत्री दो दिवसीय जॉर्डन यात्रा कर इथियोपिया के लिए रवाना हो गए. पीएम मोदी को राज परिवार ने पूरा सम्मान दिया. हुसैनिया पैलेस में सोमवार शाम को उनका स्वागत किया गया, और विदा करने खुद क्राउन प्रिंस पहुंचे. इस दौरे को प्रधानमंत्री ने सफल बताया है. यादगार यात्रा के कुछ अहम पड़ावों से रूबरू भी कराया है.

वहां पहुंचने पर जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने आलीशान हुसैनिया पैलेस में पीएम मोदी का स्वागत किया. किंग अब्दुल्ला पैगंबर मोहम्मद की 41वीं पीढ़ी के वंशज माने जाते हैं. उनका परिवार 1400 साल से जॉर्डन पर राज कर रहा है.

इस दौरे में कुछ ऐसा हुआ जो बरसों-बरस याद रखा जाएगा. प्रधानमंत्री के एक्स प्लेटफॉर्म पर 2 मिनट 10 सेकंड का क्लिप है. इसमें ही वो अभूतपूर्व क्षण दिखता है. जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय पीएम मोदी को अपनी गाड़ी से खुद ड्राइव कर करके ‘द जॉर्डन म्यूजियम’ तक लेकर पहुंचे. पीएम ने गेस्ट बुक पर साइन किया. इस दौरान भी जॉर्डन के क्राउन प्रिंस हुसैन मौजूद थे.

प्रधानमंत्री ने क्राउन प्रिंस के भाव की सराहना भी की. उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘जॉर्डन यात्रा के दौरान, मैंने हिज रॉयल हाइनेस क्राउन प्रिंस अल-हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय के साथ विस्तार से बातचीत की. जॉर्डन की प्रगति के प्रति उनका जुनून साफ ​​दिखता है. युवा विकास, खेल, अंतरिक्ष, इनोवेशन और दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण को आगे बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान सच में सराहनीय है. जॉर्डन के विकास की राह को मजबूत करने के उनके प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं.’

एक खास भाव दिखाते हुए, क्राउन प्रिंस द्वितीय ने पीएम मोदी को खुद एयरपोर्ट तक छोड़ा और इथियोपिया के लिए रवाना होते समय उन्हें विदा किया. भारत और जॉर्डन के बीच पांच अहम समझौते भी हुए. इनमें संस्कृति, अक्षय ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े समझौते शामिल हैं.

दोनों देशों ने संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, रिन्यूएबल और क्लीन एनर्जी परियोजनाओं पर साथ काम करने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए समझौते किए. वहीं डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के तहत डिजिटल गवर्नेंस और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवाओं में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए. इंडिया-जॉर्डन बिजनेस फोरम में पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की अहमियत बताई.

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