Monday, June 22, 2026
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NATIONAL : केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने बेटे भगीरथ को पुलिस के हवाले किया, पॉक्सो एक्ट में आरोपी है, लीगल टीम बोली- ‘बेल मिलेगी’

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केंद्रीय मंत्री संजय कुमार ने बेटे भगीरथ को पुलिस के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। हालांकि, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है।

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने बेटे भगीरथ को पुलिस के हवाले कर दिया है। उन्होंने एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है और उनकी लीगल टीम का कहना है कि उनके बेटे को जमानत मिल जाएगी। वहीं, तेलंगाना पुलिस का कहना है कि पॉक्सो एक्ट मामले में आरोपी भगीरथ को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने भगीरथ को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए उनके खिलाफ ‘लुक-आउट सर्कुलर’ जारी किया था।

केंद्रीय मंत्री ने क्या लिखा?
अपने बेटे बंदी भगीरथ के पॉक्सो केस पर केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने कहा, “आज मैंने अपने बेटे बंदी भगीरथ को जांच के लिए एक वकील के जरिए पुलिस को सौंप दिया है। मैंने पहले भी कहा है कि कानून के सामने सब बराबर हैं। मेरे बेटे ने लगातार कहा है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है और जब उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी, तो मैंने पहले ही उसे पुलिस को सौंपने का फैसला कर लिया था। फिर, हमने सारे सबूत लीगल टीम को सौंप दिए और उन्हें देखने के बाद उन्होंने कहा कि केस में बेल मिल जाएगी। इसीलिए सरेंडर में देरी हुई। मैं ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करता हूं।”

पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस के मुताबिक उन्हें नारसिंगी पुलिस एकेडमी की पास से अरेस्ट किया गया। तेलंगाना के साइबराबाद पुलिस कमिश्नर रमेश ने कहा, “पेटबशीराबाद पॉक्सो केस के आरोपी बंडी भगीरथ को हैदराबाद शहर के बाहरी इलाके से पकड़ा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा है। यह सरेंडर नहीं था।” तेलंगाना रक्षा सेना की अध्यक्ष के. कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया जाए, ताकि उनके बेटे से जुड़े मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित हो सके।

तेलंगाना हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इस मामले में भगीरथ को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके एक दिन बाद बंडी संजय कुमार ने बयान में कहा कि उन्होंने पिछले सप्ताह शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद बेटे से पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए कहा था। केंद्रीय मंत्री ने हालांकि कहा कि भगीरथ बार-बार कह रहा है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है और अपने वकीलों के समक्ष इस संबंध में पुख्ता सबूत पेश किये हैं। बंडी संजय के मुताबिक, वकीलों का मानना था​ कि मामला खारिज कर दिया जाएगा और भगीरथ को जमानत मिल जाएगी, जिसके कारण देरी हुई।

17 वर्षीय लड़की ने लगाए हैं आरोप
पुलिस ने भगीरथ के खिलाफ आठ मई को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। शिकायत 17 वर्षीय लड़की की मां ने दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भगीरथ के उसकी बेटी के साथ संबंध थे और उसने लड़की का यौन उत्पीड़न किया है।

NATIONAL : बंगाल में फाल्टा पुनर्मतदान से पहले दहाड़े CM सुवेंदु अधिकारी, कहा- ‘जिन्होंने मजबूरन अपना घर छोड़ा, उन सभी लोगों को वापस लाएंगे’

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पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होना है। इस बीच फाल्टा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा ‘हमारे घोषणापत्र में किए गए सभी वादे पूरा करेंगे।’

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर 29 अप्रैल 2026 को हुए मतदान को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने रद्द कर दिया था। गौरतलब है कि चुनाव के दौरान व्यापक अनियमितताओं के बाद आयोग ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। आयोग के अनुसार फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को नए सिरे से वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती 24 मई को की जाएगी।

इस बीच पुनर्मतदान से पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फाल्टा में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सूबे में घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को लागू करने से लेकर पश्चिम बंगाल को मजबूरन छोड़ने वाले लोगों के घर वापसी को लेकर भी जिक्र किया।

घोषणापत्र में किए गए सभी वादे लागू होंगे-CM सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फाल्टा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा ‘मैं आपके सामने आया हूं और मैं भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में आया हूं। हमारे घोषणापत्र में किए गए सभी वादे, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा कही गई सभी बातें, हम उन सभी को पूरा करेंगे।’

मजबूरन बंगाल छोड़ने वालों की होगी घर वापसी
जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा ‘हम उन सभी लोगों को वापस लाएंगे जिन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। मैंने पुलिस को सख्त आदेश दिए हैं: यदि कोई रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे सीधे जेल भेज दिया जाए।’

21 मई पुनर्मतदान और 24 मई गिनती
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को नए सिरे से वोट डाले जाएंगे और मतों की गिनती 24 मई को की जाएगी। आपको बता दें कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गढ़ माना जाता है।

NATIONAL : 128 करोड़ के जीएसटी घोटाले में छह गिरफ्तार, 50 फर्जी कंपनियों का सिंडिकेट बेनकाब; 51 लाख रुपये जब्त

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पुलिस ने सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच के अनुसार, महज एक कंपनी के जरिये 128 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई गई।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने फर्जी कंपनियां बनाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच के अनुसार, महज एक कंपनी के जरिये 128 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई गई। इस फर्जीवाड़े से आरोपियों ने करीब 10 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) भी हासिल किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी मास्टरमाइंड राजकुमार दीक्षित (43), गाजियाबाद के वसुंधरा निवासी विभाष मित्रा (34), मथुरा निवासी अमर (35), दिल्ली निवासी नितिन वर्मा (43), मो. वसीम (30) व आबिद (35) को भी दबोचा गया है। एक अन्य मुख्य आरोपी दिलीप कुमार फरार है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 51.12 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, दो कारें, कई लैपटॉप, फर्जी मुहरें, नकली जीएसटी बिल और बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच के दौरान अब तक 50 शेल कंपनियों का पता चला है। आशंका जताई जा रही है कि इन कंपनियों के जरिए हजारों करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फर्जी कंपनियां बनाकर बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के नकली बिल तैयार करते थे। फिर बैंकिंग चैनलों के जरिए लेनदेन को वैध दिखाया जाता था। इन फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का कारोबार दर्शाकर जीएसटी रिटर्न दाखिल किए जाते और आईटीसी के नाम पर सरकारी खजाने से रकम हासिल कर ली जाती थी।

नौकरी का झांसा देकर दस्तावेज लिए, उसी कागजात पर खड़ी कर दी फर्जी कंपनी, अब तक 250 से अधिक शेल कंपनियां रजिस्टर्ड करा चुका
जीएसटी बिलों में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड नौवीं कक्षा तक पढ़ा राजकुमार दीक्षित अब तक 250 से अधिक शेल कंपनियां रजिस्टर्ड करा चुका है। फिलहाल एक कंपनी की जांच में ही करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ है। 
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BUSINESS : सोने के बाद चांदी पर सरकार सख्त, इंपोर्ट के लिए अब लाइसेंस जरूरी

सरकार ने चांदी के इंपोर्ट नियम सख्त कर दिए हैं. अब लाइसेंस के बिना सिल्वर बार्स का आयात नहीं होगा, जिससे कीमतों पर असर पड़ सकता है. देश में बढ़ते इंपोर्ट बिल और रुपये पर दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने चांदी के इंपोर्ट नियमों को सख्त कर दिया है. सरकार ने कुछ खास तरह की सिल्वर बार्स के इमॉर्ट को “फ्री” से बदलकर “रिस्ट्रिक्टेड” श्रेणी में डाल दिया है. इसका मतलब है कि अब बिना सरकारी अनुमति चांदी इंपोर्ट नहीं की जा सकेगी.

क्या बदला है नियमों में?
अब 99.9% या उससे ज्यादा शुद्धता वाली सिल्वर बार्स और कुछ अन्य श्रेणियों के इंपोर्ट के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा. पहले इन्हें आसानी से इंपोर्ट किया जा सकता था, लेकिन अब सरकार हर इंपोर्ट पर नजर रखेगी. यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है.

सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया?
हाल के समय में सोना-चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण इन्वेस्टर्स सेफ इनवेस्टमेंट के रूप में इन धातुओं की ओर बढ़ रहे हैं. इससे भारत में इंपोर्ट बढ़ा और रुपये पर दबाव पड़ा. सरकार इसी दबाव को कम करना चाहती है.

क्या महंगी होगी चांदी?
एक्स्पर्ट्स का मानना है कि इंपोर्ट पर रोक और हाल ही में बढ़ाई गई कस्टम ड्यूटी (6% से 15%) का असर बाजार पर दिख सकता है. सप्लाई कम होने से चांदी की कीमतें थोड़े समय के लिए बढ़ सकती हैं.

किन पर पड़ेगा असर?
ज्वेलर्स, बुलियन ट्रेडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े खरीदारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. उन्हें अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है और इंपोर्ट की प्रक्रिया भी कठिन हो जाएगी. सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह अनावश्यक इंपोर्ट को कम करके अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना चाहती है.

NATIONAL : तीसरे बच्चे के जन्म पर 30000, चौथे पर 40000 देगी सरकार, घटती आबादी पर बड़ा फैसला

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आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए तीसरे बच्चे पर 30 हजार और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये की नकद सहायता देने की नई योजना घोषित की है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू प्रदेश के लोगों के लिए नई स्कीम लेकर आए हैं, जिसे सुनकर आप हैरान होंगे. उन्होंने राज्य में घटती जनसंख्या वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए एक नई प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है. इस योजना के तहत सरकार अब तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर परिवारों को नकद सहायता देंगी.

नरसन्नापेटा में आयोजित स्वर्ण आंध्र–स्वच्छ आंध्र कार्यक्रम में उन्होंने यह घोषणा की और कहा कि बच्चे देश की “संपत्ति” हैं, न कि बोझ. इसलिए समाज को जन्म दर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए.

नरसन्नापेटा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के तहत, अब सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30,000 रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40,000 रुपये की सहायता देगी.”

सीएम चंद्रबाबू नायडू कहा -“मैंने इस बारे में कई बार विचार किया है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले परिवार नियोजन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था, लेकिन बदलते हालात में जनसंख्या वृद्धि को भी आवश्यक माना जा रहा है.” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बच्चों को बोझ नहीं बल्कि देश और राज्य की संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए. उनका मानना है कि मजबूत भविष्य के लिए जनसंख्या संतुलन बेहद जरूरी है.

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज जन्म दर बढ़ाने के लिए हम सब एक साथ मिलकर काम करें. यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घोषणा की गई हो. इससे पहले सरकार ने दूसरे बच्चे के जन्म पर भी 25,000 रुपये देने का प्रस्ताव रखा था. इस बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना भी जताई जा रही है.

MAHARASHTRA : गढ़चिरौली में CRPF और पुलिस का ऑपरेशन अंतिम प्रहार: 8 नक्सली गिरफ्तार, 5 ने डाले हथियार; अब रिकॉर्ड में कोई भी वांटेड माओवादी नहीं

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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में CRPF और पुलिस के ‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ के तहत 8 नक्सली गिरफ्तार किए गए और 5 ने आत्मसमर्पण किया है। एसपी एम. रमेश के अनुसार, अब पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड में कोई भी वांटेड माओवादी बाकी नहीं बचा है।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कराने की दिशा में सुरक्षा बलों ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और गढ़चिरौली पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए ‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ (Operation Antim Prahar) के तहत आठ कुख्यात माओवादियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि पांच अन्य ने डर और दबाव के चलते अपने हथियार डाल दिए हैं। इस बड़े एक्शन के बाद जिले के आधिकारिक ‘वांटेड’ (Wanted) माओवादियों के रिकॉर्ड से सभी नाम खत्म हो गए हैं, जो कि इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से एक नया मील का पत्थर है।

गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक (SP) एम. रमेश ने इस बेहद महत्वपूर्ण कामयाबी की पुष्टि करते हुए कहा, “CRPF और गढ़चिरौली पुलिस ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ शुरू किया था, जिसके तहत आठ माओवादियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया गया है। इस ऑपरेशन के शुरू होने और इसकी सफलता के बाद, अब गढ़चिरौली पुलिस के आधिकारिक ‘वांटेड’ रिकॉर्ड में एक भी माओवादी बाकी नहीं बचा है।”

सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ के दौरान गिरफ्तार और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के ठिकानों से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, जिंदा कारतूस, विस्फोटक सामग्री और रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बरामद किया है। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इन गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण से इस क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क की रीढ़ पूरी तरह से टूट गई है

गढ़चिरौली पुलिस की इस कार्रवाई और नक्सलियों के लगातार हो रहे आत्मसमर्पण (Surrender) से साफ है कि अब माओवादियों की खोखली विचारधारा से लोगों का भरोसा उठ चुका है। ऑपरेशन के दौरान 5 नक्सलियों द्वारा हथियार डालना यह दिखाता है कि सुरक्षा बलों की सख्ती के साथ-साथ सरकार की पुनर्वास नीतियां भी रंग ला रही हैं, और भटके हुए लोग अब विकास की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं।

NATIONAL : एनटीए से जुड़े सरकारी अधिकारी तक पहुंची सीबीआई जांच की आंच, लाखों रुपये में बंटे थे सवाल

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से जुड़े एक सरकारी अधिकारी की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की इस जांच से पता चला है कि परीक्षा से कई दिन पहले ही असली पेपर लीक हो गया था और इसके पीछे एक बहुत बड़ा और शातिर नेटवर्क काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद से शिक्षा विभाग और 23 लाख छात्रों के बीच भारी हड़कंप मच गया है।

सीबीआई ने अदालत को बताया है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने एनटीए के एक अधिकारी के साथ मिलकर गहरी साजिश रची थी। 14 मई को गिरफ्तार की गई आरोपी मनीषा संजय वाघमारे और 15 मई को पकड़े गए केमिस्ट्री के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी ने पूछताछ में कई बड़े राज खोले हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, मनीषा वाघमारे को 27 अप्रैल को ही परीक्षा के प्रश्न पत्र और उनके उत्तर मिल गए थे। इसके बाद उसने ये सवाल अहमदनगर से गिरफ्तार किए गए धनंजय लोखंडे और अन्य आरोपियों को लाखों रुपये लेकर बेच दिए।

बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मंधारे ने पेपर लीक में क्या खेल किया?
इस मामले में सीबीआई ने शनिवार को बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा मांढरे को भी गिरफ्तार कर लिया है। मनीषा मांढरे एनटीए की उस खास कमेटी का हिस्सा थीं जो नीट का पेपर तैयार करती है। सीबीआई के अनुसार, मंधारे की बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्न पत्रों तक पूरी पहुंच थी। उसने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में पुणे स्थित अपने घर पर बच्चों के लिए विशेष कोचिंग क्लास लगाई थी। इस क्लास में उसने बच्चों से लाखों रुपये की फीस लेकर लीक हुए सवाल और उनके जवाब रटाए थे। जांच में पाया गया कि ये सभी सवाल 3 मई को हुई असली परीक्षा में बिल्कुल वैसे ही आए थे।

केमिस्ट्री के एक्सपर्ट ने कैसे रटाए सवाल और सबूत कैसे मिटाए?
मनीषा मांढरे की तरह ही लातूर के रहने वाले केमिस्ट्री के एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने भी अपने पद का भारी दुरुपयोग किया। कुलकर्णी कई वर्षों से नीट का पेपर सेट करने वाले पैनल में शामिल रहे हैं। सीबीआई का कहना है कि कुलकर्णी ने भी अप्रैल के अंतिम हफ्ते में अपने घर पर छात्रों को बुलाकर पेपर के सवाल और उनके जवाब लिखवाए थे। पकड़े जाने के डर से कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे ने 3 मई को परीक्षा खत्म होने के बाद हाथ से लिखे हुए उन सभी सवालों के पन्नों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था ताकि कोई सबूत न बचे।

नीट परीक्षा रद्द होने के बाद एनटीए ने क्या कार्रवाई की?
पूरे देश में नीट की यह परीक्षा 3 मई को 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस बड़ी परीक्षा में लगभग 23 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के मुताबिक, परीक्षा होने के चार दिन बाद 7 मई की शाम को उन्हें पेपर लीक होने और धांधली की गुप्त जानकारी मिली थी। इसके तुरंत बाद अगली सुबह एनटीए ने यह मामला स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया। धांधली की सच्चाई सामने आने के बाद यह परीक्षा पूरी तरह से रद्द कर दी गई है और सीबीआई की टीमें तेजी से मामले की जांच कर रही हैं।

जांच से यह तो साफ है कि एनटीए का स्टाफ परीक्षा की सुचिता बनाए रखने में नाकाम रहे। वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, नीट-यूजी 2026 शेड्यूल की तैयारी जनवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू हो गई थी। आवेदन के बाद 3 मई को परीक्षा की तिथि घोषित हुई। फरवरी के आखिर में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। जबकि 15 से 20 अप्रैल तक प्रिंटिंग प्रेस का काम भी पूरा हो चुका था। क्योंकि, नीट तैयारी का प्रोसेस ढाई से तीन महीने का होता है। इसमें प्रश्नपत्र बैंक तैयार करने से लेकर प्रश्नपत्र के अलग-अलग सेट के लिए प्रश्नों का चयन और 13 भारतीय भाषाओं में प्रश्न पत्र का ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्र के आसपास के बैंकों में सुरक्षित रखने का काम होता है।

एनटीए नियमों के तहत ऐसे तैयार होता है प्रश्नपत्र
एनटीए के चयनित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के अलग-अलग पैनल बनते हैं। इसमें विषयों की जरूरत के हिसाब से पुराने और नए विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है। हालांकि, इन विशेषज्ञों पर आगे कई स्तर पर अन्य पैनल जांच करते हैं ताकि कोई गड़बड़ी न हो। इसकी निगरानी एनटीए व परीक्षा से जुड़े अधिकारियों की होती है।
एनटीए के पास अपना प्रश्नपत्र का पूरा बैंक होता है, जिसमें पुराने प्रश्न होते हैं। सबसे पहले, पहला पैनल प्रश्न पत्र बैंक से हजार से ढाई हजार तक नए और पुराने प्रश्नों को मिलाकर शाॅर्ट लिस्ट करते हैं। एक अन्य पैनल समिति उन प्रश्नों को जांचती हैं।
एक अन्य विषय विशेषज्ञ समिति उस सेट के प्रश्नों, उनके उत्तर व भाषा को जांचती है। क्योंकि हिंदी व अंग्रेजी के साथ 13 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किए जाते हैं। एक अन्य पैनल के विशेषज्ञ अंतिम रूप से देने से पहले दोबारा जांच करते हैं। यह सब एनटीए व परीक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की गहन निगरानी में होता है।
प्रश्न पत्र तैयार करने वाले कमरों या उस एरिया में किसी के पास कोई इलेक्ट्राॅनिक आइटम, मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ, कागज, पेन जैसा कुछ नहीं होता है। यह नियम अधिकारियों, कर्मियों से लेकर पैनल से जुड़े सभी विशेषज्ञों पर भी लागू होता है। इस एरिया में खाली हाथ गहन जांच के बाद भेजा जाता है। किसी के पास कोई कागज, पेन या पैंसिल भी नहीं होती है।
प्रश्नपत्र के सेट को अंतिम रूप देने के बाद ही प्रिंटिंग व ट्रांसलेशन का काम शुरू होता है। इसके साथ परिवहन के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के आसपास के समझौते के तहत तय बैंक के लॉकर में रखा जाता है। प्रश्न पत्र बनाने में एक से डेढ़ महीने का समय लगता है। जबकि परीक्षा से 15 दिन पहले सब काम पूरा हो जाता है।

NATIONAL : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का हलफनामा, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में CJI की मौजूदगी जरूरी नहीं

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि संविधान के तहत चुनाव आयोग की नियुक्ति समिति में न्यायिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि चयन समिति में न्यायपालिका के सदस्य को शामिल करना “विधायी निर्णय” हो सकता है, लेकिन यह कोई “संवैधानिक बाध्यता” नहीं है।

केंद्र ने यह दलील मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दाखिल प्रति-हलफनामे में दी है।

2 जनवरी 2024 से लागू इस कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। नए कानून में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है।

केंद्र ने हलफनामे में कहा कि संविधान में कहीं भी चुनाव आयोग की नियुक्ति समिति में न्यायिक प्रतिनिधित्व का प्रविधान अनिवार्य नहीं किया गया है।सरकार के अनुसार, यह कहना कि नियुक्तियों की वैधता के लिए न्यायपालिका की भागीदारी जरूरी है, शक्तियों के पृथक्करण और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत संसद की भूमिका की गलत व्याख्या है।

सरकार ने कहा कि चुनाव आयोग की वास्तविक स्वतंत्रता उसके संवैधानिक दर्जे, सुरक्षित कार्यकाल, हटाने संबंधी सुरक्षा उपायों तथा वेतन और कार्यों के वैधानिक संरक्षण से सुनिश्चित होती है। 2023 का कानून इन सभी प्रावधानों को बरकरार रखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता जोड़ता है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के 2 मार्च 2023 के अनूप बरनवाल फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने उस समय अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सीजेआइ को चयन समिति में शामिल करने की बात कही थी, जो केवल तब तक लागू थी जब तक संसद इस संबंध में कानून न बना दे।सरकार ने यह भी कहा कि अब तक नियुक्त किसी भी चुनाव आयुक्त की योग्यता या निष्पक्षता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है। साथ ही, याचिकाकर्ताओं के इस आरोप को भी खारिज किया गया कि न्यायपालिका के बिना चयन समिति पक्षपातपूर्ण हो जाएगी।

NATIONAL : CBSE का बड़ा फैसला… अब 9वीं में 3 भाषाएं पढ़ना होगा जरूरी, 1 जुलाई से नए नियम लागू

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CBSE ने सत्र 2026-27 के कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया, जिसमें 2 भारतीय भाषाएं जरूरी हैं. तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, आंतरिक मूल्यांकन होगा.

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने कक्षा 9 और 10 के लिए भाषा नीति में बड़ा बदलाव किया है. अब 2026-27 सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा. यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के सभी CBSE स्कूलों में लागू किया जाएगा. हालांकि राहत की बात यह है कि तीसरी भाषा का कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में पेपर नहीं होगा.

CBSE ने 15 मई 2026 को जारी सर्कुलर में कहा कि नई शिक्षा नीति यानी NEP के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है. बोर्ड का कहना है कि छात्रों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना और भाषाई समझ विकसित करना इसका मुख्य उद्देश्य है.

नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिन्हें R1, R2 और R3 नाम दिया गया है. इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य रहेंगी.

अगर कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह तभी तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा चुन सकेगा, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों. विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथे विषय के रूप में भी लिया जा सकेगा.

यानी अब छात्रों के लिए हिंदी, संस्कृत, पंजाबी, मराठी, तमिल, तेलुगु, बंगाली जैसी भारतीय भाषाओं का अध्ययन अधिक जरूरी हो जाएगा.

तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा

CBSE ने साफ कर दिया है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा यानी R3 का बोर्ड एग्जाम नहीं कराया जाएगा.

इस विषय का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही होगा. स्कूल इंटरनल परीक्षा लेकर अंक देंगे और वही अंक CBSE प्रमाणपत्र में दिखाई देंगे.

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को सिर्फ तीसरी भाषा की वजह से कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा.

CBSE का कहना है कि इसका उद्देश्य बच्चों पर अतिरिक्त बोर्ड परीक्षा का दबाव डालना नहीं, बल्कि भाषा सीखने को बढ़ावा देना है.

जुलाई से लागू होगा नया नियम

हालांकि 2026-27 का शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन CBSE ने इसे ‘ट्रांजिशन ईयर’ माना है.

बोर्ड ने कहा है कि स्कूलों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए समय और लचीलापन दिया जाएगा ताकि छात्रों को अचानक बदलाव का सामना न करना पड़े.

CBSE के अनुसार इस दौरान किसी भी छात्र को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

स्कूलों के सामने शिक्षक की चुनौती

नई भाषा नीति लागू होने के बाद कई स्कूलों में भाषा शिक्षकों की कमी की समस्या सामने आ सकती है. इसे देखते हुए CBSE ने स्कूलों को कई विकल्प दिए हैं.

अभी कौन-सी किताबें पढ़ाई जाएंगी?

नई किताबें तैयार होने तक छात्रों को तीसरी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों से पढ़ाया जाएगा.

CBSE के मुताबिक, कक्षा 6 और 9वीं के भाषा कौशल में लगभग 75 से 80 प्रतिशत समानता है, इसलिए शुरुआती चरण में यही व्यवस्था अपनाई जा रही है.

इसके साथ स्कूल स्थानीय साहित्य, कविताएं, कहानियां और अन्य सामग्री भी पढ़ा सकेंगे ताकि बच्चों की भाषा समझ बेहतर हो सके.

CBSE 15 जून तक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा.

स्पेशल चाइल्ड और विदेशी छात्रों को राहत

CBSE ने दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष छूट का प्रावधान भी रखा है.

इसके अलावा, विदेश से लौटने वाले छात्रों और भारत के बाहर स्थित CBSE स्कूलों के लिए भी विशेष लचीले नियम लागू किए जा सकते हैं.

क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला?

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में स्कूल शिक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. नई नीति से भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा और छात्र अपनी मातृभाषा तथा क्षेत्रीय भाषाओं से अधिक जुड़ सकेंगे.

हालांकि, कई पैरेंट्स और स्कूलों के सामने अतिरिक्त भाषा, शिक्षक उपलब्धता और समय प्रबंधन जैसी चुनौतियां भी रहेंगी.

फिलहाल CBSE ने बोर्ड परीक्षा का दबाव हटाकर और स्कूलों को लचीलापन देकर इस बदलाव को आसान बनाने की कोशिश की है.

NATIONAL : राहुल का केंद्र पर बड़ा हमला, कहा- पेपर लीक गठजोड़ का नतीजा, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग

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NEET पेपर लीक अब महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। सड़कों पर छात्रों का आक्रोश, कोर्ट की सख्त दखलअंदाजी और विपक्ष का तीखा राजनीतिक हमला इस बात का गवाह है कि सिस्टम में सेंधमारी ने देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की साख को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। राहुल गांधी ने कई बड़े आरोप लगाए हैं।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुए कथित घोटाले को लेकर देश भर में मचा बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। लाखों छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखी है। राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि यह पेपर लीक कोई साधारण चूक या प्रशासनिक गलती नहीं है। यह भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से व्यवस्था में बिठाए गए अयोग्य प्रोफेसर के गठजोड़ का नतीजा है।

राहुल गांधी ने यह गंभीर आरोप ऐसे समय में लगाया है जब देश के कोने-कोने से छात्र और उनके अभिभावक चिलचिलाती धूप में सड़कों पर उतर कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। कांग्रेस नेता का कहना है कि वर्तमान सरकार ने देश के सभी प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर अपनी विचारधारा वाले लोगों को काबिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और योग्यता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। जब सिर्फ निष्ठा के आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं, तो पूरा सिस्टम खोखला हो जाता है। एनटीए जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं का फेल होना इसी मिलीभगत का परिणाम है। इसी वजह से आज 24 लाख से अधिक होनहार युवाओं के सपनों को चकनाचूर होना पड़ा है।

यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह पूरा मामला देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर लगातार सुनवाई हो रही है। अदालत के आदेश पर ग्रेस मार्क्स वाले छात्रों की परीक्षा रद्द कर दोबारा एग्जाम कराने का फैसला आ चुका है। इसके बावजूद असली बवाल मूल पेपर लीक को लेकर बना हुआ है। इस बीच देश के कई राज्यों में पुलिस ने पेपर लीक गैंग के गुर्गों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि परीक्षा सिस्टम में बहुत बड़ी सेंधमारी हुई थी।

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