Sunday, November 1, 2026
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MAHARASHTRA : नासिक में ठाकरे बंधुओं की हुंकार, भाजपा पर चौतरफा हमला

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राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि आपने कहा था कि आपने नासिक को गोद लिया है. लोगों ने आपको सत्ता दी, लेकिन आप कभी यहां आए ही नहीं. जिनके पास खुद की राजनीतिक संतान नहीं है, वे हमारे शहर को गोद लेने निकले हैं.

नासिक में ठाकरे बंधुओं की हुंकार, भाजपा पर चौतरफा हमलामुंबई:
नासिक नगर निगम चुनाव के प्रचार में शनिवार को महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे वर्षों बाद पहली बार एक साथ मंच पर नजर आए. ठाकरे बंधुओं की यह पहली संयुक्त चुनावी रैली सीधे तौर पर भाजपा और राज्य सरकार के खिलाफ जनाक्रोश का मंच बन गई.दोनों नेताओं ने एक सुर में चुनावों में देरी, निर्विरोध चुनाव, कथित खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर भाजपा पर तीखे और सीधे हमले किए.

राज ठाकरे ने रैली की शुरुआत करते हुए कहा कि लगभग चार साल तक नगर निगम के चुनाव क्यों टाले गए? यह सवाल इस सरकार को जनता के सामने जवाब देना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्विरोध (Unopposed) चुनाव की प्रवृत्ति लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है. लोगों से उनका वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है. उम्मीदवारों को डराया जा रहा है, 15-15 करोड़ रुपये देकर नाम वापस लेने को मजबूर किया जा रहा है. यह क्या चल रहा है?

1952 में जन्मी पार्टी आज 2026 में लोगों को किराए पर ले रही है: BJP पर करारा तंज
राज ठाकरे ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा, “जो पार्टी 1952 में जन्मी (जनसंघ) बताई जाती है, वह आज 2026 में दूसरे दलों के लोगों को किराए पर लेकर राजनीति कर रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा दूसरे दलों से नेता ‘इम्पोर्ट’ कर रही है, जिससे वर्षों से संघर्ष कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय हो रहा है.

नासिक ‘गोद’ लेने पर फडणवीस को घेरा
राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि आपने कहा था कि आपने नासिक को गोद लिया है. लोगों ने आपको सत्ता दी, लेकिन आप कभी यहां आए ही नहीं. जिनके पास खुद की राजनीतिक संतान नहीं है, वे हमारे शहर को गोद लेने निकले हैं.

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कुंभ मेले के बाद साजिश? साधुओं के लौटते ही बिल्डरों को ज़मीन
राज ठाकरे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “जब हम सत्ता में थे, तब कुंभ मेला हुआ, तब एक भी पेड़ नहीं काटा गया. अब साजिश है कि कुंभ के बाद, साधुओं के लौटते ही ज़मीन बिल्डरों को दे दी जाएगी.” उन्होंने दावा किया कि मनसे के 5 साल के शासन में विपक्ष भी एक भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सका.

“100 नगरसेवक जिताइए, नासिक पूरी तरह बदल देंगे”
राज ठाकरे ने मतदाताओं से भावुक अपील करते हुए कहा, “पैसे के लालच में मत पड़िए. 100 नगरसेवक जिताइए, हम नासिक को पूरी तरह बदल देंगे.”

उद्धव ठाकरे: “सोचिए जब मुंबई और नासिक का अनुभव साथ आएगा”

उद्धव ठाकरे ने मंच से कहा कि राज ठाकरे ने नासिक में क्या किया, यह सबने देखा. शिवसेना ने मुंबई में क्या किया, यह भी सब जानते हैं. सोचिए, जब दोनों साथ आएंगे तो नासिक कैसे बदलेगा.

“यह हिंदुत्व है या चुनावी हिंदुत्व?” – BJP से सवाल
उद्धव ठाकरे ने भाजपा के हिंदुत्व पर सवाल उठाते हुए कहा, “राम मंदिर का श्रेय लेते हो, लेकिन जहां राम ने तपस्या की, तपोवन में पेड़ काट रहे हो. लोगों ने पूछा तो क्या दिखाओगे? ‘नमो भवन’?” उन्होंने भाजपा के AIMIM से गठबंधन का मुद्दा उठाते हुए कहा, “हमें कांग्रेस के साथ जाने पर हिंदुत्व छोड़ने का ताना दिया गया. फिर आपका AIMIM से गठबंधन क्या था?”

“स्पीकर राहुल नार्वेकर सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं”
उद्धव ठाकरे ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर गंभीर आरोप लगाए, “उम्मीदवारों पर नाम वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है. परिवार के लोगों को 3–4 टिकट दिए गए हैं. चुनाव आयोग चुप बैठा है.” “हाँ, हम सत्ता के लिए साथ आए हैं… और आपकी ज़िंदगी बदलने के लिए”
उद्धव ठाकरे का यह बयान रैली का सबसे चर्चित पल रहा, “हाँ, हम सत्ता के लिए साथ आए हैं. आप किसलिए साथ आए हैं? गिल्ली-डंडा खेलने के लिए? हम सत्ता लेकर लोगों की ज़िंदगी बदलेंगे.”

“भाजपा दलालों की पार्टी बन चुकी है”
उद्धव ठाकरे ने कहा, “आज भाजपा दलालों की पार्टी बन गई है. राम ने रावण को मारा था, लेकिन भाजपा इतनी बेशर्म हो गई है कि आज रावण को भी पार्टी में शामिल कर ले.”

पेंगुइन से लेकर रैलियों तक का तंज
उन्होंने कहा कि मुंबई के चिड़ियाघर में पेंगुइन देखने लोग टिकट खरीदकर आते हैं, लेकिन भाजपा की रैलियों में लोग पैसे देकर भी नहीं आ रहे.”

लोकतंत्र बनाम तानाशाही

उद्धव ठाकरे ने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल में सड़कों पर उतरकर तानाशाही के खिलाफ लड़ रही हैं. महाराष्ट्र भी चुप नहीं रहेगा.

“मोदी गारंटी नहीं, ठाकरे के शब्द”
अंत में उन्होंने कहा कि नासिक का हमारा घोषणापत्र मोदी गारंटी जैसा जुमला नहीं है. यह ठाकरे के शब्द है — जो कहते हैं, वो करते हैं.नासिक की यह रैली सिर्फ चुनावी सभा नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ संयुक्त ठाकरे मोर्चे का एलान थी.अब सवाल यह है कि क्या ठाकरे बंधुओं की यह एकजुटता नासिक की राजनीति की दिशा बदल पाएगी? इसका जवाब जनता के वोट में छिपा है.

NATIONAL : खाने की थाली से बढ़ रहा बीमारियों का बोझ: तुकाराम मुंढे बोले- नहीं चेते तो भारी पड़ेगा; चिंता की बात क्या?

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महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खाद्य सुरक्षा को भारत में लोक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती बताया है। अहमदाबाद में करनावती यूनिवर्सिटी में ‘तुकाराम से टक्कर’ टॉक सेशन के बाद उन्होंने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा की समस्या लोक स्वास्थ्य में बड़ा संकट पैदा कर रही है, लेकिन लोग अभी इसकी गंभीरता को समझ नहीं पा रहे हैं। जितनी जल्दी लोग इस समस्या को समझेंगे, उतना ही बेहतर होगा।

लोग खाने को बीमारियों से क्यों नहीं जोड़ते?

तुकाराम मुंढे ने कहा कि आमतौर पर लोग किसी बीमारी को सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के तौर पर देखते हैं। वे इस बात पर उतना ध्यान नहीं देते कि वे क्या खा-पी रहे हैं और उसका उनकी सेहत से क्या संबंध हो सकता है? उन्होंने आज की बीमारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में स्वतंत्रता के समय बीमारी के कुल बोझ का करीब 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा संक्रामक बीमारियों से जुड़ा था। आज देश में बीमारी के बोझ का लगभग इतना ही हिस्सा गैर-संचारी रोगों यानी एनसीडी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि आज 25 से 30 साल की उम्र में भी लोगों को कार्डियक अरेस्ट हो रहे हैं और इसका खानपान से सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।

जब खाद्य सुरक्षा के लिए कानून और नियम हैं, तो समस्या कहां है?

तुकाराम मुंढे ने यह भी कहा कि भारत में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कानून, नियम और नियमावली पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को छोड़ दें तो खाद्य सुरक्षा से जुड़े बाकी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। यही स्थिति लोक स्वास्थ्य से समझौते की वजह बन रही है।

तुकाराम मुंढे ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानकों को लेकर लोगों में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने खास तौर पर कहा कि सुरक्षित भोजन और खाद्य मानकों को सिर्फ बाहर खाना खाते समय ही नहीं, बल्कि घर में भी अपनाना होगा। उनका कहना है कि लोगों को अपनी खाने की आदतों और भोजन की संस्कृति को सुरक्षा और मानकों के आधार पर विकसित करना होगा।

खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल किसी एक पक्ष की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए तीन प्रमुख हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। इनमें खाद्य कारोबार संचालक, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन जैसे नियामक तथा आम लोग शामिल हैं। मुंढे ने कहा कि सभी को मिलकर सुरक्षित और मानक वाला भोजन सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना होगा।

NATIONAL : बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य: सीएम शुभेंदु बोले- घुसपैठियों को खदेड़ेंगे; क्या है पूरा मामला?

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के स्कूलों और पंजीकृत मदरसों में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने यह बात कोलकाता स्थित नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। सीएम अधिकारी ने कहा कि इसे स्कूलों और पंजीकृत मदरसों में गाना जरूरी होगा।

शुभेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम में और क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली ममता बनर्जी सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राज्य में घुसपैठियों को आने दिया, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी बदल गई। अधिकारी ने अपनी सरकार को राष्ट्रवादी सरकार बताते हुए सनातनी परंपरा को प्राथमिकता देने की बात कही।

घुसपैठ को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में रहने के दौरान राज्य की सीमाओं को सुरक्षित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि घुसपैठियों को वापस भेजा जाएगा। उनका कहना था कि राज्य में ऐसी सरकार है जो सनातनी परंपरा को प्राथमिकता देती है।

ममता सरकार पर शौर्य दिवस को लेकर क्या आरोप लगाया?

शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार ने भाजपा और दूसरे हिंदुत्व संगठनों को छह दिसंबर को ‘शौर्य दिवस’ मनाने की अनुमति नहीं दी थी। यह दिन अयोध्या में 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की याद में मनाया जाता है।

राम मंदिर को लेकर शुभेंदु ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन देश में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हो रहा था, उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंदिर के विरोध में रैली आयोजित करने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया था।

वंदे मातरम् को लेकर केंद्र ने भी चलाया विशेष अभियान

पिछले दिनों वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। इस साल राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम हुए। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि आजादी के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से वंदे मातरम के सभी छंद गाया गया। केंद्र सरकार की ओर से आठ से 15 अगस्त तक देशभर में सैन्य बैंड के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

BUSINESS : मात्र ₹25/लीटर पड़ेगा ईंधन का खर्च! नितिन गडकरी का दावा: अक्तूबर में लॉन्च होगी 100% इथेनॉल से चलने वाली कार!

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भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली कार को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह इथेनॉल पर चलने वाली कार की ईंधन लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर हो सकती है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि पूरी तरह से इथेनॉल (100% फ्लेक्स फ्यूल) पर चलने वाली कार अपनाने से ईंधन का खर्च पेट्रोल की तुलना में घटकर लगभग 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर आ सकता है।

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाले इस वाहन में पारंपरिक पेट्रोल की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम सरकार के वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है। जो देश में इथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आया है।

टोयोटा की 100% इथेनॉल फ्लेक्स-फ्यूल इनोवा कब लॉन्च होने जा रही है?
नितिन गडकरी ने खुलासा किया कि टोयोटा की 100% इथेनॉल संचालित Innova (इनोवा) का बहुप्रतीक्षित मॉडल अक्तूबर 2026 में लॉन्च होने जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि उन्हें टोयोटा के इस फ्लेक्स-फ्यूल वाहन के लॉन्च इवेंट में आमंत्रित किया गया है। यह कार रेगुलर पेट्रोल के बजाय 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने के लिए डिजाइन की गई है। इसके अलावा, गडकरी ने यह दावा भी किया कि यह कार चलते समय 60 प्रतिशत बिजली भी पैदा करेगी। जिससे इसकी कार्यकुशलता और रनिंग कॉस्ट में काफी सुधार होगा।

ई20 पेट्रोल और इथेनॉल ईंधन के प्रभाव को लेकर सरकार का क्या रुख है?
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत की ई20 नीति (पेट्रोल में 20% तक इथेनॉल का मिश्रण) को लेकर वाहन के माइलेज, इंजन परफॉर्मेंस और मेंटेनेंस पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस छिड़ी हुई है:
ग्लोबल और डोमेस्टिक ट्रेंड: गडकरी ने कहा, “दुनिया के 19 देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है और आज भारत में भी किसी वाहन से कोई शिकायत नहीं आ रही है।”

तकनीकी अध्ययन का हवाला: सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसे वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल एसोसिएशनों या उपभोक्ता समूहों से E20 के कारण माइलेज या इंजन खराब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है। प्रयोगशाला अध्ययनों और फील्ड ट्रायल्स ने यह साबित किया है कि E20 ईंधन इंजन की टिकाऊपन और मटीरियल कम्पैटिबिलिटी के मानकों पर सही उतरता है।

भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का भविष्य और अन्य कंपनियों की क्या भूमिका है?
टोयोटा की प्रस्तावित 100 प्रतिशत इथेनॉल-ओनली इनोवा, भारतीय ऑटोमेकर्स द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बाजार में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है:
मारुति सुजुकी की पहल: टोयोटा से पहले जून में मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पेश की थी।
फ्लेक्स-फ्यूल की खासियत: ये वाहन E20 से लेकर 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल तक किसी भी अनुपात वाले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर निर्बाध रूप से चलने में सक्षम होते हैं, जिससे खरीदारों को ईंधन की उपलब्धता के आधार पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है।

NATIONAL : केरल में चुनाव अधिकारी रतन केलकर बने सीएम सतीशन के सचिव, बंगाल में मनोज अग्रवाल की नियुक्ति पर भड़के थे राहुल

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Kerala CM Secretary: पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाए जाने पर सियासत गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर सीधे चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलीभगत का आरोप लगाया, जिसके बाद अब बीजेपी ने केरल का हवाला देकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है।

केरल में चुनाव अधिकारी रतन केलकर बने सीएम सतीशन के सचिव
तिरुवनन्तपुरम: पश्चिम बंगाल में जीत के बाद बीजेपी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को चीफ सेक्रेटरी बनाया है। शुभेंदु अधिकारी की इस नियुक्ति की टीएमसी के साथ कांग्रेस ने आलोचना की थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुले तौर पर इसे मनोज अग्रवाल को बंगाल चुनाव में मदद करने का इनाम बताया था।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। इसके कुछ दिन बाद ही केरल में वीडी सतीशन सरकार ने केरल चुनाव कराने वाले IAS रतन केलकर को सचिव बनाया है, जिस पर राहुल गांधी को घेरा जा रहा है।

दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच साठगांठ चल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, ‘बीजेपी-चुनाव आयोग के चोर बाजार में- जितनी बड़ी चोरी, उतना ही बड़ा इनाम।’ अब केरल में लिए गए फैसले पर उन्हे घेरा जा रहा है। इस मुद्दे पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए ट्वीट किया है।

चुनाव आयोग पर मदद के आरोप
गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

बीजेपी ने पलटवार कर केरल का दिया हवाला
राहुल गांधी के इस हमले के बाद बीजेपी ने भी कांग्रेस को घेरने में देर नहीं की। बीजेपी ने केरल की कांग्रेस सरकार के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए राहुल गांधी की मंशा पर सवाल उठाए हैं। केरल में मुख्यमंत्री वी डी सतीशन की सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर को मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किया है।

राहुल गांधी का डबल स्टैंडर्ड
बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब पश्चिम बंगाल में पूर्व चुनाव अधिकारी को मुख्य सचिव बनाया जाता है, तो राहुल गांधी इसे चोरी का इनाम बताते हैं। लेकिन इसके ठीक 10 दिन बाद जब केरल की कांग्रेस सरकार अपने यहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त करती है, तो क्या वह लोकतंत्र की खूबसूरती बन जाता है? इस विवाद ने अब एक नए राजनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है।

NATIONAL : कौन हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार? SIR विवाद से पहले 193 सांसदों ने महाभियोग के लिए किया था साइन

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भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एसआईआर प्रक्रिया में मनमानी को लेकर विवादों में आ गए हैं। ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि वह अपने बाकी दो सहयोगी चुनाव आयुक्त की बात नहीं सुनते हैं और मनमानी तरीके से फैसले लेते हैं। ताजा विवाद फॉर्म -6 को लेकर है जिसमें उनपर एकतरफा फैसला लेने का आरोप है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और मनमाने ढंग से फैसले लेने के आरोपों को लेकर भारी विवादों में आ गए हैं। दरअसल, एक अखबार की रिपोर्ट में बीते 23 सितंबर को गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया गया कि चुनाव आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR पर पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने उनकी एक नहीं सुनी। यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार विवादों में आए हैं।

कुछ महीने पहले भी उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए 193 विपक्षी सांसदों ने साइन कर दिया था। उनके खिलाफ वोट चोरी, वोटर लिस्ट से गलत तरीके से नाम हटाने, चुनाव प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया गया था। हालांकि, संसद ने इस नोटिस को सिरे से खारिज कर दिया था। तो चलिए जानते हैं आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कौन हैं? फिर से विवादों में क्यों आ गए हैं? इससे पहले वह कब-कब विवादों में रहे?

ज्ञानेश कुमार पर ताजा विवाद क्या है?
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूचियों की एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और डेटा हैंडलिंग को लेकर उपजा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले ‘फॉर्म-6’ में यह नियम जोड़ा गया कि आवेदक को यह बताना होगा कि क्या एसआईआर के दौरान उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम वोटर लिस्ट में था या नहीं। यदि था, तो उनका वोटर आईडी कार्ड नंबर और विवरण देना आवश्यक किया गया।

वहीं, इस मामले पर चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि बिना कानून या विधिवत अनुमति के फॉर्म के प्रारूप में इस तरह का बदलाव करना अधिकार क्षेत्र से बाहर और गैर-कानूनी है।

कौन हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?
ज्ञानेश कुमनार 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को निवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह पदभार संभाला था। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने आईसीएफएआई (ICFAI) इंडिया से बिजनेस फाइनेंस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पर्यावरण अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है। वह 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं।

ज्ञानेश कुमार किस-किस पद पर रह चुके हैं?
19 फरवरी 2025 से मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
15 मार्च 2024 से 18 फरवरी 2025 तक चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली।
मई 2022 से 31 जनवरी 2024 तक सहकारिता मंत्रालय में सचिव रहे।
साल 2016 से 2021 तक गृहमंत्रालय के संयुक्त और अतिरिक्त सचिव रहने के दौरान महत्वपूर्ण कश्मीर संभाग का नेतृत्व किया और वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने तथा राज्य के पुनर्गठन के समय प्रमुख प्रशासनिक भूमिका निभाई।
रक्षा उत्पादन विभाग में संयुक्त सचिव रहते हुए 2007 से 2012 के दौरान रक्षा मंत्रालय के तहत सभी डिफेंस शिपयार्डों के आधुनिकीकरण का कार्य देखा।

ज्ञानेश कुमार कब-कब विवादों में रहे
पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए थे। मार्च 2024 में ज्ञानेश कुमार को जल्दबाजी में चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था।
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने भाजपा नेताओं द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई करने में जानबूझकर देरी की।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी का आरोप लगाया था जिसके बाद ज्ञानेश कुमार ने सफाई भी दी थी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च 2026 में विपक्ष के 193 सांसदों ने हटाने (महाभियोग) के नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे।
विपक्ष ने मतदाता सूची से नाम गलत तरीके से हटाने, चुनावी प्रक्रिया में भेदभाव और पद के गरिमा के खिलाफ काम करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

NATIONAL : ‘मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को किया जाए गिरफ्तार, बंगाल में दोबारा से कराए जाएं चुनाव’, ममता बनर्जी की बड़ी मांग

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर आपत्ति जताई थी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया है। ममता बनर्जी ने वीडियो जारी करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसके लिए देशभर में आंदोलन किया जाएगा। ममता बनर्जी ने बंगाल में दोबारा से चुनाव कराए जाने की भी मांग की है।

ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं
ममता बनर्जी ने कहा, ‘यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक बात है। हमने अपनी जिंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा। इस चुनाव आयुक्त (ज्ञानेश कुमार) को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। BJP को यह समझना चाहिए कि वे हमारे संविधान को नष्ट नहीं कर सकते। वे लोकतंत्र को खत्म नहीं कर सकते। वे BJP IT टीम के नाम पर अपने EROs को तैनात नहीं कर सकते। हमने जो पहले कहा था, वह अब सच साबित हो गया है।’

ज्ञानेश कुमार ने पुलिस का किया गलत इस्तेमाल
ममता बनर्जी ने आगे कहा, ‘ज्ञानेश कुमार ने पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है। BJP के साथ मिलकर अपने ही BJP-समर्थक लोगों को तैनात किया है। ऐसा घोटाला पहले कभी नहीं हुआ। अगर आपमें थोड़ी भी शर्म-लिहाज है, तो आप खुद ही गिरफ्तारी की मांग करेंगे। आपको गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’ इसके साथ ही ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि विरोध करने की वजह से उनका चुनाव चिन्ह तक छीन लिया गया।

बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग
चुनाव आयोग के SIR फैसलों और आदेशों पर अखबार की रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि अब यह साबित हो गया है कि BJP और EC ने बंगाल विधानसभा चुनाव में धांधली की है। ममता ने पुरानी वोटर लिस्ट के साथ बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। ममता ने कहा कि INDIA गठबंधन के सहयोगी जल्द ही बैठक करेंगे। जब तक ज्ञानेश कुमार CEC रहेंगे, तब तक पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन होते रहेंगे।

इतना बड़ा घोटाला पहले कभी नहीं हुआ- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा घोटाला पहले कभी नहीं हुआ। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस घर-घर जाकर लोगों से एक खास पार्टी में शामिल होने के लिए कह रही है और ऐसा नहीं करने पर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।

NATIONAL : सैयद सोहेल शो: EC में किन मुद्दों पर हुए मतभेद? वोटर लिस्ट और बंगाल के 34 लाख मामलों पर उठे सवाल

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चुनाव आयोग के भीतर हाल के महीनों में कई अहम मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए. इनमें वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने वाले फॉर्म-6 में बदलाव, ECINet प्लेटफॉर्म का केंद्रीकरण और पश्चिम बंगाल में लंबित 34 लाख मामलों को लेकर किए गए फैसले शामिल हैं. कुछ मामलों में चुनाव आयुक्तों ने प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर आपत्तियां दर्ज कराईं.

फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है. हाल ही में चुनाव आयोग ने इस फॉर्म में एक नया हिस्सा जोड़ा, जिसमें आवेदकों से उनके माता-पिता की जानकारी मांगी जाने लगी. इसके तहत पूछा जा रहा है कि पिछले SIR में माता-पिता का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज था या नहीं. सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर पूरी सहमति नहीं थी. आपत्ति यह भी थी कि ऐसे बदलाव के लिए फॉर्म में औपचारिक संशोधन और गजट नोटिफिकेशन जरूरी था.

एक अन्य विवाद ECINet प्लेटफॉर्म को लेकर सामने आया. ERO यानी इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर वह अधिकारी होता है जो वोटर लिस्ट तैयार करने और मतदाताओं के दावों एवं आपत्तियों पर फैसला लेने का काम करता है. आमतौर पर हर विधानसभा क्षेत्र में SDM स्तर का अधिकारी ERO की भूमिका निभाता है. पहले वोटर सूची से जुड़े काम ERO-Net सॉफ्टवेयर के जरिए किए जाते थे. लेकिन 22 जनवरी 2026 को चुनाव आयोग ने ECINet लॉन्च किया, जिसमें 40 से ज्यादा ऐप और पोर्टल को एक प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया.

सूत्रों के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस सिस्टम को लेकर सवाल उठाए. उनका कहना था कि ERO को वोटर लिस्ट से जुड़े कामों में पहले जैसी स्वतंत्र पहुंच नहीं मिल रही थी और अधिकारी वही कार्रवाई कर पा रहे थे, जिसकी अनुमति सॉफ्टवेयर देता था.

बताया जाता है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू पहले से ही इस पर आपत्ति जता रहे थे. उनकी आपत्तियों के बावजूद ECINet लॉन्च किया गया. अप्रैल 2026 में संधू ने नए मॉड्यूल और पोर्टल को लेकर पत्र लिखा और कहा कि इन बदलावों की जानकारी न तो उन्हें दी गई और न ही आयोग के समक्ष रखी गई. इसके बाद मई 2026 में दूसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां पत्र के माध्यम से दर्ज कराईं.

पश्चिम बंगाल के 34 लाख मामलों पर भी उठे सवाल
पश्चिम बंगाल में ट्राइब्यूनल के समक्ष लंबित करीब 34 लाख मामलों को लेकर भी आयोग के भीतर मतभेद सामने आए. सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इस मामले में सवाल उठाया कि आयोग की ओर से संबंधित कार्रवाई के लिए किस अधिकारी को और किसके आदेश पर अधिकृत किया गया था. उन्होंने यह भी लिखा कि पश्चिम बंगाल की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नीलम मीणा को इस संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई थी.

NATIONAL : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में दावे-आपत्तियों की सुनवाई 24 अगस्त से शुरू

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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के तहत दावे और आपत्तियों की सुनवाई 24 अगस्त से शुरू होगी,दावा-आप objection में प्राप्त दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर टीम गठित की गई। इसे लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त लोकेश मिश्रा ने बैठक कर कार्यालय स्तर पर गठित टीम द्वारा किए जाने वाले कार्यों की जानकारी साझा की साथ ही सभी संबंधित पदाधिकारी-कर्मियों को समयबद्ध तरीके से सत्यापन कार्य पूरा करने तथा मतदाताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने को कहा गया।

दावे-आपत्तियों की सुनवाई
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दावे-आपत्तियों से संबंधित मामलों में नोटिस का तामीला, सुनवाई और दस्तावेजों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाये. भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन करते हुए पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से पूरी करने पर जोर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को नोटिस की सुनवाई, साक्ष्यों के सत्यापन और दावे-आपत्तियों के निष्पादन से जुड़े तकनीकी एवं कानूनी पहलुओं की जानकारी दी।

सत्यापन कार्य की पारदर्शिता
पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सत्यापन कार्य में पूरी पारदर्शिता बरती जाए तथा प्राप्त दस्तावेजों की जांच निर्धारित मानकों के अनुरूप करते हुए आवश्यक अभिलेखों का संधारण किया जाए। किसी भी प्रकार की शंका या कठिनाई की स्थिति में संबंधित वरीय पदाधिकारी से मार्गदर्शन लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से नागरिकों से भी अपील की गई कि दावा एवं आपत्ति से संबंधित किसी भी प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं तथा निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और सहभागी बनाने में सहयोग करें।

NATIONAL : SIR में नाम कटा, तो घर जाकर दस्तावेज लेंगे अफसर: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला; अब तक 13.37 करोड़ नाम कटे

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नई दिल्ली(उत्तम हिन्दू न्यूज)- भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। आयोग की शनिवार को हुई बैठक में तय किया गया कि अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए ईआरओ/एईआरओ कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी।

आयोग की बैठक 26 सितंबर को दोपहर तीन बजे हुई। बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार, ऐसे लोगों के घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे। आयोग ने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में, ईआरओ के निर्णय के अनुसार, सुनवाई आयोजित की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जाएगा। यदि सुनवाई की आवश्यकता पड़ती है तो मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत कर सकता है। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने का भी फैसला किया है। जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया गया है कि वे जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित करें या विशेष शिविर आयोजित करें। इन सुविधाओं का लाभ रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जाएगा।

आयोग ने कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन नियम, 1960 के तहत लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप ईसीआईनेट प्रणाली में भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है। ईसीआईनेट की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इसमें आईआईटी/आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति यह दोबारा जांच करेगी कि ईसीआईनेट अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।

आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेडेशन पहले ही किए जा चुके हैं। यदि फील्ड अधिकारियों को आगे किसी अतिरिक्त लचीलेपन की जरूरत होगी तो उसे भी लागू किया जाएगा। भविष्य में आईटी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहलों को आयोग की मंजूरी से पहले कमेटी ऑफ ऑफिसर्स (सीओओ) में चर्चा के लिए रखा जाएगा। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के अनुरोध को देखते हुए आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है। नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि भी बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दी गई है। महाराष्ट्र में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

आयोग ने तय किया है कि उसकी सभी बैठकों के लिए एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही के मिनट्स जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (अपार) हर वर्ष निर्धारित समयसीमा यानी 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। आयोग ने यह भी कहा कि आयोग के आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। आयोग ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर पहले ही पूरा हो चुका है। एसआईआर के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में छूट गए हैं, वे संबंधित ईआरओ के पास निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं।

आयोग ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सीईओ, डीईओ और ईआरओ इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए तत्काल विशेष अभियान शुरू करेंगे। आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी डिवीजन से संबंधित नहीं था। यह पत्र चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-वितरण आदेशों को दोनों आयुक्तों के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किया गया था। साथ ही, आईटी डिवीजन की निगरानी से डीईसी की भूमिका वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई। आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में उसने देशभर में एसआईआर समेत कई फैसले लिए हैं। 24 जून 2025 को बिहार से शुरू करते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

आयोग ने कहा कि एसआईआर के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश के जरिए बरकरार रखा था। 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया। आयोग ने कहा कि मतदाताओं की अंतिम संख्या तीसरे चरण में शेष 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही सामने आएगी। आयोग ने बताया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बीएलओ को निर्देश दिया है कि वे मतदाता सूची से छूटे मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म एकत्र करें। आयोग के अनुसार, 97 में से 81 मतदाता पहले ही नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर चुके हैं। आयोग ने कहा कि 26 सितंबर 2026 को हुई बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर यह प्रेस नोट जारी किया गया है और इसे पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त है।

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