Monday, February 2, 2026
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NATIONAL : युवक को बचाने के लिए 30 फीट गहरे ड्रेनेज में कूद गया ‘डिलीवरी बॉय’, तमाशबीन बनी रही पुलिस-SDRF!

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ग्रेटर नोएडा में कोहरे के कारण ड्रेन में गिरी कार के हादसे में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. मौके पर मौजूद डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने रस्सी बांधकर पानी में उतरकर बचाने की कोशिश की. लेकिन युवराज को बचाया नहीं जा सका.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक सड़क दुर्घटना में युवराज नाम के शख्स की मौत हो गई है. यह मौत सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है. युवराज सेक्टर-150 में टाटा यूरेका पार्क सोसायटी में रहते थे और गुरुग्राम के सेक्टर-54 में एक कंपनी में काम करते थे. जब वो अपने घर लौट रहे थे तो कोहरे बहुत था. घर के पास ही उनकी एक गाड़ी से टक्कर हो जाती है और कार पास के पानी से भरे गड्ढे (ड्रेनेज) में गिर जाती है. ड्रेनेज करीब 30 फुट गहरा था. ये हादसा 16 जनवरी की रात को क़रीब 12:30 बजे हुआ था.

डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने दर्दनाक हादसे का जिक्र करते हुए बताया कि यह आधी रात के लगभग 1 बजे हुआ. खराब विजिबिलिटी के कारण एक कार ड्रेन में गिर गई. मोनिंदर ने बताया कि हादसे के बाद कार में फंसे युवराज की आवाज़ लगातार मदद के लिए सुनाई दे रही थी. करीब 1:45 मिनट तक युवराज पुकारता रहा, “भाई, किसी तरह बचा लो.”

मोनिंदर की मानें तो मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीम मौजूद थी, लेकिन बारिश और ठंड के कारण किसी ने पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई. साथ ही पानी के नीचे लोहे की रॉड होने की भी बात कही गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल हो गया.

मोनिंदर लगभग 1:45 बजे मौके पर पहुंचे जब तक युवराज की मौत हो चुकी थी. उन्होंने SDRF के जवानों से खुद रेस्क्यू करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने मना कर दिया तो मोनिंदर ने खुद पानी में छलांग लगाने का फैसला किया. उन्होंने अपने कपड़े उतारे, कमर में रस्सी बांधी और करीब 50 मीटर तक तैरकर कार और युवराज की तलाश की.

हालांकि लगभग 30 मिनट तक खोजबीन करने पर भी अंधेरे और पानी की गहराई के कारण कोई सफलता नहीं मिली. मोनिंदर ने बताया कि वह आख़िरकार सुबह करीब 5:30 बजे वहां से वापस लौटे. उस वक्त तक कार बाहर नहीं निकाली गई थी और युवराज का शव भी बरामद नहीं हुआ था.

मोनिंदर ने कहा कि उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन सिस्टम की सुस्ती और देर के कारण एक युवा की जान चली गई. ग्रेटर नोएडा में सेक्टर-150 के टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के पास शुक्रवार देर रात हुए एक दर्दनाक हादसे ने इमरजेंसी सेवी की तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान तब चली गई जब उनकी कार घने कोहरे के बीच नियंत्रण खो बैठी और पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई.

युवराज गुरुग्राम के सेक्टर-54 में एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और शुक्रवार रात ऑफिस से घर लौट रहे थे. हादसे के बाद युवराज कार से सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे और कार के ऊपर खड़े हो गए और उन्होंने अपने पिता राजकुमार मेहता को घटना की सूचना दी. पिता ने तुरंत 112 पर कॉल कर पुलिस को खबर दी और मौके पर पहुंच गए. लेकिन आपातकालीन दलों के रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी देरी हुई.

युवराज लंबे समय तक पलटी हुई कार पर खड़े टॉर्च जलाते हुए मदद के लिए पुकारते रहे. अंधेरा, घना कोहरा और आधे अधूरे बेसमेंट की खतरनाक स्थिति ने रेस्क्यू में समस्या की बड़ी वजह बनी. पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन ठंडे पानी में उतरने से हिचकिचाईं. लगभग चार घंटे बाद, गाजियाबाद से आई NDRF टीम ने 30 फीट गहरे पानी से युवराज को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

युवराज के परिवार और मौके पर लोगों ने सरकार और संबंधित विभागों पर समय पर मदद न पहुंचाने का आरोप लगाया है. उनका मानना है कि यदि तत्काल और बेहतर इमरजेंसी सेवा प्रबंधन होता, तो युवराज बच सकता था.

इस मामले में जॉइंट पुलिस कमिश्नर (सीपी) राजीव नारायण मिश्रा के कहा कि जीरो विजिबिलिटी की गंभीर स्थिति में एक रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया था. इस ऑपरेशन के दौरान हुई कुछ अनियमितताओं के संबंध में पीड़ित परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच तेजी से जारी है.

जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने साफ किया कि पुलिस प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लिया है और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही की जा रही है.

NATIONAL : केदारनाथ मंदिर में अब नहीं बना पाएंगे रील, चारधाम यात्रा में मोबाइल ले जाने पर लगेगा बैन

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चारधाम यात्रा के दौरान मंदिरों की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक अहम और दूरदर्शी कदम उठाया है. रील और ब्लॉग बनाने के नाम पर धार्मिक स्थलों में बढ़ते विवादों को देखते हुए इस वर्ष बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है. प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ अनावश्यक विवादों पर लगाम लगेगी, बल्कि श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ दर्शन कर सकेंगे.

चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर शनिवार को चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई. बैठक में गढ़वाल आईजी राजीव स्वरूप सहित विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे. इस दौरान यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए गए.गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने स्पष्ट किया कि बीते कुछ वर्षों में मोबाइल से रील और ब्लॉग बनाने के दौरान कई बार विवाद की स्थिति सामने आई है, जिससे धामों की गरिमा प्रभावित होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए बदरीनाथ में सिंहद्वार से आगे मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. वहीं केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम परिसरों में भी श्रद्धालु मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे. श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) और संबंधित जिला प्रशासन धामों से पहले श्रद्धालुओं के मोबाइल सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था करेगा.

प्रशासन का यह निर्णय यह संदेश देता है कि सरकार केवल व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था स्थलों की पवित्रता और धार्मिक अनुशासन को लेकर भी गंभीर है. गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की यह पहल संतुलित मानी जा रही है, जिसमें आस्था और व्यवस्था दोनों का ध्यान रखा गया है.आयुक्त पांडेय ने बताया कि चारधाम यात्रा प्रबंधन के लिए फरवरी माह तक सभी जनपदों को धनराशि जारी कर दी जाएगी. उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अत्यावश्यक कार्यों की सूची तीन दिन के भीतर शासन को भेजी जाए और एक सप्ताह के अंदर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर फास्ट ट्रैक मोड में काम शुरू किया जा

सड़क, संचार और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए. एनएच, एनएचआईडीसीएल, लोनिवि और बीआरओ को 31 मार्च तक यात्रा मार्गों की सड़कों को दुरुस्त करने को कहा गया है. बीएसएनएल को यात्रा मार्गों और धामों में बेहतर संचार सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों की 15-15 दिन की रोटेशन ड्यूटी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा गया है.

पंजीकरण व्यवस्था पूर्व की भांति 60 प्रतिशत ऑफलाइन और 40 प्रतिशत ऑनलाइन ही रहेगी. जरूरत पड़ने पर पंजीकरण काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. जाम से निपटने के लिए छोटी बसों की शटल सेवा और ब्रह्मपुरी चौकी के पास हाईवे चौड़ीकरण का भी निर्णय लिया गया है.

गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में रिकॉर्ड 56 लाख श्रद्धालु चारधाम पहुंचे थे और बीते सीजन में भी 50 लाख से अधिक यात्रियों ने सफल यात्रा की. उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष सरकार और प्रशासन के ठोस प्रयासों से यात्रा और अधिक सुगम, सुरक्षित और मर्यादित बनेगी. यह फैसला साफ तौर पर दिखाता है कि सरकार आस्था के केंद्रों की गरिमा बनाए रखने के लिए समय रहते ठोस कदम उठा

UP : तुम ही तो अच्छे दोस्त हो… अंधविश्वास की आड़ में फ्रेंड ने की शख्स की हत्या, शराब पार्टी में बिगड़ा माहौल

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ऑटो चालक नवीन की उसके तीन दोस्तों ने अंधविश्वास के डर में हत्या कर दी. शराब पार्टी में विवाद बढ़ा तो गैस सिलेंडर से वार कर मार डाला और शव को ऑटो सहित जला दिया.उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 35 साल के एक ऑटो चालक की उसके ही तीन दोस्तों ने बेरहमी से हत्या कर दी. मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. पुलिस जांच में पता चला कि हत्या के पीछे अंधविश्वास और गलतफहमी का बड़ा रोल था.

नवीन उर्फ नंदू गाजियाबाद में ऑटो चलाता था. उसके तीन दोस्त पवन, सागर और नसीम भी ऑटो चालक थे. चारों की दोस्ती कई सालों से थी और वे अक्सर एक साथ बैठते, बातचीत करते और समय बिताते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोस्ती को अंधविश्वास ने खतरनाक मोड़ दे दिया.नवीन पिछले कुछ समय से दिल्ली में रहने वाले एक साधु के संपर्क में था. वह अक्सर उससे मिलता था और जीवन में सुधार की सलाह पूछता था. नवीन ने अपने दोस्तों को बताया कि साधु ने कहा है अगर कोई अमीर बनना चाहता है तो उसे अपने किसी करीबी की ‘बलि’ देनी होगी.

जब नवीन ने यह बात दोस्तों को बताई तो तीनों घबरा गए. आरोप है कि नवीन ने साधु से यह भी पूछा था कि क्या दोस्त की बलि दी जा सकती है, और साधु ने ‘हाँ’ कहा. बस इसी बात ने पवन, सागर और नसीम के मन में डर पैदा कर दिया. उन्हें लगा कि कहीं नवीन उन पर ही हमला करके उनकी बलि न दे दे.

घटना वाली रात चारों सागर के घर पर बैठे थे और शराब पी रहे थे. इसी दौरान नवीन ने फिर साधु का जिक्र किया. इस बात पर दोस्तों और नवीन के बीच बहस हो गई, जो मारपीट में बदल गई. डरे हुए तीनों दोस्तों को लगा कि नवीन सच में उनकी बलि देने वाला है.

गुस्से और डर में उन्होंने एक छोटा गैस सिलेंडर उठाया और नवीन के सिर व पीठ पर हमला कर दिया. कुछ ही मिनटों में नवीन की मौत हो गई. हत्या के बाद तीनों ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. उन्होंने नवीन के शरीर को एक कंबल में लपेटा और उसे उसके अपने ऑटो में रख दिया. इसके बाद वे गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र के एक सुनसान इलाके में पहुंचे. वहाँ उन्होंने ऑटो पर पेट्रोल छिड़ककर शव के साथ उसे आग लगा दी, ताकि पहचान मिटाई जा सके.

जलती हुई गाड़ी की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. जल्द ही यह खुलासा हुआ कि हत्या से पहले नवीन अपने तीन दोस्तों के साथ था. पुलिस ने पवन और सागर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि नसीम फरार है. पुलिस का कहना है कि उसे भी जल्द पकड़ लिया जाएगा. पूछताछ में आरोपियों ने पूरा सच कबूल कर लिया. पुलिस अब साधु की भूमिका की भी जांच कर रही है.

NATIONAL : हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में लाखों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान

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मौनी अमावस्या के अवसर पर धार्मिक नगरी हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में आस्था का भव्य संगम देखने को मिल रहा है. कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह-सुबह लाखों की संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे और पवित्र स्नान किया. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन में लीन हैं.

हरिद्वार में रविवार को हजारों श्रद्धालु गंगा में पवित्र डुबकी लगाने, पूजा-पाठ करने और तर्पण करने के लिए ‘हर की पौड़ी’ पर इकट्ठा हुए. अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और निगरानी के साथ सब कुछ सुचारू रूप से सुनिश्चित किया. एक श्रद्धालु ने कहा कि आज मौनी अमावस्या है और हम इसे पारंपरिक तरीके से मना रहे हैं. इसका परिवार के सदस्यों और पूर्वजों के लिए विशेष महत्व है.

वाराणसी में भी मौनी अमावस्या के मौके पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पवित्र स्नान किया. एक महिला ने कहा कि यह कृष्ण पक्ष का नौवां दिन, मौनी अमावस्या है. इस दिन लोग व्रत रखते हैं, अपनी हैसियत के हिसाब से दान करते हैं, पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं. दशाश्वमेध घाट के तीर्थ पुरोहित विवेकानंद ने कहा कि माघ महीने के कृष्ण पक्ष में मौनी व्रत रखने वाले भक्त गंगा में अनुष्ठान करने आते हैं. गंगा में स्नान करने के बाद, वे पवित्र डुबकी लगाते हैं, अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनकी शांति व कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं.

माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान मौनी अमावस्या के दिन होता है. रविवार सुबह घने कोहरे और ठंड के मौसम के बीच मौनी अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम घाट आए. डिविजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि शनिवार शाम 6 बजे से अब तक सभी घाटों पर लगभग पचास लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया है. भीड़ उम्मीद से ज्यादा है, लेकिन पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं. स्नान की प्रक्रिया सुचारू रूप से और व्यवस्थित तरीके से चल रही है.

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान आज हो रहा है और आधी रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान कर रहे हैं. स्नान छह घंटे से ज्यादा समय से चल रहा है और यह प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी है. हर घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं और स्नान कर रहे हैं.

ज्योतिषी आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि मौनी अमावस्या स्नान का महत्व बहुत ज्यादा है. मान्यताओं के अनुसार, 33 करोड़ देवी-देवता प्रयागराज आते हैं और पवित्र स्नान करते समय मौन व्रत रखते हैं, जो इस अनुष्ठान के आध्यात्मिक महत्व को बताता है.

प्रयागराज में संगम घाट पर कड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक के इंतजाम किए गए हैं. सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है. श्रद्धालुओं ने कहा कि मौनी अमावस्या है और इस पवित्र मौके पर हम यहां पवित्र स्नान करने आए हैं. हम आधी रात के करीब निकले थे, और स्नान पूरा करने के बाद अब हम घर वापस जा रहे हैं. कई श्रद्धालुओं ने माघ मेला के दौरान व्यवस्थाओं की प्रशंसा की.

NATIONAL : वो बचाओ-बचाओ चिल्लाता रहा… टीमें साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू में लगी रहीं, बेबस पिता के सामने इंजीनियर बेटे की मौत

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ग्रेटर नोएडा में एक हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया. यहां 27 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर नाले में गिरी कार के ऊपर खड़े होकर बचाओ-बचाओ चिल्लाता रहा. पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू में लगी रहीं. मौके पर मौजूद पिता बेबसी से बेटे को जूझते देखते रहे, लेकिन देखते ही देखते बेटा कार सहित पानी में डूब गया.

ग्रेटर नोएडा में सेक्टर-150 एटीएस ली ग्रैंडियोस के पास शुक्रवार देर रात एक कार अनियंत्रित हो गई और नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी. नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस, दमकल टीम, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीम ने करीब साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू कर 30 फीट गहरे पानी से युवक को निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

मृतक की पहचान सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के रहने वाले 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के रूप में हुई है. युवराज केपिता ने अपनी आंखों के सामने बेटे के साथ हो रहे इस हादसे को देखा. पिता राजकुमार मेहता ने नॉलेज पार्क कोतवाली में घटनास्थल के पास बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं होने पर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है. इस पूरे मामले की जांच की जा रही है.

राजकुमार मेहता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से निदेशक के पद से सेवानिवृत हैं. उनकी पत्नी की कुछ साल पहले बीमारी के कारण हो मौत हो चुकी है. बड़ी बेटी यूनाइटेड किंगडम (यूके) में रहती है. बेटा युवराज मेहता गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था. वह वर्क फ्रॉम होम के साथ बीच-बीच में गुरुग्राम स्थित कंपनी जाता था.

शुक्रवार की रात युवराज गुरुग्राम से अपनी कार से लौट रहा था. घर से करीब 500 मीटर पहले सेक्टर-150 एटीएस ली ग्रैंडियोस के पास टी प्वाइंट पर युवराज की कार कोहरे के कारण नाले की दीवार को तोड़ते हुए पानी से लबालब भरे बेसमेंट में जा गिरी. ज्यादा पानी होने के कारण कार पलटने के बाद तैरने लगी. किसी तरह युवराज ने कार से बाहर आकर अपने पिता को फोन पर घटना की जानकारी दी.

पिता ने तुरंत डायल 112 पर कॉल किया और मौके पर पहुंचे. कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद कोतवाली प्रभारी सर्वेश सिंह दमकल को सूचना देकर मौके पर पहुंचे. वहीं नॉलेज पार्क फायर स्टेशन से दमकल कर्मी भी छोटी और बड़ी क्रेन के साथ पहुंच गए. उन्होंने क्रेन लगाकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को निकालने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी.

इस दौरान युवक ने बीच-बीच में कार के ऊपर ही किसी तरह खड़े होकर टार्च जलाकर तेज-तेज आवाज लगाई, वह बचाओ-बचाओ चिल्लाता रहा. इस दौरान अंधेरे के साथ कोहरा होने के कारण पुलिस और दमकल को मशक्कत करनी पड़ी. प्लॉट में ठंडा पानी भरा होने के साथ निर्माणाधीन कॉलम से टकराने के डर से पुलिस और दमकलकर्मियों ने पानी के अंदर जाने का जोखिम नहीं उठाया.

इस दौरान मौके पर मौजूद पिता बार-बार पुलिस और दमकल से बेटे को बचाने की गुहार लगाते रहे. मगर रात 1:45 बजे उनका बेटा कार सहित पानी के अंदर जा समाया. कुछ देर बाद एसडीआरएफ की टीम आई. लेकिन जरूरी संसाधन नहीं होने के कारण एसडीआरएफ को कामयाबी नहीं मिल पाई.

इस दौरान गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ को भी सूचना दी गई. करीब डेढ़ घंटे बाद गाजियाबाद से आई एनडीआरएफ की टीम ने ढाई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद गहरे पानी में स्टीमर उतारा और टार्च की रोशनी जलाकर युवराज को पानी से बाहर निकाला. उसे बेहोशी की हालत में इलाज के लिए नॉलेज पार्क स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. पिता, रिश्तेदारों, गांव के लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी के आरोप लगाए हैं.पीड़ित पिता राजकुमार मेहता ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि सेक्टर-150 के लोगों द्वारा पहले भी नोएडा प्राधिकरण से कई बार मांग की गई थी कि नाले के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड लगाए जाएं.

बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे आए दिन हादसे होते हैं. लेकिन प्राधिकरण की उदासीनता के कारण सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए. इसलिए मामले में संबंधित विभाग के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके.

नॉलेज पार्क कोतवाली प्रभारी सर्वेश सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया हादसे का कारण तेज रफ्तार और कोहरे के कारण वाहन से नियंत्रण खोना लग रहा है, जिससे कार सीधे गहरे पानी में जा गिरी. इस मामले में मृतक के पिता ने तहरीर दी है, जांच की जा रही है.

NATIONAL : बीमा के ₹1 करोड़ पर क्लेश… IRB जवान की मौत के बाद पत्नी पहुंची कोर्ट, बुजुर्ग मां-बाप लगा रहे न्याय की गुहार

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पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी क्षेत्र में सड़क हादसे में शहीद IRB जवान सुधीर कुमार सिंह की मौत के बाद ₹1 करोड़ दुर्घटना बीमा राशि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. विधवा बहू ने बीमा भुगतान रोक लगा दिया है. बुजुर्ग मां‑बाप न्याय के लिए मुसाबनी मुख्यालय पहुंचे और बहू पर प्रताड़ना व बीमा राशि पर दावा करने के आरोप लगाए हैं.

पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल से हैरान कर देने वाला पारिवारिक विवाद सामने आया है. इंडिया रिजर्व बटालियन (IRB) के जवान की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद अब उसके बूढ़े माता-पिता और विधवा पत्नी के बीच ₹1 करोड़ की दुर्घटना बीमा राशि को लेकर टकराव खुलकर सामने आ गया है. जवान के बुजुर्ग पिता ने बहू पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मुसाबनी मुख्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है.

दरअसल, यह मामला घाटशिला के मुसाबनी क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पूर्व में IRB में कार्यरत जवान सुधीर कुमार सिंह की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. परिजनों का कहना है कि बेटे की मौत के बाद जो सहारा मिलना चाहिए था, वह भी विवाद और कानूनी लड़ाई में उलझ गया है.

जानकारी के मुताबिक, सुधीर कुमार सिंह (28) की मौत 26 मई 2025 को हुई थी. वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे और साइकिल पर सवार थे, तभी मुसाबनी में एक ट्रक की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया.सुधीर कुमार सिंह इंडिया रिजर्व बटालियन में कार्यरत रह चुके थे. उनकी असमय मौत के बाद परिवार को मिलने वाली सुविधाओं और बीमा राशि को लेकर उम्मीद थी कि इससे बूढ़े माता-पिता और अन्य परिजनों का जीवन किसी तरह संभल सकेगा.

परिजनों का आरोप है कि मृतक की विधवा पत्नी नेहा कुमारी ने लालच में आकर ₹1 करोड़ की दुर्घटना बीमा राशि पर अपना दावा ठोक दिया है. जबकि बीमा पॉलिसी में नोमिनी के रूप में सुधीर की मां इतवारू देवी का नाम दर्ज है. बताया गया कि बहू ने इंश्योरेंस कंपनी को पत्र लिखकर नोमिनी को भुगतान नहीं करने का अनुरोध किया.जब इंश्योरेंस कंपनी की ओर से यह आवेदन स्वीकार नहीं किया गया, तो नेहा कुमारी ने भोजपुर के अवर न्यायाधीश प्रथम के न्यायालय में अपील दायर कर बीमा भुगतान पर रोक लगवा दी. इससे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं.

शुक्रवार को मृतक जवान के बुजुर्ग पिता और उनके चाचा मुसाबनी स्थित IRB-2 मुख्यालय पहुंचे. उन्होंने कमांडेंट को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए बहू पर गंभीर आरोप लगाए. शिकायत में कहा गया है कि बहू का उनके बेटे के साथ दांपत्य जीवन कभी सामान्य नहीं रहा और उसने पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया.

परिजनों का कहना है कि बहू ने पति की मौत के बाद सास-ससुर और कुंवारी ननद को बेसहारा छोड़ दिया है. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बूढ़े माता-पिता न्याय और सम्मान की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं.मृतक जवान के पिता और अन्य परिजन चाहते हैं कि दुर्घटना में मिलने वाली बीमा राशि पॉलिसी के अनुसार नोमिनी इतवारू देवी को मिले. उनका कहना है कि इसी राशि से कुंवारी बेटी की शादी, बीमार बेटे का इलाज और पूरे परिवार का जीवन-यापन संभव हो सकेगा.

सात महीने बाद अब मृतक जवान की सर्विस बुक में बहू का नाम दर्ज होने पर भी परिजनों ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यह मामला केवल पैसों का नहीं, बल्कि बूढ़े मां-बाप के सम्मान और भविष्य से जुड़ा है. फिलहाल, मामला कानूनी प्रक्रिया में है और परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है.

WORLD : ग्रीनलैंड को लेकर भड़के ट्रंप ने 8 देशों पर लगाया 10% टैरिफ, अब यूरोपीय यूनियन ने उठाया बड़ा कदम, अमेरिका की बढ़ेंगी मुश्किलें

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने के लिए यूरोपीय यूनियन को टैरिफ की धमकी दी. लेकिन अब EU ने उलटा ट्रंप पर दबाव बनाते हुए व्यापार समझौता रोकने का फैसला किया है.यूरोपीय संघ (EU) के सांसद अब अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को मंजूरी देने से रोकने की तैयारी कर रहे हैं. यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ धमकी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही है.

ट्रंप की धमकी के जवाब में यूरोपीय संसद के सबसे बड़े ग्रुप यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के प्रमुख मैनफ्रेड वेबर ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘EPP EU-US ट्रेड डील का समर्थन करता है, लेकिन ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकियों के कारण अभी इसकी मंजूरी संभव नहीं है. अमेरिकी उत्पादों पर EU के टैरिफ कम करने की योजना को फिलहाल रोकना होगा.’इसका मकसद दोनों तरफ से पूर्ण व्यापार युद्ध से बचना था. समझौता आंशिक रूप से लागू हो चुका है, लेकिन यूरोपीय संसद की मंजूरी अभी बाकी है. अगर EPP और लेफ्ट-लीनिंग ग्रुप मिलकर वोट दें, तो इसे रोकना या ब्लॉक करना आसान हो जाएगा.

कई EU सांसद पहले से ही इस डील को अमेरिका के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ मानते थे. जुलाई समझौते के बाद अमेरिका ने स्टील और एल्युमिनियम पर 50% टैरिफ को सैकड़ों और EU उत्पादों तक बढ़ा दिया था, जिससे गुस्सा और बढ़ गया.यूरोपीय संसद के ट्रेड कमेटी चेयर बर्न्ड लांगे ने कहा कि देशों की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने समझौते के लागू होने को रोकने और EU के एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट (ACI) इस्तेमाल करने की बात कही, जो कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है. यह टूल कोएर्सिव (दबाव वाली) ट्रेड कार्रवाइयों के खिलाफ टैरिफ, टेक कंपनियों पर टैक्स और निवेश रोक आदि का इस्तेमाल करने की शक्ति देता है.

डेनिश MEP पेर क्लाउसेन ने 30 सांसदों के हस्ताक्षर से एक लेटर भेजा है कि ग्रीनलैंड पर दावे और धमकियां जारी रहने तक डील को फ्रीज कर दिया जाए. EU के 27 देशों के राजदूत रविवार को इमरजेंसी मीटिंग में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे. यह पूरा मामला ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में तनाव बढ़ा रहा है और दोनों तरफ व्यापार युद्ध की आशंका पैदा कर रहा है.

ट्रंप ने 17 जनवरी 2026 को घोषणा की कि 1 फरवरी से 8 यूरोपीय देशों नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और डेनमार्क के सामान पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगेगा. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड को ‘पूरी तरह खरीदने’ की डील नहीं मिली, तो यह टैरिफ जून में बढ़कर 25% हो जाएगा. ग्रीनलैंड डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस इलाका है और ट्रंप लंबे समय से इसे अमेरिका में शामिल करने की बात कर रहे हैं.

MAHARASHTRA : YouTube से चोरी खीख ATM को खाली करने पहुंचे शातिर, पुलिस ने पहले ही धर दबोचा

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धुले SP श्रीकांत धिवरे ने बताया कि पुलिस ने संदिग्ध पिकअप वाहन का पीछा किया, जिसके बाद आरोपी भोरखेड़ा (चोपड़ा रोड) इलाके में वाहन छोड़कर फरार हो गए. दो को गिरफ्तार कर लिया है.महाराष्ट्र के धुले जनपद के शिरपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम को निशाना बनाने की कोशिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया है. रात करीब 2:30 बजे एक व्यक्ति ने 112 पर फोन कर सूचना दी कि बैंक ऑफ बड़ौदा, शिरपुर के एटीएम के सामने तीन संदिग्ध युवक एक पिकअप वाहन के साथ चेन बांधकर खड़े हैं. सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई.

धुले SP श्रीकांत धिवरे ने बताया कि पुलिस ने संदिग्ध पिकअप वाहन का पीछा किया, जिसके बाद आरोपी भोरखेड़ा (चोपड़ा रोड) इलाके में वाहन छोड़कर फरार हो गए. मौके से पुलिस को पिकअप वाहन, एक मोबाइल फोन और फास्टैग बरामद हुआ. इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया. जबकि एक फरार हो गया, उसकी तलाश शुरू हो गयी है.धिवरे ने आगे बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अमळनेर और धुले शहर में हुई एटीएम चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर एटीएम चोरी के तरीके सीखे और वारदातों को अंजाम दिया.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमंत सुकलाल माली (उम्र 21 वर्ष), निवासी भिलडाई, तालुका व जिला धुले और विधुर देवा जाधव उर्फ विजू (उम्र 38 वर्ष), निवासी वसंत नगर (मुकटी), तालुका पारोळा, जिला जळगांव के रूप में हुई है. दोनों आरोपी धुले के रहने वाले हैं.

धिवरे ने बताया कि पुलिस ने पिकअप वाहन और अन्य सबूत जब्त कर लिए हैं और मामले की आगे की जांच जारी है. साथ ही फरार तीसरे आरोपी की तलाश भी की जा रही है. पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय जनता ने राहत की सांस ली है. एकाके वारदातों से शहर में दहशत फैल गयी थी. पुलिस के मुताबिक एटीएम चचोरों पर अभियान चलाकर शिंकजा कसा जाएगा, ताकि फिर कोई ऐसी वारदात की न सोचे.

ENTERTAINMENT : धर्मेंद्र हाउस होगा और बड़ा, सनी-बॉबी देओल जोड़ रहे हैं जुहू के 60 करोड़ के बंगले में नया फ्लोर

देओल परिवार का मशहूर घर, जिसे धर्मेंद्र हाउस कहा जाता है, अब और बड़ा होने जा रहा हैं. सनी देओल और बॉबी देओल मिलकर जुहू के 60 करोड़ के बंगले में नया फ्लोर बनवा रहे हैं.

देओल परिवार का मशहूर घर, जिसे धर्मेंद्र हाउस कहा जाता है, मुंबई के पॉश इलाके जुहू में स्थित है. रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म नोब्रोकर के मुताबिक, इस बड़े बंगले की कीमत करीब 60 करोड़ रुपये है. अब यह मशहूर प्रॉपर्टी और भी बड़ी होने वाली है. यहां कंसट्रक्शन का काम शुरू हो चुका है और घर में एक नई मंजिल जोड़ी जा रही है.

विक्की ललवानी के मुताबिक, धर्मेंद्र के जुहू वाले बंगले में जल्द ही एक और फ्लोर बनेगा. इन दिनों बंगले में काफी हलचल है. हाल ही में परिसर में क्रेन भी देखी गई और छत पर जोर-शोर से काम चल रहा है. जानकारी के मुताबिक, सनी देओल और बॉबी देओल मिलकर परिवार के इस घर में पूरा एक नया फ्लोर बनवा रहे हैं. बंगले के पास मौजूद एक शख्स ने इसे आसान शब्दों में कहा, ‘बच्चे बड़े हो रहे हैं.’ ‘उन्हें ज़्यादा जगह की ज़रूरत है.’ सूत्रों के मुताबिक, यह रिनोवेशन काफी बड़ा होगा और इसे पूरा होने में कम से कम 4 से 5 महीने, या उससे भी ज़्यादा समय लग सकता है.

धर्मेंद्र हाउस आज भी जॉइंट फैमिली होम के रूप में चलता है. यहां बॉबी देओल अपनी पत्नी तान्या देओल और बेटों आर्यमान देओल व धरम देओल के साथ रहते हैं. वहीं सनी देओल भी इसी घर में पत्नी पूजा देओल और बेटों करण देओल व राजवीर देओल के साथ रहते हैं. इस घर में धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर, उनकी बहन और भतीजी भी रहती हैं. यही वजह है कि यह घर बॉलीवुड की उन गिनी-चुनी मिसालों में से एक है, जहां इतना बड़ा परिवार एक ही छत के नीचे साथ रहता है.

धर्मेंद्र हाउस एक बड़ा और शानदार घर है, जहां मॉडर्न और ट्रैडिशनव डिजाइन दोनों का मेल है. पहले Curly Tales को दिए इंटरव्यू में बॉबी देओल ने बताया था कि इस घर का इंटीरियर उनकी पत्नी तान्या देओल ने बनाया है, जो पेशे से इंटीरियर डिज़ाइनर हैं. घर में इंडियन चीज़ें, लकड़ी का नक्काशीदार फर्नीचर और परिवार की तस्वीरें लगी हैं. पूरा घर साधारण दिखता है लेकिन बहुत पर्सनल और दिल से जुड़ा हुआ है.

देओल परिवार का जुहू वाला घर कई खास पारिवारिक पलों का गवाह रहा है. सनी देओल के बड़े बेटे करण देओल की शादी दृशा देओल से इसी धर्मेंद्र हाउस में हुई थी, जहां पूरे देओल परिवार ने मिलकर धूमधाम से जश्न मनाया. शादियों से लेकर जन्मदिन और सालगिरह तक, यह बंगला लंबे समय से देओल परिवार के इमोशन्स से जुड़ा रहा है. अब एक नया फ्लोर जुड़ने के साथ यह घर और भी बड़ा होने जा रहा है.

24 नवंबर 2025 को 89 साल की उम्र में धर्मेंद्र के निधन के बाद परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कई प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया. सनी देओल, बॉबी देओल और धर्मेंद्र की बेटियां अजीता और विजेता ने एक होटल में प्रेयर मीट रखी. वहीं अलग से हेमा मालिनी ने अपनी बेटियों ईशा देओल और अहाना देओल के साथ अपने घर पर प्रेयर मीट रखी. इसके अलावा हेमा मालिनी ने दिल्ली और मथुरा में भी प्रेयर मीट रखी. इन सभाओं में परिवार के करीबी सदस्य और दोस्त शामिल हुए और इस तरह देओल परिवार के मुखिया और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को विदाई दी गई.

PUNJAB : पंजाब के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, बार्डर पर बेरोकटोक खेती का रास्ता होगा साफ

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सीएम की मांग पर बार्डर पर तार शिफ्ट करने के लिए केंद्र सरकार ने सहमत जताई है. वहीं आने वाले दिनों में बार्डर पर स्थित हजारों एकड़ जमीन पर पंजाब के किसान बेरोकटोक खेती कर सकेंगे.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और पंजाब से संबंधित विभिन्न लंबित मुद्दों के जल्द और समयबद्ध समाधान के लिए विचार-विमर्श किया, जिनमें सीमावर्ती सुरक्षा प्रबंध, कृषि संकट, अंतर राज्यीय पानी संबंधी विवाद और केंद्र द्वारा ग्रामीण विकास फंड के बकाए की अदायगी में देरी शामिल है. इसके साथ ही सीमावर्ती सुरक्षा दीवार जीरो लाइन से काफी दूर होने के कारण किसानों को पेश मुश्किलों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और कंटीली तार के बीच पड़ने वाली कृषि योग्य भूमि के बड़े हिस्से पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए रोजाना इसे पार करना पड़ता है.

पंजाब के मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित बीज बिल 2025, अनसुलझे सतलुज यमुना लिंक (एस.वाई.एल) विवाद, एफ.सी.आई. द्वारा अनाज की धीमी ढुलाई, आढ़तिया कमीशन रोकने, ग्रामीण विकास फंड (आर.डी.एफ.) और मार्केट फीसों का भुगतान न करने और चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब की भूमिका को घटाने संबंधी पंजाब के एतराज उठाते हुए इन मुद्दों के तुरंत और समयबद्ध समाधान की मांग की है.

प्रस्तावित बीज बिल 2025 पर गंभीर एतराज उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और देश के अन्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान देता है, फिर भी बीज बिल का खाका संबंधित धारा तहत शेड्यूल अनुसार राज्य की प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित नहीं बनाता. बिल में पेश किया गया जोन आधारित सिस्टम मौजूदा प्रणाली के विपरीत, केंद्रीय बीज समिति में पंजाब की प्रतिनिधित्व की गारंटी नहीं देता, जिससे बीज क्षेत्र को सीधे प्रभावित करने वाले फैसलों में राज्य की आवाज दबाई गई है.’

पंजाब के मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘प्रस्तावित बीज बिल में राज्य की मौजूदा शक्ति को घटा दिया गया है क्योंकि बीज रजिस्ट्रेशन में राज्य बीज समिति की कोई भूमिका नहीं है और खाके में उन किसानों के लिए एक मजबूत मुआवजा ढांचा सुनिश्चित बनाने के बारे में भी कोई बात नहीं की गई, जिन्हें रजिस्टर्ड बीज संबंधी दर्शाए नतीजे न मिलने के कारण नुकसान होता है.’

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि विदेशों में टेस्ट की गईं और छोड़ी गईं बीज किस्मों को पंजाब और अन्य राज्यों में आयात व बिक्री के लिए राज्य के कृषि-जलवायु हालात तहत अनिवार्य स्थानीय टेस्टिंग के बिना अनुमति दी गई है, जिससे किसानों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि कृषि पंजाब की रीढ़ की हड्डी है, जहां किसान फसलें उगाते हैं, उपज का कुछ हिस्सा बेचते हैं और अगले सीजन के लिए बीज संभालकर रखते हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को बीजों के लिए पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर करने के लिए मजबूर करना न तो उचित है और न ही किसानों के हित में है. उन्होंने अपील की कि बिल को मौजूदा रूप में संसद के सामने नहीं लाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने समस्याओं की जांच का भरोसा दिया है.

नदियों के पानी के बारे में पंजाब के स्पष्ट स्टैंड को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है. सतलुज, रावी और ब्यास के पानी की उपलब्धता में काफी कमी आई है और इसलिए सतलज यमुना लिंक नहर का निर्माण व्यावहारिक नहीं है.’

उन्होंने कहा कि इन नदियों के 34.34 एम.ए.एफ. पानी में से पंजाब को सिर्फ 14.22 एम.ए.एफ. आवंटित किया गया था, जो लगभग 40 प्रतिशत है और बाकी 60 प्रतिशत हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को आवंटित किया गया था. हालांकि इनमें से कोई भी नदी वास्तव में इन राज्यों से नहीं बहती. उन्होंने कहा कि यह पंजाब के साथ घोर अन्याय है और इस नहर को बनाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि यह राज्य और इसके लोगों के हितों के पूरी तरह विरुद्ध है.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आगे पंजाब का स्टैंड स्पष्ट है कि किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.

अनाज की ढुलाई और भंडारण की समस्या को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एफ.सी.आई. द्वारा पिछले पांच महीनों में राज्य से सिर्फ 4 से 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 से 6 लाख मीट्रिक टन चावलों की ही ढुलाई की जा रही है. खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के 95 लाख मीट्रिक टन चावलों की डिलीवरी की जानी है लेकिन इस समय सिर्फ 20 लाख मीट्रिक टन जगह उपलब्ध है.’

उन्होंने कहा कि खरीफ खरीद सीजन 2025-26 के कस्टम मिल्ड चावलों की समय पर डिलीवरी और 01.04.2026 से शुरू होने वाले रबी मंडीकरण सीजन (आर.एम.एस.) 2026-27 के दौरान गेहूं के भंडारण के लिए जगह की उचित उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के लिए राज्य से कम से कम 20 लाख मीट्रिक टन अनाज (गेहूं और चावल के लिए 10-10 एल.एम.टी.) की मासिक ढुलाई करना जरूरी है. उन्होंने स्टॉक की ढुलाई के लिए विशेष रेल गाड़ियां चलाने की अपील करते हुए कहा कि पंजाब राष्ट्रीय पूल में लगभग 125 एल.एम.टी. गेहूं का योगदान देता है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए उचित स्टोरेज जरूरी है.

आढ़तिया कमीशन के मुद्दे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘आढ़तिया कमीशन को 2019-20 के खरीद सीजन से पंजाब कृषि उत्पाद और मार्केटिंग एक्ट 1961 के उपबंधों के विपरीत फ्रीज किया गया है और इस समय गेहूं के लिए कमीशन 46 रुपए प्रति क्विंटल और धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल तक सीमित किया गया है.’

उन्होंने बताया कि साइलोज पर अनाज की खरीद के लिए आढ़तिया कमीशन घटाकर रेगुलर मंडियों के मुकाबले आधा कर दिया गया है और जनवरी 2024 में आढ़तिया कमीशन की संशोधन के लिए गठित कमेटी ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है. उन्होंने कहा, ‘आढ़तिए एजेंट नहीं हैं, वे जरूरी सेवाएं प्रदान करते हैं और उन्हें बनता हक मिलना चाहिए. कमीशन में संशोधन में हो रही देरी के कारण राज्य की निर्विघ्न खरीद प्रक्रिया में अड़ंगा पैदा हो सकता है और दरों को जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए.’

ग्रामीण विकास फंड की अदायगी न होने का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘संबंधित पंजाब एक्टों के तहत स्पष्ट कानूनी उपबंधों के बावजूद राज्य सरकार को आर.डी.एफ. की अदायगी नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि भले ही राज्य सरकार ने भारत सरकार की हिदायतों के तहत पंजाब ग्रामीण विकास एक्ट में संशोधन किया है लेकिन दुख की बात है कि खरीफ खरीद सीजन 2021-22 से आर.डी.एफ. की इजाजत नहीं दी गई है.’

उन्होंने बताया कि आर.डी.एफ. के 9030.91 करोड़ रुपए और मार्केट फीस के 2267.83 करोड़ रुपए लंबित हैं. उन्होंने कहा कि बनता हिस्सा न मिलने के कारण ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर बुरा प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा कि ‘आर.डी.एफ. कोई चैरिटी नहीं है. यह पंजाब का हक है और हम अपना हक मांग रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि पहली किस्त जारी करने पर विचार के लिए जल्द मीटिंग बुलाई जाएगी.

प्रशासकीय चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के लंबे समय से चल रहे 60:40 अनुपात को बनाए रखना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि पंजाब के आई.ए.एस. और पी.सी.एस. अधिकारियों को चंडीगढ़ प्रशासन में मुख्य पदों से बाहर रखा गया है और आबकारी, शिक्षा, वित्त और स्वास्थ्य जैसे विभागों में पदों को स्टेट यू.टी. कैडर के लिए खोला जा रहा है, जिससे यू.टी. प्रशासन के प्रभावशाली कामकाज में पंजाब की भूमिका पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि मौजूदा अनुपात को बरकरार रखा जाएगा.

मुख्यमंत्री ने पंजाब कैडर के अधिकारी को एफ.सी.आई. पंजाब के जनरल मैनेजर के रूप में नियुक्त करने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पंजाब कैडर के अधिकारियों को अनाज की खरीद, मंडियां, भंडारण और ढोई-ढुआई बारे जरूरी जानकारी है. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि इस पद पर रेगुलर नियुक्तियां पंजाब कैडर से होती रही हैं, जबकि अन्य कैडर के अधिकारियों को सिर्फ अस्थायी चार्ज होता है. उन्होंने कुशलता और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के हित में इस नियम की पालना करने की अपील की.

सीमावर्ती इलाकों बारे मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय नियमों अनुसार, दीवार जीरो लाइन से 150 मीटर से दूर होनी चाहिए लेकिन पंजाब के कई इलाकों में सीमावर्ती कंटीली तार 2 से 3 किलोमीटर अंदर स्थित है.” उन्होंने कहा कि हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि इस तार से परे है, जिसके कारण किसानों को रोजाना पहचान पत्र दिखाना और बी.एस.एफ. की सुरक्षा के तहत अपने खेतों में खेती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. यदि तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक दोबारा बनाया जाता है तो भारतीय भूमि का बड़ा हिस्सा दीवार के इस पार आ जाएगा, जिससे किसान बिना किसी डर और रोजाना की पाबंदियों के खेती कर सकेंगे और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता भी नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें बताया कि यह मुद्दा विचाराधीन है और पठानकोट में भी इसी तरह की व्यवस्था संबंधी कोशिश की जा चुकी है.

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