Sunday, September 27, 2026
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NATIONAL : एग्जाम देने जा रहा हूं…घर से झूठ बोलकर निकला, मॉल के चौथे फ्लोर से कूदा 12वीं का छात्र

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नागपुर के एम्प्रेस मॉल से 12वीं के एक छात्र की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्र रोज घरवालों को परीक्षा का बहाना देकर निकलता था, जबकि उसकी परीक्षाएं खत्म हो चुकी थीं. शनिवार को वह घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा. बाद में मॉल की चौथी मंजिल से गिरने की घटना सामने आई.

महाराष्ट्र के नागपुर शहर से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां 12वीं कक्षा के एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. एम्प्रेस मॉल की चौथी मंजिल से गिरने की इस घटना ने परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. खास बात यह है कि छात्र की परीक्षाएं पहले ही खत्म हो चुकी थीं, लेकिन वह रोज घरवालों को ‘पेपर है’ कहकर घर से निकलता था.

मृतक की पहचान यश सुनील झाड़े के रूप में हुई है, जो मानेवाड़ा के जवाहर नगर इलाके का रहने वाला था. परिजनों के अनुसार यश पिछले कुछ दिनों से रोज सुबह घर से यह कहकर निकलता था कि ‘एग्जाम देने जा रहा हूं.’ परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी परीक्षाएं पहले ही समाप्त हो चुकी हैं.

शनिवार को भी यश इसी तरह घर से निकला, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा. जब परिजनों ने उससे संपर्क करने की कोशिश की तो उसका मोबाइल फोन बंद मिला. काफी देर तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिवार ने हुडकेश्वर पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई.इसी दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. गणेशपेठ थाना क्षेत्र स्थित एम्प्रेस मॉल से एक युवक के चौथी मंजिल से गिरने की सूचना पुलिस को मिली. मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि मृत युवक वही छात्र यश झाड़े है, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी.

घटना के बाद पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है. फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि छात्र ने यह कदम क्यों उठाया. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वह पिछले कुछ दिनों से घरवालों से परीक्षा का बहाना बनाकर कहां जाता था और किन लोगों के संपर्क में था. गणेशपेठ पुलिस थाना के निरीक्षक अतुल तावड़े के मुताबिक मामले की जांच जारी है और हर पहलू को ध्यान में रखकर पड़ताल की जा रही है. परिवार सदमे में है और आसपास के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं.

World : ईरान में जंग के बीच भारत की बड़ी तैयारी, कनाडा पर इस चीज की सप्लाई को लेकर हिंदुस्तान की पैनी नजर

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भारत ईरान और मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच अपनी उर्वरक आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है. ऐसे में कनाडा के साथ यह डील काफी महत्वपूर्ण है. भारत कनाडा के सस्केचेवान में कर्नलाइट पोटाश परियोजना से अपने उत्पादन का लगभग 44 परसेंट हिस्सा हासिल करने का टारगेट लेकर चल रहा है. अगर ऐसा हुआ तो देश को हर साल लगभग 275,000 टन पोटाश मिलेगा.

गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (GSFC) ने कर्नलाइट रिर्सोसेज इंक में लगभग 49.68 मिलिडन डॉलर का निवेश कर रखा है. ऐसे में उसके Wynyard पोटाश प्रोजेक्ट में उसकी हिस्सेदारी 47.73 परसेंट की हिस्सेदारी है. कनाडा में Karnalyte के इस Wynyard पोटाश प्रोजेक्ट के अगले 70 साल तक चलने का अनुमान है. यानी कि भारत को लंबे समय तक खाद्य सुरक्षा मिलती रहेगी.

कनाडा से पोटाश की बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के भारत के लक्ष्य और ईरान में छिड़ी जंग के बीच सीधा कनेक्शन है. दरअसल, भारत यूरिया जैसे तमाम उर्वरकों का आयात बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों से करता है, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है. भारत को इस बात की चिंता है कि अगर ईरान पर इजरायली और अमेरिकी हमलों के बीच अगर इस रूट पर सप्लाई बाधित हो जाए, तो कहीं देश में उर्वरकों की कमी न हो जाए. अपने किसानों की सुरक्षा के लिए भारत का कनाडाई प्रोजेक्ट में निवेश अहम है. इसे हम फर्टिलाइजर्स के लिए भारत के ‘प्लान बी’ के तौर पर भी देख सकते हैं.

कनाडा से भारत के लिए आयात प्रशांत महासागर के रास्ते से होता है. इसका मिडिल ईस्ट में तनाव से कोई लेना-देना नहीं है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 25 परसेंट पोटाश कनाडा से आयात करता है. कनाडाई प्रोजेक्ट में निवेश के जरिए भारत उर्वरकों के लिए रूस-यूक्रेन या मिडिल ईस्ट जैसे युद्ध क्षेत्रों पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. पोटाश का इस्तेमाल पौधे की सुरक्षा से लेकर उसके स्वाद और पोषण को बढ़ाने तक में किया जाता है

General Knowledge : स्टेचू ऑफ लिबर्टी के टॉर्च सेक्शन में क्यों नहीं जा सकते पर्यटक, जानें क्यों है वहां जाना मना?

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न्यूयॉर्क के स्टेचू ऑफ लिबर्टी का एक हिस्सा पर्यटकों के लिए पूरी तरह से बंद है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह. स्टेचू ऑफ लिबर्टी दुनिया का काफी मशहूर स्मारक है. संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आजादी का प्रतीक यह स्मारक हर साल लाखों पर्यटकों का मेजबान बनता है. लेकिन मूर्ति का एक हिस्सा एक सदी से भी ज्यादा समय से पर्यटकों के लिए बंद है. यह हिस्सा है इसके दाहिने हाथ में ऊंचाई पर पकड़ी हुई मशाल. आइए जानते हैं कि स्टेचू ऑफ लिबर्टी के इस हिस्से में पर्यटकों का जाना क्यों माना है.

मशाल तक पहुंच को हमेशा के लिए बंद करने की मुख्य वजह ब्लैक टॉम धमाका है. यह 30 जुलाई 1916 को हुआ था. यह धमाका ब्लैक टॉम द्वीप पर हुआ था. इस द्वीप पर पहले विश्व युद्ध के दौरान जहाज से भेजने के लिए भारी मात्रा में गोला बारूद और हथियार जमा किए जा रहे थे. जर्मन एजेंटों ने गोला बारूद के इस गोदाम में तोड़फोड़ की. इसके बाद एक जबरदस्त धमाका हुआ जिसने पूरे बंदरगाह इलाके को हिला कर रख दिया. यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसका मलबा और छर्रे स्टेचू ऑफ लिबर्टी से टकराए. इस वजह से उसके दाहिने हाथ और मशाल को नुकसान पहुंचा. हालांकि बाद में मरम्मत का काम किया गया. लेकिन इस घटना की वजह से अधिकारियों ने मशाल वाले हिस्से को आम लोगों के लिए हमेशा के लिए बंद करने का फैसला किया.

धमाके की वजह से मूर्ति के ढांचे के कुछ हिस्से काफी कमजोर पड़ गए थे. मशाल पकड़े हुए हाथ के आसपास का हिस्सा भी काफी कमजोर हो गया था. मरम्मत का काम पूरा हो जाने के बाद भी इंजीनियरों को इस हिस्से के लंबे समय तक बनी रहने वाली मजबूती को लेकर चिंता थी. इन्हीं जोखिम को देखते हुए अधिकारियों ने यह फैसला किया कि बड़ी संख्या में पर्यटकों को मशाल वाले हिस्से में जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

1984 में स्मारक की बड़े पैमाने पर मरम्मत के दौरान मूर्ति की असली टॉर्च को सोने की परत वाली एक रेप्लिका से बदल दिया गया था. इसे सूरज की रोशनी को ज्यादा असरदार तरीके से रिफ्लेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया था. असली टॉर्च को स्टेचू ऑफ लिबर्टी म्यूजियम के अंदर डिस्प्ले किया गया है. यहां विजिटर इसे करीब से देख सकते हैं और इसके इतिहास के साथ-साथ 1916 में इसे पहुंचे नुकसान के बारे में भी जान सकते हैं.

हालांकि टॉर्च वाला हिस्सा भी भी बंद है लेकिन इसके बावजूद भी विजिटर्स को मूर्ति के क्राउन तक चढ़ने की इजाजत है. यहां से न्यूयॉर्क हार्बर का शानदार नजारा दिखता है. हालांकि क्राउन तक पहुंचाने के लिए स्टैचू सिटी क्रूजीज के जरिए पहले से रिजर्वेशन करवाना जरूरी है.

Bollywood : ‘कौन सभ्य परिवार साथ बैठकर ये देख सकता है ‘नोरा फतेही और संजय दत्त के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ पर लगा अश्लीलता का आरोप, भड़के लोग

नोरा फतेही और संजय दत्त के सॉन्ग सरके चुनर तेरी सरके पर इन दिनों काफी कंट्रोवर्सी हो रही है. इस गाने के लिरिक्स डबल मीनिंग हैं, जिसकी वजह से कड़ी आलोचना की जा रही है. नोरा फतेही कितनी शानदार डांसर हैं, इससे तो हर कोई वाकिफ है. उनके डांस मूव्स पर दुनियाभर के लोग फिदा हैं. ऐसे में नोरा ने एक बार फिर से तड़कते-भड़कते गाने के संग वापसी की है. हालांकि, उनके इस गाने पर जमकर कंट्रोवर्सी हो रही है.

नोरा के लेटेस्ट सॉन्ग का नाम है सरके चुनर तेरी सरके.आपको बता दें ये गाना अपकमिंग फिल्म केडी:द डेविल का है. गाने के रिलीज होते ही बहुत बड़ी कंट्रोवर्सी लिरिक्स को लेकर शुरू हो चुकी है. सोशल मीडिया यूजर्स गाने के लिरिक्स को अश्लील बता रहे हैं. बॉलीवुड के पॉपुलर सिंगर में से एक माने जाने वाले अरमान मलिक ने भी इस पर अपना रिएक्शन दिया है.इस गाने को नोरा फतेही के साथ-साथ संजय दत्त पर भी फिल्माया गया है. 15 मार्च को इसे रिलीज किया गया था. जैसे ही इसका क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हंगामा मच गया.

अरमान मलिक ने भी इस गाने के लिरिक्स की कड़ी आलोचना की. उन्होंने लिखा,’ये गाना मेरी टाइमलाइन पर दिखा और मैंने इसे रीप्ले किया, सिर्फ ये सुनिश्चित करने के लिए कि क्या मैं सही सुना या नहीं. दुख की बाच है कि कमर्शियल सॉन्ग राइटिंग का स्तर इतना गिर गया है.’ गाने में नोरा को लहंगा चोली पहने हुए देखा जा रहा है, जिसमें उन्हें काफी पसंद किया गया. लेकिन, गाने के अश्लील बोल को लेकर हंगामा मच गया.आपको बता दें मंगली ने सरके चुनर तेरी सरके को गाया है और इसके बोल को रकीब आलम ने लिखा है.

अर्जुन जन्या ने इसका म्यूजिक दिया है. अरमान मलिक के अलावा नेशनल ह्यूमर राइट्स कमीशन के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने भी इस गाने पर अपनी नाराजगी को जाहिर किया है. उन्होंने पोस्ट शेयर कर लिखा,’कौन सभ्य परिवार साथ बैठकर ये देख सकता है?

बॉलीवुड में नैतिकता की अपेक्षा तो है ही नहीं परंतु सेंसर बोर्ड द्वारा अश्लीलता को लाइसेंस देना शर्मनाक है. ये मानसिक रोगी अपनी मनोविकृतियों से पीढ़ीयों को बर्बाद कर रहे हैं. हम इस गंदगी को समाज में फैलने नहीं देंगे, कार्यवाही हेतु नोटिस जारी कर रहे हैं.’ हालांकि, आपको बता दें कि तमाम अलोचनाओं के बाद यूट्यूब पर गाने को फ्राइवेट कर दिया गया है.

World News : काबुल धुआं-धुआं, PAK आर्मी की एयरस्ट्राइक पर भड़के पाकिस्तानी मंजूर पश्तीन, बोले- ‘शर्म करनी चाहिए’

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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पाकिस्तानी वायुसेना ने बीती रात पांच जगहों पर हमला किया. इस हमले में 400 नागरिकों की मौत हुई और 250 से अधिक लोग घायल हैं. पाकिस्तान की वायुसेना ने बीती रात (16 मार्च) अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में कई जगहों पर हमला किया. इस हमले में सैकड़ों नागरिक शहीद हुए और कई लोग घायल हुए. पाकिस्तानी पश्तून मानवाधिकार कार्यकर्ता और पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के प्रमुख मंजूर पश्तीन ने इस हमले की कड़ी निंदा की.

रमज़ान की सत्रहवीं तारीख को आतंकवादी पंजाबी औपनिवेशिक ताकत (पाकिस्तान) ने काबुल के एक अस्पताल पर आतंकवादी हवाई हमला किया. इस हमले में सैकड़ों निर्दोष नागरिक शहीद हो गए और कई अन्य घायल हुए. उन्होंने कहा कि पीटीएम इस मासूम खून की आवाज़ को दुनिया के हर हिस्से तक पहुंचाने की योजना बनाएगा. मंज़ूर पश्तीन ने यह भी लिखा कि पाकिस्तान के कुछ उलेमा ने हर दौर में काबुल को तबाह करने के फतवे दिए हैं; उन्हें कम से कम इन निर्दोष लोगों और अस्पताल में पड़े मरीजों के टुकड़े-टुकड़े हुए बेगुनाह शवों को देखकर शर्म करनी चाहिए.

मंज़ूर पश्तीन ने कहा कि सीमा के दोनों ओर औपनिवेशिक ताकतों और उनकी परियोजनाओं के अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे समय में बड़े दिल के साथ राष्ट्रीय मशविरा और राष्ट्रीय उठान का आयोजन राष्ट्र की ताकत को एक करेगा, जिससे राष्ट्र को फायदा होगा और दुश्मन को नुकसान पहुंचेगा.

जानकारी के अनुसार बीती रात साढ़े 9 बजे पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने JF-17 और F-16 विमानों से काबुल में हमला किया. इस हमले में अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के पास रिहायशी इलाके, खुफिया एजेंसी GDI के हेडक्वार्टर के पास रिहायशी इलाके, राष्ट्रपति भवन के पास रिहायशी इलाके और काबुल एयरपोर्ट के पास पुराने नाटो बेस में स्थित 2 हजार बेड वाला सरकारी अस्पताल शामिल था. पाकिस्तानी वायुसेना के भारी पेलोड के इस्तेमाल से रक्षा मंत्रालय और GDI के हेडक्वार्टर के पास पूरा आसमान आग से भर गया. राष्ट्रपति भवन के पास के रिहायशी इलाके में भी आग की लपटें उठीं. काबुल के पार्की सनाई कोचक इलाके में नशे के आदी मरीजों के इलाज वाले 2 हजार बेड वाले अस्पताल पर बमबारी के बाद पूरा अस्पताल आग के गोले की तरह धधकने लगा.

कुल 23 मिनट में काबुल की पांच जगहों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई बमबारी में रात 2 बजे तक की जानकारी के अनुसार 400 लोगों की मौत हो गई और 250 से अधिक लोग घायल हुए. काबुल के अलावा पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में भी बमबारी की, जिसमें फिलहाल किसी के मारे जाने या घायल होने की सूचना नहीं मिली है. काबुल में फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है और अस्पताल समेत रिहायशी इलाकों से लाशों और दबे लोगों को निकालने का काम जारी है.

Delhi News : गैस किल्लत से बचने के लिए दुकानदारों ने खोजा नया तरीका, दिल्ली में डीजल भट्टियों की मांग तेज

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ईरान-इजरायल तनाव से भारत में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी हो गई है, खासकर दिल्ली में. छोटे व्यवसायी ब्लैक में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं. पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है और इसका असर अब भारत की सड़कों और रसोई तक पहुंच गया है. दिल्ली में घरेलू और खासकर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत मची हुई है.

लोग घंटों लाइन में लगकर भी सिलेंडर नहीं पा रहे जबकि ब्लैक में 4 से 5 हजार रुपये तक कीमतें चल रही हैं. इस संकट ने छोटे-मोटे फूड बिजनेस वाले, स्ट्रीट वेंडर, आइसक्रीम वाले और समोसे-चाट वाले सभी को परेशान कर दिया है. और अब इस मजबूरी का फायदा उठाते हुए एक नई मांग तेजी से उभरी है – डीजल से चलने वाली भट्टियों की. पुरानी दिल्ली का लाल कुआं मार्केट इन दिनों सुर्खियों में है. यहां डीजल से चलने वाली भट्टियां बनाने वाले कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं और दुकानें खरीदारों से भरी पड़ी हैं. ABP न्यूज की टीम ने लाल कुआं मार्केट पहुंचकर दुकानदारों और खरीदारों से बात की.

डीजल भट्टी खरीदने आए आइसक्रीम का कारोबार करने वाले रॉबिन ने बताया कि मेरे काम में रोज 1 से डेढ़ सिलेंडर लगता था. दूध को लंबे वक्त तक उबालने का काम इंडक्शन से मुमकिन नहीं. मेरे पास जो पहले गैस सिलेंडर का स्टॉक था वह भी खत्म हो चुका है. सरकार कह रही है सप्लाई ठीक है लेकिन अगर ठीक है तो फिर मुझे क्यों नहीं मिल रहा. मजबूरी में डीजल भट्टी लेने आया हूं. रॉबिन ने बताया कि बाजार में इनकी कीमत अब 18 से 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है जो पहले सस्ती मिलती थीं लेकिन अब डबल रेट में मिल रही हैं.

दुकानदार मोनिश ने बताया कि पहले जहां 100 नॉर्मल चूल्हे बिकते थे अब सिर्फ डीजल भट्टियां ही बिक रही हैं. इसकी मांग में कम से कम 100 फीसदी का इजाफा हुआ है. लोगों के पास कोई और चारा नहीं बचा और वे बस अपना कारोबार बचाना चाहते हैं. एक अन्य दुकानदार ने बताया कि पहले महीने में एक-दो भट्टियां बिकती थीं लेकिन अब रोज 2 से 3 बिक रही हैं. मांग 90 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है. जो भट्टी पहले 8 हजार में मिल जाती थी वह अब 12 से 13 हजार में बिक रही है.

गुरुग्राम से आए एक समोसे विक्रेता ने बताया कि उन्हें कमर्शियल सिलेंडर 15 दिन से नहीं मिल रहा. गुरुग्राम में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर ब्लैक में 4 से 5 हजार का एक मिल रहा है. यहां भट्टी 20 से 35 हजार तक की बिक रही है. महंगी है लेकिन लेनी पड़ रही है क्योंकि कोई विकल्प नहीं बचा. डीजल भट्टी में बर्नर सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जहां डीजल जलता है और यह आमतौर पर 10 से 18 इंच या उससे ज्यादा साइज का होता है. इलेक्ट्रिक मोटर से चलने वाला ब्लोअर हवा का तेज दबाव बनाता है. छोटे टैंक या पाइप से डीजल बर्नर तक पहुंचता है. नोजल डीजल को स्प्रे की तरह बारीक छिड़कता है और कंट्रोल वाल्व से डीजल की मात्रा और हवा का फ्लो एडजस्ट किया जाता है. 1 लीटर डीजल में यह करीब 1 घंटा चलती है.

कई लोगों ने कहा कि दिल्ली में पर्यावरण नियमों के चलते डीजल भट्टियां पहले बैन जैसी थीं लेकिन अब गैस न मिलने से इन्हें अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है. एक खरीदार ने कहा कि हमें पता है ये पहले अलाउड नहीं थीं और इनकी लागत भी ज्यादा आती है लेकिन गैस का कोई दूसरा विकल्प नहीं इसलिए लेनी पड़ रही हैं. यह गैस सिलेंडर का संकट सिर्फ दिल्ली तक नहीं बल्कि पूरे देश में कमर्शियल गैस की किल्लत से होटल, ढाबे और टिफिन सर्विस तक प्रभावित हो रहे हैं.

Sports : भारतीयों की जान से खिलवाड़, पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने को लेकर काव्या मारन की टीम पर भड़के सुनील गावस्कर

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इंग्लैंड की फ्रेंचाइजी लीग ‘द हंड्रेड’ के लिए सनराइजर्स लीड्स ने अबरार को 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपये) में खरीदा था, इस फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक सन ग्रुप के पास है. पाकिस्तान के खिलाड़ी अबरार अहमद को खरीदने के बाद से सनराइजर्स लीड्स आलोचकों के निशाने पर है. इंग्लैंड की फ्रेंचाइजी लीग ‘द हंड्रेड’ के लिए सनराइजर्स लीड्स ने अबरार को 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपये) में खरीदा था, इस फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक सन ग्रुप के पास है.

इसी के पास आईपीएल की टीम सनराइजर्स हैदराबाद का भी मालिकाना हक है. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद भी अबरार को खरीदने के बाद से सन ग्रुप की आलोचना हो रही है. भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने भी इसकी आलोचना की है.

काव्या मारन की भी आलोचना हो रही है, जो सनराइजर्स फ्रेंचाइजी की सीईओ हैं और द हंड्रेड के ऑक्शन के दौरान वहां मौजूद थी. सुनील गावस्कर का मानना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार को खरीदने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है, वो स्वाभाविक है. मिड-डे में लिखे अपने कॉलम में गावस्कर ने याद दिलाया कि कैसे मुंबई (2008) में आतंकी हमले के बाद आईपीएल से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बैन कर दिया गया. इसके बाद पुलवामा (2019) और पहलगाम (2025) में हुए आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और खराब हो गए.

गावस्कर का मानना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मिलने वाले पैसे टैक्स के रूप में पाकिस्तान सरकार तक भी पहुंचेगा, जिसका इस्तेमाल हथियार खरीदने के लिए भी किया जा सकता है. यानी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दिए गए पैसे भारतीयों के खून के लिए किया जा सकता है. उन्होंने लिखा कि सनराइजर्स लीड्स के कोच डेनियल विटोरी शायद इसे न समझें, लेकिन भारतीय मालिकों को समझना चाहिए था.

सुनील गावस्कर ने लिखा, ‘अगर टीम के मालिक भारतीय है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से उस सिस्टम को पैसा दे रहे हैं जो भारत के सैनिकों और लोगों की मौत का कारण बन सकता है. क्या इस टूर्नामेंट को जीतना भारतीय लोगों की जानों से ज्यादा महत्वपूर्ण है? जिसमें दुनिया के बहुत कम देशों के प्लेयर्स खेलते हैं.’

Bihar News : राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के आरोपों पर JDU का बड़ा बयान, AD सिंह की हार का कारण कौन?

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जेडीयू नेता नीरज कुमार का कहना है कि एआईएमआईएम का उम्मीदवार नहीं बनाया गया और धनबल वाले को मौका दिया गया. पढ़िए तेजस्वी को लेकर क्या कुछ कहा है. बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर एनडीए की जीत हुई है. आरजेडी से एडी सिंह उम्मीदवार थे लेकिन वे हार गए. रिजल्ट के बाद आरजेडी और तेजस्वी यादव की ओर से कई गंभीर आरोप लगाए गए. इस बीच अब जेडीयू की ओर से बड़ा बयान आया है. मंगलवार (17 मार्च, 2026) को मीडिया से बातचीत में जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने करारा जवाब दिया.

नीरज कुमार ने नतीजों पर कहा, “राज्यसभा चुनाव में एनडीए की शानदार विजय और महागठबंधन की शर्मनाक विजय हुई है, जिसके नेतृत्व कर्ता तेजस्वी यादव थे. वे बिहार से फरार हो गए हैं और आरोप हम पर लगा रहे हैं कि उनके विधायकों को डराया गया और धमकाया गया लेकिन उन्होंने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया”

जेडीयू नेता ने आगे कहा, “आप महागठबंधन के घटक दल AIMIM को अपना उम्मीदवार नहीं बनाने दिया और धनबल वाले को उम्मीदवार बनाया. होटल के बिल का भुगतान किसने किया? गैस की किल्लत की जो बात उठा रहे थे, वहां होटल में क्या विधायकों को लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाकर खिलाया गया? इन तमाम बातों की जानकारी दीजिए.” नीरज कुमार ने साफ कहा कि कांग्रेस पूर्व में भी कह चुकी है कि तेजस्वी यादव हार के कारक हैं.

उधर, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बयान पर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, “कौन से विधायक आए या नहीं आए, ये उस पार्टी को देखना चाहिए. हमारे सभी विधायक स्वतंत्र थे.”

Business : हो गया 5 परसेंट DA बढ़ने का ऐलान, खबर मिलते ही खुशी से झूम उठे हैं इस राज्य के सरकारी कर्मचारी

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मुख्यमंत्री माणिक साहा के इस ऐलान के बाद राज्य कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 41 परसेंट हो गया है. बढ़ा हुआ DA और DR 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा.

देश में आठवें वेतन आयोग को लागू करने की केंद्र सरकार की तैयारियों पर चर्चाएं जोरो पर हैं. इस बीच त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA/DR) में 5 परसेंट तक की बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. बढ़ा हुआ DA और DR 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा.

महंगाई भत्ते (DA/DR) में बढ़ोतरी का यह ऐलान मुख्यमंत्री ने बीते सोमवार को त्रिपुरा विधानसभा में चल रहे सत्र के दूसरे दिन राज्य का बजट पेश किए जाने के बाद किया. बता दें कि इस 5 परसेंट बढ़े हुए DA के साथ राज्य में टोटल DA/DR अब 41 परसेंट हो गया है. यानी कि अब राज्य सरकार के कर्मचारियों को उनकी Basic Pay या मूल वेतन का 41 परसेंट हिस्सा महंगाई भत्ते के रूप में मिलेगा. ऐसे में अगर किसी की बेसिक सैलरी 30000 रुपये है, तो उसे 12300 रुपये DA मिलेगा. यानी कि हर महीने सैलरी में सीधे 1500 रुपये का इजाफा हो जाएगा.

राज्य सरकार के इस फैसले का लाभ लगभग 1.83 लाख लोगों का मिलेगा. इनमें 1.02 लाख कर्मचारी और 81000 पेंशनर्स शामिल हैं. सरकार ने कहा कि DA/DR बढ़ाने का मकसद केंद्र और राज्य सरकार के बीच अंतर को कम करना है.

फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 58 परसेंट DA मिलता है और नए ऐलान के साथ त्रिपुरा राज्य सरकार के कर्मचारियों को 41 परसेंट DA मिलेगा. यानी कि दोनों के बीच अभी 17 परसेंट का अंतर है. त्रिपुरा में सरकार समय-समय पर DA बढ़ाकर इस अंतर को पाटने की कोशिश करती है ताकि राज्य सरकार के कर्मचारियों को कोई आर्थिक नुकसान न हो. DA में इस हालिया बढ़ोतरी से राज्य सरकार पर सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

Bhakti : श्री राम यंत्र क्या है? 19 मार्च को अयोध्या में होने वाली ऐतिहासिक स्थापना का रहस्य

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आस्था की नगरी अयोध्या, भारत 19 मार्च को ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा. इस दिन राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना होगी, क्या है श्रीराम यंत्र और इसका महत्व भी जानें.

19 मार्च का दिन अयोध्या के धार्मिक इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है, ये दिन हिंदुओं के जीवन में ऐतिहासिक पल साबित होने वाला होगा. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या में श्रीराम यंत्र की स्थापना की जाएगी. रामनगरी में इसको लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र कहां स्थापित होगा, क्या है इसका महत्व आइए जानते हैं.

19 मार्च को होगी श्रीराम यंत्र की स्थापना

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है. इस दिन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना होगी.

राम मंदिर ट्र्स्ट के अनुसार श्रीराम यंत्र की स्थापना राम मंदिर के तृतीया तल (तीसरे फ्लोर) पर स्थित गर्भगृह में होगी.

इस दिव्य और वैदिक अनुष्ठान के लिए 9 दिन तक धार्मिक आयोजन होंगे, जिसका शुभारंभ हो चुका है.

इस वैदिक अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए भारत से करीब 51 वैदिक विद्वानों को आमंत्रित किया गया है.

इस वैदिक अनुष्ठान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी शामिल होंगी.

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है, इसलिए इस दिन यह स्थापना धर्म और संस्कृति के नए अध्याय का संकेत मानी जा रही है.
इस आयोजन में सैकड़ों संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालु भी शामिल होंगे. इस ऐतिहासिक आयोजन का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा.

श्रीराम यंत्र क्या है

श्री राम यंत्र भगवान भगवान श्रीराम की दिव्य ऊर्जा और मर्यादा का प्रतीक एक पवित्र तांत्रिक-वैदिक यंत्र माना जाता है.

यह विशेष ज्यामितीय आकृतियों, बीज मंत्रों और पवित्र रेखाओं से बना होता है, जिसे वैदिक परंपरा में किसी देवता की शक्ति को स्थिर करने के लिए स्थापित किया जाता है.

श्री राम यंत्र लिखे गए मंत्र राम नाम की शक्ति को स्थिर करती है.

राम यंत्र जहां भी होता है, वहां वातावरण शुद्ध होता है, क्योंकि वह स्थान पवित्र हो जाता है. इसलिए लोग इसे अपने घर पर भी स्थापित करते हैं, जिससे कि घर पर सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहे.

यह यंत्र धर्म, मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन का प्रतीक है.

जहां इसकी स्थापना होती है वहां सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है.

मान्यता है कि इस यंत्र के सानिध्य में आने से भक्तों के भीतर की नकारात्मकता समाप्त होगी और उन्हें एकाग्रता व शांति प्राप्त होगी.

ऐसा होगा श्रीराम यंत्र

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार श्रीराम यंत्र धातु की आयताकार प्लेट है, जिसकी चौड़ाई लगभग तीन फीट और लंबाई चार फीट है.

इस पर भगवान श्रीराम सहित विभिन्न देवी-देवताओं से जुड़े मंत्र अंकित किए गए हैं.

प्रत्येक देवता का एक-एक बीज मंत्र भी यंत्र पर लिखा हुआ है.

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